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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 31 December 2008

Published 31 December 2008

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2008-12-31.595
Languages
English, Hindi

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 10101010 पौषपौषपौषपौष 1930 1930 1930 1930 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 555599995555)))) पपपपटनाटनाटनाटना, , , , बुधबुधबुधबुधवारवारवारवार 31313131 )दस+ब)दस+ब)दस+ब)दस+बर र र र 2008200820082008 सं॰ 10/विविध-29/2006/1970 समाज कल्याण विभाग ——— संकल्प 12 fnlEcj 2008 विषयः-मानव व्यापार रोकने एवं पीड़ितों के पुनर्वास हेतु राज्य स्तरीय कार्ययोजना की स्वीकृति एवं कार्यान्वयन के संबंध में।

भारतीय संविधान की धारा 23, शोषण के विरूद्ध अधिकार को मूल अधिकार की मान्यता देता है एवं किसी भी रूप में मानव व्यापार को निषेध करता है। मानव व्यापार विशेषतः महिलाओं एवं बच्चों का, मानव अधिकार का एक अत्यंत गंभीर उल्लंघन है। ज्यादातर मानव व्यापार के शिकार 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चें एवं युवक/युवती हैं। धारा 39 के अनुसार, बच्चों का शोषण से बचाव, राज्य की जिम्मेवारी है। राज्य सरकार यह महसूूस करती है कि बिहार राज्य में मानव व्यापार एक गंभीर समस्या है, यह समाज के कमजोर वर्गो के लोगों को प्रभावित करती है जो मानव व्यापार के शिकार आसानी से हो जाते है, मानव व्यापार एवं एच0आई0भी0/एड्‌स का सीधा संबंध हैं, वर्तमान में उपस्थित कार्य प्रणाली इस मुद्दे को सही तरीके से संबोधित नहीं करते हैं, अतः इस मुद्दे को सम्बोधित करने के लिए एक पूर्ण एवं समग्र प्रणाली की जरूरत को महसूस करते हुए राज्य सरकार द्वारा संलग्न कार्य योजना की स्वीकृति दी गई है जो सभी घटकों के लिए एक मार्गदर्शिका है। सभी संबंधित विभागों (वित्त विभाग सहित) द्वारा इस कार्ययोजना पर सहमति के पश्चात इस कार्य योजना में निहित बिन्दुओं पर मंत्रिपरिषद का अनुमोदन प्राप्त है। अतः सभी संबंधित विभागों द्वारा इस कार्य योजना के आलोक में कार्रवाई की जाएगी। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय एवं इसकी प्रतिलिपि सरकार के सभी विभागों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेजी जाय।

बिहार राज्यपाल के आदेश से, विजय प्रकाश, प्रधान सचिव।2 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 31 दिसम्बर 2008 'अस्तित्व''अस्तित्व''अस्तित्व''अस्तित्व' मानव व्यापर रोकने एवं पीड़ितों के पुनर्वास हेतु राज्य कार्य योजना मानव व्यापर रोकने एवं पीड़ितों के पुनर्वास हेतु राज्य कार्य योजना मानव व्यापर रोकने एवं पीड़ितों के पुनर्वास हेतु राज्य कार्य योजना मानव व्यापर रोकने एवं पीड़ितों के पुनर्वास हेतु राज्य कार्य योजना

प्रस्तावनाः-प्रस्तावनाः-प्रस्तावनाः-प्रस्तावनाः-भारतीय संविधान की धारा 23, षोषण के विरूद्व अधिकार को मूल अधिकार की मान्यता देता है एवं मानव व्यापार का किसी भी रूप मेंें निषेध करता है। मानव व्यापार, विषेषतः महिलाओं एवं बच्चों का व्यापार, मानव अधिकार का एक अत्यंत गंभीर उल्लंघन है। ज्यादातर मानव व्यापार के षिकार 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चें एवं युवक/युवती होते हैं। धारा 39 के अनुसार, बच्चों का षोषण से बचाव, राज्य की जिम्मेवारी है।

राज्य सरकार यह महसूस करती है कि - • बिहार राज्य मे मानव व्यापार एक गंभीर समस्या है, • यह समाज के कमजोर वर्गो के लोगों को प्रभावित करता है जो मानव व्यापार के षिकार आसानी से हो जाते हैं,

• मानव व्यापार एवं एच0आई0भी0/एड्‌स का सीधा संबंध है, • वर्तमान में उपस्थित प्रणाली इस मुद्दे को सही तरीके से सम्बोधित नहीं करते हैं, एवं • इस मुद्दे केा सम्बोधित करने के लिए एक पूर्ण एवं समग्र प्रणाली की जरूरत है।

राज्य सरकार की यह कार्य योजना सभी घटकों के लिए एक मार्गदर्षिका है जो उन्हें सही कदम उठाने में मदद करेगी ताकि लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

लक्ष्यः-लक्ष्यः-लक्ष्यः-लक्ष्यः-बिहार सरकार का लक्ष्य है ''मानव व्यापार मुक्त बिहार बनाना'' जहॉ महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्‌दा बने एवं इनकी रक्षा समाज द्वारा सुनिष्चित हो। इसके लिए सभी घटक को साथ मिलकर कार्य करने की आवष्यकता है।

योजना का उद्देष्ययोजना का उद्देष्ययोजना का उद्देष्ययोजना का उद्देष्यः-ः-ः-ः-

(i) मानव व्यापार की रोकथाम एवं उन्मूलन हेतु इससे संबंधित स्रोत, पारगमन एवं मांग क्षेत्र में उचित कार्रवाई सुनिष्चित करना।

(ii) पीड़ितों के हित को सर्वोपरि मानते हुए अविलम्ब उनका उचित रख-रखाव एवं सुरक्षा सुविधाएॅ उपलब्ध करवाना। साथ ही उनके लिए प्रभावषाली पुनर्वास कार्यक्रम संचालित करना जिससे उन्हें स्थिर रोजगार के साधन उपलब्ध हो सके और वे सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सषक्त बन सके। (iii) मानव व्यापार मेें संलग्न वैसे सभी तथ्यों (ट्रैफिकर यथा षड़यंत्रकारी, दुराचारी, दलाल इत्यादि) जो मानव व्यापार को बढ़ावा देने, प्रेरित करने एवं मानव व्यापार के मांग को बढ़ाने का काम करते हैं, उन्हें कानून की नजर में लाना एवं उनके विरूद्ध समुचित कार्रवाई सुनिष्चित करना ताकि उन्हें कानून के अनुसार तत्काल दंडित किया जा सके।

(iv) न्याय प्रक्रिया के घटक, सरकारी एवं गैर सरकारी अभिकरण एवं समाज के अन्य घटक को मानव व्यापार से जुड़े सभी पहलूओं पर संवेदीकरण एवं क्षमता विकास करना जिससे मानव व्यापार को प्रभावषाली रूप से रोकने एवं लड़ने में मदद मिल सके।

साझेदार/घटकः-साझेदार/घटकः-साझेदार/घटकः-साझेदार/घटकः-मानव व्यापार से लड़ने के लिए न्याय प्रक्रिया के तीन महत्वपूर्ण घटक यथा पुलिस, अभियोजन एवं न्यायपालिका, मानव व्यापार विरोधीप्रक्षेत्र में सम्मिलित है। अन्य विभाग विषेषकर गृह विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, मानव संसाधन विभाग, श्रम संसाधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, वित्त विभाग, महिला विकास निगम, सीमा सुरक्षा बल, पंचायती राज्य संस्था के सदस्य, यू0एन0 एजेेंसी, स्वयं सेवी संगठन, सामाजिक कार्यकत्र्ता, बाल कल्याण समिति, विधायकगण, मानव व्यापार के पीड़ितों के प्रतिनिधि बहुराष्ट्रीय कंपनी एवं अन्य व्यापारिक संगठनों तथा सम्पूर्ण मानव समाज इस कार्यक्रम के महत्वपूर्ण घटक है।

मानव व्यापार मुक्त बिहार बनाने की कार्य योजना/रणनीतिः-राज्य सरकार यह मानती है कि तमाम मानव व्यापार मुक्त बिहार बनाने की कार्य योजना/रणनीतिः- मानव व्यापार मुक्त बिहार बनाने की कार्य योजना/रणनीतिः- मानव व्यापार मुक्त बिहार बनाने की कार्य योजना/रणनीतिः- संसाधन की सीमाअेां के बावजूद यदि सभी घटक एक साथ मिल कर काम करें तो मानव व्यापार की इस समस्या को रोकने एवं इससे लड़ने के उद्देष्य में हम सफल हों सकेंगे। अतः यह कार्य योजना इसी बिन्दु पर सरकारी तंत्रों, गैर सरकारी संगठन, व्यापारिक संगठन, पंचायती राज्य संस्था, क्षेत्रीय संगठन एवं अन्य घटकों की वचनबद्वता सुनिष्चित करना अपेक्षित करती है।

मानव व्यापार विरोधी कार्ययोजना ''अस्तित्वअस्तित्वअस्तित्वअस्तित्व'' के प्रति राज्य सरकार अपनी वचनबद्वता को निभाने हेतु समाज कल्याण विभाग के तहत समाज कल्याण निदेषालय में मानव व्यापार विरोधी कोषांग की प्रक्रिया प्रारंभ की गयी है। यह कोषांग कार्ययोजना के विभिन्न घटकाें में बेहतर समन्वय एवं सुचारू कार्यान्वयन को सुनिष्चित करेगा। कार्य योजना को व्यापक रूप से कार्यान्वित करने हेतु निम्नलिखित शीर्ष में विभाजित किया गया है :

1़ प्रश1़ प्रश1़ प्रश1़ प्रशासनिक/ासनिक/ासनिक/ासनिक/प्रबंधन संरचनाप्रबंधन संरचनाप्रबंधन संरचनाप्रबंधन संरचनाः-ः-ः-ः-क्रियान्वयन हेतु संगठन एवं उनके कार्य. 1.1 राज्य स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समन्वय समिति राज्य स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समन्वय समिति State Level Anti-Human राज्य स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समन्वय समिति राज्य स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समन्वय समिति Trafficking Co-ordination Committee) - माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने विषालजीत बनाम भारतीय संघ के वाद में अपने फैसले में राज्य सरकार को मानव व्यापार को रोकने एवं इससे लड़ने हेतु षुरूआत करने के लिए निदेषित किया गया है। तत्पष्चात, भारत सरकार ने सभी3 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 31 दिसम्बर 2008 राज्य सरकारों को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समन्वय समिति बनाने की सलाह दी है। पूर्व में गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति का पुर्नगठन राज्य स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समन्वय समिति के रूप में होगा। इसका कार्य राज्य में मानव व्यापार को रोकने के लिए उचित कदम उठाना, कार्यो का अनुश्रवण एवं पुनर्निरीक्षण करना होगा। इस समिति की संरचना निम्न होगीः-

(क) सदस्य :-(क) सदस्य :-(क) सदस्य :-(क) सदस्य :-

- अध्यक्ष

1.1 मुख्य सचिव, बिहार 1.2 विकास आयुक्त, बिहार- उपाध्यक्ष 1.3 सचिव, समाज कल्याण विभाग - सदस्य सचिव 1.4 सचिव, ग्रामीण विकास विभाग - सदस्य 1.5 प्रधान सचिव, मानव संसाधन विभाग - सदस्य 1.6 सचिव, श्रम संसाधन विभाग - सदस्य 1.7 सचिव, स्वास्थ्य विभाग - सदस्य 1.8 आयुक्त एवं सचिव, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण - सदस्य 1.9 आरक्षी महानिदेषक - सदस्य 1.10 संयुक्त श्रमायुक्त - सदस्य 1.11 निदेषक, अभियोजन बिहार - सदस्य 1.12 जिलाधिकारी - सदस्य 1.13 राज्य नोडल अधिकारी, पुलिस विभाग - सदस्य 1.14 विषेष सचिव, गृह विभाग - सदस्य 1.15 निदेषक, समाज कल्याण निदेषालय - सदस्य 1.16 प्रंबध निदेषक, महिला विकास निगम - सदस्य 1.17 निदेषक , बिहार एड्‌स नियंत्रण समिति - सदस्य 1.18 निदेषक , आइ.सी.डी.एस. - सदस्य 1.19 संयुक्त निदेषक, एस0एस0बी0 - सदस्य 1.20 निदेशक, वित्त विभाग - सदस्य 1.21 अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति - सदस्य 1.22 समन्वयक, मानव व्यापार विरोधी कोषांग - सदस्य 1.23 3-4 गैर सरकारी संगठन/नेटवर्क के प्रतिनिधि, जो मानव व्यापार के रोकने के लिए कार्यरत है - सदस्य

(ख) स्थायी आमंत्रित प्रतिनिधि (ख) स्थायी आमंत्रित प्रतिनिधि (ख) स्थायी आमंत्रित प्रतिनिधि (ख) स्थायी आमंत्रित प्रतिनिधि

1. युनिसेफ/यु.एन.ओ.डी.सी/यु.एन.डी.पी/युनिफेम/एवं अन्य संयुक्त राष्ट्र संगठन के प्रतिनिधि जो बिहार में मानव व्यापार विरोधी कार्य कर रहे हैं।

2. कुछ अन्य प्रतिनिधि जो इस विषय से जुड़े हुए हैं एवं मानव व्यापार मुद्दे पर कार्य में विषेष अनुभव रखतें हैं।

इस समिति की बैठक तीन महीने में एक बार होगी। इस बैठक में किये गए कार्यो का पुनर्निरीक्षण किया जायेगा एवं भावी कार्य योजना भी बनायी जायेगी। यह समिति सभी अभिकरणों (Agency) एवं अधिकारियों के बीच समन्वय एवं जिम्मेवारी को सुनिष्चित करेगी। बैठक में आरक्षी महानिदेषक, निदेषक- अभियोजन बिहार एवं जिलाधिकारी अनुश्रवण प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे। यदि कोई सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहते है तो बैठक से पूर्व अपना प्रतिवेदन भेज देंगे एवं बैठक में लिये गये निर्णयों का अनुपालन करना सुनिष्चित करेंगे।

1-2 जिला स्तरीय मानव व्यापार विरोधी जिला स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समिति समिति समिति समिति (District Level Anti-Human Trafficking जिला स्तरीय मानव व्यापार विरोधी जिला स्तरीय मानव व्यापार विरोधी Committee) पीड़ितो एवं बचाए गए लोगों का उचित संरक्षण एवं देखभाल उनका एक संवैधानिक अधिकार हैे। हर गतिविधि पीड़ितों के हित के अनुसार होनी चाहिए ताकि मानव अधिकारों की पू़र्ति हो सके। पीड़ितों की संरक्षण एवं देखभाल हेतु विभिन्न कार्यक्रमोंं का क्रियान्वयन करने के उद्देष्य से जिला स्तरीय -मानव व्यापार विरोधी समिति का गठन किया जायेगा, जिसकी संरचना निम्न होगी -

(i) जिलाधिकारी - अध्यक्ष (ii) अध्यक्ष, जिला परिषद - सदस्य (iii) आरक्षी अधीक्षक - सदस्य (iv) डी.डी.सी - सदस्य (v) जिला कार्यक्रम पदाधिकारी - सदस्य (vi) सिविल सर्जन - सदस्य4 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 31 दिसम्बर 2008 (vii) सरकारी वकील - सदस्य (viii) जन अभियोजक - सदस्य (ix) जिला षिक्षा पदाधिकारी - सदस्य (x) श्रम अधीक्षक - सदस्य (xi) बिहार एड्‌स सोसाइटी के जिला स्तरीय कार्यकर्ता - सदस्य (xii) बच्चों एवं महिलाअेां के व्यापार के विरूद्व कार्य करनेवाले

2 सामाजिक संस्था/ नेटवर्क (जिला अधिकारी एवं एस.पी.के परामर्ष से नियुक्त करेंगे) - सदस्य

(xiii) जिला कल्याण पदाधिकारी/जिला प्रोग्राम पदाधिकारी - सदस्य नोट :नोट :नोट :नोट :- 1111 रेल एस.पी/वी.एस.एफ का जिला प्रमुख /एस.एस.बी. एवं अन्य अर्द्वसैनिक बल जो जिला में पदस्थापित है वे स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे।

2222 गैर सरकारी संगठनं में काम करने वाली महिला केा प्राथमिकता दिया जाएगा। अगर ये लोग उपलब्ध न हों तो स्थानीय महिला सामाजिक कार्यकर्ता को शामिल किया जाएगा।

3333 जरूरत के अनुसार अध्यक्ष, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि को षामिल कर सकते हैं।

यह समिति निम्न कार्य करेगी-

क) बचाव के समय पुलिस गैर सरकारी संगठन की महिलाओं को विषेष रूप से शामिल करेगी। बचाव के तुरन्त बाद, समिति के अध्यक्ष को इसकी सूचना दी जाएगी ताकि बचाव के बाद की कार्यवाही शुरू की जा सके। समिति के सभी सदस्य हर परिस्थिति में अपना सहयोग देंगे। इस कार्यवाही में गैर सरकारी संगठन/नेटवर्क तथा दूसरे समूह जैसे महिला हेल्पलाईन, चाइल्डलाईन को भी शामिल किया जा सकता है जिससे अन्तर जिला एवं अन्तरराज्यीय समन्वय स्थापित हो सके।

ख) समिति, मानव व्यापार के पीड़ितो के परामर्ष सेवा के लिए उचित संसाधन विकसित करेगी। इसकी मदद से उनके पुनर्वास कार्यक्रम की रचना तैयार की जायेगी। गैर सरकारी संगठनों के प्रषिक्षित परामर्र्षी को भी इस गतिविधि में शामिल किया जाय।

ग) जिला स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समिति मानव व्यापार से बचाये गये पीड़ितों के पुनर्वास से संबंधित सभी कार्यो के लिए उत्तरदायी होगा। एक बार बचाव कार्य कर लिये जाने पर पुलिस के संरक्षण से वापस लेकर सभी संबंधित विभाग/अभिकरणों/सरकार या गैर सरकारी संस्थाओं से मिलकर उसका उचित पुनर्वास करना सुनिष्चित करेगा।

घ) बच्चों एवं महिलाओं को दलालों के चंगुल से बचाने के लिए हर पारगमन (Transit) बिन्दुओं जैसे रेलवे स्टेषन बस स्टैण्ड पर सम्पर्क केन्द्र स्थापित किए जाएँगे। यह केन्द्र अन्य सुविधाओं तथा आवासीय केन्द्र की सूचना देगी।

ड़) स्वास्थ्य संरक्षण एवं एड्‌स से बचाव - जिला स्तरीय समिति, इस क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं का प्रचार प्रसार करेगी। जिला स्तरीय समिति यह भी सुनिष्चित करेगी कि कोई भी कार्यक्रम पीड़ितो के अधिकारों का उल्लंघन न करें बल्कि उनके हितों के अनुकूल कार्य करेगी। सरकार से बाहर की संस्थाओं को इन्हीं उद्देष्यों के अनुसार शामिल किया जाएगा।

च) गृह जिले में उत्तर रक्षा/संरक्षण गृह, अल्पावास गृह एवं संपर्क केन्द्र की स्थापना अत्यंत आवष्यक है। जिलाधिकारी उचित अनुभवी गैर सरकारी संगठनों का सहयोग लेंगे एवं गैर सरकारी संगठनों को इस तरह के केन्द्र/गृह स्थापित करने में सहयोग करेंगे। यह एक समयबद्व कार्यक्रम होगा। जिलाधिकारी इन संस्थाओं को राज्य एवं केन्द्र सरकार के विभिन्न योजनाओं के तहत धन मुहैया कराने का प्रयास करेंगे। ऐसी संस्थाओं को राज्य सरकार से अनुज्ञापत्र (License) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इन गृहों का संचालन अनैतिक पणन निवारण (बिहार) नियमावली, 2007 के मार्गदर्षिका के आलोक में किया जाना चाहिए। साथ ही साथ केन्द्र/गृह की गतिविधियों के उचित अनुश्रवण के लिए एक प्रणाली विकसित किया जाएगा।

गृह का सह प्रबंधन - विभिन्न घटकों के बीच अच्छी साझेदारी को सुनिष्चित करने के लिए, सरकारी घटक एवं समाज के सहयोग से पीड़ितों के गृह/केन्द्र का सहप्रबंधन की प्रणाली विकसित की जाएगी। इस प्रक्रिया में पंचायती राज्य संस्था एवं स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि भी शामिल किए जाएंगे।

छ) समुदाय आधारित निगरानी तंत्र (Community Based Vigilance Mechanisms)& समुदाय आधारित निगरानी तंत्र सही समय पर बचाव के कार्य केा गति प्रदान करेगी। मानव व्यापार विरोधी कार्य करने वाले गैर सरकारी संगठन एवं उनके नेटवर्क के सहयोग से जिला समिति इस तंत्र को गठित करने के लिए पहल करेगी।

जिला समिति प्रति महीने एक बैठक कर इस क्षेत्र में किये गये कार्यो का पुनर्निरीक्षण तथा अनुश्रवण करेगी एवं आगे की कार्य योजना तैयार करेगी। बैठक की कार्यवाही को मानव व्यापार5 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 31 दिसम्बर 2008 निवारण कोषांग, समाज कल्याण निदेषालय को नियमित अंतराल पर भेजना सुनिष्चित करेंगे। यदि कोई सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहते हैं तो बैठक में हुए निर्णय को कार्यान्वित करने की जवाबदेही उनकी होगी।

1.3 मानव व्यापार विरोध्मानव व्यापार विरोध्मानव व्यापार विरोध्मानव व्यापार विरोधीटास्क फोर्स ाीटास्क फोर्स ाीटास्क फोर्स ाीटास्क फोर्स (Anti Human Trafficking Task Force)- मानव व्यापार को रोकने एवं अपराधियों को कानून के हिरासत में लेने एवं उन्हें सजा दिलाने में पुलिस की महत्वपूर्ण एवं वृहत भूमिका होगी। सभी थाने अपने प्राथमिकता सूची में मानव व्यापार विषय को शामिल करें।

मानव व्यापार विरोधी बल आरक्षी महानिदेषक की अध्यक्षता में गठित किया जाएगा। जिसमें अन्य सक्षम अधिकारी होंगे। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी एवं वैसे गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि जिन्हें बिहार में मानव व्यापार के रोकथाम एवं बचाव कार्य का लम्बा अनुभव हो, साथ में शामिल किए जाएॅंगे। इस समिति की बैठक प्रत्येक माह होगी। आरक्षी महानिरीक्षक (CID) इस समिति के सचिव होंगे जो बैठक में लिए गए निर्णयों का फौलोअप करेंगे। सी0आई0सी0 प्रमुख, महिला कोषांग के प्रभारी आरक्षी महानिरीक्षक, इसके सदस्य-सचिव होंगें एवं सभी कार्यवाहियों का संधारण करेंगें एवं नियमित अंतराल पर उसका अनुपालन करना सुनिष्चित करेंगे। निदेषक, अभियोजन एवं सचिव, कल्याण इस समिति के आमंत्रित सदस्य होंगें।

क) यह समिति न्याय प्रक्रिया के विभिन्न घटकों के गतिविधियों का अनुश्रवण करेगी विषेषतः

1. मानव व्यापार संबंधित अपराध का मुफ्‌त निबंधन 2. मानव व्यापार संबंधित अपराधों का विषय वाद की तरह गहन छानवीन करना। इस तरह के सभी अपराधों को आरक्षी अधीक्षक पर्यवेक्षण करेंगे। हिंसा एवं अनैतिक पणन अनुसंधान हेतु अलग से यह अनुसंधान पदाधिकारी नामित किये जायेंगे।

3. प्रत्येक स्तर पर यथा नियुक्ति, पारगमन स्थान (Transit Place) एवं शोषण में शामिल लोगों के विरूद्व कठोर कानूनी प्रावधान का उपयोग करना।

4. मानव व्यापार को एक संगठित अपराध मानते हुए उसी पद्धति से अनुसंधान एवं अभियोजन करना।

5. यह सुनिष्चित किया जायेगा कि मानव व्यापार के छुड़ाए गए व्यक्तियों को कलंकित न किया जाए तथा उनके साथ अपराधियों सा व्यवहार नहीं किया जाए यथा गिरफ्‌तार किया जाना, उत्पीड़ित (Victimised) करना इत्यादि।

6. बचाव एवं उतर बचाव कार्य बचाए गए लोगों के अधिकार का उल्लंघन केा रोकने के लिए उचित कदम उठाना सुंनिष्चित करें।

7. क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत गैर सरकारी संगठन एवं नागरिक समाज के सदस्य से पुलिस एवं अन्य विधि लागू करनेवाली संस्था (Law Enforcing Agency) में सम्पर्क-सूत्र स्थापित करना जिससे विधि लागू करने के सभी पहलू से सहक्रियाषीलता स्थापित किया जा सके। साथ ही मानव व्यापार के पीड़ितों के घर की जॉच में सहायता प्रदान करना एवं उनका परिवार में पुर्नसामंजस्य कराना।

8. सभी पुलिस अधिकारियों द्वारा मानव व्यापार संबंधी अपराध पर प्राथमिकता को सुनिष्चित करवाना, 9. सुनिष्चितरूपेण मानव व्यापार से संबंधित एक डाटाबेस एवं जवाब प्रणाली (Response System) विकसित करना,

10. आरक्षी केन्द्र एवं अन्य कार्यालयों में एक सूचना पट्‌ट (Display Board) लगवाना सुनिष्चित करना जिसमें मानव व्यापार से संबंधित अपराधों के आंकड़े उस पर अंकित किये जाय जिससे अनुश्रवण के कार्य को सरल बनाया जा सके तथा मानव व्यापार विरोधी कार्यक्रमों को सबके लिए पारदर्षी बनाने के उद्‌देष्य को प्राथमिकता दी जा सके।

ख) आरक्षी महानिदेषक प्रत्येक जिले में एवं सी.आई.डी में एक मानव व्यापार विरोधी इकाई बनायेगें। एक योग्य, संवेदनषील एवं प्रषिक्षित अपर आरक्षी अधीक्षक/उपायुक्त इस इकाई के लिए उतरदायी होंगे। दूसरे स्तर के अन्य अधिकारी एवं योग्य गैर सरकारी संगठनों इस इकाई में शामिल किए जाएॅगें। इस इकाई का मुख्य उद्देष्य, पीड़ितों का बचाव एवं उनका पुनर्वास हैं। जिला इकाई का अनुश्रवण क्षेत्रीय आरक्षी महानिरीक्षक/क्षेत्रीय आरक्षी उप महानिरीक्षक एवं प्रक्षेत्रीय आरक्षी महानिरीक्षक द्वारा किया जाएगा। अन्वेषण विभाग में स्थित इकाई का अनुश्रवण विभाग के प्रमुख करेंगे। यह इकाई वैसे सभी अपराधेां केा देखेगा जिसका अन्तर्राष्ट्रीय प्रभाव हो। अनुश्रवण का प्रतिवेदन आरक्षी महानिदेषक को प्रेषित किया जाएगा। यह इकाई एक टास्क फोर्स की तरह इस मुद्‌दे से जुड़े सभी कानूनी पक्षों का क्रियान्वयन करेगा। इसके पर्याप्त सहयोग के लिए क्षेत्र के सक्षम गैर सरकारी संगठन इनके साथ होंगे।

ग) अनुश्रवण के लिए प्रत्येक अधिकारी की जवाबदेही निष्चित करना आवष्यक है। इस लिए आरक्षी महानिदेषक द्वारा एक उचित मानदण्ड विकसित किया जायेगा जिसकी सहायता से संबंधित6 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 31 दिसम्बर 2008 अधिकारियों के कार्यो का अनुश्रवण किया जाएगा। प्रत्येक जिला इकाई के अपर आरक्षी अधीक्षक/आरक्षी उपाधीक्षक द्वारा महीने में किये गए पणन से संबंधित सभी अपराधों की कार्य विवरणी आरक्षी महानिदेषक एवं सी0आई0डी0 को भेजेंगे। पुरस्कार एवं दंड देने का प्रावधान विकसित किया जाएगा। बजट एवं अन्य संसाधन की व्यवस्था, एवं उसे उपयोग करने का प्रावधान आरक्षी महानिदेषक के अनुरोध के अनुसार समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जाएगा।

घ) कानूनी प्रक्रिया को लागू करने में एक सबसे बड़ी कमी है - एक उचित डाटा वेस का इसलिए एक सही डाटा वेस की आवष्यकता है। इसके लिए प्रति महीने ऑकड़ों (data) का संकलन एवं विष्लेषण किया जाएगा। संकलन के लिए एक प्रारूप तैयार होगा एवं इसका विष्लेषण प्रत्येक माह के 10 तारीख तक गृह विभाग एवं समाज कल्याण विभाग को भेजा जाएगा। प्रतिवेदन की एक प्रति निदेषक, अभियोजन को भेजा जाएगा जो इस वाद की कार्यवाही का अनुश्रवण करेंगे। आरक्षी महानिदेषक द्वारा संकलित डाटा में निम्न तथ्य शामिल होंगें

(cid:1) व्यापार के षिकार व्यक्ति का विवरणी (cid:1) उनका उम्र समूह {(क) 14 वर्ष के कम उम्र (ख) 14-18 वर्ष के बीच (ग) वे जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक हो }ं।

(cid:1) रहने का जगह यथा देष/ राज्य/जिला/गाँव जहाँ से उसे लाया गया है (cid:1) जगह जहाँ उसे भेजा गया है (cid:1) दलाल का उम्र एवं विवरण तथा शामिल सभी व्यक्ति यथा जिनके द्वारा उन्हें लाया गया, जिसने पैसा दिया, जिसने शोषण किया, षडयंत्रकारी तथा जिसने इस पूरे कार्य में अपना सहयोग दिया है

(cid:1) अनुसंधान, आरोप पत्र, सजा एवं सजा के बाद किये गए कार्य जैसे शोषण के जगह को बंद करना, सजा पाए व्यक्ति को जिले/राज्य से बाहर भेजना {कानून,आई.टी.पी.ए, पी.आई.टी.ए के प्रावधानों के अनुसार } की स्थिति

(cid:1) उपयोग किए गए कानून की धारा का विवरण ताकि पीड़ित को अभियुक्त की तरह कलंकित नहीं किया जा सके

(cid:1) पुनर्वास के लिए उठाए गए कदम (cid:1) अन्य सरकारी विभाग एवं गैर सरकारी संगठनों का विवरण जो इस प्रक्रिया से जुड़े हैं (cid:1) पुलिस द्वारा मानव व्यापार के अपराध को रोकने का विवरण।

ड.) सी0आई0डी0 प्रमुख/आरक्षी महानिरीक्षक, कमजोर वर्ग तथा निदेषक, समाज कल्याण (अथवा मुख्य सचिव द्वारा मनोनीत कोई अन्य पदाधिकारी) मानव व्यापार के रोकथाम, उन्मूलन तथा मानव व्यापार के षिकार हुए लोगों के पुनर्वास हेतु राज्य में नोडल पदाधिकारी होेंगे। नोडल पदाधिकारी सभी राज्यों के संबंधित नोडल पदाधिकारी, अन्य राज्य विषेषकर वैसे राज्य, जो मानव व्यापार के विरूद्ध मामलोंं में आपस में सामंजस्य स्थापित करेंगे। विभिन्न राज्यों के बीच स्थापित समन्वय को समस्त मानव व्यापार विरोधी गतिविधियों के लिए प्रभावोत्पादक ढंग से व्यवहार किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त इसका उपयोग मानव व्यापार में संलिप्त लोगों के अतिरिक्त रक्षित लोगों की देख-रेख विषेषतया उनके पुनर्वास को सुनिष्चित करने के लिए उठाये जाने वाले कदमों को सुदृढ़ बनाने और संरक्षण प्रदान करने के उद्‌देष्य से ऑंकड़ो को अद्यतन करने, विनिमय करने और उपयोगी बनाने हेतु किया जायेगा। 1.4 मानव व्यापार विरोधी अभियोजन अनुश्रवण समिति मानव व्यापार विरोधी अभियोजन अनुश्रवण समिति (Anti Human-Trafficking मानव व्यापार विरोधी अभियोजन अनुश्रवण समिति मानव व्यापार विरोधी अभियोजन अनुश्रवण समिति Prosecution Monitoring Committee) - - - - यह समिति निदेषक, अभियोजन द्वारा गठित की जायेगी। यह समिति निम्नांकित कार्यो का सम्पादन करेंगीः-

1. पूरे राज्य के पणन/मानव व्यापार (Trafficking) अपराध के खिलाफ किये गए कार्यों का मासिक पुनर्निरीक्षण करेगी। इस पुनर्निरिक्षण में मजिस्ट्रेट एवं जिला न्यायालय में इस अपराध के विरूद्व हुए कार्य को भी शामिल किया जायेगा।

2. इस न्यायालय के अभियोजक अपना प्रतिवेदन निदेषक, अभियोजन को आवष्यकतानुसार भेजेंगे ताकि निदेषक, अभियोजन इससे सामयिक प्रतिवेदन बना सके।

3. यह अपना प्रतिवेदन प्रत्येक माह के 10 तारीख को गृह विभाग एवं समान कल्याण विभाग को भेजेगा। इस प्रतिवेदन को आरक्षी महानिदेषक से भी चर्चा किया जाएगा।

4. अभियोजक के मानव व्यापार के क्षेत्र में निष्पादित कार्यो के मूल्यांकन हेतु एक प्रारूप विकसित किया जाएगा एवं इसके आधार पर मासिक पुनर्निरीक्षण किया जाएगा।

5. निदेषक, अभियोजन सजा एवं पुरस्कार का प्रावधान बनाएँगे7 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 31 दिसम्बर 2008 6. परामर्षदाता द्वारा तैयार वाद विवरण को अभियोजक द्वारा वाद का षीघ्र निष्पादन हेतु उपयोग किया जाएगा।

7. पणन (Trafficking) के विषेष वादोें का त्वरित न्यायिक जाँच सुनिष्चित करना। 8. सचिव, समाज कल्याण विभाग द्वारा इस कार्यों के लिए अलग राषि की व्यवस्था करना। 9. निदेषक अभियोजन के मासिक प्रतिवेदन में ये सारी चीजें शामिल होंगी।

1.5 ग्राम स्तरीय मानव व्यापार विरोधी निकाय ग्राम स्तरीय मानव व्यापार विरोधी निकाय ग्राम स्तरीय मानव व्यापार विरोधी निकाय ग्राम स्तरीय मानव व्यापार विरोधी निकाय (Village Level Anti Trafficking Bodies) - मानव व्यापार से बचाव में पंचायती राज्य संस्थान की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए जिलाधिकारी द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों, षिक्षक, आंगनबाड़ी सेविका, स्थानीय पुलिस, समुदाय आधारित संस्थाओं के सदस्य, स्थानीय स्वयं सेवी संस्थाओं के सदस्य एवं अन्य अधिकारियों को शामिल करके ग्राम स्तरीय मानव व्यापार विरेाधी निकाय का गठन किया जएगा। यह इकाई जागरूकता, संवेदनषीलता बढ़ाने एवं सषक्तिकरण के कार्यक्रमों को सुनिष्चित करेगी। समाज कल्याण निदेषालय, गैर सरकारी संगठनों की सहायता से ग्राम स्तरीय मानव व्यापार विरोधी निकायों के उन्मुखीकरण हेतु कार्यक्रम प्रायोजित करायेगी।

2222.... मानव व्यापारमानव व्यापारमानव व्यापारमानव व्यापार (Trafficking) का रोकथाम-का रोकथाम-का रोकथाम-का रोकथाम-ट्रॅफिकिंग को रोकथाम हेतु इसके स्रोत क्षेत्र, पारगमन क्षेत्र एवं माँग क्षेत्र के लिए उचित रणनीति एवं कार्यक्रम की आवष्यकता है। इससे संबंधित कानूनों को सही तरीके से लागू करके एवं पीड़ितों को उचित संरक्षण देकर भी इसे रोका जा सकता हैं।

इस दिषा में निम्न कदम उठाए जाने चाहिए । 2222....1 1 1 1 ोत क्षेत्र एवं कमजोर व्यक्ति की पहचान -ोत क्षेत्र एवं कमजोर व्यक्ति की पहचान -ोत क्षेत्र एवं कमजोर व्यक्ति की पहचान -ोत क्षेत्र एवं कमजोर व्यक्ति की पहचान - स्त्रोत क्षेत्र वह स्थान है जहाँ से मानव व्यापार हेतु लोगों को ले जाया जाता है। दलाल वैसे व्यक्ति पर ध्यान रखते हैं जो आसानी से उनकी चंगुल में आ सके। इसके लिए कई कारक जिम्मेवार हैं यथा- परिवार की कम आय, गरीबी, निरक्षरता, जागरूकता का अभाव, रोजगार के साधन का अभाव, प्रचलित सामाजिक एवं सांस्कृतिक विभेद, कानूनी प्रक्रिया के पालन का अभाव आदि। इसके बचाव के लिए निम्न कार्य किए जाएँगे।

क) जिला स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समिति इन कारकों को समझकर, इसे उचित तरीके से सम्बोधित करेगी।

ख) इस के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए संबंधित सभी सरकारी योजनाओं को प्रकाषित कराना।

ग) राज्य सरकार के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में उत्तर रक्षा गृह/संरक्षण गृह/अल्पावास गृह के आवासित मानव व्यापार के पीड़ित महिलाअेां को प्राथमिकता देना ताकि वे आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो सके।

घ) ोत क्षेत्रों में नियमित रोजगारपरक परियोजना शुरू करना एवं इसका उचित क्रियान्वयन सुनिष्चित करना।

ड़) पिछड़े/कमजोर समुदाय के लिए विषेष कार्यक्रम चलाना। च) ट्रैफिकिंग संबंधित मुद्दे विषेषकर सामाजिक मान्यता को स्थापित करने एवं कलंक को हटाने के लिए जन जागरूकता अभियान शुरू करना।

छ) जिलाधिकारी एवं आरक्षी अधीक्षक इसके बचाव के लिए सभी कार्य करेंगे। इनके प्रयास का दस्तावेज बनाकर मासिक प्रतिवेदन गृह विभाग/समाज कल्याण विभाग/आरक्षी महानिदेषक को भेजा जाएगा।

2222....2 2 2 2 पारगमन स्थान पारगमन स्थान पारगमन स्थान पारगमन स्थान (Transit Point) में मानव व्यापार निरोधक कार्य में मानव व्यापार निरोधक कार्य में मानव व्यापार निरोधक कार्य में मानव व्यापार निरोधक कार्य -ोत स्थान से माँग क्षेत्र तक पणित (Trafficked) व्यक्तियों को ले जाने वाले मार्ग को पारगमन स्थान (Transit Point) कहते हैं। उक्त के आलोक में लगभग सारे बस स्टैण्ड एवं रेलवे स्टेषन हुए जहॉ से व्यक्तियेां का आवागमन होता हैं साथ ही सीमावर्ती क्षेत्र, सीमापार से होनेे व्यापार के लिए पारगमन स्थान हो सकता है। अतः कारगर बचाव के लिए निम्नलिखित कार्य शुरू किया जायेगाः-

क) समाज को जागरूक एवं संवेदनषील बनाने के लिए पुलिस, गैर सरकारी संगठनों एवं परामर्षदाता को शमिल किया जायेगा। इसके साथ परामर्ष केन्द्र भी स्थापित किया जायेगा। ख) इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए क्षेत्रीय भाषा में विकसित पोस्टर एवं अन्य प्रिंट माघ्यमों का उपयोग किया जायेगा। जिलाधिकारी एवं आरक्षी अधीक्षक द्वारा सुरक्षा एजेंसियाँ जैसे एस.एस. बी/बी.एस.एफ/ जी.आर.पी की सेवा को उपयोग करना।

2222....3 3 3 3 माँग क्षेत्र में मानव व्यापार निरोधकमाँग क्षेत्र में मानव व्यापार निरोधकमाँग क्षेत्र में मानव व्यापार निरोधकमाँग क्षेत्र में मानव व्यापार निरोधक कार्य -कार्य -कार्य -कार्य - वह क्षेत्र/जगह जहांँ पणित व्यक्ति को ले जाया जाता है तथा जहॉँ से उनका माँग होता है ोत क्षेत्र कहलाता है। बचाव तब ही संभव है जब इस क्षेत्र में उचित प्रयास किए जाएँ।

क) जिला समिति अपने अनुसंधान को माँग क्षेत्र में केन्द्रित करे ताकि देाषी व्यक्ति पकड़ा जा सकें।

ख) आरक्षी अधीक्षक यह सुनिष्चित करें कि उचित कार्य हुआ है।8 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 31 दिसम्बर 2008 ग) उच्च विद्यालय /महाविद्यालय /यूथ क्लब के युवाओं की इस विषय पर जागरूकता आवष्यक है। जिलाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक तथा जिला समिति इस दिषा में पहल करें।

2222....4 4 4 4 सीमापार मानव व्यापार का बचाव एवं रोकथाम सीमापार मानव व्यापार का बचाव एवं रोकथाम सीमापार मानव व्यापार का बचाव एवं रोकथाम सीमापार मानव व्यापार का बचाव एवं रोकथाम ---- बिहार के आठ सीमावर्ती जिले यथा मधुबनी, सीतामढ़ी, पष्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, षिवहर, सुपौल, अररिया एवं किषनगंज, मानव व्यापार के लिए संवेदनषील है। इसे रोकने तथा बचाए गए लोगों के उत्तर रक्षा के लिए एक कार्यक्रम की आवष्कयता है। साथ ही समय सीमा में इससे संबंधित जानकारियों को प्रसार सभी संबंधित समूहों में करना भी आवष्यक है। इस जिलों के जिलाधिकारी एवं आरक्षी अधीक्षक एक संयुक्त कार्य समूह का गठन दूसरे घटक के साथ मिलकर करे। उपयुक्त गैर सरकारी संगठनों के साथ सीमा पार के भी गैर सरकारी संगठनों को भी इस समूह में शामिल किया जायेगा। इन सभी को उचित प्रषिक्षण दिया जायेगा। संयुक्त कार्य समूह का गठन एवं इसकी कार्यवाही की सूचना पहले से गृह विभाग एवं समाज कल्याण विभाग को दिया जायेगा। चूंकि इसमें अन्तर्राष्ट्रीय मुद्वे भी शामिल है, अतः भारत सरकार के दिषा-निर्देष का पालन सुनिष्चित किया जायेगा।

इस जिले के जिलाधिकारी/आरक्षी अधीक्षक नेपाल के सहयोगियों के साथ त्रैमासिक बैठक करें जिसमें मानव व्यापार को रोकने के लिए संयुक्त साझा कार्यक्रम तैयार किया जायेगा। तैयार किये गये संयुक्त साझा कार्यक्रम की जानकारी गृह विभाग एवं भारत सरकार को पूर्व में दी जायेगी। प्रमंडलीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों यथा जिला पुलिस, एस.एस.बी, बी.एस.एफ, कस्टम अधिकारियों की संयुक्त बैठक नियमित रूप से की जायेगी। इस बैठक में कार्य करने वाले प्रभावषाली गैर सरकारी संगठनोंं को भी आमंत्रित किया जायेगा।

अन्तरराज्यीय मानव व्यापार को रोकने के लिए, दूसरे राज्य के अधिकारियों द्वारा कदम उठाया जायेगा।

2222....5 5 5 5 राजनैतिक इच्छा शक्ति -राजनैतिक इच्छा शक्ति -राजनैतिक इच्छा शक्ति -राजनैतिक इच्छा शक्ति - मानव व्यापार विरोधी गतिविधयाँ (बचाव एवं रोक) कारगर तभी हो सकती हैं जब सही राजनैतिक इच्छा शक्ति मौजूद हो। अतः विधान सभा एवंं विधान परिषद के चुने हुए राजनीतिक प्रतिनिधियों की संवेदनषीलता बढ़ाने की आवष्यकता होगी। समाज कल्याण विभाग इस दिषा में कदम उठायेगा। इस मुद्वे पर विधायिका को भी संवेदनषील होना चाहिए। 2222....6 6 6 6 जिम्मेदार मीडिया -जिम्मेदार मीडिया -जिम्मेदार मीडिया -जिम्मेदार मीडिया - मानव व्यापार को रोकने, सुरक्षा एवं अभियोजन के लिए मीडिया को सघन रूप से शामिल करने की जरूरत है। समाज कल्याण विभाग इस दिषा में कदम उठायेगा। सभी घटक, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाें सहित, को शामिल करके मीडिया के लिए एक आदर्ष आचार संहिता बनाया जायेगा।

3 पीड़ित एवं बचाए गए लोगों की रक्षा एवं पु 3 पीड़ित एवं बचाए गए लोगों की रक्षा एवं पुनर्वास नर्वास नर्वास नर्वास 3 पीड़ित एवं बचाए गए लोगों की रक्षा एवं पु 3 पीड़ित एवं बचाए गए लोगों की रक्षा एवं पु 3.1 सेवानिवृत पुलिस अधिकारी एवं सेवा निवृत सैनिक अधिकारी का विषेष पुलिस अधिकारी के रूप में नियुक्ति - समाज को प्रभावित करने विभिन्न मुद्‌दों के लिए पुलिस अधिकारियों की बहुत कमी है। अतः जिलाधिकारी एवं आरक्षी अधीक्षक आई0टी0पी0ए0 के अनुच्छेद 13 के प्रावधानों के अंतर्गत उपयुक्त सेवानिवृत पुलिस एवं सैनिक अधिकारी की पहचान कर, उन्हें विषेष पुलिस अधिकारी नियुक्त करेंगे, जिसमें कम से कम 35 प्रतिषत महिलाएं होगी। चयनित विषेष पुलिस अधिकारी को आरक्षी महानिदेषक एवं समाज कल्याण विभाग के द्वारा प्रषिक्षण प्रदान किया जायेगा।

3.2 मानव व्यापार विरोधी क्षेत्र में विषिष्ट कार्य कर रहें सरकारी अधिकारी, पुलिस अधिकारी एवं गैर सरकारी संगठन को जिलाधिकारी द्वारा पुरस्कृत किया जायेगा। जिलाधिकारी, किसी पुलिस अधिकारी को पुरस्कृत किये जाने की सूचना आरक्षी महानिदेषक एवं अन्य स्थानीय अधिकारियों को प्रदान करेंगे ताकि इसका पुनरावृत्ति न हो सके। अन्य घटक द्वारा किए गए विषिष्ट कार्यो का भी पर्याप्त प्रचार होगा।

3.3 पुलिस थानों में महिला एवं बच्चों का डेस्क- महिलाअेां एवं बच्चों के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों के अलावा, मानव व्यापार पर केन्द्रित कार्येां के लिए, हर थानों में यह डेस्क स्थापित करना आवष्यक है। इसकी देखभाल करने वाले अधिकारी विषेष रूप से प्रषिक्षित, संवेदन शील तथा ज्ञान, बुद्वि एवं संसाधन से उन्मुखीकृत हाेंगे। संसाधन एवं अन्य कार्यवाही की सीमाओं के कारण एक ही साथ सभी थानों में यह डेस्क गठित करना संभव नहीं है। इसलिए पहले कुछ चुने हुए थानों से इसकी शुरूआत हो फिर इसका विस्तार अन्य थानों में किया जाए। प्रारंभ मे महिला एवं बाल डेस्क जिला मुख्यालय में गठित किए जाएँ। गृह विभाग इस दिषा में पहल करें। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पास इस कार्यक्रम के लिए जरूरी राषि उपलब्ध है। इसका अनुश्रवण करना होगा।

3.4 पणन (Trafficking) से पीड़ित/ बचाए गए निःषक्त बच्चों के विषेष देखभाल पर ध्यान देने की आवष्यकता होगी।

3.5 लोगों को संवेदनषील करने के लिए समाज कल्याण विभाग ''अन्तर धार्मिक धर्म गुरू मंच'' का गठन किया जायेगा।9 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 31 दिसम्बर 2008 3.6 सामाजिक पुनर्वास कोषसामाजिक पुनर्वास कोषसामाजिक पुनर्वास कोषसामाजिक पुनर्वास कोष- बिहार सरकार इस योजना के अन्तर्गत मानव व्यापार के पीड़ित महिलाओं एंव बच्चों के पुनर्वास के लिए पर्याप्त राषि की व्यवस्था करेगी, जो नारी शक्ति योजना के सामाजिक पुनर्वास कोष से खर्च की जाएगी। यह राषि जिलाधिकारी को आवंटित किया जाएगा ताकि आवष्यकता अनुसार इस राषि का उपयोग पणित व्यक्तियों के स्वास्थ्य, शैक्षणिक, आर्थिक एवं सामाजिक पुनर्वास के लिए किया जाये। इसके लिए राशि उपलब्ध है।

3.7 पुनर्वास में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की सहभागिता- कार्यांे एवं संसाधनों को चिन्ह्‌ करने के केन्द्रीकरण के क्रम में यह उपयुक्त होगा कि राज्य स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समिति एवं जिला स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समिति पुनर्वास प्रक्रिया विषेषकर जीविकोपार्जन हेतु कौषल विकास एवं रोजगार देने में तथा विपणन आदि में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को शामिल किया जायेगा।

4. वैधानिक ढाँचावैधानिक ढाँचावैधानिक ढाँचावैधानिक ढाँचा 4.1 समाज कल्याण विभाग, गृह विभाग की सहायता से ई0टी0पी0ए0 की धारा 13 की उपधारा 3 (बी) के अनुसार गैर सरकारी स्वयं सेवी संगठनों की एक सलाहकार समिति अधिसूचित करेगा। सलाहकार समिति का गठन प्रत्येक जिला में किया जायेगा ताकि जिले में कार्यरत सक्षम गैर सरकारी संगठनों का चयन किया जा सके।

4.2 आई टी पी ए/पी आई टी ए की नियमावली बनाकर लागू की जायेगी। समाज कल्याण विभाग इस दिषा में गृह विभाग की सलाह से कदम उठायेगा।

4.3 मानव व्यापार के करने के लिए एकमात्र विस्तृत विधायिका ''गोआ बाल अधिनियम, 2002'' है। समाज कल्याण विभाग द्वारा इस प्रणाली के आधार पर बिहार मानव व्यापार विरोधी अधिनियम बनाया जायेगा। मानव व्यापार विरोधी विषेषज्ञ एवं कानूनी विषेषज्ञ की एक समिति बनायी जायेगी जो इस नियम का मसौदा तैयार कर सके।

5 क्षमतावर्द्धन एवं संवेदनषीलता के कार्यक्रम क्षमतावर्द्धन एवं संवेदनषीलता के कार्यक्रम क्षमतावर्द्धन एवं संवेदनषीलता के कार्यक्रम क्षमतावर्द्धन एवं संवेदनषीलता के कार्यक्रम 5.1 पुलिस अधिकारी कानून, इसकी प्रक्रिया, न्यायालय के आदेष एवं अन्य कार्यवाहियों पर विषेष रूप से प्रषिक्षित किये जायेंगे। देष में होने वाले विषिष्ट कार्यों को आर्दष की तरह विकसित कर पुलिस अधिकारियों के उचित उन्मुखीकरण के लिए उन्हें वितरित किया जाए। भारत सरकार के गृह मंत्रालय एवं अन्य सक्षम अभिकरणों के सहयोग से कानून को लागू करने वाले अधिकारी को सषक्त करने के लिए कार्यक्रम चलाया जायेगा। ये संसाधन सही तरीके से उपयोग किए जाएँ ताकि जो अधिकारी मानव व्यापार के खिलाफ विभिन्न कार्य करने के लिए बुलाए गए हो उन्हें सषक्त एवं संवेदनषील बनाया जा सके।

5.2 मानव व्यापार को रोकने एवं उससे बचाव संबंधित कानून एवं उसके न्यायिक आदेष पर अभियोजक की क्षमता एवं संवेदनषीलता बढ़ायी जायेगी।

5.3 वर्तमान में उपस्थित प्रणाली के अनुसार पीड़ितों को समुचित संरक्षण एवं उनके त्वरित न्याय को सुनिष्चत करने के लिए न्यायिक अधिकारियों (जो मानव व्यापार सबंधी अपराध को देखते हैं, को सषक्त एवं संवेदनषील किया जायेगा। माननीय सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय के आदेषेां को संकलित करके एक संग्रहिका विकसित की जायेगी, जिसे न्यायिक अधिकारियों को स्त्रोत सामग्री (Resource Materials) की तरह दिया जायेगा।

5.4 गैर सरकारी संगठनों का प्रषिक्षण - गैर सरकारी संगठनों को इस योजना में बड़ा दायित्व दिया गया है अतः उन्हें आई टी पी ए/पी आई टी ए के अन्तर्गत उन्हें दिए गए शक्ति/दायित्व पर उचित उन्मुखीकरण अत्यन्त आवष्यक है। यह उन्हें वर्तमान न्याय प्रणाली में सही ढंग से भाग लेने में सहयोग करेगा। गैर सरकारी संगठन राज्य के नेटवर्क का एक भाग होगा जिसका राज्य के जैसा समान लक्ष्य होगा यथा मानव व्यापार मुक्त बिहार। समाज कल्याण विभाग, गैर सरकारी संगठन, समुदाय एवं शैक्षणिक संस्थान को संवेदनषील बनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने में पहल करेगा।

5.5 सभी घटकों का विवरण (पता, विषेषज्ञता, नाम आदि समाज कल्याण विभाग द्वारा विकसित किया जाएगा। इस क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाआें का फोटो पहचान के साथ वेब डायरेक्टरी (Web Directory) बनाया जाएगा। इसे नियमित रूप से अद्यतन किया जाए तथा इसे कानून लागू करने वाले एजेंंसियों को उपलब्ध कराया जाए। यह सहयोगियों के लिए अत्यन्त उपयोगी होगा। यह कार्य किसी बाहर के एजेंसी को दिया जाए जो समय सीमा के अंदर में इसे पूरा कर सके।

5.6 समुदाय के जागरूकता के लिए कारगर सूचना षिक्षा सम्पर्क सामग्री निर्मित किया जायेगा एवं व्यापक रूप से इसका इस्तेमाल समाज में संवेदनषील बनाने हेतु किया जायेगा।

5.7 कानून लागू कराने वाले अभिकरणों (Agency) , प्रषासनिक पदाधिकारी, सुधारात्मक प्रषासन के पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग पदाधिकारी द्वारा आयोजित प्रषिक्षण कार्यक्रम में मानव व्यापार पर एक सत्र शामिल किया जाएगा।10 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 31 दिसम्बर 2008 6.... राज्य संसाधन एवं सूचना केन्दराज्य संसाधन एवं सूचना केन्दराज्य संसाधन एवं सूचना केन्दराज्य संसाधन एवं सूचना केन्द-मानव व्यापार को रोकने के लिए एक राज्य संसाधन केन्द्र की जरूरत है। यह केवल डाटा केन्द्र नहीं होगा बल्कि इस विषय पर एक वृहत सूचना केन्द्र होगा।

6.1 यह केन्द्र देष में होने वाले अच्छे कार्यों का संकलन कर इसे विभिन्न घटकों को सषक्त करने के लिए सभी को भेजा जाएगा।

6.2 इस केन्द्र में एक मुफ्‌त हेल्पलाइन स्थपित किया जा सकेगा। 6.3 यह केन्द्र गुमषुदा व्यक्तियों के मुद्वे का अनुश्रवण करेगा क्योंकि बहुधा, गुमषुदा वाद वास्तव में पणन के वाद हो सकते हैं।

6.4 यह पुलिस, गैर सरकारी संगठनों तथा अन्य संबंधित घटक के साथ समन्वय स्थापित करेगा। 6.5 इसे महिलाओं एवं बच्चों पर काम करने वाले गैर सरकारी संगठन की सूचना सूची होगी। 6.6 यह बचाए गए लोगों/पीड़ितों लोगों के कानूनी, मेडिकल एवं परामर्ष संबंधी जरूरतों की पूर्ति के लिए सक्षम होगा।

6.7 पीड़ितों को सुरक्षित स्थान देने वाले संस्थाओं की सूची पुलिस, न्यायालय एवं समाज को उपलब्ध कराएगा।

6.8 बचाए गए लोग संस्थान में रखे जाएँगे जहॉ उनके स्वाभिमान को बहाल करने के लिए कानूनी, चिकित्सीय एवं परामर्ष सेवा उपलब्ध कराया जाएगा।

6.9 इस केन्द्र द्वारा आई.ई.सी, शोध एवं प्रषिक्षण कार्यक्रम विकसित एवं आयोजित किया जाएगा। 6.10 यह एक स्त्रोत निर्देषिका (Resource Directory) प्रकाषित करेगा तथा वेब साइट जारी करेगा।

सभी घटक इस केन्द्र के लिए योगदान करेंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य समिति इसकी चर्चा करके, इसे गठित करने की रणनीति तय करेगा।

बिहार राज्यपाल के आदेश से, विजय प्रकाश, प्रधान सचिव।

———— अधी.क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु)ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 595-571+200-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 31 December 2008. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2008-12-31.595/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2008-12-31.595.