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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 31 December 2008

Published 31 December 2008

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2008-12-31.596
Languages
English, Hindi

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विषयः-श्रमिक चेतना सैनिक एवं श्रमिक चेतना शिवरों की व्यवस्था के संबंध में। देश में श्रमिकों की कुल जनसंख्या का लगभग 93 प्रतिशत असंगठित क्षेत्रों में काम करता है। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले इन श्रमिकों का एक बड़ा भाग गॉवों में रहता है एवं कृषि क्षेत्रों में नियोजित है तथा वह किसानों के खेत में बटाईदार, दैनिक मजदूर अथवा संबद्व मजदूर के रूप में काम करता है। जब इन श्रमिकों को काम नहीं मिलता अथवा काम का उचित दाम नहीं मिलता तो ये प्रवासी मजदूर के रूप में राज्य से पलायन करने को विवश हो जाते हैं। कृषि क्षेत्र सहित अन्य असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों में कई कारणों से अभी तक सामूहिक सौदेबाजी की क्षमता विकसित नहीं हो पाई है तथा उनमें जागरूकता का भी अभाव है। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के अन्दर सामूहिक सोैदेबाजी की क्षमता न होने, जागरूकता की कमी तथा मजबूत संगठन के अभाव के कारण उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी मिलने में भी कठिनाई पेश आती है। यह भी देखा गया है कि सड़क, बॉध, सिंचाई आदि प्रक्षेत्रों में संचालित सरकारी योजनाओं में असंगठित मजदूरों का बड़ा हिस्सा एवं कृषि मजदूर भी नियोजित होते हैं। वत्र्तमान में '' नरेगा '' योजना चलाइर््र जा रही है उसमें खेतिहर मजदूरों का बड़ा हिस्सा काम करता जिन्हें सरकार द्वारा जॉब कार्ड मुहैया कराया गया है। ऐसा देखा गया है कि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं में भी निर्धारित न्यूनतम मजदूरी एवं अन्या सुविधाएॅ सही ढंग से मजदूरों तक उपरोक्त कारणों से नहीं पहूॅंच पाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतिहर मजदूरों के अलावा भारी संख्या में निर्माण मजदूर एवं बीड़ी मजदूर भी बसते हें। बिहार राज्य के नालन्दा, बेगूसराय, जमूई, मुंगेर, भागलपुर, बक्सर, समस्तीपुर एवं मधुबनी जिलों समें बीड़ी बनाने का सबसे अधिक काम होता है। निर्माण एवं बीड़ी मजदूरोें को भी उपरोक्त कारणों से सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी पाने में कठिनाई होती है।2 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 31 fnlEcj 2008 अतः श्रम संसाधन विभाग इस उत्प्रेरक की भूमिका का निर्वाहन करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बसने वाले खेतिहर एवं अन्य असंगठित मजदूरों तक सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी तथा श्रमिक कल्याण की अन्य योजनाओं का समुचित लाभ पहूॅचाने के उदेश्य से सामूहिक सौदेबाजी की उनकी क्षमता विकसित करने हेतु श्रमिक प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन, न्यूनतम मजदूरी की दरें तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए श्रम चेतना सैनिक एवं श्रम चेतना शिविरों के आयोजन की निम्नांकित व्यवस्था की जाती हैः-

1. राज्य के प्रत्येक पंचायत से एक-एक श्रमिक का चयन कर उन्हे ग्रामीण प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाय। श्रमिकों के चयन मे दलित एवं महिला मजदूरों को प्राथमिकता दी जाय। साथ ही ऐसे श्रमिकों को भी प्राथमिकता दी जाय जो पढ़ना-लिखना जानते हैं।

2. इस प्रकार चयनित एवं प्रशिक्षित श्रमिक को उस पंचायत के लिये श्रमिक चेतना सैनिक कहा जाय। श्रमिक चेतना सैनिक अपने-अपने पंचायतों में श्रमिक चेतना केन्द्र स्थापित करेंगे। श्रमिक चेतना केन्द श्रमिकों द्वारा स्वेच्छा से उपलब्ध कराए गए स्थान पर कार्यरत रहेगा।

3. प्रत्येक केन्द्र की एक कार्यकारिणी समिति होगी, जिसमें उस पंचायत के अन्तर्गत आनेवाले गॉवों के श्रमिक सदस्य रहेंगे। कार्यकारिणी समिति के सदस्यों की संख्या कम-से-कम 10 रहेगी। श्रमिक चेतना सैनिक कार्यकारिणी समिति के सचिव के रूप में भी काम करेंगे। 4. 'श्रमिक चेतना सैनिकों' को श्रम संसाधन विभाग द्वारा समय-समय पर न्यूनतम मजदूरी तथा श्रमिकों के कल्याण से संबंधित सूचना एवं सामग्रियॉ उपलब्ध करायी जायेगी। उनसे यह अपेक्षा की जायेगी कि वे उन सूचनओं की जानकारी चेतना केन्द्र की कार्यकारिणी समिति के माध्यम से उक्त पंचायत के सभी श्रमिकों तक पहूॅचाएॅ। उक्त सामग्रियॉ श्रमिक चेतना केन्द्रों में भी सर्वसुलभ रहेगी।

5. श्रमिक चेतना सैनिक से अपेक्षा होगी कि वे समय-समय पर श्रमिक चेतना केन्द्र में पंचायत के श्रमिकों की बैठकें कर उन्हें जागरूक बनाने का कार्य करेंगे। इस प्रकार के कार्यक्रमों में श्रम प्रवत्र्तन पदधिकारी अनिवार्य रूप से भाग लेंगे।

6. यदि कोई श्रम चेतना सैनिक कार्य में रूचि नहीं रखता हो तो उपरोक्त कार्यकारिणी समिति उसके स्थान पर किसी अन्य श्रमिक को श्रमिक चेतना सैनिक के रूप में नामित कर सकेगी।

7. श्रमिक चेतना सैनिक एवं श्रमिक चेतना केन्द्र की व्यवस्था पूरी तरह से स्वैच्छिक आधार पर होगी तथा इस हेतु सरकार द्वारा कोई निधि उपलब्ध नहीं कराई जायेगी। आशा की जाती है कि श्रमिक चेतना सैनिक चयन के समय संबंधितों को इस तथ्य से अवगत करा दिया जायेगा।

8. श्रम प्रवत्र्तन पदाधिकारी एवं श्रम संसाधन विभाग के अन्य पदाधिकारियों का यह दायित्व होगी कि जब कभी वे क्षेत्रीय भ्रमण अथवा प्रवत्र्तन हेतु क्षेत्रों में जाएॅ तो अनिवार्य रूप से श्रमिक चेतना सैनिक एवं कार्यकारिणी के सदस्यों की बैठक करें तथा उनहे जागरूक बनाने का कार्य करें।

9. श्रम प्रवत्र्तन पदाधिकारी/श्रमाधीक्षक, श्रमिक चेतना सैनिक/केन्द्रों के निरंतर सम्पर्क में रहेंगे।

10. इस बात की सम्भावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि श्रमिक चेतना सैनिक/ कार्यकारिणी समिति के सदस्य न्यूनतम मजदूरी का उल्लधन करने वाले किसानों एवं अन्य नियोजकों की ईष्र्या/षडयंत्र का शिकार बन जाय तथा प्रताड़ित किए जाए। अतएव प्रत्येक पंचायत के श्रमिक चेतना सैनिकों की सूची उस जिले के श्रम अधीक्षक द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, थाना प्रभारी एवं उक्त पंचायत के मुखिया/सरपंच/पंचायत सचिव को उपलब्ध कराया जायेगा तथा अनुरोध किया जाय कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी दशा में नियोजकों द्वारा श्रमिक चेतना सैनिक अथवा कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को प्रताड़ित नही किया जाय। साथ ही यदि उन्हें प्रताड़ित करने की सूचना मिले तो उस पर त्वरित कार्रवाई करें तथा उन्हें समुचित सुरक्षा प्रदान किया जाय।3 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 31 fnlEcj 2008 आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के असाधरण अंक में प्रकाशित कराया जाय और इसकी प्रतियॉ सभी विभाग/सभी विभागाघ्यक्ष/सभी प्रमंडलीय आयुक्त/सभी जिला पदाधिकारी/सभी आरक्षी अधीक्षक/सभी उप विकास आयुक्त को उपलब्ध करायी जाय।

सं0 5/एम0डव्ल्ूा0-2031/2008श्र0सं0 बिहार-राज्यपाल के आदेश से, नन्दजी राम, सरकार के सयुंक्त सचिव।

———— अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु*ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 596-571+500-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 31 December 2008. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2008-12-31.596/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2008-12-31.596.