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अध्सिूचना
3 मार्च 2009
सं∫वि∫स∫वि∫-01/2009-527/वि∫स∫—''बिहार राजकोषीय उ½ारदायित्व और बजट प्रबंध्न ;संशोध्नद्ध विध्ेयक, 2009'', जो बिहार विधन सभा में दिनांक 3 मार्च, 2009 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन-सभा की प्रिÕया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 116 के अन्तर्गत उ∞ेश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है।== =
सुरेन्‹ प्रसाद शर्मा,
सचिव,
बिहार विधन सभा, पटना।2 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 17 माच. 2009
[वि॰स॰वि॰-04/2009वि॰स॰वि॰-04/2009वि॰स॰वि॰-04/2009वि॰स॰वि॰-04/2009]
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राजकोषीय प्रबंधन के लिए वित्तीय वर्ष 2008-09 तक राजस्व घाटा को समाप्त करने एवं राजकोषीय घाटा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत स्तर पर बनाये रखने हेतु निर्धारित राजकोषीय लक्ष्य को संशोधित करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के साठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ ।—(1) यह अधिनियम बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2009 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा ।
(3) यह उस तिथि से प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा राजपत्र में इस निमित्त नियत करे ।
2. बिहार अधिनियम 5, 2006 की धारा-3 में संशोधन ।—बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम 5, 2006) की धारा 3 'क' में उल्लिखित ''वित्तीय वर्ष 2008-09 से सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत स्तर पर बनाये रखेगी'' को ''वित्तीय वर्ष 2008-09 के लिए सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन दशमलव पाँच (3.5) प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2009-10 से सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन (3) प्रतिशत स्तर पर बनाये रखेगी'' शब्दावली से प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
3. बिहार अधिनियम 5, 2006 की धारा-9 में संशोधन ।— उक्त अधिनियम की धारा-9 (2)(ख) में 'और' के बाद उल्लिखित ''वर्ष 2008-09 तक राजकोषीय घाटा को घटाकर राजकोषीय घाटा को घटाकर स॰रा॰घ॰उ॰ के 3.5 प्रतिशत एवं वर्ष 2009-10 से राजकोषीय घाटा 3 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 17 माच. 2009
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राजकोषीय स्थायित्व एवं सम्पोषनीयता सुनिश्चित करने तथा पर्याप्त राजस्व अधिकोष की प्राप्ति कर राजकोषीय घाटे के लिये निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के निमित्त बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2006 को अधिनियमित किया गया था । उक्त् अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2008-09 के लिये निर्धारित राजकोषीय घाटा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3 (तीन) प्रतिशत से संशोधित कर 3.5 (तीन दशमलव पाँच) प्रतिशत करने के लिये संशोधन विधेयक लाया जा रहा है । इससे राज्य सरकार वर्ष 2008-09 में अतिरिक्त ऋण की उगाही कर सकेगी ।
सुशील कुमार मोदी,
भार-साधक सदस्य ।4 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 17 माच. 2009 उद्देश्य और हेतु उद्देश्य और हेतु उद्देश्य और हेतु उद्देश्य और हेतु
सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटे को वर्ष 2008-09 में तीन प्रतिशत तक बनाये रखने पर ''ऋण समेकन और राहत सुविधा'' (Debt Consolidation and Relief Facility) प्राप्त होते रहने की अनुशंसा 12वें वित्त आयोग द्वारा प्रतिपादित है और भारत सरकार द्वारा स्वीकृत है ।
भारत सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष (2008-09) में ऋण समेकन और राहत सुविधा मार्गदर्शन (DCRF Guidelines) को संशोधित कर राजकोषीय घाटा लक्ष्य को तीन दशमलव पाँच (3.5) प्रतिशत करने का निर्णय लिया है ।
अतएव, विकास कार्यो पर पूंजीगत व्यय में वृद्धि करने के उद्देश्य से, राज्य सरकार द्वारा लिये जाने वाले ऋणों/उधारों की सीमा को बढ़ाने के लिये, राजकोषीय घाटा की सकल राज्य घरेलू उत्पाद की प्रतिशत सीमा में संशोधन करना इस विधेयक का उद्देश्य है जिसे अधिनियमित कराना ही इसका अभीष्ट है ।
सुशील कुमार मोदी,
भार-साधक सदस्य ।
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———— अधी/क, सिचवालय मुिणालय,