िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 2 2 2 2 वैशाखवैशाखवैशाखवैशाख, , , , 1931931931931111 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 11114444 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ———————— 22222222 अूीलअूीलअूीलअूील,,,, 2009200920092009 ((((ईईईई0000)))) पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)1, पदःथापन, बदली, श(cid:18)1, छु 6ट(cid:15) और अ8य 9य(cid:18)1गत सूचनाएं। 2222----3333 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु=म? के समादेंटाओं के आदेश।
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भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन-एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Fाओं के पर(cid:15)Fा-फल, कायHबम, छाऽवृ(cid:18)K ूदान, आLद। ---
भाग-1 ग—िशFा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Fाफल आLद ---
भाग-2—(cid:18)बहार-राMयपाल और कायाHNयF? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आLद। 5555----8888 भाग-3—भारत सरकार, पQRम बंगाल सरकार और उTच 8यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राMय गजट? के उVरण।
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भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---
(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूची सूची सूची सूची
पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मX पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उZत (cid:18)वधान मंडल मX उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Lकये जानेवाले ूवर सिमितय?
के ूितवेदन और उZत (cid:18)वधान मंडल मX पुर:ःथापन के पूवH ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-7—संसद के अिधिनयम Qजनपर रांशपित क\ अनुमित िमल चुक\ है। ---
भाग-8—भारत क\ संसद मX पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मX उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय? के ूितवेदन और संसद मX उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय? के ूितवेदन और संसद मX पुर:ःथापन के पूवH ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-9—(cid:18)व]ापन ---
भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क\ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प^रवहन, सूचनाएं, 8यायालय सूचनाएं, और सवHसाधारण सूचनाएं इ_याLद।
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पूरक
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पूरक-क 9999----232323232 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009
भागभागभागभाग----1111
िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1, , , , छु 6ट(cid:15) और अ8यछु 6ट(cid:15) और अ8यछु 6ट(cid:15) और अ8यछु 6ट(cid:15) और अ8य वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
मामीण (cid:18)वकास (cid:18)वभाग
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अिधसूचना
13 अूील 2009
मा0(cid:18)व0-2/ःथा0-1-01/08-2890—(cid:18)बहार ूशासिनक सेवा के िनcनांLकत पदािधका^रय? का
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2. उZत ूःताव मX भारत िनवाHचन आयोग क\ अनाप(cid:18)K संसूिचत है ।
3. उपर क\ अिधसूचनाओं एवं इसके पूवH मX िनगHत अिधसूचनाओं मX कोई (cid:18)वरोधाभास हो तो वतHमान मX िनगHत अिधसूचना ह(cid:15) ूभावी होगी और एतj (cid:24)ारा उनसे संबंिधत पूवH के अिधसूचना (cid:18)वलो(cid:18)पत क\ जाती है ।
4. ःथानांत^रत/ पदःथा(cid:18)पत पदािधकार(cid:15) लोक सभा आम चुनाव को देखते हुए बगैर पारगमन काल का उपभोग Lकये अ(cid:18)वलंब (cid:18)वरिमत होकर अपने नव पदःथा(cid:18)पत ःथान पर योगदान देकर ूभार महण करXगे ।
(cid:18)बहार-राMयपाल के आदेश से,
(ह0)-अःपंट,
सरकार के उप-सिचव।3 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009
निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग (निबंधन)
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vf/klwpuk 9 vizhy 2009 सं॰ I / E1 – 703 / 2008-816/श्रीमती नीलिमा लाल, अवर निबंधक, लालगंज, जिला- वैशाली (हाजीपुर) को दिनांक- 18.02.08 से दिनांक- 04.03.08 तक कुल 16 (सोलह) दिनों की उपार्जित अवकाश की स्वीकृति बिहार सेवा संहिता के नियम 227, 228, 230, 232 एवं 248 के अंतर्गत व्यक्तिगत कारणों से दी जाती है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, एन. विजयलक्ष्मी, निबंधन महानिरीक्षक।
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निर्वाचन विभाग
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अधिूसचना
6 अप्रील 2009
सं0-ई2-215/90-43-4073—बिहार सेवा संहिता के नियम-227 एवं 248 में निहित प्रावधानों के अन्तर्गत श्री सुधाकर प्रसाद, तदेन अवर निर्वाचन पदाधिकारी, बिहारषरीफ अनुमंडल, नालन्दा (सम्प्रति बक्सर अनुमंडल, बक्सर में पदस्थापित) को दिनांक 10.11.2007 से 03.01.2008 तक (कुल 55 दिन) उपार्जित अवकाष की स्वीकृति दी जाती है। 2. इस प्रस्ताव में आंतरिक वित्तीय सलाहकार की सहमति एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार-सह-सरकार के प्रधान सचिव, निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राम कृश्ण प्रसाद, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार -सह-सरकार के उप सचिव।
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अधीFक, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुLित। (cid:18)बहार गजट, 5Ñ571+50-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।4 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 5 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009
भागभागभागभाग----2222
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राMयराMयराMयराMयपाल और कायाHNयपाल और कायाHNयपाल और कायाHNयपाल और कायाHNयF? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमF? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमF? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमF? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेश आदेश आदेश आदेश अिधसूचनाएं और िनयम आLद।अिधसूचनाएं और िनयम आLद।अिधसूचनाएं और िनयम आLद।अिधसूचनाएं और िनयम आLद। ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
गृह (विषेष) विभाग
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अधिसूचना
13 अप्रील 2009
सं॰ के/कारा-रा0प0-33/05-2143—श्री विष्वनाथ प्रसाद नं-2, काराधीक्षक (सम्प्रति सेवानिवृत्त) पर अधीक्षक, मंडल कारा, सहरसा के पद पर पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितताओं की जांच हेतु विभागीय अधिसूचना सं0-13390, दिनांक 19.9.06 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई थी और प्रमंडलीय आयुक्त, कोषी प्रमंडल,सहरसा को संचालन पदाधिकारी तथा अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, भागलपुर को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया था। 2. श्री प्रसाद दिनांक 30-9-2008 को अधीक्षक, मंडल कारा, समस्तीपुर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, परन्तु उक्त विभागीय कार्यवाही लंबित है। 3. अतएव प्रासंगिक विभागीय कार्यवाही को दिनांक 1-10-2008 के प्रभाव से बिहार पेंषन नियमावली के नियम 43बी0 के तहत संचालनार्थ परिवर्तित किया जाता है। संचालन पदाधिकारी एवं प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी पूर्ववत् रहेंगें।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, मो0 सउद, सरकार के उप सचिव।
———
मुख्य अभियंता उत्तर का कार्यालय
नलकूप प्रभाग, लघु जल संसाध्न-विभाग, मुजफ्रपफरपुर।
———
कार्यालय-आदेश
5 मार्च 2009 संख्याः-स्था¥-3, बी-8/2008-287—सरकार के अवर सचिव, लघु सिंचाई विभाग, बिहार, पटना का पत्राांक-1661 दिनांक 2.4.07 में निहित सरकार के आदेश के अनुपालन में स्व¥ राम बाबू प्रसाद, भूतपूर्व खलासी, नलकूप प्रमण्डल, सीतामढ़ी के आश्रित पुत्रा श्री दिलीप कुमार को नलकूप प्रमण्डल, मध्ुबनी के अन्तर्गत निम्न वर्गीय लिपिक के रिक्त पद पर अस्थायी रूप से वेतनमान 3050-75-3950-80-4590 रूपयें तथा सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अन्य भत्तों के साथ अनुकम्पा के आधर पर औपबंध्कि रूप से नियुक्त किया जाता है, जिसे बिना कारण बताये रद्द किया जा सकता है।
2-श्री दिलीप कुमार पत्रा प्राप्ति के 15 दिनों के अन्दर निश्चित रूप से अपने नव नियुक्त पद पर योगदान देंगे। योगदान के समय इन्हें किसी असैनिक शल्य चिकित्सक/जिला चिकित्सा पदाध्किारी द्वारा प्रदत्त स्वास्थता प्रमाण-पत्रा, आय प्रमाण पत्रा, विवाह में तिलक दहेज का लेन-देन नहीं करना, न्यायालय में सजा प्राप्ति नहीं होने, न्यायालय में पफौजदारी मुकदमा लम्बित नहीं रहने तथा स्व¥ राम बाबू प्रसाद के परिवार के आश्रित सदस्यों का भरण-पोषण करने संबंध्ी अद्यतन शपथ-पत्रा आदि मूल कागजात कार्यपालक अभियंता नलकूप प्रमण्डल, मध्ुबनी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जाflच कार्यपालक अभियंता करेगें तथा इसे सही पाये जाने पर ही योगदान स्वीकृत किया जायेगा।
3-शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्रा/जिला अनुकम्पा समिति द्वारा अनुशंसित पत्रा का सत्यापन कार्यपालक अभियंता द्वारा करा ली जायेगीं।6 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 4-कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधर विभाग का परिपत्रा संख्या-13293 दिनांक-5.10.91 की कंडिका-1 ;खद्ध के अनुसार मृत सरकारी सेवक की नियुक्ति स्वीकृति पद के विरू( विध्वित की गई थी, का सत्यापन कार्यपालक अभियंता द्वारा करा लिया जायेगा।
5-कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधर विभाग का परिपत्रा संख्या-13293 दिनांक-5.10.91 की कंडिका-7 के अनुसार नियुक्त किये जा रहे व्यक्ति के विरू( यदि मृतक सरकारी सेवक के आश्रित परिवार के भरण-पोषण में किसी प्रकार की त्राुटि पाई जायेगी तो नियुक्ति पदाध्किारी द्वारा पृच्छा प्राप्त कर इनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी। इस संबंध् में श्री दिलीप कुमार को योगदान के समय वर्णित अनुदेश के अनुरूप एक घोषणा पत्रा भी कार्यपालक अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसे कार्यपालक अभियंता श्री दिलीप कुमार की सेवा पुस्तिका में दर्ज कर सुरक्षित रखेंगे।
6-गलत तथ्यों अथवा कागजातों के आधर पर नियुक्ति होने की सूचना अगर बाद में प्राप्त होती है तों किसी भी समय कारण पृच्छा नोटिश देते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी।
7-तिलक दहेज नहीं लेने और न देने संबंध्ी एक घोषणा पत्रा भी नियुक्ति किये जा रहें व्यक्ति को कार्यपालक अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
8-यदि यह नियुक्ति रोस्टर व्यवस्था के आरक्षित बिन्दु के विरू( पड़ता है तो उसे अग्रणीत कर लिया जायेगा। 9-इन्हे छः माह के अन्दर कम्प्युटर टाईपिंग का ज्ञान आवश्यक है अन्यथा इनकी नियुक्ति समाप्ति हेतु कारवाई की जायेगी।
10- योगदान करने हेतु श्री दिलीप कुमार को यात्राा-भत्ता देय नहीं होगा।
11- वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1964 दिनांक-31.08.05 में निहित अंशदायी पेंशन योजना संबंध्ी प्रावधन लागू होगें।
विश्वनाथ चौध्री,
मुख्य अभियंता ;उत्तरद्ध। ———
मुख्य अभियंता उत्तर का कार्यालय
नलकूप प्रभाग, लघु जल संसाध्न-विभाग, मुजफ्रपफरपुर।
———
कार्यालय-आदेश
6 अप्रील 2009 संस्था∫-3, बी-21/ 2008-497—सरकार के अवर सचिव, लघु सिंचाई विभाग, बिहार, पटना का पत्राांक-1661 दिनांक 2.4.07 में निहित सरकार के आदेश के अनुपालन में स्व¥ तिलक राय, भूतपूर्व मेट, नलकुप प्रमण्डल, समस्तीपुर के आश्रित पुत्रा - श्री शिव नारायण कुमार पाल को नलकूप प्रमण्डल, खगड़िया के अन्तर्गत निम्न वर्गीय लिपिक के रिक्त पद पर अस्थायी रूप से वेतनमान 3050-75-3950-80-4590 रूपयें तथा सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अन्य भत्तों के साथ अनुकम्पा के आधर पर औपबंध्कि रूप से नियुक्त किया जाता है, जिसे बिना कारण बताये रद्द किया जा सकता है।
2-श्री शिव नारायण कुमार पाल पत्रा प्राप्ति के 15 दिनों के अन्दर निश्चित रूप से अपने नव नियुक्त पद पर योगदान देंगे। योगदान के समय इन्हें किसी असैनिक शल्य चिकित्सक/जिला चिकित्सा पदाध्किारी द्वारा प्रदत्त स्वास्थता प्रमाण-पत्रा, आय प्रमाण पत्रा, विवाह में तिलक दहेज का लेन-देन नहीं करना, न्यायालय में सजा प्राप्ति नहीं होने, न्यायालय में पफौजदारी मुकदमा लम्बित नहीं रहने तथा स्व¥ तिलक राय के परिवार के आश्रित सदस्यों का भरण-पोषण करने संबंध्ी अद्यतन शपथ-पत्रा आदि मूल कागजात कार्यपालक अभियंता नलकूप प्रमण्डल, खगड़िया के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जाflच कार्यपालक अभियंता करेगें तथा इसे सही पाये जाने पर ही योगदान स्वीकृत किया जायेगा।
3-शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्रा/जिला अनुकम्पा समिति द्वारा अनुशंसित पत्रा का सत्यापन कार्यपालक अभियंता द्वारा कर ली जायेगीं।7 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 4-कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधर विभाग का परिपत्रा संख्या-13293 दिनांक-5.10.91 की कंडिका-1 ;खद्ध के अनुसार मृत सरकारी सेवक की नियुक्ति स्वीकृति पद के विरू( विध्वित की गई थी, का सत्यापन कार्यपालक अभियंता द्वारा कर ली जायेगी।
5-कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधर विभाग का परिपत्रा संख्या-13293 दिनांक-5.10.91 की कंडिका-7 के अनुसार नियुक्त किये जा रहे व्यक्ति के विरू( यदि मृतक सरकारी सेवक के आश्रित परिवार के भरण-पोषण में किसी प्रकार की त्राुटि पाई जायेगी तो नियुक्ति पदाध्किारी द्वारा पृच्छा प्राप्त कर इनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी। इस संबंध् में श्री शिव नारायण कुमार पाल को योगदान के समय वर्णित अनुदेश के अनुरूप एक घोषणा पत्रा भी कार्यपालक अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसे कार्यपालक अभियंता श्री शिव नारायण कुमार पाल की सेवा पुस्तिका में दर्ज कर सुरक्षित रखेंगे।
6-गलत तथ्यों अथवा कागजातों के आधर पर नियुक्ति होने की सूचना अगर बाद में प्राप्त होती है तों किसी भी समय कारण पृछा नोटिश देते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी।
7-तिलक दहेज नहीं लेने और न देने संबंध्ी एक घोषणा पत्रा भी नियुक्ति किये जा रहे व्यक्ति को कार्यपालक अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
8-यदि यह नियुक्ति रोस्टर व्यवस्था के आरक्षित बिन्दु के विरू( पड़ता है तो उसे अग्रणीत कर लिया जायेगा। 9-इन्हे छः माह के अन्दर कम्प्युटर टाईपिंग का ज्ञान आवश्यक है अन्यथा इनकी नियुक्ति समाप्ति हेतु कारवाई की जायेगी।
10-योगदान करने हेतु श्री शिव नारायण कुमार पाल को यात्राा-भत्ता देय नहीं होगा।
11-वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1964 दिनांक-31.08.05 में निहित अंशदायी पेंशन योजना संबंध्ी प्रावधन लागू होगें।
विश्वनाथ चौध्री,
मुख्य अभियंता ;उत्तरद्ध। ———
मुख्य अभियंता उत्तर का कार्यालय
नलकूप प्रभाग, लघु जल संसाध्न-विभाग, मुजफ्रपफरपुर।
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कार्यालय-आदेश
6 अप्रील 2009 संस्था∫-3, बी-45/ 2008-498—सरकार के अवर सचिव, लघु सिंचाई विभाग, बिहार, पटना का पत्राांक-1661 दिनांक 2.4.07 में निहित सरकार के आदेश के अनुपालन में स्व¥ हरि किशोर सिंह भूतपूर्व नलकूप चालक नलकुप प्रमण्डल, गोपालगंज के आश्रित पुत्राी - सुश्री नीतु कुमारी को नलकूप प्रमण्डल, सिवान के अन्तर्गत निम्न वर्गीय लिपिक के रिक्त पद पर अस्थायी रूप से वेतनमान 3050-75-3950-80-4590 रूपयें तथा सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अन्य भत्तों के साथ अनुकम्पा के आधर पर औपबंध्कि रूप से नियुक्त किया जाता है, जिसे बिना कारण बताये रद्द किया जा सकता है।
2-सुश्री नीतु कुमारी पत्रा प्राप्ति के 15 दिनों के अन्दर निश्चित रूप से अपने नव नियुक्त पद पर योगदान देंगे। योगदान के समय इन्हें किसी असैनिक शल्य चिकित्सक/जिला चिकित्सा पदाध्किारी द्वारा प्रदत्त स्वास्थता प्रमाण-पत्रा, आय प्रमाण पत्रा, विवाह में तिलक दहेज का लेन-देन नहीं करना, न्यायालय में सजा प्राप्ति नहीं होने, न्यायालय में पफौजदारी मुकदमा लम्बित नहीं रहने तथा स्व¥ हरि किशोर सिंह के परिवार के आश्रित सदस्यों का भरण-पोषण करने संबंध्ी अद्यतन शपथ-पत्रा आदि मूल कागजात कार्यपालक अभियंता नलकूप प्रमण्डल, सिवान के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जाflच कार्यपालक अभियंता करेगें तथा इसे सही पाये जाने पर ही योगदान स्वीकृत किया जायेगा।
3-शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्रा/जिला अनुकम्पा समिति द्वारा अनुशंसित पत्रा का सत्यापन कार्यपालक अभियंता द्वारा कर ली जायेगीं।8 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 4-कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधर विभाग का परिपत्रा संख्या-13293 दिनांक-5.10.91 की कंडिका-1 ;खद्ध के अनुसार मृत सरकारी सेवक की नियुक्ति स्वीकृति पद के विरू( विध्वित की गई थी, का सत्यापन कार्यपालक अभियंता द्वारा कर ली जायेगी।
5-कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधर विभाग का परिपत्रा संख्या-13293 दिनांक-5.10.91 की कंडिका-7 के अनुसार नियुक्त किये जा रहे व्यक्ति के विरू( यदि मृतक सरकारी सेवक के आश्रित परिवार के भरण-पोषण में किसी प्रकार की त्राुटि पाई जायेगी तो नियुक्ति पदाध्किारी द्वारा पृच्छा प्राप्त कर इनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी। इस संबंध् में सुश्री नीतु कुमारी को योगदान के समय वर्णित अनुदेश के अनुरूप एक घोषणा पत्रा भी कार्यपालक अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसे कार्यपालक अभियंता सुश्री नीतु कुमारी की सेवा पुस्तिका में दर्ज कर सुरक्षित रखेंगे।
6-गलत तथ्यों अथवा कागजातों के आधर पर नियुक्ति होने की सूचना अगर बाद में प्राप्त होती है तों किसी भी समय कारण पृछा नोटिश देते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी।
7-तिलक दहेज नहीं लेने और न देने संबंध्ी एक घोषणा पत्रा भी नियुक्ति किये जा रहे व्यक्ति को कार्यपालक अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
8-यदि यह नियुक्ति रोस्टर व्यवस्था के आरक्षित बिन्दु के विरू( पड़ता है तो उसे अग्रणीत कर लिया जायेगा। 9-इन्हे छः माह के अन्दर कम्प्युटर टाईपिंग का ज्ञान आवश्यक है अन्यथा इनकी नियुक्ति समाप्ति हेतु कारवाई की जायेगी।
10-योगदान करने हेतु सुश्री नीतु कुमारी को यात्राा-भत्ता देय नहीं होगा।
11-वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1964 दिनांक-31.08.05 में निहित अंशदायी पेंशन योजना संबंध्ी प्रावधन लागू होगें।
विश्वनाथ चौध्री,
मुख्य अभियंता ;उत्तरद्ध।
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अधीFक, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुLित। (cid:18)बहार गजट, 5Ñ571+200-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।9 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट काकाकाका पुरकपुरकपुरकपुरक((((अअअअ0000)))) ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत
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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचनाएं
17 दिसम्बर 2008
सं॰-22/नि0सि0(देव0)-10-06/99/1008—श्री रजनीकान्त राय शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, कुंडहित सम्प्रति सेवा निवृत को कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय आदेश सं0-904 दिनांक 5.12.2001 द्वारा निम्न दण्ड संसचूति किया गया था।
(1) निन्दन वर्ष 1998-99 (2) संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक। (3) निलंबन अवधि में जीवन यापन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा किन्तु पेंशन के प्रयोजनार्थ उक्त अवधि की गणना की जाएगी।
श्री शर्मा द्वारा उक्त दण्डादेश के विरूद्व माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर सी0डब्ल्ू0जे0सी0सं0-4855/02 में दिनांक 30.6.2006 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-627 दिनांक 26.06.2007 द्वारा विभागीय दण्डादेश सं0-904 दिनांक 5.12.2001 को इस शर्त के साथ निरस्त किया गया था कि यह आदेश विभाग द्वारा इस मामले में दायर किये जाने वाले एल0पी0ए0 के फलाफल से प्रभावित होगा। लेकिन विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के संदर्भ में एल0पी0ए0 दायर नहीं किया जा सका। मामले की पुर्नसमीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त उक्त वर्णित याचिका में पारित न्याय निर्णय का अनुपालन करने का निर्णय लिया गया।
वर्णित स्थिति में विभागीय अधिसूचना सं0-627 दिनांक 26.6.2007 में वर्णित शर्त ''यह आदेश विभाग द्वारा दायर किये जाने वाले एल0पी0ए0 से प्रभावित होगा'' को समाप्त किया जाता है। शेष यथावत रहेगा।
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23 दिसम्बर 2008
सं॰ 22/नि0सि0(यॉ0)-4-132/94/1036—श्री नेत राय,, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, (यांत्रिक) (सम्प्रति सेवा निवृत), यांत्रिक प्रमण्डल, मोहम्मदगंज के कार्यकाल (अगस्त 88 से दिसम्बर 89) तक में बिना प्राक्कलन की स्वीकृति के लाखो रूपये का सामान डी0 जी0 एस0 एण्ड डी0 रेट पर क्रय करने के आरोपों के लिए श्री राय के विरूद्व बिहार पेंशन निियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गयी। विभागीय कार्यवाही में आरोप प्रमाणित होने के फलस्वरूप विभागीय ज्ञापांक-2577 दिनांक 26.8.97 द्वारा श्री नेत राय को शत प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक का दण्ड संसूचित किया गया। दण्ड संसूचित होने के लगभग आठ वर्षो के पश्चात श्री राय द्वारा दण्डादेश के विरूद्व विभाग में अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। प्राप्त अपील अभ्यावेदन पर सरकार के स्तर पर सम्यक समीक्षा की गयी। समीक्षा के क्रम में अपील अभ्यावेदन कालंबाधित होने के फलस्वरूप उसे अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। श्री नेत राय, तत्कालीन कार्यपालक10 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 अभियन्ता (यांत्रिक) का विभागीय दण्डादेश के विरूद्व अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने के प्रस्ताव पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय, बिहार, पटना का अनुमोद न प्राप्त है। उक्त निर्णय श्री नेत राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता (यांत्रिक) सम्प्रति सेवानिवत को संसूचित किया जाता है।
बिहार राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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23 दिसम्बर 2008
सं॰ 22/नि0सि0(यॉ0)-4-111/94/1037——श्री भोलन चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, (यांत्रिक) द्वारा वर्ष 1987-88 में यांत्रिक प्रमण्डल, पॅाकी, श्0ि-मोहम्मदगंज (पलामू) के पदस्थापन अवधि में बरती गयी अनियमितता दायत्वि समिति के सामने जिन विपत्रों को नहीं रखा गया उन्हें पुनः सी0 पी0 सी0 नोटिस प्राप्त होने के पश्यात 12 लाख का क्लेम को सही पाकर उच्चाधिकारियों को अग्रसारित करना। जब दायित्व समिति के द्वारा 56 लाख का भुगतान हो चुका था तो पुनः इसको अग्रसारित करने के पहले पूर्ण छानबीन नहीं करने संबंधी आरोपों के लिए उड़नदस्तमा से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया आरोप प्रमाणित पाये जाने के फलस्वरूप सविल सर्विसेज (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) रूल्स के नियम-55ए के तहत विभागीय पत्रांक 2647 दिनांक 13.9.94 द्वारा आरोप गठित कर स्पष्टीकरण पूछा गया। इस बीच श्री चौधरी दिनांक 31.01.98 को सेवानिवृत हो गये। उक्त कारवाई को विभागीय आदेश सं0-1099 दिनांक 16.9.98 सह पठित ज्ञापांक- 2692 दिनांक 16.2.98 के द्वारा उनके सेवा निवृति के पश्चात बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत कारवाई हेतु जारी रखते हुए 43 (बी) में परिवर्तित किया गया। श्री चौधरी से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त श्री भोलन चौधरी, कार्यपालक अभियन्ता, (यांत्रिक) के विरूद्व निम्नांकित आरोप पाया गयाः- '' दायित्व समिति के सामने जिन विपत्रों को नहीं रखा गया उन्हें पुनः सी0 पी0 सी0 नोटिस प्राप्त होने के पश्यात 12.00 लाख रूपये के क्लेम को सही पाकर उच्चाधिकारियों को अग्रसारित करना। जब दायित्व समिति द्वारा 56.00 लाख रूपये का भुगतान हो चुका था तो पुनः इसको अग्रसारित करने के पूर्व पूर्ण छानबीन नहीं करना जिसके आधार पर 8.47 लाख का भुगतान बाद में होना''ं उपर्युक्त वर्णित प्रमाणित आरोपों के लिए इन्हें दोषी पाते हुए निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गयाः- '' श्री भोलन चौधरी कार्यपालक अभियन्ता (यांत्रिक) सेवानिवृत 31.01.98 को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत 100 प्रतिशत पेंशन पर । एक वर्ष तक रोक''। उक्त दण्ड श्री चौधरी को विभागीय आदेश सं0-1185 दिनांक 10.10.98 सह पठित ज्ञापांक- 2872 दिनांक 10.10.98 द्वारा संसूचित किया गया। उपर्युक्त दण्ड के विरूद्व श्री चौधरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-11616/98 दायर किया गया। दिनांक 10.9.99 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मामले में न्यायादेश पारित किया जिसमें दण्डादेश को निरस्त कर दिया गया। विभाग द्वारा उक्त न्याय निर्णय के विरूद्व माननीय न्यायालय में एल0 पी0 ए0-1534/99 दायर किया गया। दिनांक 13.5.2008 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा एल0पी0ए0 डिसमिस कर दिया गया। उक्त वर्णित स्थिति में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा एल0 पी0 ए0 1534/99 दिनांक 13.5.2008 में पारित न्यायादेश के अनुपालन के क्रम में विभागीयच आदेश सं0-1185 दिनांक 10.10.2008 को निरस्त किया जाता है। उक्त निर्णय श्री भोलन चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता (यांत्रिक) सेवानिवृत को संससूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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31 दिसम्बर 2008
सं॰ 22/नि0सि0(पट0)-3-05/06/1050—श्री राम लखन महतों, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, जल पथ प्रमण्डल, जहानाबाद के द्वारा वर्ष 2004-05, 2005-06 में बरती गयी कतिपय अनियमितताओं यथा कार्य सम्पादन में गुणवता एवं विशिष्टि का ध्यान नही रखना जॉचदल को मापपुस्त साईड ऑडर बुक एवं अन्य अभिलेख को उपलब्ध नहीं कराने एवं उच्चधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण के क्रम में दिये गये आदेश का समुचित अनुपालन नहीं करने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय पत्रांक 1007 दिनांक 26.9.2006 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री महतों से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा के क्रम में श्री महतो के विरूद्व जॅाच दल को स्थल पर अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने का आरोप प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री महतो को सरकार द्वारा निम्नदण्ड देने का निर्णय लिया गयाः- (1) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।11 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 उक्त दण्ड श्री महतों, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, जल पथ प्रमण्डल, जहानाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता गुण नियंत्रण प्रमंडल, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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31 दिसम्बर 2008
सं॰ 22/नि0सि0(पट0)-3-05/06/1051—श्री अशोक कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, जल पथ प्रमण्डल, जहानाबाद के द्वारा वर्ष 2003-04, 2004-05 एवं 2005-06 में बरती गयी कतिपय अनियमितताओं यथा कार्य सम्पादन में गुणवता एवं विशिष्टि का नजरअंदाज कर आवेदक को लाभ पहुचाने, उच्चधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण के क्रम में दिये गये निदेश का समुचित अनुपालन नहीं करना एवं कर्तव्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन न करने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण,नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय पत्रांक 1006 दिनांक 26.9.2006 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा के क्रम में श्री कुमार के विरूद्व जॅाच दल को स्थल पर अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने का आरोप प्रमाणित पाया गया।
उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री कुमार को सरकार द्वारा निम्नदण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गयाः- (1) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त दण्ड श्री कुमार तत्कालीन सहायक अभियन्ता, जल पथ प्रमण्डल, जहानाबाद सम्प्रति अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, जल पथ प्रमण्डल, एकंगरसराय, नालन्दा को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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31 दिसम्बर 2008
सं॰ 22/नि0सि0(पट0)-3-05/06/1052—श्री देवानन्द कुुंवर, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, जल पथ प्रमण्डल, जहानाबाद के द्वारा वर्ष 2003-04, 2004-05 में बरती गयी कतिपय अनियमितताओं यथा कार्य के सम्पादन में गुणवता एवं विशिष्टि का ध्यान नहीं रखा जाना परिणामस्वरूप नहर बैंक क्षतिग्रस्त होने तथा गुण नियंत्रण प्रमण्डल से जॅाच प्रतिवेदन प्राप्त किये वगैर कम्पेन्शेन मद में शत प्रतिशत राशि का भुगतान करने के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक ( वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय पत्रांक 1008 दिनांक 26.9.2006 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री कुंवर से प्राप्त स्पष्टीिकरण की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। उनके द्वारा कराये गये कार्य के गुणवत्ता की जॅाच गवेषण संस्थान ,खगौल से करायी गयी जिसमें कार्य की गुणवत्ता सही पायी गयी। इस आधार पर श्री कुंवर के स्पष्टीकरण को स्वीकृत करते हुए सरकार द्वारा इन्हें दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय, श्री देवानन्द कुंवर, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, जल पथ प्रमण्डल, जहानाबाद को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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16 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-02/01/27—श्री जगदीश प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल तारापुर/लक्ष्मीपुर से उनके उक्त पदस्थापन अवधि, वर्ष 1999-2000 एवं 2000-01 के दौरान बरती गयी कतिपय अनियमिततओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंट््रोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम -55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक 171, दिनांक 7.2.2003 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।
2. श्री सिन्हा से प्राप्त स्पष्टीकरण के जबाब की समीक्षाा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री जगदीश प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है। (क) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त निर्णय श्री जगदीश ्रपसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है। 12 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009
16 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-02/01/28—श्री उपेन्द्र, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल तारापुर से उनके उक्त पदस्थापन अवधि, वर्ष 1999-2000 एवं 2000-01 के दौरान बरती गयी कतिपय अनियमिततओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंट््रोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम -55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक 169 दिनांक 7.2.2003 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। 2. श्री उपेन्द्र से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षाा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री उपेन्द्र, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है।
(क) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त निर्णय श्री उपेन्द्र, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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16 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-02/01/29—श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-1, लक्ष्मीपुर से उनके उक्त पदस्थापन अवधि, वर्ष 1999-2000 एवं 2000-01 के दौरान बरती गयी कतिपय अनियमिततओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के दौरान बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंट््रोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम -55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक उ172 दिनांक 7.2.2003 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। 2. श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरणा के जबाब की समीक्षाा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है।
(क) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त निर्णय श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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22 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/03/34—श्री देवेन्द्र झा तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल भागलपुर से उनके पदस्थापन अवधि वर्ष 2000-01 के दौरान बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंटर््ोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम-55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक-336 दिनांक 10.6.2004 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री झा से प्राप्त स्पष्टीकरण के जबाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री झा को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः-
(क) निन्दन वर्ष 2000 -01 (ख) दो वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक । उक्त निर्णय श्री देवेन्द्र झा, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
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22 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/03/35—श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, सिकन्दरा से उनके पदस्थापन अवधि वर्ष 2000-01 के दौराान बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंटर््ोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम-55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक-353 दिनांक 10.06.04 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। सरकार द्वारा पर्याप्त समय प्रदान किये जाने के बावजुद श्री सिन्हा द्वारा स्पष्टीकरण का जबाव विभाग को उपलब्ध नहीं कराया गया। फलस्वरूप मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री सिन्हा को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है।
(क) निन्दन 2000-0113 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 (ख) दो वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक । उक्त निर्णय श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियन्ता सिंचाई प्रमण्डल सिकन्दरा को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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22 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/03/36—श्री अवधेश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल भागलपुर से उनके पदस्थापन अवधि वर्ष 2000-01 के दौराान बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंटर््ोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम-55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक-368 दिनांक 21.06.04 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के जबाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री कुमार को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः-
(क) निन्दन वर्ष 2000 -01 (ख) दो वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक । उक्त निर्णय श्री अवधेश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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22 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/03/37—श्री सुरेश प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल भागलपुर से उनके पदस्थापन अवधि वर्ष 2000-01 के दौराान बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंटर््ोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम-55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक-336 दिनांक 10.6.2004 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण के जबाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री प्रसाद को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः-
(क) निन्दन वर्ष 2000 -01 (ख) दो वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक । उक्त निर्णय श्री सुरेश प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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22 जनवरी 2009
अधिसूचना संख्या-22/नि0सि0(भाग0)-09-05/03/38—श्री विजय कुमार सिंह तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल भागलपुर से उनके पदस्थापन अवधि वर्ष 2000-01 के दौराान बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंटर््ोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम-55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक-337, दिनांक 10.6.2004 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।
श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण के जबाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री सिंह को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः-
(क) निन्दन वर्ष 2000 -01 (ख) दो वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक । उक्त निर्णय श्री विजय कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता अभियन्ता को संसूचित किया जाता है। 14 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009
22 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/03/39—श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, तारापुर/लक्ष्मीपुर से उनके पदस्थापन अवधि वर्ष 2000-01 के दौराान बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंट्रोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम-55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक-335 दिनांक 10.06.04 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। सरकार द्वारा पर्याप्त समय प्रदान किये जाने के बावजुद श्री कुमार द्वारा स्पष्टीकरण का जबाव विभाग को उपलब्ध नहीं कराया गया। फलस्वरूप मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री कुमार को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है।
(क) निन्दन 2000-01 (ख) दो वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक । उक्त निर्णय श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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22 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/03/40—श्री परवेज अख्तर अंसारी, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल सिकन्दरा से उनके पदस्थापन अवधि वर्ष 2000-01 के दौराान बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंटर््ोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम-55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक-338, दिनांक 10.06.04 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।
श्री अंसारी से प्राप्त स्पष्टीकरण के जबाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री अंसारी को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः-
(क) निन्दन वर्ष 2000 -01 (ख) दो वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक । उक्त निर्णय श्री परवेज अख्तर अंसारी तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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22 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/03/41—श्री जगदीश प्रसाद सिन्हा तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, तारापुर/लक्ष्मीपुर से उनके पदस्थापन अवधि वर्ष 2000-01 के दौराान बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंटर््ोल एण्ड अपील) रूल्स 1956 के नियम-55'ए' के तहत विभागीय पत्रांक-328 दिनांक 10.06.04 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।
श्री सिन्हा से प्राप्त स्पष्टीकरण के जबाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री सिन्हा को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः-
(क) निन्दन वर्ष 2000 -01 (ख) दो वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक । उक्त निर्णय श्री जगदीश प्रसाद सिन्हा तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है। 15 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009
शुद्धि-पत्र
23 जनवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/03/42—जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सं0-34 ज्ञापांक-34 दिनांक 22.1.09 द्वारा श्री देवेन्द्र झा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई को संसूचित दण्ड के खण्ड ''ख'' में अंकित '' दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' के स्थान पर ''एक वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' पढ़ा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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11 फरवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(मुक0)-19-57/98/51—जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियन्ता श्री लक्ष्मी नारायण सिन्हा जब वर्ष 1990-91 में पश्चिमी तटबंध प्रमण्डल, निर्मली में पदस्थापित थें, तो उनके विरूद्व प्राप्त परिवाद पत्रों की जॅाच मुख्य अभियन्ता जल संसाधन विभाग, वीरपुर एवं विभागीय उड़़नदस्ता से करायी गई। प्राप्त जॅाच प्रतिवेेदनों की सम्यक समीक्षा विभागीय स्तर पर हुई। समीक्षोपरान्त निम्नलिख्ति प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्र सं0-2386 दिनांक 6.11.91 से स्पष्टीकरण श्री सिन्हा कार्यपालक अभियन्ता से पूछा गया :-
(क) वर्ष 1988-89 के दायित्व मद की 12,16,635/- का भुगतान नियमों तथा वरीय पदाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना कर किया गया।
(ख) जिन बाढ़ संधर्षात्मक कार्यो की वृहत शीर्ष 2711 (गैर-योजना) में उपलब्ध निधि से कराया जाना था उससे न कराकर अनाधिकृत रूप से व्यय का वहन वृहत शीर्ष-4711 (योजना मद) से किया गया। इस पुर्नविनियोग की शक्तियॅा कार्यपालक अभियन्ता को प्राप्त नहीं है।
उक्त आरोपों के संदर्भ में श्री सिन्हा, कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभाग एवं सरकार के स्तर पर हुई। श्री सिन्हा, कार्यपालक अभियन्ता का उत्तर तथ्यों पर आधारित न पाकर सरकार द्वारा उन्हें उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए निलंबित कर विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया। सरकार के इस निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-16 दिनांक-22.04.93 द्वारा उन्हें निलंबित किया गया एवं सिविल सर्विसेज (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली नियम 55 के तहत विभागीय कार्यवाही का संकल्प ज्ञापांक-940 दिनांक 30.4.93 द्वारा आरोप पत्र सहित निर्गत करते हुए विभागीय कार्यवाही चलायी गई।
श्री सिन्हा, कार्यपालक अभियन्ता के द्वारा उक्त निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही के आदेशो के विरूद्व माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-5496/93 दायर की गई। इस याचिका की सुनवाई के पश्यात माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निर्णय दिनांक 11.01.94 को पारित किया गया, जिसमें विभाग को निम्नरूपेण अगे्रतर कारवाई हेतु निर्देश दिया गयाः-
(1) आरोप पत्र आरोपी को दो सप्ताह में प्राप्त होना चाहिये। (2) वादी (आवेदक) को उत्तर एक सप्ताह के अन्दर देना है। (3) विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के लिए तीन माह समय सीमा निर्धारण अन्यथा निलंबन आदेश निरस्त हो जायेगा।
विभागीय कार्यवाही का जॅाच प्रतिवेदन विभाग को दिनांक 13.4.94 को प्राप्त हुआ। अतः माननीय उच्च न्यायालय के न्याय निर्णय के आलोक में चूॅकि विभागीय कार्यवाही के संदर्भ में सरकार का अंतिम निर्णय तीन माह के निर्धारित समय सीमा के अन्तर्गत नहीं हो सका। अतः विभागीय आदेश सं0-388 दिनांक 17.6.94 (ज्ञाप सं0-1757 दिनांक 17.6.94) द्वारा दिनांक 14.4.94 के प्रभाव से उन्हें निलंबन से मुक्त किया गया।
विभागीय कार्यवाही का जॉच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। जॅाच प्रतिवेदन में जॅाच पदाधिकारी द्वारा श्री सिन्हा, कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व उक्त दोनों आरोपों को प्रमाणित पाया गया। विभागीय समीक्षा में भी उक्त दोनों आरोप प्रमाणित पाये गये तदुपरान्त सरकार द्वारा श्री सिन्हा, कार्यपालक अभियन्ता को उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सेवा से बर्खास्त किये जाने का निर्णय लिया गया। सरकार के द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्र सं0-772 दिनांक 1.6.95 द्वारा श्री सिन्हा कार्यपालक अभियन्ता से द्वितीय कारण पृच्छा की गई जिसके उत्तर के लिए उन्हें एक पक्ष का समय सीमा निर्धारित किया गया। परन्तु अनेक स्मार के बाद द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर उनसे अप्राप्त रहा। पुनः इस मामले की समीक्षा विभाग एवं सरकार के स्तर पर हुई और कार्यपालक अभियन्ता के सेवा बर्खास्तगी के दण्ड को बहाल रखा गया।
श्री सिन्हा कार्यपालक अभियन्ता के सेवा बर्खास्तगी के दण्ड लागू करने के निमित नियमानुकूल प्रक्रिया के तहत विभागीय पत्र सं0-1435 दिनांक 6.5.97 द्वारा सेवा बर्खास्तगी दण्ड के प्रस्ताव को बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति हेतु भेजा गया। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना द्वारा भलिभॉति विचारोपरान्त उनके पत्र सं0-6/प्री0-7-3/97-1610 दिनांक 20.11.97 द्वारा सेवा बर्खास्तगी के दण्ड के विभागीय प्रस्ताव में सहमति प्रदान की गई।16 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 तदुपरान्त श्री सिन्हा कार्यपालक अभियन्ता के सेवा बर्खास्तगी के दण्ड के प्रस्ताव को संलेख के माध्यम से मंत्रिपरिषद की स्वीकृति हेतु भेजा गया। दिनांक 30.6.98 को मंत्रिपरिषद की बैठक में श्री सिन्हा कार्यपालक अभियन्ता की सेवा बर्खास्तगी के दण्ड के प्रस्ताव में स्वीकृति प्रदान की गई। इस प्रकार श्री सिन्हा, कार्यपालक अभियन्ता के सेवा बर्खास्तगी दण्ड के प्रस्ताव में बिहार लोक सेवा आयोग एवं मंत्रिपरिषद की स्वीकृति प्राप्त थी।
अतएव श्री सिन्हा कार्यपालक अभियन्ता, जल संसाधन विभाग को सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-2006 दिनांक 10.7.98 द्वारा सेवा से बर्खास्त किया गया।
उक्त बर्खास्तगी आदेश के विरूद्व श्री लक्ष्मी नारायण सिन्हा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-10828/98 दायर किया गया जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 27.11.08 को न्याय निर्णय पारित किया गया। उक्त न्याय निर्णय के द्वारा विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-2006 दिनांक 10.7.98 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया है। अतएव माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उक्त न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 2006 दिनांक 10. 7.98 को निरस्त किया जाता है। परन्तु श्री लक्ष्मी नारायण सिन्हा के पूर्व के वेतनादि का भुगतान उनके विरूद्व प्रारम्भ की जाने वाली विभागीय कार्यवाही के फलाफल पर निर्भर करेगा ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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13 फरवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-08/07/62—श्री विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाईप्रमण्डल, सिकन्दरा से उनके उक्त पदस्थापन अवधि वर्ष 2007-08 के दौरान लोअर क्यिूल वैली योजना के बाये नहर प्रणाली के गरसंडा वितरणी में सही ठंग से मेजरमेन्ट नहीं लेने एवं संबंधित अधीक्षण अभियन्ता के आदेश के विपरीत संयुक्त लेभल लेने, नियंत्री पदाधिकारी के आदेश का उल्लंधन करने, 1.49 करोड़ रूपये का चेक प्रमण्डल का प्रभार सौपने के बाद बैक डेट में हस्ताक्षारित करने आदि अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1075 दिनांक 21.11.07 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1099 दिनांक 3.12.07 द्वारा बिहार सरकारी सेवक ( वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी।
2. विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त श्री सिन्हा के विरूद्व आर0 एस0 वी0 वाई0 योजनान्तर्गत विभागीय स्वीकृति के बिना लोअर क्यिूल वैली योजना के बाये नहर प्रणाली में योजनाओं का कार्य कराने का आरोप प्रमाणित पाया गया। फलस्वरूप सरकार द्वारा श्री सिन्हा को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गयाः-
(क) एक वेतन वृद्वि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (ख) निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशनादि के लिए की जायेगी ।
उक्त निर्णय श्री विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिचाई प्रमण्डल, सिकन्दरा को संसूचित किया जाता है एवं उन्हें निदेश दिया जाता है कि वे मुख्यालय में अपना योगदान समर्पित करें। यह आदेश निर्गत होने की तिथि से लागू होगा।
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13 फरवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(विभा0)-14-103/88 खण्ड/63—श्री केदार प्रसाद केशरी तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत दुर्गावर्ती बायॅा तट नहर प्रमण्डल, भीतरी बॅाध द्वारा उक्त पदस्थापन अवधि में विविध कार्यो के भुगतान हेतु बैंक से 14,10,475/- रूपये की निकासी कर अपने अधीनस्थ अवर प्रमण्डलीय पदाधिकारी को अस्थायी अग्रिम के रूप में बाट देने के आरोप के लिए उन्हें निलंबित कर असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील ) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया । तदनुसार श्री केशरी को विभागीय अधिसूचना सं0-51 दिनांक 24.8. 95 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1463 दिनांक 12.9.95 द्वारा विभागीय कार्यवाही चलायी गयी। अपरिहार्य कारणवश श्री केशरी के सेवाकाल में विभागीय कार्यवाही का निष्पादन नहीं हो सका तथा वे दिनांक 31.5.2000 को सेवानिवृत हो गये। अतः सरकार द्वारा विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी के अन्तर्गत जारी रखा गया। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप मुक्त करने के अनुशंसा की गयी तथा अंकित किया गया था कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा जो भी व्यय किये गये है वह स्वीकृत प्राक्कलित राशि के अन्तर्गत है। समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार स्तर पर की गयी। सरकार ने समीक्षोपरान्त जॅाच पदाधिकारी के मत से असहमत होते हुए 11.88 लाख रूपये17 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 जिसका कैश बुक एवं एम0बी0 उपलब्ध है, में 8.96 लाख रूपये हस्त रसीद के माध्यम से खर्च किये जाने के विन्दु पर विभागीय पत्रांक 2092 दिनांक 19.11.2001 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी तथा द्वितीय कारण पृच्छा के क्रम में दिये गये जबाव की समीक्षोपरान्त 8.96 लाख रूपये हस्त रसीद के माध्यम से खर्च किये जाने के आरोप के लिए विभागीय आदेश सं.-39 सह पठित ज्ञापांक- 171 दिनांक 20.2.2002 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-
(1) बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के अन्तर्गत 75 प्रतिशत पेंशन पर एक वर्षो तक रोक एवं (2) निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ देय नहीं परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी एवं वेतनवृद्वि देय होगा।
उक्त विभागीय आदेश के विरूद्व श्री केशरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0 30/05 केदार प्रसार केशरी बनाम राज्य सरकार एवं अन्य दायर की गयी जिसमें दिनांक 3.12.07 को पारित न्यायादेश में द्वितीय कारण पृच्छा एवं दण्डादेश को निरस्त करते हुए प्रतिवादी अगर चाहे तो तीन माह में पुनः विभागीय कार्यवाही चलाकर निष्पादित करने का निदेश दिया गया साथ ही यह भी निदेशित किया गया कि उक्त निर्धारित अवधि के भीतर विभागीय कार्यवाही समाप्त नहीं होती है, तो वह बन्द समझा जायेगा।
उक्त न्यायादेश जो सर्व प्रथम विभाग में दिनांक 7.1.08 को प्राप्त हुआ के समीक्षोपरान्त विधि विभाग को परामर्श हेतु दिनांक 21.1.08 को संचिका पृष्टांकित की गयी परन्तु विधि विभाग द्वारा संचिका दिनांक 25.1.08 को परामर्श के विन्दु गठित कर भेजने हेतु वापस की गई परामर्श के बिंदु गठित करते हुए विधि विभाग को पुनः संचिका दिनांक 31.1.08 को पृष्टांकित की गयी। विधि विभाग द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पुनः कार्यवाही की छुट के तहत पुनः कारवाई नियमानुसार करने के निदेश के साथ दिनांक 6.3.08 को वापस की गयी।
विधि विभाग के परामर्श के आलोक में विभागीय कार्यवाही विभागीय संकल्प 317 दिनांक 22.4.08 द्वारा प्रारम्भ की गयी। साथ ही न्यायादेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना 926 दिनांक 19.11.08 द्वारा विभागीय आदेश 39 सह पठित ज्ञापांक-171 दिनांक 20.2.02 एवं विभागीय पत्रांक 2092 दिनांक 14.11.01 को निरस्त किया गया। विभागीय कार्यवाही की जॅाच प्रतिवेदन अप्राप्त रहने की स्थिति में विभागीय पत्रांक-844 दिनांक 31.10.08 द्वारा संचालन पदाधिकारी को जॅाच प्रतिवेदन अविलग्ब उपलबध कराने हेतु अनुरोध किया गया तथा वादी श्री केशरी को अपेक्षित सहयोग प्रदान करने हेतु अनुरोध किया गया जिसके क्रम में श्री केशरी ने दिनांक 15.11.08 को अभ्यावेदन समर्पित किया तथा इसी बीच श्री केशरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में एम0 जे0 सी0........./08 भी दायर किेया गया।
श्री केशरी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षा के क्रम में पाया गया किः- (1) माननीय उच्च न्यायालय के न्यायादेश के आलोक में वादी द्वारा दिनांक 7.1.08 को समर्पित न्यायादेश एवं अभ्यावेदन के आलोक में दिनांक 7.4.08 तक विभागीय कार्यवाही समाप्त हो जानी चाहिए थी परन्तु प्रक्रियात्मक विलंब के फलस्वरूप विभागीय कार्यवाही ही दिनांक 22.4.08 को प्रारम्भ की गयी जो न्यायालय के निर्धारित समय सीमा के बाहर है। (2) माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी निदेशित किया है कि अगर तीन माह के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही समाप्त नहीं होती है तो वर्ष 1987-88 का आरोप होने के कारण विभागीय कार्यवाही बन्द समझा जायेगा और विभाग वादी के विरूद्व अगे्रतर कारवाई नहीं कर सकेगा।
(3) श्री केशरी के विरूद्व वित्तीय गबन से संबंधित आरोप नहीं है, बल्कि हस्त रसीद से राशि अग्रिम देने का मामला है, जो वित्तीय वर्ष में समायोजित भी हो गया है, के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप मुक्त करने का मंतव्य दिया गया था।
उपर्युक्त परिपेक्षय में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के निर्धारित समय के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही समाप्त नहीं होने में प्रक्रियात्मक विलंब के फलस्वरूप वादी श्री केशरी द्वारा दायर अवमाननावाद को ध्यान में रखते हुए माननीय उच्च न्यायालय के आदेश अनुपालन में वादी (श्री केशरी) के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 317 दिनांक 22.04.08 द्वारा बिहार पेंषन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत प्रारम्भ की गयी विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना सं0-63 दि0-13.02.09 द्वारा समाप्त किया गया।
श्री केषरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवा निवृत द्वारा विभागीय अधिसूचना-63 दि0-13.02.09 के क्रम में दि0-03.03.09 को अभ्यावेदन समर्पित किया गया। समीक्षोपरान्त निर्णय लिया गया कि यद्वपि विभागीय अधिसूचना 926 दि0-19.11.08 द्वारा विभागीय दंडादेष 39 दि0-20.02.02 निरस्त किया जा चुका है तथा अधिसूचना सं0-63 दि0-13.02.09 द्वारा विभागीय कार्यवाही समाप्त की जा चुकी है, इसलिए विभागीय अधिसूचना सं0-51 दि0-24.08.95 जिसके द्वारा श्री केषरी को निलंबित किया गया था, को निरस्त करते हुए निलंबन अवधि का वेतन भुगतान किया जाए।
अतः उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-51 दि0-24.08.95 को निरस्त किया जाता है तथा श्री केदार प्रसाद केशरी तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को निलंबन अवधि का पूर्ण वेतन देय होगा। 18 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009
18 फरवरी 2009
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-106/99/66—श्री बटेश्वर शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, सिरसिया से उक्त प्रमण्डल, के अन्तर्गत वि0दु0-37.75 पर भुतही बलान नदी पर निर्मित सायफन के निर्माण कार्यो में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-3392 दिनांक 3.12.94 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री शर्मा से प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई, समीक्षोपरान्त श्रम मद में 7,12025-20 रूपया का अधिक भुगतान एवं लगभग 64,000/- रूपये का दोहरा भुगतान करने हेतु दोषी पाया गया। फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना सं0-1094 दिनांक 17.6.95 द्वारा श्री शर्मा को दण्ड संसूचित किया गया।
श्री शर्मा द्वारा उक्त निर्गत दण्ड के विरूद्व माननीय उच्च न्यायालय पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-4999/95 दायर किया गया। उक्त दायर याचिका में दिनांक 30.11.95 को हुए फैसले के आलोक में अधिसूचना सं0-1094 दिनांक 17.6.95 द्वारा निर्गत दण्डादेश को विभागीय अधिसूचना सं0-2682 दिनांक 8.12.95 द्वारा निरस्त कर दिया गया । पुनः उक्त न्यायादेश में दिये गये निदेश के आलोक में ही सभी साक्ष्यों को देते हुए श्री शर्मा से विभागीय पत्रांक-2643 दिनांक 4.12.95 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई। श्री शर्मा से प्राप्त स्पष्टीकरण के उतर की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि श्री शर्मा को एकरारनामा में उल्लेखित मूल कार्य में मदों पर लेवर स्केलेशन मद में भुगतान करना था, लेकिन उन्होंने अतिरिक्त कार्य मदों पर भी अनियमित रूप से 7,12,025-20 का लेवर स्केलेशन मद में भुगतान किया, जिसके लिए श्री शर्मा अन्य दो पदाधिकारियों के साथ जिम्मेवार पाये गये। इन्होंने स्पष्टीकरण में यह बात भी स्वीकार किया है कि 64,000/- के दोहरा भुगतान का सामंजन बाढ़ में कर लिया गया अर्थात श्री शर्मा द्वारा 64,000/- का दोहरा भुगतान किया गया, दोहरे भुगतान में प्रक्रियात्मक भूल की गई जिसके लिए श्री शर्मा दोषी पाये गये। इस प्रकार उपरोक्त अनियमितताओं के लिए श्री शर्मा को दोषी पाते हुए विभागीय अधिसूचना सह ज्ञापांक-2823 दिनांक 26.12.95 द्वारा निम्नांकित दण्ड संसूचित किया गयाः-
(1) ''निन्दन'' जिसकी प्रविष्टि उनके चारित्री वर्ष 1987-88 में किया जाएगा। (2) देय तिथि से तीन वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक। (3) 2,37,341/- रूपये की वसूली। पुनः विभागीय अधिसूचना सं0-1446 दिनांक 18.7.96 द्वारा उपर्युक्त दण्डादेश की कंडिका (11) में अंकित दण्ड '' देय तिथि से तीन वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक'' को संशोधित करते हुए '' देय तिथि से पॅाच वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक'' किया गया।
उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री शर्मा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0 -694/96 दायर किया गया। उक्त याचिका की सुनबाई करते हुए न्यायालय द्वारा दिनांक 10.12.98 को पारित न्याय निर्णय में श्री शर्मा के याचिका को खारिज कर दिया गया। उक्त न्यायादेश के विरूद्व श्री शर्मा द्वारा एल0 पी0 ए0 सं0-233/99 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 7.11.07 को न्याय निर्णय पारित करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा विभागीय दण्डादेश एवं आरोप को निरस्त कर दिया गया।
एल0 पी0 ए0 में पारित उक्त न्यायादेश के विरूद्व विधि विभाग के परामर्श से विभाग द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एस0 एल0 पी0 (सिविल)......................../08 (सी0 सी0-14349/08) दायर किया गया। माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा उक्त मामले की सुनवाई करते हुए दिनांक 5.12.08 को विभाग द्वारा दायर एस0 एल0 पी0 को खारीज कर दिया गया। तदुपरान्त मामले की सम्यक समीक्षा विभाग द्वारा की गई एवं एल0 पी0 ए0 सं0-233/99 में दिनांक 7.11.07 को पारित न्याय निर्णय का अनुपालन करने का निर्णय लिया गया है।
तदनुसार श्री शर्मा से संबंधित विभागीय दण्डादेश अधिसूचना सं0-2823 दिनांक 26.12.95 एवं अधिसूचना सं0-1446 दिनांक 18.7.96 को उनके विरूद्व गठित आरोप पत्र सहित निरस्त किया जाता है।
उक्त विभागीय निर्णय श्री बटेश्वर शर्मा को संसूचित किया जाता है।
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4 मार्च 2009
सं॰ 22 नि0 सि0/(वीर0)-7-13/2004/112—श्री राजीव नन्दन मौर्य, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, पूर्वी तटबंध प्रमण्डल, वीरपुर के विरूद्व उनके पदस्थापन की अवधि में बेतार संवाद सं0-346 दिनांक 21.9.04 द्वारा सीधे विभागीय मंत्री के आप्त सचिव को उक्त प्रमण्डल में पदस्थापित दो कनीय अभियन्ता सर्वश्री कमलेश्वरी सिंह एवं श्री महेन्द्र शर्मा को दो दिनाें की अनुपस्थिति के लिए निलंबन एवं नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा तथा निलंबन अवधि में इन दोनों का मुख्यालय पूर्वी कोशी तटबंध प्रमण्डल, वीरपुर की अनुशंसा करने, कार्यपालक अभियन्ता के स्तर से ही श्री कमलेश्वरी सिंह एवं श्री महेन्द्र शर्मा, कनीय अभियन्ता को दण्ड संसूचित करने दोनों कनीय अभियन्ताओं का वेतन बिना विभागीय अनुमति के अवरूद्व करने आदि कतिपय आरोपों के लिए19 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प सं0-1280 दिनांक 11.12.06 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई।
जॅाच पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग द्वारा की गई। जॅाच पदाधिकारी द्वारा दिये गये मंतव्य में कहा गया है कि श्री मौर्य को इस तरह की कारवाई अपने उच्चाधिकारी को विश्वास में रखकर ही करना चाहिये था तथा विभागीय मंत्री महोदय के आप्त सचिव को सीधे पत्राचार कर श्री मौर्य ने गलती की है। अतः सम्यक विचारोपरान्त श्री राजीव नन्दन मौर्य, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गयाः-
(1) चेतावनी (2) एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।
उक्त निर्णय श्री राजीव नन्दन मौर्य, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, सरकार के उपसचिव।
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4 मार्च 2009
सं॰ 22 नि0 सि0/(सिवान)-11-10/2006/113—श्री सुनील कुमार वैश्य तत्कालीन सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, ठकराहा, शि0-गोपालगंज से उक्त प्रमण्डल के अधीन बाढ़ 2006 के पूर्व एजेण्डा सं0-84/44 के तहत पतहरा छरकी के कि0 मी0 0.50 से 1.70 कि0 मी0 तक पुर्नस्थापन कार्य में गड़बड़ी के संबंध में उडनदस्ता अंचल से जॅाच करायी गयी। उडनदस्ता अंचल से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा विभागीय स्तर पर हुई। समीक्षोपरान्त कतिपय अनियमितताओं के लिए श्री वैश्य प्रथम द्रष्टया दोषी पाये गये। उड़नदस्ता अंचल से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के आघार पर विभागीय पत्रांक-1246 दिनांक 7.12.2006 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण किया गया।
श्री वैश्य से प्राप्त स्पष्टीकरण के जबाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री वैश्य के स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
उक्त निर्णय श्री वैश्य, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, ठकराहा, शि0 गोपालगंज को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, सरकार के उपसचिव।
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4 मार्च 2009
सं॰ 22 नि0 सि0/(सिवान)-11-10/2006/114—श्री नरेन्द्र कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, ठकराहा, शि0-गोपालगंज से उक्त प्रमण्डल के अधीन बाढ़ 2006 के पूर्व एजेण्डा सं0-84/44 के तहत पतहरा छरकी के कि0 मी0 0.50 से 1.70 कि0 मी0 तक पुर्नस्थापन कार्य में गड़बड़ी के संबंध में उडनदस्ता अंचल से जॅाच करायी गयी। उडनदस्ता अंचल से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा विभागीय स्तर पर हुई। समीक्षोपरान्त कतिपय अनियमितताओं के लिए श्री कुमार प्रथम द्रष्टया दोषी पाये गये। उड़नदस्ता अंचल से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के आघार पर विभागीय पत्रांक-1246 दिनांक 7.12.2006 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण किया गया।
श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के जबाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय श्री कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, ठकराहा, शि0 गोपालगंज को संसूचित किया जाता है। 20 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009
4 मार्च 2009
सं॰ 22/नि0सि0(पट0)-03-01/09/115—श्री विजय कुमार सिन्हा, आई0 डी0-2271 सहायक अभियन्ता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, दीधा, पटना प्रतिनियुक्त कुसहा तटबंध, जो निगरानी थाना कांड सं0- 015/2009 के प्राथमिकी अभियुक्त है तथा जिन्हें निगरानी अन्वेषण व्यूरो के गठित जॅाच दल द्वारा 3,12,632/- (तीन लाख बारह हजार छः सौ बतीस रूपये मात्र) नगद अवैध राशि के साथ दिनांक 20.2.2009 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, को विभाग द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9 के तहत निलंबित करने तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत विभागीय कारवाई चलाने का निर्णय लिया गया है।
उक्त विभागीय निर्णय के आलोक में श्री सिन्हा को दिनांक 20.2.2009 के प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. न्यायिक हिरासत से छूटने के उपरान्त श्री सिन्हा का मुख्यालय मुख्य अभियन्ता का कार्यालय, केन्द्रीय रूपांकण संगठन, जल संसाधन विभाग, पटना निर्धारित किया जाता है।
3. निलंबन अवधि में श्री सिन्हा को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। 4. विभागीय कार्यवाही का संकल्प अलग से निर्गत किया जा रहा है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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23 मार्च 2009
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-04/09/177—श्री कामेष्वर नाथ सिंह, कार्यपालक अभियन्ता, पष्चिमी कोषी नहर प्रमण्डल, खुटौना आई0 डी0 -1787 प्रतिनियुक्त कुसहा तटबंध जो निगरानी थाना कांड सं0-014/2009 के प्राथमिकी अभियुक्त है तथा जिन्हें निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के गठित जॅाच दल द्वारा 8,20,000/- (आठ लाख बीस हजार रूपये) नगद अवैध राषि के साथ दिनांक 20.2.09 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9 में निहित प्रावधान के अन्तर्गत निलंबित कर विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया है। उक्त विभागीय निर्णय के आलोक में श्री सिंह को दिनांक 20.2.09 के प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2- न्यायिक हिरासत से छुटने के उपरान्त श्री सिंह का मुख्यालय मुख्य अभियन्ता का कार्यालय, केन्द्रीय रूपांकण संगठन, जल संसाधन विभाग, अनीसाबाद, पटना निर्धारित किया जाता है। 3- निलंबन अवधि में श्री सिंह को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। 4- विभागीय कार्यवाही का संकल्प अलग से निर्गत किया जा रहा है।
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23 मार्च 2009
21 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009(2) निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ देय नहीं परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी एवं वेतनवृद्वि देय होगा।
उक्त विभागीय आदेश के विरूद्व श्री केशरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0 30/05 केदार प्रसार केशरी बनाम राज्य सरकार एवं अन्य दायर की गयी जिसमें दिनांक 3.12.07 को पारित न्यायादेश में द्वितीय कारण पृच्छा एवं दण्डादेश को निरस्त करते हुए प्रतिवादी अगर चाहे तो तीन माह में पुनः विभागीय कार्यवाही चलाकर निष्पादित करने का निदेश दिया गया साथ ही यह भी निदेशित किया गया कि उक्त निर्धारित अवधि के भीतर विभागीय कार्यवाही समाप्त नहीं होती है, तो वह बन्द समझा जायेगा।
उक्त न्यायादेश जो सर्व प्रथम विभाग में दिनांक 7.1.08 को प्राप्त हुआ के समीक्षोपरान्त विधि विभाग को परामर्श हेतु दिनांक 21.1.08 को संचिका पृष्टांकित की गयी परन्तु विधि विभाग द्वारा संचिका दिनांक 25.1.08 को परामर्श के विन्दु गठित कर भेजने हेतु वापस की गई परामर्श के बिंदु गठित करते हुए विधि विभाग को पुनः संचिका दिनांक 31.1.08 को पृष्टांकित की गयी। विधि विभाग द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पुनः कार्यवाही की छुट के तहत पुनः कारवाई नियमानुसार करने के निदेश के साथ दिनांक 6.3.08 को वापस की गयी।
विधि विभाग के परामर्श के आलोक में विभागीय कार्यवाही विभागीय संकल्प 317 दिनांक 22.4.08 द्वारा प्रारम्भ की गयी। साथ ही न्यायादेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना 926 दिनांक 19.11.08 द्वारा विभागीय आदेश 39 सह पठित ज्ञापांक-171 दिनांक 20.2.02 एवं विभागीय पत्रांक 2092 दिनांक 14.11.01 को निरस्त किया गया। विभागीय कार्यवाही की जॅाच प्रतिवेदन अप्राप्त रहने की स्थिति में विभागीय पत्रांक-844 दिनांक 31.10.08 द्वारा संचालन पदाधिकारी को जॅाच प्रतिवेदन अविलग्ब उपलबध कराने हेतु अनुरोध किया गया तथा वादी श्री केशरी को अपेक्षित सहयोग प्रदान करने हेतु अनुरोध किया गया जिसके क्रम में श्री केशरी ने दिनांक 15.11.08 को अभ्यावेदन समर्पित किया तथा इसी बीच श्री केशरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में एम0 जे0 सी0........./08 भी दायर किेया गया।
श्री केशरी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षा के क्रम में पाया गया किः- (1) माननीय उच्च न्यायालय के न्यायादेश के आलोक में वादी द्वारा दिनांक 7.1.08 को समर्पित न्यायादेश एवं अभ्यावेदन के आलोक में दिनांक 7.4.08 तक विभागीय कार्यवाही समाप्त हो जानी चाहिए थी परन्तु प्रक्रियात्मक विलंब के फलस्वरूप विभागीय कार्यवाही ही दिनांक 22.4.08 को प्रारम्भ की गयी जो न्यायालय के निर्धारित समय सीमा के बाहर है। (2) माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी निदेशित किया है कि अगर तीन माह के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही समाप्त नहीं होती है तो वर्ष 1987-88 का आरोप होने के कारण विभागीय कार्यवाही बन्द समझा जायेगा और विभाग वादी के विरूद्व अगे्रतर कारवाई नहीं कर सकेगा।
(3) श्री केशरी के विरूद्व वित्तीय गबन से संबंधित आरोप नहीं है, बल्कि हस्त रसीद से राशि अग्रिम देने का मामला है, जो वित्तीय वर्ष में समायोजित भी हो गया है, के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप मुक्त करने का मंतव्य दिया गया था।
उपर्युक्त परिपेक्षय में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के निर्धारित समय के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही समाप्त नहीं होने में प्रक्रियात्मक विलंब के फलस्वरूप वादी श्री केशरी द्वारा दायर अवमाननावाद को ध्यान में रखते हुए माननीय उच्च न्यायालय के आदेश अनुपालन में वादी (श्री केशरी) के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 317 दिनांक 22.04.08 द्वारा बिहार पेंषन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत प्रारम्भ की गयी विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना सं0-63 दि0-13.02.09 द्वारा समाप्त किया गया।
श्री केषरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवा निवृत द्वारा विभागीय अधिसूचना-63 दि0-13.02.09 के क्रम में दि0-03.03.09 को अभ्यावेदन समर्पित किया गया। समीक्षोपरान्त निर्णय लिया गया कि यद्वपि विभागीय अधिसूचना 926 दि0-19.11.08 द्वारा विभागीय दंडादेष 39 दि0-20.02.02 निरस्त किया जा चुका है तथा अधिसूचना सं0-63 दि0-13.02.09 द्वारा विभागीय कार्यवाही समाप्त की जा चुकी है, इसलिए विभागीय अधिसूचना सं0-51 दि0-24.08.95 जिसके द्वारा श्री केषरी को निलंबित किया गया था, को निरस्त करते हुए निलंबन अवधि का वेतन भुगतान किया जाए।
अतः उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-51 दि0-24.08.95 को निरस्त किया जाता है तथा श्री केदार प्रसाद केशरी तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को निलंबन अवधि का पूर्ण वेतन देय होगा।
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25 मार्च 2009
सं॰ 22 नि0 सि0/(दर0)-16-13/2007/190—श्री गंगा प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, रूपांकण अंचल दरभंगा जो मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग, दरभंगा के अतिरिक्त प्रभार में थे, को दरभंगा के पदस्थापन अवधि में पश्चिमी कोशी नहर परियोजना के अन्तर्गत कार्यो के लिए प्राप्त प्रशासनिक स्वीकृति के अनुरूप सही ढ़ंग से कार्यान्वयन नहीं करने, बिना प्रशासनिक स्वीकृति के कार्य कराने एवं अनुचित इरादों से संवेदक को लाभ पहुॅचाने तथा निविदा में जालसाजी, हेराफेरी करने तथा विभागीय निदेशों की अवहेलना करने इत्यादि कतिपय अनियमितताओं के लिए सरकार द्वारा निलंबित कर22 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया। सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रसाद को विभागीय अधिसूचना सं0-456 दिनांक 7.5.07 द्वारा निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-959 दिनांक 10.10.07 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के क्रम में श्री प्रसाद निलम्बनावस्था में ही दिनांक 31.12.08 को सेवानिवृत हो गये। तदुपरान्त मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त श्री प्रसाद को सेवानिवृत होने की तिथि 31.12.08 से निलम्बन मुक्त करते हुए इनके विरूद्व चल रही विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी0 में परिवर्तित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री गंगा प्रसाद, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, दरभंगा को उनकी सेवानिवृति की तिथि 31.12.08 के प्रभाव से निलम्बन मुक्त करते हुए इनके विरूद्व पूर्व से चल रही विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 में परिवर्तित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, सरकार के उपसचिव
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27 मार्च 2009
2. विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी सह अधीक्षण अभियन्ता योजना मोनेटरिंग अंचल-2, पटना के पत्रांक-1088 दिनांक 20.5.2002 से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी किन्तु अंतिम रूप से निर्णय होने के पूर्व ही श्री सिन्हा दिनांक 31.1. 2002 को सेवानिवृत हो गये। श्री सिन्हा के सेवानिवृत होने के उपरान्त उनके विरूद्व सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत संचालित कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत परिवर्तित करते हुए विभागीय आदेश सं0-68 ज्ञापांक-528 दिनांक 26.05.2005 द्वारा कार्यवाही को जारी रखा गया।
3. बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत श्री सिन्हा से विभागीय पत्रांक-529 दिनांक 26.05.2005 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी एवं श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जबाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री सिन्हा, सेवानिवृत अधीक्षण अभियन्ता के विरूद्व ''एक वर्ष के लिये पॅाच प्रतिशत पेंशन पर रोक'' दण्ड देने का निर्णय लिया गया।
4. श्री सिन्हा के विरूद्व उक्त प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-3482 दिनांक 17.12. 2008 द्वारा सहमति प्राप्त है।
5. बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति के उपरान्त श्री सिन्हा के विरूद्व उक्त दण्ड प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी है मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के उपरान्त श्री मिथिलेश कुमार सिन्हा सेवानिवृत अधीक्षण अभियन्ता को ''एक वर्ष के लिये पॅाच प्रतिशत पेंशन पर रोक'' का दण्ड संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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27 मार्च 2009
सं॰ 22 नि0 सि0/(भाग0)-09-07/2006/202—सिंचाई पमण्डल, सिकन्दरा में वर्ष 2006-07 के दौरान हुई वित्तीय अनियमितता के संबंध में श्री अलख निरंजन कुंवर, तत्कालीन प्रमण्डलीय रोकड़पाल, सिंचाई प्रमण्डल, सिकन्दरा से प्राप्त परिवाद की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा दिनांक 4.6.2006 को करायी गयी।
उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त श्री विश्वानाथ प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, सिकन्दरा के विरूद्व कतिपय आरोपों यथा प्रमण्डलीय कार्यालय में बिना संचिका के माध्यम से कार्य सम्पन्न कराने, माप पुस्त भ्रमण पंजी, सी0 एण्ड पी0 पंजी, चेक निर्गत पंजी, विपत्र पारित पंजी, संचिका आदि का संधारण नहीं किये जाने, अधीनस्थों से सौहार्द्वपूर्ण संबंध नहीं रखने आदि प्रमाणित पाये गये। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिये श्री सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता से विभागीय पत्रांक-1141 दिनांक 6.11.2006 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।23 (cid:18)बहार गजट, 22 अूील 2009 श्री सिन्हा से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री सिन्हा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं संलग्न साक्ष्यों के आधार पर उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
उक्त निर्णय श्री सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, सिकन्दरा को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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27 मार्च 2009
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-02/01/203—अधिसूचना सं0-29, ज्ञापांक-29 दिनांक 16.01.2009 जो श्री सत्येन्द्र कमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-1, लक्ष्मीपुर को संसूचित है, के कंडिका ''2'' में अंकित ''श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री उपेन्द्र, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है'' के स्थान पर ''श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है'' पढ़ा जाय।
शेष यथावत् रहेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, सरकार के उपसचिव।
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27 मार्च 2009
सं॰ 22 नि0 सि0(यॅा0)-04-07/2004/204—श्री विनय मोहन, तत्कालीन सहायक अभियन्ता (यॅा0) सिंचाई यांत्रिक कर्मशाला अनुमण्डल, डिहरी द्वारा कार्यपालक अभियन्ता, श्री पी0 एन0 पंडित के साथ मारपीट करने के आरोप के लिए विभागीय संकल्प सं0-1138 दिनांक 2.8.2000 द्वारा बिहार असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी।
सम्यक विचारोपरान्त सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि चूॅकि श्री विनय मोहन को सेवा निवृति दिनांक 31.
01.2008 से ही बर्खास्तगी के समतुल्य पूर्ण पेंशन एवं उपादान पर सदा के लिए रोक का दण्ड लघु सिंचाई विभाग के आदेश सं0-211 सह ज्ञापांक-4259 दिनांक 5.8.2008 द्वारा दिया गया है, इसलिए अब पुनः श्री मोहन पर किसी प्रकार का दण्ड निरूपित करने का औचित्य नहीं है।
उक्त निर्णय श्री विनय मोहन, तत्कालीन सहायक अभियन्ता (यॅा0) सिंचाई यांत्रिक कर्मशाला अनुमंडल, डिहरी को संसूचित किया जाता है। ————
अधीFक, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुLित। (cid:18)बहार गजट का पूरक (अ0) 5—571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।