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सं0 3-नि0गो0(2)05/07-प0पा0-58-डा0 मुकेश कुमार श्रीवास्तव, तदेन सहायक कुक्कुट पदाधिकारी, चाईबासा(सम्प्रति निलंबित, बिहार कैडर ) जिनकी जन्म-तिथि 21 जुलाई 1960, सरकारी सेवा में नियुक्ति की तिथि 24 अक्तूबर 1983 एवं संभावित सेवानिवृति की तिथि 31 जुलाई 2020 है, को अवैध रूप से सरकारी राशि की निकासी (वित्तीय अनियमितता ) करने अथवा उसमे सहयोग करने के आरोप में इस विभाग के आदेश संख्या 127 नि0शा0, दिनांक 02 फरवरी 1996 द्वारा निलंबित किया गया था।
उक्त अनियमितता के आरोप में दर्ज आपराधिक कांड में आरक्षी अनुसंधान में सहयोग नहीं कर फरार हो जाने के कारण उन्हें किसी प्रकार की नोटिस आदि का तामिला नहीं हो सकने एवं विभागीय कार्यवाही का संचालन संभव नहीं होने की स्थिति में इस विभाग के आदेश ज्ञापांक-188 नि0शा0, दिनांक 21 फरवरी 1996 द्वारा पूर्व में निलंबित डा0 श्रीवास्तव को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया । किन्तु बर्खास्तगी के विरूद्ध डा0 श्रीवास्तव द्वारा दायर सी0डब्लू0 जे0सी0 संख्या 11858/ 97 में दिनांक 21 मई 98 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्यायादेश के अनुपालन में विभाग द्वारा पूर्व में जारी बर्खास्तगी संबंधी आदेश को विभागीय आदेश ज्ञापांक 1395 नि0शा0 दिनांक 04 दिसम्बर 1998 द्वारा निरस्त करते हुए उन्हें पुनः निलंबित किया गया। सम्प्रति निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय निदेशक, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, पटना का कार्यालय, पटना निर्धारित हैे।
सी0बी0आई0 द्वारा चारा घोटाला, जिसमें बहुत बड़े पैमाने पर अनियमित एवं अवैध निकासी की वित्तीय 2 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 11 मई 2009 पैट, आर0सी0 20(ए)/ 96, आर0सी0 46(ए)/ 96(ii), आर0सी0 47(ए)/ 96, आर0सी0 51(ए)/ 96, आर0सी0 66(ए)/ 96 एवं आर0सी0 68(ए)/ 96 दर्ज कराये गये है। उपरोक्त आपराधिक कांडों में से आर0सी0 19(ए)/ 96 पैट एवं आर0सी0 66(ए)/ 96 का निष्पादन माननीय सी0बी0आई0 (ए0च0डी0 स्कैम केसेज) न्यायालय, रॉंची के पारित न्यायादेश द्वारा किया गया है। शेष आपराधिक कांड अभी भी न्यायालय के निर्णय हेतु लंबित है।
आपराधिक कांड संख्या आर0सी0 19(ए)/ 96 पैट में माननीय विशेष न्यायाधीश IV, सी0बी0आई0 (ए0च0डी0 स्कैम केसेज), रॉंची द्वारा दिनांक 12 अप्रील 2006 को पारित न्यायादेश द्वारा डा0 श्रीवास्तव के विरूद्ध लाए गए आरोपों को प्रमाणित पाया गया है तथा उन प्रमाणित आरोपों के आलोक में डा0 श्रीवास्तव को 7 (सात) वर्षों का सश्रम कारावास तथा रु0 4.55लाख (चार लाख पचपन हजार रुपये) के जुर्माने की सजा दी गयी है।
उक्त न्यायादेश के आलोक में डा0 श्रीवास्तव से उनको भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 (2)(ए) के प्रावधानों के तहत सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का अनुशासनिक दण्ड दिए जाने के सरकार के प्रस्ताव पर कारण पृच्छा की गयी। उक्त कारण पृच्छा की नोटिस डा0 श्रीवास्तव को केन्द्रीय कारा, रॉंची में, जहॉं वे सजा काट रहे थे, तामिला हेतु भेजा गया। अपने कारण पृच्छा उत्तर में डा0 श्रीवास्तव द्वारा उल्ल्ेख किया गया है कि सी0बी0आई0 न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध उनके द्वारा माननीय उच्च् न्यायालय में अपील दायर की गयी है, अतः अगे्रतर कोई कार्रवाई नहीं की जाय।
डा0 श्रीवास्तव द्वारा समर्पित कारण पृच्छा की उत्तर की समीक्षा सरकार द्वारा की गयी। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Dy. Director, collegiate Vs Nagoor Mera (1995) 3 SSC 377 में दिए गये आदेश के अनुसार अपील दायर कर देने मात्रा से बर्खास्तगी की कार्रवाई नहीं रोका जा सकता हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इस Observation के आलोक में डा0 श्रीवास्तव की कारण पृच्छा के उत्तर को अस्वीकृत करते हुए राज्य सरकार ने डा0 मुकेश कुमार श्रीवास्तव, तदेन सहायक कुक्कुट पदाधिकारी, चाईबासा को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(ए)तथा बिहार सरकारी सेवक ( वर्गीकरण , नियंत्राण एवं अपील ) नियमावली 2005 के नियम 14 (x) एवं नियम 20(1)के प्रावधानों के तहत तात्कालिक प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया है। तद्नुसार डा0 मुकेश कुमार श्रीवास्तव, तदेन सहायक कुककुट पदाधिकारी, चाईबासा को इस आदेश के निर्गत होने की तिथि के प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाता है।
इस आदेश के निर्गत होने की तिथि से डा0 श्रीवास्तव का इस विभाग में ग्रहणाधिकार नहीं रहेगा ं यह भी निर्णय लिया जाता है कि निलंबन की तिथि 02 फरवरी 1996 से लेकर सेवा से बर्खास्त किए जाने की तिथि तक की अवधि के लिए डा0 श्रीवास्तव को निलंबन भत्ता के अलावे अन्य किसी प्रकार का वेतन भत्ते का भुगतान नहीं किया जाएगा।
बिहार राज्यपाल के आदेश से,
एस0 के0 तिवारी,
सरकार के संयुक्त सचिव।
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अधी,क, सिचवालय मुिणालय,