िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 21212121 ौावणौावणौावणौावण 1931 1931 1931 1931 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0 0 0 0 पटना पटना पटना पटना 420420420420)))) पटनापटनापटनापटना, , , , बुधबुधबुधबुधवारवारवारवार,,,, 12121212 अगःतअगःतअगःतअगःत 2009200920092009 ÑÅÖâà=ÑçLâì=äeââ=äÑéçâóX=
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ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ^=2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 12 अगःत 2009 बिहार पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2009 बिहार पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2009 बिहार पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2009 बिहार पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2009
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बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम 6, 2006) का संशोधन करने के लिए विधेयक। भारत गणराज्य के साठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो- 1. संक्षिप्त नाम विस्तार और आरंभ ।-संक्षिप्त नाम विस्तार और आरंभ ।-संक्षिप्त नाम विस्तार और आरंभ ।-संक्षिप्त नाम विस्तार और आरंभ ।- (1) यह अधिनियम बिहार पंचायत राज (संशोधन) अधिनियम, 2009 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरत प्रवृत्त होगा। 2. बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा-2 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा-2 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा-2 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा-2 का संशोधन ।- बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम 6, 2006) की धारा-2 (क ड) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जाएगी :- ''2 (क ड) - ''ग्राम'' से अभिप्रेत है, ग्राम पंचायत में सम्मिलित सभी राजस्व ग्राम या निकटस्थ राजस्व ग्रामों का समूह या उसका कोई भाग।''
3. बिहार अधिनियम 6, 20बिहार अधिनियम 6, 20बिहार अधिनियम 6, 20बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा-13 का संशोधन।- 06 की धारा-13 का संशोधन।- 06 की धारा-13 का संशोधन।- 06 की धारा-13 का संशोधन।-
(i) बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम 6, 2006) (इसके आगे उक्त अधिनियम के रूप में विनिर्दिष्ट) की धारा-13(1) की द्वितीय कंडिका में शब्द ''विहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(ii) उक्त अधिनियम की धारा - 13(1) की तृतीय कंडिका के दूसरे वाक्य में शब्द ''उत्तरवर्त्ती चुनावों में'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे। (iii) उक्त अधिनियम की धारा-13(4) में शब्द ''यथाविहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(iv) उक्त अधिनियम की धारा-13(4) के पश्चात् उल्लेखित स्पष्टीकरण ''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 1993 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।'' निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायगी, यथा-
''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, पिछड़े वर्गों की महिलाओं तथा अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।''
4. बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 15 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 15 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 15 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 15 का संशोधन ।- (i) उक्त अधिनियम की धारा-15(5)(i) की द्वितीय कंडिका में शब्द ''नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(ii) उक्त अधिनियम की धारा - 15(5)(i) की तृतीय कंडिका के दूसरे वाक्य में शब्द ''उत्तरवर्त्ती चुनावों में'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे। (iii) उक्त अधिनियम की धारा-15(5)(iv) में शब्द ''विहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(iv) उक्त अधिनियम की धारा-15(5)(iv) के पश्चात् उल्लेखित स्पष्टीकरण ''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 1993 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।'' निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायगी, यथा-
''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, पिछड़े वर्गों की महिलाओं तथा अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।'' 5. बिहार अध्बििहार अध्बििहार अध्बििहार अधिनियम, 6, 2006 की धारा -28 का संशोधन ।- ानियम, 6, 2006 की धारा -28 का संशोधन ।- ानियम, 6, 2006 की धारा -28 का संशोधन ।- ानियम, 6, 2006 की धारा -28 का संशोधन ।-
उक्त अधिनियम की धारा-28 में शब्द समूह ''जिसे राज्य सरकार ने स्वीकृत कर अधिसूचित कर दिया हो,'' के पश्चात् शब्द समूह ''के आधार पर''''के आधार पर''''के आधार पर''''के आधार पर'' अंतःस्थापित किया जाएगा। 6. बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 38 का संशोधन बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 38 का संशोधन ।- ।- ।- ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 38 का संशोधन बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 38 का संशोधन3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 12 अगःत 2009 (i) उक्त अधिनियम की धारा-38(1) की द्वितीय कंडिका में शब्द ''विहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(ii) उक्त अधिनियम की धारा - 38(1) की तृतीय कंडिका के दूसरे वाक्य में शब्द ''उत्तरवर्त्ती निर्वाचनों में'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे। (iii) उक्त अधिनियम की धारा-38(4) में शब्द ''विहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(iv) उक्त अधिनियम की धारा-38(4) के पश्चात् उल्लेखित स्पष्टीकरण ''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 1993 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।'' निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायगी, यथा-
''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, पिछड़े वर्गों की महिलाओं तथा अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।''
7. बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 40 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 40 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 40 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 40 का संशोधन ।- (i) उक्त अधिनियम की धारा-40(2) की द्वितीय कंडिका में शब्द ''विहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तः स्थापित किये जायेंगे।
(ii) उक्त अधिनियम की धारा - 40(2) की तृतीय कंडिका के दूसरे वाक्य में शब्द ''उत्तरवर्त्ती चुनावों में'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तः स्थापित किये जायेंगे। (iii) उक्त अधिनियम की धारा-40(2)(iv) में शब्द ''यथाविहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तः स्थापित किये जायेंगे।
(iv) उक्त अधिनियम की धारा-40(2)(iv) के पश्चात् उल्लेखित स्पष्टीकरण ''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 1993 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।'' निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायगी, यथा-
''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, पिछड़े वर्गों की महिलाओं तथा अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।''
8. बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 65 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 65 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 65 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 65 का संशोधन ।- (i) उक्त अधिनियम की धारा-65(1) की द्वितीय कंडिका में शब्द ''विहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(ii) उक्त अधिनियम की धारा - 65(1) की तृतीय कंडिका के दूसरे वाक्य में शब्द ''उत्तरवर्त्ती निर्वाचनों में'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे। (iii) उक्त अधिनियम की धारा-65(4) में शब्द ''विहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(iv) उक्त अधिनियम की धारा-65(4) के पश्चात् उल्लेखित स्पष्टीकरण ''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 1993 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।'' निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायगी, यथा-
''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, पिछड़े वर्गों की महिलाओं तथा अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।''
9. बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 67 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 67 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 67 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 67 का संशोधन ।- (i) उक्त अधिनियम की धारा-67(2) की द्वितीय कंडिका में शब्द ''जिला परिषदों को'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(ii) उक्त अधिनियम की धारा - 67(2) की तृतीय कंडिका के दूसरे वाक्य में शब्द ''उत्तरवर्त्ती निर्वाचनों में'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 12 अगःत 2009 (iii) उक्त अधिनियम की धारा-67(2)(iv) में शब्द ''विहित रीति से,'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(iv) उक्त अधिनियम की धारा-67(2)(iv) के पश्चात् उल्लेखित स्पष्टीकरण ''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 1993 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।'' निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायगी, यथा-
''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, पिछड़े वर्गों की महिलाओं तथा अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।''
10. बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 91 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 91 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 91 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 91 का संशोधन ।- (i) उक्त अधिनियम की धारा-91(1) की द्वितीय कंडिका में शब्द ''विहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(ii) उक्त अधिनियम की धारा - 91(1) की तृतीय कंडिका के दूसरे वाक्य में शब्द ''अगले चुनावों में'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(iii) उक्त अधिनियम की धारा-91(4) में शब्द ''यथाविहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(iv) उक्त अधिनियम की धारा-91(4) के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण अन्तःस्थापित की जायगी, यथा-
''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, पिछड़े वर्गों की महिलाओं तथा अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।'' 11. बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 93 का संश् बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 93 का संशोधन ।- ाोधन ।- ाोधन ।- ाोधन ।- बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 93 का संश् बिहार अधिनियम 6, 2006 की धारा - 93 का संश् (i) उक्त अधिनियम की धारा-93(5)(i) की द्वितीय कंडिका में शब्द ''विहित रीति से,'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(ii) उक्त अधिनियम की धारा - 93(5)(i) की तृतीय कंडिका के दूसरे वाक्य में शब्द ''उत्तरवर्त्ती चुनावों में'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे। (iii) उक्त अधिनियम की धारा-93(5)(iv) में शब्द ''विहित रीति से'' के पश्चात् शब्द ''दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात्'' अन्तःस्थापित किये जायेंगे।
(iv) उक्त अधिनियम की धारा-93(5)(iv) के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण अन्तःस्थापित की जायगी, यथा-
''शंकाओं के निवारण हेतु एतद् द्वारा घोषणा की जाती है कि इस उप-धारा के अधीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, पिछड़े वर्गों की महिलाओं तथा अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं के पदों के आरक्षण के प्रयोजनार्थ चक्रानुक्रम सिद्धान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रारंभ होने के पश्चात् हुए प्रथम निर्वाचन से प्रारंभ होगा।''
12. बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-125 की उप बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-125 की उप----धारा-(8) के पश्चात् नई उपधारा-(8) के पश्चात् नई उपधारा-(8) के पश्चात् नई उपधारा-(8) के पश्चात् नई उप----धारा का जोड़ा जाना।-धारा का जोड़ा जाना।-धारा का जोड़ा जाना।-धारा का जोड़ा जाना।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-125 की उप बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-125 की उप उक्त अधिनियम की धारा-125 में उप-धारा-(8) के पश्चात् निम्नलिखित उप-धारा जोड़ी जाएगी, यथाः- ''(9) निर्वाचन कार्य हेतु कतिपय प्राधिकारियों के कर्मियों को उपलब्ध कराया जाना ।- (क) जब जिला ''(9) निर्वाचन कार्य हेतु कतिपय प्राधिकारियों के कर्मियों को उपलब्ध कराया जाना ।- ''(9) निर्वाचन कार्य हेतु कतिपय प्राधिकारियों के कर्मियों को उपलब्ध कराया जाना ।- ''(9) निर्वाचन कार्य हेतु कतिपय प्राधिकारियों के कर्मियों को उपलब्ध कराया जाना ।- निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) द्वारा किसी निर्वाचन के संबंध में किसी कर्त्तव्य के संपादन हेतु कर्मचारियों को उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया जाएगा, तब संबंधित प्राधिकारी उन कर्मचारियों को, उस संख्या में जो निर्वाचन कर्त्तव्य के संपादन हेतु आवश्यक हो, निर्वाची पदाधिकारी को उपलब्ध कराने हेतु बाध्य होगा। निर्वाचन कर्त्तव्य के अन्तर्गत मतदान, मतगणना, विधि व्यवस्था के संधारण, पेट्रोलिंग, दंडाधिकारी आदि से संबंधित कर्त्तव्य सम्मिलित माने जाएंगे।
(ख) उप खंड ''क'' के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित प्राधिकारी होंगे :- (1) प्रत्येक स्थानीय प्राधिकार (2) कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा-617 में परिभाषित सरकारी कंपनी (3) कोई अन्य संस्था, प्रतिष्ठान या उपक्रम जिसे केन्द्रीय, प्रांतीय या राज्य अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित किया गया है या जिसे केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः प्रदान निधियों द्वारा पूर्णतः या आंशिक नियंत्रित किया जाता है या वित्त प्रदान किया जाता है।''
13. बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-125 के पश्चात् नई धारा का अंतःस्थापन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-125 के पश्चात् नई धारा का अंतःस्थापन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-125 के पश्चात् नई धारा का अंतःस्थापन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-125 के पश्चात् नई धारा का अंतःस्थापन ।-5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 12 अगःत 2009 उक्त अधिनियम की धारा-125 के बाद निम्नलिखित नई धारा अंतःस्थापित की जाएगी, यथा :- ''125-क- (1) अभ्यर्थियों के लिए कतिपय सूचनाएं देना आवश्यक ः- अभ्यर्थियों के लिए कतिपय सूचनाएं देना आवश्यक ः- इस अधिनियम या इसके अभ्यर्थियों के लिए कतिपय सूचनाएं देना आवश्यक ः- अभ्यर्थियों के लिए कतिपय सूचनाएं देना आवश्यक ः- अन्तर्गत बनाए गए नियमों के अन्तर्गत परिदत्त अपने नाम निर्देशन पत्रों के साथ अभ्यर्थी किसी सूचना से भिन्न, जिसे प्रस्तुत करने के लिए वह अपेक्षित है, अपनी अभ्यर्थिता के संबंध में निम्नांकित बिन्दुओं से संबंधित सूचना भी शपथ पर प्रस्तुत करेगा :-
(i) क्या प्रत्याशी पूर्व में किसी आपराधिक कृत्य से दोष सिद्ध/दोष मुक्त/उन्मोचित है। क्या वह कारावास अथवा अर्थदण्ड से दंडित है।
(ii) क्या प्रत्याशी नामांकन दाखिल करने के छह माह पूर्व जिसमें छह महीने से अधिक के कारावास का दण्ड दिया जा सके, के लंबित प्रकरण में आरोपित है और उसमें आरोप तैयार कर लिया गया है अथवा सक्षम विधि न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया गया है, यदि ऐसा हो तो उसका विवरण।
(iii) प्रत्याशी, उसके पति/पत्नी, जैसी भी स्थिति हो, और उसके आश्रितों की परिसंपत्तियों (अचल, चल एवं बैंक में जमा राशि सहित) का विवरण।
(iv) दायित्वों का विवरण यदि कोई हो, विशेष रूप से सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों की अतिशोध्य दायित्वों अथवा राजकीय देयों का विवरण।
(v) प्रत्याशी की शैक्षणिक योग्यताएँ। उपर्युक्त सूचनाओं से संबंधित शपथ पत्र उपलब्ध न कराए जाने पर संबंधित प्रत्याशी का नामांकन संवीक्षा के समय निर्वाची पदाधिकारी द्वारा शपथ पत्र उपलब्ध न कराए जाने के आधार पर निरस्त किए जाने योग्य होगा। उपर्युक्त शपथ पत्र में प्रत्येक प्रत्याशी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना की एक प्रति संबंधित निर्वाची पदाधिकारी के कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाएगी तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया के प्रतिनिधियों को उदारतापूर्वक निःशुल्क तथा अन्य प्रत्याशी या व्यक्ति को आयोग द्वारा निर्धारित शुल्क पर उपलब्ध कराई जाएगी।
यदि कोई प्रतिद्वंदी प्रत्याशी सम्यक रूप से शपथ पत्र पर कोई प्रतिकूल सूचना शपथ पत्र के माध्यम से देता है तब प्रतिद्वंदी प्रत्याशी के ऐसे शपथ पत्र को भी संबंधित प्रत्याशी के शपथ पत्र के साथ उपर्युक्त वर्णित तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा।
अधिनियम और नियमों के अन्तर्गत ही अभ्यर्थी द्वारा सूचना प्रस्तुत करना :- किसी न्यायालय के (2) अधिनियम और नियमों के अन्तर्गत ही अभ्यर्थी द्वारा सूचना प्रस्तुत करना :- अधिनियम और नियमों के अन्तर्गत ही अभ्यर्थी द्वारा सूचना प्रस्तुत करना :- अधिनियम और नियमों के अन्तर्गत ही अभ्यर्थी द्वारा सूचना प्रस्तुत करना :- निर्णय, डिक्री या आदेश या राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देश, आदेश या आदेश में कुछ भी समाविष्ट होने के बावजूद कोई अभ्यर्थी अपने निर्वाचन के संबंध में कोई ऐसी सूचना प्रकट या प्रस्तुत करने के लिए बाध्य नहीं होगा, जिसे इस अधिनियम या इसके अन्तर्गत बनाए गए नियमों के तहत प्रकट या प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है। मिथ्या शपथ पत्र भरने के लिए शास्ति :- जो अभ्यर्थी स्वयं या अपने प्रस्तावक के माध्यम से (3) मिथ्या शपथ पत्र भरने के लिए शास्ति :- मिथ्या शपथ पत्र भरने के लिए शास्ति :- मिथ्या शपथ पत्र भरने के लिए शास्ति :- निर्वाचन में निर्वाचित होने के उद्देश्य से
(क) उप-धारा-(2) से संबंधित सूचना प्रस्तुत करने में असफल होता है या (ख) मिथ्या सूचना देता है जिसे मिथ्या होने की उसे जानकारी है या मिथ्या होने के विश्वास का कारण उसके पास है, या
(ग) परिदत्त नाम निर्देशन पत्र में या अपने शपथ पत्र में किसी ऐसी सूचना को छिपाता है जो परिदत्त किए जाने हेतु अपेक्षित है, वह तत्समय प्रवृत्त विधि में कुछ भी समाविष्ट होने के बावजूद एक अवधि के कारावास से, जिसे एक साल तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा।
निर्वाचन कार्य हेतु परिसर/वाहनों का अधिग्रहण :- (i) यदि राज्य सरकार को यह प्रतीत (4) निर्वाचन कार्य हेतु परिसर/वाहनों का अधिग्रहण :- निर्वाचन कार्य हेतु परिसर/वाहनों का अधिग्रहण :- निर्वाचन कार्य हेतु परिसर/वाहनों का अधिग्रहण :- होता हो कि राज्य के भीतर निर्वाचन के संबंध में -
(क) मतदान केन्द्र के रूप में प्रयोग हेतु या मतदान के पश्चात् मतपेटियों के भंडारण हेतु किसी परिसर की आवश्यकता है या आवश्यकता होने की संभावना है, या
(ख) मतदान केन्द्र से मतपेटियों के परिवहन हेतु या निर्वाचन संचालन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल के सदस्यों के परिवहन हेतु या निर्वाचन कर्त्तव्यों के अनुपालन हेतु किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के परिवहन के लिए किसी वाहन, जलयान या जन्तु की आवश्यकता है या आवश्यकता होने की संभावना है, तो सरकार लिखित आदेश द्वारा उस परिसर या वाहन, जलयान या जन्तु, जो भी स्थिति हो, का अधिग्रहण कर6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 12 अगःत 2009 सकती है और ऐसा अन्य आदेश कर सकती है जो इस अधिग्रहण के संबंध में आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो।
परन्तु किसी ऐसे वाहन, जलयान या जन्तु का अधिग्रहण उस निर्वाचन में मतदान की समाप्ति तक नहीं कर सकती है जो अभ्यर्थी या उसके अभिकर्त्ता द्वारा निर्वाचन कार्य के लिए विधिपूर्वक प्रयुक्त किया जा रहा है।
(ii) संपत्ति पर कब्जा रखने वाले मालिक या व्यक्ति को संबोधित करते हुए राज्य सरकार द्वारा लिखित आदेश के तहत अधिग्रहण किया जाएगा और ऐसा आदेश संबोधित किए गए व्यक्ति को निर्धारित तरीके से तामिल कराया जाएगा। (iii) जब कभी किसी संपत्ति को खंड - (i) के उपखण्ड (क) अथवा (ख) के तहत अधिग्रहण हेतु माँग की जाती है तो उस माँग की अवधि उस अवधि से अधिक नहीं होगी जिसके लिए उस संपत्ति की उस उपखंड में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए अपेक्षा है।
(iv) इस उप-धारा में - (क) परिसर से अभिप्रेत है कोई भूमि, भवन या भवन का भाग और झोपड़ी, शेड या अन्य संरचना या उनका कोई भाग। (ख) वाहन से अभिप्रेत है सड़क परिवहन हेतु प्रयुक्त कोई वाहन या प्रयुक्त किए
जाने योग्य कोई वाहन चाहे यांत्रिक शक्ति द्वारा या अन्यथा चालित हो। (v) जब कभी उक्त खंड (i) तक तहत राज्य सरकार किसी भवन का अधिग्रहण करती है तो हितबद्ध व्यक्तियों को क्षतिपूर्त्ति की राशि का भुगतान किया जाएगा जिसका निर्धारण निम्नांकित को विचार में रखते हुए किया जाएगा :-
(क) परिसर के संबंध में देय किराया या यदि कोई किराया देय नहीं हो तो उस
क्षेत्र में समान परिसर के लिए देय किराया।
(ख) यदि परिसर के अधिग्रहण के फलस्वरूप हितबद्ध व्यक्ति अपना निवास या व्यवसाय स्थल को परिवर्त्तित करने के लिए बाध्य है तो उस परिवर्त्तन से आनुषंगिक युक्तियुक्त व्यय (यदि कोई हो)
परन्तु जहाँ निर्धारित क्षतिपूर्त्ति की राशि द्वारा व्यथित कोई हितबद्ध व्यक्ति निर्धारित समय के भीतर राज्य सरकार को आवेदन करता है कि इस मामले को मध्यस्थ को निर्दिष्ट किया जाए तो भुगतान की जानेवाली क्षतिपूर्त्ति की राशि वही होगी जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ निर्धारित करे। परन्तु जहाँ क्षतिपूर्त्ति प्राप्त करने के हक के लिए या क्षतिपूर्त्ति की राशि के प्रभाजन के लिए कोई विवाद हो तो इसके निर्धारण के लिए सरकार द्वारा इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ को निर्दिष्ट किया जाएगा और उस मध्यस्थ के निर्णय के अनुरूप इसे निर्धारित किया जाएगा। स्पष्टीकरण :- स्पष्टीकरण :- स्पष्टीकरण :- स्पष्टीकरण :- इस उपखंड में वर्णित ''हितबद्ध व्यक्ति'' से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो अधिग्रहण के तुरत पहले धारा के अन्तर्गत अधिग्रहित संपत्ति के वास्तविक आधिपत्य में था या जहाँ कोई व्यक्ति ऐसे वास्तविक आधिपत्य में नहीं था, वहाँ उस परिसर का स्वामी।
(ग) जब कभी उक्त खंड (i) के अनुसरण में राज्य सरकार किसी वाहन जलयान या जन्तु का अधिग्रहण करती है तब उसके मालिक को क्षतिपूर्त्ति की राशि का भुगतान किया जाएगा जिसका निर्धारण राज्य सरकार द्वारा इस वाहन, जलयान या जन्तु के क्षेत्र में प्रचालित किरायों या दरों के आधार पर किया जाएगा।
परन्तु जहाँ निर्धारित क्षतिपूर्त्ति की राशि द्वारा व्यक्ति ऐसे वाहन जलयान या जन्तु का मालिक निर्धारित समय के भीतर राज्य सरकार को आवेदन करता है कि इस मामले को मध्यस्थ को निर्दिष्ट किया जाए तो भुगतान की जानेवाली क्षतिपूर्त्ति की राशि वही होगी जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ निर्धारित करे।
परन्तु जहाँ अधिग्रहित वाहन या जलयान आवश्यकता से तुरत पहले भाड़ा बुक करार के कारण मालिक से भिन्न किसी व्यक्ति के अधिपत्य में हो, वहाँ निर्धारित क्षतिपूर्त्ति की राशि करार के अनुरूप उस व्यक्ति एवं मालिक के बीच आनुपातिक रूप से भुगतेय होगी। करार के व्यक्ति में इसे उस तरीके से निर्गत किया जाएगा जैसा राज्य सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ निर्धारित करे।7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 12 अगःत 2009 (vi) खंड (i) के तहत संपत्ति अधिग्रहण करने या खंड (ंv) के अन्तर्गत देय क्षतिपूर्त्ति का निर्धारण करने के विचार से राज्य सरकार उस संपत्ति से संबंधित किसी सूचना को ऐसे प्राधिकारी को देने का आदेश किसी व्यक्ति को दे सकती है या पेक्षा कर सकती है जिसे आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाएगा।
(vii) परिसर में प्रवेश और निरीक्षण आपिरिसर में प्रवेश और निरीक्षण आपिरिसर में प्रवेश और निरीक्षण आपिरिसर में प्रवेश और निरीक्षण आदि की शक्ति :- द की शक्ति :- द की शक्ति :- द की शक्ति :- राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिकृत कोई व्यक्ति किसी परिसर में प्रवेश कर सकता है और किसी परिसर, वाहन, जलयान या जन्तु का निरीक्षण कर सकता है कि खंड (i) के तहत ऐसे परिसर, वाहन जलयान या जन्तु के संबंध में किस प्रकार का आदेश दिया जाए ताकि उस खण्ड के अन्तर्गत किए गए किसी आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित किया जाए।
(viii) अधिग्रहित परिसर से बेदखली :- अधिग्रहित परिसर से बेदखली :- अधिग्रहित परिसर से बेदखली :- अधिग्रहित परिसर से बेदखली :- (क) खंड (ii) के तहत किसी अधिग्रहित परिसर के आदेश के विपरीत कोई व्यक्ति उस परिसर पर कब्जा रखता है तो राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी द्वारा उसे उस परिसर से संक्षेपतः बेदखल किया जाएगा। (ख) इस प्रकार अधिकृत कोई पदाधिकारी जनता के बीच नहीं आनेवाली किसी महिला को युक्तियुक्त चेतावनी देने और प्रत्याहरण की सुविधा देने के पश्चात् किसी भवन के किसी ताले या चिटकनी को हटा या खोल सकता है या किसी दरवाजे को तोड़ सकता है या उसे बेदखल करने हेतु कोई अन्य कार्य कर सकता है।
(ix) अधिग्रहण से परिसर की मुक्ति :- अधिग्रहण से परिसर की मुक्ति :- अधिग्रहण से परिसर की मुक्ति :- अधिग्रहण से परिसर की मुक्ति :- (क) जब खण्ड (ii) के तहत अधिग्रहित किए गए किसी परिसर को अधिग्रहण से मुक्त किया जाता है तो उसका कब्जा उस व्यक्ति को प्रदान किया जाएगा जिससे परिसर के अधिग्रहण के समय कब्जा लिया गया था या यदि ऐसा कोई व्यक्ति नहीं हो तो राज्य सरकार द्वारा उस परिसर के स्वामी के रूप में माने जानेवाले व्यक्ति को प्रदान किया जाएगा और अधिपत्य का ऐसा परिदान राज्य सरकार को ऐसे परिदान के सभी दायित्वों से पूर्णतः मुक्त करेगा लेकिन परिसर के संबंध में किसी अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा जिसके लिए कोई अन्य व्यक्ति परिसर का कब्जा प्रदान किए जाने वाले व्यक्ति के विरूद्ध कार्रवाई करने हेतु विधि की सम्यक प्रक्रिया के तहत हकदार हो सकेगा।
(ख) जहाँ खण्ड (ii) के तहत अधिग्रहित किसी परिसर के कब्जा को खंड (ix) के अन्तर्गत प्रदान किया जाना हो और वह व्यक्ति नहीं पाया जाए या तुरंत सुनिश्चित नहीं किया जाए या उसकी तरफ से परिदान स्वीकृत करने हेतु कोई अन्य व्यक्ति नहीं हो वहाँ राज्य सरकार द्वारा यह घोषित करते हुए सूचना दी जाएगी कि ऐसे परिसर को अग्रिहण से मुक्त कर दिया गया है। इसे उस परिसर के किसी सहजदृश्य भाग पर लगाया जाएगा और राजपत्र में प्रकाशित करेगा।
(ग) जब उपखंड (ख) में निर्दिष्ट सूचना राजपत्र में प्रकाशित की जाए, तो उस सूचना में विनिर्दिष्ट परिसर उस प्रकाशन की तिथि पर या से अधिग्रहण को समाप्त माना जाएगा और उसके कब्जा के हकदार व्यक्ति को परिदत्त किया हुआ माना जाएगा और राज्य सरकार उस तिथि के बाद किसी अवधि के लिए उस परिसर के संबंध में किसी क्षतिपूर्त्ति या अन्य दावे के लिए दायी नहीं होगी।
(x) अधिग्रहण के संबंध में राज्य सरकार के कार्यों का प्रत्यायोजन अधिग्रहण के संबंध में राज्य सरकार के कार्यों का प्रत्यायोजन ः- :- :- :- राज्य सरकार अधिग्रहण के संबंध में राज्य सरकार के कार्यों का प्रत्यायोजन अधिग्रहण के संबंध में राज्य सरकार के कार्यों का प्रत्यायोजन राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्देशित कर सकती है कि खंड (i) से (ix) तक के किन्ही प्रावधानों द्वारा सरकार को ऐसी शर्त्तों के अन्तर्गत प्रदान कोई शक्तियाँ या अधिरोपित कर्त्तव्य ऐसे अधिकारी या अधिकारियों की श्रेणी द्वारा प्रयुक्त या निर्वहित किया जाएगा, जो विहित किए जाएं। (xi) अधिग्रहण से संबंधित किसी आदेश के उल्लंघन के लिए शास्ति :- अधिग्रहण से संबंधित किसी आदेश के उल्लंघन के लिए शास्ति :- यदि कोई व्यक्ति अधिग्रहण से संबंधित किसी आदेश के उल्लंघन के लिए शास्ति :- अधिग्रहण से संबंधित किसी आदेश के उल्लंघन के लिए शास्ति :- खंड (i) या (vi) के तहत दिए गए आदेश का उल्लंघन करता है तो वह कारावास की सजा, जो एक साल तक के लिए विस्तारित की जा सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डनीय होगा।
14. बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-126 के पश्चात् नई धारा का अंतःस्थापन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-126 के पश्चात् नई धारा का अंतःस्थापन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-126 के पश्चात् नई धारा का अंतःस्थापन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 में धारा-126 के पश्चात् नई धारा का अंतःस्थापन ।- उक्त अधिनियम की धारा-126 के पश्चात् निम्नलिखित नई धारा अंतःस्थापित की जाएगी, यथा :- ''126-क- मत देने का अधिकार :- मत देने का अधिकार :- मत देने का अधिकार :- मत देने का अधिकार :- (1) कोई भी व्यक्ति किसी निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचन में मत नहीं देगा यदि वह इस अधिनियम में निर्दिष्ट किन्हीं निहर्ताओं के अधीन है।8 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 12 अगःत 2009 (2) कोई व्यक्ति समान श्रेणी के एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में साधारण या उप निर्वाचन में मत नहीं देगा और यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में मत देता है तो सभी ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में उसके मत शून्य होंगे।
(3) कोई व्यक्ति समान निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक मत नहीं देगा यद्यपि उसका नाम उस निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक सूची में एक से अधिक बार पंजीकृत हो और यदि वह मत देता है तो उस निर्वाचन क्षेत्रों में उसके सभी मत शून्य होंगे।
(4) कोई भी व्यक्ति किसी निर्वाचन में मत नहीं देगा यदि वह कारावास की सजा या निर्वासन या अन्य स्थिति में या पुलिस की विधिपूर्ण अभिरक्षा में, कारावास में संसीमित हो। परन्तु यह उपधारा किसी ऐसे व्यक्ति के उपर लागू नहीं होगी जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अन्तर्गत निवारक निरोध अन्तर्गत आता है।
(5) उपधारा-(2) एवं (3) में अंतर्विष्ट कोई भी बात ऐसे व्यक्ति पर लागू नहीं होगी जिसे इस अधिनियम के अन्तर्गत निर्वाचक के लिए प्रौक्सी के रूप में मत देने के लिए अधिकृत किया गया हो, जहाँ तक वह ऐसे निर्वाचक के लिए प्रौक्सी के रूप में मतदान करता है।
15. बिहार अधिनियम, 6, 2006 की धारा-130 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 की धारा-130 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 की धारा-130 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 की धारा-130 का संशोधन ।- उक्त अधिनियम की धारा-130 की उपधारा-(16) के स्पष्टीकरण में शब्द-समूह ''और धारा-97 (ख)'' को विलोपित किया जाएगा।विलोपित किया जाएगा।विलोपित किया जाएगा।विलोपित किया जाएगा। 16. बिहार अधिनियम, 6, 2006 की धारा-136 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 की धारा-136 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 की धारा-136 का संशोधन ।- बिहार अधिनियम, 6, 2006 की धारा-136 का संशोधन ।- धारा-136 की उपधारा-(2) निम्नवत् प्रतिस्थापित किया जाएगा एवं दिनांक 10 अपै्रल, 2006 के प्रभाव से प्रतिस्थापित समझा जायगा :-
''यदि किसी स्तर पर ऐसा कोई प्रश्न उठे कि ग्राम पंचायत का मुखिया, पंचायत समिति का सदस्य या जिला परिषद् का अध्यक्ष सहित किसी स्तर के पंचायत का सदस्य, ग्राम कचहरी का सरपंच या ग्राम कचहरी का पंच निर्वाचन के पूर्व या निर्वाचित होने के पश्चात् जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद - 243(च) में प्रावधान किया गया है एवं धारा-135 या धारा-136 की उपधारा-(1) में उल्लिखित निरर्हताओं के अध्यधीन है, तो इस विषय को राज्य निर्वाचन आयुक्त को विनिश्चय के लिए सुपुर्द किया जायेगा। निर्वाचन पूर्व या निर्वाचन के पश्चात् निरर्हता का मामला राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष किसी व्यक्ति या प्राधिकार द्वारा परिवाद, आवेदन या सूचना के रूप में लाया जायेगा। राज्य निर्वाचन आयोग स्वयं भी ऐसे मामलों का संज्ञान ले सकेगा एवं प्रभावित पक्षों को सुनने का पर्याप्त अवसर देते हुए ऐसे मामलों का त्वरित निष्पादन कर सकेगा।
परन्तु यह कि राज्य निर्वाचन आयोग संविघान के अनुच्छेद-243(ण) के साथ पठित अधिनियम की धारा - 137 के प्रावधानों के अनुसार ऐसे किसी परिवाद या आवेदन जो विशुद्ध रूप से निर्वाचन विवाद यथा भ्रष्ट आचरण, गलत तरीके से नामांकन रद्द करने इत्यादि को विचारित करने में सक्षम नहीं होगा।
(2) धारा-136(3) में ''सरपंच'' शब्द के पश्चात् ''या पंच'' ''या पंच'' ''या पंच'' ''या पंच'' शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा।9 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 12 अगःत 2009
उद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतु
बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-2 (क ड) में यथा परिभाषित ''ग्राम'' संविधान के अनुच्छेद-243(छ) में परिभाषित ''ग्राम'' के अनुरूप नहीं है। इससे ग्राम पंचायत में एक या एक से अधिक राजस्व ग्राम सम्मिलित होंगे तथा एक ग्राम पंचायत क्षेत्राधिकार अन्तर्गत एक से अधिक ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाना होगा। संविधान द्वारा ग्राम पंचायत अन्तर्गत एक ही ग्राम सभा आयोजित किये जाने का प्रावधान है। अतएव बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-2 (क ड) को संशोधित करते हुए प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव है। 2. बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-13, 15, 38, 40, 65, 67, 91 एवं 93 में क्रमशः ग्राम पंचायत के सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति के सदस्य, प्रमुख, जिला परिषद् के सदस्य, अध्यक्ष, ग्राम कचहरी के पंच एवं सरपंच के पदों पर विहित रीति से चक्रानुक्रम में स्थान का आरक्षण संबंधी प्रावधान किए गए हैं। उक्त प्रावधान के अन्तर्गत त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं एवं ग्राम कचहरी की अवधि की समाप्ति के उपरान्त प्रत्येक निर्वाचन में आरक्षण की स्थिति परिवर्त्तित हो जानी है। विभाग को विभिन्न स्तरों से यह सुझाव/परामर्श प्राप्त हो रहे हैं कि प्रत्येक आम निर्वाचन में आरक्षण की स्थिति परिवर्त्तित हो जाने संबंधी प्रावधान रहने के कारण त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं एवं ग्राम कचहरी के निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं पदधारकों द्वारा अपने कार्यों में अभिरूची नहीं लेने के कारण कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अतएव दो क्रमिक आम निर्वाचन के पश्चात् विहित रीति से चक्रानुक्रम में आरक्षण संबंधी प्रावधान अधिनियम में करने हेतु उक्त धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव दिया गया है। 3. बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-28 को स्पष्ट करने हेतु संशोधन का प्रस्ताव है। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन सुनिश्चित कराने तथा राज्य निर्वाचन आयोग की प्रभावशीलता बनाए रखने के उद्देश्य से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की तरह बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 में धारा-125(8) के पश्चात् उप-धारा-(9) तथा धारा-125 के पश्चात् धारा-125-क, धारा-126 के पश्चात् धारा-126-क अंतः स्थापित करने का प्रस्ताव है। उक्त अधिनियम की धारा-130 की उप-धारा-(16) के स्पष्टीकरण में कतिपय शब्द भूलवश अंतःस्थापित हो गया, जिसे विलोपित करने का प्रस्ताव है। साथ ही निरहर्ताओं के अधीन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा सुनवाई किये जानेवाले मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए उक्त अधिनियम की धारा-136 की उप-धारा-(2) को नये सिरे से प्रतिस्थापित करने तथा धारा-136 की उपधारा-(3) में ''या पंच'' शब्द छुटा है, जिसे अंतःस्थापित करने का प्रस्ताव है। 4. यही इस विधेयक का उद्देश्य है तथा इसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का मुख्य अभीष्ठ है। (हरि प्रसाद साह)(हरि प्रसाद साह)(हरि प्रसाद साह)(हरि प्रसाद साह) भार साधक सदस्य iVuk% fnukad 28 tqykbZ] 2009
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———— अधी)क, सिचवालय मुिणालय,