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ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââz=ásìâ^2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 4 जनवर(cid:15) 2010 बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2009 [Ñç∫ä∫Ñç∫CNQ]OMMV⁄
प्रस्तावनाः- राजकोषीय प्रबंधन के लिए वित्तीय वर्ष 2009-10 में राजकोषीय घाटा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3.5 (तीन दशमलव पाँच) प्रतिशत स्तर पर बनाये रखने के निर्धारित राजकोषीय लक्ष्य को संशोधित करने हेतु विधेयक । भारत गणराज्य के साठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ- (1) यह अधिनियम बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2009 कहा जा सकेगा । (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा । (3) यह उस तिथि से प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा राजपत्र में इस निमित नियत करे । 2. बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्धन (संशोधन) अधिनियम, 2009 की धारा- 2 में संशोधन ।- बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्धन अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम 5, 2006) की धारा 3 (क) में बिहार अधिनियम 3, 2009 द्वारा किये गये संशोधन ''वित्तीय वर्ष 2008-09 एवं 2009-10 के लिये सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन दशमलव पाँच (3.5) प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2010-11 से सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन (3) प्रतिशत पर बनाये रखेगी'' को ''वर्ष 2008-09 के लिये राजकोषीय घाटा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3.5 प्रतिशत तक तथा वर्ष 2009-10 के लिये राजकोषीय घाटा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के चार प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2010-11 से सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन (3) प्रतिशत स्तर पर बनाये रखेगी'' शब्दावली से प्रतिस्थापित किया जायेगा । 3. बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्धन (संशोधन) अधिनियम, 2009 की धारा- 3 में संशोधन ।- बिहार अधिनियम 5, 2006 की धारा 9 (2)(ख) में बिहार अधिनियम 3, 2009 द्वारा किये गये संशोधन ''वर्ष 2008-09 एवं 2009-10 तक राजकोषीय घाटा को घटाकर सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3.5 प्रतिशत एवं वर्ष 2010-11 से राजकोषीय घाटा को घटाकर सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत तक लायेगी'' को प्रतिस्थापित करते हुए ''वर्ष 2008-09 के लिये राजकोषीय घाटा को घटाकर सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3.5 प्रतिशत तक तथा वर्ष 2009-10 के लिये राजकोषीय घाटा को बढ़ाकर सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 4 प्रतिशत एवं वर्ष 2010-11 से राजकोषीय घाटा को घटाकर सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत तक लायेगी'' शब्दावली से अन्तः स्थापित किया जायेगा ।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 4 जनवर(cid:15) 2010
वित्तीय संलेख
राजकोषीय स्थायित्व एवं सम्पोषनीयता सुनिश्चित करने तथा पर्याप्त राजस्व अधिकोष की प्राप्ति कर राजकोषीय घाटे के लिये निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के निमित बिहार राजकोषीय उत्तदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2006 को अधिनियमित किया गया था । उक्त अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2008-09 एवं 2009-10 के लिये निर्धारित राजकोषीय घाटा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3 (तीन) प्रतिशत से संशोधित कर 3.5 (तीन दशमलव पाँच) प्रतिशत करने के लिये बिहार राजकोषीय उत्तदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2009 (बिहार अधिनियम 3, 2009) को अधिनियमित किया गया । भारत सरकार ने ऋण समेकन और राहत सुविधा मार्गदर्शन (DCRF Guidelines) में संशोधन करते हुए वित्तीय वर्ष 2009-10 में राजकोषीय घाटा के लक्ष्य को सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 3.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 (चार) प्रतिशत करने का निर्णय लिया है । तदनुसार राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्धन अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम 3, 2009) द्वारा किये गये संशोधन में आवश्यक संशोधन कर वर्ष 2009-10 के लिए निर्धारित राजकोषीय घाटा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 4 (चार) प्रतिशत करने के लिए संशोधन विधेयक लाया जा रहा है । इससे राज्य सरकार वर्ष 2009-10 में अतिरिक्त ऋण की उगाही कर सकेगी ।
(सुशील कुमार मोदी) भार-साधक सदस्य
उद्देश्य एवं हेतु
सकल राज्य घरेलु उत्पाद के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटे को वर्ष 2009-10 में 3.5 (तीन दशमलव पाँच) प्रतिशत तक बनाये रखने पर ''ऋण समेकन और राहत सुविधा'' (Debt Consolidation and Relief Facility) प्राप्त होते रहने की अनुशंसा 12वें वित्त आयोग द्वारा प्रतिपादित है और भारत सरकार द्वारा स्वीकृत है । भारत सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष (2009-10) में ऋण समेकन और राहत सुविधा मार्गदर्शन (DCRF Guidelines) को संशोधित कर राजकोषीय घाटा लक्ष्य को चार (4) प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। अतएव, विकास कार्यों पर पूंजीगत व्यय में वृद्धि करने के उद्देश्य से, राज्य सरकार द्वारा लिये जाने वाले ऋणाें/उधारों की सीमा को बढ़ाने के लिये, राजकोषीय घाटा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद अनुपात की प्रतिशत सीमा में संशोधन करना ही इस विधेयक का उद्देश्य है, जिसे अधिनियमित कराना ही इसका अभीष्ट है ।
(सुशील कुमार मोदी) भार-साधक सदस्य
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——— अधी*क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु0ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 12-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in