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बिहार मूल्य वर्द्धित कर (संषोधन) विधेयक, 2009
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बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) में संषोधन करने हेतु विधेयक। भारत गणराज्य के साठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः- 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ। - (1) यह अधिनियम बिहार मूल्य वर्द्धित कर (संषोधन) अधिनियम, 2009 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरंत प्रवृत्त होगा। 2. बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-54 की उप-धारा (1) में संषोधन।-बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-54 की उप-धारा (1) को निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जायेगा : ''(1) पब्लिक लिमिटेड या प्राईवेट लिमिटेड कंपनी से भिन्न प्रत्येक व्यवहारी जिसका सकल आवर्त्त एक करोड़ रूपये से अधिक है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी लेखाकार द्वारा अपने वार्षिक लेखाओं की लेखापरीक्षा इस अधिनियम की धारा-24 की उप-धारा (3) के स्पष्टीकरण के अधीन नियत तिथि के पहले करायेगा।''
वित्तीय संलेख
बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-54(1) के अन्तर्गत उल्लिखित प्रावधान के अनुसार वैसे व्यवसायी जिनका वार्षिक सकल आवर्त्त रू॰ 40 लाख (चालीस लाख) से अधिक है, को अपने लेखा का अंकेक्षण लेखापाल (धारा-54(2) में दी गयी स्पष्टीकरण के अनुसार) से कराना अनिवार्य है । व्यवसायिक संगठनों की मांग है कि इस सीमा को बढ़ाया जाय और इसे पश्चिम बंगाल के तर्ज पर रू॰ 1 करोड़ (एक करोड़) किया जाय । व्यवसायिक संगठनों की यह मांग निम्नाकिंत कारणों से है :- (क) वस्तुओं का मूल्य सूचकांक (Price Index) काफी बढ़ गया है । (ख) रू॰ 1 करोड़ (एक करोड़) वार्षिक सकल आवर्त के दायरे में अब छोटे व्यवसायी भी आ गये हैं । इन व्यवसायियों के लिए अंकेक्षक की सेवा लेना दुश्कर है ।
(ग) पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में सम्प्रति अंकेक्षण की अधिसीमा रू॰ 1 करोड़ है ।
बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-24(3) के अन्तर्गत नियत तिथि तक अंकेक्षित लेखा समर्पित नहीं करने पर अधिनियम की धारा-54(4) के तहत देय कर का प्रतिमाह 2 (दो) प्रतिशत की दर से शास्ति का प्रावधान है। इस कारण रू॰ 40 लाख से एक करोड़ तक के वार्षिक सकल आवर्त्त के व्यवसायियों को शुद्ध आय कम रहने के पश्चात् भी चार्टेड एकाउन्टेंट या कॉस्ट एकाउन्टेंट की सेवा प्राप्त करने हेतु एक बड़ी राशि चुकानी पड़ती है एवं किसी कारणवश समय पर अंकेक्षित लेखा समर्पित न होने की स्थिति में शास्ति के रूप में एक बड़ी राशि भुगतान करने का दायित्व बन जाता है । अतः व्यवसायियों की उक्त मांग का औचित्य को देखते हुए ऊपरवर्णित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संशोधन हेतु विधेयक विधान मंडल के चालू सत्र में लाया जाय । विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।
(सुशील कुमार मोदी) भार साधक सदस्य3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 4 जनवर(cid:15) 2010
उद्देश्य एवं हेतु
बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-54(1) के अन्तर्गत उल्लिखित प्रावधान के अनुसार वैसे व्यवसायी जिनका वार्षिक सकल आवर्त रू॰ 40 लाख (चालीस लाख) से अधिक है, को अपने लेखा का अंकेक्षण लेखापाल (धारा-54(2) में दी गयी स्पष्टीकरण के अनुसार) से कराना अनिवार्य है । व्यवसायिक संगठनों की मांग है कि इस सीमा को बढ़ाया जाय और इसे पश्चिम बंगाल के तर्ज पर रू॰ 1 करोड़ (एक करोड़) किया जाय । व्यवसायिक संगठनों की यह मांग निम्नांकित कारणों से है :- (क) वस्तुओं का मूल्य सूचकांक (Price Index) काफी बढ़ गया है । (ख) रू॰ 1 करोड़ (एक करोड़) वार्षिक सकल आवर्त के दायरे में अब छोटे व्यवसायी भी आ गये हैं । इन व्यवसायियों के लिए अंकेक्षक की सेवा लेना दुश्कर है ।
(ग) पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में सम्प्रति अंकेक्षण की अधिसीमा रू॰ 1 करोड़ (एक करोड़) है ।
बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-24(3) के अन्तर्गत नियत तिथि तक अंकेक्षित लेखा समर्पित नहीं करने पर अधिनियम की धारा-54(4) के तहत देय कर का प्रतिमाह 2 (दो) प्रतिशत की दर से शास्ति का प्रावधान है । इस कारण रू॰ 40 लाख से एक करोड़ तक के वार्षिक सकल आवर्त्त के व्यवसायियों को शुद्ध आय कम रहने के पश्चात् भी चार्टेड एकाउन्टेंट या कॉस्ट एकाउन्टेंट की सेवा प्राप्त करने हेतु एक बड़ी राशि चुकानी पड़ती है एवं किसी कारणवश समय पर अंकेक्षित लेखा समर्पित न होने की स्थिति में शास्ति के रूप में एक बड़ी राशि भुगतान करने का दायित्व बन जाता है । अतः व्यवसायियों की उक्त मांग का औचित्य को देखते हुए ऊपरवर्णित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संशोधन हेतु विधेयक विधान मंडल के चालू सत्र में लाया जाय ।
इस विधेयक को अधिनियमित करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि सामान्य किस्म के व्यापारियों को यह सूविधा प्राप्त हो । इस हेतु विधेयक को अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ठ है ।
(सुशील कुमार मोदी) भार साधक सदस्य
पटना : दिनांक 22 दिसम्बर, 2009
सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा, सचिव, बिहार विधान-सभा।
——— अधी*क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु0ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 13-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in