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विषयः- पटना (यू.ए.) में पदस्थापित राज्य के सरकारी सेवकों को शहरी परिवहन भत्ता (City Transport Allowance) की स्वीकृति के संबंध में ।
केन्द्रीय षष्टम वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में केन्द्रीय कर्मियों के वेतन एवं भत्तों का पुनरीक्षण किया गया था । उक्त के आलोक में केन्द्रीय कर्मियों की भाँति राज्य कर्मियों को पुनरीक्षित वेतन तथा भत्ते आदि पर सम्यक् अनुशंसा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा वेतन समिति का गठन किया गया ।
| वेतनमान (अपुनरीक्षित) | वर्त्तमान दर (परिवहन भत्तानगर क्षतिपूरक भत्ता) | पुनरीक्षित दर (शहरी परिवहन भत्ता) |
| 8000-13500 एवं अधिक | 400 रू0 प्रतिमाह180 रू0 प्रतिमाह | 1000 रू0 प्रतिमाह |
| 6500-10500 से 7500-12000 | 200 रू0 प्रतिमाह100 रू0 प्रतिमाह | 700 रू0 प्रतिमाह |
| 5500-9000 एवं उससे कम | 75 रू0 प्रतिमाह65 रू0 प्रतिमाह | 400 रू0 प्रतिमाह |
4.(i) चलने-फिरने से मजबूर ऐसे विकलांग कर्मी को यह भत्ता सरकारी अस्पताल के आर्थोपेेडिक विभाग के विभागाध्यक्ष के प्रमाण-पत्र पर अनुमान्य होगा ।
(ii) नेत्रहीन कर्मियों को यह भत्ता सरकारी अस्पताल के चक्षु रोग विशेषज्ञ द्वारा प्रदत्त प्रमाण-पत्र के आधार पर अनुमान्य होगा ।
5. परिवहन भत्ता एवं नगर क्षतिपूर्ति भत्ता को एकीकृत करने के फलस्वरूप नगर क्षतिपूरक भत्ता विलोपित किया जाता है ।
6. राज्य सरकार के ऐसे पदाधिकारी जिन्हें सरकारी कार्य हेतु सरकारी वाहन उपलब्ध है, वे आवास से कार्यालय तक आने जाने के लिए भी वाहन का उपयोग कर सकेंगे । ऐसे पदाधिकारियों को परिवहन भत्ता देय नहीं होगा । नोटः- किन पदाधिकारियों को शहरी परिवहन भत्ता (City Transport Allowance) मिलेगा इसकी स्वीकृति सचिवालय स्तर पर विभागीय सचिव और क्षेत्रीय स्तर पर विभागाध्यक्ष/नियंत्री पदाधिकारी द्वारा गाड़ी की उपलब्धता की जाँच करने के बाद दी जायेगी ।
स्वीकृति देने के पूर्व सक्षम पदाधिकारी यह सुनिश्चित कर लेंगे कि "पूल व्यवस्था" करके भी पदाधिकारियों को आवास से कार्यालय तक सरकारी वाहन द्वारा आने जाने की व्यवस्था संभव नहीं है । प्रत्येक मामले में एतद् विषयक आदेश निर्गत होने के पश्चात् ही सक्षम प्राधिकार द्वारा प्राधिकार पत्र निर्गत किया जायेगा ।
7. यह भत्ता अवकाश, प्रशिक्षण, भ्रमण आदि के कारण लगातार 30 दिनों से अधिक समय तक कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहने की स्थिति में देय नहीं होगा ।
8. जहाँ तक उच्च न्यायालय/बिहार विधानसभा/बिहार विधान परिषद् के कर्मियों/पदाधिकारियों को शहरी परिवहन भत्ता (City Transport Allowance) देने का प्रश्न है, इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय/अध्यक्ष, बिहार विधानसभा/सभापति, बिहार विधान परिषद् की स्वीकृति प्राप्त कर संबंधित सचिवालय/कार्यालय द्वारा आदेश निर्गत किया जाएगा ।
9. यह आदेश दिनांक 1 जनवरी 2010 से प्रभावी होगा ।