िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
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राज्य के गृहविहीन महादलित परिवारों को वास हेतु भूमि उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार कृत संकल्प है। इस संकल्प को मूर्त्त रूप देने के लिए महादलित विकास योजना के अन्तर्गत सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि राज्य के गृहविहीन महादलित परिवाराें को प्रति परिवार 3 (तीन) डिसमल की दर से भूमि उपलब्ध करायी जाय।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के द्वारा वर्ष 2008-09 तथा उसके पश्चात् कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में वास रहित महादलित परिवारों की संख्या दिनांक 07.12.2009 तक 2,16,829 आयी है। इनके आवासन के लिए भूमि उपलब्ध कराना सरकार का एक दायित्व है।
सरकार की नीति के तहत सर्वप्रथम सरकारी भूमि की बंदोबस्ती महादलित परिवारों के साथ की जायेगी तथा यदि सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होगी तो प्रति परिवार 3 डीसमल की दर से रैयती भूमि का क्रय कर उन्हें उपलब्ध कराया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि उपलब्ध सरकारी भूमि की बन्दोबस्ती से राज्य के सभी गृहविहीन महादलित परिवारों को आच्छादित नहीं किया जा सकता है। वर्णित स्थिति में कुल 78,493 महादलित परिवारों के वास हेतु 2354.79 एकड़ रैयती भूमि चिन्हित की गयी है। सम्प्रति सरकार द्वारा उक्त रैयती भूमि के क्रय करने की योजना है। (2) क्रय प्रक्रिया के लाभः-दिनांक 07 दिसम्बर 2009 तक सर्वेक्षण द्वारा चिन्हि्त सरकारी भूमि तथा उस भूमि से आच्छादित किए जानेवाले परिवारों के आंकडे निम्नांकित हैः-2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 5 जनवर(cid:15) 2010
| क्रं0 सं0 | सरकारी भूमि की कोटि | चिन्हि्त रकबा | आच्छादित किए जाने वाले परिवारों की संख्या |
| (क) | गैर मजरूआ आम | 1,153.9960 | 37,328 |
| (ख) | गैर मजरूआ खास/मालिक | 1,818.59 | 68.997 |
| 2,972.586 | 1,06,325 |
कुल 78,493 महादलित परिवारों के आवासन के लिए कुल 2,354.79 एकड़ रैयती भूमि चिन्हि्त की गयी है, जिसका लोक निधि से क्रय किया जाएगा।
प्रस्तावित क्रय से निम्नांकित लाभ परिकल्पित हैंः-
(i) लाभुक या लाभुकों का समूह अपनी इच्छा, अभिरूचि एवं आवश्यकता के अनुसार भूमि का चयन कर सकेगा जिसमें क्रेता-विक्रेता दोनों की रजामंदी रहेगी।
(ii) त्वरित रूप से प्रश्नगत भूमि विक्रेता द्वारा क्रेता को अन्तरित की जा सकेगी। (iii) जहां तीस या तीस से अधिक परिवार सामूहिक रूप से वांछित मात्रा में भूमि चिह्नित करके क्रय करेंगे वहां संकुल निर्माण एवं परिसर विकास का पथ प्रशस्त होगा।
(iv) परस्पर सहमति से क्रय विक्रय की व्यवस्था से क्रयोपरान्त क्रेता की दखल-दिहानी सुगम होगी। स्पष्टीकरण (नीति कंडिका 1 तथा 2) :- सरकार के निर्णयानुसार कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार सरकार, के ज्ञापांक-5613 दिनांक 18.11.2009 के द्वारा "चमार" दलित जाति को महादलित श्रेणी में समाविष्ट किया गया है। राज्य में इस महादलित जाति का पारिवारिक सर्वेक्षण कराया जा रहा है। उक्त सर्वेक्षण में प्राप्त तथ्यों तथा आंकड़ों के आलोक में वासरहित "चमार" महादलित जाति के लिए भी सरकारी/रैयती भूमि चिन्हि्त की जाएगी।
नीति कंडिका 1 तथा 2 में उल्लिखित पूर्वोक्त अांकड़े एक कालविन्दु विशेष तक सर्वेक्षण निष्कर्षों को प्रतिबिम्बित करते हैं। चूंकि पारिवारिक एवं सरकारी/रैयती भूमि की शिनाख्त एक सतत प्रक्रिया है, अतएव कालक्रम में इनमें अपेक्षित संशोधन की गुंजाइश रहेगी।
समग्र रूप में विभिन्न महादलित परिवारों के लिए चिन्हि्त हो चुकी या भविष्य में चिन्हि्त होनेवाली रैयती भूमि का लोक निधि से क्रय किया जाएगा।
(3) खासमहाल हस्तक के अन्तर्गत सरकार के स्तर से रैयती भूमि के क्रय का प्रावधानः- इस परिप्रेक्ष्य में बिहार सरकार खासमहाल हस्तक, 1953 का नियम -2 (2) द्रष्टव्य है जिसके अनुसार सरकार निजी अनुबंध से क्रय कर भू-सम्पदा अर्जित कर सकती है। धारा-2 का उद्धरण निम्नवत् हैः-
Government estates- How acquired:- Estates may be acquired by Government in the following ways :-
(1) Purchase at revenue sale (Section 58 of Act XI of 1859).
(2) Purchase by private contract.
(3) Escheat in default of legal heirs.
(4) Forfeiture to Government for certain offences against the State.
(5) Resumption of island chars (Regulation XI of 1825).
(6) Acquisition for public purposes.
(7) Accretion to estates, the property of Government.
(8) Resumption of lands hitherto held by zamindars for the performance of police duties when they are relieved of those duties.
3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 5 जनवर(cid:15) 2010(4) अतः महादलित विकास योजना के तहत भूमिहीन महादलित परिवारों के आवासन हेतु बिहार सरकार खासमहाल हस्तक, 1953 के नियम-2 (2) के तहत रैयती भूमि का क्रय कर लाभुकों के साथ बन्दोबस्त करने का प्रस्ताव है।
(5) (क) निबन्धन हेतु रैयती भूमि के मूल्य का निर्धारण एवं विक्रेता को भुगतान :- निबंधन विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम प्राक्कलित बाजार मूल्य तथा उसमें उक्त न्यूनतम प्राक्कलित बाजार मूल्य की 50 % राशि को जोड़कर प्रश्नगत रैयती भूमि के मूल्य का निर्धारण करते हुए अंचलाधिकारी द्वारा भू-स्वामी विक्रेता को उसका भुगतान किया जाएगा। (ख) वास रहित महादलित परिवार को वास हेतु 3 (तीन) डीसमल रैयती भूमि क्रय कर उपलब्ध कराने हेतु अधिकतम राशि 20,000/-(बीस हजार रूपया) प्रति तीन डिसमिल भूमि प्रति परिवार होगी। (ग) वैसे वास रहित महादलित परिवार, जो BPL श्रेणी में आते हैं, उन्हें वास भूमि क्रय हेतु भारत सरकार एवं बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इंदिरा आवास योजना के तहत 5,000/- 5,000/- रूपया कुल 10,000/- रू0 प्रति परिवार राशि उपलब्ध करायी जाएगी तथा शेष राशि बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा उपलब्ध करायी जाएगी। परन्तु किसी भी परिस्थिति में इंदिरा आवास योजनान्तर्गत कुल राशि भारत सरकार एवं राज्य सरकार के अंशदान सहित कुल राशि निर्धारित अधिसीमा 20,000/-रूपया से अधिक नहीं होगी। (घ) वैसे वास रहित महादलित परिवार, जो APL श्रेणी में आते हैं, उन्हें 3 डीसमल भूमि प्रति परिवार क्रय हेतु सम्पूर्ण राशि राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा उपलब्ध करायी जाएगी। यह राशि किसी भी परिस्थिति में निर्धारित अधिसीमा 20,000/- रूपये से अधिक नहीं होगी।
(6) भूमि क्रय हेतु वित्तीय व्यवस्थाः- (क) महादलित परिवारों के आवासन हेतु आवश्यक निधि योजना एवं विकास विभाग/वित्त विभाग के द्वारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को उपलब्ध करायी जायेगी।
(ख) किसी वित्तीय वर्ष में इस मद में किए गए बजट उपबन्ध के आलोक में किस-किस जिले को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए तथा उस जिले को कितनी राशि आवंटित की जाए, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग इसकी अनुशंसा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से करेगा। तदनुसार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग उस जिले को राशि आवंटित करेगा।
(ग) वास रहित महादलित परिवारों को वास के लिए तीन डिसमिल प्रति परिवार रैयती भूमि क्रय हेतु व्यय किए जाने वाली राशि के लिए मुख्य शीर्ष 2225 के अधीन एक अलग उपशीर्ष खोला जाएगा। राज्य योजना से राशि के व्यय हेतु उद्व्यय प्राप्त की जाएगी। वास रहित परिवारों के लिए भूमि क्रय हेतु राशि की निकासी समेकित निधि से कर विभिन्न जिलों के अंचलाधिकारी को व्यय हेतु उपलब्ध करायी जाएगी। राशि का व्यय तुरन्त नहीं हो सकने की स्थिति में अंचलाधिकारी द्वारा उक्त राशि की निकासी कर मुख्यशीर्ष-''8443 सिविल जमा राशियाँ उप मुख्यशीर्ष-00 लघुशीर्ष-101 राजस्व जमा उपशीर्ष-0001 राजस्व जमा'' में विपत्र कोड-K8443001010001 अंकित कर जमा की जाएगी तथा आवश्यकता के आधार पर इसी शीर्ष से राशि की निकासी विपत्र कोड-L8443001010001 से की जाएगी।
(घ) अंचल अधिकारी चयनित भूमि के लिए विक्रेताओं को भूमि क्रय का मूल्य बैंक चेक के माध्यम से उपलब्ध करायेंगे।
(ङ) राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आवंटन से निम्नांकित कार्य अनुमान्य होंगे :-
(i) भूमि के यथा पूर्वोक्त निर्धारित मूल्य का भुगतान । (ii) सेल डीड राइटर्स को निबन्धन विभाग द्वारा समय-समय पर निर्धारित शुल्क का भुगतान। (iii) अंचल अधिकारी द्वारा नियोजित अमीनों का भुगतान। (iv) जबतक बिहार काशतकारी अधिनियम की धारा-26(A)(ii) के अंतर्गत देय Land Lord's fees के विमुक्ति के सम्बन्ध में निर्णय नहीं होता है तबतक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को प्राप्त आवंटन से इसका भुगतान किया जाएगा।
(v) कार्य सम्पादन हेतु आकस्मिक मद में तथा दस्तावेजों के Scanning पर होने वाला व्यय भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा इस योजना के तहत आवंटित राशि से अनुमान्य होगा।
(7) भूमि क्रय हेतु मुद्रांक भुगतान से छूट ः- भारतीय मुद्रांक अधिनियम की धारा-29 (c) के अनुसार हस्तांतरण पत्र (Conveyance) के मामले में हस्तांतरिती (Grantee) को मुद्रांक ड्यूटी भुगतान करना है। वर्त्तमान मामले में प्रथम संव्यवहार में सरकार भूमि क्रय कर रही है। तथापि भारतीय मुद्रांक अधिनियम की धारा-3 के द्वितीय परन्तुक के खण्ड (1) के अनुसार सरकार के द्वारा या सरकार के पक्ष में निष्पादित किसी भी लिखत पर मुद्रांक ड्युटी देय नहीं होगा। तदनुसार इस नीति के तहत रैयती भूमि क्रय करने पर सरकार के पक्ष में निष्पादित लिखत पर मुद्रांक ड्युटी सरकार पर प्रभार्य नहीं होगा। नोटः- (i) बिहार मुद्रांक नियमावली, 1954 के परिशिष्ट VIII में भारतीय मुद्रांक अधिनियम, 1899 की धारा-9 के अधीन दी गयी विमुक्तियों (Exemptions) की सूची के भाग-II (खंड E) के क्रमांक 16 के अनुसार4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 5 जनवर(cid:15) 2010 किसी व्यक्ति को सरकार द्वारा हस्तान्तरित (granted) कीे गयी भूमि के हस्तान्तरण पत्र (Conveyance) से सम्बन्धित लिखत को स्टाम्प ड्युटी की देयता से विमुक्त किया गया है।
(ii) एस0 ओ0-900 दिनांक-18.12.1990 द्वारा प्रकाशित निबंधन शुल्क तालिका में वर्णित विमुक्तियों की कंडिका (1) के अनुसार सरकार के द्वारा या सरकार के पक्ष में निष्पादित ऐसे विलेखों पर जिनमें मुद्रांक ड्युटी देय नहीं हो, निबंधन शुल्क भी विमुक्त रहेगा।
(iii) उपर्युक्त लिखत/विलेखों को कम्प्यूटरीकृत निबन्धन व्यवस्था के अन्तर्गत जिला स्कोर द्वारा प्रभार्य सेवा शुल्क से विमुक्त किया जाता है।
(8) प्रति परिवार भूमि क्रय की अधिसीमा एवं अवस्थिति :- सरकार द्वारा अधिकतम 3 डीसमल प्रति परिवार के अनुसार भूमि क्रय कर उस भूमि को उसी सेल डीड के द्वारा लाभुक के साथ बन्दोबस्त किया जायेगा। उपर्युक्त भूमि ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थित होगी।
(9) मानक सेल डीड में निबन्धन- परिशिष्ट-1 पर संलग्न मानक सेल डीड (Standard sale deed) में भूमि का निबंधन किया जायेगा।
(10) लाभुक की अवस्थितिः- लाभुक उसी मौजा या निकटवर्ती मौजों का बाशिंदा होना चाहिए। (11) क्रय भूमि की बन्दोबस्ती में महिलाओं के लिए आरक्षणः- इस योजना के तहत क्रय की गई शत प्रतिशत भूमि संबंधित लाभुक परिवारों की महिलाओं के साथ बन्दोबस्त की जायगी। यदि लाभुक के परिवार में महिला नहीं हो तो पुरूष के साथ भूमि की बन्दोबस्ती की जायेगी। (12) क्रय की गई भूमि के अन्तरण पर रोक :-लाभुक या उसके उत्तराधिकारी द्वारा क्रय की गई भूमि का किसी प्रकार से अन्तरण नहीं किया जा सकता है। परन्तु इस नीति के अन्तर्गत क्रय की गई भूमि लाभुक के उत्तराधिकारियों को अनुवांशिक रूप से प्राप्तव्य (heritable) होगी। (13) क्रय की गई भूमि का उपयोगः- लाभुक एवं उसके उत्तराधिकारी द्वारा क्रय की गयी भूमि का उपयोग मूलतः आवासीय प्रयोजन से किया जाएगा। तथापि, एकल या संकुल पारिवारिक आवासन में भूमि के आवासीय उपयोग के बाद, उपलब्ध रिक्त भूमि पर लाभुक/लाभुकों के द्वारा लघु एवं कुटीर उद्योग, लघु वाणिज्य-व्यवसाय, फलदार या अन्य वृक्षारोपण, सब्जी, मसालों आदि की खेती, पशुपालन, सरकार द्वारा सृजित सामुदायिक हित की संरचना का निर्माण आदि अनुमान्य होंगे। (14) क्रय की गई भूमि से सम्बन्धित सूचना का संधारणः-अंचल अधिकारी एक अलग पंजी में इस योजना के तहत क्रय की गई भूमि से सम्बन्धित सम्पूर्ण विवरणी मौजा वार संधारित करेंगे तथा उसकी एक प्रति जिला कार्यालय में भी संधारित की जायेगी। (15) क्रय की गयी भूमि के दस्तावेजों एवं रोकड़बही का संधारणः- दस्तावेजों, रोकड़बही आदि की मूल प्रति अंचल कार्यालय में संधारित होगी तथा सुरक्षा प्रयोजन से उसकी दूसरी प्रति भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के कार्यालय में Scan करके संधारित की जाएगी। इस कार्य के सम्पादन हेतु आकस्मिक मद में सम्भावित व्यय भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा इस योजना के तहत आवंटित राशि से अनुमान्य होगा। (16) क्रय की गयी भूमि का संरक्षण एवं लाभुकों के हितों की रक्षाः-महादलित योजना के तहत वास रहित महादलित परिवार के वास हेतु क्रय की गयी भूमि के संरक्षण एवं लाभुक के हितों के रक्षा का दायित्व सम्बन्धित भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, जिसके क्षेत्राधिकार में प्रश्नग्त भूमि अवस्थित होगी, का होगा। (17) लाभुक के सहायतादाता (Facilitator) के रूप में अंचलाधिकारी के दायित्वः-
(i) लाभुक द्वारा प्रश्नगत् भूमि (3 डीसमल) की तलाश करने में अंचलाधिकारी सहायतादाता (facilitator) की भूमिका का निर्वहण करेंगे।
(ii) अंचलाधिकारी अंचलों में संधारित सर्वेक्षित भूमिहीन महादलित परिवारों की सूची के आलोक में उन्हें इस आशय की सूचना भेजेंगे कि सरकारी लागत पर उन्हें प्रति परिवार 3 डीसमल की दर से वासगीत प्रयोजन से रैयती भूमि निबंधन विभाग द्वारा निबंधन हेतु निर्धारित न्यूनतम प्राक्कलित बाजार मूल्य तथा उसमें उक्त मूल्य की 50% राशि जोड़कर भुगतान करते हुए सरकार द्वारा क्रय करके उपलब्ध करायी जायेगी। अतः वे संभावित विक्रेताओं से सम्पर्क स्थापित कर भूमि/विक्रेता की पहचान करेंगे एवं पहचानोपरान्त अंचल कार्यालय में इस प्रयोजन से गठित विशेष कोषांग में भूमि तथा विक्रेता की उपलब्ध विवरणी उपलब्ध करायेंगे।
(iii) अंचलाधिकारी प्रयास करेंगे कि क्रय की जानेवाली भूमि का चयन संकुल (cluster) के रूप मे हो ताकि संकुल परिसर में अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग अन्य सुविधाएँ मुहैया करा सके। इस हेतु भी वे सहायतादाता (facilitator) का कार्य करेंगे तथा जहां जहां 30 या अधिक परिवाराें का संकुल सृजित होगा, उसकी सूचना अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग को देंगे।
(iv) प्रश्नगत् भू-खण्ड का चयन लाभुक सम्प्रति जिस मौजा में निवास कर रहा हो, उसमें अथवा उसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र से ही की जायेगी।5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 5 जनवर(cid:15) 2010 (v) भूमि क्रय में राजस्व विभाग द्वारा पूर्व से चिह्नित रैयती भूमि को भी ध्यान में रखा जायगा। यदि लाभुक या भू-धारी इच्छुक नहीं हों तो लाभुक द्वारा चिह्नित एवं विक्रेता से तय की गयी अन्य भूमि का क्रय किया जाएगा।
(vi) यदि लाभुक एक संकुल के रूप में भूमि का क्रय करते हैं तो वहाँ महादलित विकास से सम्बन्धित अन्य योजनाएँ भी क्रियान्वित की जा सकेंगी एवं भू-भाग का आवासीय अंश तदनुसार 3 डीसमल के अन्दर निर्धारित किया जायेगा, जिसमें आवास के अतिरिक्त अन्य सुविधाएँ भी शामिल हाेंगी।
(vii) लाभुकों का आवेदन पत्र प्राप्त होने पर अंचलाधिकारी एक सप्ताह के अन्दर अपने राजस्व अभिलेखों से विक्रेता के स्वत्वाधिकार की जाँच कर लेंगे तथा स्थलीय जांच में विचारगत भू-खंड पर विक्रेता के दखल का सत्यापन भी कर लेंगे। सही पाये जाने वाले समस्त मामलों का निबन्धन अवर निबन्धन/निबन्धन कार्यालय परिसर में शिविर आयोजित करके किया जाएगा। शिविर आयोजित करने की सूचना निबंधन कार्यालय एवं बैंकाें सहित सभी संबंधित को दी जायेगी।
(viii) अंचलाधिकारी यह प्रमाण पत्र निर्गत करेंगे जिसमें अंकित रहेगा कि किन-किन राजस्व अभिलेखों के आलोक में विक्रेता का विक्रय अधिकार पाया गया है। उक्त प्रमाण पत्र में दखल स्तम्भ देकर आवश्यक प्रविष्टि भी की जाएगी। वे यह भी प्रमाणित करेंगे कि प्रश्नगत् भूमि का क्रय महादलित विकास योजना के तहत किए जाने के प्रयोजन से उपर्युक्त प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है। प्रमाण पत्र पूर्वाग्रह- रहित (without prejudice) निर्गत किया जायेगा।
(ix) अंचलाधिकारी, अंचल निरीक्षक एवं हल्का कर्मचारी प्रश्नगत् भूमि की खरीद-बिक्री की निर्धारित तिथि को संबंधित निबंधन कार्यालय स्थित शिविर में आवश्यक कागजात के साथ स्वयं उपस्थित रहेंगे।
(x) संबंधित अंचलाधिकारी जमीन की नापी, सीमांकन एवं संबंधित सेल डीड में संलग्न करने के लिए प्रश्नगत् भू-खण्ड का स्केच मैप तैयार करने के लिए अपने स्तर से उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार वांछित संख्या में अमीनों को चिह्नित एवं कार्यरत करायेंगे। प्रत्येक अमीन को रू0 200/- (दो सौ रूपए) प्रति भूखण्ड (plot) पारिश्रमिक अनुमान्य होगा। (xi) अंचलाधिकारी संबंधित विक्रेता से इस आशय का शपथ-पत्र प्राप्त कर लेंगे कि उन्हें बिक्री का अधिकार है तथा जमीन अवभार मुक्त (encumbrance- free) है।
(xii) अंचलाधिकारी निबंधन कार्यालय से प्रश्नगत भूमि का अवभार मुक्त प्रमाण पत्र (non- encumbrance certificate) प्राप्त करेंगे।
(xiii) निबंधन शिविर के दिन क्रेता एवं विक्रेता की पहचान के लिए पंचायत के वार्ड सदस्य एवं पंच सक्षम होंगे। अगर दोनों में कोई उपलब्ध नहीं रहा तो कोई भी ग्राम-वासी उपर्युक्त पहचान कर सकेंगे पहचान की कार्रवाई अभिलेखबद्ध की जाएगी।
(xiv) अंचलाधिकारी विक्रेता को यथा पूर्वोक्त निर्धारित बाजार मूल्य Post dated चेक के द्वारा भूमि के निबन्धन के दिन भुगतान करेंगे एवं इस दरम्यान दाखिल-खारिज तथा दखल-दिहानी की आवश्यक कार्रवाई पूरी करेेंगे।
(xv) अंचलाधिकारी क्रय-विक्रय शिविर को संबंधित निबंधन कार्यालय में लगाने की तिथि एवं समय निर्धारित करेंगे एवं सभी संबंधित को औपचारिक रूप से सूचित करेंगे।
(xvi) सेल डीड के साथ क्रय किए जाने वाले भू-खण्ड का स्केच मैप भी संलग्न किया जायेगा। (18) अनुश्रवण, पर्यवेक्षण एवं मूल्यांकनः- निम्नांकित स्तरों पर महादलित वास भूमि क्रय योजना के क्रियान्वयन के अनुश्रवण एवं समकालीन मूल्यांकन (Concurrent evaluation) के लिए समितियाँ गठित की जायेंगी तथा यथावश्यक अनुदेश निर्गत किए जाएंगेः-
| क्रमांक | स्तर | समिति के गठन का दायित्व एवं अध्यक्षता |
| 1 | प्रमण्डल | प्रमण्डलीय आयुक्त |
| 2 | जिला | समाहर्त्ता |
| 3 | अनुमण्डल | अनुमण्डल पदाधिकारी |
प्रमण्डलीय आयुक्त, समाहर्त्ता तथा संबंधित अनुमण्डल पदाधिकारी इस नीति के कार्यान्वयन में स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं के निराकरण हेतु समिति में विचार-विमर्श कर आवश्यक कारवाई करेंगे। (19) बिहार महादलित विकास योजनान्तर्गत रैयती भूमि की क्रय नीति संकल्प निर्गत की तिथि से प्रभावी होगी। (20) आदेश दिया जाता है कि संकल्प की प्रति बिहार गजट के विशेष अंक में प्रकाशित की जाय एवं सभी विभागों/विभागाध्यक्षों के बीच परिचालित की जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सी0 अशोकवर्धन, प्रधान सचिव।
——— अधी+क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु0ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 20-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in