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सं0 वि0स0वि0-22/2010-1186/वि0स0।—''दीघा अर्जित भूमि बन्दोबस्ती विधेयक, 2010'', जो बिहार विधान-सभा में दिनांक 31 मार्च, 2010 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान-सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।
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दीघा अर्जित भूमि बन्दोबस्ती विधेयक, 2010
प्रस्तावनाः-चूँॅंकि, नागरिकों के लिये शहरी आवास की सुविधाएँ विकसित करने तथा उपलब्ध करने के उद्देश्य से बिहार राज्य आवास बोर्ड, कानूनी निकाय, के लिये पटना नगर निगम के अंतर्गत दीघा में बिहार सरकार द्वारा 1024.52 एकड़ भूमि अर्जित की गयी थी,
चूँॅंकि, कतिपय भू-धारियों द्वारा अर्जन प्रक्रिया को चुनौती दी गयी थी और मामला भारत के उच्चतम न्यायालय तक गया, जिसमें अर्जन की प्रक्रिया कोे सही ठहराया गया,
चूँॅंकि, अर्जन पूरा किया गया था और अधिनिर्णय सुनाया गया था,
चूँॅंकि, अर्जन और विकास की लागत को पूरा करने के लिये बोर्ड ने कतिपय निर्बंधनों और शत्र्तों पर वित्तीय संस्थानों से ब्याज युक्त ऋण लिया,
चूँॅंकि, बोर्ड ने अर्जन लागत मद में लगभग 17.42 करोड़ रुपये की राशि समाहरणालय, पटना में जमा की है,
चूँॅंकि, अर्जन की लंबी प्रक्रिया के दौरान तथा अर्जन के बाद भी पूर्व के भू-स्वामियों ने, इस बात के होते हुए भी कि ऐसे भू-धारियों को अंतरिम भूमि में कोई हक नहीं है, अप्राधिकृत ढंग से अर्जित भूमि के विभिन्न भागों का कब्जा महानगरों मेंं रजिस्ट्रीकृत अंतरण विलेख के माध्यम से अथवा वकालतनामा के माध्यम से अथवा किसी अन्य लिखित लिखत के माध्यम से विभिन्न सहकारी समितियों को/व्यक्तियों को सौंप दिया,
चूँॅंकि, बीते समय में उक्त अर्जित भूमि का लगभग 600 एकड़ का बड़ा हिस्सा अप्राधिकृत ढंग से ऐसी सोसाइटी/व्यक्तियों द्वारा दखल कर लिया गया है और वे मकान बनाकर उसमें रह रहे हैं,
चूँॅंकि, सिवाय छोटे क्षेत्र में यत्र-तत्र अप्राधिकृत निर्माण के, शेष अर्जित भूमि में से लगभग 400 एकड़ में से अधिकांशतः अप्राधिकृत निर्माण से मुक्त है,
चूँॅंकि, अर्जित भूमि पर प्रस्तावित आवास योजना के निष्पादन में राज्य सरकार और इसकी एजेंसियों की ओर से निष्क्रियता बरते जाने का अभिकथन करते हुए एक सामाजिक संगठन ने वर्ष 1987 में पटना उच्च न्यायालय के समक्ष लोक हित मुकदमा दायर किया गया था,
चूँॅंकि, पटना उच्च न्यायालय ने अप्राधिकृत अधिभोगियों को हटाने तथा अर्जित भूमि से काटकर बनाये गये भूखंडों का आवंटन विभिन्न कोटियों के आवेदकों को करने के संबंध में तथा अर्जित भूमि पर प्रस्तावित आवास योजना के निष्पादन के संबंध में समय-समय पर अनेक आदेश पारित किया और तदनुसार पटना उच्च न्यायालय के उक्त आदेशों के अधीन बोर्ड द्वारा प्रस्तावित आवास योजना के निष्पादन के लिये राज्य सरकार, जिला प्रशासन की सहायता से सभी संभावित कदम उठाये गये किन्तु मुख्यतः पूर्व के भू-स्वामियों की दुरभिसंधि में अप्राधिकृत अधिभोगियों के अत्यधिक प्रतिरोध के कारण वे सभी निरर्थक साबित हुए। फलस्वरूप विधि-व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी,
चूँॅंकि, उक्त तथ्यगत स्थिति को ध्यान में रखते हुए पटना उच्च न्यायालय ने भी माना कि राज्य सरकार और बोर्ड के अधीन के भूखंडों का आवंटन के लिये ऐसी स्कीम बनाने का प्रयास किया जाए, जिसमें अप्राधिकृत अधिभोगियों और आवेदकों का हित सम्मिलित हो,
चूँकि, पूर्व के भू-स्वामी ने अभ्यावेदन किया है तथा भू-अर्जन अधिनियम की धारा-4 के अधीन अधिसूचना की तारीख को प्रचलित बाजार मूल्य निम्नतर होने के कारण और तत्पश्चात् अर्जित भूमि के मूल्यांकन में तीव्र वृद्धि होने के कारण अतिरिक्त राशि की माँग की है,3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 चूँॅंकि, यह समीचीन समझा जाता है कि संपूर्ण अर्जित क्षेत्र को दो कोटियों में वर्गीकृत किया जाय, एक वह जो अधिकांशतः अप्राधिकृत अधिभोग में है और दूसरा वह जिसमें से अधिकांशतः अप्राधिकृत अधिभोग/अधिग्रहण से मुक्त है, मात्र यत्र-तत्र छोटे-छोटे क्षेत्र में कुछ निर्माण किया गया है,
चूँॅंकि, परेशानीवाली इस समस्या के समाधान के मद्देनजर भूमि की बन्दोबस्ती तथा खाली क्षेत्र को कब्जा में लेने के लिये यह लाजिमी माना गया है कि बोर्ड को अथवा किसी अन्य विशेष प्रयोजन माध्यम को प्राधिकृत करने वाली विधि बनाई जाय,
भारत गणराज्य के इकसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय-I
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।- (1) यह अधिनियम दीघा अर्जित भूमि बन्दोबस्ती अधिनियम, 2010 कहा जा सकेगा।
(2) यह उस तारीख से प्रवृत्त होगा जो सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करें।
(3) यह बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रयोजनार्थ दीघा, पटना में सरकार द्वारा अर्जित सम्पूर्ण 1024.52 एकड़ भूमि पर लागू होगा।
2. परिभाषाएँ।- जब तक विषय या संदर्भ में कोर्ई प्रतिकूल बात न हो, इस अधिनियम मेें -
(क) '' अर्जित भूमि '' से अभिप्रेत है, बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रयोजनार्थ दीघा, पटना में बिहार राज्य द्वारा अर्जित 1024.52 एकड़ भमि,
(ख) ''आवंटिती'' से अभिप्रेत है बिहार राज्य आवास बोर्ड (आवासीय भू-सम्पदा का प्रबंधन एवं निस्तार) विनियमावली, 1983 के अधीन यथा परिभाषित आवंटिती।
(ग) ''आवेदक'' से अभिप्रेत है वैसे व्यक्ति/व्यक्तियों जिन्होंने बोर्ड के पास अग्रिम धन के साथ विहित प्रक्रिया द्वारा दीघा में अर्जित भूमि में भूखण्ड/मकान/फ्लैट के आवंटन के लिए आवेदन दिया हो।
(घ) ''प्राधिकार'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा-9 के अधीन गठित प्राधिकार।
(ड.) '' बोर्ड'' से अभिप्रेत है बिहार राज्य आवास बोर्ड अधिनियम, 1982 के अधीन गठित बिहार राज्य आवास बोर्ड ।
(च) ''भवन'' में सम्मिलित है कोई संरचना या संरचना का भाग, जो आवासीय वाणिज्यिक या अन्य प्रयोजनों हेतु अर्जित भूमि में उपयोग के लिये आशायित हो।
(छ) ''अध्यक्ष (चेयरमैन)'' से अभिप्रेत है बोर्ड का अध्यक्ष।
(ज) ''अध्यक्ष (चेयरपरसन)'' से अभिप्रेत है प्राधिकार का अध्यक्ष।
(झ) ''प्रतिपूर्ति'' से अभिप्रेत है भू-अर्जन अधिनियम के उपबंध के अनुसार किये गये अधिनिर्णय के अधीन पूर्व के भू-स्वामियों को उनकी सुसंगत भूमि के अर्जन के विरूद्ध भुगतान की गयी/भुगतेय रकम।
(ञ) ''पूर्व के स्वामी में ऐसे व्यक्ति सम्मिलित हैं जिनकी भूमि बोर्ड के प्रयोजनार्थ दीघा, पटना में बिहार राज्य द्वारा अर्जित की गयी थी।
(ट) ''अनुग्रह राशि'' से अभिप्रेत है, भू-अर्जन अधिनियम के उपबंधों के अनुसार उन्हें पूर्व में भुगतान की गयी/भुगतेय प्रतिपूर्ति के अतिरिक्त, बोर्ड के लिये अर्जित उनकी सुसंगत भूमि के विरुद्ध रजिस्ट्रीकृत4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 विक्रय विलेख के माध्यम से अथवा किसी अन्य लिखित लिखत के माध्यम से पूर्व के भू-स्वामियों या उनके अंतरितियों को भुगतान की जाने वाली बोर्ड द्वारा निर्धारित एवं सरकार द्वारा अनुमोदित राशि।
(ठ) ''प्रबंध निदेशक'' से अभिप्रेत है- बोर्ड का प्रबंध निदेशक।
(ड) ''सरकार'' से अभिप्रेत है - राज्य सरकार।
(ढ) ''विहित'' से अभिप्रेत है- इस अधिनियम के अधीन बनाये गये नियम या किया गया आदेश या जारी अधिसूचना।
(ण) ''नियमावली'' से अभिप्रेत है - इस अधिनियम के अधीन बनाई गयी नियमावली।
(त) ''स्कीम'' से अभिप्रेत है- इस अधिनियम के अधीन बनाई गयी स्कीम।
(थ) ''सचिव'' से अभिप्रेत है - बोर्ड के सचिव।
(द) ''सेटली'' से अभिप्रेत है- ऐसा अप्राधिकृत अधिभोगी जो वाणिज्यिक भवन या आवासीय भवन निर्माण सहित अर्जित भूमि के अनधिकृत अधिभोगी है और जिसके जिम्मे अर्जित भूमि का भाग आवासीय मकान या वाणिज्यिक भवन के निर्माण के साथ अप्राधिकृत दखल में पाया गया और वह इस अधिनियम की धारा-3 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बोर्ड द्वारा बनाई गयी स्कीम के अधीन उसके द्वारा बन्दोबस्त किया गया।
(ध) ''बन्दोबस्ती'' से अभिप्रेत है - बोर्ड की दीघावाली भूमि की सेटली को बन्दोबस्ती जो उन लोगों के कब्जे में है जो न तो आवेदक हैं और न बोर्ड द्वारा आवंटन प्राप्त किन्तु आवासीय मकान, कोई अन्य आवासीय/वाणिज्यिक निर्माण कर लिया है, जिसकी बन्दोबस्ती बनायी गयी स्कीम के अधीन की जा सकेगी।
(न) ''बन्दोबस्ती प्रभार'' से अभिप्रेत है - इस अधिनियम की धारा-3 के अधीन बन्दोबस्ती के लिए स्कीम बनाते समय बोर्ड द्वारा अवधारित तथा राज्य सरकार द्वारा अनधिकृत अधिभोगी के अधीन अर्जित भूमि के भाग को बन्दोबस्ती के लिए अनुमोदित और बोर्ड द्वारा सम्बद्ध अनधिकृत अधिभागी से प्रभारित की जाने वाली रकम।
(प) ''राज्य'' से अभिप्रेत है - बिहार राज्य (फ) ''अंतरिती'' से अभिप्रेत है - वह व्यक्ति/वे व्यक्ति जिन्हें अर्जित भूमि के अर्जन के पश्चात् लिखित लिखत/लिखतों के माध्यम से पूर्व के संबंद्ध भू-स्वामी/भू-स्वामियों द्वारा अर्जित भूमि से भू-खण्ड/भू-खण्डों का अन्तरण किया गया है।
(ब) ''अप्राधिकृत अधिभोगी'' में वे व्यक्ति सम्मिलित हैं जो अर्जित भूमि के अर्जन के पश्चात् रजिस्ट्रीकृत विक्रय विलेख या किसी अन्य लिखित लिखत के माध्यम से भूखंडों का विधि विरूद्ध क्रय कर उस भूमि पर किसी वैद्य/हक और विधिक प्राधिकार के बिना आवासीय मकान/वाणिज्यिक भवन निर्माण कर बस गये हैं । (भ) ''सेक्टर'' से अभिप्रेत है - बिहार राज्य आवास बोर्ड अधिनियम, 1982 के अधीन बोर्ड द्वारा अर्जित भूमि के लिए तैयार अभिन्यास योजना में निदेशित बारह आसपास सेक्टर।
अध्याय-।।
3. स्कीम बनाने और उसे कार्यान्वित करने की बोर्ड की शक्तियॉं।—इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के अध्यधीन, बिहार राज्य आवास बोर्ड अधिनियम, 1982 के अध्याय-IX या इस अधिनियम के उपबंध के प्रतिकूल, किसी अन्य विधि में किये गये उपबंधों के होते हुए भी, ऐसे निर्बंंधनों और शत्र्तों पर, जो बोर्ड स्कीम के प्रवत्र्तन और कार्यान्वयन के लिये समुचित और न्यायोचित5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 समझे, सुसंगत अधिभोगी को अप्राधिकृत अधिभोग वाले सुसंगत क्षेत्र का औपचारिक आवंटन अप्राधिकृत अधिभोगी के पक्ष में करके अर्जित भूमि की बन्दोबस्ती के लिये स्कीम बनाएगा;
परन्तु, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से बोर्ड बन्दोबस्ती प्रभार और अनुग्रह राशि भी अवधारित करेगाः-
परन्तु यह और कि, कोई स्कीम बनाते समय बोर्ड, ब्याज और विकास प्रभारों के भुगतान सहित भू-अर्जन की लागत वसूल करने के अपने अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निम्नलिखित मानदंड पर भी विचार करेगा -
(क) राजस्व के हित में तथा अप्राधिकृत अधिभोगियों के हित में बोर्ड उस व्यक्ति/उन व्यक्तियों को भूमि बन्दोबस्त कर सकेगा, जिन्होंने बोर्ड की भूमि पर आवासीय मकान या वाणिज्यिक भवन का निर्माण कर कब्जा किये हुये हैं,
(ख) बोर्ड पूर्व के उन भू-स्वामियों या उनके अंतरितियों के हित पर भी विचार कर सकेगा जो अभ्यापत्ति के अधीन प्रतिपूर्ति की रकम प्राप्त करने से वंचित रहे हैं और जिन्होंने अपना कब्जा निर्निहित कर दिया हो और अभ्यापत्ति के अधीन तथा भू-अर्जन अधिनियम की धारा-4 के अधीन अधिसूचना के तारीख को प्रचलित मूल्य से अर्जित भूमि का बाजार मूल्य कम रहने के कारण प्रतिपूर्ति की रकम प्राप्त करने से वंचित रहे ।
(ग) बोर्ड अप्राधिकृत अधिभोगियों के पक्ष में बन्दोबस्ती प्रभार अवधारित करने का हकदार होगा तथा अर्जन की लागत, ऋण पर ब्याज, विकास प्रभार, पूर्व के भू-धारियों या अंतरितियों को भुगतान की जानेवाली अनुग्रह रकम तथा आवंटिती/आवेदकों द्वारा जमा की गयी राशि की ब्याज सहित वापसी आदि अवयवों को ध्यान में रखेगा,
परन्तु ऐसे अप्राधिकृत अधिभोगियों की इक्विटी और मानवीय पहलू पर भी विचार करेगा, जो मकान बनाकर कई वर्षों से लगातार अधिभोग कर रहे हैं,
परन्तु यह और कि बोर्ड बन्दोबस्ती प्रभार एकमुश्त या कुछ किश्तों में वसूल कर सकेगा। (घ) ऐसी बन्दोबस्ती के लिये बोर्ड बन्दोबस्ती प्रभार उस व्यक्ति/उन व्यक्तियो से वसूल करेगा जो ऐसा कब्जा रखते हों और बोर्ड द्वारा यथा अनुमोदित सम्यक् रूप से भरा फारम इसके संबंध में प्रस्तुत करते हैं, (ड.) पूर्व के भू-स्वामियों या अंतरितियों के लिये अनुग्रह रकम अवधारित करते समय बोर्ड अप्राधिकृत अधिभोगियों के पक्ष में भूमि की बन्दोबस्ती किये जाने पर वसूल किये जानेवाले धन को ध्यान में रख सकेगा।
(च) बोर्ड को ऐसे अप्राधिकृत अधिभोगियों को बेदखल करने का अधिकार होगा जो पटना से प्रकाशित दो स्थानीय समाचार पत्रों में दी गयी नोटिस पर ऐसी नोटिस के साठ दिनों के भीतर स्कीम को स्वीकार करने तथा बोर्ड द्वारा यथा अवधारित बन्दोबस्ती प्रभार को चुकाने के लिये आगे नहीं आते और बेदखल किये जाने की स्थिति में सभी संरचनाओं सहित भूमि किसी ऋणभार से पूर्णतः मुक्त बोर्ड में निहित हो जाएगी तथा बोर्ड उसे यथोचित एवं यथा उपयुक्त रीति से किसी को भी आवास के लिये अथवा किसी अन्य लोक प्रयोजन के लिये बन्देाबस्त कर सकेगा।
(छ) बोर्ड द्वारा दी गयी नोटिस के 60 (साठ) दिनों के भीतर किसी भी कारण से जवाब देने में अप्राधिकृत अधिभोगी या पूर्व के भू-स्वामी/अंतरीतियों की विफलता की दशा में बन्दोबस्ती/अनुग्रह रकम के लिये उनका कोई दावा समाप्त हो जाएगा।6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 4. आवंटनों का रद्दकरण और आवंटितियों/आवेदकों द्वारा बोर्ड में जमा कराई गयी रकम का ब्याज सहित वापसी।- बिहार राज्य आवास बोर्ड अधिनियम, 1982 के अधीन बनाई गयी बिहार राज्य आवास बोर्ड (आवासीय भू-सम्पदाआेंं का प्रबंधन और निपटना) विनियमावली, 1983 के अधीन अर्जित भूमि का आवंटन/आवंटनों को बोर्ड रद्द कर सकेगा और ऐसे आवंटियों/आवेदकों द्वारा कियेे गये जमा, जमा किये जाने की तारीख से वापसी की तारीख तक के लिये 8 (आठ) प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से चक्रवृद्धि ब्याज के साथ उसे/उन्हें वापस कर सकेगा।
परन्तु यह और कि, अर्जित भूमि के किसी भूखंड का कोई आवंटी, जिसने इस अधिनियम के प्रवत्र्तन के पूर्व बोर्ड से वापसी स्वीकार किया था, का किसी अतिरिक्त रकम का कोई दावा नहीं होगा। 5. पूर्व का आवंटन निष्प्रभावी माना जाना।-इस अधिनियम या किसी अन्य अधिनियम या नियम या आदेश में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रवत्र्तन के पूर्व बोर्ड द्वारा अर्जित भूमि के किसी भाग का किया गया आवंटन निष्प्रभावी माना जाएगा।
परन्तु, बोर्ड द्वारा भूमि के ऐसे आवंटी वस्तुतः जिसके कब्जे में भूमि हो और जिसने आवासीय या वाणिज्यिक भवन निर्माण कर लिया हो, ऐसे निष्प्रभावीकरण के अध्यधीन नहीं होंगे।
6. भूमि की बन्दोबस्ती कतिपय क्षेत्र तक सीमित रहना।-इस अधिनियम, नियमावली या उसके अधीन जारी आदेश के उपबंधों के अनुसार बन्दोबस्ती सेक्टर- 3, 4, 6, 7, 9, 11 और 12, जिसके अधिकांश क्षेत्र में आवासीय या वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिये विधि विरुद्ध निर्मित क्षेत्र आते हैं, में समाविष्ट 600 एकड़ क्षेत्र तक सीमित रहेगी,
परन्तु उक्त सेक्टरों में खाली भूमि बोर्ड के पास रहेगी और उस भूमि के लिए भू-स्वामी/अंतरिती अनुग्रह भुगतान के हकदार होंगे।
7. खाली भूमि का बोर्ड द्वारा कब्जे में लिया जाना।-सेक्टर- 1, 2, 5, 8 और 10 में अवस्थित लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में समाविष्ट खाली भूमि को कब्जे में लेने के लिये बोर्ड हकदार होगा;
परन्तु, आवासीय मकान या वाणिज्यिक भवन के रूप में निर्मित भाग अनुग्रह भुगतान के साथ-साथ निर्मित क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा अनुमोदित और बोर्ड द्वारा अवधारित अतिरिक्त रकम का भी हकदार होगा।
परन्तु यह और कि, ऐसे क्षेत्र में कोई अप्राधिकृत अधिभोगी बन्दोबस्ती प्रभार का भुगतान करने पर भी भूमि की बन्दोबस्ती का हकदार नहीं होगा और उक्त क्षेत्र में समाविष्ट भूमि का वास्तविक कब्जा ले लेने की शक्ति बोर्ड को होगी।
8. राज्य सरकार द्वारा निधि उपलब्ध कराया जाना। - इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाई गयी स्कीम के प्रयोजन को कार्यान्वित करने के लिये राज्य सरकार को यथेष्ट निधि उपबंधित कर सकेगी।
अध्याय-।।।
9. प्राधिकार का गठन। - (1) अनुग्रह रकम के दावों तथा बन्दोबस्ती प्रभार का विनिश्चय करने के प्रयोजनार्थ सरकार एक कार्यकारी प्राधिकार का गठन प्रारंभिक तौर पर एक वर्ष के लिये करेगी, जिसमें अध्यक्ष (चेयरपरसन) सहित तीन सदस्य होंगे।7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 (2) अध्यक्ष (चेयरपरसन) ऐसा कार्यरत् या सेवा निवृत्त सरकारी अधिकारी होगा, जिसे राजस्व मामले का पर्याप्त ज्ञान हो।
(3) प्राधिकार के अध्यक्ष (चेयरपरसन) और सदस्यगण सरकार के प्रसाद पर्यन्त पद धारण करेंगे।
(4) इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ प्राधिकार को कमीशन जारी करने, स्थानीय निरीक्षण करने, साक्षियों को समन करने तथा उन्हें हाजिर कराने और दस्तावेजों के प्रस्तुत किये जाने के लिये मजबूर करने के संबंध में सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 (1908 का अधिनियम-5) के अधीन सिविल न्यायालय में यथानिहित शक्ति होगी।
(5) प्राधिकार के समक्ष होनेवाली कार्यवाही सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा-193 और 228 के अर्थ अंतर्गत न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी।
10. प्राधिकार के पदाधिकारी और सेवक। - प्राधिकार का काम-काज करने के लिये उसकी सहायतार्थ यथावश्यक पदाधिकारियों और सेवकों की नियुक्ति, राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से, बोर्ड कर सकेगा। ऐसे पदाधिकारियों और सेवकों के पारिश्रमिक तथा अन्य सेवा शत्र्तें सरकार द्वारा अनुमोदित तथा बोर्ड द्वारा यथाविहित होगी।
11. प्राधिकार के मद्धे बोर्ड द्वारा भुगतान। - राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर यथा अवधारित, प्राधिकार के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों और पदाधिकारियों एवं सेवकों को भुगतेय पारिश्रमिक, वेतन, भत्ते और अन्य अंशदानों के भुगतान के लिये आवश्यक रकम बोर्ड द्वारा भुगतान की जाएगी जो इस संबंध में आने वाली लागत को पूरा करने के लिये बन्दोबस्ती प्रभार/अनुग्रह रकम का 1 (एक) प्रतिशत चार्ज कर एक पृथक लेखा में कार्पस (corpus) सृजित करेगा।
12. प्राधिकार के लिये नियम बनाने की शक्ति। - (1) इस अधिनियम के प्रयोजनों को पूरा करने के लिये बोर्ड, राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से समय-समय पर नियम बना सकेगा।
(2) ऐसे सभी नियम राजपत्र में प्रकाशित किये जाएंगे।
13. न्यायालयों की अधिकारिता पर वर्जन। - इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकार द्वारा किया गया कोई विनिश्चय/आदेश किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।
अध्याय- IV
प्रकीर्ण
14. बोर्ड और प्राधिकार को निदेश देने की सरकार की शक्ति। - सरकार बोर्ड/प्राधिकार को ऐसे निदेश दे सकेगी जो इस अधिनियम के उद्देश्यों/प्रयोजनों को पूरा करने के लिये उसकी राय में आवश्यक या समीचीन हो और बोर्ड/प्राधिकार ऐसे निदेशों का अनुपालन करने के लिये बाध्य होगा।
15. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति। - इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में कोई विवाद, कठिनाई/अड़चन होने की स्थिति में राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों के होते हुये भी, उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजनार्थ ऐसा कोई भी आदेश कर सकेगी जो उस विवाद कठिनाई/अड़चन को दूर करने के लिए यथावश्यक हो।
16. सद्भावपूर्वक की गयी कार्रवाई की संरक्षा। - इस अधिनियम या किसी नियम के अधीन या उसके अधीन किये गये किसी आदेश के अधीन राज्य सरकार या बोर्ड के किसी अधिकारी या प्राधिकार के अधिकारियों के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं चलायी जाएगी जिसने इस अधिनियम या8 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 किसी नियम या उसके अधीन किये गये किसी आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक कोई बात की गयी हो या करने के लिये आशयित हो।
17. अभिभावी प्रभाव और व्यावृत्ति। - (1) इस अधिनियम का कोई उपबंध भू-अर्जन अधिनियम, 1894 संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 बिहार राज्य आवास बोर्ड अधिनियम, 1982 और/या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि/नियमावली/ विनियमावली के उपबंधों का विरोधी/खंडन करने वाला होने की दशा में इस अधिनियम के उपबंध अभिभावी होंगें।
(2) परन्तु, तत्समय प्रवृत्त कोई अन्य विधि/नियम तथा इस अधिनियम के प्रवत्र्तन के पूर्व अर्जित भूमि के संबंध में किया गया/जारी कोई आदेश, अधिसूचना, परिपत्र, स्कीम, संकल्प, जहॉं तक वे इस अधिनियम के असंगत न हो, प्रवृत्त बने रहेंगे और इस अधिनियम के अधीन किये गये/जारी या पारित माने जाएंगे।
वित्तीय संलेख
विभिन्न श्रेणी के नागरिकों के लिए शहरी आवास की सुविधाएँ विकसित करने तथा इसे लोगों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिहार राज्य आवास बोर्ड के लिए पटना नगर निगम के अंतर्गत दीघा में बिहार सरकार द्वारा 1024.52 एकड़ भूमि 1982 में अर्जित की गई थी इस हेतु 8.33 करोड़ रूपये तथा अर्जन और विकास के लागत को पूरा करने के लिए बोर्ड ने कतिपय निबंधन एवं शर्तों पर वित्तीय संस्थानों से 17.5 करोड़ रूपए ब्याजयुक्त ऋण लेकर समाहरणालय, पटना में जमा की है । अधिकांश भू-स्वामिओं द्वारा मुआवजे की राशि नहीं ली गई है । अर्जन की लम्बी प्रक्रिया के दौरान एवं अर्जन के बाद भी पूर्व के भू-स्वामिओं द्वारा जमीन पर उनका हक नहीं रहने के बाद भी अनधिकृत ढंग से अर्जित भूमि के विभिन्न भागों पर कब्जा महानगरों में रजिस्ट्री के अंतरण विलेख, वकालतनामा अथवा अधलिखत दस्तावेज के माध्यम से विभिन्न सहकारी समितियों, व्यक्तियों को लगभग 600 (छः सौ) एकड़ अनधिकृत रूप से दखल दिया गया । शेष 400 (चार सौ) एकड़ जमीन यत्र-तत्र छोटे अनधिकृत निर्माण को छोड़कर अधिकांशतः अनधिकृत निर्माण से मुक्त है ।
अनधिकृत निर्माण की बन्दोबस्ती से राशि की प्राप्ति तथा शेष भूमि, जो अनधिकृत निर्माण से मुक्त है के मूल भू-स्वामी को देय मुआवजे की राशि में बढ़ोत्तरी की संभावना है । विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है ।
(सुशील कुमार मोदी)
भारसाधक सदस्य
उद्देश्य एवं हेतु
विभिन्न श्रेणी के नागरिकों के लिए शहरी आवासीय सुविधा विकसित करने हेतु दीघा पटना में 1053.52 एकड़ भूमि की अर्जन हेतु अधियाचना जनवरी, 1974 एवं अगस्त, 1974 में समाहत्र्ता, पटना के यहां समर्पित की गयी थी एवं इस हेतु 8.33 करोड़ रूपये पटना प्रमण्डल द्वारा जमा किया गया था, जिसके विरूद्ध 1024.52 एकड़ भूमि का अर्जन कर दिनांक 28.02.1983 को बोर्ड द्वारा दखल कब्जा किया गया । लेकिन जिस उद्देश्य से इस भूमि का अर्जन किया गया था, वह कई कारणों से अब तक पूरा नहीं हो सका । अधिकांश भू-धारियों ने जमीन का मुआवजा नहीं लिया है । जिन आवेदकों को भूमि आवंटित की गयी थी, उन्हें भी दखल-कब्जा नहीं दिलया जा सका ।9 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 कतिपय भू-धारियों एवं आवंटियों द्वारा मा0 उच्च न्यायालय का सहारा लिया गया । मामला उच्चतम न्यायालय तक गया, जिसमें भू-अर्जन की प्रक्रिया को सही ठहराया गया । अर्जन की लम्बी प्रक्रिया एवं अर्जन के बाद भी पूर्व के भू-स्वामियों ने इस बात के होते हुए भी ऐसे भू-धारियों को अंतरिम भूमि पर कोई हक नहीं है, अनधिकृत रूप से अर्जित भूमि के विभिन्न भागों का कब्जा महानगरों में रजिस्ट्रीकृत अन्तरण विलेख के माध्यम से अथवा वकालतनामा के माध्यम से अथवा किसी अन्य लिखत के माध्यम से विभिन्न सरकारी समितियों/व्यक्तियों को सौंप दिया । उक्त अर्जित भूमि का लगभग 600 (छह सौ) एकड़ का बड़ा हिस्सा अनधिकृत रूप से ऐसे व्यक्तियों द्वारा दखल कर लिया गया और वे मकान बना कर रह रहे हैं । शेष अर्जित भूमि में से लगभग 400 (चार सौ) एकड़ में यत्र-तत्र छोटे अनधिकृत निर्माण को छोड़कर अधिकांशतः अनधिकृत निर्माण से मुक्त है ।
मा0 उच्च न्यायालय द्वारा निदेश दिया गया है कि बड़ी संख्या में निर्माण हो चुके हैं, जिन्हें तोड़ना संभव नहीं है । बोर्ड एवं सरकार मुआवजा प्राप्त कर ऐसे निर्माण को स्वीकार करने के संबंध में अपना प्रस्ताव समर्पित करे । जिला प्रशासन एवं विधि व्यवस्था से जुड़े पदाधिकारियों की बैठक में यह माना गया है कि शांतिपूर्ण तरीके से दखल-कब्जा करना कठिन है । यह समीचीन है कि सम्पूर्ण अर्जित क्षेत्र को दो कोटि में वर्गीकृत किया जाए । एक वह जो अधिकांशतः अनधिकृत/अतिक्रमण से मुक्त है, मात्र यत्र-तत्र छोटे क्षेत्र में निर्माण किया गया है । दूसरा वह जिस पर आवास भवन निर्मित है ।
इस समस्या के सम्यक् समाधान हेतु उपर्युक्त को ध्यान में रखते हुए अनधिकृत कब्जे वाले भूमि की बन्दोबस्ती तथा खाली क्षेत्र को कब्जा में लेने के लिए यह जरूरी है कि बोर्ड को अथवा किसी अन्य विशेष प्रयोजन माध्यम को प्राधिकृत करने वाली विधि बनाई जाए। दीघा अर्जित भूमि बन्दोबस्ती विधेयक, 2010 बनाने का यही मुख्य उद्देश्य है, जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ठ है ।
(सुशील कुमार मोदी)
भारसाधक सदस्य
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अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु0ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 234-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in