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बिहार कृषि विश्वविद्यालय विधेयक, 2010
बिहार राज्य में कृषि एवं सहबद्ध विज्ञानों के विकास के लिए एक विश्वविद्यालय को स्थापित करने और निगमित करने हेतु विधेयक।
भारत गणराज्य के इकसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
अध्याय I प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ।-(1) यह अधिनियम बिहार कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह उस तारीख से प्रवृत्त होगा जो, सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे। 2. परिभाषाएँ।-जबतक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए सभी परिनियमों और विनियमों मेंः
(1) ''विद्वत (अकादमिक) परिषद्'' से अभिप्रेत है, विश्वविद्यालय का विद्वत परिषद्'' (2) ''अधिनियम'' से अभिप्रेत है, बिहार कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010'' (3) ''कृषि'' के अन्तर्गत निम्नलिखित विषय सम्मिलित हैः''
(क) प्राकृतिक संसाधन का प्रबंधन; (ख) उत्पादन और संरक्षण सहित फसल संवर्धन; (ग) उद्यान कृषि; (घ) पशु चिकित्सा, प्राणी विज्ञान और मात्स्यिकी; (ड़) डेयरी (दुग्धशाला) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; (च) वानिकी; (छ) कृषि अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी; (ज) खाद्य प्रौद्योगिकी; (झ) गृह विज्ञान; (ञ) कृषि व्यापार प्रबंधन; (ट) कृषि जैव प्रौद्योगिकी; (ठ) मौलिक विज्ञान और कृषि से संबंधित मानविकी; एवं (ड) कृषि और सहबद्ध विज्ञान से संबंधित कोई अन्य विषय, जो ग्रामीण समुदायों के सामाजिक, एवं आर्थिक उत्थान और प्रबंधन हेतु प्रयुक्त हो।
(4) ''प्राधिकार'' से अभिप्रेत है, इस अधिनियम में यथाविनिर्दिष्ट विश्वविद्यालय का कोई प्राधिकार; (5) ''बोर्ड'' से अभिप्रेत है, विश्वविद्यालय का प्रबंधन बोर्ड; (6) ''अध्ययन समिति'' से अभिप्रेत है, संकाय स्तर पर शैक्षिक मामले की समिति; (7) ''महाविद्यालय'' से अभिप्रेत है, विश्वविद्यालय का अंगीभूत महाविद्यालय ; (8) ''कुलाधिपति'' से अभिप्रेत है, विश्वविद्यालय का कुलाधिपति; (9) ''नियंत्रक'' से अभिप्रेत है, विश्वविद्यालय का नियंत्रक; (10) ''संकायाध्यक्ष(डीन)'' से अभिप्रेत है, अंगीभूत महाविद्यालय का प्रधान; (11) ''संकाय-अध्यक्ष'' से अभिपे्रत है, संकाय का प्रधान; (12) ''विभाग'' से अभिप्रेत है, संकाय का विभाग; (13) ''निदेशक'' से अभिप्रेत है और इसमें शामिल है निदेशक, रेजिडेंट शिक्षण, निदेशक, शोध और निदेशक विस्तार शिक्षा;
(14) ''संकाय से अभिपे्रत है, अधिनियम और परिनियमों में यथाविनिर्दिष्ट विश्वविद्यालय का संकाय ; (15) ''सरकार'' से अभिप्रेत है, बिहार सरकार; (16) ''राज्यपाल'' से अभिप्रेत है बिहार राज्य का राज्यपाल; (17) ''प्रधान से अभिप्रेत है, महाविद्यालय/विभाग का प्रधान; (18) ''के0वी0के0'' से अभिप्रेत है, विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार के अधीन कृषि विज्ञान केन्द्र; (19) ''पदाधिकारी'' से अभिप्रेत है अधिनियम/परिनियम में यथाविनिर्दिष्ट विश्वविद्यालय का पदाधिकारी;
3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010(20) ''विहित'' से अभिप्रेत है, विश्वविद्यालय के अधिनियम/परिनियम/विनियम में वर्णित उपबंध; (21) ''रजिस्ट्रार'' से अभिप्रेत है विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार; (22) ''अनुसूचित जातियों'' से अभिपे्रत है, संविधान (अनुसूचित जातियॉं) आदेश, 1950 की अनुसूची के भाग ।।। में विनिर्दिष्ट अनुसूचित जातियाँ ;
(23)''अनुसूचित जनजातियों'' से अभिपे्रत है, संविधान (अनुसूचित जनजातियॉं) आदेश, 1950 की अनुसूची के भाग ।।। में विनिर्दिष्ट अनुसूचित जनजातियाँ ;
(24) ''परिनियम विनियम और नियमावली'' से क्रमशः अभिप्रेत है, विश्वविद्यालय का तत्समय प्रवृत्त परिनियम, विनियम और नियमावली;
(25) ''छात्र'' से अभिप्रेत है, डिग्री, डिप्लोमा अथवा सम्यक रूप से संस्थित अन्य शैक्षिक कार्यक्रम के पाठ्यक्रम में भाग लेने हेतु विश्वविद्यालय के अंगीभूत महाविद्यालय/संकाय में दाखिल तथा नामांकित व्यक्ति;
(26) ''शिक्षक'' से अभिप्रेत है शिक्षा प्रदान करने अथवा शोध अथवा विस्तार शिक्षा कार्यक्रमों को संचालित करने और मार्गदर्शित करने के प्रयोजनार्थ विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त अथवा मान्यताप्राप्त सहायक प्राध्यापक से अन्यून पंक्ति का व्यक्ति और इसमें ऐसा कोई अन्य व्यक्ति शामिल हो सकेगा जिसे न्यूनतम विहित अहर्ता के साथ परिनियम द्वारा शिक्षक होने के लिए घोषित किया जाय ;
(27) ''इकाई'' से अभिप्रेत और इसमें शामिल है विश्वविद्यालय की सेवा इकाईयाँ ; (28) ''विश्वविद्यालय'' से अभिप्रेत है बिहार कृषि विश्वविद्यालय ; (29) ''कुलपति'' से अभिप्रेत है विश्वविद्यालय का कुलपति।
अध्याय II
विश्वविद्यालय
3. विश्वविद्यालय की स्थापना और निगमन।-(1) इस अधिनियम के प्रवर्तन की तारीख से निम्नलिखित विश्वविद्यालय की स्थापना की जायगी :
(।) बिहार कृषि विश्वविद्यालय जिसका मुख्यालय भागलपुर जिला के सबौर में होगा और इसका क्षेत्राधिकार सम्पूर्ण बिहार राज्य होगा।
(।।) सभी महाविद्यालय, शोध और प्रायोगिक केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र अथवा अनुसूची I में उल्लिखित अन्य संस्थाएं, इसके पदाधिकारियों और प्राधिकारों के पूर्ण प्रबंधन और नियंत्रण के अधीन, इसकी अंगीभूत इकाईयाँ होगी और ऐसे किसी इकाई को सम्बद्ध इकाई के रूप में मान्यता प्रदान नहीं की जाएगी। राज्य सरकार को अनुसूची I में किसी संस्था को जोड़ने अथवा किसी संस्था को उसमें से हटाने की शक्ति होगी।
(2) विश्वविद्यालय कुलाधिपति, कुलपति, प्रबंधन बोर्ड, विद्वत परिषद् और इस अधिनियम में दिए गए अथवा परिनियमों में यथाउपबंधित अन्य प्राधिकारों और पदाधिकारियों तथा संघटक निकायों से मिलकर बनेगा।
(3) विश्वविद्यालय शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य सील रखनेवाला एक निगमित निकाय होगा और यह उक्त नाम से वाद चलाएगा और इस पर वाद चलाया जाएगा।
(4) विश्वविद्यालय चल और अचल दोनों संपत्ति अर्जित करने तथा धारित करने, कोई चल और अचल संपत्ति, जो विश्वविद्यालय के प्रयोजनार्थ उसमें निहित हो गई हो और उसके द्वारा अर्जित की जा चुकी हो, को पट्टा पर देने, बिक्री करने अथवा अन्यथा अंतरित करने और केन्द्र सरकार, राज्य सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किसी निगमित निकाय से धन उधार लेने और संविदा करने तथा इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ अन्य सभी आवश्यक कार्य करने के लिए सक्षम होगा;
परन्तु, विश्वविद्यालय राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना राज्य सरकार द्वारा उसे अंतरित की गई किसी अचल संपत्ति को न तो पट्टे पर देगा, बिक्री करेगा अथवा अन्यथा अंतरित करेगा।
(5) विश्वविद्यालय द्वारा दायर अथवा उसके विरूद्ध दायर सभी वादों और अन्य विधिक कार्यवाहियों में रजिस्ट्रार अथवा विधि पदाधिकारी अथवा कुलपति द्वारा यथा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अभिवचन हस्ताक्षरित तथा सत्यापित किया जाएगा और ऐसे वादों और कार्यवाहियों में सभी आदेशिका रजिस्ट्रार/विधि पदाधिकारी को जारी की जाएगी और तामील कराई जाएगी।
4. क्षेत्रीय अधिकारिता और अंगीभूत निकाय।-(1) विश्वविद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण, कृषि के क्षेत्र में और इस अधिनियम में मोटे तौर पर परिभाषित इससे संबंधित क्षेत्रों में शोध तथा विस्तार शिक्षा से संबंधित विश्वविद्यालय की क्षेत्रीय अधिकारिता और जिम्मेदारी धारा 3(1) (।) और (।।) में यथाउल्लिखित क्षेत्रों तक विस्तारित होगी।
(2) विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार और प्राधिकार के अधीन आनेवाले सभी महाविद्यालय, शोध केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र और अन्य संस्थाएॅं विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों और प्राधिकारों के पूर्ण प्रबंधन और नियंत्रण के अन्तर्गत विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाईयॉं के रूप में होगी। किसी इकाई को सम्बद्ध इकाई के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी।4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 (3) विश्वविद्यालय अपनी क्षेत्रीय अधिकारिता के अन्तर्गत अपने अंगीभूत निकायों की यथापेक्षित स्थापना, विकास और संचालन की जिम्मेवारी ले सकेगा।
(4) राज्य में कृषि और सहबद्ध विषयों में अनुदेश, शिक्षण, अनुसंधान, विस्तार शिक्षा और प्रशिक्षण की व्यवस्था कराने के लिए विश्वविद्यालय को अपने सम्पूर्ण क्षेत्राधिकार में प्राधिकार होगा।
(5) राज्य में पूर्व से विद्यमान अथवा भारत सरकार या बिहार सरकार के किसी अधिनियम से स्थापित कृषि विश्वविद्यालय जिनसे यह अधिनियम संबंधित हो, से भिन्न कोई विश्वविद्यालय गृह विज्ञान विषय को छोड़कर कृषि का कोई डिग्री प्रदान करने के लिए सक्षम नहीं होगा।
(6) विश्वविद्यालय, साझा हितों के विषयों में अन्य विश्वविद्यालय, जो इस अधिनियम के अधीन स्थापित हो अथवा अन्यथा के साथ अथवा अन्य संस्थान के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजना चला सकेगा।
5. विश्वविद्यालय के उद्देश्य।-विश्वविद्यालय निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए स्थापित और निगमित किया जायेगाः
(1) कृषि की विभिन्न शाखाओं तथा ज्ञान की अन्य सहबद्ध शाखाओं तथा छात्रवृत्ति, जिसे विश्वविद्यालय शामिल करना आवश्यक समझे, में शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करना,
(2) इसके अतिरिक्त कृषि में ज्ञान की अभिवृद्धि करना तथा शोध का संचालन, (3) राज्य की जनता के कल्याणार्थ विस्तार शिक्षा विषयक कार्य करना। (4) राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय शैक्षिक संस्थाओं के साथ भागीदारी तथा संयोजन को बढ़ावा देना, (5) ऐसे अन्य प्रयोजन, जो विश्वविद्यालय अथवा राज्य सरकार समय-समय पर अवधारित करे। 6. विश्वविद्यालय में प्रवेश (नामांकन)।-(1) विश्वविद्यालय इस अधिनियम और परिनियमों के उपबंधों के अध्यधीन विश्वविद्यालय सभी लोगों के लिए खुला रहेगा, परन्तु इस धारा की कोई बात विश्वविद्यालय से यह अपेक्षा नहीं करेगी कि वह किसी ऐसे व्यक्ति को किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश करने दे जो प्रवेश के लिए विहित शैक्षिक योग्यता/स्तर नहीं रखता हो अथवा वैसे व्यक्तियों को विश्वविद्यालयों में बनाए रखे जिनका शैक्षिक वृत्त, डिग्री हासिल करने के लिए अपेक्षित न्यूनतम स्तर से कम है और जिनका व्यक्तिगत आचरण विश्वविद्यालय के प्रयोजन अथवा अन्य विद्यार्थियों और कर्मचारीवृन्द के उपयुक्त अधिकारों और विशेषाधिकारों के लिए हानिकर हो।
(2) उप-धारा (1) के उपबंधों के अध्यधीन, विश्वविद्यालय, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट अन्य वर्गों के लिए स्थान सुरक्षित करेगा;
परन्तु , ऐसा कोई व्यक्ति तब तक विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने का हकदार नहीं होगा जब तक वह ऐसे उम्मीदवारों की बाबत विहित मानक को पूरा न करता हो।
(3) विश्वविद्यालय किसी पाठ्यक्रम में उतनी संख्या में छात्रों का प्रवेश ले सकेगा जिन्हें विश्वविद्यालय के उपलब्ध संकायों अथवा किसी खास महाविद्यालय अथवा विभाग में विद्वत परिषद् द्वारा यथाअवधारित संख्या तक समायोजित किया जा सके।
7. विश्वविद्यालय की शक्तियॉं और कृत्य।-विश्वविद्यालय की निम्नलिखित शक्तियॉं और कृत्य होंगेः-(1) कृषि तथा अन्य सहबद्ध विषयों, जिन्हें विश्वविद्यालय उचित समझे, में स्नातकपूर्व और स्नातकोत्तर शिक्षा का उपबंध करना,
(2) कृषि और इसकी सहबद्ध शाखाओं में शोध करने का उपबंध करना, (3) विस्तार शिक्षा कार्यक्रम द्वारा शोध के निष्कर्षों तथा तकनीकी जानकारी के प्रचार हेतु उपबंध करना, (4) डिग्री, डिप्लोमा तथा अन्य अकादमिक विशिष्टताओं को संस्थापित करना, (5) पाठ्यक्रम तैयार करना तथा परीक्षा का आयोजन करना और उन व्यक्तियों को डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाण-पत्र एवं अन्य शैक्षणिक उपाधियॉं प्रदान करना जिन्होंने-
(।) यथाविहित पाठ्यक्रमानुसार अध्ययन किया हो, और (।।) विश्वविद्यालय अथवा इस निमित्त विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान में ऐसा शोध किया हो, जैसा कि विहित किया जाए,
(6) यथाविहित मानद डिग्री तथा अन्य उपाधियॉं प्रदान करना, (7) क्षेत्रीय कर्मियों, किसानों, अन्य व्यक्तियों, जो नियमित छात्र के रूप में नामांकित नहीं हैं, के लिए व्याख्यानों तथा शिक्षण का उपबंध करना तथा उन्हें प्रमाण पत्र देना जैसा कि विहित किया जाय,
(8) अन्य विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के संस्थानों तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित निजी और सार्वजनिक संगठनों/संस्थानों के साथ शैक्षिक, शोध एवं एवं विस्तार शिक्षा कार्यक्रमों में सहयोग करना,
(9) वैसी चल और अचल, दोनों संपत्तियों को अर्जित करना, धारण करना तथा बनाए रखना जो विश्वविद्यालय के प्रयोजनार्थ उसमें निहित हो गई हो या उसके द्वारा अर्जित की गई हो,
(10) कृषि और सहबद्ध विज्ञानों से संबंधित महाविद्यालयों/संकायों, अनुसंधान केन्द्रों/प्रयोगशालाओं, कृषि विज्ञान केन्द्रों तथा उनकी इकाईयों को स्थापित करना तथा उनका अनुरक्षण करना,
(11) राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से शिक्षण, शोध एवं विस्तार शिक्षा के पदों का सृजन करना और ऐसे पदों पर व्यक्तियों को नियुक्त करना,5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 (12) राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से प्रशासनिक और अन्य पदों का सृजन करना तथा ऐसे पदों पर व्यक्तियों की नियुक्ति करना,
(13) परिनियमों के अनुसार अध्येतावृत्ति, छात्रवृत्ति, वृत्तिका, पुरस्कार को स्थापित करना और प्रदान करना,
(14) यथाविहित फीस और अन्य चार्ज नियत करना, उसकी मॉंग करना और उसे प्राप्त करना, (15) विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों के लिए यथाउपयुक्त आवासन की व्यवस्था करना तथा उसका रखरखाव करना,
(16) विश्वविद्यालय के छात्रों के आवास, आचरण एवं अनुशासन का पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण करना तथा उनके स्वास्थ्य एवं कल्याण की अभिवृद्धि की व्यवस्था करना।
(17) शिक्षकों की अर्हताएं अवधारित करना और कृषि एवं सहबद्ध विषयों में शिक्षा देने तथा शोध और विस्तार शिक्षा का कार्य करने के लिए अर्हता प्राप्त व्यक्तियों की पहचान करना,
(18) विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए यथापेक्षित सभी कार्यों एवं बातों को करना, चाहे वे उपर्युक्त शक्तियों के आनुषंगिक हो अथवा न हों।
अध्याय-III विश्वविद्यालय के प्राधिकार
8. विश्वविद्यालय के प्राधिकार।-विश्विद्यालय के निम्नलिखित प्राधिकार होंगे, यथा- (1) प्रबंधन बोर्ड (2) सीनेट (3) विद्वत (अकादमिक ) परिषद् (4) संकाय और उनके अध्ययन बोर्ड (5) विश्विद्यालय के ऐसे अन्य निकाय जिन्हें परिनियम द्वारा विश्वविद्यालय का प्राधिकार घोषित किया जाए; 9. प्रबंधन बोर्ड और इसका गठन।-(1) प्रबंधन बोर्ड विश्वविद्यालय का मुख्य कार्यपालक निकाय होगा और उसमें निम्नलिखित व्यक्ति होंगे :-
(i) कुलपति - अध्यक्ष (ii) कृषि उत्पादन आयुक्त/प्रधान सचिव/सचिव, कृषि विभाग, बिहार सरकार (iii) प्रधान सचिव/सचिव, वित्त विभाग (iv) प्रधान सचिव/सचिव,पषु एवं मत्स्य संसाधन विभाग (v) निदेशक, कृषि (vi) निदेशक, उद्यान (vii) कृषि एवं सहबद्ध विज्ञान के क्षेत्र से एक प्रख्यात शिक्षाविद (जो प्रोफेसर से अन्यून कोटि के) जिनका नामनिर्देशन राज्य सरकार के द्वारा किया जाएगा।
(viii) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले राज्य विधान मंडल के दो प्रतिनिधि (ix) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट की जाने वाली एक उत्कृष्ट महिला कार्यकर्ता जिनकी ग्रामीण समुन्नति की पृष्ठभूमि हो
(x) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाला विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र से एक प्रगतिशील किसान
(xi) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला एक विशिष्ट कृषि उद्योगपति (xii) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आई.सी.ए.आर.) से एक प्रतिनिधि, जिनका नाम निर्देशन आई.सी.ए.आर. के महानिदेशक द्वारा किया जाएगा।
(xiii) परिनियम में यथाविहित चक्रानुक्रम से एक निदेशक जिनका नामनिर्देशन कुलपति द्वारा किया जाएगा
(xiv) परिनियम में यथाविहित चक्रानुक्रम से एक डीन, जिनका नामनिर्देशन कुलपति द्वारा किया जाएगा
(xv) परिनियम में यथाविहित चक्रानुक्रम से एक स्नातकोत्तर विभाग का एक अध्यक्ष, जिनका नाम निर्देशन कुलपति द्वारा किया जाएगा
(xvi) रजिस्ट्रार - सचिव
(2) पदेन सदस्यों से भिन्न, बोर्ड के सदस्यों की पदावधि दो वर्षों की होगी। (3) जब मृत्यु, त्यागपत्र या पदावधि की समाप्ति से भिन्न किसी कारण से किसी सदस्य का पद रिक्त होता हो तब उस रिक्ति की पूर्ति इस धारा के उपबंधों के अनुसार की जाएगी और ऐसी रिक्ति की पूर्ति करने वाला व्यक्ति इस अवधि तक पद धारण करेगा जिस अवधि तक वह व्यक्ति सदस्य रहता जिसके स्थान पर उसने पद की पूर्ति की हो।6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 (4) बोर्ड में किसी रिक्ति या उसके गठन में किसी दोष मात्र के आधार पर बोर्ड की कोई कार्रवाई या कार्यवाही अविधिमान्य नहीं होगी।
(5) बोर्ड की बैठक में बोर्ड के एक तिहाई सदस्यों की उपस्थिति से गणपूर्ति होगी। परन्तु, यदि गणपूर्ति के अभाव में यदि बोर्ड की कोई बैठक स्थगित की जाती हो तो उसी कार्य के लिए बुलाई गई बैठक के लिए किसी गणपूर्ति की आवश्यकता नहीं होगी।
(6) सामान्यतः बोर्ड की बैठक वर्ष में कम से कम दो बार, कुलपति द्वारा नियत तारीखों पर होगी। किन्तु, कुलपति जबकभी उचित समझे तथा बोर्ड पांच से अन्यून सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित अध्यपेक्षा पर बोर्ड की विशेष बैठक बुला सकेंगे।
10. प्रबंधन बोर्ड की शक्तियां और कृत्य।-प्रबंधन बोर्ड की निम्नलिखित शक्तियां होंगी तथा निम्नलिखित कत्र्तव्यों का संपादन करेगा, यथाः-
(i) इस अधिनियम के अधीन विहित रीति से परिनियम/विनियमों को बनाना, संशोधित करना और निरस्त करना;
(ii) विश्वविद्यालय के लिए वित्तीय अपेक्षाओं और प्राक्कलनों की समीक्षा तथा विचार करना तथा इसके बजट का अनुमोदन करना;
(iii) विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए अनुशंसा को अनुमोदित करना;
(iv) विश्वविद्यालय की ओर से किसी सम्पत्ति को स्वीकार या अन्तरण करना; (v) आशयित प्रयोजन के लिए विश्वविद्यालय के व्ययन पर दी गयी निधि को प्रशासित करना; (vi) विश्वविद्यालय की निधियों के निवेष और निकासी की व्यवस्था करना; (vii) विश्वविद्यालय की ओर से न्यास, वसीयत और दान स्वीकार करना; (viii) जहाँ अपेक्षित हो वहाँ अकादमिक परिषद् की अनुशंसाओं पर विचार करना तथा उनका अनुमोदन करना;
(ix) विश्वविद्यालय की सामान्य मुहर (कॉमन सील) के स्वरूप एवं उपयोग का निर्देश देना; (x) ऐसी समितियों और निकायों का गठन करना, जो यह आवश्यक समझे, तथा इस अधिनियम और परिनियम के उपबंधों के अनुसार उनके लिए विचारणीय विषयों को निर्धारित करना; (xi) विद्वत (अकादमिक) परिषद् की अनुशंसा पर महाविद्यालयों, विभाग, केन्द्र या शोध केन्द्र/उपकेन्द्र की स्थापना, आमेलन और समाप्ति पर विचार करना तथा अनुमोदन करना। नए महाविद्यालय/संकाय की स्थापना राज्य सरकार के पूर्वानुमोदन के बाद ही की जाएगी;
(xii) राज्य के पूर्वानुमोदन से शिक्षण, शोध और विस्तार शिक्षा के पदों का सृजन करना। 11. सीनेट।-(1) सीनेट में निम्नलिखित सदस्य होंगे, यथा पदेन सदस्य
(i) कुलाधिपति - अध्यक्ष (ii) कुलपति : कुलाधिपति की अनुपस्थिति में सीनेट की अध्यक्षता कुलपति करेंगे। (iii) कृषि उत्पादन आयुक्त या उनकी अनुपस्थिति में कृषि सचिव; (iv) प्रधान सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार सरकार; (v) विशेष या अपर या संयुक्त सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना; (vi) विशेष या अपर या संयुक्त सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार; (vii) मुख्य वन संरक्षक, बिहार; (viii) कृषि निदेशक, बिहार, पटना; (ix) निदेशक, पशुपालन, बिहार; (x) निदेशक, मत्स्य, बिहार; (xi) संयुक्त निदेशक, कृषि, शिक्षा, बिहार, पटना; (xii) निदेशक, शोध, बिहार कृषि विश्वविद्यालय ; (xiii) निदेशक, विश्वविद्यालय की विस्तार शिक्षा; (xiv) संकायों के सभी डीन; (xv) अंगीभूत महाविद्यालय के सभी प्राचार्य और शोध संस्थानों के सभी निदेशक
प्रतिनिधि - सदस्य (xvi) अध्यक्ष, विधान सभा द्वारा यथाविहित रीति से बिहार विधान सभा द्वारा अपने सदस्यों में से चयनित किए जाने वाले सात व्यक्ति;
7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010(xvii) सभापति, विधान परिषद् द्वारा यथाविहित रीति से बिहार विधान परिषद् द्वारा अपने सदस्यों में से चयनित दो व्यक्ति;
(xviii)प्राचार्यो तथा संकायों के डीन से भिन्न सात शिक्षक, जिन्हें कम-से-कम पाँच वर्षेां का अनुभव हो, जिनका नाम निर्देशन परिनियमों द्वारा विहित रीति से किया जाएगा ताकि विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत महाविद्यालयों का प्रतिनिधित्व हो;
(xix) दो व्यक्ति, जिनमें से एक का नाम निर्देशन बिहार फल एवं सब्जी विकास निगम और दूसरे का काम्फेड (सी.ओ.एम.एफ.ई.डी.) द्वारा किया जाएगा;
(xx) (शिक्षक से भिन्न) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का एक प्रतिनिधि, जिनका चयन विहित रीति से किया जाएगा;
(xxi) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट दो किसान; (xxii) कुलाधिपति द्वारा नामनिर्दिष्ट दो प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक; (xxiii)परिनियमों द्वारा यथाविहित रीति से कुलपति द्वारा नामनिर्दिष्ट एक मेधावी छात्र।
(2) पदेन सदस्यों से भिन्न सदस्यों की पदावधि, यथास्थिति, उनके अपने-अपने निर्वाचन या नाम निर्देशन की तारीख से दो वर्षों के लिए होगी और इसमें आगे कि ऐसी कोई अवधि सम्मिलित होगी जो यथास्थिति उक्त दो वर्षो के अवधि-अवसान तथा अगले उत्तरवर्ती निर्वाचन या नामनिर्देशन, जो किसी आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन या नामनिर्देशन न हो, के बीच बीत जाएगी;
परन्तु, किसी निकाय के प्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट सदस्य द्वारा उस तारीख के प्रभाव से पद को छोड़ देना माना जाएगा जिस तारीख को वह
उस निकाय का सदस्य नहीं रह जाएगा जिसने उसका निर्वाचन या नामनिर्देशन किया हो। (3) सीनेट की बैठक कुलपति द्वारा नियत तारीखों को वर्ष में दो बार होगी और इन बैठकों को सीनेट की साधारण बैठक कहा जाएगा, जिसमें से एक को परिनियम द्वारा सीनेट की वार्षिक सभा घोषित किया जाएगा। (4) कुलपति जब कभी उचित समझे तथा सीनेट के कुल सदस्यों में से कम-से-कम एक तिहाई सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित अध्यपेक्षा पर सीनेट की विशेष बैठक बुला सकेगा।
12. सीनेट की शक्तियां और र्काव्य।- इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन, सीनेट की निम्नलिखित शक्तियां और कृत्य होंगे :-
(i) विश्वविद्यालय की व्यापक नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करना तथा विश्वविद्यालय की उन्नति एवं विकास के लिए उपायों की सलाह देना,
(ii) विश्वविद्यालय के वार्षिक प्रतिवेदन, वार्षिक लेखा, विाीय प्राक्कलनों तथा ऐसी लेखा अंकेक्षण प्रतिवेदनों पर विचार करना और प्रस्ताव पारित करना,
(iii) ऐसे किसी विषय पर कुलाधिपति को सलाह देना जो इसे सलाह के लिए निर्दिष्ट किया जाए।
13. विद्वत् परिषद् (अकादमिक परिषद्)।-(1) विद्वत् परिषद् (अकादमिक परिषद्) में निम्नलिखित सदस्य होंगे :-
(i) कुलपति- सभापति (ii) निदेशक (iii) सभी संकायाध्यक्ष/ डीन (iv) सभी अघ्यक्ष, स्नातकोार विभाग (v) हरेक संकाय से महाविद्यालय के दो विभागाध्यक्ष, जिनका नाम निर्देशन चक्रानुक्रम से कुलपति द्वारा किया जाएगा।
(vi) हरेक संकाय से प्राध्यापक की पंक्ति का एक शिक्षक, जिनका नाम निर्देशन चक्रानुक्रम से कुलपति द्वारा किया जाएगा।
(vii) एक प्रख्यात कृषि शिक्षाविद्, जो विश्वविद्यालय से बाहर का हो और जिनका नाम निर्देशन कुलपति द्वारा किया जाएगा।
(viii) रजिस्ट्रार -सदस्य सचिव, नियंत्रक और विश्वविद्यालय पुस्तकाध्यक्ष गैर-सदस्य आमंत्रिती होंगे।
(2) विद्वत परिषद् यथा विहित अवधि के लिए तथा यथाविहित रीति से दो से अनधिक व्यक्तियों को सदस्य के रूप में सहयोजित कर सकेगा ताकि कृषि एवं सहबद्ध क्षेत्रों के विभिन्न सेक्टरों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
(3) पदेन सदस्यों तथा उपधारा (2) में निर्दिष्ट सदस्यों से भिन्न विद्वत् परिषद् के सभी सदस्य दो वर्षों की अवधि के लिए पद धारण करेंगे।8 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 (4) परिषद् की बैठक में गणपूर्ति एक तिहाई सदस्यों से होगी। परन्तु, यदि गणपूर्ति के अभाव में परिषद् की कोई बैठक स्थगित की जाती हो, तो उसी कार्य के सम्पादनार्थ आहूत अगली बैठक के लिए किसी गणर्पूाि की आवश्यकता नहीं होगी।
(5) सामान्यतः विद्वत परिषद् की बैठक हरेक सेमेस्टर में एक बार कुलपति द्वारा यथा निर्धारित तिथि को होगी; किन्तु, कुलपति द्वारा विद्वत् परिषद् की विशेष बैठक बुलायी जा सकेगी।
14. विद्वत् परिषद् की शक्तियाँ एवं कृत्य।- (1) इस अधिनियम एवं परिनियम के उपबंधों के अध्यधीन विद्वत् परिषद् को विनियमों द्वारा पाठ्यक्रम विहित करने और पाठ्यचर्या निर्धारित करने की शक्ति होगी, और विश्वविद्यालय के अंतर्गत अध्यापन एवं अन्य शैक्षिक कार्यक्रमों पर उसका नियंत्रण होगा और उसके मानदंडों की देखरेख हेतु उारदायी होगा।
(2) इसे अपने नियंत्रण के अध्यधीन, सभी शैक्षिक मामलों के संबंध में इस अधिनियम और परिनियमों से संगत विनियम बनाने, ऐसे विनियमों को संशोधित करने या निरस्त करने की शक्ति होगी।
(3) खासकर, पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना विद्वत् परिषद् निम्नलिखित शक्तियों और कृत्यों का प्रयोग करेगा :-
(i) सभी शैक्षणिक मामलों में समिति और कुलपति को सलाह देना। (ii) अध्यापन शोध और विस्तार शिक्षा के संबंध में अनुशंसा करना। (iii) प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक और अन्य शिक्षकीय पदों, जिसमें शोध और विस्तार शिक्षा के पद भी सम्मिलित है, पर नियुक्ति एवं उनसे संबंंधित र्काव्यों की अनुशंसा करना।
(iv) अनुबद्ध प्राध्यापकत्व हेतु अनुशंसा करना। (v) महाविद्यालय के संकाय, अध्यापन विभाग, शोध और विस्तार शिक्षा की स्थापना/ आमेलन/ समापन हेतु अनुशंसाएँ करना
(vi) विश्वविद्यालय में छात्रों के नामांकन से संबंधित विनियम बनाना और नामांकन कराने वाले छात्रों की संख्या निर्धारित करना।
(vii) उपाधि (डिग्री), डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदायक पाठ्यक्रमों से संबंधित विनियम बनाना। (viii) परीक्षा के संचालन से संबंधित विनियम बनाना और शिक्षा के मानकों को बनाए रखना तथा उसमें सुधार लाना।
(ix) समिति को मानद उपाधि प्रदान करने से संबंधित अनुशंसा करना। (x) विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए अर्हताएं विहित किए जाने से संबंधित अनुशंसा करना। (xi) ऐसे अन्य कृत्यों का सम्पादन करना और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना जो इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसे बोर्ड या कुलपति द्वारा प्रदान या अधिरोपित की जाए। 15. संकाय और अध्ययन बोर्ड।-(1) विश्वविद्यालय में यथाविहित संकाय होंगे। (2) अध्ययन के लिए हरेक संकाय में परिनियमों द्वारा यथाविहित विभाग होगा। (3) हरेक संकाय में परिनियमों द्वारा यथाविहित सदस्य होंगे तथा उसे यथाविहित शक्तियाँ हाेंगी और वह यथाविहित र्काव्यों का संपादन करेगा।
(4) हरेक संकाय में अध्ययन बोर्ड होगा जिसमें निम्नलिखित सदस्य हाेंगे :- (i) संकाय के डीन/डीन - अध्यक्ष (ii) संबद्ध महाविद्यालयों के संकाय के डीन (iii) संबद्ध संकाय के सभी अध्यक्ष/विभागाध्यक्ष (iv) संकाय के डीन द्वारा नामनिर्दिष्ट हरेक विभाग से एक वरीय संकाय सदस्य, (v) वरीय विभागाध्यक्ष - सदस्य सचिव (5) हरेक संकाय के निम्नलिखित कृत्य होंगे :-
(i) अध्यापन कार्यक्रम की पुनर्विलोकन करना और उसमें सुधार का सुझाव देना, (ii) विभाग/संकाय की पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या समिति या इसी तरह के निकाय की अनुशंसाओं पर विचार करना और उन्हें अनुमोदन के लिए विद्वत् (अकादमिक) परिषद को प्रस्तुत करना।
(iii) ऐसे अन्य कृत्यों का संपादन करना जो उसे विद्वत् (अकादमिक) परिषद् या कुलपति द्वारा समनुदेशित किया जाए।
(6) विश्वविद्यालय के हरेक स्नातकोार विभाग का एक अध्यक्ष होगा और महाविद्यालय के हरेक विभाग का एक प्रधान होगा जिसकी नियुक्ति, शक्तियों और कर्तव्यों को परिनियमों द्वारा विहित किया जाएगा।9 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 16. प्राधिकारों की सदस्यता के संबंध में उपबंध ।- (1) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकार या निकाय के पदेन सदस्य से भिन्न कोई सदस्य मृत्यु, त्यागपत्र, हटाए जाने के कारण अथवा अन्यथा अपनी पूरी पदावधि पूरा करने में असमर्थ हो तो इस प्रकार हुई रिक्ति सुविधानुसार यथाशीघ्र, यथास्थिति, नियुक्ति, नाम निर्देशन या सह-योजन द्वारा भरी जाएगी, और इस प्रकार नियुक्ति, नाम निर्दिष्ट या सहयोजित व्यक्ति ऐसी रिक्ति की पूर्ति उस सदस्य की पदावधि के अपर्यवसित अवधि तक करेगा जिसके स्थान पर ऐसे व्यक्ति को नियुक्त, नाम निर्दिष्ट या सहयोजित किया जाता हो और वह अन्यथा पद पर बना रहता।
(2) विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकार या निकाय की सदस्यता से किसी व्यक्ति को बोर्ड कुलाधिपति के अनुमोदन से इस आधार पर हटा सकेगा कि ऐसा व्यक्ति नैतिक अधमता के किसी अपराध का सिद्धदोष ठहराया गया है अथवा संबंद्ध सदस्य का आचरण उसके द्वारा धारित पद के अनुरूप नहीं है, किन्तु जहाँ ऐसा कोई व्यक्ति सक्षम न्यायालय द्वारा सिद्धदोष ठहराया गया हो वहाँ कुलाधिपति के पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी, परन्तु, सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना किसी व्यक्ति के विरूद्ध ऐसा कोई आदेश नहीं किया जाएगा।
(3) कोई व्यक्ति जो विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकार या निकाय का दूसरे निकाय चाहें वह विश्वविद्यालय का हो या न हो, के प्रतिनिधि के रूप में सदस्य हो, यदि अपनी सदस्यता की पदावधि को समाप्ति के पूर्व उस अन्य निकाय, जिसने उसे नियुक्त या नाम निर्दिष्ट किया हो, का सदस्य न रह जाता हो तो वह ऐसे प्राधिकार या निकाय का सदस्य नहीं रह पाएगा।
(4) जब कभी कोई व्यक्ति अपने द्वारा धारित पदाभिधान से विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकार या निकाय का सदस्य हो जाता हो तब यदि वह अपनी सदस्यता अवधि के अवसान के पूर्व ऐसे पद पर बना नहीं रह जाता/जाती हो तो वह तुरत ऐसे प्राधिकार या निकाय का सदस्य नहीं रह जाएगा,
परन्तु वह मात्र इस कारण से अपना पद धारण करने से प्रवारित नहीं हो जाएगा/जाएगी कि वह चार माह से अनधिक अवधि के लिए छुट्टी पर जा रहा/रही है।
(5) विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकार या निकाय के पदेन सदस्य से भिन्न कोई सदस्य कुलपति को संबोधित पत्र द्वारा अपने पद से त्याग पत्र दे सकेगा और ऐसा त्याग पत्र स्वीकार किए जाने पर, उस तारीख से प्रभावी होगा जिस तारीख को वह प्रस्तुत किया गया हो।
17. अधिनियम की विधिमान्यता और संरक्षा।-(1) विश्वविद्यालय संघ और राज्य के अधिनियमों और विधियों का अनुपालन करेगा।
(2) विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकार या निकाय का कोई कार्य या कार्यवाही उसके सदस्यों में से किसी रिक्ति की विद्यमानता के कारण अथवा किसी ऐसे व्यक्ति की कार्यवाही में भाग लेने के कारण जिसके लिए बाद में पता चले कि वह ऐसा करने का हकदार नहीं था, अविधिमान्य नहीं होगी। (3) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, विश्वविद्यालय या इसके किसी प्राधिकार द्वारा सद्भावपूर्वक किए गए सभी कार्य या किए गए आदेश अंतिम होगें और इस अधिनियम या परिनियमों या विनियमों के अनुसरण में की गई या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी बात के लिए विश्वविद्यालय या इसके प्राधिकार के विरूद्ध कोई वाद नहीं चलाया जाएगा अथवा उससे किसी क्षतिपूर्ति का दावा नहीं किया जाएगा।
(4) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी परिनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई, किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए विश्वविद्यालय के किसी पदाधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरूद्ध कोई वाद या विधिक कार्यवाही संस्थित नहीं होगी।
अध्याय-IV
विश्वविद्यालय के पदाधिकारी
18. पदाधिकारी।-विश्वविद्यालय के निम्नलिखित पदाधिकारी होगें, यथा :-
(i) कुलाधिपति (ii) कुलपति (iii) निदेशकगण (iv) डीन (v) रजिस्ट्रार (vi) नियंत्रक
(vii) विश्वविद्यालय की सेवा के ऐसे अन्य व्यक्ति जिन्हें परिनियमों द्वारा विश्वविद्यालय का पदाधिकारी घोषित किया जाए,
19. कुलाधिपति।-(1) बिहार राज्यपाल अपने पदाभिधान से विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होगंें। (2) कुलाधिपति विश्वविद्यालय के प्रधान होगें तथा उपस्थित रहने पर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेंगे।
(3) सम्मान उपाधि प्रदान करने का हरेक प्रस्ताव कुलाधिपति की सम्पुष्टि के अध्यधीन होगा। (4) कुलाधिपति;
10 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010(i) विश्वविद्यालय के कार्यकलाप से संबंधित जानकारी के लिए कोई कागजात की मांग कर सकेंगे, और
(ii) अभिलिखित कारणों से, धारा-42 के अधीन आनेवाले विषय को छोड़कर, किसी भी विषय को विश्वविद्यालय के ऐसे किसी पदाधिकारी या प्राधिकार को पुनर्विचार के लिए निर्देश कर सकेंगे जिसने ऐसे विषय पर पूर्व में विचार किया हो।
(5) कुलाधिपति लिखित आदेश द्वारा, विश्वविद्यालय के किसी पदाधिकारी या प्राधिकार के ऐसे किसी आदेश या कार्यवाही को वातिल कर सकेंगे जो इस अधिनियम, परिनियम या विनियम के अनुरूप न हो,
परन्तु ऐसा कोई आदेश करने के पूर्व वे संबद्ध पदाधिकारी या प्राधिकार से कारण पृच्छा करेगे कि ऐसा आदेश क्यों न किया जाए और यदि विनिर्दिष्ट समय के अन्तर्गत इसके संबंध में कोई कारण दर्शाया जाता हो तो वे उस पर विचार करेंगें।
(6) कुलाधिपति ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेंगे तथा ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेंगे जो इन्हे इस अधिनियम या परिनियम द्वारा प्रदा हो।
(7) कुलाधिपति ऐसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों, जिसे वे निदेशित करें, से विश्वविद्यालय, जिसमें इसका भवन प्रयोगशाला, पुस्तकालय, संग्रहालय, कार्यशाला तथा उपकरण भी शामिल है और विश्वविद्यालय द्वारा अनुरक्षित या प्रशासित किसी संस्थान, महाविद्यालय या छात्रावास अथवा विश्वविद्यालय द्वारा इसके तत्वावधान में संचालित अध्यापन एवं अन्य कार्य तथा विश्वविद्यालय किसी अन्य कृत्यकारी का निरीक्षण करा सकेंगे और विश्वविद्यालय के प्रशासन एवं विा से जुडे़ किसी विषय की बावत कोई जांच करा सकेंगे।
(8) कुलाधिपति ऐसे निरीक्षक या जांच पड़ताल के निष्कर्ष के साथ राज्य सरकार के विचार, विश्वविद्यालय को संप्रेषित करेंगे और उसपर विश्वविद्यालय की राय अभिनिश्चित करने के पश्चात की जानेवाली कार्रवाई तथा ऐसी कार्रवाई के लिए निर्धारित समय-सीमा के संबंध में विश्वविद्यालय को परामर्श देंगे।
20. कुलपति।-(1) कुलपति विश्वविद्यालय के पूर्णकालिक पदाधिकारी होंगे और उनकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित नामों के पैनल से कुलाधिपति द्वारा की जाएगी। राज्य सरकार सर्च कमिटी (Search Committee) की अनुशंसा के आधार पर ऐसा पैनल तैयार करेेगी। सर्च कमिटी में निम्नलिखित सदस्य होंगेः- (i) महानिदेशक, आई॰ सी॰ ए॰ आर॰ का एक नाम निर्देशिती (ii) राज्य सरकार का एक नाम निर्देशिती (iii) कुलाधिपति का एक नाम निर्देशिती;
परन्तु, इन सदस्यों में से एक को राज्य सरकार द्वारा संयोजक के रूप में नाम निर्दिष्ट किया जाएगा; सरकार और कुलाधिपति का नाम निर्देशिती कुलपति या समतुल्य पंक्ति का होगा। किन्तु विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति प्रख्यात —षि वैज्ञानिकों में से राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
(2) ऐसा व्यक्ति जिसने अकादमिक उत्—ष्टता हासिल की हो तथा शोध, शिक्षा और विस्तार के क्षेत्र में नेतृत्व की गुणवत्ता प्रदर्शित की हो, कुलपति के पद के लिए अभ्यर्थिता का पात्र होगा।
(3) सर्च कमिटी की सूचना का व्यापक प्रचार किया जाएगा और वह सभी —षि विश्वविद्यालयों/संस्थानों में जाएगी। सर्च के पैनल का कमिटी चयन करेगी और तीन नामों के पैनल का सुझाव देगी।
(4) उपर्युक्त उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, द्वितीय और बाद के कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति द्वारा, उनके द्वारा यथा अवधारित निबंधनों और शर्त्तों पर की जाएगी।
(5) कुलपति अपने पद पर आसीन होने की तारीख से पाँच वर्षों तक अथवा पैंसठ वर्ष की आयु तक जो भी पहले हो, पद धारण करेगा। प्रथम कुलपति की रिक्ति पांच वर्ष के पूर्व होने पर पांच वर्ष के अवशेष अवधि के लिए पुनः राज्य सरकार कुलपति नियुक्त कर सकेगी।
(6) कुलपति स्वलिखित त्याग पत्र कुलाधिपति को संबोधित कर अपना पद त्याग कर सकेगा जो कुलाधिपति के सामान्यतः उस तारीख से 60 दिन पूर्व सौंपा जाएगा जिस तारीख को कुलपति अपने पद का त्याग करना चाहते हों, किन्तु कुलाधिपति उन्हें पहले भी पदमुक्त कर सकेंगे।
(7) कुलपति के पद की अस्थाई रिक्ति होने पर अथवा छुट्टी पर जाने अथवा किसी अन्य कारण से उनकी अनुपस्थिति में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ निदेशक/संकाय के डीन, कुलाधिपति के अनुमोदन से, कुलपति के कर्त्तव्यों का संपादन कर सकेगा, किन्तु उनकी अवधि छह माह से अधिक की नहीं होगी।
(8) कदाचार या असमर्थता के आधार पर अथवा कुलाधिपति द्वारा पारित आदेश अथवा यदि कुलाधिपति को प्रतीत हो कि कुलपति का पद पर बने रहना विश्वविद्यालय के हितों के विरूद्ध है तब कुलाधिपति द्वारा नामनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा सम्यक् जाँच-पड़ताल कराने तथा उन्हें अपना अभ्यावेदन करने का अवसर दिए जाने के बाद कुलाधिपति के आदेश को छोड़कर कुलपति को इनके पद से हटाया नहीं जाएगा।11 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 21. कुलपति की शक्तियाँ एवं कर्त्तव्य।-(1) कुलपति विश्वविद्यालय का प्रधान कार्यपालक पदाधिकारी तथा बोर्ड, विद्वत् परिषद् एवं अन्य प्राधिकारों का पदेन अध्यक्ष होगा और कुलाधिपति की अनुपस्थिति में विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेगा तथा उन व्यक्तियों को उपाधियाँ प्रदान करेगा जो उसे प्राप्त करने के हकदार हों।
(2) कुलपति विश्वविद्यालय के कार्यकलापों पर समग्र नियंत्रण रखेगा तथा विश्वविद्यालय में अनुशासन बनाए रखने का जिम्मेदार होगा।
(3) कुलपति प्रबंधन बोर्ड तथा विद्वत् परिषद् की बैठकें आहूत करेगा। (4) कुलपति इस अधिनियम तथा परिनियमों और विनियमों के उपबंधों का विश्वसनीय अनुपालन सुनिश्चित करेगा तथा इसके लिए यथावश्यक शक्तियों का प्रयोग करेगा।
(5) कुलपति प्रबंधन बोर्ड के वार्षिक वित्तीय प्राक्कलनों तथा वार्षिक लेखा के प्रस्तुतीकरण का जिम्मेदार होगा।
(6) कुलपति किसी आकस्मिकता की स्थिति में ऐसी कोई कार्रवाई कर सकेगा जिसमें उसकी राय के अनुसार तात्कालिक कार्रवाई की आवश्यकता हो। ऐसी स्थिति में तथा तत्पश्चात यथाशीघ्र अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट उन प्राधिकारों को देगा जो सामान्य तथा उस विषय पर कार्रवाई करते।
(7) जहां उपधारा (6) के अधीन कुलपति द्वारा की गई कार्रवाई विश्वविद्यालय की सेवा में कार्यरत किसी व्यक्ति के लिए अहितकर हो वहाँ ऐसा व्यक्ति, की गई कार्रवाई की नोटिस तामील किए जाने की तारीख से तीस दिनों के भीतर बोर्ड के पास अपील करेगा।
(8) यदि कुलपति का समाधान हो जाए कि बोर्ड का निर्णय विश्वविद्यालय के सर्वाेत्तम हित में नहीं है तो वह उसे कुलाधिपति के प्रति निर्देश करेगा जिनका उस पर निर्णय अन्तिम होगा।
(9) पूर्ववर्त्ती उपधाराओं के उपबंधों के अध्यधीन, कुलपति विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रोन्नति और बर्खास्तगी से संबंधित बोर्ड के निर्णयों को लागू करेगा।
(10) कुलपति, विश्वविद्यालय के कार्यकलापों के समुचित प्रशासन तथा अध्यापन शोध और विस्तार के सघन, समन्वय एवं एकीकरण का जिम्मेदार होगा।
(11) कुलपति, प्रबंधन बोर्ड को सूचना देकर, धारा- 18 के खंड (iii) से (vii) तक में निर्दिष्ट विश्वविद्यालय के किसी पदाधिकारी के रिक्त पद पर छह माह से अनधिक अवधि के लिए किसी उपयुक्त व्यक्ति की अस्थाई नियुक्ति कर सकेगा।
(12) कुलपति ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे अन्य कर्त्तव्यों का संपादन कर सकेगा, जो उसे इस अधिनियम और परिनियमों के उपबंधों के अधीन उसे प्रदत्त हो या अधिरोपित हो।
(13) इस अधिनियम के प्रथम प्रवर्तन की तारीख से छह माह की अवधि के लिए कुलपति को निम्नलिखित अतिरिक्त शक्तियाँ होगीः-
(i) कुलाधिपति के अनुमोदन के अध्यधीन, विश्वविद्यालय के कार्य संचालन के लिए इस अधिनियम के अधीन परिनियम बनाना;
परन्तु कुलपति इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पूर्व विश्वविद्यालय में विद्यमान परिनियमों को यथावश्यक परिवर्तन सहित अंगीकार कर सकेगा।
(ii) कुलाधिपति के पूर्व अनुमोदन से, औपबंधिक प्राधिकारों तथा निकायों का गठन कर सकेगा और उनकी अनुशंसा पर विश्वविद्यालय के कार्य संचालन के लिए नियमावली बनाना। (iii) कुलाधिपति के नियंत्रण के अध्यधीन, ऐसी वित्तीय व्यवस्था करना तथा ऐसा व्यय करना जो इस अधिनियम या इसके किसी अंश को कार्यरूप देने के लिए यथावश्यक हो;
(iv) राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से ऐसी नियुक्तियाँ करना जो इस अधिनियम या इसके किसी अंश को कार्यरूप देने के लिए यथावश्यक हो।
(v) कुलाधिपति के पूर्व अनुमोदन से उसके द्वारा यथानिदेशित —त्यों के निर्वहन के लिए यथोचित समितियों की नियुक्ति करना;
(vi) इस अधिनियम या परिनियमों द्वारा प्रबंधन बोर्ड को प्रदत्त किसी या सभी शक्तियों का प्रयोग करना।
22. विश्वविद्यालय के अन्य पदाधिकारी।-सामान्य निर्बंधन और शर्त्तें :- धारा- 18 के खंड (iii) से (vii) तक में निर्दिष्ट विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों की नियुक्ति, विश्वविद्यालय के संबद्ध प्राधिकार के अनुमोदन से तथा यथाविहित निर्बंधनों और शर्त्ताें पर कुलपति द्वारा की जाएगी और वे विश्वविद्यालय के पूर्णकालिक पदाधिकारी होंगे। ऐसे पदाधिकारी के वेतन, भत्ते तथा अन्य सेवा शर्त्ते वही होगी जो परिनियमों द्वारा यथाविहित हो।12 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 23. निदेशक, डीन, रजिस्ट्रार, नियंत्रक आदि।-(1) रेजिडेंट शिक्षण निदेशक-सह-डीन (पी॰जी॰एस॰) स्नातक पूर्व एवं स्नातकोत्तर रेजिडेंट शिक्षण के अन्तर संकाय और अन्तर विभागीय समन्वय के लिए जिम्मेदार होंगे। (2) निदेशक, शोध विश्वविद्यालय में शोध कार्यक्रम के निदेशन एवं समन्वय के जिम्मेवार होंगे। (3) निदेशक, विस्तार शिक्षा —षि विस्तार कार्यक्रम के निदेशन और समन्वय के जिम्मेदार हाेंंगे। अन्य निदेशकों के कर्त्तव्य एवं जिम्मेदारियाँ वही होंगी जो परिनियमों द्वारा यथाविहित हो। (4) संकाय के डीन/डीन : डीन संकाय और इसके अध्ययन बोर्ड के अध्यक्ष होंगे तथा संकाय के शिक्षण कार्यक्रम के आयोजन हेतु कुलपति के प्रति जिम्मेदार होंगे।
(5) रजिस्ट्रार : (क) प्रबंधन बोर्ड तथा विद्वत् परिषद् का पदेन सचिव होंगे और सभी परिषदों के स्थाई आमंत्रित होंगे। (ख) विश्वविद्यालय के अभिलेखों तथा सामान्य मुहर (सील) की सम्यक् अभिरक्षा का जिम्मेदार होगा। (ग) यथाविहित स्थापना विषयक कार्य तथा विश्वविद्यालय के सामान्य प्रशासन का जिम्मेदार होगा। (घ) स्नातक पूर्व (यू॰जी॰) तथा स्नातकोत्तर (पी॰जी॰) पाठयक्रमों में नामांकन, यू॰जी॰ और पी॰जी॰ की परीक्षाओं का संचालन एवं प्रबंधन, विश्वविद्यालय के छात्रों के स्थाई अभिलेखों, जिनमें लिए गए पाठ्यक्रम, प्राप्त क्रेडिट, उपाधियों, पुरस्कारों अथवा अन्य विशिष्ट उपाधियों (डिस्टींसन्स) तथा छात्रों के अकादमिक कार्यकलाप और अनुशासन से संबंधित अन्य वस्तुएँ भी शामिल है, के अनुरक्षण का जिम्मेदार होगा।
(6) नियंत्रक : (क) विश्वविद्यालय बजट, लेखा विवरण बनाने, निधियों के प्रबंधन तथा निवेश का जिम्मेदार होगा। (ख) यह सुनिश्चित करने का जिम्मेदार होगा कि यथाप्राधि—त व्यय हो। (ग) विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाईयों में संधारित लेखा के आवधिक आन्तरिक निरीक्षण की व्यवस्था करेगा।
(घ) बोर्ड द्वारा यथा अनुमोदित रूप में तथा रीति से विश्वविद्यालय के लेखा के संधारण का जिम्मेदार होगा तथा नकद की स्थिति, बैंक अतिशेष और निवेश की स्थिति पर सतत नजर रखेगा।
(ङ) यह देखेगा कि आस्तियों से संबंधित रजिस्टर का अद्यतन संधारण हो और नियमित स्टॉक मिलान किया जाए।
(7) इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन, धारा- 18 के खंड (iii) से (vii) तक में निर्दिष्ट विश्वविद्यालय के पदाधिकारी ऐसे अन्य कर्त्तव्यों का संपादन करेंगे जो उन्हें समय-समय पर कुलपति द्वारा विहित या समनुदेशित किया जाए।
अध्याय-V
शिक्षकों एवं कर्मियों की सेवा-शत्र्तें
24. चयन, नियुक्ति तथा वेतन एवं र्शाों का निर्धारण।-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन विश्वविद्यालय शिक्षकों तथा कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रोन्नति, चयन, वेतन एवं भाों का निर्धारण तथा अन्य सेवा र्शाो की प्रक्रिया विहित परिनियम में यथाविहित रूप में होगी।
(2) अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई विश्वविद्यालय या महाविद्यालय या इसके संस्थान, विाीय दायित्व वाले किसी प्रकार के शिक्षकीय, गैर शिक्षकीय पद का सृजन तथा अपने कर्मियों के वेतन-भाों में वृद्धि राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं कर सकेगा।
अध्याय-VI
शिक्षा, शोध एवं विस्तार शिक्षा
25. शिक्षा।-(1) इस अधिनियम के अघ्यधीन विश्वविद्यालय की शिक्षा के अन्तर्गत स्नातक, स्नातकोार एवं डॉक्टर की उपाधि संबंधी कार्यक्रम तथा कृषि एवं यथाविहित सहबद्ध विज्ञान के क्षेत्र में अल्पकालिक डिप्लोमा/सर्टिफिकेट कोर्स इत्यादि सम्मिलित होगे।
(2) शिक्षा कार्यक्रम, राज्य एवं राष्ट्रीय नीतियों के बीच सर्वांगसमता बनाए रखेगा। (3) विश्वविद्यालय ई-शिक्षा, वितरित/दूर शिक्षा, आई0सी0टी0 समर्पित जानकारी का आदान-प्रदान करने इत्यादि से संबंधित पहल करेगा।
(4) कृषि शिक्षा के कार्यक्रमों का लक्ष्य सक्षम तथा कुशल स्नातक एवं स्नाकोारधारी प्रस्तुत करना होगा। 26. शोध।-(1) इस अधिनियम तथा परिनियम के अघ्यधीन, विश्वविद्यालय कृषि एवं सहबद्ध क्षेत्रों में युक्तिपूर्ण, बुनियादी तथा अनुप्रयुक्त गवेषणा को वढ़ावा देगी
(2) अपने शोघ संगठन के माध्यम से विश्वविद्यालय कृषि, पशुपालन तथा इसके क्षेत्राधिकार के अन्य सहबद्ध शाखाओं के लिए प्रधान नियंत्रक एजेंसी होगा।13 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 (3) विश्वविद्यालय सरकार की सहमति से कार्यान्वयन सहित शोध संचालन हेतु अपने क्षेत्रीय अधिकारिता के अन्तर्गत विभिन्न कृषि जलवायु जोन में क्षेत्रीय/जोनल अनुसंधान केन्द्र एवं उप अनुसंधान केन्द्र स्थापित कर सकेगा।
27. विस्तार शिक्षा।-(1) विश्वविद्यालय में विस्तार शिक्षा कार्यक्रम आरंभ किया जाएगा तथा, इस अधिनियम एवं परिनियम के अध्यधीन प्रावैधिक मूल्यांकन परिष्करण को सुनिश्चित करेगा तथा त्वरित कृषि विकास हेतु किसानों एवं अन्य के लिए शोध के निष्कर्ष पर आधारित प्रौद्यौगिकी के प्रसार के सुकर बनाएगा। इसके द्वारा विभिन्न पणधारियों के लिए प्रदर्शनों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। विस्तार शिक्षा कार्यक्रमों के साथ विश्वविद्यालय की विभिन्न ईकाइयों तथा केन्द्र और राज्य सरकार की दूसरी समुचित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करेगा।
(2) विश्वविद्यालय राज्य में कृषि विस्तार के विकास का प्रतिमान विकसित करने का उारदायी होगा। (3) विश्वविद्यालय राज्य सरकार के पदाधिकारियों/विस्तार अधिकारियों और उनके क्षेत्राधिकार में आनेवाले किसानों को कृषि के नवाचारों से संबंधित प्रशिक्षण संबंधी सहायता और सहयोग प्रदान करेगा।
28. शिक्षण, शोध और विस्तार शिक्षा का एकीकरण।-(1) कुलपति विश्वविद्यालय के सक्षम पदाधिकारियों के परामर्श से शिक्षा, शोध एवं विश्वविद्यालय के विस्तारी शिक्षा के गतिविधियों के पूर्ण एकीकरण हेतु यथोचित कदम उठाने के लिए उारदायी होगा।
(2) शिक्षण संवर्ग का प्रत्येक संकाय सदस्य प्रत्येक अकादमिक वर्ष में शिक्षण-कार्य के अतिरिक्त कुछ समय (30% से अधिक नहीं और कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय के सक्षम पदाधिकारी के परामर्श से यथा निर्धारित अवधि तक) तक शोध और/ या विस्तार क्रियाकलापों में निरत रहेगा। उसी प्रकार शोध या विस्तार संवर्ग का सदस्य कुछ समय शिक्षण कार्य में व्यतीत करेगा।
(3) महाविद्यालय/संकाय में पदस्थापित शिक्षण, शोध एवं विस्तार शिक्षा के सभी कर्मचारी संकाय के डीन/महाविद्यालय/संकाय डीन के प्रशासनिक नियंत्रण में होंगे तथा यथास्थिति निदेशक (शोध) एवं निदेशक (विस्तार शिक्षा) के समग्र तकनीकी नियंत्रण में होंगे।
(4) विश्वविद्यालय राज्य की क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने शोध एवं विस्तार शिक्षा का कार्यक्रम विकसित करेगा तथा सरकार एवं अन्य पणधारियों को उपयुक्त प्रौद्योगिकी उपलब्ध करायेगा।
अध्याय-VII
निधि तथा लेखा
29. विश्वविद्यालय की निधियाँ।-(1)विश्वविद्यालय की एक सामान्य निधि होगी जिसमें :-
(i) शुल्कों, विन्यासों तथा अनुदानों से प्राप्त आय और विश्वविद्यालय की सम्पत्ति यथा छात्रावास, शोध केन्द्रों एवं फार्मों से प्राप्त आय;
(ii) सरकार द्वारा इस अधिनियम के उपबंध के संगत शर्तों पर दिया गया अंशदान एवं अनुदान; (iii) अन्य अंशदान, अनुदान, दान तथा ऋण एवं दूसरी प्राप्तियॉं जमा की जाएगी।
(2) विश्वविद्यालय संस्थापन निधि के नाम से एक कोष का गठन करेगा। केन्द्र सरकार या राज्यसरकार या इस निधि हेतु जमा करने के लिए अनुमोदित एजेंसी द्वारा किए गए अंशदान और अनुदान तथा बोर्ड द्वारा यथाविनिर्दिष्ट अन्य राशि इस निधि में जमा की जाएगी। जब कभी आवश्यक हो बोर्ड यथाविनिर्दिष्ट राशि संस्थापन निधि से सामान्य निधि में यथाविहित रीति से पुनः अन्तरित कर सकेगा।
(3) विश्वविद्यालय सरकार द्वारा दिये गए किसी अनुदान से संबंधित लेखा विवरण, रिपोर्ट एवं अन्य विशिष्टयाँ सरकार को प्रस्तुत करेगा तथा सरकार द्वारा यथानिदेशित समय के भीतर और यथानिदेशित रीति से अनुदान के उपयोग से संबंधित ऐसे विवरण, खाते प्रतिवेदन एवं अन्य विशिष्टयाँ एवं अन्य विवरण प्रस्तुत करेगा और कार्रवाई करेगा जैसा कि उसे निदेशित किया जाए।
(4) अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय, सरकार से या किसी अन्य राज्य सरकार से या केन्द्र सरकार से या वैधानिक निकायों से अनुदान या दान ऐसी शर्तो पर स्वीकार करने के लिए सक्षम होगा जिसके लिए विश्वविद्यालय और अनुदान दाता या दाता के बीच करार किए हाें।
30. निधि का प्रबंधन।-विश्वविद्यालय की सामान्य निधि, संस्थापन निधि एवं अन्य निधियों का प्रबन्ध परिनियम द्वारा निर्धारित उपबंधों के अनुसार किया जाएगा।
31. लेखा तथा अंकेक्षण।-विश्वविद्यालय का वार्षिक लेखा विवरण नियंत्रक द्वारा तैयार किया जाएगा तथा बोर्ड द्वारा नामनिर्दिष्ट या प्राधिकृत प्राधिकार द्वारा प्रमाणित किया जाएगा। विवरण में विश्वविद्यालय को प्रोद्भूत या प्राप्त सभी धन चाहे वे जिस किसी स्रोत से आए हों, तथा विश्वविद्यालय द्वारा भुगतान की गयी सभी रकम सम्मिलित होगी। ऐसा विवरण बोर्ड द्वारा सामान्यतः संबंधित विाीय वर्ष की समाप्ति के छह माह के भीतर प्रस्तुत किया जाएगा।14 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 32. भविष्य निधि, पेंशन और बीमा।-(1) विश्वविद्यालय यथा विहित रीति से तथा विहित शर्तो केे अध्ययधीन अपने पदाधिकारियों, शिक्षकों, अनुसचिवीय कर्मचारियों तथा अन्य कर्मचारियों के हित में राज्य सरकार द्वारा यथाअनुमोदित, पेंशन, उपदान, बीमा, भविष्यनिधि, अंशदायी पेंशन निधि का गठन करेगा।
(2) विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार गठित ऐसे पेंशन, उपदान, बीमा और भविष्य निधि के लिए राज्य सरकार यह घोषणा कर सकेगी कि भविष्य निधि अधिनियम के उपबंध इन निधियों पर लागू होंगे मानो यह सरकारी भविष्य निधि हो;
परन्तु, विा समिति तथा बोर्ड के परामर्श से विश्वविद्यालय को यह शक्ति होगी कि वह भविष्य निधि का निवेश ऐसी रीति से करे जैसा कि वह अवधारित करे।
33. सरकारी अनुदान।-सरकार हर वर्ष विश्वविद्यालय को निम्नलिखित एकमुश्त अनुदान देगा, यथा :- (1) विश्वविद्यालय के समुचित कार्य संपादन के लिए कर्मचारियों के वेतन और भो, विश्वविद्यालय की आकस्मिकताओं, आपूर्तियों और सेवाओं से संबंधित प्राक्कलित व्यय से अन्यून अनुदान।
(2) आवर्तक और अनावर्तक व्यय के ऐसे अतिरिक्त मदों को पूरा करने के लिए अनुदान जो राज्य सरकार आवश्यक समझे।
34. विा समिति।-(1) बोर्ड एक विा समिति का गठन निम्नलिखित रूप में करेगाः-
(i) कुलपति - अध्यक्ष (ii) प्रधान सचिव/सचिव, विा विभाग, राज्य सरकार अथवा उनका नाम निर्देशिती जो संयुक्त सचिव से अन्यून पंक्ति का हो।
(iii) प्रधान सचिव/सचिव, कृषि विभाग, राज्य सरकार अथवा उनका नाम निर्देशिती जो संयुक्त सचिव से अन्यून पंक्ति का हो।
(iv) बोर्ड के सदस्यो में से एक निदेशक/डीन, जिनका नाम निर्देशन कुलपति द्वारा किया जाएगा।
(v) बोर्ड का एक नाम निर्देशिती (vi) नियंत्रक - सदस्य सचिव
(2) विा समिति के निम्नलिखित कृत्य होंगे :-
(i) विश्वविद्यालय के वार्षिक लेखा और बजट प्राक्कलनों की जाँच करना तथा उस पर बोर्ड को सलाह देना।
(ii) समय-समय पर विश्वविद्यालय की विाीय स्थिति की समीक्षा कराना। (iii) विश्वविद्यालय के सभी विाीय मामलों पर बोर्ड को अनुशंसा करना। (iv) बजट में उपबंधित राशि से अधिक व्यय से संबंधित सभी प्रस्तावेां पर बोर्ड को अनुशंसा करना।
अध्याय - VIII
परिनियम और विनियम
35. परिनियम।-इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन, विश्वविद्यालय के परिनियम द्वारा विश्वविद्यालय के कार्यकलापों से जुड़े किसी विषय पर तथा खासकर निम्नलिखित विषयों पर उपबंध किया जा सकेगा :-
(1) प्राधिकारों का गठन, उनकी शक्तियाँ और कर्तव्य, (2) विश्वविद्यालय अकादमिक गतिविधि में सुधार के लिए आवश्यक या वांछनीय अन्य निकायों या समितियों का गठन, संरचना और —त्य,
(3) कुलाधिपति और कुलपति से भिन्न पदाधिकारियों का पदनाम, उनकी शक्तियाँ, —त्य, कर्तव्य, नियुक्ति तथा चयन की रीति और सेवा के निर्बंधन एवं शर्तें,
(4) विश्वविद्यालय के शिक्षकों तथा गैर शिक्षकीय कर्मचारियों का वर्गीकरण, अर्हता और नियुक्ति की रीति, सेवा के निर्बंधन एवं शर्ते तथा कर्तव्य,
(5) कुलपति की सेवा के निर्बंधन और शर्तें, (6) विश्वविद्यालय के संकायों, विभागों/शोध स्थलों/केन्द्रों अथवा अन्य इकाइयों की स्थापना, आमेलन, उप विभाजन या समापन,
(7) विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों के हित में पेंशन और बीमा स्कीमों की स्थापना तथा ऐसी स्कीमों की नियमावली, निर्बंधन एवं शर्तें,
(8) उपाधि (डिग्री) और डिप्लोमा प्रदान करने के लिए दीक्षांत समारोह का आयोजन, (9) मानद उपाधियों और अकादमिक विशिष्टता प्रदान करना और वापस लेना, (10) विश्वविद्यालय के अधीन नियोजित पदाधिकारियों, शिक्षकों और अन्य व्यक्तियों की सेवा शर्तें, तथा उन्हें भुगतान किए जाने वाले पारिश्रमिक एवं भो जिसमें यात्रा भाा और दैनिक भाा भी शामिल है,
(11) परीक्षण निकायों तथा परीक्षकों की नियुक्ति की शर्तें एवं ढंग और कर्तव्य,15 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 (12) विश्वविद्यालय द्वारा संस्थापित अथवा अनुरक्षित महाविद्यालयों/केन्द्रों/प्रभागों/ विभागों/क्षेत्रीय केन्द्रों/अन्य —षि विकास केन्द्रों/संस्थानों का प्रबंधन,
(13) शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए चयन समिति का गठन, (14) पदाधिकारियों का पदनाम, उनकी नियुक्ति की रीति, शक्तियाँ और उनके कर्तव्य, (15) सभी अन्य मामले जो इस अधिनियम में हो अथवा परिनियम द्वारा उपबंधित की जाए, 36. परिनियम किस प्रकार बनाए जाएँगें।-(1) इस अधिनियम के अधीन परिनियमों का प्रस्ताव बोर्ड द्वारा किया जाएगा और सहमति के लिए कुलाधिपति को प्रस्तुत किया जाएगा तथा सहमति प्राप्त होने और कुलपति द्वारा अधिसूचित किए जाने पर ही विधिमान्य होगा। किन्तु, धारा-35(7) और (10) से संबंधित परिनियम में राज्य सरकार का पूर्व अनुमोदन अपेक्षित होगा।
(2) कुलाधिपति की सहमति से बोर्ड द्वारा किसी परिनियम को संशोधित या निरस्त किया जा सकेगा। (3) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए सभी परिनियम राजपत्र में प्रकाशित किए जाएगें। 37. विनियम।-(1) विश्वविद्यालय के प्राधिकार इस अधिनियम और परिनियम के संगत विनियम
निम्नलिखित बातों के लिए बना सकेगें :-
(i) अपनी बैठकों की प्रक्रिया का विनिर्धारण और गणपूर्ति के लिए अपेक्षित सदस्यों की संख्या। (ii) ऐसे विषयों के लिए उपबंध करना जो इस अधिनियम और परिनियम के अधीन विनियमों द्वारा विनियमित किया जाना हो।
(iii) ऐसे किसी अन्य मामले के लिए उपबंध करना जो एक मात्र इस प्राधिकार से संबंधित हो और जो इस अधिनियम तथा परिनियम द्वारा उपबंधित न हो।
(2) इस अधिनियम और परिनियम के अध्यधीन, विद्वत् परिषद् पाठ्यक्रम, परीक्षा-पद्धति,अकादमिक कलेंडर, विश्वविद्यालय की उपाधि और डिप्लोमा तथा रेजिडेंट शिक्षण से संबंधित अन्य मामलों के लिए विनियम बना सकेगी। (3) विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकार द्वारा बनाए गए विनियम बोर्ड के ऐसे निदेशों के अध्यधीन होंगे जो समय-समय पर इस संबंध में दिए जाएँ।
(4) विश्वविद्यालय का विद्वत परिषद् निम्नलिखित बातों के लिए विनियम बना सकेगीः- (i) उपाधि और डिप्लोमा प्रदान करने के लिए दीक्षांत समारोह का आयोजन, (ii) मानद उपाधि, अकादमिक विशिष्टिता प्रदान करना तथा उपाधि वापस लेना, (iii) विश्वविद्यालय द्वारा अनुरक्षित छात्रावासों की स्थापना और उनका समापन, (iv) फेलोशिप, छात्रवृाि, वृािका, वजीफा, मेडल तथा पुरस्कार संस्थित करना और उन्हें प्रदान करने की शर्तें,
(v) विश्वविद्यालय में छात्रों का प्रवेश और नामांकन तथा इस रूप में बने रहना और नामांकन से छात्रों को हटा दिए जाने की शर्तें एवं प्रक्रिया,
(vi) विश्वविद्यालय द्वारा ली जानेवाली फीस, (vii) विश्वविद्यालय की सभी उपाधियों, डिप्लोमा और प्रमाणपत्रों के लिए विनिर्धारित किए जानेवाले पाठ्यक्रम,
(viii) वे शर्तें, जिनके अधीन विश्वविद्यालय की उपाधियों, डिप्लोमा या अन्य पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं के लिए नामांकित किया जाएगा तथा उपाधि एवं डिप्लोमा प्रदान किए जाने हेतु उनकी पात्रता।
(ix) उपाधियों और अन्य अकादमिक विशिष्टता प्रदान किए जाने की शर्तें, (x) विश्वविद्यालय के छात्रों में अनुशासन बनाए रखना। (xi) विशेष व्यवस्था, यदि कोई हो, जो छात्राओं के आवासन, अनुशासन और अध्यापन के लिए की जाए तथा महिलाओं के लिए विशेष पाठ्यक्रम का उपबंध।
(xii) विश्वविद्यालय के छात्रों के आवासन की शर्तं तथा छात्रावासों में आवासन के लिए ली जानेवाली फीस।16 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010
अध्याय - IX
प्रकीर्ण
38. छात्रों का आवासन।-छात्र नियमों द्वारा यथाउपबंधित आवासीय हॉस्टल में रहेंगे। 39. वार्षिक प्रतिवेदन।-विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन रजिस्ट्रार कुलपति के निदेशाधीन समनुदेशित अन्य पदाधिकारी द्वारा सामान्यतः विाीय वर्ष की समाप्ति से छह माह के भीतर तैयार किया जाएगा और जिस बैठक में उस पर विचार किया जाना हो उससे पूर्व बोर्ड के सदस्यों को प्रचारित किया जाएगा। वार्षिक प्रतिवेदन पर विचार किए जाने के बाद बोर्ड उसकी एक प्रति सरकार को अग्रसारित करेगा।
40. शक्तियों का प्रत्यायोजन।-प्रबंधन बोर्ड (बो0ओ0एम0) इस अधिनियम अथवा इसके अधीन बनाए गए परिनियम के अधीन प्रयोग की जा सकनेवाली शक्तियों का प्रत्यायोजन, प्रबंधन बोर्ड के यथोचित शर्तों एवं निर्बंधनों के अध्यधीन, किसी प्राधिकार, पदाधिकारी, महाविद्यालयों/विभागों/संस्थानों के अध्यक्षों को प्रत्यायोजित कर सकेगा।
41. तदर्थ समितियों का गठन।-इस अधिनियम में किसी बात के होते भी तथा प्राधिकारों के सम्यक गठन के समय तक के लिए, कुलपति, बोर्ड के गठन के बाद इसके अनुमोदन के अध्यधीन, इस अधिनियम के अधीन ऐसे प्राधिकार की शक्तियों, —त्यों और कर्तव्यों के प्रयोग, संपादन और निर्वहन के लिए अस्थाई तौर पर समितियाँ नियुक्त कर सकेगा।
42. विश्वविद्यालय के प्राधिकारों और निकायों के संस्थापन से संबंधित विवाद।-यदि किसी व्यक्ति के संबंध में कोई प्रश्न उठे कि वह विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकार या अन्य निकाय में सम्यक् रूप से नियुक्त किया गया है या नहीं अथवा वह उसका सदस्य होने का हकदार है या नहीं तो वह मामला कुलाधिपति को निर्देश किया जाएगा जिनका निर्णय अन्तिम होगा,
परन्तु कोई निर्णय करने के पूर्व कुलाधिपति उससे प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देंगे। 43. विधिक कार्यवाही।-विश्वविद्यालय द्वारा या उसके विरूद्ध सभी वाद तथा अन्य विधिक कार्यवाही रजिस्ट्रार के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन विश्वविद्यालय की ओर से विधि पदाधिकारी द्वारा अथवा कुलपति द्वारा इस निमिा विनिर्दिष्टतः नामनिर्दिष्ट किसी अन्य पदाधिकारी द्वारा संस्थित, अभियोजित या बचाव किया जाएगा। 44. विश्वविद्यालय के कार्यकलापों से संबंधित पदों पर नियुक्ति।-(1) इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए परिनियम के उपबंधों के अध्यधीन विश्वविद्यालय के कार्यकलापों से जुड़े पदों पर और सेवाओं में नियुक्ति, यथाविहित संबद्ध प्राधिकार के अनुमोदन से, कुलपति द्वारा की जाएगी,
परन्तु, सहायक प्राध्यापक (असिसटेंट प्रोफेसर) के वेतनमान से निम्नतर वेतनमान वाले पदों पर नियुक्ति के संबंध में बोर्ड के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।
(2) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी तथा परिनियम बनाए जाने अथवा विश्वविद्यालय के प्राधिकारों का गठन होने तक, विश्वविद्यालय के कार्यकलापों से संबंधित पदों पर और सेवाओं में नियुक्ति, कुलाधिपति द्वारा यथा अनुमोदित निर्बंंधनों एवं शर्तों पर, कुलपति द्वारा की जा सकेगी।
45. अंतःकालीन उपबंध।-(1) इस अधिनियम में अथवा राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों के अधिनियम में अथवा इन अधिनियमितियों में से किसी के अधीन बनाए गए परिनियम या विनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी छात्र को, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पूर्व इस महाविद्यालय में पढ़ रहा था, जिसे (अन्य) विश्वविद्यालयों की उपाधि, डिप्लोमा या प्रमाण पत्र के लिए विश्वविद्यालय का विशेषाधिकार दिया गया हो या इसके बाद दिया जाएगा, इस विश्वविद्यालय के विनियमों के अनुसारः-
(क) विश्वविद्यालय (राज्य के अन्य विश्वविद्यालय) के पाठ्यक्रम के अनुसार अपनी पाठ्यचर्या पूरी करने की अनुमति दी जाएगी,
(ख) इस विश्वविद्यालय द्वारा उसकी परीक्षा ली जायगी, और यदि ऐसी परीक्षा के परीक्षाफल में वह अर्हित होता हो तो विश्वविद्यालय की संगत उपाधि या डिप्लोमा या प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने का पात्र होगा,
(ग) उक्त पाठ्यक्रम को पूरा करने की सामान्य अवधि दो वर्ष के अन्तर्गत परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।
(2) विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष में, विभिन्न संकायों और विषयों के सभी पाठ्यक्रमों की विश्वविद्यालय परीक्षा, यथास्थिति, राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित की जाएगी और पश्चात्वत्र्ती वर्षों में परीक्षा इस विश्वविद्यालय द्वारा संचालित की जाएगी।
46. विद्यमान महाविद्यालयों और संस्थानों से संबंधित उपबंध।-(1) अनुसूची-। में उपदर्शित महाविद्यालयों तथा शोध संस्थानों का अनुरक्षण, नियंत्रण एवं प्रबंधन विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा।
(2) अनुसूची-। में उपदर्शित संस्थान से संबंधित सभी संपत्ति, आस्तियों, दायित्व और बाध्यता विश्वविद्यालय को अन्तरित हो जाएगी तथा उसमें निहित या उसका न्यागत हो जाएगी।
(3) विश्वविद्यालय (राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों) अधिनियम या विनियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कृषि महाविद्यालय/पशु चिकित्सा महाविद्यालय या (सरकार द्वारा यथा अनुमोदित) संबद्ध क्षेत्रों के अन्य महाविद्यालय इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पश्चात् राज्य के अन्य विश्वविद्यालय द्वारा अंगीभूत महाविद्यालय के रूप में अनुरक्षित किए जाएंगे।17 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 (4) अनुसूची-। में उल्लिखित किसी महाविद्यालय, शोध संस्थान के सभी कर्मचारी या पदाधिकारी और संस्थान विश्वविद्यालय के कर्मचारी होंगे और राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के कर्मचारी नहीं रह जाएंगे,
परन्तु, बिहार राजपत्र में इस अधिनियम की अधिसूचना प्रकाशित होने के एक वर्ष के अन्तर्गत राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय को लिखित नोटिस देंगे, उन्हें राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकारी की सेवा में बनाए रखने तथा समतुल्य पद पर पदस्थापित किए जाने की अनुमति दी जा सकेगी। इसी प्रकार, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के कर्मचारी, यदि वे ऐसी इच्छा जाहिर करें तो बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में अपने आमेलन के लिए राज्य सरकार को लिखित नोटिस दे सकेंगे। राज्य सरकार अपने निर्णय से विश्वविद्यालय को अवगत कराएगी। 47. कठिनाइयों को दूर करना।-(1) इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी बनाने में यदि कोई कठिनाई उत्पन्न होती हो तो उस कठिनाई को दूर करने के लिए जो भी आवश्यक प्रतीत हो वैसा कुछ भी करने का आदेश सरकार दे सकेगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश को किसी विधि न्यायालय में इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि उक्त उपधारा में निर्दिष्ट कोई कठिनाई विद्यमान नहीं थी जिसे दूर करना हो।
(3) इस धारा के अधीन प्रकाशित हरेक आदेश, इस आदेश के प्रकाशन के बाद यथाशीघ्र, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा।
48. निरसन एवं व्यावृति।- (1) बिहार कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1987 (बिहार अधिनियम, 8, 1988) अनुसूची-। में परिगणित संस्थानों के संबंध में इस अधिनियम के निबंधनों के अनुसार उपान्तरित समझे जाएंगे। (2) ऐसा संशोधन होने के बाबजूद, उक्त अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, जहॉं तक वह इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में या उसके अधीन की गई मानी जाएगी, मानो यह अधिनियम उस दिन प्रवृत्त था जिस दिन वैसी बात की गई या वैसी कार्रवाई की गई।18 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 अनुसूची-।
।. शैक्षिक संस्थान-
(1) बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर, भागलपुर (2) मंडन भारती कृषि महाविद्यालय, अगवानपुर, सहरसा (3) बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय, पटना (4) संजय गॉंधी डेयरी प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना (5) उद्यान कृषि महाविद्यालय, नूरसराय, नालन्दा
।।. अनुसंधान संस्थान/केन्द्र/उप-केन्द्र-
(1) क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, अगवानपुर, सहरसा (2) क्षेत्रीय अनुसंधान उपकेन्द्र, जलालगढ़, पूर्णियॉ (3) जूट अनुसंधान केन्द्र, कटिहार (4) सिंचाई अनुसंधान केन्द्र, मधेपुरा (5) क्षेत्रीय अनुसंधान उपकेन्द्र, अररिया (6) क्षेत्रीय अनुसंधान उपकेन्द्र, मुंगेर (7) महीन धान अनुसंधान उप केन्द्र, तिलोन्धा, भागलपुर (8) सिंचाई अनुसंधान केन्द्र, विक्रमगंज, रोहतास (9) वानस्पतिक अनुसंधान उप केन्द्र, धनगांई, रोहतास (10) कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना (11) दलहन अनुसंधान केन्द्र, मोकामा, पटना (12) पानवल्लरी अनुसंधान केन्द्र, इस्लामपुर, नालन्दा
।।।. कृषि विज्ञान केन्द्र-
(1) कृषि विज्ञान केन्द्र, मुंगेर (2) कृषि विज्ञान केन्द्र, अरिआरी, शेखपुरा (3) कृषि विज्ञान केन्द्र, अगवानपुर, सहरसा (4) कृषि विज्ञान केन्द्र, जलालगढ़, पूर्णिया (5) कृषि विज्ञान केन्द्र, कटिहार (6) कृषि विज्ञान केन्द्र, मधेपुरा (7) कृषि विज्ञान केन्द्र, सबौर, भागलपुर (8) कृषि विज्ञान केन्द्र, अररिया (9) कृषि विज्ञान केन्द्र, बॉंका (10) कृषि विज्ञान केन्द्र, लखीसराय (11) कृषि विज्ञान केन्द्र, सुपौल (12) कृषि विज्ञान केन्द्र, किशनगंज (13) कृषि विज्ञान केन्द्र, बाढ, पटना (14) कृषि विज्ञान केन्द्र, हरनौत, नालन्दा (15) कृषि विज्ञान केन्द्र, विक्रमगंज, रोहतास (16) कृषि विज्ञान केन्द्र, जहानाबाद (17) कृषि विज्ञान केन्द्र, औरंगाबाद (18) कृषि विज्ञान केन्द्र, गया (19) कृषि विज्ञान केन्द्र, अरवल19 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 वित्तीय संलेख बिहार की अर्थव्यवस्था प्रधानतः कृषि आधारित है। बिहार के लोगों की समग्र उन्नति के लिए कृषि का त्वरित विकास अत्यावश्यक है। कृषि के त्वरित विकास के लिए कृषि और सहबद्ध विज्ञान के क्षेत्र में शोध, शिक्षा और विस्तार शिक्षा को सुदृढ़ करने की परम आवश्यकता है। हाल के दिनों में राज्य सरकार ने कृषि महाविद्यालय, अगवानपुर, सहरसा तथा उद्यान कृषि महाविद्यालय, नूरसराय, नालंदा की स्थापना कर शोध, शिक्षा और विस्तार शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने का कदम उठाया है। वत्र्तमान में, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर एक मात्र कृषि विश्वविद्यालय है। कृषि विकास के त्वरित विकास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, अब नया कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करना राज्य हित में है। बीसवीं शताब्दी के शुरूआत से ही सबौर, भागलपुर कृषि विषयक शोध, शिक्षा और विस्तार शिक्षा का केन्द्र रहा है। बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर की स्थापना 1908 के दौरान की गई थी और यह देश के सबसे पुराने कृषि महाविद्यालयों में एक है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, भागलपुर में स्थापित किया जाएगा। विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार संपूर्ण बिहार तक होगा। विद्यमान संस्थान/शोध केन्द्र और कृषि विज्ञान केन्द्र, जो इस विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई होंगी, उनकी सूची बना ली गई है और वे विधेयक की अनुसूची-। के रूप में उपाबद्ध है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर की स्थापना के लिए वित्तीय वर्ष 2009-10 में एक करोड़ रूपये स्वीकृत किये गये हैं । विश्वविद्यालय के लिए कुलपति एवं उनकी कोर टीम स्वीकृत किये गये हैं। कोर टीम द्वारा विश्वविद्यालय के लिए विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को समर्पित किया जायेगा। विधेयक के प्रस्ताव में योजना प्राधिकृत समिति, वित्त विभाग की स्वीकृति प्राप्त है।
(रेणु कुमारी) भारसाधक सदस्य20 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 उद्देश्य एवं हेतु बिहार की अर्थव्यवस्था प्रधानतः कृषि आधारित है। बिहार के लोगों की समग्र उन्नति के लिए कृषि का त्वरित विकास अत्यावश्यक है। कृषि के त्वरित विकास के लिए कृषि और सहबद्ध विज्ञान के क्षेत्र में शोध, शिक्षा और विस्तार शिक्षा को सुदृढ़ करने की परम आवश्यकता है। हाल के दिनों में राज्य सरकार ने कृषि महाविद्यालय, अगवानपुर, सहरसा तथा उद्यान कृषि महाविद्यालय, नूरसराय, नालंदा की स्थापना कर शोध, शिक्षा और विस्तार शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने का कदम उठाया है। वत्र्तमान में, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर नामक एक मात्र कृषि विश्वविद्यालय है। कृषि विकास के त्वरित विकास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, अब नया कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करना राज्य हित में है। बीसवीं शताब्दी के शुरूआत से ही सबौर, भागलपुर कृषि विषयक शोध, शिक्षा और विस्तार शिक्षा का केन्द्र रहा है। बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर की स्थापना 1908 के दौरान की गई थी और यह देश का एक सबसे पुराना कृषि महाविद्यालय है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, भागलपुर में स्थापित किया जाएगा। विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार संपूर्ण बिहार तक होगा। विद्यमान संस्थान/शोध केन्द्र और कृषि विज्ञान केन्द्र, जो इस विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई होंगी, उनकी सूची बना ली गई है और वे विधेयक की अनुसूची-। के रूप में उपाबद्ध है। इस विधेयक का प्रयोजन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर की स्थापना कर कृषि विज्ञान के क्षेत्र में शिक्षण, शोध और विस्तार शिक्षा का एक समान मानक प्रवर्तित करना है। इसमें उक्त विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रबंधन तथा कर्मचारियों की सेवाशत्र्तों का भी उपबंध है। उक्त प्रावधानों को लागू करना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है। जिसे अधिनियमित कराना ही इसका अभीष्ट है।
(रेणु कुमारी) भारसाधक सदस्य
पटनाः दिनांक 30 मार्च, 2010
सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा, सचिव,
बिहार विधान-सभा।
———— अधी-क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 245-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in