िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 17171717 चैऽ चैऽ चैऽ चैऽ 1932193219321932 ((((शशशश0000))))
((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 246246246246) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना, , , , बुधबुधबुधबुधवारवारवारवार,,,, 7777 अूीलअूीलअूीलअूील 2020202010101010 ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=äÑéçâóX=
CCCCCCCCC=
îÑLäïéìâ=
PM=Éâéw=OMNM=
= ä~M= Ñç∫ä∫Ñç∫CNV]OMNMCNNRN]Ñç∫ä∫^—ÑÅÖâà= ¢Ñ?â= eâïÑÉ= Eñpà= ¢Ñ?â= áòXâëíìâë~= Çë= ÑóI= äbáÑàç½âwìF= ÑçLëXÇz=OMNMGGz=íâë=ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=Éë~=Ñåìâ~Ç=PM=Éâéwz=OMNM=Çâë=áèàBicââÑáê=Öèîâ=cââz=ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=ÇÜ= áòÑÕXâ=êcââ=ÇâXw=ä~éâóì=ÑìXÉâçóÜ=Çë=ÑìXÉ=NNS=Çë=îrêñwê=ã∞ëDX=îâpà=Öëêè=äÑÖê=áòÇâÑDâê=ÑÇXâ==íâêâ=Öp=^=
äèàër‹=áòäâå=DâÉâwz=
äÑéçz=
ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ^2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010
[Ñç¥ä¥Ñç¥CNN]OMNM⁄
बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) विधेयक, 2010
कृषि भूमि के गैर-कृषि प्रयोजनों से सम्परिवर्तन के लिए तथा उससे सम्बद्ध एवं अनुषंगी मामलों को विनियमित करने हेतु विधेयक।
भारत गणराज्य के इकसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ ।- (1) यह अधिनियम बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) अधिनियम, 2010 कहा जा सकेगा।
(2) यह बिहार म्यूनिसिपल अधिनियम, 2007 या उसके किसी भाग के तहत नगर क्षेत्र के रूप में गठित या कैन्टोनमेंट के तहत पड़ने वाले किसी क्षेत्र को छोड़कर सम्पूर्ण बिहार राज्य में विस्तारित होगा। इस अधिनियम का विस्तार वही होगा जैसा बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 में उपबंधित है।
स्पष्टीकरणः-यह अधिनियम किसी हद तक कृषि भूमि समाहित करते हुए ऐसे क्षेत्र पर लागू नहीं होगा जिसे मास्टर प्लान के प्रकाशन के द्वारा या अन्य किसी विधि से व्यावसायिक, औधोगिक या नगर क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया हो।
(3) यह उस तिथि से प्रवृत्त होगा जो सरकार अधिसूचना द्वारा नियत करे
2. परिभाषाएँ ।- इस अधिनियम में, जबतक संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) "कृषि भूमि" से अभिप्रेत है कृषि एवं सहबद्ध क्रियाकलापों के लिए प्रयुक्त भूमि।
(ख) "सम्परिवर्तन" से अभिप्रेत है कृषि से गैर कृषि प्रयोजनों के लिए भूमि उपयोग में परिवर्तन।
(ग) "सम्परिवर्तन फीस" में सम्बन्धित परिस्थितियों में लागू फीस शामिल है।
(घ) "गैर-कृषि भूमि" से अभिप्रेत है कृषि भूमि से भिन्न भूमि।
(ङ) "सरकार" से अभिप्रेत है बिहार सरकार।
(च) "समाहर्त्ता" से अभिप्रेत है जिला समाहर्त्ता जिसकी अधिकारिता में सम्परिवर्तन के लिए आवेदित कृषि भूमि अवस्थित है, तथा इसमें इस अधिनियम के अधीन जिला समाहर्त्ता की शक्तियों का प्रयोग तथा कृत्यों का अनुपालन करने वाला सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी सम्मिलित है।
(छ) "सक्षम प्राधिकार" से अभिप्रेत है अनुमंडल पदाधिकारी, जिसकी अधिकारिता में सम्बन्धित कृषि भूमि या उसका भाग अवस्थित हो।
(ज) "विहित प्रक्रिया" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन सरकार द्वारा निर्मित नियमों अथवा सरकारी आदेश के द्वारा विहित प्रक्रिया।
(झ) "अधिसूचना" से अभिप्रेत है बिहार राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना तथा शब्द "अधिसूचित" तदनुसार समझा जायेगा।
(ञ) "अधिभोगी" में निम्नलिखित सम्मिलित हैं :-
(i) कोई व्यक्ति, भूमि अथवा उसके ऊपर निर्मित संरचना के लिए तत्समय लगान या उसके अंश का भुगतान कर रहा हो या भुगतान के लिए उत्तरदायी हो।
(ii) लगान-मुक्त अधिभोगी।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 (ट) "स्वामी" में सम्मिलित है कोई व्यक्ति, जो तत्समय अपने लेखा में या किसी अन्य व्यक्ति के एजेन्ट, ट्रस्टी, अभिभावक, प्रबन्धक या रिसीभर के रूप में, या किसी धार्मिक, शैक्षणिक या दातव्य प्रयोजन से, कृषि भूमि या वैसी भूमि पर निर्मित संरचना के लिए लगान या मुनाफा ले रहा हो, या लेने की अर्हता रखता हो तथा इसमें निम्नलिखित भी सम्मिलित हैं, जिन्हें राज्य सरकार या केन्द्र सरकार के द्वारा भूमि लीज पर दी गयी हैः-
(i) कोई लीजधारी, यदि सरकार के द्वारा उसे भूमि गैर कृषि प्रयोजनार्थ लीज पर दी गयी है तथा उसे उससे आय हो रही हो;
(ii) कोई स्थानीय प्राधिकार, यदि भूमि स्थानीय प्राधिकार में निहित हो तथा गैर कृषि प्रयोजनार्थ उससे आय प्राप्ति के लिए, प्रयुक्त है।
(ठ) "बाजार मूल्य" से अभिप्रेत है भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के प्रावधानों के अधीन समाहर्त्ता द्वारा यथा अवधारित कृषि भूमि का मूल्य।
3. भूमि उपयोग सम्परिवर्तन ।- (1) सक्षम प्राधिकार की पूर्वानुमति के बिना राज्य में कृषि भूमि का गैर कृषि उपयोग नहीं किया जाएगा।
(2) गैर-कृषि भूमि के प्रयोजनार्थ कृषि भूमि के ऐसे सम्परिवर्तन के लिए आवेदन धारा-4 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट सम्परिवर्तन फीस सहित विहित प्रपत्र में दिया जायगा।
(3) यदि उप-धारा-(2) के अनुसार भुगतान किया गया सम्परिवर्तन फीस विहित फीस से कम पाया जाता है तब आवेदन प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर सक्षम पदाधिकारी के द्वारा आवेदक को एक सूचना प्रेषित करके फीस में कमी की जानकारी दी जाएगी।
(4) आवेदक उप-धारा (3) के अधीन निर्गत सूचना में निर्दिष्ट अन्तर फीस को सूचना प्राप्ति के तीस दिनों के भीतर जमा करेगा।
(5) यदि आवेदक उप-धारा (3) के अधीन निर्गत सूचना में अंकित अन्तर फीस को ऐसी सूचना प्राप्ति के 30 दिनाें के भीतर जमा नहीं करता है, तब सक्षम प्राधिकार आवेदक को एक द्वितीय सूचना निर्गत करेगा जिसमें उसे सूचना प्राप्ति के 15 दिनाें के अन्दर अन्तर फीस जमा करने का निदेश दिया जायेगा। यदि आवेदक निदेश का अनुपालन करने में विफल रहता है तब उसका आवेदन अस्वीकृत कर दिया जायेगा।
(6) सम्परिवर्तन के लिए आवेदित अनुमति आवेदन प्राप्त होने की तिथि या अन्तर राशि की प्राप्ति की तिथि, जो बाद में हो, के 90 दिनों के भीतर सक्षम पदाधिकारी के द्वारा पूर्णतः या अंशतः या तो निर्गत की जाएगी अथवा अस्वीकृत की जाएगी परन्तु ऐसे आवेदनों को अस्वीकृत करने की स्थिति में, अस्वीकृति के कारणों को लिखित रूप में अभिलिखित कर आवेदक को संसूचित किया जाएगा।
यदि उपर्युक्त सम्परिवर्तन बिहार अधिनियम 21, 1993 के प्रवृत्त होने के बाद तथा इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के पूर्व कर लिया गया हो तो सम्परिवर्तन हेतु उत्तरदायी व्यक्ति के लिए अनिवार्य होगा कि वह अधिनियम प्रवृत्त होने की तिथि के 6 महीनों के भीतर इस अधिनियम की धारा-4 में उपबन्धित सम्परिवर्तन फीस के साथ तथा सम्बन्धित भूमि के वर्तमान बाजार मूल्य के 1 izfr'kr के अतिरिक्त सम्परिवर्तन फीस के साथ सक्षम प्राधिकार के समक्ष, उपर्युक्त सम्परिवर्तन के तथ्य का उल्लेख करते हुए आवेदन दे जिसमें असफल रहने पर सक्षम प्राधिकार इस अधिनियम, की धारा 6 के अनुसार कार्रवाई करेगा :
परन्तु, यदि बिहार अधिनियम 21, 1993 के प्रारम्भ के पूर्व कोई सम्परिवर्तन कर लिया गया है तथा संबंधित व्यक्ति को सम्परिवर्तन आदेश की आवश्यकता है और वह इसके लिए आवेदन देता है तो उसे इस अधिनियम के4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 प्रावधानों के अध्यधीन तथा इस अधिनियम की धारा 4 (1) में विनिर्दिष्ट सम्परिवर्तन फीस का भुगतान करने पर सम्परिवर्तन करने की अनुमति दी जा सकेगी।
(7) आवेदन प्राप्त होने पर सक्षम प्राधिकार इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन, कार्रवाई करेगा :
परंतु यदि ऐसे आवेदन पर उप-धारा (6) के अधीन विहित समय में कोई आदेश पारित नहीं होता हो, तो सम्बन्धित आवेदक सक्षम पदाधिकारी को निबंधित डाक से उसके द्वारा वांछित अनुमति की अप्राप्ति की सूचना भेजेगा। ऐसी सूचना प्राप्त होने पर सक्षम पदाधिकारी सूचना प्राप्ति के एक पक्ष के अन्दर वांछित अनुमति प्रदान करेगा अन्यथा अपेक्षित अनुमति दी गयी मानी जाएगी।
परन्तु और कि यदि आवेदन पूर्णतः या अंशतः अस्वीकृत कर दिया जाता है, तब आवेदक द्वारा जमा किया गया सम्परिवर्तन फीस, जितनी भूमि के लिए अनुमति प्रदान नहीं की जा सकी, उस अनुपात में उसको वापस कर दी जाएगी।
स्पष्टीकरणः-किसी भूखंड के अंश या पूर्ण, जिसे गैर कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जा रहा हो या लाया जाने वाला हो, के विरूद्ध सम्परिवर्तन की अनुमति दी जा सकेगी। ऐसी भूमि के उपयोग के अनुपात में सम्परिवर्तन फीस का भुगतान देय होगा।
4. सम्परिवर्तन फीस लगाने तथा वसूल करने की शक्ति ।- (1) इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तिथि के प्रभाव से कृषि भूमि के प्रत्येक दखलकार या स्वामी को सरकार के द्वारा समय-समय पर क्षेत्रों के लिए यथा अधिसूचित भूमि के बाजार मूल्य का 10 प्रतिशत गैर कृषि प्रयोजन के लिए सम्परिवर्त्तन फीस का भुगतान करना होगा।
(2) भू-स्वामी, जब उसकी कृषि भूमि के गैर कृषि उपयोग के लिए सम्परिवर्तन की अनुमति दी जा चुकी हो,ऐसे सम्परिवर्तन के पूर्व बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 के प्रासंगिक प्रावधानों या इसके अध्यधीन निर्गत नियमों/अनुदेशों यदि कोई हों, के तहत भुगतान किए गए लगान/सेस के दस गुणा के दर से लगान/सेस भूमि के जिस अंश के लिए अनुमति दी गयी हो, का भुगतान करेगा।
5. कृषि भूमि का गैर कृषि प्रयोजनार्थ सम्परिवर्तन का आदेश देने के लिए सक्षम प्राधिकार ।-(1) अनुमंडल पदाधिकारी अपने क्षेत्रीय अधिकारिता में अवस्थित भूमि के संबंध में कृषि प्रयोजन से गैर कृषि प्रयोजन में भूमि के उपयोग के लिए आदेश देने के लिए सक्षम होंगे।
(2) सक्षम प्राधिकार के द्वारा सम्परिवर्तन की अनुमति मात्र इसी आधार पर अस्वीकृत की जा सकेगी कि समुचित सम्परिवर्तन फीस का भुगतान नहीं किया गया है, या सम्परिवर्तन से सार्वजनिक न्यूसेन्स की सम्भावना है या इस धारा की उपधारा (3) के अधीन अधिरोपित की जा सकनेवाली शर्तों के अनुपालन में भूधारी अक्षम या अनिच्छुक हो।
(3) मात्र निम्नलिखित उद्ेश्यों के लिए सम्परिवर्तन पर शर्तें अधिरोपित की जा सकती हैं, यथा-सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करने के लिए तथा ऐसी भूमि के मामले में जहाँ भूमि का उपयोग भवन-स्थल के रूप में किया जाना है, ताकि यह भी सुनिश्चित किया जा सके कि स्थलों का परिमाण, व्यवस्था और पहुँच दखलकारों के स्वास्थ्य तथा सुविधा के लिए पर्याप्त है या स्थानीय तौर पर उपयुक्त है।
(4) यदि किसी पारित आदेश या किसी भी पूर्वगामी उपधारा में अधिरोपित शर्तों के उल्लंघन में किसी भूमि के प्रयोजन का सम्परिवर्तन हो गया हो तो सक्षम प्राधिकार ऐसे उल्लंघन के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को सूचना तामील होने के 6 माह के भीतर भूमि के मूल प्रयोजन के लिए उपयोग करने का आदेश देगा या अन्य ऐसे5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 आवश्यक कदम उठाएगा जिससे भूमि का उसके मूल प्रयोजन के लिए उपयोग हो सके, या शर्त का अनुपालन हो सके।
(5) यदि उपधारा (4) के अधीन सूचना प्राप्त कोई व्यक्ति सूचना में विहित अवधि में सक्षम प्राधिकार के द्वारा यथाआदेशित कार्रवाई करने में विफल रहता है तब सक्षम प्राधिकार अपने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा तथा ऐसा करने में उपगत कोई खर्च भू-राजस्व के बकाया के रूप में ऐसे व्यक्ति से वसूलनीय होगी।
6. अनधिकृत सम्परिवर्तन के लिए शास्ति ।-(1) सक्षम प्राधिकार स्वप्रेरणा से या सम्बन्धित अंचल अधिकारी के द्वारा इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के बाद किसी व्यक्ति के द्वारा कृषि भूमि के गैर कृषि भूमि में सम्परिवर्तन के सम्बन्ध में समर्पित प्रतिवेदन पर कार्यवाही प्रारम्भ कर सकेगा। ऐसी सूचना/प्रतिवेदन प्राप्त होने पर सक्षम प्राधिकार कार्यवाही प्रारम्भ करेगा तथा सम्बन्धित व्यक्ति को अपने न्यायालय में उपस्थित होने तथा कृषि भूमि के गैर कृषि उपयोग में प्रतिवेदित सम्परिवर्तन के सम्बन्ध में कारण-पृच्छा समर्पित करने, अपेक्षित सम्परिवर्तन फीस एवं उसके साथ इस धारा की उप धारा (3) में विनिर्दिष्ट शास्ति जमा करने की अपेक्षा करते हुए सूचना निर्गत करेगा। (2) यदि सक्षम प्राधिकार की यह राय हो कि कृषि भूमि को धारा-3 में उपबन्धित अनुमति प्राप्त किये बिना गैर कृषि उपयोग में लाया गया है तो यह समझा जाएगा कि कृषि भूमि को गैर कृषि प्रयोजन में सम्परिवर्तित कर लिया गया है।
(3) ऐसे अनधिकृत सम्परिवर्तन के मामले में सक्षम प्राधिकार अधिनियम की धारा-4 में विनिर्दिष्ट उक्त भूमि के लिए सम्परिवर्तन फीस के अतिरिक्त सम्परिवर्तन फीस के 50 प्रतिशत की शास्ति अधिरोपित करेगा।
(4) भूमि का स्वामी या दखलकार यथाविहित रीति से आदेश की तिथि से तीन माह के भीतर उप धारा (3) में अंकित सम्परिवर्तन फीस एवं शास्ति का भुगतान करेगा।
(5)(i) यदि सम्परिवर्तन फीस एवं शास्ति का भुगतान उप धारा (4) में विनिर्दिष्ट अवधि व्यतीत होने पर असमादत्त रहे, तब बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 के प्रावधानों के अनुसार देय राशि वसूलनीय होगी।
(ii) ऐसे भू-स्वामी या भू-दखलकार के विरूद्ध इस अधिनियम की धारा 5 की उप धारा (4) तथा (5) के अधीन आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी।
7. सम्परिवर्त्तन फीस में छूट ।- (1) उद्योग विभाग, बिहार सरकार के द्वारा इस सम्बन्ध में यथा अधिसूचित उद्योग से जुड़े मामले, मुद्दे और नीति में सम्परिवर्तन अनुमान्य होगा परन्तु इसमें सम्परिवर्तन फीस देय नहीं होगा। एतदर्थ, आवेदक सक्षम प्राधिकार के समक्ष आवेदन कर सकेंगे, जो इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सम्परिवर्तन की स्वीकृति देगा।
(2) उप धारा (1) में उपबन्धित किसी भूमि के मामलों में, जो मूलतः छूट की श्रेणी में थी, बाद में ऐसा उपयोग किया जाए जिसके लिए छूट नहीं हो, इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन सम्परिवर्त्तन फीस प्रभार्य होगा। 8. कतिपय भूमि एवं भूमि उपयोग में सम्परिवर्तन की अनुमति अनपेक्षित होना ।-
निम्नलिखित के संबंध में सम्परिवर्तन की अनुमति अनपेक्षित होगी :-
(क) राज्य सरकार के स्वामित्व की भूमि ;
(ख) स्थानीय प्राधिकार के स्वामित्व की भूमि, जिनका उपयोग सामुदायिक प्रयोजनों के लिए हो रहा हो, जबतक उनका व्यावसायिक प्रयोजनों के लिए उपयोग नहीं हो रहा हो;
6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010(ग) धार्मिक, सामाजिक एवं दातव्य प्रयोजनों से उपयोग में लायी जानेवाली भूमि, जबतक उनका व्यावसायिक प्रयोजनों के लिए उपयोग नहीं हो रहा हो;
(घ) एक एकड़ से अनधिक पारम्परिक पेशा युक्त सूक्ष्म गृह उद्योग के लिए उपयोग में लायी गयी भूमि;
(ङ) छोटी दुकानों के लिए उपयोग में लायी जानेवाली 500 वर्गफीट से अनधिक भूमि;
(च) सरकार द्वारा समय-समय पर यथा अधिसूचित किन्हीं अन्य प्रयोजनों के उपयोग मे लायी गयी भूमि;
(छ) बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 की धारा 23 (2) में विनिर्दिष्ट भूमि-उपयोग।
9. अपील एवं पुनरीक्षण ।-(1) अनुमंडल पदाधिकारी के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति ऐसे आदेश के 60 दिनों के भीतर समाहर्त्ता के समक्ष अपील दायर कर सकेगा।
(2) अपीलीय आदेश के विरूद्ध ऐसे आदेश के 30 दिनों के भीतर प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण मामला दायर किया जा सकेगा।
10. अन्य विधियों पर अधिनियम का अध्यारोही होना ।-तत्समय प्रवृत्त किसी भी अन्य विधि या विधि की शक्तियुक्त किसी परम्परा या व्यवहार या संविदा, न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकार के निर्णय, डिक्री या आदेश से असंगत रहने पर भी, इस अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होंगे।
11. निदेश देने की शक्ति ।-इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के प्रयोजनार्थ सरकार किसी पदाधिकारी, प्राधिकार या सरकार के अधीनस्थ व्यक्ति को यथोचित निदेश देने में सक्षम होगी।
12. अधिकारिता का वर्जन ।- इस अधिनियम में स्पष्टतया अन्यथा उपबन्धित को छोड़कर किसी भी न्यायालय में धारा-3 के अधीन कमी फीस या धारा-6 के अधीन अधिरोपित किये गये जुर्माने या इस अधिनियम या इसके अधीन बनी किसी नियमावली के अधीन किसी पदाधिकारी या प्राधिकार के द्वारा पारित आदेश या लिए गए निर्णय को निरस्त, संशोधित या उसकी वैधता को प्रश्नगत करने हेतु कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण नहीं की जाएगी।
13. सदिच्छा से कृत कार्रवाई का संरक्षण ।- इस अधिनियम या इसके अधीन बनायी गयी नियमावली के अधीन सदिच्छापूर्वक कृत या करने के लिए इच्छित किसी कार्य के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक् कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी।
14. कठिनाईयाँ दूर करने की शक्ति ।- इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने में यदि कोई कठिनाई उत्पन्न हो तो सरकार बिहार राजपत्र में प्रकाशित आदेश के द्वारा आवश्यक व्यवस्था करेगी जो इस अधिनियम के प्रावधानों के असंगत न हो तथा उस कठिनाई को हटाने हेतु आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो। 15. नियम बनाने की शक्ति ।- इस अधिनियम के सभी या किसी प्रयोजन को क्रियान्वित करने के लिए सरकार अधिसूचना के द्वारा नियम बना सकेगी।7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010
वित्तीय संलेख
कृषि भूमि के गैर कृषि प्रयोजन हेतू सम्परिवर्त्तन के लिए बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 के अन्तर्गत कोई प्रावधान नहीं था । इस संबंंध में सन् 1983 में संशोधनोपरान्त एक नई धारा-23 जोड़ी गयी थी लेकिन उसे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया है ।
तदुपरान्त राज्य में आर्थिक विकास के प्रसंग में एक नया अधिनियम लाने की आवश्यकता प्रतीत हुयी जिसके क्रम में यह विधेयक लाया गया है ।
इस विधेयक की धारा 6 के अनुसार सम्परिवर्त्तन बिहार अधिनियम, रा0, 1983 के प्रवृत होने के बाद तथा इस अधिनियम के प्रवृत होने के पूर्व कर लिया गया हो तो सम्परिवर्त्तन हेतु उत्तरदायी व्यक्ति के लिए अधिनियम प्रवृत होने की तिथि के 6 महीनों के भीतर यथा अधिसूचित भूमि के वर्त्तमान बाजार मूल्य का 1% के अतिरिक्त 10% गैर कृषि प्रयोजन के लिए सम्परिवर्त्तन फीस का भुगतान करने का प्रस्ताव है ।
विधेयक की धारा-4(2) में जब किसी भू-स्वामी को उसकी कृषि भूमि के गैर कृषि उपयोग के लिए सम्परिवर्त्तन की अनुमति दी जा चुकी हो, तब ऐसे संपरिवर्त्तन के पूर्व बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत भुगतान किए गये लगान/सेस के दस गुणा की दर से भुगतान करने का प्रस्ताव है । प्रस्तावित विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि यदि किसी पारित आदेश या किसी भी पूर्वगामी उपधारा में अधिरोपित शर्त्तों के उल्लंघन में किसी भूमि के प्रयोजन का सम्परिवर्त्तन हो गया हो तो सक्षम प्राधिकार ऐसे उल्लंघन के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को सूचना तामिल होने के 6 माह के भीतर भूमि के मूल प्रयोजन के लिए उपयोग करने का आदेश देगा या अन्य ऐसे आवश्यक कदम उठायेगा जिससे भूमि का उसने मूल प्रयोजन के लिए उपयोग हो सके या शर्त्त का अनुपालन हो सके ।
प्रस्तावित विधेयक की धरा-5(4) में इस धारा के अधीन सूचना प्राप्त कोई व्यक्ति विवित अवधि के अन्दर सक्षम प्राधिकार के द्वारा यथा आदेशित कार्रवाई करने में विफल रहने पर सक्षम प्राधिकार द्वारा अपने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने का प्रावधान किया गया है । और ऐसा करने में उपगत कोई खर्च-भू राजस्व के बकाया के रूप में ऐसे व्यक्ति से वसूल करने का प्रस्ताव है ।
यदि कृषि भूमि को धारा-3 में उपबंधित अनुमति प्राप्त किये बिना गैर किसी उपयोग में लाया गया है तो इसे कृषि भूमि को गैर कृषि प्रयोजन में अनाधिकृत सम्परिवर्त्तन मानते हुए धारा-4 में विनिर्दिष्ट उक्त भूमि के लिए सम्परिवर्त्तन फीस के अतिरिक्त 50 प्रतिशत की शास्ति अधिरोपित करने का प्रस्ताव है ।
प्रस्तावित विधेयक में निम्न के स्वामित्व वाली भूमि के उपयोग में सम्परिवर्त्तन की अनुमति अनपेक्षित रहने का प्रस्ताव है :-
(क) राज्य सरकार के स्वामित्व की भूमि ;
(ख) स्थानीय प्राधिकार के स्वामित्व की भूमि, जिनका उपयोग सामुदायिक प्रयोजनों के लिए हो रहा हो, जबतक उनका व्यावसायिक प्रयोजन के लिए उपयोग नहीं हो रहा हो ;
(ग) धार्मिक, सामाजिक एवं दातव्य प्रयोजनों से उपयोग में लायी जानेवाली भूमि, जबतक उनका व्यावसायिक प्रयोजनों के लिए उपयोग नहीं हो रहा हो ;
(घ) एक एकड़ से अनधिक पारम्परिक पेशा युक्त सूक्ष्म गृह उद्योग के लिए उपयोग में लायी गयी भूमि ;
(ङ) छोटी दुकानों के लिए उपयोग में लायी जानेवाली 500 वर्गफीट से अनधिक भूमि ;
(च) सरकार द्वारा समय-समय पर यथा अधिसूचित किन्हीं अन्य प्रयोजनों के उपयोग में लायी गयी भूमि ;
(छ) बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 की धारा 23 (2) में विनिर्दिष्ट भूमि-उपयोग ।8 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010 उपर्युक्त विधेयक के लाये जाने से कृषि भूमि के सक्षम प्राधिकार के पूर्वानुमति के बिना गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्त्तन की प्रवृति को रोकने में मदद मिलेगी । इसका दूसरा पहलू यह है कृषि भूमि के कानूनी रूप से सम्परिवर्त्तन होने से राज्य के विकास की गति तीव्र होगी । साथ ही राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी ।
विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है ।
(नरेन्द्र नारायण यादव)
भार साधक सदस्य9 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 7 अूील 2010
उद्देश्य एवं हेतु
इस विधेयक का उद्देश्य कृषि भूमि के गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्त्तन से संबंधित मामलों को विनियमित करना है । ऐसा प्रावधान किया जा रहा है कि बिना सक्षम प्राधिकार की पूर्वानुमति के कृषि भूमि का गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्त्तन नहीं किया जा सकता है । इस विधेयक में सम्परिवर्त्तन की अनुमति के लिए आवेदन दायर किए जाने की प्रक्रिया एवं उनके निष्पादन की प्रक्रिया उल्लिखित की जा रही है । अनुमति प्रदान किए जाने में कुछ शर्त्तें भी उपबंधित की जा रही हैं । विधेयक में दण्डात्मक प्रावधान भी हैं । अंत में, जिन मामलों में सम्परिवर्त्तन से उन्मुक्तियाँ दी जायेंगी एवं जिन मामलों में कोई क्षेत्राधिकार का प्रावधान भी किया गया है । सारांशतः इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य एवं हेतु कृषि भूमि गैर कृषि प्रयोजन से सम्परिवर्त्तन का विनियमन है । जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ठ है ।
(नरेन्द्र नारायण यादव)
भार साधक सदस्य पटनाः
सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा, दिनांक 30 मार्च, 2010
सचिव,
बिहार विधान-सभा।
———— अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 246-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in