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अधिसूचना
13 मई 2010
सं0 2489—मोटर गाड़ी अधिनियम, 1988 (एम.भी.एक्ट 1988)(अधिनियम संख्या 59) की धारा-88 की उप-धारा (5) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल जो अधिसूचना जारी करना चाहते हैं, उसका निम्न प्रारूप प्रभावित हो सकने वाले व्यक्तियों के जानकारी के लिए प्रकाशित किया जाता है और इसके द्वारा नोटिस दिया जाता है कि जिस व्यक्ति को उक्त प्रारूप के संबंध में जो भी आपत्ति या सुझाव हो वह इस अधिसूचना के सरकारी गजट में प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों के अंदर अपनी आपत्तियॉं एवं सुझाव विचारार्थ अधोहस्ताक्षरी को भेज सकते हैं। निर्धारित समय-सीमा के पश्चात राज्य सरकार, राज्य परिवहन प्राधिकार, बिहार, पटना के परामर्श से प्राप्त आपत्ति या सुझाव पर विचार करेगी ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रामवृक्ष ठाकुर,
सरकार के अवर सचिव । बिहार एवं छत्तीसगढ़ के बीच पारस्परिक परिवहन समझौता 2008 का आलेख्य—मोटर वेहिकल्स एक्ट, 1988 अधिनियम 59(5) के अधीन शक्ति का प्रयोग करके और इस विषय में समस्त कारकों का अतिक्रमण करके राज्यपाल उस नवीन पारस्परिक करार का, जिसे बिहार एवं छत्तीसगढ़ के राज्य करने का प्रस्ताव करते है । निम्नलिखित प्रारूप ऐसे समस्त व्यक्तियों के सूचना के लिए जिस पर इसका प्रभाव पड़ने की सम्भावना है, और उसके संबंध में अभ्यावेदन आमंत्रित करने की दृष्टि से प्रकाशित किया जाता है ।
उक्त करार के प्रारूप के संबंध में समस्त अभ्यावेदन प्रमुख सचिव, गृह (परिवहन विभाग) मंत्रालय दाऊकल्याणसिंह भवन, छत्तीसगढ़ रायपुर अथवा बिहार प्रदेश शासन(.......) का संबंधित एवं लिखित रूप में गजट प्रकाशन की तिथि से एक महीने के अन्दर अनिवार्य रूप से प्रेषित किया जाना चाहिए । उपरोक्त2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 7 जून 2010 दिनांक से पूर्व प्राप्त सभी अभ्यावेदनों तथा उक्त करार के प्रारूप पर उपर लिखित अधिकारी द्वारा दिनांक-... ..... को 11 बजे पूर्वाह्न में दाऊकल्याणसिंह भवन, छत्तीसगढ़ रायपुर अथवा ....... पटना में विचार किया जायगा ।
बिहार सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के मध्य पारस्परिक परिवहन करार वर्ष-2008—पूर्ववर्त्ती बिहार एवं मध्यप्रदेश राज्य से नवीन राज्य झारखण्ड एवं छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया है । पूर्ववर्ती बिहार एवं मध्यप्रदेश राज्य के मध्य सम्पन्न समझौते के अंतर्गत कई ऐसे मार्ग जिन पर कोई सीघी रेल सेवा आज भी नहीं है, एवं यात्रियों को बस सुविधा ही आवागमन का एक मात्र साधन है। छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड राज्य के गठन पश्चात् वर्तमान में छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड तथा बिहार राज्य के स्थानों को जोडने वाले ऐसे मार्ग उपलब्ध है, जिन पर वाहन परिचालन हो रहा है । छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड राज्य के मध्य मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा-88 (6) के अंतर्गत पारस्परिक यातायात समझौता को अंतिम रूप मिल चुका है, तथा सम्पन्न समझौते की कंडिका 10 की उप-कंडिका (ग) द्वारा झारखण्ड सरकार द्वारा यह सहमति दी गयी है कि ''अविभाजित मध्यप्रदेश एवं बिहार राज्य के समय स्वीकृत/जारी स्थायी परमिट जो छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड राज्य के गठन के पश्चात (छत्तीसगढ़-झारखण्ड एवं बिहार) तीनों राज्यों को जोड़ने वाले मार्ग हो गए है, उन मार्गों पर बिहार और छत्तीसगढ़ राज्य के बीच समझौता किया जाना है । चूॅंकि उक्त मार्ग का मध्य भाग झारखण्ड में पड़ता है । अतः बिहार एवं छत्तीसगढ़ राज्य के बीच होनेवाले समझौता पर झारखण्ड राज्य सहमति प्रदान करता है । अतः बिहार तथा छत्तीसगढ़ राज्य से निर्गत होने वाले परमिटों पर झारखण्ड राज्य से प्रतिहस्ताक्षर किया जायेगा, तथा परमिटधारी द्वारा झारखण्ड राज्य के समस्त मोटरयान कर नियमानुसार देय होगा ।
उक्त परिप्रेक्ष्य में बिहार सरकार एवं छत्तीसगढ़ सरकार के बीच अन्तर्राज्यीय परिवहन हेतु मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा-88 के अंतर्गत आवश्यक पारस्परिक परिवहन करार (जिसे इसके पश्चात् करार कहा गया है) किया जाना आवश्यक हो गया है ।
अतएव प्रथम पक्ष के रूप में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल (जिन्हें आगे छत्तीसगढ़ सरकार कहा गया है, और जिसमें पदासीन उनके उत्तराधिकारी भी सम्मिलित है) और द्वितीय पक्ष के रूप में बिहार के राज्यपाल (जिन्हें आगे बिहार सरकार कहा गया है और जिसमें पदासीन उनके उत्तराधिकारी भी सम्मिलित है) के बीच आज दिनांक 31 जुलाई 2008 को एतद्र्थ निम्नलिखित करार किया जाना प्रस्तावित है ।
इसलिए आज दिनांक 31 जुलाई 2008 को एतद्र्थ आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रमुख सचिव, सह-परिवहन आयुक्त, एवं बिहार सरकार के राज्य परिवहन आयुक्त तथा उप-सचिव के बीच निम्नांकित बिन्दुओं पर परस्परिक वार्ता हुई । वार्ता में सुविधाजनक संदर्भ के लिये छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दोनों राज्यों के बीच अवस्थित कुल-11 अंतर्राज्यीय भागों की सूची उपलब्ध करायी गयी, जबकि सरकार की ओर से इन मार्गों के अतिरिक्त कुल-17 मार्गों की सूची उपलब्ध करायी गयी इस तरह दोनों राज्यों के बीच अवस्थित विभिन्न अंतर्राज्यीय मार्गो की कुल संख्या 28 होती है। इस सूची में विभिन्न राज्यों में मार्गों की दूरी एवं परमिटों की संख्या दर्शायी गयी है । दोनों में से किसी राज्य के पहल पर इस समझौते के अधीन या उनसे अतिरिक्त मार्गो पर आवश्यकता होने पर आपसी सहमति से प्रक्रम यात्री वाहनों के यथा अपेक्षित संख्या में परमिट स्वीकृत किये जा सकेगें तथा ऐसे परमिट पारस्परिक यातायात समझौता के बाहर के परमिट कहलायेंगे और इन पर प्रतिहस्ताक्षरित राज्य के कराधान अधिनियम के अनुसार मोटरयान कर देय होगा ।
दोनों पक्षकारों के बीच सहमति निम्न प्रकार से हैः- यह पारस्परिक समझौता संबंधित राज्य सरकारों द्वारा एतदर्थ निर्गत अंतिम अधिसूचना की तिथि से लागू होगा और तब तक मान्य रहेगा, जब तक दोनों राज्यों के बीच कोई नया समझौता न हो जाये । 1. करो का निर्धारण-
(i) पारस्परिक समझौता के तहत संबंधित राज्य में समय-समय पर लागू अधिनियमों/नियमों एवं विनियमों के प्रावधानों के अंतर्गत निर्गत होगा ।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 7 जून 2010 (ii) समझौता के तहत सभी श्रेणी के परिवहन वाहनों के लिए द्वि-कर (double point) करारोपण प्रणाली लागू होगी । यह द्वि-कर प्रणाली नवीकरण के लंबमान अवधि में मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा-87 के तहत निर्गत परमिट एवं उसके प्रतिहस्ताक्षर पर भी लागू होगी, परन्तु दोनों राज्यों का मोटरयान कर दोनों राज्यों में प्रभावी मोटरयान कराधान अधिनियम के तहत देय होगा ।
(iii) कर-अपवंचना की प्रवृत्ति पर नियंत्रण पाने के लिये दोनों राज्यों के बीच इस बिन्दु पर पारस्परिक सहमति हुई कि परमिट निर्गत करने वाला प्रत्येक प्राधिकार परमिट का निर्गमन तभी करेगा जब आवेदक दूसरे संबंद्ध राज्य (प्रतिहस्ताक्षर करने वाला राज्य) का कर स्टेट बैंक ऑंफ इंडिया या किसी अन्य बैक जो इंटरनेट बैकिंग की सुविधा उपलब्ध कराता है, में संबंधित राज्य के खाता में जमा कर देता है और परमिट निर्गत करने वाला प्राधिकार इस कर का वास्तविक भुगतान की सम्पुष्टि कर लेता है । राज्य परिवहन प्राधिकार/क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार संंबंधित राज्य परिवहन प्राधिकार को फैक्स के माध्यम से लिये गये कर की विवरणी यथा बैंक ड्राफ्ट की संख्या, बैंक ड्राफ्ट की राशि एवं परमिटधारी का नाम आदि हर माह भेज देंगे । प्रतिहस्ताक्षर करने वाला प्राधिकार, जब तक कोई आपत्तिजनक सूचना प्राप्त न हो वैधानिक रूप से परमिट का प्रतिहस्ताक्षर करेंगे ।
(iv) स्टेज-कैरेज, ठेका परमिट एवं मालवाहक परमिट आदि निर्गत करने वाला मूल प्राधिकार संबंधित राज्य को कर एवं बकाये कर वसूली में हर संभव सहयोग करेगा । यदि दूसरे राज्य में आवेदक कर-प्रमादी हो तो उसे कोई परमिट निर्गत नहीं किया जाएगा । (v) अंतर्राज्यीय मार्गो पर परमिट का नवीकरण वाहन का प्रतिस्थापन या अंतर्राज्यीय परमिट के प्रत्यर्पण की स्वीकृति के पूर्व प्रत्येक संबंद्ध राज्य को जॉंचोपरान्त यह सुनिश्चित करना होगा कि दोनों राज्यों को देय कर का नुकसान नहीं हों । परमिट के निरंतरता की जॉंच 15 नवम्बर 2000 से ही की जाएगी, एवं तदनुसार यह निर्धारित किया जाएगा कि आवेदक द्वारा सम्यक रूप से दोनों राज्यों को देय कर का भुगतान किया गया है अथवा नहीं । परमिट लेने हेतु आवेदक को बैंक खाता संख्या का प्रमाण देना दोनों राज्यों में प्रतिहस्ताक्षर हेतु अनिवार्य होगा ।
(vi) अस्थायी/विशेष/ठेका परमिट को निर्गत करने वाला प्राधिकार उपरोक्त कंडिका (iii), (iv) एवं (v) का अनुपालन सुनिश्चित करेगा ।
(vii) वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए उपयोग किये जाने वाले यानों से भिन्न सभी प्रकार के मोटरयानों को जो अनन्यतः एक राज्य के स्वामित्व द्वारा और सरकार के प्रयोजन के लिए उपयोग किये जाये पारस्परिक करारकर्ता राज्य में समस्त करो के संदाय से छूट प्राप्त होगी ।
2. लोक सेवा यान मंजिली यात्री बसों (स्टेज कैरिज का संचालन) का परमिटः-
(i) मार्गों की उपलब्ध सूची में मार्ग की लबाई के संबंध में किसी प्रकार की कोई खामी का पता चलने पर दोनों संबद्ध राज्य के राज्य परिवहन प्राधिकार आपसी पत्राचार के द्वारा इसे दूर करेंगे और यह समझौते का संशोधन नहीं समझा जाएगा । इसी तरह की पद्धति दोनों राज्यों के बीच पड़ने वाले अंतर्राज्यीय मार्ग विशेष में अधिकतम 24 कि.
मी. तक विस्तार या कटौती पर अपनायी जाएगी ।
(ii) स्थायी परमिट की वैधानिक मान्यता पॉंच वर्षों की होती है । सरकारी राजस्व की क्षति पर नियंत्रण के उद्देश्य से दोनों पक्षों के बीच इस बिन्दु पर सहमति हुई कि स्थायी परमिट पॉंच वर्षों का निर्गत होगा लेकिन परमिट के साथ-साथ प्राधिकारण-पत्र (परिचालन प्रमाण-पत्र)/अनुशंसा-पत्र भी निर्गत किया जाएगा, जो कर भुगतान की तिथि4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 7 जून 2010 तक मान्य रहेगा । परिचालन प्रमाण-पत्र की मान्य अवधि समाप्त होने पर बिना उसके विस्तारण के वाहन का परिचालन नहीं हो सकेगा ।
(iii) किसी वाहन परिचालन के संबंध में वही अधिकतम यात्री एवं माल भाड़ा वसूल किया जा सकता है, जो संबंधित राज्यों की सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जायेगा । एक राज्य द्वारा निर्गत टिकट दूसरे राज्य में मान्य होगी ।
(iv) परमिट के प्रतिहस्ताक्षर के निलंबन अथवा रद्द करने की सूचना परमिट निर्गत करने वाले प्राधिकर को दी जावेगी, ताकि दूसरे राज्य द्वारा परिचालन की व्यवस्था की जा सकें ।
(v) परिशिष्ट ''क'' में दर्शित सभी 28 मार्गों की दूरी 100 कि.मी. से अधिक होने के कारण उन पर संचालित सभी बस सेवाये दुतगामी बस सेवा (एक्सप्रेस सेवा) होगी । (vi) इस समझौता में दर्शाये गये मार्गों के अतिरिक्त अन्य जनोपयोगी मार्गों की जानकारी प्राप्त होने पर उसे अगले अंतरिम समझौते में शामिल कर लिया जाएगा । (vii) वर्ष-1979, 1988 तथा 1996 जिसमें केवल वर्ष-1979 के समझौते को ही अंतिम रूप दिया गया था, परन्तु वर्ष-1988 एवं वर्ष-1996 को अंतिम रूप नहीं दिया गया था, लेकिन स्थायी परमिट स्वीकृत किये गये है, उसे मान्यता प्रदान करते हुए परमिट के नवीनीकरण/प्रतिहस्ताक्षर दोनों राज्य यथावत करते रहेगे ।
(viii) आम-यात्रियों को आरामदायक एवं सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दोनों पक्ष निम्नांकित बिन्दुओं पर सहमत हुए कि यदि पर्यावरण प्रदूषण अथवा अन्य विधान/नियमों से बाधित न हो तो - (क) ऐसे यात्री वाहन जिनका व्हील बेस 205 इंच से कम हो, परमिट स्वीकृत
नहीं किये जायेगें परन्तु वर्ष-1979 वर्ष-1988 तथा वर्ष-1996 के समझौते के तहत स्थायी परमिट स्वीकृत किये गये है, ऐसे अनुज्ञा-पत्र धारकों को शर्त्त के
अनुसार पारस्परिक यातायात समझौता के पश्चात् संबंधित राज्यों के राजपत्र में
प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष के अंदर वाहन का प्रतिस्थापन कराना अनिवार्य होगा ।
(ख) 08 वर्ष से अधिक आयु के वाहनों को अंतर्राज्यीय मार्गों पर परमिट की स्वीकृति नहीं दी जाएगी । परन्तु वर्ष 1979, वर्ष-1988 एवं वर्ष-1996 के
समझौते के तहत स्थायी परमिट स्वीकृत किये गये है ऐसे अनुज्ञा-पत्र धारकों
को शर्त्त के अनुसार पारस्परिक यातायात समझौता के पश्चात संबंधित राज्यों के राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष के अंदर वाहन का प्रतिस्थापन
कराना अनिवार्य होगा ।
(ix) परिशिष्ट ''क'' में उल्लेखित मार्गों पर जबतक राज्य परिवहन प्राधिकार द्वारा स्थायी परमिट स्वीकृत नहीं किये जाते है तब तक दोनों राज्यों द्वारा अस्थायी परमिट स्वीकृति/प्रतिहस्ताक्षरित किये जायेंगे ।
3. विशेष परमिटः-
(i) मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा-88(8) के तहत पर्यटन के उद्देश्य से शादी के अवसर, स्थल दर्शन, बीमार व्यक्तियों की चिकित्सा एवं धार्मिक उद्देश्य से निर्गत होने वाले विशेष परमिट संबंद्ध राज्य के प्राधिकार द्वारा उपर्युक्त कंडिका-1 की उप-कंडिका (i) से (vi) का अनुपालन करते हुए अधिकतम 30 दिनों के लिए पूरी अवधि में मात्र एक अप (जाने) एवं एक डाउन (वापसी) खेप के लिए दिया जाएगा। (ii) ऐसे विशेष परमिटों के साथ यात्रियों की सूची संबद्ध राज्य के प्राधिकार द्वारा अनुमोदित होगी । इस सूची के साथ पार्टी द्वारा विस्तृत यात्रा प्रोग्राम भी दिया जाएगा, जो प्राधिकार से अनुमोदित होगा । यात्रियों की सूची एवं यात्रा प्रोग्राम दो प्रतियों में, देय5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 7 जून 2010 होगा । इसका संक्षिप्त विवरण परमिट पर भी अंकित किया जाएगा । इन सूचनाओं के अभाव में परमिट अमान्य रहेगा। सभी प्रकार के कर/फीस इत्यादि के भुगतान/वसूली के संबंध में पूर्ण उल्लेख परमिट पर अंकित रहेगा ।
4. ठेका परमिट (अस्थायी)ः-अस्थायी ठेका परमिट मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा-87(1)(क) के अंतर्गत आवश्यकतानुसार दूसरे राज्य परिवहन प्राधिकार की सहमति के बिना उपर्युक्त कंडिका-1 की उप कंडिका (i) से (vi) का अनुपालन करते हुए अधिकतम दो सप्ताह के लिए पूरी अवधि में मात्र एक अप एक डाउन ट्रिप निम्नांकित शर्तों के अंतर्गत निर्गत किये जा सकते हैः-
(i) वाहन किसी व्यक्ति द्वारा भाड़ा पर लिया गया हो और यात्रा एक जाने एवं एक लौटने के लिए हो ।
(ii) परमिट पर जाने एवं लौटने की तिथि स्पष्ट रूप से अंकित होगी । (iii) दोनों संबद्ध राज्यों के प्रारंभ एवं पहुंच स्थान के बीच किसी बिन्दु पर यात्रियों को चढ़ाने-उतारने की अनुमति नहीं होगी ।
(iv) किसी कारणवश विशेष परिस्थिति में अगर किसी वाहन के परमिट की मान्य अवधि संबद्ध राज्य में समाप्त हो जाती है, तो नियमानुसार संबद्ध राज्य नया अस्थायी परमिट दे सकता है ।
(v) वाहन के निबंधित बैठान क्षमता से अधिक तथा स्टैन्डिंग पोजीशन (खड़ी सवारी) में यात्रियों को ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी ।
(vi) ऐसे अस्थायी ठेका परमिटों के साथ यात्रियों की सूची संबद्ध राज्य के प्राधिकार के द्वारा अनुमोदित होगी । इस सूची के साथ पार्टी द्वारा विस्तृत यात्रा प्रोग्राम भी दिया जाएगा । जो प्राधिकार से अनुमोदित इसका संक्षिप्त विवरण परमिट पर भी अंकित किया जाएगा । इन सूचनाओं के अभाव में परमिट अमान्य रहेगा । सभी प्रकार के कर/फीस इत्यादि के भुगतान/वसूली के संबंध में पूर्ण उल्लेख परमिट पर अंकित रहेगा। (vii) अस्थायी ठेका परमिट निर्गमन हेतु दूसरे राज्य के लिए भुगतान किया गया मोटर वाहन कर तथा अतिरिक्त मोटर वाहन कर किसी दूसरे राज्य/अन्य परमिट पर हस्तांतरित या समायोजित नहीं होगा ।
5. माल वाहन परमिट (स्थायी)ः-दोनों राज्यों के बीच माल की ढुलाई को सुगम बनाने तथा एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामानों को नियमित तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से निम्नांकित बिन्दुओं पर सहमति हुईः-
(i) उपर्युक्त कंडिका-1 की उप-कंडिका (i) से (vi) का अनुपालन करते हुए बिहार एवं छत्तीसगढ़ में से प्रत्येक राज्य द्वारा पांच हजार (5,000) की अधिकतम संख्या तक मालवाहन परमिट का निर्गमन किया जाएगा, तथा दूसरे संबद्ध राज्य के राज्य परिवहन प्राधिकार द्वारा प्रतिहस्ताक्षर किया जा सकेगा । यह प्रतिहस्ताक्षर सभी राष्ट्रीय एवं राज्य के उच्च पथ से 50 कि0मी0 की दूरी तक अलगाव (क्मअपंजपवद) मार्ग के लिए मान्य होगा, जो औद्योगिक केन्द्र या निर्माण केन्द्र तक पहुंचने के लिए आवश्यक है । (ii) किसी तेल कंपनी उनके अधिकृत अभिकर्ता या ठेकेदार द्वारा स्वामित्व प्राप्त किए पेट्रोल टैंकर को परमिट का प्रतिहस्ताक्षर बिना कोई संख्या के रोक लगाए संबद्ध राज्य के संपूर्ण क्षेत्र में परिचालन हेतु पेट्रोल एवं पेट्रोलियम उत्पाद के परिवहन के लिए किया जाएगा । यह प्रतिहस्ताक्षर संबद्ध राज्य के राज्य परिवहन प्राधिकार द्वारा किया जाएगा। (iii) ऐसे परमिट प्राप्त मालवाहन या पेट्रोल टैंकर द्वारा प्रतिहस्ताक्षर के राज्य में माल का यदि उठाव किया जाता है तो उसी राज्य में उसका अनलोडिंग नहीं किया जाएगा । (iv) केवल विशिष्ठ प्रकृति के माल ढोने के लिए एक राज्य बिना किसी संख्या बंधेज के मालवाहन परमिट (स्थायी) का निर्गमन कंडिका-1 की उप-कंडिका (i) से (vi) का6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 7 जून 2010 अनुपालन करते हुए करेंगे तथा दूसरे संबद्ध राज्य का राज्य परिवहन प्राधिकार पारस्परिक राज्य की अनुशंसा पर प्रतिहस्ताक्षर करेगा ।
(v) मालवाहन परमिट के मामले में प्रतिहस्ताक्षर के लिए अनुशंसा आवेदक के व्यापार की विश्वसनीयता की पूरी जांच पड़ताल के बाद ही किया जाएगा ।
(vi) प्रतिहस्ताक्षर करने वाले राज्य के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत ऐसी गाड़ियों का व्यापार इंट्रास्टेट ट्रांसपोर्ट के रूप में नहीं किया जाएगा ।
6. माल वाहन परमिट (स्थायी)ः-मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा-87 के तहत् दो राज्यों के बीच अंतर्राज्यीय मार्ग पर परिचालन हेतु उपर्युक्त कंडिका-1 की उप-कंडिका (i) से (vi) अनुपालन करते हुए अधिकतम 30 दिवस की अवधि के लिए अस्थायी परमिट का निर्गमन प्रतिहस्ताक्षर के बिना संबंधित राज्यों के क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारों द्वारा निम्नांकित शर्तों पर किया जा सकेगाः-
(i) पारस्परिक राज्य के क्षेत्रांतर्गत पड़ने वाले किसी दो बिन्दुओं के बीच कोई माल उठाया/उतारा नहीं जाएगा अर्थात ऐसी गाड़ियों का व्यवहार संबद्ध राज्य के क्षेत्रांतर्गत इंट्रास्टेट ट्रांसपोर्ट के रूप में नहीं किया जाएगा ।
(ii) यह अस्थायी परमिट दो टर्मिनल को जोड़ने वाले सीधे एवं न्यूनतम मार्ग के लिए निर्गत किया जाएगा तथा संबंधित राज्य के परिवहन प्राधिकार द्वारा लागू किये गए शर्तों के अंतर्गत होगा ।
7. नियमः-पारस्परिक समझौता के तहत् परिचालित होने वाले वाहन दूसरे संबंधित राज्य में वहॉं के मोटर वाहन अधिनियम एवं नियम के प्रावधानों का पालन करेंगे।
8. सामान्यः-
(i) समझौता के अंतर्गत परिचालित की जाने वाले वाली परिवहन गाड़ियॉ संबद्ध राज्यों द्वारा निर्धारित लदान क्षमता, उसके व्हील बेस याा बैठान क्षमता आदि के संबंध में लगाए गए प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं करेगी और ऐसे वाहन संबद्ध राज्य द्वारा लगाए गए अन्य प्रतिबंध जो समय-समय पर लागू किये जायेंगे का पालन करेगी ।
(ii) इस समझौते के क्रियान्वयन में उत्पन्न किसी कठिनाई का समाधान दानों राज्य आपसी सहमति से कर सकेंगे।
(एन. के. अग्रवाल) (रवि परमार) प्रमुख सचिव राज्य परिवहन आयुक्त
सह-परिवहन आयुक्त बिहार-पटना।
छत्तीसगढ़-रायपुर ।7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 7 जून 2010
परिशिष्ट ''क''
| क्रम सं. | मार्ग का नाम | मार्ग की दूरी (कि.मी.में) | फेरो की संख्या | परमिट संख्या | |||||
| छत्तीसगढ़ | झारखण्ड बिहार | क ल ु दूरी | छत्तीसगढ़ | बिहार | छत्तीसगढ़ | बिहार | |||
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
| 1. | अंबिकापुर-बोधगया भाया रामानुजगंज, औरंगाबाद, डोभी | 110 | 69 | 192 | 371 | 06 | 06 | 06 | 06 |
| 2 | जशपुर-राजगीर भाया ग मला, कुरू, चतरा, ु गया हिसुआ | 26 | 112 | 222 | 360 | 06 | 06 | 06 | 06 |
| 3 | रायगढ़-सासाराम भाया धर्मजयगढ़, पत्थलगांव, अंबिकापुर, डाल्टेनगंज, औरंगाबाद, डिहरी | 308 | 124 | 89 | 521 | 04 | 06 | 04 | 06 |
| 4 | पटना-अंबिकापुर भाया जहानाबाद, गया, शेरघाटी, औरंगाबाद, डाल्टेनगंज, रामानुजगंज | 110 | 204 | 166 | 480 | 06 | 06 | 06 | 06 |
| 5 | पटना-अंबिकापुर भाया बिहटा, अरबल, दाउदनगर औरंगाबाद, डाल्टेनगंज, रामानुजगंज | 110 | 219 | 81 | 410 | 04 | 04 | 04 | 04 |
| 6 | जशपुर-सासाराम भाया औरंगाबाद, डाल्टेनगंज, लातेहार, कुरू, लोहरदगा, गुमला | 26 | 89 | 241 | 356 | 04 | 04 | 04 | 04 |
| 7 | भभुआ-अंबिकापुर भाया सासाराम, औरंगाबाद, डाल्टेनगंज, रामानुजगंज | 110 | 127 | 157 | 394 | 04 | 04 | 04 | 04 |
| 8 | आरा-अंबिकापुर भाया विक्रमगंज, सासाराम, औरंगाबाद, डाल्टेनगंज, रामानुजगंज | 110 | 244 | 76 | 430 | 04 | 04 | 04 | 04 |
| 9 | डिहरीऑनसोन- जशपुर भाया औरंगाबाद, डाल्टेनगंज, कुरू, लोहरदगा, गुमला | 26 | 77 | 262 | 365 | 04 | 04 | 04 | 04 |
| 10. | डिहरीऑनसोन- अंबिकापुर भाया औरंगाबाद, डाल्टेनगंज, गढ़वा | 110 | 77 | 126 | 313 | 04 | 04 | 04 | 04 |
| 11 | पटना-जशपुर भाया बिहारशरीफ, बरही, हजारीबाग, रांची, लोहरदगा, गुमला | 26 | 147 | 331 | 504 | 06 | 06 | 06 | 06 |
| 12 | भागलपुर से जशपुर भाया देवघर, गिरीडीह, हजारीबाग, रांची लोहरदगा | 26 | 463 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 13 | छपरा से कोरबा भाया पटना, औरंगाबाद, डाल्टेनगंज, अंबिकापुर, घाटधरी | 248 | 576 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 14 | पटना से कुनकुरी भाया कुरूडेगा, सिमडेगा, गुमला, चतरा, डोभी, गया, जहानाबाद | 60 | 413 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 15 | बक्सर से जशपुर भाया सासाराम, डेहरी, औरंगाबाद, डाल्टनगंज, लातेहार, चंदवा कुडु, ग मला, घाघरा ु | 26 | 475 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 16 | आरा से जशपुर भाया बिक्रमगंज, सासाराम, ड हरी, औरंगाबाद, े डाल्टनगंज, लातेहार, चंदवा कुडु गुमला, घाघरा | 26 | 465 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 17 | सासाराम से कोरबा भाया डेहरी, औरंगाबाद, डाल्टनगंज, गढ़वा, रामानुजगंज, अंबिकापुर | 375 | 588 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 18 | छपरा से जशपुर भाया पटना, तीलरांची, लोहरदगा, सिवान | 26 | 582 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 19 | दरभंगा से कुनकुरी भाया बख्तियारपुर, हजारीबाग, रांची ग मला ु | 60 | 635 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 20 | मोतिहारी से जशपुर भाया बख्तियारपुर, रांची, हजारीबाग | 26 | 704 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 21 | बेगूसराय से कुनकरी भायाा रांची, बख्तियारपुर, सिमडेगा | 60 | 572 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 22 | भागलपुर से कुनकुरी भाया देवघर, गिरीडीह, हजारीबाग, रांची, बेड़ा, गुमला, जशपुर | 60 | 690 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 23 | सिवान से बगीचा भाया मीरगंज, मोतिपुर, अंबिकापुर, | 108 | 727 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 24 | मुजफ्फरपुर से जशपुर भाया पटना, बख्तियारपुर, हजारीबाग, रामगढ़, रांची, सिसाई, गुमला | 26 | 612 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 25 | पटना से अंबिकापुर भाया सासाराम, डेहरी, औरंगाबाद, गढ़वा रोड, रामानुगंज | 110 | 369 | 04 | 04 | 04 | 04 | ||
| 26 | सिवान से जशपुर भाया पटना, हजारीबाग, रांची | 26 | 641 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 27 | जशपुर से जयरागी भाया सांख, माजाटोरी, पतराटोली, चैनपुर | 26 | 126 | 02 | 04 | 02 | 04 | ||
| 28 | बिहारशरीफ से अंबिकापुर भाया नवादा, रांची, कुरू, लातेहार, डाल्टेनगंज, रामानुगंज | 110 | 75 | 342 | 527 | 06 | 06 | 06 | 06 |
———— अधी/क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु5ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 353-571+100-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in