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[वि॰स॰वि॰-24/2010]
बंगाल, आगरा एवं असम, व्यवहार न्यायालय (बिहार संशोधन) विधेयक, 2010
बिहार राज्य में लागू करने के लिए बंगाल, आगरा एवं असम, व्यवहार न्यायालय अधिनियम, 1887 का संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के इकसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ।- (1) यह अधिनियम बंगाल, आगरा एवं असम व्यवहार न्यायालय (बिहार संशोधन) अधिनियम, 2010 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा।
(3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तिथि से 30 दिनों बाद प्रवृत्त होगा।
(4) इस संशोधन से लंबित मामले (वाद) अप्रभावित रहेगें।
2. अधिनियम की धारा-18 में संशोधन ।- अधिनियम की धारा-18 में शब्द ''जिला न्यायाधीश अथवा अधीनस्थ न्यायाधीश'' शब्द ''जिला न्यायाधीश अथवा सिविल न्यायाधीश (वरीय कोटि)'' द्वारा प्रतिस्थापित किये जायेंगे।
3. अधिनियम की धारा-19 में संशोधन।- धारा-19 में शब्द ''मुन्सिफ की अधिकारिता का विस्तार वैसे सभी वादों तक है जिसका मूल्य तीस हजार रुपये से अधिक न हो'' शब्द ''सिविल न्यायाधीश (कनीय कोटि) की अधिकारिता का विस्तार वैसे सभी वादों तक है जिसका मूल्य 1,50,000/- (एक लाख पचास 4. अधिनियम की धारा-21 में संशोधन।- धारा-21 की उपधारा (1) के खंड (क) में शब्द ''दो 3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 3 अगःत 2010 उद्देश्य एवं हेतु व्यवहार न्यायालयों में, विभिन्न स्तर के न्यायालयों के अधिकारिता की सीमा बंगाल आगरा एवं असम व्यवहार न्यायालय अधिनियम, 1887 (1887 का अधिनियम संख्या 2) के प्रावधानों के तहत निर्धारित होती है। सम्पत्ति के मूल्यों में वृद्धि एवं 'मुंसिफ' एवं अधीनस्थ न्यायाधीश के पदनाम में बदलाव के कारण, पदनाम, एवं धनीय अधिकारिता की सीमा में, वृद्धि ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है। जिसे अधिनियमित करना ही इस बंगाल, आगरा एवं असम व्यवहार न्यायालय (बिहार संशोधन) विधेयक, 2010 का मुख्य अभीष्ट है।
(राम नाथ ठाकुर)
भार साधक सदस्य पटनाः
सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा
दिनांक 21 जुलाई 2010
सचिव,
बिहार विधान-सभा ।
———— अधी+क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु0ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 539-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in