िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 9999 भाभाभाभािििि 1932193219321932 ((((शशशश0000))))
((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 639639639639) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना, , , , मंगलमंगलमंगलमंगलवारवारवारवार,,,, 31313131 अगःतअगःतअगःतअगःत 2020202010101010 पत्र संख्या- विधि 60-36/2007-861 --------- राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार
प्रेषक, अहिभूषण पाण्डेय, सचिव। राज्य निर्वाचन आयोग। सेवा में, सभी प्रमंडलीय आयुक्त। सभी जिला पदाधिकारी-सह- जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत)।
पटना, दिनांक 03 जून, 2009 विषय :-पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख तथा जिला परिषद् के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन से संबंधित विवादों के निपटारा के संबंध में। महाशय, निदेशानुसार आयोग के पत्रांक 1420 दिनांक 02.06.2009 एवं सी0- 2090 दिनांक 11 अगस्त 2006 का कृपया संदर्भ करें जिनके द्वारा पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख तथा जिला परिषद् के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन एवं इस निर्वाचन से संबंधित किसी विवाद के निपटारे के संबंध में बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 एवं बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2006 के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए आयोग द्वारा विस्तृत दिशा-निदेश दिए गए हैं। 2. आयोग के पत्रांक सी0-2090, दिनांक 11 अगस्त 2006 की कंडिका-6 में आयोग का निदेश था कि प्रमुख उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन संपन्न हो जाने के पश्चात इस निर्वाचन से संबंधित किसी विवाद के निपटारे के लिए अधिनियम की धारा 137 के अंतर्गत चुनाव याचिका दायर की जा सकती है। सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या- 9830/2006 (विजय कापरी बनाम राज्य एवं अन्य) में दिनांक 15 अप्रील 2009 को माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय दिया गया है कि प्रमुख/उप प्रमुख के निर्वाचन से संबंधित विवादों के निपटारे हेतु बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 137 के अंतर्गत चुनाव याचिका दायर करने का प्रावधान नहीं है, बल्कि इन मामलों का निपटारा अधिनियम की धारा 40 (4) के अंतर्गत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया एवं नियम के अनुसार ही किया जा सकता है। माननीय न्यायालय का निदेश है कि अधिनियम की धारा 40 (4) के अंतर्गत निहित शक्तियों से आयोग शीघ्र ही ऐसे मामलों के निपटारे हेतु नियम एवं प्रक्रिया निर्धारित करें। 3. बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 40 (4) निम्नवत है :-
2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 31 अगःत 2010''प्रमुख और उप प्रमख का चुनाव, उपर्युक्त पदों की रिक्तियों को भरने और ऐसे चुनाव से संबंधित विवादों का निपटारा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा यथाविहित नियमों अथवा प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा'' इस अधिनियम की धारा 67 (4) निम्नवत है :- ''किसी जिला परिषद् के अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष का निर्वाचन और उपर्युक्त पदों की रिक्तियों को भरने तथा ऐसे निर्वाचन से सम्बद्ध विवादों का निपटारा राज्य रिर्वाचन आयोग द्वारा यथा विहित नियमों या प्रक्रियाओं के अनुसार किया जायेगा।'' 4. माननीय उच्च न्यायालय के उक्त न्याय निर्णय के आलोक में बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 40 (4) के अंतर्गत किसी पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख के चुनाव इन पदों पर रिक्तियों को भरने एवं ऐसे चुनाव से संबंधित विवादों के निपटारे तथा अधिनियम की धारा 67 (4) के अंतर्गत किसी जिला परिषद् के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन, इन पदों पर रिक्तियों को भरने तथा ऐसे निर्वाचन से सम्बद्ध विवादों के निपटरारा हेतु आयोग द्वारा निम्ल नियम एवं प्रक्रिया निर्धारित की जाती है :- (1) प्रमुख/ उप प्रमुुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के सामान्य निर्वाचन हेतु कार्यक्रम आयोग द्वारा निर्धारित किया जाएगा। समय-समय पर विभिन्न कारणों यथा मृत्यु, त्यागपत्र, पदच्यूति आदि के कारण रिक्त हुए पदों पर भी निर्वाचन कार्यक्रम आयोग द्वारा निर्धारित किया जाएगा। प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के पद की आकस्मिक रिक्ति की सूचना जिला दंडाधिकारी द्वारा आयोग को रिक्ति होने के अधिकतम एक सप्ताह के अंदर निश्चित रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी। (2) राज्य निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षण, नियंत्रण एवं निदेशन के अधीन बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 40 (1) एवं बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2006 के नियम 87 (1) के प्रावधानों के अंतर्गत अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा अपने क्षेत्र के प्रमुख/ उप प्रमुख के निर्वाचन के निमित्त पंचायत समिति तथा उक्त अधिनियम की धारा 67 (1) एवं उक्त नियमावली के नियम 87 (1) के प्रावधानों के अंतर्गत जिला दण्डाधिकारी द्वारा जिला परिषद अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन के निमित्त जिला परिषद की बैठक की तिथि, समय एवं स्थान का निर्धारण कर संबंधित सदस्यों को संसूचित किया जायेगा। उक्त नियमावली के नियम 88 के अंतर्गत पंचायत समिति की ऐसी बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी द्वाारा तथा जिला परिषद की ऐसी बैठक की अध्यक्षता जिला दण्डाधिकारी द्वारा किया जाएगा। उक्त नियमावली के नियम 87 से नियम 102 तक निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए पंचायत समिति प्रमुख/ उप प्रमुख तथा जिला परिषद अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष का निर्वाचन संपन्न किया जायेगा। (3) (i) प्रमुख/ उप प्रमुख के निर्वाचन हेतु अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन हेतु जिला दण्डाधिकारी द्वारा आयोग के पर्यवेक्षण, नियंत्रण एवं निदेशन के अधीन तिथि, समय एवं स्थान की सूचना यथास्थिति पंचायत समिति/ जिला परिषद के सभी निर्वाचित सदस्यों को प्रपत्र-24 में उचित समय पर जो निर्वाचन की तिथि से कम-से-कम पाँच दिन पूर्व होगी, दी जायेगी। बैठक में भाग लेने की सूचना केवल निर्वाचित सदस्यों को ही दी जायेगी, पदेन सदस्यों को नहीं दी जायेगी। स्पष्ट किया जाता है कि प्रमुख/ उप प्रमुख के निर्वाचन में पंचायत समिति एवं अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन में जिला परिषद् के केवल निर्वाचित सदस्य ही भाग ले सकते हैं, गैर निर्वाचित सदस्यों को इनके चुनाव में भाग लेने का कोई अधिकार नहीं है। (ii) आम निर्वाचन की स्थिति में इस बैठक में सर्वप्रथम यथास्थिति अनुमंडल दंडाधिकारी/ जिला दंडाधिकारी द्वारा पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्यों/ जिला परिषद् के निर्वाचित सदस्यों को प्रपत्र 28 में शपथ ग्रहण कराया जाएगा। इसके तुरंत बाद नियमावली के नियम 88 से 102 के आलोक में प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष का निर्वाचन संपन्न कराया जाएगा। आकस्मिक रिक्ति की स्थिति में केवल नियमावली के नियम 88 से 102 के आलोक में निर्वाचन संपन्न कराया जाएगा। (iii) प्रमुख एवं उप प्रमुख के लिए अलग-अलग प्रपत्र- 25 में नामांकन पत्र लिए जाएंगे। दोनों पदों के लिए एक ही दिन निर्वाचन संपन्न कराये जाने की स्थिति में पहले प्रमुख के पद के लिए नामांकन लिया जाएगा तथा निर्वाचन कराया जाएगा। प्रमुख का निर्वाचन परिणाम घोषित हो जाने के पश्चात उप प्रमुख के लिए नामांकन पत्र प्राप्त किया जाएगा तथा ्रपमुख के निर्वाचन हेतु अपनाई गई प्रक्रिया के अनुसार ही उसका निर्वाचन कराया जाएगा। (iv) इसी प्रकार जिला परिषद् के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष पद के निर्वाचन के लिए भी अलग-अलग, नामांकन पत्र लिए जाएंगे। पहले अध्यक्ष के पद के लिए नामांकन लिया जाएगा तथा निर्वाचन कराया जाएगा। अध्यक्ष का निर्वाचन परिणाम घोषित हो जाने के पश्चात उपाध्यक्ष के लिए नामांकन पत्र प्राप्त किया जाएगा तथा अध्यक्ष के निर्वाचन हेतु अपनायी गई प्रक्रिया के अनुसार ही उसका निर्वाचन कराया जाएगा। (v) पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख तथा जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार के प्रस्तावक/ समर्थक के संबंध में निम्नवत स्थिति स्पष्ट की जाती है :- (क) पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख पद के अभ्यर्थी का प्रस्तावक या समर्थक संबंधित पंचायत समिति का कोई सदस्य तथा जिला परषिद् के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष पद क अभ्यर्थी का प्रस्तावक या समर्थक संबंधित जिला परिषद् का कोई सदस्य ही हो सकता है। (ख) पंचायत समिति के सदस्य यदि वे स्वयं प्रमुख पद के उम्मीदवार हैं तो वे किसी दूसरे सदस्य जो प्रमुख पद के उम्मीदवार हैं, के प्रस्तावक या समर्थक नहीं हो सकते हैं। उसी प्रकार जिला परिषद् के सदस्य यदि वे स्वयं अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं तो वे किसी दूसरे सदस्य जो अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं, के प्रस्तावक या समर्थक नहीं हो सकते हैं। (ग) कोई भी सदस्य किन्हीं देा विभिन्न सदस्यों जो एक ही पद अध्यक्ष या उपाध्यक्ष अथवा प्रमुख या उप प्रमुख के उम्मीदवार हैं, के प्रस्तावक या समर्थक नहीं हो सकते हैं अर्थात कोई भी सदस्य किसी पद विशेष के एक उम्मीदवार का ही प्रस्तावक या समर्थक हो सकता है। (घ) उसी प्रकार पंचायत समिति के उप प्रमुख या जिला परिषद् के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार किसी दूसरे सदस्य जो उप प्रमुख या उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं, के प्रस्तावक या समर्थक नहीं हो सकते हैं। (ड़) निर्वाचित अभ्यर्थियों को अध्यक्ष द्वारा प्रपत्र 22 में प्रमाण पत्र दिया जाएगा।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 31 अगःत 2010 (4) स्पष्ट किया जाता है कि पंचायतों के आम निर्वाचन के पश्चात् प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिए बुलाई गई बैठक में विचारार्थ सिर्फ दो ही मुद्दे होंगे, यथा (क) निर्वाचित सदस्यों को शपथ/ प्रतिज्ञा कराना तथा (ख) यथास्थिति प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष का निर्वाचन कराना। उक्त बैठक के लिए अन्य कोई भी मुद्दा विचारणीय नहीं रखा जाएगा। आकस्मिक रिक्ति की स्थिति में निर्वाचन हेतु बुलाई गई बैठक में केवल संबंधित पद का निर्वाचन कराया जाएगा। (5) निर्वाचन स्थल के इर्द-गिर्द अवांछनीय व्यक्तियों को रोकने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अनुसार निरोधात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख/उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन की स्वच्छता बनाए रखने हेतु यह आवश्यक है कि सभी निर्वाचित सदस्य स्वेच्छा से अपनी पसन्द के उम्मीदवार के पक्ष में मत डालें। प्रमुख और अध्यक्ष के चुनाव में दबंग प्रत्याशियों द्वारा धनबल एवं बाहुबल का प्रयोग करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। अगर उक्त पदों के निर्वाचन हेतु सूचना निर्गत किए जाने के पश्चात जिला दंडाधिकारी/ अनुमंडल दंडाधिकारी को संपुष्ट जानकारी प्राप्त होती है कि उक्त पदों के किसी उम्मदवार द्वारा अपने प़क्ष में मतदान कराने अथवा अपने प्रतिद्वन्दी के विरोध मत में डालने के लिए सदस्यों को दुष्प्रेरित किया जा रहा है अथवा धनबल या बाहुबल का सहारा लिया जा रहा है, तो वे अविलंब इसका संज्ञान लेंगे तथा जाँच पड़ताल के पश्चात बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 एवं भारतीय दंड संहिता की संगत धाराओं के अधीन ऐसे व्यक्तियों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे। बैठक हॉल के अन्दर किसी सदस्य द्वारा अव्यवस्था फैलाने तथा तनाव पैदा करने की स्थिति में उन्हें हॉल से बाहर निकाल दिया जाएगा तथा गिरफ्तार भी किया जाएगा। आयोग की मंशा है कि प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष का निर्वाचन स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वातावरण में संपन्न हो। इस उद्देश्य से पूरे निर्वाचन प्रक्रिया की विडियों रिकॉर्डिंग भी अवश्य कराई जाए। (6) संभव है कई निर्वाचित सदस्यों को यथास्थिति प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं हो। अतएव प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वचन के पहले उपस्थित सभी सदस्यो को निर्वाचन प्रक्रिया के बारे में आवश्यक जानकारी/ प्रशिक्षण अनुमंडल पदाधिकारी/ जिला दण्डाधिकारी द्वारा दी जानी चाहिए। उन्हें प्रपत्र 25 (नाम निर्देशन पत्र) तथा प्रपत्र 26 (मतपत्र) की एक खाली प्रति दी जाएगी तथा जानकारी दी जाएगी कि नाम निर्देशन पत्र में क्या-क्या अकित करना है। उन्हें यह भी जानकारी दी जाएगी कि मतपत्र में अंकित अभ्यर्थियों में से अपनी पसंद के अभ्यर्थी के नाम में किस प्रकार से क्रॉस चिन्ह लगाया जाएगा। उनकी सुविधा के लिए मतपत्र में ऐसे काल्पनिक नाम अंकित किए जाएंगे जो निर्वाचित सदस्यों में से किसी का नह हो और उन्हें समझा दिया जाएगा कि वे यदि अभ्यर्थी ''क'' के पक्ष में वोट देना चाहते हैं तो उनके नाम के सामने अकित स्थान में क्रॉस चिन्ह लगाएं। क्रॉस चिन्ह किस प्रकार लगाया जाएगा, इसका प्रदर्शन (Demonstration) ब्लैकबोर्ड या कागज के पन्ने के माध्ये से कराया जा सकता है। (7) प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन हेतु बुलाई गई बैठक में भाग लने वाले उपस्थित सभी निर्वाचित सदस्यों की उपस्थिति ली जाएगी तथा बैठक की कार्यवाही अंकित की जाएगी जिसपर बैठक के अध्यक्ष सहित सभी उपस्थित सदस्यों का हस्ताक्षर प्राप्त किया जाएगा। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि उपर्युक्त बैठकों के लिए जो नोटिस जारी की जाएगी उसमें बैठक की तिथि, समय और स्थान स्पष्ट रूप से उल्लिखित हो ताकि किसी भी सदस्य को बैठक में भाग लेने में किसी प्रकार की भ्रान्ति न होने पाए। प्रमुख/ उप प्रमुख के शपथ ग्रहण एवं निर्वाचन हेतु बैठक प्रखण्ड मुख्यालय में प्रखण्ड कार्यालय अथवा अन्य उपयुक्त भवन में तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण एवं निर्वाचन हेतु बैठक जिला मुख्यालय में उपयुक्त भवन/ परिसर में आयोजित की जाएगी। संबंधित स्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित कराई जाएगी। (8) प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन में सदस्यों के निरक्षर होने की स्थिति में उनके द्वारा मताधिकार का प्रयोग निम्न प्रक्रिया द्वारा किया जा सकेगा :- (i) निरक्षर निर्वाचित सदस्यों को उनके द्वारा मताधिकार के प्रयोग में सहायतार्थ उनकी इच्छानुसार एक अवयस्क व्यक्ति (पुरूष या स्त्री), जिनपर उन्हें पूर्ण विश्वास हो, साथ रखने की अनुमति दी जाएगी। (ii) ऐसा अवयस्क व्यक्ति संबंधित निरक्षर उम्मीदवार को यथास्थिति प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष पद के लिए बनाए गए मतपत्रों में अंकित उम्मीदवारों का नाम पढ़कर उन्हें बताएगा तथा उनकी इच्छानुसार अभ्यर्थी के नाम के सामने क्रॉस का चिन्ह लगाकर मताधिकार का प्रयोग करने में सहायता प्रदान करेगा। (9) जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी जो अनुमंडल पदाधिकारी के स्तर से अन्यून हो, पंचायत समिति के सदस्य, प्रमुख एवं उप-प्रमुख को तथा जिला दंडाधिकारी जिला परिषद् के सदस्य, अध्यक्षएवं उपाध्यक्ष को शपथ- ग्रहण/ प्रतिज्ञा करायेगा। (10) शपथ- ग्रहण/ प्रतिज्ञा प्रपत्र 28 में कराया जायेगा। (11) शपथ ग्रहण/ प्रतिज्ञा करने वाले पदधारकों की सूची जिला निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय में संधारित की जायेगी। (12) प्रमुख/उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के निर्वाचन में संभावित विवादों से बचने हेतु आयोग के निम्न दिशा-निदेश संसूचित किये जाते हैं जो भविष्य में इन चुनावों के लिए प्रभावी होगाः- (i) बैठक आरम्भ होने का जो समय सूचना पत्र (प्रपत्र 24) में अंकित किया गया है, उसके बाद एक घंटे के भीतर आने वाले निर्वाचित सदस्यों को बैठक में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी, किन्तु चुनाव हेतु नामांकन प्रक्रिया आरम्भ हो जाने के पश्चात, विलम्ब से ओने वाले किसी भी सदस्य को बैठक में भाग लेने की अनुमति नही दी जाएगी। (ii) अगर बैठक आरम्भ होने के पूर्व यथास्थिति अनुमंडल दंडाधिकारी/ जिला दंडाधिकारी को यह सूचना प्राप्त होती है कि किसी सदस्य अथवा सदस्यों को बैठक में आने से बलपूर्वक रोका जा रहा है, तो यथासंभव उक्त सूचना के सत्यापन हेतु त्वरित कार्रवाई की जाएगी। ऐसा भी संभव है कि कुछ सदस्य अपनी इच्छा से बैठक में नहीं आना चाहते हों। उतः ऐेसे मामलों में कार्रवाई करने के पूर्व4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 31 अगःत 2010 अत्यधिक सतर्कता एवं सावधानी बरतने की आवश्यकता है। सूचना संपुष्ट हो जाने पर आरोपित व्यक्तियों के विरूद्ध जिला दंडाधिकारी/ अनुमंडल दंडाधिकारी द्वारा तुरन्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। (iii) अगर किसी सदस्य अथवा सदस्यों द्वारा बैठक में यह लिखित शिकायत की जाती है कि उनपर किसी प्रत्याशी के पक्ष अथवा विपक्ष में मतदान करने हेतु दवाब बनाया गया है, तो निर्वाचन की प्रक्रिया की समाप्ति के पश्चात आरोपित व्यक्ति के विरूद्ध संगत वैधानिक प्रावधानों के अधीन कार्रवाई करने का निदेश अध्यक्ष द्वारा दिया जाएगा, भले ही वह प्रत्याशी चुनाव जीत जाए अथवा हार जाए। (iv) मतों की गिनती सभी सदस्यों के समक्ष की जाएगी। जो सदस्य मतपत्र दोबारा देखना चाहें, उन्हें अध्यक्ष द्वारा मतपत्र दिखलाया जा सकेगा पर किसी भी स्थिति में मतपत्र उनके हाथ में नहीं दिया जाएगा। अगर किसी मतपत्र में ''X'' का निशान प्रत्याशी के नाम के सामन विहित स्तम्भ में अंकित नहीं कर प्रत्याशी के नाम पर या उसके बगल में अंकित कर दिया गया है, तथा जिससे यह स्पष्ट होता है कि मतदाता ने उसके पक्ष में मतदान किया है, तो ऐसे मतों को अविधिमान्य (Invalid) नहीं मानकर विधिमान्य (Valid) माना जाएगा। किन्तु, अगर ''X'' का चिन्ह इस प्रकार लगाया गया हो कि यह निश्चत नहीं हो सके कि किस अभ्यर्थी को मत दिया गया है या ''X'' का चिन्ह एक से अधिक प्रत्याशी के नाम पर या उसके सामने लगाया गया है या ''X'' का चिन्ह कहीं नहीं लगाया गया है, तो ऐसे मतपत्रों को अविधिमान्य कर दिया जाएगा। इसमें किसी भी तर्क की गुंजाईश नहीं होगी। (v) अगर मतों की गणना के पश्चात कोई प्रत्याशी पुनर्गणाना का अनुरोध करता है तो उसे तुरंत मान लिया जाना चाहिए तथा सभी सदस्यों के समक्ष पुनर्गणना करा देनी चाहिए। दोबारा पुनर्गणना का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा। (13) लॉटरी निकालने की प्रक्रिया निम्नवत पूरी की जायेगी :- (i) सर्वप्रथम बैठक की अध्यक्षता करने वाले अधिकारी (यथास्थिति अनुमंडल दंडाधिकारी अथवा जिला दंडाधिकारी) द्वारा सभी उपस्थित सदस्यों/ प्रत्याशियों को संलग्न प्रपत्र में सूचना देकर यह बतलाया जाएगा कि फलांफलां प्रत्याशियों को बराबर-बराबर मत (मतों की संख्या अंकित की जाएगी) प्राप्त होने के कारण लॉटरी द्वारा परिणाम निकालने की कार्रवाई तुरंत शुरू की जा रही है। सूचना पत्र पर सभी उपस्थित सदस्यों/ प्रत्याशियों को हस्ताक्षर ले लिया जाएगा। (ii) लॉटरी के लिए सफेद कागज की पर्ची का प्रयोग किया जाएगा। पर्ची के कागज का साईज ए-4 साईज के कागज का चौथाई हिस्सा का (1/4वां) होगा। प्रत्येक पर्ची समान साईज की होगी। साईज में तनिक भी अंतर नहीं होगा। पर्ची बिल्कुल सादी (Blank) होगी तथा सादी पर्ची उपस्थित सभी सदस्यों/ प्रत्याशियों को अध्यक्ष द्वारा दिखला दी जाएगी ताकि यह संदेह न हो कि पर्ची पर पहले से कुछ लिख हुआ है। प्रत्येक पर्ची पर अध्यक्ष द्वारा स्वयं प्रत्याशी का नाम काले रंग से स्केच पेन से लिखा जाएगा तथा प्रत्येक पर्ची पर निचले हिस्से में तिथि सहित अपना अस्ताक्षर किया जाएगा। जितने प्रत्याशियों के बीच लॉटरी निकाली जानी है, पर्ची की संख्या उतनी ही रखी जाएगी। अर्थात अगर देा प्रत्याशियों को समान संख्या में मत मिलें हों, तो उन दोनों के बीच लॉटरी निकालने हेतु मात्र दो पर्चियों और अगर तीन प्रत्याशियों को समान मत मिले हों तो लॉटरी निकालने हेतु मात्र तीन पर्चियों का उपयोग किया जाएगा। दो प्रत्याशियों के मामले में एक पर्ची पर पहले प्रत्याशी का नाम एवं दूसरी पर्ची पर दूसरे प्रत्याशी का नाम अध्यक्ष द्वारा लिखा जाएगा। इसी प्रकार तीन प्रत्याशियों के मामले में तीन अलग-अलग पर्ची पर पहले, दूसरे एवं तीसरे प्रत्याशी का नाम लिखा जाएगा। पर्चियों में नाम लिखने के पश्चात अध्यक्ष द्वारा सभी पर्चियां उपस्थित सदस्यों/ प्रत्याशियों को प्रदर्शित की जाएंगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रत्येक पर्ची में अलग-अलग प्रत्याशी के नाम अंकित हैं, किसी एक प्रत्याशी का नाम देा या अधिक पर्चियों में अंकित नहीं किया गया है। पर्चियों का प्रदर्शन कर देने के पश्चात अध्यक्ष प्रत्येक पर्ची को चार फोल्ड में मोड़कर वहाँ उपस्थित किसी सदस्य को, जो प्रत्याशी नहीं होगा, उन पर्चियों को वहाँ विशेष रूप से रखे गए एक छोटे अपारदर्शी डिब्बे में रखने हेतु कहेगा। डिब्बे में पर्चियों को रखे जाने के पहले डिब्बा सभी सदस्यों/ प्रत्याशियों को दिखला दिया जाएगा कि वह पूर्ण्तः खाली है एवं उसमे ंपहले से कोई पर्ची आदि नहीं रखी हुई है। डिब्बे में पर्चियों को रख देने के पश्चात उस सदस्य द्वारा डिब्बे का ढक्कन बंद कर दिया जाएगा। (iii) लॉटरी के लिए पर्ची निकालने हेतु ऐसे व्यक्ति का चयन किया जाएगा जो पर्ची बनाए जाने, उस पर नाम लिखे जाने, फोल्ड करने तथा डिब्बे में बंद किए जाने के समय वहाँ मौजूद नहीं रहा हो। स्पष्टतः वह व्यक्ति अध्यक्ष अथवा बैठक कक्ष में मौजूद कोई सदस्य या प्रत्याशी नहीं होगा। लॉटरी निकालने हेतु अध्यक्ष अपने कार्यालय से किसी पदाधिकारी अथवा कर्मचारी को पूर्व से नामित कर देगा तथा उसे पर्ची बनाने तथा फोल्ड करने के पूर्व बाहर रहकर प्रतीक्षा करने को कहेगा। (iv) डिब्बे में पर्चियों को बंद हो जाने के पश्चात उस नामित व्यक्ति को अंदर बुलाया जाएगा तथा उसे अध्यक्ष द्वारा कहा जाएगा कि वह डिब्बे को अच्छी तरह हिलाकर उसे खोले एवं उसमें से कोई एक पर्ची बाहर निकाले। (v) नामित व्यक्ति अध्यक्ष एवं उपस्थित सदस्यों/ प्रत्याशियों के समक्ष डिब्बे में से कोई एक पर्ची बाहर निकालकर उसे खोलेगा, उसमें अंकित नाम को जोर से पढ़ेगा ताकि सभी सुन लें तथा पर्ची को अध्यक्ष को सौंप देगा। अध्यक्ष उस पर्ची के नीचे निर्वाचित लिख कर तिथि एवं समय सहित पुनः अपना हस्ताक्षर करेगा तथा उस प्रत्याशी को निर्वाचित घोषित करते हुए निर्वाचन प्रमाण पत्र निर्गत करेगा। (vi) निर्वाचन परिणाम घोषित कर देने के पश्चात सभी पर्चियों को अध्यक्ष द्वारा एक लिफाफे में सीलबन्द कर निर्वाचन अभिलेख के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। (vii) पर्ची बनाने से लेकर निर्वाचन परिणाम घोषित करने तक की पूरी कार्यवाही की विडियोग्राफी की जाएगी तथा इसे अभिलिखित भी किया जाएगा। कार्यवाही के अंत में उस पर अध्यक्ष के साथ-साथ लॉटरी निकालने वाले व्यक्ति तथा उपस्थित सदस्यों/ प्रत्याशियों द्वारा हस्ताक्षर किया जाएगा।5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 31 अगःत 2010 (viii) किसी भी स्थिति में लॉटरी निकालने का काम स्थगित नहीं किया जाएगा। लॉटरी के परिणाम से व्यथित व्यक्ति/ व्यक्तियों को दोबारा लॉटरी निकालने की माँग करने का अधिकार नहीं होगा, और अगर ऐसा कोई अनुरोध फिर भी किया जाता है अध्यक्ष द्वारा उसे तुरन्त अस्वीकृत कर दिया जाएगा। (14) यह स्पष्ट किया जाता है कि मतदाता के निरक्षर रहने केी स्थिति में उनके मताधिकार के प्रयोग में सहायतार्थ उसकी इच्छानुसार एक अवयस्क व्यक्ति (पुरूष या स्त्री) साथ रखने की अनुमति दी जाएगी जो उसे (मतदाता को) मतपत्र में अंकित उममीदवारों का नाम पढ़कर सुनाएगा तथा उसकी इच्छानुसार प्रत्याशी के नाम के सामने ''X'' का चिन्ह लगाएगा। यह सुनिश्चित करना अध्यक्ष की जबावदेही है कि संबंधित मतदाता के साथ जाने वाला व्यक्ति किसी भी स्थिति में वयस्क नहीं हो, भले ही वह उसका पुत्र/ पुत्री अथवा अन्य विश्वस्त व्यक्ति हो। अध्यक्ष द्वारा निरक्षर मतदाता के सहयोगी के रूप में किसी वयस्क व्यक्ति को मतदाता के साथ मतदान प्रकोष्ठ में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, तथाउसे किसी अवयस्क व्यक्ति को लाने कहा जाएगा अन्यथा उसे मताधिकार का प्रयोग बिना किसी सहयोगी के करना होगा। उपुर्यक्त शर्तें किसी अंधे अथवा शारीरिक रूप से अशक्त मतदाता के संबंध में भी लागू होंगी। (15) प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के चुनाव हेतु प्राप्त नाम निदेर्शन पत्रों की संवीक्षा, विधिमान्य अभ्यर्थियों की सूची, मतपत्र निर्गत करने तथा मतगणना करने, मतपत्रों को अविधिमान्य घोषित करने तथा परिणाम घोषित करने बैठक की कार्यवाही का अभिलेख तैयार करने आदि की पूर्ण जिम्मेवारी अध्यक्ष को सौंपी गई है। ये सारे कार्य अध्यक्ष अकेले नहीं कर सकते हैं, उन्हें अपने सहायतार्थ एक या दो अधिकारियों को रखने की जरूयरत हो सकती है। ये अधिकारी ऐसे होने चाहिए जो विवादित नहीं हो तथा स्वच्छ छवि रखते हों। प्रमुख के चुनाव में अध्यक्ष (अनुमंडल दंडाधिकारी) के सहायतार्थ उस प्रखण्ड के प्रखण्ड विकास पदाधिकारी/ अंचल अधिकारी या अन्य किसी पदाधिकारी/ कर्मचारी को किसी भी स्थिति में नहीं लगाया जाएगा, अध्यक्ष अपने अनुमंडल अथवा दूसरे प्रखण्डों में पदस्थापित अधिकारियों को अपनी सहायता करने हेतु प्रतिनियुक्त करेंगे। प्रमुख/ उप प्रमुख का निर्वाचन अनुमंडल दंडाधिकारी की अध्यक्षता में किया जाता है और एक दिन में एक एक प्रखंड अथवा अधिकतम देा प्रखडों मेें ही चुनाव कराना व्यवहार के रूप से संभव है। ऐसी स्थिति में किसी प्रखण्ड विशेष में चुनाव के दिन अपने क्षेत्राधिकार अन्तर्गत दूसरे प्रखण्ड के अधिकारियों/ कर्मियों की सेवा प्राप्त करने में अनुमंडल दंडाधिकारी को कोई कठिनाई नहीं होगी। अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के चुनाव में जिला दंडाधिकारी अपने सहायतार्थ ऐसे अधिकारियों/ कर्मियों को रख सकेंगे जो जिला परिषद् से संबंधित नहीं हो, अर्थात जिला परिषद् के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अथवा जिला अभियंता अथवा अन्य पदाधिकारी/ कर्मी अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के चुनाव कार्य हेतु प्रतिनियुक्त नहीं किए जाएंगे। जिस कक्ष में निर्वाचन संबंधी बैठक चल रही हो, वहां कोई आरक्षी पदाधिकारी मौजूद नहीं रहेंगे। विधि व्यवस्था के संधारण हेतु प्रतिनियुक्त आरक्षी पदाधिकारी/ आरक्षी बल बैठक कक्ष के बाहर रहेंगे तथा सामान्य स्थिति उत्पन्न हो जाने पर अध्यक्ष द्वारा आदेश दिए जाने पर ही बैठक कक्ष में प्रवेश कर सकेंगे। (16) पंचायत समिति के प्रमुख एवं जिला परिषद के अध्यक्ष पदों के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा अनुमोदित एवं संसूचित आरक्षण के अनुसार ही संपन्न कराया जाएगा। स्पष्ट किया जाता है कि पंचायत समिति के उप प्रमुख एवं जिला परिषद के उपाध्यक्ष के पदों के लिए कोई आरक्षण नहीं किया गया है। (17) स्पष्ट किया जाता है कि पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख एवं जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन हेतु निर्धारित तिथि, स्थान एवं समय पर उपस्थित सदस्यों से ही प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष का निर्वाचन संपन्न होगा। इसके लिए किसी गणपूर्ति (कोरम) की आवश्यकता नहीं है। (18) पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख एवं जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन हेतु आयोग द्वारा निर्धारित तिथि में अपरिहार्य कारणवश कोई परिवर्तन आयोग की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा। (19) पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख एवं जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन में उक्त दिशा-निर्देशों के अनुसरण करने से निर्वाचन संबंधी विवाद उत्पन्न होने की संभावना कमतर होगी। फिर भी निर्वाचन परिणाम घोषित हो जाने पर उसकी वैधता के बिन्दु पर विवाद होने पर बिहार पंचायत राज अधिनियम, (यथा संशोधित) 2006 की धारा 40 (4) एवं 67 (4) के प्रावधानों के तहत आयोग द्वारा क्रमशः पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख के निर्वाचन संबंधी विवाद के निपटारे हेतु संबंधित जिला के जिला दण्डाधिकारी तथा जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी विवाद के निपटारे हेतु संबंधित प्रमंडलीय आयुक्त को प्राधिकृत किया गया है। पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख के निर्वाचन से विक्षुब्ध पक्ष संबंधित जिला दण्डाधिकारी तथा जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन से विक्षुब्ध पक्ष संबंधित प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष निर्वाचन समाप्ति के एक सप्ताह के अन्दर परिवाद दर्ज करा सकते हैं। (i) परिवाद के पक्षकार :- प्रार्थी अपने परिवाद पत्र में प्रत्यर्थी के रूप में अन्य सभी अभ्यर्थियों को जोड़ेगा जिन्होंने निर्वाचन मं भाग लिया था या जिनके कारण से वह निर्वाचन प्रभावित समझता हो। (ii) परिवाद पत्र में महत्वपूर्ण तथ्यों के कथन को समाविष्ट किया जाएगा जिन पर प्रार्थी निर्भर करता हो। (iii) परिवाद पत्र एवं उसकी कोई अनुसूची या अनुलग्नक को भी आवेदक द्वारा हस्ताक्षरित किया जायेगा और सत्यापित किया जायेगा। (iv) परिवाद पत्र की सुनवाई :- जिला पदाधिकारी/ प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर देते हुए यथाशीघ्र ऐसे मामलों की सुनवाई की जायेगी एवं समुचित जाँचोपरांत परिवाद दायर किये जाने की तिथि से अधिकतम दो माह के अन्दर युक्तियुक्त आदेश पारित किया जायेगा जिसकी एक प्रति राज्य निर्वाचन आयोग को भी भेजी जायेगी। (v) पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख तथा जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन रद्द करने के आधार :-
6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 31 अगःत 2010(क) अध्यक्ष द्वारा किसी नामांकन पत्र को अनुचित रूप से स्वीकृत या अस्वीकृत कर दिया गया हो। (ख) बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006/ बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2006 एवं राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा इस पत्र में निर्धारित प्रक्रिया से भिन्न प्रक्रिया अपना कर प्रमुख/ उप प्रमुख तथा अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष का निर्वाचन कराया गया हो। (ग) मत बराबर होने की स्थित में आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से लॉटरी नहीं निकालकर मनमानी किया गया हो। (घ) अध्यक्ष अथवा बैठक में उपस्थित किसी अन्य सरकारी पदाधिकारी द्वारा मनमाने एंग से निर्वाचन का संचालन किसी प्रत्याशी विशेष को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया हो। (ड.) निरक्षर, अंधा या शारीरिक रूप से अशक्त किसी सदस्य को उनके मताधिकार के प्रयोग में सहायतार्थ किसी अवयस्क आदमी को नहीं देकर व्यस्क आदमी को दिया हो। (च) पंचायत समिति के प्रमुख एवं जिला परिषद के अध्यक्ष पदों के लिए आयोग द्वारा अनुमोदित एव संसूचित आरक्षण से भिन्न कोटि के उम्मीदवार का निर्वाचन किया गया हो। स्पष्ट किया जाता है कि सक्षम प्राधिकार द्वारा पंचायत समिति/ जिला परिषद सदस्य के लिए निर्गत जाति प्रमाण पत्र गलत पाये जाने पर संबंधित प्राधिकार द्वारा उसे रद्द किया जा सकता है, किन्तु इस आधार पर उसी सदस्यता रद्द करने का अधिकार सक्षम व्यवहार न्यायालय का ही है। अतः आरक्षित कोटि से भिन्नता निर्विवाद रूप से स्पष्ट होने पर ही इस आधार पर निर्वाचन रद्द किया जा सकेगा। (छ) पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख तथा जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष का निर्वाचन आयोग की पूर्व अनुमति प्राप्त किये बिना कराया गया हो। (vi) परिवाद पत्र की सुनवाई एवं जाँच में यह तथ्य स्पष्ट होता है कि वैध मत को अवैध या अवैध मत को वैध करार देने या मतगणना की त्रुटि से चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ है तो यथास्थिति जिला दण्डाधिकारी/ प्रमंडलीय आयुक्त पूर्व परिणाम को रद्द कर प्रार्थी को निर्वाचित घोषित कर सकते हैं। (vii) आवश्यकता महसूस होने पर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जिला दण्डाधिकारी/ प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा पारित आदेश से संबंधित अभिलेखों को मंगा कर अवलोकन किया जा सकता है एवं ऐसा पाया जाता है कि उक्त पारित आदेश के पुनर्रीक्षण का पर्याप्त कारण है तो संबंधित पक्षकारों को सूचना देकर एवं सुनवाई कर आयोग द्वारा युक्तियुक्त आदेश पारित किया जा सकता है। 5. पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख तथा जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन हेतु आयोग के उक्त दिशा-निदेश बिहार पंचायत राज अधिनियम (यथा संशोधित), 2006 एवं बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली (यथा संशोधित), 2006 के प्रावधानों के अनुरूप बनाये गये हैं। इनके क्रियान्वयन में कोई कठिनाई या भ्रम उत्पन्न होने पर आयोग से स्पष्टीकरण/ निदेश प्राप्त कर अग्रतर कार्रवाई की जा सकेगी। 6. अनुरोध है कि इस पत्र की पर्याप्त प्रतियाँ अपने स्तर पर तैयार कर सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों तथा निर्वाचन कार्य से जुड़े अन्य पदाधिकारियों को शीघ्र उपलब्ध करा देने की कृपा की जाए।
विश्वासभाजन (ह0)/-अस्पष्ट, सचिव।
सूचनासूचनासूचनासूचना ............................................. पंचायत समिति के प्रमुख/ उप प्रमुख/...................................... जिला परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष* हेतु किए गए निर्वाचन में श्री ...................................... श्री ................................. एवं श्री ...................................................* को बराबर-बराबर ........................... .............. मत प्रापत हुए हैं। बराबर मत प्राप्त होने के कारण बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2006 के नियम 98 के प्रावधानों के अधीन परिणाम का विनिश्चय लॉटरी द्वारा करने हेतु कार्रवाई तुरन्त आरंभ की जा रही है। कृपया लॉटरी निकालने की प्रक्रिया के समय उपस्थित रहने का कष्ट करें।
दिनांक ....................................।
अध्यक्ष का हस्ताक्षर उपस्थित सदस्यों/ प्रत्याशियों के हस्ताक्षर
———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु0ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 639-571+1000-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in