िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
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(iii) बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 की घारा-5 (बी) के अन्तर्गत आनेवाली आरा मिलों की वरीयता उनके उद्योग विभाग में निबंधन की तिथि के आधार पर निर्धारित की जायेगी। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा याचिका संख्या 202/95 में दायर आई0 ए0 सं0 813-815 एवं अन्य में दिनांक-29 अक्तूबर 2004 को पारित आदेश के आलोक में इस नियम के अन्तर्गत केवल वे आरा मिल आयेगें जिनका बिहार काष्ट चिरान (विनियमन) नियमावली, 1993 के गजट प्रकाशन की तिथि अर्थात दिनांक 4 सितम्बर 19933 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 10 िसत+बर 2010 से तीस दिनों के अन्दर अनुज्ञप्ति हेतु आवेदन-पत्र तथा इसके साथ आवेदन शुल्क एवं प्रतिभूति राशि प्रमंडलीय कार्यालय में प्राप्त हुआ हो।
(iv) उपर्युक्त के अतिरिक्त अन्य अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिलों की वरीयता के निर्धारण में सर्वप्रथम अनुज्ञप्ति हेतु आवेदन की तिथि को मान्यता दी जायेगी। आवेदन की तिथि का अर्थ है—बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) नियमावली 1993 के नियम 3 (2) के अनुसार आरा मिल की स्थापना एवं संचालन हेतु विहित प्रपत्र में आवेदन तथा रुपये 1000 का अप्रत्यर्पणीय अनुज्ञप्ति शुल्क एवं 2000 रुपये प्रतिभूति राशि के रूप में प्रमंडलीय कार्यालय में प्राप्ति की तिथि/आवेदन-पत्र के साथ आवेदन शुल्क अथवा प्रतिभूति राशि अगर नहीं जमा किया जाता है तब इनमें से जो सबसे बाद में प्रमंडलीय कार्यालय में प्राप्त हुआ हो उसके प्राप्ति की तिथि को आवेदन की तिथि माना जायेगा। वैसे मामले जिनमें आवेदन नियमावली के प्रकाशन के पूर्व ही दिया गया है परन्तु नियमावली प्रकाशन उपरांत शुल्क एवं प्रतिभूति राशि जमा की गयी है तथा उन्हें अनुज्ञप्ति प्रदान की गयी है उन्हें भी समान मानते हुये हुये वरीयता निर्धारण हेतु मान्यता प्रदान की जायेगी तथा आवेदन शुल्क अथवा प्रतिभूति राशि में जो भी सबसे बाद में प्रमंडलीय कार्यालय में प्राप्त हुआ हो उसके प्राप्ति की तिथि को आवेदन की तिथि मानते हुये वरीयता में स्थान दिया जायेगा। आवेदन आरा मिल स्वामी या सक्षम प्राधिकार (Power of Attorney- धारक) द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिये।
जिन आरा मिलों को अनुज्ञप्ति प्राप्त नहीं है परन्तु उनके द्वारा बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के तहत आवेदन दिया गया एवं बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1993 के तहत निर्धारित शुल्क तथा प्रतिभूमि राशि जमा की गयी हो उनके वरीयता का भी निर्धारण आवेदन पत्र, आवेदक शुल्क तथा प्रतिभूति राशि में जो सबसे बाद में प्रमंडलीय कार्यालय में प्राप्त हुआ हो उसके प्राप्ति की तिथि के आधार पर की जायेगी।
(v) आवेदन की तिथि एक होने पर वरीयता के निर्धारण हेतु आरा मिल की स्थापना से सम्बंधित उद्योग विभाग में निबंधन की तिथि मानी जायेगी। आवेदन की तिथि तथा उद्योग विभाग में निबंधन की तिथि एक होने पर वाणिज्य-कर विभाग में निबंधन की तिथि वरीयता का आधार होगी।
(vi) जो आवेदन-पत्र, आवेदन शुल्क एवं प्रतिभूति राशि के साथ 29 अक्तूबर 2002 के बाद प्राप्त हुये थे उन्हें वरीयता के स्थान नहीं दिया जायेगा।
(vii) स्वामित्व परिवर्तन—
(क) विरासत सम्बंधी मामलें-यदि अनुज्ञप्ति के स्वामित्व में परिवर्तन विरासत (Inheritance) के क्रम में किया गया है तो वैसे मामले में आरा मिल की वरीयता वही रखी जायेगी जो पूर्व से है।
(ख) व्यक्तिगत मामले- ऐसे मामले जिसमें आरा मिल का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का है वहाँ उस व्यक्ति के मिल के स्वामित्व से पूर्णतया अलग हो जाने या मिल पर अपना नियंत्रण खो देने की स्थिति में उक्त मिल को वरीयता सूची में स्थान नहीं दिया जायेगा। अगर आरा मिल की अनुज्ञप्ति एक से अधिक व्यक्ति के नाम से है और अनुज्ञप्ति प्राप्ति के उपरान्त वे अलग हो गये हैं तब वरीयता सूची में उन व्यक्तियों में से उस व्यक्ति को रखा जायेगा जिसके नियंत्रण में वह आरा मिल है जिसके लिये अनुज्ञप्ति दी गयी थी। शेष व्यक्तियों को वरीयता में स्थान नहीं दिया जायेगा।
(viii) स्थल परिवर्तन
(क) यदि बिना अनुज्ञापन पदाधिकारी की अनुमति के आरा मिल का स्थल परिवर्तन आरा मिल स्वामी द्वारा कर लिया गया हो तो उन्हें औपबंधिक वरीयता में स्थान नहीं दिया जायेगा।4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 10 िसत+बर 2010 (ख) अगर अनुमति प्राप्त कर भी स्थान परिवर्तन एक अनुज्ञापन पदाधिकारी के अधिकार क्षेत्र बाहर से हुआ है, तो ऐसे आरा मिल को वरीयता में स्थान नहीं दिया जायेगा।
(2) आरा मिलों के वरीयता निर्धारण हेतु प्रक्रिया—
(i) प्रत्येक वन प्रमंडल पदाधिकारी वरीयता निर्धारण के मापदण्ड के आलोक में आरा मिलों की औपबंधिक वरीयता सूची (सभी आवश्यक सूचनाओं सहित) तैयार कर (जिलावार) कार्यालय के नोटीस बोर्ड पर चिपकाते हुये 15 दिनों के अन्तर्गत आपत्ति आमंत्रित करेगें। इस सम्बंध में प्रचार-प्रसार भी किया जायेगा। (ii) उपर्युक्त औपबंधिक वरीयता सूची से प्रभावित व्यक्ति 15 दिनों के अन्तर्गत अपना आपत्ति लिखित रूप में सम्बंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी को देंगें। (iii) वन प्रमंडल पदाधिकारी औपबंधिक वरीयता सूची, आपत्ति, आपत्ति के सम्बंध में तथ्यकथन सम्बंधित संचिका आदि चयन समिति के समक्ष उपस्थापित करेंगें। चयन समिति निम्नप्रकार गठित होगी।
(क) प्रमंडलीय आयुक्त- अध्यक्ष (ख) संबंधित वन संरक्षक- सदस्य (ग) संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी- सदस्य सचिव
(iv) सदस्य सचिव के अनुरोध पर अध्यक्ष द्वारा किसी वन प्रमंडल में आरा मिलों के चयन हेतु तिथि निर्धारित की जायेगी जिसकी सूचना सदस्य सचिव एवं अन्य सदस्य को दी जायेगी। अध्यक्ष द्वारा आवश्यक अभिलेख उपस्थापित करने हेतु सदस्य सचिव को निदेशित किया जायेगा। सर्वप्रथम समिति के द्वारा प्राप्त आपत्तियों पर व्यथित व्यक्ति को सुनवाई का एक मौका प्रदान करने के उपरांत निर्णय लेकर आदेश निर्गत किया जायेगा।
(v) समिति द्वारा निर्णयोपरान्त अध्यक्ष के हस्ताक्षर से जिले के लिये चयनित आरा मिलों की सूची प्रकाशित की जायेगी। प्रकाशित सूची की एक प्रति प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, सम्बंधित क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक/ मुख्य वन संरक्षक एवं सम्बंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी को प्रेषित की जायेगी। वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा आदेश की एक प्रति प्रमंडलीय कार्यालय के नोटीस बोर्ड पर चिपकाया जायेगा। इसकी प्रति वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा सम्बंधित वनों के क्षेत्र पदाधिकारी को भी प्रेषित की जायेगी। किसी भी आरा मिल स्वामी द्वारा मांग करने पर वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा सच्ची प्रति उपलब्ध करायी जायेगी।
(vi) समिति का निर्णय अन्तिम होगा। चयन से व्यथित व्यक्ति चयन समिति के निर्णय के विरुद्ध आदेश निर्गत की तिथि से 30 दिनों के अन्तर्गत जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील दायर कर सकेंगें।
(3) अधिशेष आरा मिलों को बन्द करने की प्रक्रिया
जिले में अनुमान्य संख्या के अनुरूप आरा मिलों के चयन के पश्चात अधिशेष आरा मिलों को बन्द करा दिया जायेगा। इस हेतु अधिशेष आरा मिलों को इस आशय का नोटीस भेजते हुये उन्हें सूचित किया जायेगा कि उनका आरा मिल अचयनित रह गया है। अतः 30 दिनों के अन्तर्गत मिल के अन्तर्गत काष्ठ भंडार का निष्पादन कर आरा मिल बन्द कर दें। यदि मिल स्वामी उसके पश्चात आरा मिल बन्द नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी। चयनित आरा मिलों में से जिन आरा मिलों को बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के तहत अनुज्ञप्ति प्राप्त है उनके अनुज्ञप्ति का नवीकरण किया जायेगा परन्तु जिन्हें अनुज्ञप्ति प्राप्त नहीं है उन्हें अनुज्ञप्ति निर्गत करने से पूर्व केन्द्रीय प्राधिकृत समिति की स्वीकृति प्राप्त किया जाना अनिवार्य होगा।
(4) क्रेन्द्रीय प्राधिकृत समिति के दिनांक 11 जून 2008 को किये गये अनुशंसा के आलोक में राज्य के लिये आरा मिलों की पूर्व निर्धारित संख्या 1450 को बढ़ाकर 1919 किया5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 10 िसत+बर 2010 जाता है। जिलावार अनुमान्य आरा मिलों की संख्या की विवरणी परिशिष्ट ''क'' में दी जा रही है।
(5) केन्द्रीय प्राधिकृत समिति के दिनांक 11 जून 2008 के अनुशंसा के आलोक में मात्र बढ़ईगिरी कार्य में व्यवहार होने वाले 18 इन्च व्यास तक के भर्टीकल एवं सर्कुलर आरा मिल जिसे केवल फर्निचर के निर्माण/जूतों के सोल निर्माण में फिनिशिंग कार्य हेतु काम में लाया जाता है ऐसे आरा मिलों को उपरोक्त संख्या की परिधि से बाहर रखा जाता है। बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 की धारा-25 के तहत बढ़ईगिरी के इन सामान्य संत्रियाओं को, जिनमें आरा मिल या आरा गड्ढ़े की संत्रियाएँ अन्तगर््रस्त नहीं है, उनपर उक्त अधिनियम एवं इसके अधीन बनाये गये नियम लागू नहीं होगें। परन्तु इस प्रावधान के गलत उपयोग को रोकने हेतु इन आरा मिलों को उपयोग करने से पूर्व सम्बंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी के कार्यालय में पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण के इन आरा मिलों को इस्तमाल करने वाले व्यक्ति को दोषी मानते हुये बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के प्रावधानों के तहत उनके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी।
5 (1) विनियर मिलों की वरीयता निर्धारण के सम्बंध में मार्गदर्शन सिद्धान्त—
बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1990 में दिनांक 22 अप्रील 2002 को संशोधन कर विनियर एवं प्लाईवुड मिलों को आरा मशीन की परिधि में लाया गया। सरकार द्वारा विज्ञप्ति के माध्यम से 31 जुलाई 2002 तक ऐसे विनियर एवं प्लाईवुड मिलों से अनुज्ञप्ति हेतु आवेदन आमंत्रित किया जो 12 दिसम्बर 1996 के पूर्व से स्थापित थे। यहाँ पर उल्लेखनीय है कि दिनांक 22 अप्रील 2002 को हुये संशोधन के पूर्व भी कुछ प्रमंडलाें में विनियर एवं प्लाईवुड मिलों को अनुज्ञप्ति दी गयी थी और उनका नवीकरण भी किया जाता रहा। माननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा दिनांक 29 अक्तूबर 2002 को आदेश पारित कर काष्ठ आधारित उद्योगों को नये लाईसेन्स देने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया फलतः किसी भी विनियर मिल को लाईसेन्स नहीं दिया जा सका। ऐसी परिस्थिति में 29 अक्तूबर 2002 के पूर्व स्थापित सभी विनियर मिलों की वरीयता सूची तैयार करने की आवश्यकता है।
वरीयता सूची तैयार करने से पूर्व इस बात का निर्धारण आवश्यक है कि इनकी वरीयता सूची जिलावार तैयार की जाय या पूरे राज्य की वरीयता सूची एक हो। राज्य में विनियर मिलों की स्थापना के सम्बंध में देखा गया है कि ये मिलें क्षेत्र विशेष में ही केन्द्रित हैं, अर्थात पूरे राज्य में इनकी स्थापना में एकरूपता नहीं है। कई-कई जिलों में एक भी विनियर मिल नहीं हैं। मुख्यतः पटना, मुजफ्फरपुर एवं पूर्णियां प्रशासनिक प्रमंडलों में ये मिलें स्थापित है।
उपर्युक्त सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुये विनियर मिलों की वरीयता निर्धारण हेतु निम्नलिखित मापदंड निर्धारित किये जाते हैं। (i) विनियर मिलों की वरीयता सूची रीजनवार होगी।
(ii) राज्य में विभाग को तीन रीजन में प्रशासनिक दृष्टिकोण से बांटा गया है, यथा पटना, मुजफ्फरपुर एवं भागलपुर। अतः राज्य के लिये निर्धारित अनुमान्य संख्या 177 को तीन भागों में बांटा जाता है। प्रत्येक रीजन के लिये अनुमान्य संख्या 59 होगी।
(iii) वरीयता सूची में उन्हीं विनियर मिलों को सम्मिलित किया जायेगा जो दिनांक 29 अक्तूबर 2002 या उसके पूर्व से स्थापित हैं। ऐसे सभी मिलों को औपबंधिक वरीयता सूची में स्थान दिया जायेगा। (iv) विनियर मिलों की आपसी वरीयता निम्नवत् निर्धारित की जायेगी। (क) वरीयता सूची में विनियर मिलों को उनकी स्थापना की तिथि के क्रम में वरीयता दी जायेगी। स्थापना की तिथि का निर्धारण जिला उद्योग केन्द्र/फैक्ट्री लाईसेन्स की पंजियन तिथि को माना जायेगा या विभाग द्वारा निर्गत लाईसेन्स की तिथि-इनमें से जो पहले की हो, वही तिथि मान्य होगी।6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 10 िसत+बर 2010 (ख) उपर्युक्त दोनों तिथियों के एक रहने पर वाणिज्य-कर में निबन्धित
मिलों को अनिबन्धित मिलों से वरीय माना जायेगा।
(v) ऐसे विनियर मिल जो दिनांक 29 अक्तूबर 2002 के पूर्व से संचालित है और जिसका मूल अभिलेख (उद्योग लाईसेन्स, फैक्ट्री लाईसेन्स आदि) वर्तमान संचालक से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति के नाम से है, तो ऐसे विनियर मिल मालिक से कारण पृच्छा की जायेगी। यदि मामला वैधानिक उत्तराधिकार का होगा तो मिल की वरीयता पूर्ववत् रहेगी। यदि मामला मिल की खरीद-बिक्री का होगा तो बिक्री की तिथि से उस मिल की वरीयता मानी जायेगी। यदि खरीद बिक्री 29 अक्तूबर 2002 के बाद हुयी है तो उसे वरीयता सूची में स्थान नहीं दिया जायेगा। वरीयता सूची का निर्धारण एक समिति द्वारा की जायेगी जिसका गठन निम्नवत् किया जाता है-
(1) क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक अध्यक्ष (2) रीजन के वरीयतम वन संरक्षक सदस्य (3) रीजन के वरीयतम वन प्रमंडल पदाधिकारी सदस्य (2) विनियर मिल के वरीयता निर्धारण हेतु प्रक्रिया—
(i) प्रत्येक क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक वरीयता निर्धारण मापदण्ड के आलोक में विनियर मिलों की औपबंधिक वरीयता सूची (सभी आवश्यक सूचनाओं सहित) तैयार कर (जिलावार) कार्यालय के नोटीस बोर्ड पर चिपकाते हुये 15 दिनों के अन्तर्गत आपत्ति आमंत्रित करेगें। इस सम्बंध में प्रचार-प्रसार भी किया जायेगा। (ii) उपर्युक्त औपबंधिक वरीयता सूची से प्रभावित व्यक्ति 15 दिनों के अन्तर्गत अपनी आपत्ति लिखित रूप में सम्बंधित क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक को देगें। (iii) क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक के द्वारा विनियर मिलों के चयन हेतु तिथि निर्धारित की जायेगी। समिति के द्वारा प्राप्त आपत्तियों पर व्यथित व्यक्ति को सुनवाई का एक मौका प्रदान करने के उपरांत निर्णय लेकर आदेश निर्गत किया जायेगा।
(iv) समिति द्वारा निर्णयोपरान्त अध्यक्ष के हस्ताक्षर से विनियर मिलों की सूची प्रकाशित की जायेगी। प्रकाशित सूची की एक-एक प्रति पर्यावरण एवं वन विभाग विभाग, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार तथा सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी को प्रेषित की जायेगी। वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा आदेश की एक प्रति प्रमंडलीय कार्यालय के नोटीस बोर्ड पर चिपकायी जायेगी। इसकी प्रति वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा सम्बंधित वनों के क्षेत्र पदाधिकारी को भी प्रेषित की जायेगी। किसी भी विनियर मिल स्वामी द्वारा मांग करने पर वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा सच्ची प्रति उपलब्ध करायी जायेगी।
(v) समिति का निर्णय अन्तिम होगा। चयन से व्यथित व्यक्ति चयन समिति के निर्णय के विरुद्ध आदेश निर्गत की तिथि से 30 दिनों के अन्तर्गत जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील दायर कर सकेंगें।
(3) अधिशेष विनियर मिलों को बन्द करने की प्रक्रिया जिले में अनुमान्य संख्या के अनुरूप विनियर मिलों के चयन के पश्चात अधिशेष विनियर मिलों को बन्द करा दिया जायेगा। इस हेतु अधिशेष विनियर मिलों को इस आशय का नोटीस भेजते हुये उन्हें सूचित किया जायेगा कि उनका विनियर मिल अचयनित रह गया है। अतः 30 दिनों के अन्तर्गत मिल के अन्तर्गत काष्ठ भंडार का निष्पादन कर विनियर मिल बन्द कर दें। यदि मिल स्वामी उसके पश्चात विनियर मिल बन्द नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी। चयनित विनियर मिलों में से जिन विनियर मिलों को बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के तहत अनुज्ञप्ति प्राप्त है उनके अनुज्ञप्ति का नवीकरण किया जायेगा परन्तु जिन्हें अनुज्ञप्ति प्राप्त नहीं है उन्हें अनुज्ञप्ति निर्गत करने से पूर्व केन्द्रीय प्राधिकृत समिति की स्वीकृति प्राप्त किया जाना अनिवार्य होगा।7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 10 िसत+बर 2010 6. प्लाईवुड इण्डस्ट्रीज के वरीयता निर्धारण के सम्बंध में याचिका संख्या 202/95 में दायर आई0 ए0 सं0 2522-2523 में माननीय उच्चतम न्यायालय ने दिनांक 04 सितम्बर 2009 को आदेश पारित कर मामले को केन्द्रीय प्राधिकृत समिति को वापस करते हुये मांगो की जांच कर प्रतिवेदन समर्पित करने हेतु कहा है। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय के अंतिम निर्णय उपरांत मागदर्शन निर्धारित किया जायेगा। 7. केन्द्रीय प्राधिकृत समिति के दिनांक 11 जून 2008 के अनुशंसा के आलोक में किसी जिला के लिये आरा मिलों की अंतिम वरीयता सूची के प्रकाशन तक उक्त जिला के सभी अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिलों को चलने दिया जायेगा। परन्तु यह प्रावधान बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के प्रावधानों के उल्लंघन के कारण उक्त अधिनियम के तहत बन्द कराये गये आरा मिलों पर लागू नहीं होगा। इन आरा मिलों के अनुज्ञप्ति का नवीकरण नियमानुसार किया जायेगा परन्तु संकल्प संख्या 760, दिनांक 13 नवम्बर 2003 के आलोक में अचयनित आरा मिल जिस अवधि में वास्तविक रूप से बंद रहे हैं उनके द्वारा उस अवधि के लिये नवीकरण शुल्क देय नहीं होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अंजनी कुमार सिंह, सरकार के प्रधान सचिव।
परिशिष्ट ''क''
जिलावार आरा मिलों की निर्धारित संख्या
जिला पूर्व में आरा मिलों की
क्रम सं0
निर्धारित सं0
आरा मिल का संशोधित निर्धारित संख्या 1 पटना 93 123 2 भोजपुर 44 58 3 बक्सर 27 36 4 नालंदा 43 57 5 रोहतास 45 60 6 कैमूर (भभुआ) 23 30 7 औरंगाबाद 35 46 8 नवादा 33 44 9 जहानाबाद 27 36 10 गया 63 83 11 मुजफ्फरपुर 62 82 12 वैशाली 44 58 13 सीतामढ़ी 44 58 14 शिवहर 9 12 15 पूर्वी चम्पारण 65 86 16 पश्चिमी चम्पारण 51 67 17 सारण (छपरा) 55 73 18 सिवान 47 62 19 गोपालगंज 39 52 20 दरभंगा 52 69 21 मधुबनी 58 77 22 समस्तीपुर 56 74 23 बेगूसराय 37 49 24 मुंगेर 26 34 25 लखीसराय 16 21 26 शेखपुरा 11 14 27 जमुई 25 338 (cid:18)बहार गजट (असाधारण)] 10 िसत+बर 2010 28 खगड़िया 21 28 29 भागलपुर 45 60 30 बांका 27 36 31 सहरसा 27 36 32 सुपौल 31 41 33 मधेपुरा 27 36 34 अररिया 33 44 35 किशनगंज 23 30 36 कटिहार 41 54 37 पूर्णियां 45 60
कुल 1450 1919
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, नागेन्द्र पाठक, सरकार के उप-सचिव।
———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 664-571+500-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in