िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 12121212 काित(cid:30)ककाित(cid:30)ककाित(cid:30)ककाित(cid:30)क,,,, 1931931931932222 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 44444444 पटनापटनापटनापटना, , , , बुबुबुबुधवारधवारधवारधवार,,,, ———————— 3333 नव&बनव&बनव&बनव&बर र र र 2020202010101010 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ
पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)/, पदःथापन, बदली, श(cid:18)/, छु 5ट(cid:15)
भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मX पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उZत (cid:18)वधान मंडल मX उपःथा(cid:18)पत और अ8य 9य(cid:18)/गत सूचनाएं। 2-6
या उपःथा(cid:18)पत Mकये जानेवाले ूवर भाग-1-क—ःवयंसेवक गु=म? के समादेंटाओं के
सिमितय? के ूितवेदन और उZत (cid:18)वधान आदेश।
---
भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0,
मंडल मX पुर:ःथापन के पूव(cid:30) ूकािशत (cid:18)वधेयक।
---
बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0,
भाग-7—संसद के अिधिनयम Pजनपर रांशपित क\ एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2,
अनुमित िमल चुक\ है। ---
एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन-
भाग-8—भारत क\ संसद मX पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Hाओं के
संसद मX उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय? के पर(cid:15)Hा-फल, काय(cid:30)बम, छाऽवृ(cid:18)L ूदान,
ूितवेदन और संसद मX उपःथा(cid:18)पत ूवर आMद।
---
भाग-1-ग—िशHा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Hाफल आMद ---
सिमितय? के ूितवेदन और संसद मX पुर:ःथापन के पूव(cid:30) ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-2—(cid:18)बहार-राNयपाल और काया(cid:30)OयH? (cid:24)ारा
भाग-9—(cid:18)व^ापन
---
िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं
भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क\ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
और िनयम आMद। 7-8
भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प_रवहन सूचनाएं, भाग-3—भारत सरकार, पPQम बंगाल सरकार और
8यायालय सूचनाएं और सव(cid:30)साधारण उSच 8यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं
सूचनाएं इ`याMद। 9-10 और िनयम, 'भारत गजट' और राNय गजट? के उUरण। ---
पूरक
---
भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---
पूरक-क 11-322 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
भागभागभागभाग----1111
िनयु(cid:18)/िनयु(cid:18)/िनयु(cid:18)/िनयु(cid:18)/, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)/श(cid:18)/श(cid:18)/श(cid:18)/, , , , छु 5ट(cid:15) और अछु 5ट(cid:15) और अछु 5ट(cid:15) और अछु 5ट(cid:15) और अ8य8य8य8य वैय(cid:18)/क सूचनाएंवैय(cid:18)/क सूचनाएंवैय(cid:18)/क सूचनाएंवैय(cid:18)/क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
मामीण (cid:18)वकास (cid:18)वभाग
ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
अिधसूचना
25 अZतूबर 2010
सं0 मा0(cid:18)व0-2/ःथा0-02-01/10-12484ÑÑÑÑ(cid:18)वभागीय अिधसूचना सं0-447 Mदनांक 19 जनवर(cid:15) 2010 (cid:24)ारा (cid:18)बहार मामीण (cid:18)वकास सेवा संवग(cid:30) के गठन के फलःवdप (cid:18)वभागीय संक=प सं0 460 Mदनांक 19 जनवर(cid:15) 2010 सहपMठत शुM(cid:24) पऽ सं0-592 Mदनांक 25 जनवर(cid:15) 2010 तथा संक=प सं0 2907 Mदनांक 26 माच(cid:30) 2010 (cid:24)ारा िलये गये िनण(cid:30)य के आलोक मX ूखंड (cid:18)वकास पदािधकार(cid:15) के ःवीकृ त पद? पर िनयिमत िनयु(cid:18)//ूो8नित होने तक अंत_रम/काय(cid:30)कार(cid:15) 9यवःथा के तहत ःथानाप8न ूभार देते हुये बम सं0-1 से बम सं0-4 पर अंMकत िचP8हत (cid:18)वभाग? के िचP8हत पय(cid:30)वेHीय पदािधका_रय? क\ सेवा ूाgत करते हुए एवं ःतंभ-7 मX अंMकत पद से ःथानांत_रत करते हुये ःतंभ-8 मX अंMकत ूखंड मX ूखंड (cid:18)वकास पदािधकार(cid:15) के पद पर ूितिनयु(cid:18)/ के आधार पर अगले आदेश तक पदःथा(cid:18)पत Mकया जाता है :-
| J Jhhhh J J hhhh | 7ूच 7ूच | RDD- ID NO. | प0 प0 प0 प0 > | ++++ Pल | प प C+ C+ प प C+ C+ वभ वभ वभ वभ > | पूव _प0 पूव _प0cccc पूव _प0 पूव _प0 Pल > | वप012 वप012 पपपप वप012 वप012 खF > | वप012 प वप012 प वप012 वप012 प Pल Pल Pल Pल > > > > |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 |
| 1 | 481 | "RDD/ 000526# | iीु<8j 7> 2 | प ूवk च&प V | _ वभ | _ प0 प च&प V | च5 | |
| 2 | 12482 | "RDD/ 001617# | iीआ80 ु > | प | P \ :व >ू= वभ | P \प व lफपु ु | पm0 ल | पूवkच&प V |
| 3 | 12483 | "RDD/ 001588# | iीच0 ु > 8 | प | = V वभ | खF= V प0 प "_च nMफ7ु :व7ु = Vवभ प # | प mपु | पूवkच&प V |
| 4 | 12484 | "RDD/ 001941# | iी>ी भ ी ु > | 0भ | = V वभ | खF= V प0 प | <_ | पूवkच&प V |
पदःथापदःथापदःथापदःथापन ूःतापन ूःतापन ूःतापन ूःताव मX भारत िनवा(cid:30)चन आयोग का िनदेश अपर मु(cid:8)य व मX भारत िनवा(cid:30)चन आयोग का िनदेश अपर मु(cid:8)य िनवा(cid:30)चन पदािधकार(cid:15) िनवा(cid:30)चन पदािधकार(cid:15) िनवा(cid:30)चन पदािधकार(cid:15) िनवा(cid:30)चन पदािधकार(cid:15), , , , (cid:18)बहार (cid:18)बहार (cid:18)बहार (cid:18)बहार व मX भारत िनवा(cid:30)चन आयोग का िनदेश अपर मु(cid:8)य व मX भारत िनवा(cid:30)चन आयोग का िनदेश अपर मु(cid:8)य का पऽांक का पऽांक का पऽांक का पऽांक 9940 9940 9940 9940 Mदनांक Mदनांक Mदनांक Mदनांक 23232323 माच(cid:30) माच(cid:30) माच(cid:30) माच(cid:30) 2010 2010 2010 2010 (cid:24)ारा संसूिचत Mकया गया है । (cid:24)ारा संसूिचत Mकया गया है । (cid:24)ारा संसूिचत Mकया गया है । (cid:24)ारा संसूिचत Mकया गया है ।
2. यह आदेश त`कािलक ूभाव से लागू होगा । पारगमन अविध देय नह(cid:15)ं होगा ।
3. उZत पदािधका_रय? क\ ूितिनयु(cid:18)/ िनयिमत पदािधकार(cid:15) क\ िनयु(cid:18)/ होने तक अथवा अिधकतम 3 वषo, दोन? मX से जो पहले हो, के िलए होगा ।
4. काया(cid:30)विध क\ समािp के उपरांत उपरोZत तािलका मX ूितिनयुZत ूखंड (cid:18)वकास पदािधकार(cid:15) िनयिमत िनयु(cid:18)/ का दावा नह(cid:15)ं करेगे ।
5. ूितिनयुZत पदािधकार(cid:15) अपने वेतनमान मX ह(cid:15) काय(cid:30) करेगे तथा उ8हX (cid:18)बहार सेवा संMहता के सुसंगत िनयम? के अधीन ूितिनयु(cid:18)/ भLा देय होगा ।
6. सेवा असंतोषूद पाये जाने पर मामीण (cid:18)वकास (cid:18)वभाग (cid:24)ारा Mकसी भी समय पदािधकार(cid:15) क\ सेवाऍ उनके पैतृक (cid:18)वभाग को वापस कर Mदया जाएगा ।
7. ूितिनयुZत पदािधकार(cid:15) अ(cid:18)वलंब (cid:18)वरिमत होकर अपने-अपने पदःथापन ःथान पर योगदान देकर िनPQत dप से ूभार महण करXगे एवं ूभार ूितवेदन (cid:18)वभाग को भेजXगे ।
8. ूितिनयुZत पदािधकार(cid:15) क\ सेवापुःत उनके पूव(cid:30) पदःथापन के िनयंऽी पदािधकार(cid:15) नवपदःथा(cid:18)पत ूखंड से संबंिधत Pजला के Pजला पदािधकार(cid:15) को उपलrध करायXगे तथा नवपदःथा(cid:18)पत ःथान से संबंिधत Pजला के Pजला पदािधकार(cid:15) को सेवापुःत ूाgत होने पर अपने अधीनःथ काया(cid:30)लय मX संधा_रत करXगे ।
(cid:18)बहार-राNयपाल के आदेश से,
अिनल कु मार, संयुZत सिचव ।
ÑÑÑ
खान एवं भूतत्व विभाग
———
अध्सिूचनाएं
8 अक्तूबर 2010
सं.सं.-ए/ए1-4064/92;खण्डद्ध-1975/एम0—श्री नित्यानन्द चौध्री, खान निरीक्षक, जिला खनन कार्यालय, नवादा को दिनांक 1 सितम्बर 2002 के भूतलक्षी प्रभाव से रु 6500-10500 के अपुनरीक्षित वेतनमान में सहायक खनन पदाध्किारी के पद पर नियमित प्रोन्नति दी जाती है ।
2. भूतलक्षी प्रभाव से दी गई प्रोन्नति के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है ।
3. प्रस्ताव एवं प्रारूप में प्रधन सचिव ;सक्षम प्राध्किारद्ध से अनुमोदन प्राप्त है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
राम सूचित शर्मा, उप सचिव ।4 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
8 अक्तूबर 2010
सं.सं.-ए/ए1-4064/92;खण्डद्ध-1976-एम0—श्री सुभाष चन्द्र, खान निरीक्षक, जिला खनन कार्यालय, समस्तीपुर को दिनांक 22 जनवरी 2004 के भूतलक्षी प्रभाव से रु 6500-10500 के अपुनरीक्षित वेतनमान में सहायक खनन पदाध्किारी के पद पर नियमित प्रोन्नति दी जाती है ।
2. भूतलक्षी प्रभाव से दी गई प्रोन्नति के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है ।
3. प्रस्ताव एवं प्रारूप में प्रधन सचिव ;सक्षम प्राध्किारद्ध से अनुमोदन प्राप्त है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
राम सूचित शर्मा, उप सचिव ।
———
8 अक्तूबर 2010
5 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 20108 अक्तूबर 2010 सं.सं.-ए/ए1-4064/92;खण्डद्ध-1980-एम0—निम्नांकित खान निरीक्षकों को रु 6500-10500 के अपुनरीक्षित वेतनमान में सहायक खनन पदाध्किारी के पद पर उनके नाम के सम्मुख अंकित तिथि के प्रभाव से वैचारिक रूप से नियमित प्रोन्नति दी जाती है।
| क्रमांक | प ्रोन्नत सेवानिवृत्त खान निरीक्षकों का नाम | वैचारिक रूप से प्रोन्नति की तिथि |
| 1 | 2 | 3 |
| 1 | श्री अजु न प्रसाद सिन्हा र् | 12.06.1999 |
| 2 | श्री अबू सालेह मलिक | 19.06.1999 |
| 3 | श्री हरि किशोर सिंह | 01.01.2001 |
3. प्रस्ताव एवं प्रारूप में प्रधन सचिव ;सक्षम प्राध्किारद्ध से अनुमोदन प्राप्त है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से राम सूचित शर्मा, उप सचिव ।
———
पथ निर्माण विभाग
ÑÑÑ अधिसूचना 13 अक्तूबर 2010 सं॰ 2/प्रो॰-2-07/2008-14617(एस)—बिहार लोक सेवा आयोग के पत्र संख्या 6/प्रो॰-24-26/2009- 2155/लो॰से॰आ॰, दिनांक 17 दिसम्बर 2009 द्वारा अनुशंसित पथ निर्माण विभाग, बिहार के बिहार अवर अभियंत्रण सेवा संवर्ग के कनीय अभियंता (असैनिक) श्री रेवती रमण वत्सलम (वरीयता क्रमांक-1970/2009) को बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-2 के अधीन पुनरीक्षित पे बैण्ड-2 एवं ग्रेड पे 5400 रुपये में आदेय भत्तो के साथ सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से औपबंधिक रूप से प्रोन्नत किया जाता है। उन्हें प्रोन्नति का वित्तीय लाभ सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर वास्तविक प्रभार ग्रहण करने की तिथि से अनुमान्य होगा। 2. यह प्रोन्नति पथ निर्माण विभाग के कार्यालय आदेश संख्या 286 सहपठित ज्ञापांक 3878 (ई॰) दिनांक 16 सितम्बर 2010 की कंडिका-5 के आलोक में इस शर्त के साथ दी गई है कि संचालित क्रिमिनल केश में यदि कोई Adverse आदेश श्री वत्सलम के लिए पारित होता है तो उसके फलाफल से यह प्रोन्नति प्रभावित होगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अमरेन्द्र भूषण सिंह, उप सचिव (प्र॰को॰)।
———
निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग
(निबंधन)
ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
अधिसूचनाएं
12 अक्तूबर 2010
सं॰ IV/स्था0(रा0)ई1-403/09-3036—मो0 कमाल अशरफ, जिला अवर निबंधक, गया को बिहार सेवा संहिता के नियम 234 के अन्तर्गत दिनांक 30 मई 2010 से 27 जून 2010 तक कुल 29(उनतीस) दिनों के लिए 29×2 अर्थात 58 (अंठावन) दिनों के रूपान्तरित अवकश की स्वीकृति दी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्र शेखर सिंह, उप सचिव।6 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
21 अक्तूबर 2010
संख्या-IV/स्था0(रा0)ई1-401/2010-3102—स्व0 अरूण कुमार ठाकुर, भूतपूर्व जिला अवर निबंधक, कैमूर (भभुआ) को वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग के पत्रांक-1904 (22) दिनांक 7 अक्तूबर 2010 के द्वारा प्रेषित उपार्जित अवकाश आदेयता प्रतिवेदन के आधार पर दिनांक 10 अक्तूबर 2009 से 8 नवम्बर 20.09 तक कुल 30 (तीस) दिनों का उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्र शेखर सिंह, उप सचिव।
ÑÑÑ
अधीHक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुMित। (cid:18)बहार गजट, 33Ñ571+50-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in7 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
भागभागभागभाग----2222
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राNयराNयराNयराNयपाल और काया(cid:30)Oयपाल और काया(cid:30)Oयपाल और काया(cid:30)Oयपाल और काया(cid:30)OयH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , , अिधसूचनाएं और िनयम आMद।अिधसूचनाएं और िनयम आMद।अिधसूचनाएं और िनयम आMद।अिधसूचनाएं और िनयम आMद।
ÑÑÑÑÑ Department of Information Technology INTENT NOTIFICATION "Facilitating Services though Common Service Centres (CSC) by enabling implementation of State Portal, State Service Delivery Gateway (SSDG) and Electronic Forms across the State" ——— ORDER 1st September 2010
No. IT/234/2008-1001—WHEREAS the National e-Governance Plan (NeGP) of the Govt. of India aims to make all Government Services accessible to the common man in his locality, through common service delivery outlets and ensure efficiency, transparency & reliability of such services at affordable costs to realize the basic needs to the common man.
WHEREAS the Government of Bihar desires to create a mechanism to deliver public services by utilizing the network of the Common Service Centres.
WHEREAS the State Government is implementing State Portal (SP), State Service Delivery Gateway (SSDG) & Electronic forms project.
WHEREAS this initiative facilitating Electronic Service Delivery will provide significant benefits to the citizens especially in the form of a single gateway to citizen for service delivery.
WHEREAS SP/SSDG/Electronic form project will enable citizen to fill the form either online or offline at CSC and submit it electronically to the respective office of the concerned department. While the submitted e-Form will be routed through State Service Delivery Gateway (SSDG) to the respective field office of the concerned department responsible for providing the particular service, State Portal (SP) will give information about the services & would host all the e-Forms.
AND THEREFORE Government of Bihar intends to inform the general public that it is intended to deliver services to the citizens through Common Service Centres (CSC's), State Portal (SP) along with State Service Delivery Gateway (SSDG) electronically.
By Order of the Governor of Bihar,
ARUN KUMAR SINGH,
Principal Secretary to Govt.
8 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010कृषि विभाग
ÑÑÑ
शुद्धि-पत्र
26 अक्तूबर 2010
सं॰ 1/ए॰ जी॰ प्रो॰ 11/06-6264/—॰ विभागीय अधिसूचना संख्या 4968, दिनांक 17 अगस्त 2010 के क्रमांक 02 में उल्लेखित नाम मो॰ शरफुद्दीन के स्थान पर श्री एम0 एम0 शरफुद्दीन (मियाँ मो॰ शरफुद्दीन जन्म तिथि 1 जनवरी 1935) पढ़ा जाय।
उक्त अधिसूचना को इस हद तक संशोधित समझा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, देवकी नन्दन चौधरी, अवर सचिव।
ÑÑÑÑ
अधीHक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुMित। (cid:18)बहार गजट, 33Ñ571+20-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in9 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
भागभागभागभाग----9999((((खखखख))))
और सव(cid:30)साधारण सूचनाएं इ`याऔर सव(cid:30)साधारण सूचनाएं इ`याऔर सव(cid:30)साधारण सूचनाएं इ`याऔर सव(cid:30)साधारण सूचनाएं इ`याMद।Mद।Mद।Mद। ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
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सं॰ 39—मैं, मो॰ इनामुल हक जफीरी, पुत्र-मो॰ जफीर उद्दीन, स्थायी निवासी-महल्ला-यहियापुर, डाकघरथानाजिला-शेखपुरा, माननीय न्यायाधीश के सचिव, उच्च न्यायालय, पटना, वर्त्तमान निवासी-ब्लाक संख्या-10, फलैट ंख्या-5, अदालतगंज, पटना, घोषित करता हुं कि मैंने शपथ पत्र संख्या-920, दिनांक 05 अप्रील 2010 के द्वारा अपना नाम बदलकर ''मो॰ इनामुल हक जफीरी'' की जगह ''मो॰ इनामुल हक'' कर दिया हुं।'' इसकी घोषणा अंग्रेजी दैनिक समाचार-पत्र हिन्दुस्तान टाइम्स, दिनांक 13 अप्रील 2010 में भी प्रकाशित हो चुकी है।
मो॰ इनामुल हक जफीरी।
ÑÑÑ
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सं॰ 38—मैं अमित, जन्मतिथि 19 फरवरी 1987, पिता श्री दिनेश कुमार, माता-श्रीमती प्रतिमा, पता ग्राम-मोहनपुर, पोस्ट-मिरापुर, थाना-सकरा, जिला-मुजफ्फरपुर का स्थाई निवासी हूॅ।
शपथ-पत्र संख्या-15384 दिनांक 16 दिसम्बर 2009, द्वारा घोषित करता हूॅ कि मैने अपना नाम ''अमित'' से परिवर्तित कर ''अमित सोरिन'' (AMIT SORIN) कर लिया है। अब मैं ''अमित सोरिन'' (AMIT SORIN) के नाम से जाना जाउॅगा।
अमित।10 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
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सं 43—मैं, आकांक्षा तिवारी, पुराना नाम-आकांक्षा रिमझिम, सुपुत्राी-श्री श्यामा शरण तिवारी, स्थायी पता-जानकी विला, रोड नं0-शून्य, कैलाश नगरी, गाँध्ी मूर्ति के नजदीक, पटेल नगर, पटना-23 यह घोषणा करती हूँ कि मैंने अपना नाम शपथ-पत्रा संख्या-20226, दिनांक 10 जून 2010, जो पटना समाहरणालय से जारी हुआ है, के द्वारा बदल लिया है। सं0-11439;PTद्ध आकांक्षा रिमझिम।
ÑÑÑÑ
अधीHक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुMित। (cid:18)बहार गजट, 33Ñ571+30-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in11 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट काकाकाका पूरकपूरकपूरकपूरक((((अअअअ0000)))) ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत
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जल संसाधन विभाग
———
अधिसूचनाएं
14 जून 2010
सं॰ 22/नि0सि0(डि0)-14-09/2007/881—श्री मोबिन अहसन, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, नासरीगंज के पदस्थापन अवधि में सोन नहर प्रमण्डल, नासरीगंज के अन्तर्गत अकोढ़ीगोला से नोखा के बीच बक्सर शाखा नहर के 2.805 कि0मी0 से 11.675 कि0मी0 तक नहर सेवा पथ निर्माण कार्य में पायी गयी अनियमितता की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया कि प्रावधानानुसार बेस में 6'' बालू सतह के बजाये 3'' बालू का सतह पाया गया। (2) मेटल गे्रड i, ii, iii की समेकित मुटायी 12'' के जगह पर प्रायः 11'' पाया गया कही भी 12'' नहीं पाया गया। (3) पूरे रीच में कारपेंटिंग (कालीकरण) की मोटाई प्रायः 13 मी0 मी0 पाया गया जबकि इसे 20 मि0 मी0 होना चाहिए था एवं मेटल गे्रड iii की मात्रा में कुछ ओभर साईज पाया गया। सबवेस कोर्स की मुटाई 20 एम0 एम0 का टोलरेन्स मान्य है। बाईडिंग मटेरियल के रूप में मूरम का प्रयोग किया गया जो भारी वाहनों के आवागमन के कारण डस्ट के रूप में बदल जाना स्वभावित एवं मान्य है स्थल जॅाच प्रतिवेदन में भी तीन गे्रड के मेटल की मुटाई 11'' से 12 फीट के बीच पाया गया हैं। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में विभागीय समीक्षा की गयी जिसमें बालू भराई की मुटाई 6'' के बदले 3'' पाये जाने का है इस संबंध में उड़नदस्ता दल द्वारा बालू की मुटाई 6 के बदले 4.5'' पाया गया है प्राक्कलन तैयार करते समय बॅाक्स कटिंग के साथ बालू भराई कार्य का प्रावधान होना चाहिए था साथ ही भौगोलिक स्थिति एवं समय अन्तराल में 1 से 15'' की कमी आना स्वाभाविक है। आरोप सं0-2 के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य पाया गया क्योंकि पथ क्रस्ट की मुटाई की गणना मंत्रिमंडल निगरानी विभाग द्वारा निर्गत परिपत्र के अनुसार नहीं की गयी है। कार्य की जॅाच 6 वर्षो के बाद की गयी है। अतः सड़क निर्माण में प्रयुक्त अवयवों के क्षरण स्वाभाविक है। क्षेत्रिय गुण नियंत्रण संगठन द्वारा भी कार्य की गुणवत्ता संतोषप्रद पाया गया है। मेटल गे्रड iii की मात्रा में कुछ ओभर साईज पाया जाने का जॅाच फल पर आधारित नहीं है फलतः यह मान्य नहीं है। अतः विभागीय समीक्षा में पाया गया कि लगाये गये तीनों आरोप प्रमाणित नहीं होता है अतः आरोपी पदाधिकारियों द्वारा उल्लेखित विचारणीय तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए दोषमुक्त करने का निर्णय विभाग द्वारा पारित किया गया। अतः श्री मोबिन अहसन, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, नासरीगंज सम्प्रति को दोषमुक्त करने संबंधी आदेश संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, उप-सचिव ।12 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
14 जून 2010
सं॰ 22/नि0सि0(डि0)-14-09/2007/882—श्री उदयानन्द राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, नासरीगंज के पदस्थापन अवधि में सोन नहर प्रमण्डल, नासरीगंज के अन्तर्गत अकोढ़ीगोला से नोखा के बीच बक्सर शाखा नहर के 2.805 कि0मी0 से 11.675 कि0मी0 तक नहर सेवा पथ निर्माण कार्य में पायी गयी अनियमितता की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया कि प्रावधानानुसार बेस में 6'' बालू सतह के बजाये 3'' बालू का सतह पाया गया। (2) मेटल गे्रड i, ii, iii की समेकित मुटायी 12'' के जगह पर प्रायः 11'' पाया गया कही भी 12'' नहीं पाया गया। (3) पूरे रीच में कारपेंटिंग (कालीकरण) की मोटाई प्रायः 13 मी0 मी0 पाया गया जबकि इसे 20 मि0 मी0 होना चाहिए था एवं मेटल गे्रड iii की मात्रा में कुछ ओभर साईज पाया गया। सबवेस कोर्स की मुटाई 20 एम0 एम0 का टोलरेन्स मान्य है। बाईडिंग मटेरियल के रूप में मूरम का प्रयोग किया गया जो भारी बाहनों के आवागमन के कारण डस्ट के रूप में बदल जाना स्वभावित एवं मान्य है स्थल जॅाच प्रतिवेदन में भी तीन गे्रड के मेटल की मुटाई 11'' से 12 फीट के बीच पाया गया हैं। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में विभागीय समीक्षा की गयी जिसमें बालू भराई की मुटाई 6'' के बदले 3'' पाये जाने का है। इस संबंध में उड़नदस्ता दल द्वारा बालू की मुटाई 6 के बदले 4.5'' पाया गया है। प्राक्कलन तैयार करते समय बॅाक्स कटिंग के साथ बालू भराई कार्य का प्रावधान होना चाहिए था साथ ही भौगोलिक स्थिति एवं समय अन्तराल में 1 से 15'' की कमी आना स्वाभाविक है। आरोप सं0-2 के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य पाया गया क्योंकि पथ क्रस्ट की मुटाई की गणना मंत्रिमंडल निगरानी विभाग द्वारा निर्गत परिपत्र के अनुसार नहीं की गयी है। कार्य की जॅाच 6 वर्षो के बाद की गयी है। अतः सड़क निर्माण में प्रयुक्त अवयवों के क्षरण स्वाभाविक है। क्षेत्रिय गुण नियंत्रण संगठन द्वारा भी कार्य की गुणवत्ता संतोषप्रद पाया गया है। मेटल गे्रड iii की मात्रा में कुछ ओभर साईज पाया जाने का जॅाच फल पर आधारित नहीं है फलतः यह मान्य नहीं है। अतः विभागीय समीक्षा में पाया गया कि लगाये गये तीनों आरोप प्रमाणित नहीं होता है अतः आरोपी पदाधिकारियों द्वारा उल्लेखित विचारणीय तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए दोषमुक्त करने का निर्णय विभाग द्वारा पारित किया गया। अतः श्री उदयानन्द राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, नासरीगंज सम्प्रति सेवानिवृत को दोषमुक्त करने संबंधी आदेश संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, उप-सचिव ।
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14 जून 2010
सं॰ 22/नि0सि0(डि0)-14-09/2007/883—श्री अख्तर जमील, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, नासरीगंज के पदस्थापन अवधि में सोन नहर प्रमण्डल, नासरीगंज के अन्तर्गत अकोढ़ीगोला से नोखा के बीच बक्सर शाखा नहर के 2.805 कि0मी0 से 11.675 कि0मी0 तक नहर सेवा पथ निर्माण कार्य में पायी गयी अनियमितता की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया कि प्रावधानानुसार बेस में 6'' बालू सतह के बजाये 3'' बालू का सतह पाया गया। (2) मेटल गे्रड i, ii, iii की समेकित मुटायी 12'' के जगह पर प्रायः 11'' पाया गया कही भी 12'' नहीं पाया गया। (3) पूरे रीच में कारपेंटिंग (कालीकरण) की मोटाई प्रायः 13 मी0 मी0 पाया गया जबकि इसे 20 मि0 मी0 होना चाहिए था एवं मेटल गे्रड iii की मात्रा में कुछ ओभर साईज पाया गया। सबवेस कोर्स की मुटाई 20 एम0 एम0 का टोलरेन्स मान्य है। बाईडिंग मटेरियल के रूप में मूरम का प्रयोग किया गया जो भारी बाहनों के आवागमन के कारण डस्ट के रूप में बदल जाना स्वभावित एवं मान्य है स्थल जॅाच प्रतिवेदन में भी तीन गे्रड के मेटल की मुटाई 11'' से 12 फीट के बीच पाया गया हैं। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में विभागीय समीक्षा की गयी जिसमें बालू भराई की मुटाई 6'' के बदले 3'' पाये जाने का है। इस संबंध में उड़नदस्ता दल द्वारा बालू की मुटाई 6 के बदले 4.5'' पाया गया है प्राक्कलन तैयार करते समय बॅाक्स कटिंग के साथ बालू भराई कार्य का प्रावधान होना चाहिए था साथ ही भौगोलिक स्थिति एवं समय अन्तराल में 1 से 15'' की कमी आना स्वाभाविक है। आरोप सं0-2 के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य पाया गया क्योंकि पथ क्रस्ट की मुटाई की गणना मंत्रिमंडल निगरानी विभाग द्वारा निर्गत परिपत्र के अनुसार नहीं की गयी है। कार्य की जॅाच 6 वर्षो के बाद की गयी है। अतः सड़क निर्माण में प्रयुक्त अवयवों के क्षरण स्वाभाविक है। क्षेत्रिय गुण नियंत्रण संगठन द्वारा भी कार्य की गुणवत्ता संतोषप्रद पाया गया है। मेटल गे्रड iii की मात्रा में कुछ ओभर साईज पाया जाने का जॅाच फल पर आधारित नहीं है फलतः यह मान्य नहीं है। अतः विभागीय समीक्षा में पाया गया कि लगाये गये तीनों आरोप प्रमाणित नहीं होता है अतः आरोपी पदाधिकारियों द्वारा उल्लेखित विचारणीय तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए दोषमुक्त करने का निर्णय विभाग द्वारा पारित किया गया।13 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 अतः श्री अख्तर जमील, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, नासरीगंज सम्प्रति पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल सं0-2, कपिलेश्वर स्थान-मधुबनी को दोषमुक्त करने संबंधी आदेश संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, उप-सचिव ।
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14 जून 2010
सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-1-13/2007/884—सिंचाई प्रमण्डल, मुरलीगंज के अन्तर्गत वितरणी, उप वितरणी एवं लधु नहरो के कार्यो में की जा रही अनियमितताओं की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा की गई। उड़नदस्ता से प्रापत जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई एवं प्रथम द्रष्टया प्रमाणित अरोपों के लिए श्री सुरेश कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, मुरलीगंज के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए पत्रांक 10 दिनांक 9 जनवरी 2008 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री कुमार, कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए दोषमुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। सरकार का उक्त निर्णय श्री सुरेश कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, मुरलीगंज को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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14 जून 2010
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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14 जून 2010
सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-1-07/2005-886—महानन्दा पश्चिमी तटबंध के कुरसेल(रंगवाड़ा) गॅाव के निकट विगत तीन दिनों से कटाव होने, कटाव स्थल पर दिनांक 16 जुलाई 2004 को कोई अभियन्ता उपस्थित नहीं होने तथा तटबंध 200 मी0 की लम्बाई में कट जाने से संबंधित सूचना जिला पदाधिकारी कटिहार द्वारा दी गई। जिला पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर मामले के समीक्षोपरान्त श्री सुजीत कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, अवर प्रमण्डल, कदवा, बेलगाछी के विरूद्व आरोप गठित कर विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुजीत कुमार, सहायक अभियन्ता के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1296 दिनांक 14 अक्तूबर 2005 द्वारा बिहार सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। विभागीय कार्यवाही में जॅाच पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त जॅाच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए श्री कुमार से कतिपय असहमति के विन्दुओं पर विभागीय पत्रांक-983 दिनांक 3. दिसम्बर 2008 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गईं। सम्यक समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित नहीं पाते हुए श्री सुजीत कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, को दोषमुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया हैं सरकार के उक्त निर्णय श्री सुजीत कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमण्डल, कदवा, बेलगाछी को निर्णय संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।14 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
14 जून 2010
सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-1-07/2005/887—महानन्दा पश्चिमी तटबंध के कुरसेल(रंगवाड़ा) गॅाव के निकट बिगत तीन दिनों से कटाव होने, कटाव स्थल पर दिनांक 16 जुलाई 2004 को कोई अभियन्ता उपस्थित नहीं होने तथा तटबंध 200 मी0 की लम्बाई में कट जाने से संबंधित सूचना जिला पदाधिकारी कटिहार द्वारा दी गई। जिला पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर मामले के समीक्षोपरान्त श्री प्रभात कुमार, तत्कालीन कनीय अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमण्डल, कदवा, बेलगाछी के विरूद्व आरोप गठित कर विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रभात कुमार, तत्कालीन कनीय अभियन्ता, के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1295 दिनांक 14 अक्तूबर 2005 द्वारा बिहार सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। विभागीय कार्यवाही में जॅाच पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त जॅाच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए श्री कुमार से कतिपय असहमति के विन्दुओं पर विभागीय पत्रांक-984 दिनांक 3 दिसम्बर 2008 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गईं सम्यक समीक्षोपरानत आरोप प्रमाणित नहीं पाते हुए श्री प्रभात कुमार, कनीय अभियन्ता को दोषमुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया हैं। सरकार के उक्त निर्णय श्री प्रभात कुमार, तत्कालीन कनीय अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमण्उल, कदवा, बेलगाछी को निर्णय संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
——— 14 जून 2010 सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-1-07/2005/888—महानन्दा पश्चिमी तटबंध के कुरसेल(रंगवाड़ा) गॅाव के निकट बिगत तीन दिनों से कटाव होने, कटाव स्थल पर दिनांक 16 जुलाई 2004 को कोई अभियन्ता उपस्थित नहीं होने तथा तटबंध 200 मी0 की लम्बाई में कट जाने से संबंधित सूचना जिला पदाधिकारी कटिहार द्वारा दी गई। जिला पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर मामले के समीक्षोपरान्त श्री श्याम नारायण सिंह तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार के विरूद्व आरोप गठित कर विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री श्याम नारायण सिंह, कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1298 दिनांक 14 अक्तूबर 2005 द्वारा बिहार सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के क्रम में ही श्री सिंह, कार्यपालक अभियन्ता की मृत्यु दिनांक 20 जून 2006 को हो गई। अतः समीक्षोपरान्त श्री सिंह, कार्यपालक अभियन्ता के मामले को तकनीकि आधार पर समाप्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री श्याम नाराण सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियान्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार के विरूद्व संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को तकनीकि आधार पर समाप्त किया जाता है एवं श्री सिंह के परिवार को उक्त निर्णय संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
——— 16 जून 2010 सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-06/2009/898—श्री निरंजन कुमार दत्त, आई0 डी0-1785, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, नवगछिया द्वारा उक्त पदस्थापन अवधि वर्ष 2007-08 एवं 2008-09 में जिला पदाधिकारी, भागलपुर के निदेश की अवहेलना करने जिसके कारण बाढ़ के दृष्टिगत नवगछिया अनुमंडल अन्तर्गत सभी तटबंधों का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण नहीं हो सका एजेण्डा सं0-94/15 के तहत भगलपुर जिलान्तर्गत नवगछिया अनुमंडल के विक्रमशिला सेतु के अपस्ट्रीम में खैरपुर राधोपुर एवं काजीकोरैया ग्रामों की सुरक्षा हेतु वर्ष 2007-08 में कुल 6.00 कि0मी0 की लम्बाई में बोल्डर रिटमेंट कार्य समय पर पूरा नहीं कराने तथा उक्त कार्य के संवेदक से अनावश्यक सहानुभूति दर्शानें, उक्त कार्य हेतु लगाये गये मजदूरों की संख्या के संबंध में जिला प्रशासन को गलत सूचना देने स्थल निरीक्षण में धोर सुस्ती दिखाने, बाढ़ नियंत्रण निरोधात्मक कार्यं में मुस्तैदी से कार्य नहीं कराने, कराये गये कुल कार्य की राशि 1822.810 लाख रूपये अंकित करना संदेहास्पद पाये जाने आदि प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिये उनके विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक-764 दिनांक 3.8.09 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि श्री दत्ता, कार्यपालक अभियन्ता पर लगाये गये सभी आरोप प्रशासनिक प्रकृति के है15 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 जो संचालन पदाधिकारी द्वारा जॅाच में प्रमाणित नहीं पाया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए सरकार द्वारा श्री दत्ता को उन पर लगाये गये आरोपों से मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय श्री निरंजन कुमार दत्त, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, नवगछिया को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, उप-सचिव ।
——— 17 जून 2010 सं॰ 22/नि0सि0(मोति0)-08-04/2004/908—श्री नागेन्द्र प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, (आई0डी0-1215) तिरहुत नहर प्रमण्डल, रक्सौल के विरूद्व तिरहुत नहर के वर्ष 2001 में टूटानों की मरम्मति पर होने वाले व्यय का आकलन करने, स-समय प्राक्कलन समर्पित नहीं करने एवं राशि रहते हुए भी मरम्मति कार्य प्रारम्भ कराने में विलम्ब के आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1415 दिनांक 29 अक्तूबर 2001 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई तथा सम्यक समीक्षोपरान्त श्री सिन्हा के विरूद्व आरोपों को प्रमाणित नहीं पाये जाने के कारण उन्हें दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया। तदनुसार श्री नागेन्द्र प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, (आई0डी0-1215) तिरहुत नहर प्रमण्डल, रक्सौल सम्प्रति सेवा निवृत को दोषमुक्त किया जाता है। श्री सिन्हा को उक्त निर्णय एतद् द्वारा संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
——— 17 जून 2010 सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-05/09/909—पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, दरभंगा के अन्तर्गत पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के वि0दू0 171.30 से 186.00 के बीच कराये गये पुनस्र्थापन कार्य में अनियमितता की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता अंचल से कराई गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में पाया गया कि उक्त वि0दू0 171.80 से 186.00 के बीच पुनस्र्थापन कार्यो के प्री लेवेल की जॅाच कार्य आरम्भ होने के बाद कार्य के दौरान किया गया है। जबकि प्री लेवेल की जॅाच के बाद ही कार्य आरम्भ होना चाहिए था। उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री भगवती शरण द्विवेदी, सहायक अभियन्ता, रूपांकण प्रमण्उल सं.-1, दरभंगा के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए विभागीय पत्रांक 1029 दिनांक 8 अक्तूबर 2009 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री द्विवेदी सहायक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी सम्यक समीक्षोपरान्त श्री द्विवेदी के विरूद्व आरोप प्रमाणित पाते हुए निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गया हैः- (1) निन्दन वर्ष 2008-09 (2) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। सरकार का उक्त निर्णय श्री भगवती शरण द्विवेदी तत्कालीन सहायक अभियन्ता, रूपांकण प्रमण्डल सं0-1, दरभंगा को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
——— 28 जून 2010 सं॰ 22/नि0सि0(विभा0)-14-103/88(अंश-4)/962—श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, दुर्गावर्ती बॅाध प्रमण्डल सं0-1, भीतरीबॅाध रोहतास को उनके पदस्थापन अवधि वर्ष 1987-88 में उनके द्वारा दुर्गावर्ती परियोजना में क्ले ब्लैकेटिंग कार्य स्ट्रीपिंग कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए उत्तरदायी पाये जाने के फलस्वरूप विभागीय आदेश सं0-95 दिनांक 5 मई 1992 द्वारा आदेश निर्गत करने की तिथि से बर्खास्त किया गया था। सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-10383/92 में माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा दिनांक 11 जनवरी 2003 को पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश सं0-85 दिनांक 20 मार्च 1993 द्वारा बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए उन्हें दिनांक 5 मई 1992 के प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय कार्यवाही के समीक्षोपरान्त आदेश सं0-72 दिनांक 26 अप्रील 1995 द्वारा आदेश निर्गत की तिथि से पुनः बर्खास्त किया गया, जिसके विरूद्व श्री सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-4443/95 दायर किया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 14 अक्तूबर 1996 को पारित आदेश में यह निर्णय दिया गया कि श्री सिंह माननीय महामहिम राज्यपाल के समक्ष अपना अपीलीय अभ्यावेदन समर्पित करेंगे तथा अभ्यावेदन समर्पित की तिथि से चार माह के अन्दर अपीलीय अभ्यावेदन का निस्तार नहीं होने की स्थिति में बर्खास्तगी आदेश स्वतः निरस्त समझा जाएगा।16 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 कतिपय कारणों से निर्धारित समय सीमा के अन्दर अपीलीय अभ्यावेदन पर विचार नहीं किये जाने के फलस्वरूप माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह (बर्खास्त सहायक अभियन्ता) द्वारा दिनांक 28 फरवरी 1997 को विभाग में योगदान प्रतिवेदन दिया गया। तदुपरान्त विभाग द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में आई0 ए0 सं0-653 तथा 654/97 दायर किया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 28 मार्च 1997 को पारित आदेश में यह निर्णय दिया गया कि महामहिम राज्यपाल द्वारा श्री सिंह के अपीलीय अभ्यावेदन का निस्तार अगले तीन माह के अन्दर निश्चित रूप से कर दिया जाए तथा महामहिम राज्यपाल के निर्णय तक श्री सिंह, सहायक अभियनता की सेवा उनके योगदान की तिथि 28 फरवरी 1997 से बरकरार मानी जायेगी और यह महामहिम के निर्णय से प्रभावित होगी। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उपर्युक्त आदेश के आलोक में महामहिम राज्यपाल द्वारा मामले की सम्यक सीक्षोपरान्त श्री सिंह का अपीलीय अभ्यावेदन दिनांक 25 जून 1997 को खारिज कर दिया गया। फलस्वरूप विभाीय आदेश सं0-694 दिनांक 13 मई 1998 द्वारा दिनांक 25 जून 1997 को महामहिम राज्यपाल द्वारा पारित आदेश के आलोक में उक्त तिथि से श्री सिंह स्वतः बर्खास्त समझे जायेंगे निर्गत किया गया। श्री सिंह द्वारा विभागीय सेवा बर्खास्तगी आदेश दिनांक 26 अप्रील 1995 तथा अपीलेट आदेश दिनांक 25 जून 1997 के विरूद्व मननीय उच्च न्यायालय, पटना में रिट याचिका सी. डब्लू0 जे0 सी0 सं0-6750/97 दायर की गयी। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्याय निर्णय दिनांक 1 अप्रील 2010 में श्री सिंह के विरूद्व निर्गत उपरोक्त अपीलीट तथा सेवा बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया गया है। उक्त न्यायादेश में श्री सिंह के नियंत्री पदाधिकारी कार्यपालक अभियन्ता के मामले में पारित न्यायादेश दिनांक 15 जनवरी 2008 तथा उनके अधीनस्थ कनीय अभियन्ताओं के संदर्भ में पारित न्यायादेश दिनांक 10 जनवरी 2008 के सदृश्य श्री सिंह को सेवा में पुनस्र्थापित कर विधि सम्मत सभी देय बकाया वेतनादि का लाभ देने का निदेश प्राप्त है। विभाग द्वारा उक्त न्यायादेश का अनुपालन भी किया जा चुका है तथा बर्खास्तगी की तिथि से पूर्ण वेतन देने का आदेश दिया गया है। उपरोक्त न्यायादेश के आलोक में श्री सिंह द्वारा दिनांक 6 जून 2010 को विभाग में सहायक अभियंता के पद पर योगदान दिया गया है। एल0 पी0 ए0 में जाने के विन्दु पर विधि विभाग का परामर्श प्राप्त किया गया। विद्वान महाधिवक्ता, बिहार, पटना का स्पतर अभिमत है कि इसी मामले से संबंधित कार्यपालक अभियन्ता श्री सुबोध कुमार वर्मा के मामले में माननीय उच्च न्यायालय एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अवलोकन एवं अन्य कनीय अभियन्ताओं के विषय में न्याय निर्णय अवलोकन तथा विभाग द्वारा न्याय निर्णय का अनुपालन किये जाने की स्थिति में श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह के मामले में रिट कोर्ट द्वारा निर्गत आदेश अनुपालन करने की आवश्यकता है। उक्त वर्णित स्थिति में माननीय उच्च न्यायाल, पटना द्वारा सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं00-6750/97 में दिनांक 1 अप्रील 2010 को पारित न्यायादेश को अनुपालित करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय आदेश सं0-72 दिनांक 26 अप्रील 1995 तथा महामहिम राज्यपाल द्वारा पारित अपीलेट आदेश दिनांक 25 जून 1997 सह विभागीय आदेश सं0- 694 दिनांक 13 मई 1998 को निरस्त किया जाता है। तथा श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, दुर्गावती बॅाध प्रमण्उल सं0-1, भीतरीबॅाध रोहतास सम्प्रति सेवा से बरर्खास्त को सेवा से बरर्खास्तगी की तिथि दिनांक 26 अप्रील 1995 से सेवा में पुनस्र्थापित करते हुए उन्हें पूर्ण वेतन अन्य वेतन भत्ता यथा विशेष वेतन सहित उनके द्वारा पूर्व में निकासी की गयी राशि को समायोजित करते हुए अन्तर राशि का भुगतान का आदेश दिया जाता हेै। तथा साथ ही श्री सिंह द्वारा दिनांक 6 अप्रील 2010 को विभाग में दिये गये योगदान की स्वीकृति प्रदान की जाती है। उक्त आदेश श्री सिंह, सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, उप-सचिव ।
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30 जून 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/10/982—सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-906/10 श्री विन्देश्वर यादव कंस्ट्रक्सन प्रा0 लि0 ग्रा0 - हरिराहा जिला- मधुबनी बनाम बिहार सरकार में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में कोशी नहर प्रमण्डल, खुटौना के निविदा सं0-01/2009-10 के ग्रुप सं0-3 की निविदा में बरती गई अनियमितता की जॅाच मंत्रिमंडल निगरानी (त0प0को0) पटना द्वारा की गई। निगरानी विभाग से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त नव निर्माण बिहार कंस्ट्रक्सन प्रा0 लि0, ग्रा0-एकम्बा बसानया जिला-मधुबनी के वित्तिय बीड से संबंधित अभिलेखों में छेड़छाड़ करने एवं अनियमितता बरतने का आरोप प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए मो0 अशरफ हुसैन, कार्यपालक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, खुटौना के विरूद्व प्राथमिकी दर्ज कर निलंबित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में मो0 अशरफ हुसैन, कार्यपालक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, खुटौना को आदेश निर्गत की तिथि से निलंबित किया जाता है।17 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 (2) निलंबन अवधि में श्री हुसैन, कार्यपालक अभियन्ता का मुख्यालय मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, पटना (अनीसाबाद) का कार्यालय निर्धारित किया जाता है। (3) निलंबन अवधि में श्री हुसैन को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा । (4) विभागीय कार्यवाही का संकल्प अलग से निर्गत किया जा रहा है। (5) अवर सचिव (श्री अंजनी कुमार सिंह) प्रबंधन कोषांग, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को निदेश दिया जाता है कि निगरानी विभाग से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर श्री हुसैन, कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व संबंधित थाने में घोर कदाचार, अनियमितता, हेराफेरी एवं जालसाजी के लिए प्राथमिकी दर्ज करायी जाय। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
——— 30 जून 2010 सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/10/983—सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-906/10 श्री विन्देश्वर यादव कंस्ट्रक्सन प्रा0 लि0 ग्रा0 - हरिराहा जिला- मधुबनी बनाम बिहार सरकार में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में कोशी नहर प्रमण्डल, खुटौना के निविदा सं0-01/2009-10 के ग्रुप सं0-3 की निविदा में बरती गई अनियमितता की जॅाच मंत्रिमंडल निगरानी (त0प0को0) पटना द्वारा की गई। निगरानी विभाग से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त नव निर्माण बिहार कंस्ट्रक्सन प्रा0 लि0, ग्रा0-एकम्बा बसानया जिला- मधुबनी के वित्तिय बीड से संबंधित अभिलेखों में छेड़छाड़ करने एवं अनियमितता बरतने का आरोप प्रमाणित पाया गया। (2) निविदा में अनियमितता की प्रारंभिक जॅाच श्री प्रेम प्रकाश सिंह, कार्यपालक अभियन्ता योजना एवं मोनेटरिंग, अंचल जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा की गई। कार्यपालक अभियन्ता मोनेटरिंग द्वारा निविदा के वित्तिय बीड से संबंधित अभिलेखों में छेड़छाड़ होने के बाद भी यह प्रतिवेदित किया गया कि कोई छेड़छाड़ नहीं हुआ है एक गंभीर प्रमाणित आरोप है। (3) उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिये श्री प्रेम प्रकाश सिंह, कार्यपालक अभियन्ता योजना एवं मोनेटरिंग, अंचल जल संसाधन विभाग, पटना के विरूद्व प्राथमिकी दर्ज कर निलंबित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। (4) सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रेम प्रकाश सिंह, कार्यपालक अभियन्ता योजना एवं मोनेटरिंग, अंचल जल संसाधन विभाग, पटना को आदेश निर्गत की तिथि से निलंबित किया जाता है।
(5) निलंबन अवधि में श्री सिंह का मुख्यालय मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पटना (अनीसाबाद) का कार्यालय निर्धारित किया जाता है। (6) निलंबन अवधि में श्री सिंह को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। (7) विभागीय कार्यवाही का संकल्प अलग से निर्गत किया जा रहा है। (8) अवर सचिव (श्री अंजनी कुमार सिंह) प्रबंधन कोषांग, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को निदेश दिया जाता है कि निगरानी विभाग से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन के आधार पर श्री प्रेम प्रकाश सिंह, कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व संबंधित थाने में घोर कदाचार, अनियमितता, हेरा-फेरी एवं जालसाजी के लिए प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
——— 1 जुलाई 2010 सं॰ 22/नि0सि0(गया)-17ए-05/2008/988—श्री जय किशोर सिंह, आई0 डी0 सं0 2143 कार्यपालक अभियन्ता (चालू प्रभार) निलंबित सम्प्रति मुख्यालय मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, पटना में पदस्थापित को विभागीय अधिसूचना सं0-224 दिनांक 1 अप्रील 2009 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9 के अन्तर्गत निलंबित करते हए उक्त नियमावली के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी हैं। इसी क्रम में श्री सिंह, कार्यपालक अभियन्ता (चालू प्रभार) निलंबित द्वारा विभाग में अभ्यावेदन समर्पित करते हुए जीवन निर्वाह भत्ता की राशि बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। श्री सिंह से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के भााग-4 की कंडिका 10(1) के तहत तत्काल देय 50 प्रतिशत जीवन निर्वाह भत्ता को बढ़ाकर 75 प्रतिशत देने का निर्णय लिया गया है। उक्त केआलोक में श्री सिंह को देय जीवन निर्वाह भत्त को जून 2010 से 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया जाता है।18 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 उक्त निर्णय श्री सिंह को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण तिवारी, उप-सचिव ।
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12 जुलाई 2010
सं॰ 22/नि0सि0(जम0)-12-12/2005/1025—श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन, कार्यपालक अभियन्ता, खरकई नहर प्रमण्डल, राजनगर सम्प्रति जल संसाधन विभाग, बिहार के अधीन पदस्थापित के विरूद्व उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन अवधि में निविदा सूचना सं0-1/2003-04 को बिना सक्षम पदाधिकारी से अनुमति प्राप्त किए हुए तोड़कर निविदा निकालने, इसके बिक्री हेतु अंचल कार्यालय एवं मुख्य अभियन्ता कार्यालय नहीं भेजे जाने, सहायक अभियन्ताओं/कनीय अभियन्ताओं/ कर्मचारियों का वेतन लंबित रखने, प्रोन्नति के लाभों का भुगतान में शिथिलता बरते जाने एवं सरकारी आवास में रहते हुए आवास भत्ता लेने की अनियमितता पाये जाने के उपरान्त जल संसाधन विभाग, झारखण्ड के पत्रांक 1274 दिनांक 31 मार्च 2005 एवं पत्रांक 3722 दिनांक 17 सितम्बर 2005 द्वारा आरोप पत्र गठित कर उसे संलग्न कर भेजते हुए अनुशासनिक कारवाई करने हेतु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना से अनुरोध किया गया। जल संसाधन विभाग, झारखण्ड से प्राप्त आरोप पत्र के आलोक में सरकार के स्तर पर मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त श्री चौधरी के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत कारवाई करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 744 दिनांक 15.7.2006 द्वारा आरोप पत्र एवं विभागीय पत्रांक-998 दिनांक 24 अक्तूबर 2007 द्वारा पूरक आरोप पत्र भेजते हुए श्री चौधरी, तत्कालीन, कार्यपालक अभियन्ता, खरकई नहर प्रमण्डल, राजनगर से स्पष्टीकरण पूछा गया। इनके विरूद्व मुख्य रूप से निम्नांकित आरोप गठित किए गये ।
1. (क) खरकई नहर प्रमण्डल, राजनगर में पदस्थापन काल में श्री चौधरी द्वारा सहायक अभियन्ता/कनीय अभियन्ता एवं कर्मचारियों का वेतन अधिकांश मामले में बिना कारण बताए एक लम्बे अर्से तक लंबित रखने के बाद भुगतान किया गया। अधिकांश मामलों में न तो भुगतान लंबित रखने का प्रायोजन अंकित किया गया और न ही पुनः भुगतान किए जाने का कारण ।
(ख) श्री चौधरी कार्यपालक अभियन्ता द्वारा उक्त प्रमण्डल के कर्मचारियों के प्रोन्नति के लाभ का भुगतान करने में त्वरित कारवाई नहीं की गई बल्कि शिथिलता बरती गयी ।
2. खरकई नहर प्रमण्डल, राजनगर में कार्यपालक अभियन्ता के पद पर पदस्थापन अवधि में निविदा सूचना सं0-1/2003-04 के द्वारा राजनगर शिविर कार्यालय भवनों की मरम्मति एवं सम्पोषण कार्यो हेतु रूपये 1,96,345 (एक लाख छियानवें हजार तीन सौ पैतालीस) रूपये मात्र की स्वीकृत प्राक्कलन एवं परिमाण विपत्र को बिना सक्षम पदाधिकारी से स्वीकृति प्राप्त किये हुए तोड़कर निविदा निकाली गयी । साथ ही परिमाण विपत्र भी बिक्री हेतु अंचल कार्यालय/मुख्य अभियन्ता कार्यालय को उनके द्वारा नही भेजा गया। iwjd vkjksi%&
श्री चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, खरकई नहर प्रमण्डल, राजनगर द्वारा सरकारी आवास में रहते हुए निर्धारित मकान भाड़ा की कटौती नहीं करने एवं उनके मुख्यालय में दैनिक विश्राम आवास भत्ता के रूप मेें 3867 रूपये एवं 6696 रूपये मकान भाड़ा के रूप में अधिकाई राशि प्राप्त किया गया ।
विभाग द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण के आलोक में श्री चौधरी द्वारा अपना स्पष्टीकरण विभाग मे समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई । समीक्षा के क्रम में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में निम्न तथ्य दिया गया ।
1. अधीनस्थ कर्मचारियों का वेतन एक साथ न देकर अलग-अलग भुगतान किया गया क्योंकि उपस्थिति विवरणी समय पर प्राप्त नहीं हुआ।
2. जैसे-जैसे संचिका उपस्थापित हुई वेसे-वैसे ए0 सी0 पी0 का भुगतान किया गया। 3. आवासीय स्थिति जर्जर थीं। अप्रील,2004 से आवास भत्ता नहीं लिया गया है।
समीक्षोपरान्त पाया गया है कि श्री चौधरी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में दिया गया तर्क सही नहीं है। कार्यालय भवन न होने के कारण अपने कार्यालय के अधिनस्थ कर्मियों के वेतनादि के मामले में उन्हें संवेदनशील रहना चाहिए था। 196,345 रूपये मात्र के स्वीकृत प्राक्कलन एवं परिमाण विपत्र को तोड़कर निविदा निकालने एवं सक्षम पदाधिकारी से स्वीकृति नहीं लेने के आरोप के लिए श्री चौधरी द्वारा कोई तर्क नहीं दिया गया हैं परिमाण विपत्र बिक्री हेतु अंचल कार्यालय एवं मुख्य अभियन्ता कार्यालय नहीं भेजने का भी औचित्य नहीं दर्शाया गया है। सरकारी आवास में रहते हुए निर्धारित मकान भाड़ा की कटौती नहीं करने के संबंध में स्वीकार किया गया है कि अप्रील, 2004 के पूर्व आवास भत्ता लिया गया है। समीक्षोपरान्त श्री चौधरी के विरूद्व गठित आरोप प्रमाणित पाये गये। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा विभागीय अधिसूचना सं0-753 दिनांक 5 सितम्बर 2008 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया हैः-
1. निन्दन वर्ष 2003-04 2. पॅाच वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक । 3. 10,563/- ( दस हजार पॅाच सौ तिरसठ रूपये ) की वसूली ।19 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 2. उक्त दंडादेश, अधिसूचना दिनांक 5 सितम्बर 2008 के विरूद्व श्री चौधरी द्वारा महामहिम राज्यपाल, बिहार को सम्बोधित अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक् समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने अपील अभ्यावेदन में जिन विन्दुओं का उल्लेख किया गया है उसपर सरकार द्वारा पूर्व में समीक्षा की जा चुकी है एवं उनके विरूद्व आरोपों को प्रमाणित पाकर ही उक्त वर्णित दंड संसूचित किये गये हैं। इनके द्वारा अपील अभ्यावेदन में कोई नया साक्ष्य या तथ्य नहीं दिया गया है, जिसपर पुनर्विचार किया जा सके। समीक्षोपरान्त यह भी पाया गया कि इनका अपील अभ्यावेदन कालबाधित भी है। वर्णित स्थिति में इनका अपील अभ्यावेदन अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है।
श्री चौधरी के अपील अभ्यावेदन दिनांक 31 दिसम्बर 2008 को अस्वीकृत करने के प्रस्ताव पर मंत्रीपरिषद की स्वीकृति प्राप्त की गयी। महामहिम राज्यपाल, बिहार द्वारा श्री चौधरी के उक्त अपील अभ्यावेदन को मंत्रिपरिषद की सलाह पर खारीज करने की कृपा की गयी है।
तदनुसार उक्त निर्णय श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, खरकई नहर प्रमण्डल, राजनगर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
——— 16 जुलाई 2010 सं॰ 22/नि0सि0(मुक0) ल0 सिं0-19-10/2007/1059—श्री रधुबीर झा, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, नलकूप अवर प्रमण्डल, सासाराम के विरूद्व उनके उक्त पदस्थापन अवधि में बरती गयी वित्तीय अनियमितता सक्षमता के बाहर जाकर नियम विरूद्व व्यय करने आदि आरोपों के लिये लधु, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प सं0-1413 दिनांक 3 अप्रील 1992 यथा संशोधित संकल्प ज्ञापांक-6736 दिनांक 15 अक्तूबर 1999 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के निाम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। (2) उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरान्त, लधु, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-2088 दिनांक 11 मई 2004 द्वारा श्री झा से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। स्मारित किये जाने के बावजूद श्री झा से द्वितीय कारण पृच्छा का उतर प्राप्त नहीं हुआ। (3) इसी बीच में श्री झा के दिनांक 31 जुलाई 2004 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप मामले की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर किये जाने के उ परान्त श्री झा के विरूद्व संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत जारी रखते हुए उनके विरूद्व प्रमाणित आरोपों के लिये ''शत प्रतिशत पेंशन एवं उपादान पर सदा के लिये रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया एवं इस आशय हेतु श्री झा से पुनः लधु, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-5019 दिनांक 19 अक्तूबर 2004 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। उक्त द्वितीय कारण पृच्छा के संबंध में श्री झा को एक पक्ष के अन्दर अपना पक्ष रखने हेतु निदेशित किया गया साथ ही यह भी अंकित किया गया कि निर्धारित अवधि के अन्दर अगर उनका जबाब प्राप्त नहीं होगा तो यह समझा जायेगा कि उन्हें इस संदर्भ में कुछ नहीं कहना है और सरकार एक पक्षीय निर्णय के लिये स्वतंत्र होगा। (4) निर्धारित अवधि के समाप्त हो जाने के उपरान्त भी श्री झा से द्वितीय कारण पृच्छा का जबाब प्रापत नहीं होने पर मामले की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त श्री झा के विरूद्व एक अग्रिम लंबित रहते हुए नियम विरूद्व दूसरा अग्रिम प्राप्त करने रूपये 9,10,365.72/- का अग्रिम प्राप्त कर छोटे-छोटे वाउचरों, लेटर पैडों पर विपत्र बनाकर नियम विरूद्व व्यय एवं भुगतान बिना निविदा एवं एकरारनामा के किये जाने, भण्डार लेखा एवं संयंत्र लेखा का निमानुसार संधारण एवं सत्यापन नहीं किये जाने के आरोपों को प्रमाणित पाया गया। फलतः श्री झा को लधु जल संसाधन विभाग के आदेश सं0-299 सह पठित ज्ञापांक-5718 दिनांक 7 दिसम्बर 2004 द्वारा शत प्रतिशत पेंशन एवं उपादान पर सदा के लिये रोक का दण्ड संसूचित किया गया। (5) श्री झा द्वारा लधु, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के उक्त आदेश के विरूद्व दायर वाद, सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-11821/03 रधुवीर झा बनाम राज्य सरकार एवं अन्य के मामले में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 8 अगस्त 2006 को पारित न्यायादेश द्वारा लधु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा श्री झा को संसूचित दण्ड आदेश सं0-299 सह पठित ज्ञापांक-5718 दिनांक 7 दिसम्बर 2004 को निरस्त कर दिया गया एवं श्री झा द्वारा दाखिल किये जानेवाले अभ्यावेदन पर आयुक्त एवं सचिव, जल संसाधन विभाग को सुनवाई करने का आदेश दिया गया।
(6) माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-11821/03 रधुवीर झा बनाम राज्य सरकार एवं अन्य के मामले में दिनांक 8 अगस्त 2006 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री झा के दिनांक 11 जनवरी 2007 के लिखित अभ्यावेदन पर दिनांक 24 जनवरी 2007 को आयुक्त एवं सचिव, जल संसाधन विभाग द्वारा सुनवाई की गयी एवं सुनवाई के उपरान्त विभागीय तार्किक आदेश सं0-17 दिनांक 27 फरवरी 2007 द्वारा श्री झा के अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए लधु, जल संसाधन विभाग के आदेश सं0-299 सह पठित ज्ञापांक-5718 दिनांक 7 दिसम्बर 2004 द्वारा उनके विरूद्व संसूचित दण्ड को यथावत् रखने का निर्णय लिया गया। उक्त तार्किक आदेश सं0-17 दिनांक 27 फरवरी 2007 विभागीय ज्ञापांक-170 दिनांक 27 फरवरी 2007 द्वारा श्री झा को संसूचित किया गया।20 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 (7) श्री झा द्वारा उक्त विभागीय तार्किक आदेश सं0-17 दिनाक 27 फरवरी 2007 के विरूद्व माननीय उच्च न्यायालय पटना में वाद सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-3677/07 रघुवीर झा बनाम राज्य सरकार एवं अन्य दायर किया गया जिसमें दिनांक 16 फरवरी 2010 यथा संशोधित दिनांक 8 मार्च 2010 को पारित न्यायादेश द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा लधु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के आदेश सं0-299 सह पठित ज्ञापांक-5718 दिनांक 7 दिसम्बर 2004 एवं विभागीय तार्किक आदेश सं0-17 दिनांक 27 फरवरी 2007 को निरस्त करते हुए श्री झा को पूर्ण पेंशन एवं उपादान प्रदान करने का निर्देश दिया गया।
(8) माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-3677/07 रघुवीर झा बनाम राज्य सरकार एवं अन्य के मामलें में पारित उक्त न्याय निर्णय के अनुपालन में सरकार द्वारा लधु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के आदेश सं0-299 सह पठित ज्ञापांक-5718 दिनांक 7 दिसम्बर 2004 एवं विभागीय तार्किक आदेश 17 दिनांक 27 फरवरी 2007 को निरस्त करते हुए श्री झा को पूर्ण पेंशन एवं उपादान प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान करने का निर्णय लिया गया हैं। उक्त निर्णय श्री रधुवीर झा, तत्कालीन सहायक अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।
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20 जुलाई 2010
सं॰ 22/नि0सि0 (विभा0)-3-1014/89/1069—निदेशक क्रय एवं परिवहन, सिंचाई विभाग, पटना के आदेश सं0-1000 दिनांक 21 सितम्बर 1982 द्वारा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, मनेर के लिए 1300 मे0 टन सिमेंट रोहतास इन्डस्ट्रीज लिमिटेड एक्जीवीशन रोड, पटना को डालमियानगर से रेलवे बैगन द्वारा आपूर्ति करने का आदेश दिया गया, जिसके लिए श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता, सोन बाढ़ सुरक्षा अवर प्रमण्डल, कटेशर को कन्साईनी बनाया गया। परिस्थिति जन्य कारणों से मुख्य अभियन्ता, सिंचाई, पटना द्वारा दिनांक 4 फरवरी 1983 से 15 फरवरी 1983 के बीच 20 ट्रक यानि 240 मे0 टन सीमेंट ट्रक से ढुलाई करने का आदेश दिया गया। श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता ने अधीनस्थ कनीय अभियन्ता श्री नरेन्द्र कुमार सिंह को सड़क द्वारा सीमेंट ढुलाई का भार सौंपा। फरवरी 83 एवं मार्च 83 के लेखानुसार उन्होंने दिनांक 6 फरवरी 1983 से 15 मार्च 1983 के बीच 264 मे0 टन सीमेंट का ढुलाई किया। इस प्रकार उच्चाधिकारी के आदेश को अनदेखी कर 24 मे0 टन सीमेंट अधिक ढुलाई किया गया और वस्तु स्थिति से उच्चाधिकारी को भी अवगत नहीं कराया गया।
कार्यपालक अभियन्ता, सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, मनेर को सीमेंट की ढुलाई में गड़बड़ी की आशंका हुई। उन्होंने रोहतास इन्डस्ट्रीज एक्जीवीशन रोड, पटना के कार्यालय में जाकर स्वयं स्थिति की जानकारी ली। रोहतास इन्डस्ड्रीज के कार्यालय से प्राप्त सूचनानुसार दिनांक 7 फरवरी 1983 से 30 मार्च 1983 के बीच कुल 422 मे0 टन सीमेंट सड़क मार्ग से ढुलाई 35 ट्रको से कर ली गयी थी, जबकि फरवरी/मार्च 83 के लेखा में मात्र 264 मे0 टन सीमेंट ही दर्शाया गया था। इस प्रकार 422-264=158 मे0 टन सीमेंट का गोलमाल किया गया। कार्यपालक अभियन्ता द्वारा दो बार स्पष्टीकरण पूछने पर इनके द्वारा जबाब नहीं दिया गया।
कार्यपालक अभियन्ता, जल पथ प्रमंडल जहानाबाद में अपने पत्रांक-64 दिनांक 31 जनवरी 1983 द्वारा कार्यपालक अभियन्ता सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, मनेर से 4,000 बोरा सिंमेंन्ट स्थानान्तरित करने का अनुरोध किया। अधीक्षण अभियन्ता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा अंचल, पटना के आदेश के आलोक में कार्यपालक अभियन्ता, सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, मनेर ने श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता को भुगतान प्राप्ति के पश्चात प्राधिकृत पदाधिकारी को हस्तरसीद पर 4,000 बोरा सीमेंट हस्तान्तरित करने का आदेश दिया। तदनुसार सीमेंट प्राप्ति हेतु प्राधिकृत कनीय अभियन्ता श्री निजामुद्वीन द्वारा दिनांक 7 फरवरी 1983 से 720 बोरा सीमेंट हस्तरसीद पर प्रभारी कनीय अभियन्ता श्री नरेन्द्र्र कुमार सिंह से प्राप्त किया तथा शेष सीमेंट के लिए श्री सिंह से कस्टडी स्लीप प्राप्त कर सीमेंट गोदाम में ही छोड़ दिया। उक्त कस्टडी स्लीप के विरुद्ध पुनः श्री सिंह, कनीय अभियन्ता ने दो ट्रक सीमेंट (240 बोरा प्रत्येक ट्रक) जहानाबाद भेजवाया। इस प्रकार जल पथ प्रमण्डल, जहानाबाद को 720240240=1300 बोरा सीमेंट प्राप्त हुआ जबकि 240 बोरा सीमेंट के एक हस्तरसीद में ''3'' जोड़कर उसे 3,240 बोरा सीमेंट निर्गत दर्शाया गया तथा 240 बोरा का एक हस्तरसीद गायब कर दिया गया। इस प्रकार जल पथ प्रमण्डल, जहानाबाद को (200 बोरा सीमेंट के बदलेें 7203240=3960) जानकारी रहते हुए भी श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता अनभिज्ञ बने रहे तथा वास्तविक तथ्योे से उच्चाधिकारियों को अवगत तक नहीं कराया।
कार्यपालक अभियन्ता, सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, मनेर 7 सितम्बर 1983 को निरीक्षण करने गये तो श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह उपस्थित नहीं थे। गोदाम का खुद भी निरीक्षण नहीं किये और किये गये भौतिक सत्यापन में मात्र 163 बोरा सीमेंट पाया गया।
उपर्युक्त सभी अभियन्ताओं के सबंध में मुख्य अभियन्ता, पटना से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर हुई। सीमेंट गोलमाल के मामले में श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता को प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय आदेश सं0-1251 दिनांक 25 जुलाई 1984 द्वारा निलंबित कर विभागीय संकल्प ज्ञाप सं0-1881 दिनांक 24 नवम्बर 1984 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता को कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के निहित प्रावधान के आलोक में निलंबन अवधि दो वर्ष पूरा होने के फलस्वरूप विभागीय आदेश सं0-51921 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 दिनांक 10 सितम्बर 1986 द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। विभागीय कार्यवाही में संंचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर हुई। समीक्षोपरान्त श्री सिंह, सहायक अभियनता के विरूद्व प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय से अवगत कराते हुए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक 1123 दिनांक 18 अप्रील 1994 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया। उनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर हुईं समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप प्रमाणित पाया गयाः-
(क) डालमियानगर फैक्ट्री से 7 फरवरी 1983 से 30 मार्च 1983 के बीच 158 मे0 टन सीमेंट के गबन में इनकी कनीय अभियन्ता से मिली भगत थी एवं इस तरह इन्होंने अपने कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व का उचित निर्वहन में लापरवाही बरती, इस गबन की जानकारी पॅाच महीने के बाद हुई। श्री सिंह द्वारा नहीं बल्कि कार्यपालक अभियन्ता द्वारा इसका उद्भेदन किया गया।
(ख) श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह को कनीय अभियन्ता के द्वारा सीमेंट गबन किये जाने की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने इसकी उचित छान-बीन कर उच्चाधिकारियों को सूचना नहीं दी जो उनके उत्तरदायित्व के निर्वहन में लापारवाही का द्योतक है और गबन में इनकी मिलीभगत का सूचक है।
(ग) इन्होंने अपने कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व का उचित निर्वहन नहीं किया तथा इनका स्टोर पर उचित आवश्यक नियंत्रण नहीं था जिस कारण श्री नरेन्द्र कुमार सिंह, कनीय अभियन्ता द्वारा जल पथ प्रमण्डल, जहानाबाद को 138 मे0 टन सीमेंट स्थानान्तरित न कर गबन करने में सफल हुए एवं 163 बोरा सेट सीमेंट के लिए भी दोषी है।
(घ) अतः 158 मे0 टन138 मे0 टन सीमेंट के गबन में श्री नरेन्द्र कुमार सिंह, कनीय अभियन्ता के साथ इनकी पूर्ण सहभागिता रही है।
उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह सहायक अभियन्ता को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता की सेवा से बर्खास्तगी हेतु बिहार लोक सेवा आयोग, पटना एवं मंत्रिपरिषद की सहमति प्राप्त है।
उक्त के आलोक में विभागीय आदेश सं0 163-सह-पठित ज्ञाप सं0-876 दिनांक 12 जून 2000 द्वारा श्री सिंह को निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-
(1) श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता, सहायक अभियन्ता वरीयता क्रमांक 1483, आई0डी0-102 को सेवा से बर्खास्त किया जाता है।
(2) निलंबन अवधि 15 जुलाई 1984 से 10 सितम्बर 1986 में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा। उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री सिंह द्वारा दिनांक 12 जून 2000 दायर सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-8669/2000 में दिनांक 15 मार्च 2001 द्वारा पारित आदेश से श्री सिंह, सहायक अभियन्ता को अपील दायर करने हेतु निदेश दिया गया। श्री सिंह से प्राप्त अपील अभ्यावेदन को माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा आदेश सं0-326 दिनांक 11 मार्च 2003 द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। पुनः श्री सिंह द्वारा माननीय राज्यपाल को सीधे अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसे माननीय राज्यपाल द्वारा पुनः पत्रांक-1597 दिनांक 22 दिसम्बर 2005 द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया।।
इस बीच प्रथम अपील की अस्वीकृति के विरूद्व श्री सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में एक अन्य याचिका 4826/03 दायर की गयी थी, जिसे 9 जनवरी 2006 को पारित आदेश के बाद खारिज कर दिया गया था। उक्त के विरूद्व वादी द्वारा दायर एल0 पी0 ए0 सं0-1165/06 में दिनांक 28 अप्रील 2010 को पारित न्याय निर्णय के द्वारा विभाग द्वारा दिये गये दण्ड को काफी कठोर मानते हुए निरस्त कर दिया गया एवं विभाग को ही मामला यथोचित दंड देने के लिए वापस कर दिया गया है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया में कोई त्रुटि नहीं है मात्र Quantum of punishment पर टिप्पणी करते हुए दंड संसूचित करने का निदेश हैं साथ ही माननीय उच्च न्यायालय द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि वादी का दण्ड अगर कम किया जाता है तो उनके द्वारा बर्खास्तगी की तिथि से वास्तविक सेवानिवृति की तिथि 12 जून 2000 से 30 नवम्बर 2004 तक का वेतनादि का भुगतान नहीं किया जायेगा परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशनादि हेतु की जायेगी।
मााननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निदेश एवं श्री सिंह के सेवानिवृति को ध्यान में रखते हुए आरोपी पदाधिकारी पर सभी प्रमाणित आरोप में उन्हें कार्य के प्रति उदासीन एवं लापारवाह होना ही पाया गया है, परन्तु किये गये गबन में सीधे सीधे इनकी साहभागिता प्रमाणित नहीं होने के कारण पूर्व में संसूचित दण्ड के अनुरूप निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः-
(1) निलंबन अवधि में मात्र जीवन निर्वाह भत्ता परन्तु इस अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी। (2) दिनांक 12 जून 2000 से 30 नवम्बर 2004 तक कुल 53 माह का वेतनादि भुगतान नहीं किया जायेगा परन्तु इस अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी।
(3) सेट सीमेंट के लिए दोषी पाये जाने के कारण पेंशन से 3200 रूपये की वसूली। उक्त निर्णय श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।22 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 28 जुलाई 2010 सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-1-04/2006/1101—कटिहार जिलान्तर्गत अमदाबाद प्रखण्ड के रौशना से गोविन्दपुर बॅाध तक पक्की सड़क निर्माण में घोर अनियमितता बरतने संबंधी आरोपों की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता से कराई गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरान्त श्री रमेश कुमार वर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल कटिहार के विरुद्ध निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गयाः- (1) बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल कटिहार अन्तर्गत अमदाबाद प्रखण्ड के रौशना से गोविन्दपुुर बॅाध तक (लाभा चौकिया पहाड़पुर महानन्दा दायॅा तटबंध) पक्की सड़क निर्माण कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन एवं एकरारनामा के मद सं0-1(4) के अन्तर्गत यांत्रिक विधि से मिट्टी ढुलाई (150 से 1/2 कि0मी0) हेतु मुख्य अभियन्ता से लीड प्लान की स्वीकृति के बगैर पॅाचवे एवं छठे चालू विपत्र विपत्र के माध्यम से कुल रूपया 4,65,735 का अनियमित भुगतान के आप दोषी है। उक्त आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1272 दिनांक 11 दिसम्बर 2006 द्वारा श्री रमेश कुमार वर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। विभागीय कार्यवाही में जॅाच पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के सतर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरानत पाया गया कि कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन एवं एकररारनामा के मद सं0-1(4) के अन्तर्गत यांत्रिक विधि से मिट्टी ढुलाई (150 से 1/2 कि0मी0) हेतु मुख्य अभियन्ता से लीड प्लान की स्वीकृति के बगैर पॅाचने एवं छठे चालु विपत्र के माध्यम से अनियमित भूगतान के लिए श्री वर्मा दोषी है। जिसकी स्वीकृति श्री वर्मा द्वारा अपने बचाव बयान में किया गया है एवं जॅाच पदाधिकारी द्वारा जॅाच प्रतिवेदन में भी इसकी चर्चा की गई है। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री वर्मा, कार्यपालक अभियन्ता को निम्न दण्ड प्रस्तावित करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा करने का निर्णय लिया गयाः- (1) चेतावनी वर्ष 2004-05 (2) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्वि पर रोक सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 1409 दिनांक 3 दिसम्बर 2009 द्वारा श्री वर्मा से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री वर्मा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त पाया गया कि प्रथम चार चालू विपत्रों का भुगतान प्रमण्डल में पदस्थापित मूल कार्यपालक अभियन्ता द्वारा किया गया तथा श्री वर्मा जो इस प्रमण्डल में कार्यपालक अभियन्ता के अतिरिक्त प्रभार में थे के द्वारा सही तथ्यों की जानकारी के अभाव में पॅाचवे एवं छठे विपत्र का भुगतान किया गया। यह भी पाया गया कि श्री वर्मा द्वारा कराये गये कार्यो के विरूद्व ही भुगतान किया गया है। अतः पूर्व में प्रस्तावित दण्ड में संशोधन करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया हैः- (1) चेतावनी वर्ष 2004-05 (2) एक वेतनवृद्वि पर असचयात्मक प्रभाव से रोक। सरकार का उक्त निर्णय श्री रमेश कुमार वर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
——— 16 अगस्त 2010 सं॰ 22/नि0सि0(विभा0)-14-162/89/1174—श्री शशि भूषण सिंह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता (तदर्थ रूप से नियुक्त) सोन नहर अंचल को अपने वरीय/ कनीय पदाधिकारियों से झगड़ा करने अवांछित, असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर कार्यालय में हल्ला करवाने, अमर्यादित व्यवहार करने, सरकारी आदेशों की अवहेलना करने, उच्चाधिकारियों को धमकी देने आदि जैसे गंभीर प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हें विभागीय आदेश सं0-127 दिनांक 8 अप्रील 1993-सह-पठित ज्ञापांक-717 दिनांक 8 अप्रील 1993 द्वारा इन्हें सेवा से विमुक्त किया गया। उपर्युक्त विभागीय आदेश के विरूद्व श्री सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0जे0सी0 सं0-7916/97 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक 11 नवम्बर 1997 के द्वारा विभागीय आदेश सं0-127 दिनांक 8 अप्रील 1993-सह-पठित ज्ञापांक-717 दिनांक 8 अप्रील 1993 द्वारा दण्डादेश को निरस्त कर दिया गया तथा श्री सिंह को विभागीय कार्यवाही की प्रतिलिपि उपलब्ध कराते हुए द्वितीय कारण पृच्छा करने एवं पृच्छा का उतर की समीक्षोपरान्त अंतिम निर्णय लेने का आदेश पारित किया गया। उक्त न्याय निर्णय में पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश सं0-1137 दिनांक 25 नवम्बर 1997 द्वारा पूर्व में निर्गत दण्डादेश को निरस्त करते हुए उन्हें सेवा में पुर्नस्थापित किया गया तथा विभागीय पत्रांक 3331 दिनांक 12 दिसम्बर 1997 द्वारा विभागीय कार्यवाही की प्रति उपलब्ध कराते हुए उनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।23 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 श्री शशि भूषण सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं निम्नांकित आरोप प्रमाणित पाये गयेः- (1) विभागीय उच्चाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करना। (2) असामाजिक तत्वों से मिलकर उनके द्वारा वरीय/कनीय पदाधिकारियों पर अनुचित दबाब डलवाना। (3) सरकारी आदेशों का उल्लंधन करना, मुख्य अभियन्ता की मासिक बैठक में कार्यपालक अभियन्ता के साथ गाली गलौज करना तथा उनके निवास पर जाकर धमकी देना आदि। श्री सिंह द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में लगभग वही बातो को दुहराया है जो विभागीय कार्यवाही में उनके द्वारा लिखित बयान देते समय कही गयी थी। अतः विभागीय कार्यवाही में जॅाच पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होने का कोई कारण नहीं बनता है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि श्री शशि भूषण सिंह, सहायक अभियन्ता सम्प्रति सेवा से बर्खास्त का आचरण सरकारी सेवक आचार नियमावली के विरूद्ध है। ऐसे अनुशासनहीन, गैर जबावदेह असामाजिक तत्वों से सांठ-गांठ रखने वाले सरकारी सेवक के लोकहित में सरकारी सेवा में बरकरार रखना उचित नहीं मानते हुए विभागीय अधिसूचना सं0 2481 दिनांक 2 सितम्बर 1998 द्वारा श्री सिंह को सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड संसूचित किया गया। उक्त बर्खास्तगी दण्ड के विरूद्व श्री शशि भूषण सिंह (सेवा से बर्खास्त) सहायक अभियंता द्वारा महामहिम राज्यपाल महोदय के समक्ष एक अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। महामहिम राज्यपाल सचिवालय, बिहार राजभवन, पटना के पत्रांक 1717 दिनांक 28 अप्रील 2009 द्वारा उक्त अभ्यावेदन प्रघान सचिव, जल संसाधन विभाग को अग्रसारित करते हुए यह निदेश दिया गया कि मंत्रिपरिषद की सहमति प्राप्त कर पुनः महामहिम राज्यपाल सचिवालय को भेजा जाए। श्री शशि भूषण सिंह ( सेवा से बर्खास्त) सहायक अभियन्ता को अधिसूचना सं0-2481 दिनांक 2 सितम्बर 1998 द्वारा संसूचित सेवा बर्खास्तगी दण्ड के विरूद्ध समर्पित श्री सिंह को अपील अभ्यावेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं श्री सिंह के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में निर्गत सेवा से बर्खास्तगी के दण्ड को यथावत रखने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में ज्ञापांक-1040 दिनांक 9 अक्तूबर 2009 द्वारा संलेख मंत्रिपरिषद के अनुमोदनार्थ मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग को भेजी गयी। उक्त संलेख में निहित प्रस्ताव दिनांक 21 अक्तूबर 2009 में मद सं0-4 के रूप में मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत किया गया। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के उपरान्त विभागीय पत्रांक 1180 दिनांक 2 नवम्बर 2009 द्वारा महामहिम राज्यपाल सचिवालय की सहमति हेतु भेजी गयी। महामहिम राज्यपाल सचिवालय के पत्रांक 1390 दिनांक 13 अप्रील 2010 द्वारा श्री सिंह के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने संबंधी निर्णय विभाग को संसूचित किया गया है। अतः उक्त के आलोक में श्री शशि भूषण सिंह (सेवा से बर्खास्त) सहायक अभियन्ता को विभागीय अधिसूचना सं0-2481 दिनांक 2 सितम्बर 1998 द्वारा सेवा से बर्खास्तगी दण्ड के विरूद्व श्री सिंह द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने संबंधी सरकार को निर्णय श्री सिंह का संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।
——— 17 अगस्त 2010 सं॰ 22/नि0सि0(औ0)-17-04/2000/1191—श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमण्डल, औरंगाबाद द्वारा उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन अवधि में पूर्वी लिंक नहर एवं पटना मुख्य नहर के 0.00 मील से 6.00 मील एवं 13 मील से 21 मील तक सेवापथ पर पक्की रोड के निर्माण एवं पूर्वी सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमण्डल, औरंगाबाद के अन्तर्गत बारून शिविर में निर्मित चाहारदीवारी के निर्माण कार्यो में बरती गयी अनियमितता की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरापों के लिए विभागीय संकल्प सं0-1589 दिनांक 24 अगस्त 2001 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 637 दिनांक 13 अक्तूबर 2006 से जॅाच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं जॅाच पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन के निम्न विन्दुओं पर असहमति व्यक्त करते हुए विभागीय पत्रांक 678 दिनांक 20 अगस्त 2008 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी :- (1) जॅाच पदाधिकारी द्वारा आरोप सं0-4 प्रमाणित नहीं पाया गया है, परन्तु आरोप में उल्लेखित क्षति की राशि रूपया 11.23 लाख की गणना गलत बताते हुए मात्र 1.22 लाख रूपये बताया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि शिविर के चाहारदीवारी के अॅाधी में ध्वस्त हो जाने के बाद बिना उसका पुनर्निमाण कराये दिनांक 20 जून 2000 को मापी अंकित करने एवं दिनांक 10 जुलाई 2000 को भुगतान करके सरकार को 11.23 लाख रूपये की जगह 1.22 लाख रूपये की क्षति पहुचायी गयी है। (2) आरोप सं0-5 जो सिमेंट के गुणवत्ता के प्रतिवेदन के स्टै्रंप में कमी पाये जाने के बावजूद भी सीमेंट आपूर्तिकत्र्ता को वापस नहीं करके उसी सीमेंट से कार्य कराने से संबंधित है, संबंध में जॅाच पदाधिकारी द्वारा सिमेंट की गुणवत्ता की जॅाच प्रतिवेदन कार्य समाप्ति के पश्चात प्रमण्डल को प्राप्त हुआ के फलस्वरूप आरोप प्रमाणित पाया गया है,24 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 परन्तु वस्तुतः सीमेंट की गुणवत्ता में कमी पायी गयी और उनके द्वारा आपूर्तिकत्र्ता के विरूद्व कोई कार्रवाई नहीं की गयी। अतः यह आरोप प्रमाणित है। उक्त द्वितीय कारण पृच्छा के क्रम में श्री दास, कार्यपालक अभियन्ता द्वारा दिनांक 21 अगस्त 2008 को समर्पित जबाव की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरान्त पाया गया कि जॅाच पदाधिकारी ने भी क्षति की राशि की गणना में त्रुटि बताते हुए 1.22 लाख रूपये की क्षति की बात कही है साथ ही सीमेंट की गुणवत्ता का रिपोर्ट योजना पूर्ण होने के बाद प्राप्त होना आरोप मुक्त नहीं करता है, यह प्रमाणित करता है कि योजना में घटिया सीमेंट का उपयोग हुआ है। (3) अतः उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमण्डल, औरंगाबाद को योजना के कार्यान्वयन में अपने दायित्व के निर्वहन में गंभीर अनियमितता बरतने सरकार को वित्तीय क्षति पहुॅचाने जैसे आरोप के लिए अधिसूचना सं0-288 दिनांक 9 अप्रील 2009 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित किया गया :- (क) ''निन्दन'' वर्ष 1999-2000 (ख) दो वेतनवृद्वि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (4) उपर्युक्त अधिसूचना सं0-288 दिनांक 9 अप्रील 2009 द्वारा अधिरोपित दण्ड के विरूद्व श्री विनोद कुमार दास, कार्यपालक अभियन्ता द्वारा महामहिम राज्यपाल, बिहार, पटना के समक्ष अपील अभ्यावेदन दायर किया गया। महामहिम राज्पाल सचिवालय, राजभवन, पटना के पत्रांक 4673 दिनांक 14 दिसम्बर 2009 द्वारा उक्त अपीलीय अभ्यावेदन पर मंत्रिपरिषद का परामर्श प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजने का निदेश दिया गया। श्री दास द्वारा महामहिम राज्यपाल, बिहार, पटना को समर्पित अपील अभ्यावेदन की एक प्रति विभाग को भी दिनांक 26 मई 2009 को समर्पित की गयी। (5) संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए विभाग द्वारा निम्न असहमति के दो विन्दुओं पर द्वितीय कारण पृच्छा की गयी :- (क) जॅाच पदाधिकारी द्वारा क्षति की गणना 11.23 लाख के स्थान पर 1.22 लाख निर्धारित की गयी इससे स्पष्ट है कि सरकार को आर्थिक क्षति हुई जिसमें मात्र राशि में भिन्नता है। (ख) सीमेंट की गुणवत्ता रिपोर्ट योजना पूर्ण होने के पश्चात प्राप्त होना आरोप मुक्त नहीं करता है। आई0 आर0 आई0, खगौल द्वारा सीमेंट के गुणवत्ता की जॅाच की गई, जिसमें सीमेंट निर्धारित मापदण्ड के अनुरूप नहीं पाया गया। योजना पूर्ण होने के उपरान्त गुणवत्ता प्रतिवेदन प्राप्त होने से कार्यपालक अभियन्ता जिम्मेवारी से मुक्त नहीं हो सकते, क्योंकि इनके द्वारा न तो आपूर्तिकत्र्ता को कालीकृत करने का प्रस्ताव दिया गया और न तो विपत्र से राशि की कटौती की गई, दीवाल के क्षतिग्रसत होने के कारण अॅाधी तूफान के स्थान पर घटिया सीमेंट का प्रयोग होना माना जा रहा है, जिसके लिए सरकार को 1.22 लाख रूपये की वित्तीय क्षति हुई, उक्त के आलोक में अपीलकत्र्ता जिम्मेवार पाये गये है। (6) श्री विनोद कुमार दास, कार्यपालक अभियन्ता द्वारा समर्पित अपीलीय अभ्यावेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त अधिसूचना सं0-288 दिनांक 9 अप्रील 2009 द्वारा अधिरोपित दण्ड (1) निन्दन वर्ष 1999-2000 एवं (2) दो वेतनवृद्वि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक को बरकरार रखते हुए अपीलीय अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। (7) महामहिम सचिवालय के पत्रांक 4673 दिनांक 14 दिसम्बर 2009 द्वारा प्राप्त निदेश के आलोक में मंत्रिपरिषद की स्वीकृति हेतु ज्ञापांक-415 दिनांक 9 मार्च 2010 द्वारा संलेख मंत्रिमंडल सचिवालय को भेजा गया जिस पर मद सं0-12 के रूप में दिनांक 23.3.10 को मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गयी। (8) महामहिम राज्यपाल सचिवालय के पत्रांक 3158 दिनांक 6 अगस्त 2010 द्वारा श्री दास के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने संबंधी निर्णय विभाग को संसूचित किया गया हैं अतः उक्त के आलोक में श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमण्डल, औरंगाबाद को विभागीय अधिसूचना सं0-288 दिनांक 9 अप्रील 2009 द्वारा संसूचित दण्ड के विरूद्व श्री दास द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने संबंधी सरकार का निर्णय श्री दास को संसूचित किया जाता हैं।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।
——— 26 अगस्त 2010 सं॰ 22/नि0सि0(सम0)-2-21/2009/1250—मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के अधीन भुतही बलान दायॅा एवं बायॅा तटबंध के सुदृढ़ीकरण एवं उच्चीकरण कार्यो की निविदा से संबंधित संवेदक ''बाबा हंस कंस्ट्रक्सन'' द्वारा जाली कार्य अनुभव प्रमाण पत्र देने संबंधी मामले की जॅाच निगरानी (त0प0 को0) विभाग द्वारा की गई। निगरानी विभाग से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गईं। सम्यक समीक्षोपरान्त निम्नांकित आरोपों के लिए श्री ओम प्रकाश सिंह, सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल सं0-1, झंझारपुर के विरूद्व विभागीय कार्यवाही चलाये जाने का निर्णय लिया गयाः- '' दिनांक 4 नवम्बर 2009 को तकनीकी बीड पर विचारार्थ बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल के अन्तर्गत बाबा हंस कंस्ट्रक्सन प्रा0 लि0 द्वारा संलग्न कार्य अनुभव प्रमाण पत्र की जॅाच संबंधित प्रमण्डल में जाकर25 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 करने हेतु कार्यपालक अभियन्ता के पत्रांक 1477 दिनांक 7 नवम्बर 2009 के द्वारा आपको प्राधिकृत किया गया। आपके द्वारा आर0 एस0 भी0 वाई0 प्रोजेक्ट डिविजन, सी0 पी0 डब्लू0 डी0, पटना के कार्यपालक अभियन्ता से ने मिलकर संवीदा के आधार पर कार्यरत कर्मी से मिलकर अनुभव प्रमाण पत्र को सही मानते हुए पत्र कार्यपालक अभियन्ता, झंझारपुर के कार्यालय में पहुॅचाया गया, जो निगरानी विभाग के जॅाच में जाली पाया गया। अतः कर्तव्यों एवं दायित्वों के समुचित निर्वहन नहीं करने हेतु दोषी।'' उक्त अरोपों के लिए श्री सिंह, सहायक अभियन्ता के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक-360 दिनाक 25 फरवरी 2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ किया गया। विभागीय कार्यवाही में जॅाच पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरूद्व आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। फलतः सरकार द्वारा श्री सिंह को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उक्त निर्णय श्री ओम प्रकाश सिंह, सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल सं0-1, झंझारपुर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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27 अगस्त 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/2004/1259—श्री एतवॅा उरॅाव, तत्कालीन अधीक्षण अभियनता, सिंचाई अंचल, खड़गपुर द्वारा पूर्व के पदस्थापन अवधि में वर्ष 1996-97 में पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल सं0-2, वीरपुर, शि0-जयनगर के अधीन कमला एवं घौरी साईफन के निविदा दस्तावेज तैयार करने में बरती गई अनियमिता के लिए उनके विरूद्व निम्नांकित आरोप गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही चलाये जाने का निर्णय लिया गयाः-
(1) कमला एवं घौरी साईफन के मूल पेंसील स्टेज में विभाग से अनुमोदित निविदा दस्तावेज में विवाचक की कंडिका सम्मिलित हुई।
(2) किसी खास संवेदक को लाभ पहुॅचाने, अपने कर्तव्य के प्रति घोर उदासिनता एवं गैर जिम्मेवारी के लिए प्रथम द्रष्ट्या दोषी ।
उक्त आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1678 दिनांक 27 फरवरी 2003 द्वारा श्री उरॅाव के विरूद्व सिविल सेवा (वर्गीगरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 1950 के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। विभागीयकार्यवाही में जॅाच पदाधिकारी द्वारा जॅाच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। तदुपरान्त प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त जॅाच पदाधिकारी के मंतव्य से निम्नांकित विन्दुओं पर असहमति व्यक्त की गई :-
'' एक अन्तराष्ट्रीय निविदा के निष्पादन में अधीक्षण अभियन्ता का ध्यान विवाचक कंडिका पर नहीं जाना आश्चर्य की बात है, जिसके लिए उरॅाव दोषी है।''
उक्त कारणें से श्री उरॅाव को निन्दन वर्ष 1996-97 का दण्ड प्रस्तावित था। इसी बीच उक्त कार्रवाई के क्रम में ही श्री उरॅाव दिनांक 30 जून 2004 को सेवानिवृत हो गये। तदुपरान्त श्री उरॅाव, सेवानिवृत अधीक्षण अभियन्ता से उक्त असहमति के विन्दुओं पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत कारण पृच्छा करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 987 दिनांक 3 दिसम्बर 2008 द्वारा श्री उरॅाव से 43 बी.0 के तहत द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।
श्री उरॅाव से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उतर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त पाया गया कि कमला एवं घौरी साईफन निर्माण की निविदा एक अन्तराष्ट्रीय निविदा थी। प्रपत्र एफ-2 क्लोज-23 जो विभाग एवं संवेदक के बीच विवाद उत्पन्न होने पर विवाचक की नियुक्ति से संबंध रखता है को लोक निर्माण विभाग के पत्रांक एफ-2/नियम-6113 एस0 दिनांक 18 नवम्बर 19.92 के आलोक में विलोपित कर दिया गया था, परन्तु निविदा दस्तावेज बिक्री हेतु तैयार करने में इस निदेश की अवहेलना की गई।
अतएव निविदा दस्तावेज तैयार करने में विभागीय दिशा निर्देश की अवहेलना करने का आरोप प्रमाणित पाते हुए श्री एतवा उरॅाच अधीक्षण अभियन्ता, सेवानिवृत से प्राप्त स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुए जिस पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार के अनुमोदनोपरानत निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया हैः-
1. दस (10)प्रतिशत पेंशन पर दो वर्षो तक रोक।
सरकार के उक्त निर्णय श्री एतवा उरॅाव सेवानिवृत अधीक्षण अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।26 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
31 अगस्त 2010
सं॰ 22/नि0सि0(पट0)-03-10/2006/1278—कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, खगौल द्वारा किये जा रहे धांधली (धोटाला) के संबंध में प्राप्त परिवाद की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी, जिसमें कतिपय कार्यो के लिए श्री रधुनाथ सिंह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, नौबतपुर प्रथम द्रष्टया दोषी पाये गये। उडृनदस्ता अंचल, पटना के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय पत्रांक 731 दिनांक 24 जुलाई 2009 द्वारा श्री सिंह के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा के क्रम में हस्तपावती के आधार पर भुगतान के लिए श्री सिंह दोषी पाये गये है।
अतएव समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है- 1. निन्दन वर्ष 2005-06
उक्त निर्णय श्री सिंह को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।
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31 अगस्त 2010
सं॰ 22/नि0सि0(औ0)-17-16/2006/1279—श्री रामनारायण ठाकुर, सहायक अभियन्ता, उत्तर कोयल नहर प्रमण्डल, नवीनगर के विरूद्व जिला पदाधिकारी एवं समाहत्र्ता, औरंगाबाद के पत्रांक 3401/गो0 दिनांक 16 नवम्बर 2006 द्वारा अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने एवं विधि व्यवस्था संबंधी पत्र लेने से इन्कार करने के संबंध में कार्रवाई की अनुशंसा के आलोक में विभागीय पत्रांक-4 दिनांक 3 जनवरी 2007 द्वारा श्री ठाकुर सहायक अभियन्ता से दिनांक 12 अक्तूबर 2006 से मुख्यालय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने एवं विधि व्यवस्था संबंधी जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद के पत्र लेने से इन्कार करने के संबंध में श्री रामनारायण ठाकुर,, सहायक अभियन्ता, उत्तर कोयल नहर प्रमण्डल, नवीनगर से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री ठाकुर से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 742 दिनांक 22 जुलाई 2007 द्वारा श्री ठाकुर से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री ठाकुर से स्पष्टीकरण प्राप्त हुआ जिसकी सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षा में श्री ठाकुर के विरूद्व मुख्यालय छोड़ने की सूचना अपने वरीय पदाधिकारी को नहीं देने और इस हेतु कोई आवेदन नहीं देने तथा दूरभाष पर सूचित करने के बावजूद श्री ठाकुर द्वारा विधि व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण कार्य संबंधी आदेश प्राप्त नहीं करने के लिए जिम्मेवार माना गया तथा साथ ही दूरभाष पर खबर दिये जाने पर उन्हें स्वयं आकर सारी स्थिति की जानकारी दी जानी चाहिए थी, जो उनके द्वारा नहीं की गयी।
अतः विभागीय आदेश सं0-142 दिनांक 28 नवम्बर 2008 सह पठित ज्ञापांक-968 दिनांक 28 नवम्बर 2008 द्वारा इन्हें निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-
(1) ''निन्दन'' वर्ष 2006-07 (2) एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। (3) अनुपस्थित अवधि दिनांक 13 अक्तूबर 2006 से 24 अक्तूबर 2006 तक कोई वेतन देय नहीं परन्तु उक्त अवधि सेवा में टूट नहीं मानी जायेगी।
उक्त दण्ड के विरूद्व श्री रामनारायण ठाकुर, सहायक अभियन्ता द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त मानवीय दृष्टिकोण से दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया। अतः श्री रामनारायण ठाकुर, सहायक अभियन्ता, उत्तर कोयल नहर प्रमण्डल, नवीनगर सम्प्रति सहायक अभियन्ता, गंगा पम्प नहर प्रमण्डल, कहलगॅाव को आदेश सं0-142 दिनांक 28 नवम्बर 2008 सह पठित ज्ञापांक-968 दिनांक 28.11.08 द्वारा संसूचित दण्ड को निरस्त करते हुए दोषमुक्त करने संबंधी आदेश संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।
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31 अगस्त 2010
सं॰ 22/नि0सि0(डि0)-14-17/2007/1280—श्री रविशंकर सिंह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल,, सासाराम के विरूद्व सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमंडल, डिहरी के अंतर्गत वर्ष 1997-98 एवं 1998-99 में चौसा शाखा नहर के 0 कि0 मी0 से 29.70 कि0 मी0 के बीच कराये गये मिट्टी कार्य की जॉच उड़नदस्ता अंचल से करायी गयी। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से जॉच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसका सम्यक् समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं संचालन27 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री रविशंकर सिंह, सहायक अभियन्ता सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमंडल, सासाराम, शिविर-डिहरी सम्प्रति गुण नियंत्रण प्रमण्डल, बख्तियारपुर को आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया। अतः श्री रविशंकर सिंह, सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, सासाराम को आरोप मुक्त करने संबंधी आदेश संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।
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31 अगस्त 2010
सं॰ 22/नि0सि0(डि0)-14-17/2007/1283—श्री लक्ष्मण झा, (आई0 डी0-1395) तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर प्रमण्डल, सासाराम शि0 डिहरी के विरूद्व सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमंडल, डिहरी के अंतर्गत वर्ष 1997-98 एवं 1998-99 में चौसा शाखा नहर के 0 कि0 मी0 से 29.70 कि0 मी0 के बीच कराये गये मिट्टी कार्य की जॉच उड़नदस्ता अंचल से करायी गयी। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से जॉच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसका सम्यक् समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री लक्ष्मण झा, सहायक अभियन्ता सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, सासाराम, शि0-डिहरी सम्प्रति सेवा निवृत सचिव प्रावैधिक, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना को आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया। अतः श्री लक्ष्मण झा, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर प्रमण्डल, सासाराम शि0 डिहरी को आरोप मुक्त करने संबंधी आदेश संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।
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1 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/2008/1286—मुनहरा बराज योजना अन्तर्गत नहर प्रणाली के एकरारनामा सं0-एफ0-2-1/06-07 के तहत कराये गये मुनहरा नहर प्रणाली के पुनस्र्थापन कार्य की जॅाच उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त निम्न आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाये गयेः-
(1) मुनहरा वीयर से निःसृत नहरो के पुनस्र्थापन कार्यो का वर्ष 2005 में तैयार किये गये प्राक्कलन एवं तत्पश्चात स्वीकृत प्राक्कलन के लेवेल में काफी अन्तर पाया गया एवं पूर्व में मिट्टी में स्वीकृत लिफ्ट की गणना भी गलत होने के कारण उसे स्वीकृत कार्यकारी प्राक्कलन से हटा दिया गया है। जिससे स्पष्ट है कि बिना सर्वेक्षण एवं लेवेल लिये ही प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया है।
(2) कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व भी लेवेल के जॅाच असंबंध प्रमण्डल/गुण नियंत्रण द्वारा नहीं कराई गई और न ही स-समय कार्यकारी प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया, जिसके कारण संवेदक को अधिकाई भुगतान हुआ जिसके बाद में कटौती गई जो नियमानुकूल नहीं था।
उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री संतोष शरण, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर के विरूद्व विभागीय पत्रांक 133 दिनांक 27 जनवरी 2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए श्री शरण कार्यपालक अभियन्ता से स्पष्टीकरण की मांग की गई।
श्री शरण से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित नहीं पाते हुए श्री शरण को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री संतोष शरण, तत्कालीन, कार्यपालक अभियन्ता, मुनहर बराज प्रमण्डल, जयनगर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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7 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-05/2009/1307—पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, दरभंगा के अन्तर्गत पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के वि0दू0 171..30 से 186.00 के बीच कराये गये पुनस्र्थापन कार्य में अनियमितता की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा कराई गई। उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में पाया गया कि पश्चिमी कोशी नहर परियोजना को पूर्ण करने हेतु स्पील ओभर मिट्टी कार्य के लिए उपलब्ध आवंटन से रू0 30.01 लाख का भुगतान बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति के किया गया है। उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोप के लिए श्री प्रमोद कुमार शरण, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी28 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 नहर प्रमण्डल, खुटौना के विरुद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1025 दिनांक 8 अक्तूबर 2009 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई।
विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त श्री शरण, सहायक अभियन्ता के विरूद्व आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। फलतः श्री शरण को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उक्त निर्णय श्री प्रमोद कुमार शरण, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, खुटौना को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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7 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-05/2009/1308—पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, दरभंगा के अन्तर्गत पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के वि0दू0 171.30 से 186.00 के बीच कराये गये पुनस्र्थापन कार्य में अनियमितता की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा कराई गई। उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में पाया गया कि पश्चिमी कोशी नहर परियोजना को पूर्ण करने हेतु स्पील ओभर मिट्टी कार्य के लिए उपलब्ध आवंटन से रू0 30.01 लाख का भुगतान बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति के किया गया है। उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोप के लिए श्री शम्भु प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, रूपांकण अंचल, सिंचाई, दरभंगा के विरूद्वविभागीय संकल्प ज्ञापांक-1028 दिनांक 8 अक्तूबर 2009 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई।
विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त श्री प्रसाद, सहायक अभियन्ता के विरूद्व आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। फलतः श्री प्रसाद को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री शम्भु प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, रूपांकण अंचल, सिंचाई, दरभंगा को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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7 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-05/2009/1309—पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, दरभंगा के अन्तर्गत पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के वि0दू0 171..30 से 186.00 के बीच कराये गये पुनस्र्थापन कार्य में अनियमितता की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा कराई गई। उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में पाया गया कि पश्चिमी कोशी नहर परियोजना को पूर्ण करने हेतु स्पील ओभर मिट्टी कार्य के लिए उपलब्ध आवंटन से रू0 30.01 लाख का भुगतान बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति के किया गया है। उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोप के लिए श्री राम विनोद प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1027 दिनांक 8 अक्तूबर 2009 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त श्री प्रसाद, सहायक अभियन्ता (सेवानिवृत) के विरूद्व आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। फलतः श्री प्रसाद को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री राम विनोद प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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7 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-05/2009/1310—पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, दरभंगा के अन्तर्गत पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के वि0दू0 171..30 से 186.00 के बीच कराये गये पुनस्र्थापन कार्य में अनियमितता की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा कराई गई। उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन में पाया गया कि पश्चिमी कोशी नहर परियोजना को पूर्ण करने हेतु स्पील ओभर मिट्टी कार्य के लिए उपलब्ध आवंटन से रू0 30.01 लाख का भुगतान बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति के किया गया है। उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोप के लिए श्री रामजी प्रसाद यादव, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, अंधराठाढ़ी के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1026 दिनांक 8 अक्तूबर 2009 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई।29 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त श्री यादव, सहायक अभियन्ता के विरूद्व आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। फलतः श्री यादव को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री रामजी प्रसाद यादव, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल, अंधराठाढ़ी को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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8 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/2008/1329—मुनहरा बराज योजना अन्तर्गत नहर प्रणाली के एकरारनामा सं0-एफ0-2-1/06-07 के तहत कराये गये मुनहरा नहर प्रणाली के पुनस्र्थापन कार्य की जॅाच उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त निम्न आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाये गयेः-
(1) मुनहरा वीयर से निःसृत नहरो के पुनस्र्थापन कार्यो का वर्ष 2005 में तैयार किये गये प्राक्कलन एवं तत्पश्चात स्वीकृत प्राक्कलन के लेवेल में काफी अन्तर पाया गया एवं पूर्व में मिट्टी में स्वीकृत लिफ्ट की गणना भी गलत होने के कारण उसे स्वीकृत कार्यकारी प्राक्कलन से हटा दिया गया है। जिससे स्पष्ट है कि बिना सर्वेक्षण एवं लेवेल लिये ही प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया है।
(2) कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व भी लेवेल के जॅाच असंबंध प्रमण्डल/गुण नियंत्रण द्वारा नहीं कराई गई और न ही स-समय कार्यकारी प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया, जिसके कारण संवेदक को अधिकाई भुगतान हुआ जिसके बाद में कटौती गई जो नियमानुकूल नहीं था।
उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सफी अहमद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर के विरूद्व विभागीय पत्रांक 136 दिनांक 27 जनवरी 2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए श्री अहमद सेे स्पष्टीकरण की मांग की गई। श्री अहमद, सहायक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित नहीं पाते हुए श्री अहमद को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री सफी अहमद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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8 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/2008/1330—मुनहरा बराज योजना अन्तर्गत नहर प्रणाली के एकरारनामा सं0-एफ0-2-1/06-07 के तहत कराये गये मुनहरा नहर प्रणाली के पुनस्र्थापन कार्य की जॅाच उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त निम्न आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाये गयेः-
(1) मुनहरा वीयर से निःसृत नहरो के पुनस्र्थापन कार्यो का वर्ष 2005 में तैयार किये गये प्राक्कलन एवं तत्पश्चात स्वीकृत प्राक्कलन के लेवेल में काफी अन्तर पाया गया एवं पूर्व में मिट्टी में स्वीकृत लिफ्ट की गणना भी गलत होने के कारण उसे स्वीकृत कार्यकारी प्राक्कलन से हटा दिया गया है। जिससे स्पष्ट है कि बिना सर्वेक्षण एवं लेवेल लिये ही प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया है।
(2) कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व भी लवेल के जॅाच असंबंध प्रमण्डल/गुण नियंत्रण द्वारा नहीं कराई गई और न ही स-समय कार्यकारी प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया, जिसके कारण संवेदक को अधिकाई भूगतान हुआ जिसके बाद में कटौती गई जो नियमानुकूल नहीं था।
उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री मोइउद्वीन अहमद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर के विरूद्व विभागीय पत्रांक 135दिनांक 27.1.10 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए श्री अहमद सेे स्पष्टीकरण की मांग की गई। श्री अहमद, सहायक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित नहीं पाते हुए श्री अहमद को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री मोइउद्वीन अहमद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।30 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010
8 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/2008/1331—मुनहरा बराज योजना अन्तर्गत नहर प्रणाली के एकरारनामा सं0-एफ0-2-1/06-07 के तहत कराये गये मुनहरा नहर प्रणाली के पुनस्र्थापन कार्य की जॅाच उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त निम्न आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाये गयेः-
(1) मुनहरा वीयर से निःसृत नहरो के पुनस्र्थापन कार्यो का वर्ष 2005 में तैयार किये गये प्राक्कलन एवं तत्पश्चात स्वीकृत प्राक्कलन के लेवेल में काफी अन्तर पाया गया एवं पूर्व में मिट्टी में स्वीकृत लिफ्ट की गणना भी गलत होने के कारण उसे स्वीकृत कार्यकारी प्राक्कलन से हटा दिया गया है। जिससे स्पष्ट है कि बिना सर्वेक्षण एवं लेवेल लिये ही प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया है।
(2) कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व भी लेवल के जॅाच असंबंध प्रमण्डल/गुण नियंत्रण द्वारा नहीं कराई गई और न ही स-समय कार्यकारी प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया, जिसके कारण संवेदक को अधिकाई भुगतान हुआ जिसके बाद में कटौती गई जो नियमानुकूल नहीं था।
उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री बलिराम राम, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व विभागीय पत्रांक 489 दिनांक 19 मार्च 2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए श्री राम, सहायक अभियन्ता से स्पष्टीकरण की मांग की गई।
श्री राम, सेवानिवृत सहायक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित नहीं पाते हुए श्री राम को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री बलिराम राम, सहायक अभियन्ता सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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8 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/2008/1332—मुनहरा बराज योजना अन्तर्गत नहर प्रणाली के एकरारनामा सं0-एफ0-2-1/06-07 के तहत कराये गये मुनहरा नहर प्रणाली के पुनस्र्थापन कार्य की जॅाच उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त निम्न आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाये गयेः-
(1) मुनहरा वीयर से निःसृत नहरो के पुनस्र्थापन कार्यो का वर्ष 2005 में तैयार किये गये प्राक्कलन एवं तत्पश्चात स्वीकृत प्राक्कलन के लेवेल में काफी अन्तर पाया गया एवं पूर्व में मिट्टी में स्वीकृत लिफ्ट की गणना भी गलत होने के कारण उसे स्वीकृत कार्यकारी प्राक्कलन से हटा दिया गया है। जिससे स्पष्ट है कि बिना सर्वेक्षण एवं लेवेल लिये ही प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया है।
(2) कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व भी लेवेल के जॅाच असंबंध प्रमण्डल/गुण नियंत्रण द्वारा नहीं कराई गई और न ही स-समय कार्यकारी प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया, जिसके कारण संवेदक को अधिकाई भुगतान हुआ जिसके बाद में कटौती गई जो नियमानुकूल नहीं था।
उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सहीदन उरॅाव, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर के विरूद्व विभागीय पत्रांक 137 दिनांक 27 जनवरी 2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए श्री उरॅाव सेे स्पष्टीकरण की मांग की गई।
श्री उरॅाव से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित नहीं पाते हुए श्री उरॅाव को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री सहीदन उरॅाव, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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8 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/2008/1333—मुनहरा बराज योजना अन्तर्गत नहर प्रणाली के एकरारनामा सं0-एफ0-2-1/06-07 के तहत कराये गये मुनहरा नहर प्रणाली के पुनस्र्थापन कार्य की जॅाच उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त निम्न आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाये गयेः-31 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 (1) मुनहरा वीयर से निःसृत नहरो के पुनस्र्थापन कार्यो का वर्ष 2005 में तैयार किये गये प्राक्कलन एवं तत्पश्चात स्वीकृत प्राक्कलन के लेवेल में काफी अन्तर पाया गया एवं पूर्व में मिट्टी में स्वीकृत लिफ्ट की गणना भी गलत होने के कारण उसे स्वीकृत कार्यकारी प्राक्कलन से हटा दिया गया है। जिससे स्पष्ट है कि बिना सर्वेक्षण एवं लेवेल लिये ही प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया है।
(2) कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व भी लेवेल के जॅाच असंबंध प्रमण्डल/गुण नियंत्रण द्वारा नहीं कराई गई और न ही स-समय कार्यकारी प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया, जिसके कारण संवेदक को अधिकाई भुगतान हुआ जिसके बाद में कटौती गई जो नियमानुकूल नहीं था।
उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर के विरूद्व विभागीय पत्रांक 134 दिनांक 27 जनवरी 2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए श्री रजक, सेे स्पष्टीकरण की मांग की गई।
श्री रजक, कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित नहीं पाते हुए श्री रजक को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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8 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-02/2008/1334—मुनहरा बराज योजना अन्तर्गत नहर प्रणाली के एकरारनामा सं0-एफ0-2-1/06-07 के तहत कराये गये मुनहरा नहर प्रणाली के पुनस्र्थापन कार्य की जॅाच उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त निम्न आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाये गयेः-
(1) मुनहरा वीयर से निःसृत नहरो के पुनस्र्थापन कार्यो का वर्ष 2005 में तैयार किये गये प्राक्कलन एवं तत्पश्चात स्वीकृत प्राक्कलन के लेवेल में काफी अन्तर पाया गया एवं पूर्व में मिट्टी में स्वीकृत लिफ्ट की गणना भी गलत होने के कारण उसे स्वीकृत कार्यकारी प्राक्कलन से हटा दिया गया है। जिससे स्पष्ट है कि बिना सर्वेक्षण एवं लेवेल लिये ही प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया है।
(2) कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व भी लेवेल के जॅाच असंबंध प्रमण्डल/गुण नियंत्रण द्वारा नहीं कराई गई और न ही स-समय कार्यकारी प्राक्कलन तैयार कर समर्पित किया गया, जिसके कारण संवेदक को अधिकाई भुगतान हुआ जिसके बाद में कटौती गई जो नियमानुकूल नहीं था।
उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री विपेन्द्र भूषण सिह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, मुनहरा बराज प्रमण्डल जयनगर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व विभागीय पत्रांक 488 दिनांक 19.3.10 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए श्री सिंह, सहायक अभियन्ता से स्पष्टीकरण की मांग की गई।
श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित नहीं पाते हुए श्री सिंह को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री विपेन्द्र भूषण सिह, सहायक अभियन्ता सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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22 सितम्बर 2010
सं॰ 22/नि0सि0(दर0)-16-10/2005/1431—श्री राम विनय शर्मा, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल सं0-2, राजनगर, शि0- खजौली, मधुबनी आई0 डी0 कोड-2162 वरीयता क्रमांक-2945 को तीन कनीय अभियन्ता तथा एक पत्राचार लिपिक के साथ श्री उमेश पाण्डेय, कार्यपालक अभियन्ता पर जानलेवा हमला करने के पाये गये प्रथम द्रष्टया आरोप के लिए विभागीय आदेश सं0-66 दिनांक 6 जनवरी 2000 (ज्ञापांक-66 दिनांक 6 जनवरी 2000) द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही चालने का निर्णय लिया गया।32 (cid:18)बहार गजट, 3 नव&बर 2010 तद्नुकूल विभागीय संकल्प ज्ञापांक-195 दिनांक 19 जनवरी 2000 द्वारा असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 1950 के नियम-55 के तहत श्री शर्मा के विरूद्व विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। विभागीय कार्यवाही में जॅाच पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त फौजदारी मुकदमें की पुलिस प्रतिवेदन की मांग आरक्षी अधीक्षक, मधुबनी से की गई। आरक्षी अधीक्षक, मधुबनी से लम्बी अवधि तक प्रतिवेदन अप्राप्त रहने के कारण विभागीय आदेश सं0-6 दिनांक 17 जनवरी 2006 (ज्ञापांक-42 दिनांक 17 जनवरी 2006) द्वारा श्री शर्मा, सहायक अभियन्ता को निलंबन से मुक्त किया गया।
आरक्षी अधीक्षक, मधुबनी से प्राप्त प्रतिवेदन की समीक्षा के क्रम में ही श्री शर्मा दिनांक 30 जून 2008 को सेवानिवृत हो गये। तदुपरान्त पूरे मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरान्त विभागीय आदेश सं0-223 दिनांक 27 नवमबर 2009 द्वारा इनके विरूद्व संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली 43 (बी0) में परिवर्तित करते हुए विभागीय पत्रांक 1453 दिनांक 8 दिसम्बर 2009 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए कतिपय विन्दुओं पर द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री शर्मा से प्राप्त कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री शर्मा का नाम नामजद प्राथमिकी में दर्ज नहीं है। पुलिस प्रतिवेदन में भी कार्यालय कर्मी पर संदेह व्यक्त किया गया है एवं साक्ष्य सूत्रहीन है। अतः केवल संदेह के आधार पर आरोपित पदाधिकारी को दोषी नहीं माना जा सकता है।
अतः उपर्युक्त तथ्यों एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राम विनय शर्मा, सेवानिवृत सहायक अभियन्ता को दोषमुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।
सरकार का उक्त निर्णय श्री राम विनय शर्मा, सेवानिवृत सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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अधीHक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुMित। (cid:18)बहार गजट, 33Ñ571+400-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in