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भाग-1-क—7वयंसेवक गुCमD के समादे1टाओं के आदेश।
---
भाग-1-ख—मैI(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Mाओं के पर(cid:15)Mा-फल, कायNOम, छाPवृ,Q (cid:25)दान, आRद।
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भाग-1-ग—(cid:26)शMा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Mाफल आRद ---
भाग-2—(cid:18)बहार-राSयपाल और कायाNTयMD (cid:24)ारा (cid:1)नकाले गये ,व(cid:1)नयम, आदेश, अUधसूचनाएं
,वषय,वषय,वषय,वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृ1ठपृ1ठपृ1ठपृ1ठ
पृ1ठपृ1ठपृ1ठपृ1ठ भाग-5—(cid:18)बहार ,वधान मंडल म^ पुर:7था,पत ,वधेयक, उ`त ,वधान मंडल म^ उप7था,पत
या उप7था,पत aकये जानेवाले (cid:25)वर
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भाग-7—संसद के अUध(cid:1)नयम िजनपर रा1Iप(cid:1)त कb
अनुम(cid:1)त (cid:26)मल चुकb है। ---
भाग-8—भारत कb संसद म^ पुर:7था,पत ,वधेयक,
संसद म^ उप7था,पत (cid:25)वर स(cid:26)म(cid:1)तयD के
(cid:25)(cid:1)तवेदन और संसद म^ उप7था,पत (cid:25)वर
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भाग-9—,वdापन
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भाग-9-क—वन ,वभाग कb नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
और (cid:1)नयम आRद। 7-8
भाग-3—भारत सरकार, पिWम बंगाल सरकार और उYच >यायालय के आदेश, अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राSय गजटD के उ[रण। ---
भाग-4—(cid:18)बहार अUध(cid:1)नयम ---
भाग-9-ख—(cid:1)न,वदा सूचनाएं, पeरवहन सूचनाएं,
>यायालय सूचनाएं और सवNसाधारण
सूचनाएं इfयाRद। 9-9
---
पूरक
पूरक-क 11-172 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011
भागभागभागभाग----1111
(cid:1)नयु45(cid:1)नयु45(cid:1)नयु45(cid:1)नयु45, , , , पद7थापद7थापद7थापद7थापनपनपनपन, , , , बदल(cid:15)बदल(cid:15)बदल(cid:15)बदल(cid:15), , , , श45श45श45श45, , , , छु ;ीछु ;ीछु ;ीछु ;ी और अ>य और अ>य और अ>य और अ>य वैय45क सूचनाएं वैय45क सूचनाएं वैय45क सूचनाएं वैय45क सूचनाएं ————————————————————
सं॰ वि॰ प्रा॰ (I) न1-10/04, (पार्ट-I)-150 विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग ——— संकल्प 19 जनवरी 2011
विषय - विषय - विषय - विषय - विभागान्तर्गत राजकीय महिला पोलिटेकनिक संस्थानों में प्राचार्य पद के लिए महिला प्राचार्य का अलग संवर्ग होने के प्रावधान को समाप्त कर महिला पोलिटेकनिक सहित सभी पोलिटेकनिक संस्थानों में प्राचार्य का एक ही संवर्ग रखे जाने तथा महिला प्राचार्य की उपलब्धता की स्थिति में उन्हें प्राथमिकता के आधार पर महिला पोलिटेकनिक संस्थान में पदस्थापित किये जाने के संबंध में।
वर्त्तमान में विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग के अन्तर्गत दो महिला पोलिटेकनिक यथा राजकीय महिला पोलिटेकनिक, फुलवारीषरीफ, पटना एवं राजकीय महिला पोलिटेकनिक, मुजफ्फरपुर कार्यरत हैं। उक्त दोनों संस्थानों में प्राचार्य का एक-एक पद सृजित है।
2222.... उक्त दोनों संस्थानों में विभागीय अधिसूचना संख्या 2221, दिनांक 15 जून 1974 के आलोक में महिला पोलिटेकनिक मेें केवल महिला अभ्यथियों से प्राचार्य के पद पर नियुक्ति किये जाने का प्रावधान है। 3333.... उक्त दोनों संस्थानों में प्राचार्य के पद पर नियुक्ति हेतु विभाग द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग को भेजी गई अधियाचना के क्रम में आयोग द्वारा प्रकाषित विज्ञापन के आलोक में प्राचार्य के पद पर नियुक्ति में आयोग द्वारा किसी भी महिला अभ्यर्थी को सुयोग्य नहीं पाये जाने के कारण आयोग द्वारा प्रष्नगत पद के लिए निर्धारित योग्यता, प्रषिक्षण एवं अनुभव के संदर्भ में पुर्नविचार कर नये सिरे से अधियाचना आयोग को उपलब्ध कराने का परामर्ष दिया था।
4. विभाग के अधीन राजकीय पोलिटेकनिक/राजकीय महिला पोलिटेकनिक संस्थान अखिल भारतीय तकनीकी षिक्षा परिषद् एक्ट से आच्छादित है। ए॰आई॰सी॰टी॰ई॰ द्वारा निर्धारित योग्यता को ए॰आई॰सी॰टी॰ई॰ एक्ट के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार द्वारा संषोधित नहीं किया जा सकता है। उक्त के आलोक में राज्य के महिला पोलिटेकनिक में प्राचार्य के पद पर निर्धारित योग्यता एवं अहर्त्ता पर पुनर्विचार करना संभव नहीं है। 5. उपर्युक्त परिस्थिति में दूसरे विकल्प के रूप मेें विभागीय अधिसूचना संख्या 2221, दिनांक 15 जून 1974 में महिला पोलिटेकनिक संस्थानों में प्राचार्य के पद पर केवल महिला अभ्यर्थी की नियुक्ति के प्रावधान को समाप्त करने का मामला राज्य सरकार के विचाराधीन था।
6. उपर्युक्त के आलोक सम्यक रूप से विचारोपरान्त राज्य सरकार ने निर्णय लिया कि विभागान्तर्गत राजकीय महिला पोलिटेकनिक संस्थानों में प्राचार्य पद के लिए महिला प्राचार्य का अलग से संवर्ग होने के प्रावधान को समाप्त कर महिला पोलिटेकनिक सहित सभी पोलिटेकनिक संस्थानों मेें प्राचार्य का एक ही संवर्ग रखा जाए तथा महिला प्राचार्य की उपलब्धता की स्थिति में उन्हें प्राथमिकता के आधार पर महिला पोलिटेकनिक संस्थान में पदस्थापित किया जाय।
7. एतद् संबंधी पूर्व के निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या 2221, दिनांक 15 जून 1974 को अवक्रमित समझा जाए। आदेश -आदेश -आदेश -आदेश - आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में सर्वसाधारण की जानकारी हेतु प्रकाषित किया जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव।3 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011
पथ निर्माण विभाग
———
अधिसूचनाएं
3 जनवरी 2011
सं॰ प्र॰2/स्था॰-08-01/09-17(s)—बिहार लोक सेवा आयोग के पत्र संख्या 6/प्रो॰-24-26/2009- 2330/लो॰से॰आ॰, दिनांक 9 दिसम्बर 2010 द्वारा अनुशंसित पथ निर्माण विभाग, बिहार के बिहार अवर अभियंत्रण सेवा संवर्ग के निम्नांकित कनीय अभियंता (याँत्रिक) को बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-2 के अधीन पुनरीक्षित पे बैण्ड-2 एवं ग्रेड पे 5400 रुपये में आदेय भत्तो के साथ सहायक अभियंता (याँत्रिक) के पद पर अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से प्रोन्नत किया जाता है। उन्हें प्रोन्नति का वित्तीय लाभ सहायक अभियंता (याँत्रिक) के पद पर वास्तविक प्रभार ग्रहण करने की तिथि से अनुमान्य होगा।
| क्रमांक | कनीय अभियंता (याँत्रिक) का नाम | वरीयता क्रमांक वर्ष, 2009 |
| 1 | 2 | 3 |
| 1 | श्री राम पूजन सिंह | 37 |
| 2 | श्री सुरेश प्रसाद | 40 |
| 3 | श्री चन्द्रधर पाण्डेय | 42 |
| 4 | श्री सुरेश गिरी | 43 |
2. वरीयता संशोधित होने पर संबंधित पदाधिकारियों की प्रोन्नति भी तद्नुसार प्रभावित होगी। 3. प्रोन्नति के बिन्दु पर माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन याचिका में पारित न्याय निर्णय के फलाफल से उक्त प्रोन्नति प्रभावित होगी।
4. जिन वरीय पदाधिकारियों की प्रोन्नति लंबित रखी गई है, उन्हें भविष्य में प्रोन्नति के योग्य पाये जाने पर प्रोन्नति देते समय यदि पद उपलब्ध नहीं रहेगा तो कनीयतम पदाधिकारी को पदावनत कर दिया जायगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अमरेन्द्र भूषण सिंह, उप सचिव (प्र॰को॰)।
———
1 फरवरी 2011
सं॰ प्र॰-2/मुक॰-55/2010-1201(S)—गृह (विशेष) विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या 10455, दिनांक 6 सितम्बर 2010 द्वारा आपसी सहमति के आधार पर सहायक अभियंताओं का पारस्परिक रूप से स्थानांतरित किया गया। तद्आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या प्र॰2/मुक॰-17/2002 (अंश)-17229 (एस), दिनांक 28 दिसम्बर 2010 द्वारा आवेदक श्री सुरेश कुमार दास के साथ अन्य दो सहायक अभियंताओं को झारखंड राज्य में योगदान करने हेतु विरमित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी॰डब्लू॰जे॰सी॰ संख्या 422/2011 सुरेश कुमार दास बनाम बिहार सरकार एवं अन्य में दिनांक 13 जनवरी 2011 को पारित अंतरिम न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय अधिसूचना संख्या 17229 (एस), दिनांक 28 दिसम्बर 2010 में श्री सुरेश कुमार दास को विरमित करने के आदेश को अगले आदेश तक स्थगित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अमरेन्द्र भूषण सिंह, उप-सचिव (प्र॰को॰)।
——— 14 जनवरी 2011 सं॰ 1/वि॰-16/2010-560(S)—भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकारण (पोत परिवहन, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय), नई दिल्ली के पत्रांक 11012/157/2009 Admin-II, दिनांक 9 अप्रील 2010 एवं 4 अगस्त 2010 के आलोक में निम्नलिखित कार्यपालक अभियंताओं को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नई दिल्ली के अन्तर्गत उप-महाप्रबंधक (तकनीकी) के पद पर चार वर्षों के लिए प्रतिनियुक्ति के आधार पर की गयी नियुक्ति के क्रम में उनकी सेवाएॅ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन सौंपी जाती है तथा योगदान हेतु तत्कालिक प्रभाव से विरमित किया जाता हैः-
(i) श्री रघुनन्दन प्रसाद, कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण) पथ अंचल, पूर्णियाँ। (ii) श्री सच्चिदानन्द प्रसाद यादव, कार्यपालक अभियंता, राज्य उच्च पथ प्रमंडल, नवादा। (iii) श्री ब्रज कुमार ओझा, कार्यपालक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना।4 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011 (iv) श्री मुकेश कुमार, कार्यपालक अभियंता (उप-महाप्रबंधक, तकनीकी) बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना।
श्री रघुनन्दन प्रसाद, कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण) पथ अंचल, पूर्णियाँ एवं श्री सच्चिदानन्द प्रसाद यादव, कार्यपालक अभियंता, राज्य उच्च पथ प्रमंडल, नवादा क्रमशः अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, पूर्णियाँ एवं अधीक्षण अभियंता, मगध पथ अंचल, गया द्वारा किये गये स्थानीय व्यवस्था के तहत प्रभार सौपेंगे। श्री ब्रज कुमार ओझा, कार्यपालक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा श्री मुकेश कुमार, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति उपमहाप्रबंधक (तकनीकी) बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना क्रमशः विशेष सचिव-सह-निदेशक, बिहार शहरी विकास अभिकरण, नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना एवं प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना द्वारा किये गये स्थानीय व्यवस्था के तहत प्रभार सौपंगे। आसन्न बिहार विधान सभा चुनाव, 2010 में लागू आदर्श आचार संहिता एवं विभागीय प्रक्रियात्मक विलंब के कारण इन्हें अब विरमित किया जा रहा है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अमरेन्द्र भूषण सिंह, उप सचिव (प्र॰को॰)।
———
समाज कल्याण विभाग
———
अधिसूचना
12 जनवरी 2011
सं॰ स0क0 स्था0(राज0)-10-121/10-140-स॰क॰—श्रीमती मोना झा, (सामान्य वर्ग) ग्राम-कोशी प्रोजेक्ट कॉलनी, पो0- वीरपुर, थाना-वीरपुर, जिला-सुपौल को समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना संख्या 794, दिनांक 7 मार्च 2008 द्वारा बाल विकास परियोजना, पदाधिकारी के पद (वेतनमान रु॰ 6,500-200-10.500) के पद पर 02 (दो) वर्षो की परिक्ष्यमान अवधि के लिए बिल्कुल अस्थायी रूप से नियुक्त करते हुए बाल विकास परियोजना, रोहतास (रोहतास) में पदस्थापित किया गया था।
श्रीमती मोना झा, बाल विकास परियेाजना पदाधिकारी, रोहतास को बिहार लोक सेवा आयोग, पटना द्वारा आयोजित 48 वीं से 52 वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के साक्षात्कार में शामिल होने हेतु समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के आदेश ज्ञापांक 1132, दिनांक 16 मार्च 2010 द्वारा अनुमति प्रदान की गई थी।
श्रीमती मोना झा ने अपने आवेदन पत्र दिनांक 1 जनवरी 2011 द्वारा विभाग को सूचित किया है कि बिहार लोक सेवा आयोग की 48 वीं से 52 वीं सम्मिलित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से उनका चयन बिहार प्रशासनिक सेवा हेतु हुआ है। सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार की अधिसूचना संख्या 12/नि0-1013/10-सा0प्र0-12834, दिनांक 27 दिसम्बर 2010 द्वारा बिहार प्रशासनिक सेवा के अधीन वेतनमान रु॰-9300-34,800 (पे बैंड-2) गे्रड वेतन रु॰-5400 में श्रीमती मोना झा को परीक्ष्यमान उप समाहर्त्ता के रूप में औपबंधिक रूप से अगले छः माह के लिए नियुक्त करते हुए मधुबनी जिला में व्यवहारिक प्रशिक्षण हेतु पदस्थापित किया गया है। जहाँ उन्हें योगदान देना है।
अतः श्रीमती मोना झा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, रोहतास को तत्कालीक प्रभाव से विरमित करते हुए मधुबनी जिला में परीक्ष्यमान उप-समाहर्त्ता के पद पर योगदान करने की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, जवाहर प्रसाद, उप-सचिव ।
———
निगरानी विभाग
———
अधिसूचनाएं
7 फरवरी 2011
सं॰ नि॰वि॰परि0गृह(आ0)-73/2009-651—चूँकि, राज्य सरकार को ऐसा प्रतीत होता है कि शास्त्री नगर थाना में दर्ज थाना कांड का अनुसंधान एवं पर्यवेक्षण के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में उपलब्ध विशिष्ट अनुसंधानाकर्त्ताओं को संलग्न किया जाना आवश्यक है। अतः तात्कालीक प्रभाव से निम्न वर्णित कांड के अधिग्रहण एवं अनुवर्ती अनुसंधान तथा पर्यवेक्षण के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना को प्राधिकृत किया जाता है :-
1. शास्त्री नगर (पटना) थाना कांड संख्या 175/07 (विधि विज्ञान प्रयोगशाला, पटना के कार्य कलाप के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश)।
बिहार-राजयपाल के आदेश से, पी॰ सी॰ शरण, विशेष सचिव।5 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011
7 फरवरी 2011
सं॰ नि॰वि॰ स्था॰-105/97-अंश -I-683—श्री श्याम कुमार सिंह, वि0प्र0से0, संयुक्त सचिव जिन्हें सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना संख्या 1092, दिनांक 31 जनवरी 2011 द्वारा निगरानी विभाग में पदस्थापित किया गया है को निगरानी विभाग के संकल्प संख्या-785, दिनांक 26 फरवरी 1981 के समूह संख्या 03 के अन्तर्गत पथ निर्माण विभाग, भवन निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग तथा ग्रामीण कार्य विभाग में संयुक्त सचिव-सह-मुख्य निगरानी पदाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया जाता है। इस समूह का नोडल विभाग पथ निर्माण विभाग होगा। मुख्य निगरानी पदाधिकारी को बैठने हेतु कमरा तथा आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का दायित्व नोडल विभाग का होगा। श्री सतीश प्रसाद, वि0प्र0से0, संयुक्त सचिव जिन्हें सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना संख्या 1092, दिनांक 31 जनवरी 2011 द्वारा निगरानी विभाग में पदस्थापित किया गया है को निगरानी विभाग के संकल्प संख्या 785, दिनांक 26 फरवरी 1981 के समूह संख्या 05 के अन्तर्गत उद्योग विभाग, खान एवं भू-तत्व विभाग, मानव संसाधन विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं सहकारिता विभाग में संयुक्त सचिव-सह-मुख्य निगरानी पदाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया जाता है। इस समूह का नोडल विभाग मानव संसाधन विकास विभाग होगा। मुख्य निगरानी पदाधिकारी को बैठने हेतु कमरा तथा आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का दायित्व नोडल विभाग का होगा। सामान्य प्रशासनिक नियंत्रण, स्थापना तथा आय व्ययक के परियोजनार्थ प्रत्येक मुख्य निगरानी पदाधिकारी, प्रधान सचिव, निगरानी विभाग के अधीन निगरानी विभाग के अंग होगें, किन्तु वे संबंधित प्रशासी विभागों के प्रधान सचिव/सचिव के पर्यवेक्षण में उन विभागों का कार्य करेंगे और प्रशासी विभाग के प्रधान सचिव तथा निगरानी विभाग के प्रधान सचिव के बीच निगरानी संबंधी सभी कार्याे के लिए कड़ी बने रहेंगे। यह आदेश तात्कालिक प्रभाव से लागू होगा।
बिहार-राजयपाल के आदेश से, पी॰ सी॰ शरण, विशेष सचिव।
———— अधीMक, सUचवालय मुhणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा (cid:25)का(cid:26)शत एवं मुRhत। (cid:18)बहार गजट, 48—571+100100100100-डी0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in6 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011 7 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011
भागभागभागभाग----2222
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राSयराSयराSयराSयपाल और कायाNTयपाल और कायाNTयपाल और कायाNTयपाल और कायाNTयMD (cid:24)ारा (cid:1)नकाले गये ,व(cid:1)नयमMD (cid:24)ारा (cid:1)नकाले गये ,व(cid:1)नयमMD (cid:24)ारा (cid:1)नकाले गये ,व(cid:1)नयमMD (cid:24)ारा (cid:1)नकाले गये ,व(cid:1)नयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , , अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम आRद।अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम आRद।अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम आRद।अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम आRद।
————— जल संसाधन विभाग।जल संसाधन विभाग।जल संसाधन विभाग।जल संसाधन विभाग। ——— शुद्धि-पत्रशुद्धि-पत्रशुद्धि-पत्रशुद्धि-पत्र 4 फरवरी 20114 फरवरी 20114 फरवरी 20114 फरवरी 2011
सं॰ सं॰ः 7/एल 6-1026/2002-160—विभागीय अधिसूचना संख्या 7/एल 6-1026/2002-112, दिनांक 15 फरवरी 2010 की कंडिका सं॰ 1 (,ा) में अुंकेत दिनांक 27 मार्च 2000 से 21 मार्च 2001 तक 180 दिन रूपांतरित अवकाष (जो 180 x 2=360 दिनों का अर्द्धवैतनिक अवकाष के समतुज्य है।) एवं (ग) में अंकित दिनांक 22 मार्च 2001 से 31 अप्रील 2001 तक 40 दिनों का अर्द्धवैतनिक अवकाष तथ्य के स्थान पर दिनांक 27 मार्च 2000 से 30 अप्रील 2001 तक कुल 400 (चार सौ) दिनों का अर्द्धवैतनिक अवकाष की स्वीकृति पढ़ा जाए।
2. उक्त अधिसूचना का इस हद तक संषोधित समझाा जाय। 3. शेष तथ्य यथावत् रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से अंजनी कुमार सिंह, अवर सचिव (प्रबंधन)।
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श्रम संसाधन विभाग
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शुद्धि-पत्र
10 जनवरी 2011
सं॰ 1 श्रम वि॰ई॰-8-8003/2005-48-श्र॰सं॰—श्रम संसाधन विभागीय अधिसूचना संख्या 320, दिनांक 4 नवम्बर 2006 में यथा उल्लेखित चिकित्सकों के क्रमांक 11 पर अंकित डा॰ वीरेन्द्र कुमार ठाकुर, बीमा चिकित्सा पदाधिकारी के नाम के सामने काफलत 4 में अंकित तिथि 27 अगस्त 1999 के स्थान पर ''दिनांक 1 सितम्बर 1999'' पढ़ा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से गरीब साहु, अपर सचिव ।
———
Labour Resources Department
———
NOTIFICATION
19th January 2011
NO.एसीस-01/नि॰-73/2010-65—WHEREAS by a notification of the Government of Bihar number-832, dated-25.08.10 the State Government, in consultation with the Employees' State Insurance Corporation and with the approval of Central Government, gave notice of its intention to extend the provisions of the Employees' State Insurance Act, 1948 (34 of 1948) to certain classes of establishments specified in the schedule to the said notification after one month from the date of that notification.
AND WHEREAS, the copies of said notification were made available to the public on Gazette (8th Sept, 2010).
AND WHEREAS, no objections and suggestions have been received within the said period of one month in respect of said notification. /And whereas, objections and suggestions received from the persons likely to be affected thereby have been considered by the Government. (Delete whichever is not applicable).
8 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011NOW, THEREFORE, in exercise of the powers conferred by sub-section (5) of section 1 of the Employees' State Insurance Act, 1948 (34 of 1948), the State Government of Bihar, in consultation with the Employees' State Insurance Corporation and with the approval of Central Government, hereby extends the provisions of the said Act to the classes of establishments specified in Column (1) and situated within the areas specified in Column (2) of the Schedule in the State of Bihar namely :-
| Description of establishments | Areas in which the establishments are situated |
| (1) | (2) |
| The following establishments whereon ten or more persons are employed, or were employed on any day of the preceding twelve months, namely- i) Shops; ii) Hotels; iii) Restaurants; iv) Road Motor Transport establishments; v) Cinemas including preview theatres; vi) Newspaper establishments as defined in section 2(d) of the Working Journalists (Conditions of Service) and Miscellaneous Provisions Act, 1955 (45 of 1955); vii) Educational Institutions (including public, private, aided or partially aided) run by individuals, trustees, societies or other organizations; viii) Medical Institutions (including corporate, joint sector, trust, charitable and private ownership hospitals, nursing homes, diagnostic centres, pathological labs. | All areas where the provisions of the ESI Act, 1948 have already been brought into force under Section 1 (3) of the Act. |
By order of the Governor of Bihar (Sd)-Illegible, Principal Secretary to the Government.
———— अधीMक, सUचवालय मुhणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा (cid:25)का(cid:26)शत एवं मुRhत। (cid:18)बहार गजट, 48—571+100100100100-डी0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in9 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011
भागभागभागभाग----9999((((खखखख))))
और सवNसाधारण सूचनाएं इfयाऔर सवNसाधारण सूचनाएं इfयाऔर सवNसाधारण सूचनाएं इfयाऔर सवNसाधारण सूचनाएं इfयाRद।Rद।Rद।Rद। ————————————————————
सूचना
सं॰ 22 मैं कुलदीप गिरि पुत्र श्री राम बहादुर गिरि (आर॰बी॰गिरि) माता का नाम-श्रीमती देवन्ती देवी, निवासी-राजीव नगर, रोड नं॰ 21, पो॰ केषरी नगर, थाना-राजीव नगर, पटना (बिहार), पिन-800024, हूं।
1. मैं घोषणा करता हूं कि पूर्व में मेरा नाम कुलदीप था। 2. मैं घोषणा करता हूं कि मैं अपना नाम बदलकर कुलदीप के स्थान पर कुलदीप गिरि दिनांक-7 जुलाई, 2009 शपथ-पत्र संख्या-5472, के द्वारा रख लिया है।
3. मैं बयान करता हूं कि मेरा जन्म-तिथि 20 फरवरी, 1986 है जो कि केन्द्रीय माघ्यमिक परीक्षा 2000 (दसवी) के बोर्ड द्वारा प्रदत प्रमाण-पत्र मे दर्ज है।
4. मैं घोषणा करता हूं कि भविष्य में मुझे दिनांक 7 जुलाई, 2009 से कुलदीप गिरि के नाम से जाना जाय ।
कुलदीप गिरि
——— सूचना
सं॰ 24 मैं, कुणाल सिंह, जन्म-तिथि 8 मई 1983, पिता-श्री अषोक कुमार, एच0 आई0 जी0 74, रोड न0 1, चाणक्यापुरी कॉलोनी, गया, पिन-823001, घोषणा करता हूँ कि मैंने अपना नाम शपथ-पत्र संख्या 43, दिनांक 5 अक्तूबर 2009 के द्वारा अपना नाम बदलकर कुणाल नाथ कर दिया है।
कुणाल सिंह
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CHANGE OF NAME
No. 23 I, Priyanka,D/o Shree Shridhar Prasad, Aged about 30 years, resident of Mohalla Satpura Colony, House No.14/A, Rod no.1, Near Vaishali Bhawan, P.o- Ramana, P.S. Kazi Mohammadpu, Dist- Muzaffarpur, declare that from now onwards I would be known as Priyanka Aatreyi (प्रियंका आत्रैयी) for all purpose vide Affidavit No. 3719, Dated 23rd August 2010.
Priyanka Aatreyi
———— अधीMक, सUचवालय मुhणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा (cid:25)का(cid:26)शत एवं मुRhत। (cid:18)बहार गजट, 48—571+30-डी0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in10 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011 11 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट काकाकाका पूरकपूरकपूरकपूरक((((अअअअ0000)))) (cid:25)ाUधकार(cid:15) (cid:24)ारा (cid:25)का(cid:26)शत(cid:25)ाUधकार(cid:15) (cid:24)ारा (cid:25)का(cid:26)शत(cid:25)ाUधकार(cid:15) (cid:24)ारा (cid:25)का(cid:26)शत(cid:25)ाUधकार(cid:15) (cid:24)ारा (cid:25)का(cid:26)शत
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पथ निर्माण विभाग ——— अधिसूचनाएं 28 जनवरी 2011 सं0 निग/सारा-7-ग्रा0का0वि0-उ0वि0-9/08-1085 (एस)—श्री स्वदेश नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति सेवा-निवृत्त द्वारा कार्य प्रमंडल, सुपौल के पदस्थापन काल में सुपौल जिलान्तर्गत किशनपुर-भलुआही मरौना पथ में कार्यान्वित योजना कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए इनके विरुद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11063 (एस) अनु0, दिनांक 21 अगस्त 2008 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री नारायण के दिनांक 31 जुलाई 2008 को सेवा-निवृत्त होने के परिणामस्वरुप उक्त विभागीय कार्यवाही को संकल्प ज्ञापांक 1318 (एस), दिनांक 25 फरवरी 2009 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। 2. विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 51 (अनु0), दिनांक 17 फरवरी 2009 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में यद्यपि इनके विरुद्ध गठित सभी आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया गया तथापि जाँच प्रतिवेदन के सम्यक् समीक्षोपरांत असहमति के बिन्दुओं का उल्लेख करते हुए विभागीय पत्रांक 8467 (एस) अनु0, दिनांक 31 जुलाई 2009 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा मांगी गई। 3. श्री नारायण, सेवा, निवृत कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर दिनांक 1 सितम्बर 2009 के समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके द्वारा कार्य मापी परिच्छेदन के आधार पर नहीं करने; निर्धारित अवधि में कार्य समाप्त नहीं कराने; संवेदक से एकरारनामा के अनुरुप राशि की कटौती नहीं करने; मरम्मति कार्य ससमय पूरा नहीं कराने; निर्गत बिटुमिन एवं खाली ड्रम की राशि की वसूली नहीं करने के फलस्परूप योजना कार्य की गुणवत्ता एवं उपयोगिता प्रभावित हुई। तद्आलोक में सरकार के निर्णयानुसार उक्त योजना कार्य में निष्फल व्यय की राशि रुपये 4,00,453 का 15% अर्थात् रुपये 60,068 (रूपये साठ हजार अड़सठ) मात्र की वसूली इनके सेवा-निवृत्ति राशि से करने का निर्णय लिया गया। 4. श्री नारायण, सेवा-निवृत्त कार्यपालक अभियंता के विरुद्ध निर्णित दंड पर विभागीय पत्रांक 10582 (एस) अनु0, दिनांक 19 जुलाई 2010 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गई। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2559, दिनांक 5 जनवरी 2011 द्वारा विभागीय दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गई। अत्एव श्री स्वदेश नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवा-निवृत्त के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत इन्हें निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-
(i) सुपौल जिलान्तर्गत किशनपुर-भलुआही मरौना पथ में कार्यान्वित येजना कार्य में निष्फल व्यय की राशि रुपये 4,00,453 का 15% (पन्द्रह प्रतिशत) अर्थात रुपये 60,068 (रूपये साठ हजार अड़सठ) मात्र की वसूली इनके सेवा निवृत्ति राशि से की जायेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव।12 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011 18 जनवरी 2011 सं0-निग॰/सारा-आरोप-N.H-70/09-711 (एस)—श्री विपिन कुमार सिंह, सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गोपालगंज से राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गोपालगंज के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या 85 के कि0मी0 66 से 92 तक की खराब स्थिति के संबंध में अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा स्थल निरीक्षण कर स्थिति की जानकारी देने, दिनांक 18 अगस्त 2009 को आयोजित विभागीय मासिक समीक्षात्मक बैठक में कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गोपालगंज द्वारा सड़क की खराब स्थिति की स्वीकारोक्ति किये जाने तथा इसके लिए इनके द्वारा बरते जा रहे असहयोगात्मक रवैये जैसे आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 9455 (एस) अनु0, दिनांक 28 अगस्त 2009 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई। 2. श्री सिंह, सहायक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण पत्रांक शून्य, दिनांक 24 सितम्बर 2009 के समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके द्वारा उक्त पथांश के पूरी तरह क्षतिग्रस्त रहने की बात स्वीकार की गई। साथ ही, इस हेतु चार बार प्राक्कलन बनाने की स्वीकारोक्ति से स्पष्ट है कि प्राक्कलन स्थल निरीक्षण एवं आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं बताये गए। इस प्रकार श्री सिंह अपने दायित्वों के निर्वहन में असफल रहे। 3. अत्एव सरकार के निर्णयानुसार निम्न निर्णय लिया जाता है :- (i) इनकी दो वेतन-वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव।
——— 21 जनवरी 2011 सं॰ निग॰/सारा-आरोप- 71/10-898 (एस)—श्री विजय कुमार, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या 2, मुजफ्फरपुर से सचिव द्वारा दिनांक 12 जुलाई 2010 को एन0एच0-77 के स्थल निरीक्षण के क्रम में कटौंझा पुल के पूर्व मनार गाँव के पास सड़क की भयावह स्थिति तथा मुजफ्फरपुर से सीमामढ़ी के बीच कई जगहों पर पोट्स पाये जाने के आलोक में उक्त तिथि में पथ के Defect liability period में होने के बावजूद इनके द्वारा Defect liability period को enforce नहीं कराने तथा अपने अधीनस्थ अभियंताओं पर नियंत्रण नहीं होने जैसे आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-154/गो0, दिनांक 15 जुलाई 2010 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई। 2. श्री कुमार, कार्यपालक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण पत्रांक 918, दिनांक 19 जुलाई 2010 के समीक्षोपरांत पाया गया कि सड़क की स्थिति भयावह थी (जिसे स्वीकार भी किया गया है) तथा अधीनस्थ अभियंताओं पर इनका नियंत्रण नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि Defect liability period में होने के बाद भी पथ के रख-रखाव की समुचित व्यवस्था इनके द्वारा नहीं की गई। 3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार इनकी दो वेतन-वृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव।
——— 21 जनवरी 2011 सं॰ निग॰/सारा-उड़नदस्ता-आरोप-40/2009-905 (एस)—श्री प्रमोद कुमार सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति कार्यपालक अभियंता निलंबित, अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय को पथ प्रमंडल, सुपौल के पदस्थापन काल में नारायणपुर चौक-एन0एच0-57 झिल्ला शाहपुर पृथ्वी पट्टी-छिट्टी-सतनपट्टी-शाहटोला-पंडित टोला जगदीशपुर-करजाईन बाजार (एन0एच0-106) पथ के कि0मी0 1-7, 8 (p), 9 (p), 10-13, 14 (p), 15 (p),16-21 एवं 22 (p) तक कुल 19-92 कि0मी0 में क्रॉस ड्रेनेज एवं पथ बचाव कार्य सहित IRQP कार्य वर्ष-2008-09 की निविदा के वित्तीय बीड को खोलने एवं संवेदक विशेष के पक्ष में दरों में हेर-फेर करने जैसी अनियमितताओं के मामले में कार्यपालक अभियंता, उड़दस्ता प्रमंडल संख्या-2, पथ निर्माण विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर इनको बुलाकर आरोपों के संदर्भ में सुना गया तथा इनका कोई defence नहीं पाये जाने के फलस्वरूप इन्हें विभागीय अधिसूचना संख्या 4756 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक 4757 (एस), दिनांक 15 मई 2009 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के अंतर्गत तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के सुसंगत कंडिकाओं के अनुसार इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होने का आदेश पारित किया गया। 2. इनके विरुद्ध उक्त आरोपों के लिए आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर साक्ष्य सहित विभागीय पत्रांक 7788 (एस) अनु0, दिनांक 15 जुलाई 2009 द्वारा इनसे बचाव वयान मांगा गया। श्री सिन्हा, निलंबित कार्यपालक अभियंता के पत्र दिनांक 22 जुलाई 2009 द्वारा समर्पित बचाव वयान के समीक्षोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक-12101 (एस) अनु0 दिनांक 29 अक्तूबर 2009 द्वारा इनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।13 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011 3. श्री सिन्हा, निलंबित कार्यपालक अभियंता द्वारा निलंबन से मुक्त करने हेतु समर्पित आवेदन दिनांक 27 सितम्बर 2010 के समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में 15 से अधिक तिथियॉ बीत चुकी है तथा यह अद्यावधि संचालित है एवं इनकी निलंबन की अवधि डेढ़ वर्ष से अधिक हो चुकी है। 4. अत्एव सरकार के निर्णयानुसार तकनीकी आधार पर इन्हें तात्कालिक प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न निर्णय लिया जाता है :-
(i) इनकी निलंबन अवधि का विनियमन इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के अंतिम फलाफल के आधार पर नियमानुसार किया जायेगा।
(ii) निलंबन से मुक्त होने के उपरांत इनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।
(iii) इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही पूर्ववत् संचालित रहेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव।
——— 21 जनवरी 2011 सं॰ निग/सारा-2 (पथ)-31/2004-874 (एस)—श्री उमाशंकर सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, भवन अवर प्रमंडल संख्या-2, वैशाली, हाजीपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय को भवन अवर प्रमंडल संख्या-2, वैशाली के पदस्थापन काल में दिनांक 21 सितम्बर 2004 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरोे द्वारा रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर इनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-12/2004 दर्ज किया गया तथा विधि विभाग द्वारा दिनांक 20 अक्तूबर 2006 को इनके विरूद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गई। तद्आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-11828 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-11829 (एस) दिनांक 8 अक्तूबर 2007 द्वारा इन्हें अगले आदेश तक के लिए निलंबित करते हुए निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता देय होने का आदेश पारित किया गया। साथ ही विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11914 (एस), दिनांक 10 अक्तूबर 2007 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। 2. श्री सिंह, सहायक अभियंता द्वारा निलंबन से मुक्त करने के संबंध में समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 8 नवम्बर 2010 एवं दिनांक 5 अक्तूबर 2010 केे समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सिंह दिनांक 8 अक्तूबर 2007 से निलंबित हैं तथा इनकी निलंबन की अवधि तीन वर्ष पूरी हो चुकी है। तद्आलोक में सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-16814 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-16815 (एस), दिनांक 16 दिसम्बर 2010 द्वारा इन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए इनकी निलंबन अवधि का विनियमन इनके विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड के अंतिम फलाफल के आधार पर नियमानुसार किये जाने तथा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही पूर्वत संचालित रहने का आदेश पारित किया गया। 3. श्री सिंह, सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में इनके द्वारा पथ प्रमंडल, भागलपुर के पदस्थापन काल में कार्यपालक अभियंता के साथ अभद्र व्यवहार करने जैसे आरोपों के लिए संकल्प ज्ञापांक-13982 (एस) अनु0 दिनांक 5 दिसम्बर 2007 द्वारा अनुपूरक आरोप गठित किया गया। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1786 अनु0, दिनांक 25 नवम्बर 2009 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-1 को अप्रमाणित तथा अनुपूरक आरोप को प्रमाणित पाया गया। तद्नुसार मामले के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-1 के संबंध में दिये गये मंतव्य पर असहमति के बिन्दुओं को चिन्हित कर विभागीय पत्रांक-8972 (एस) अनु0 दिनांक 16 जून 2010 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा मांगी गई। 4. श्री सिंह, सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 1 जुलाई 2010 को समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के सम्यक् समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सिंह ने रिश्वत लेकर अनैतिक कार्य किया है। रिश्वत लेने एवं अन्य आरोपों के लिए इनके द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में अपने अनैतिक कार्य एवं ली गई रिश्वत को बाद का बहाना बनाकर (after thought) बचाने का असफल प्रयास किया गया है, जो कतई स्वीकार योग्य नहीं है। इस आधार पर सरकार के निर्णयानुसार इन्हें सहायक अभियंता के न्यूनतम प्रक्रम पर पदावनत करने का निर्णय लिया गया तथा विभागीय पत्रांक-11088 (एस) अनु0, दिनांक 30 जुलाई 2010 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से इस अनुमोदित प्रस्ताव पर सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गई। 5. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2561, दिनांक 5 जनवरी 2011 द्वारा श्री सिंह, सहायक अभियंताके विरूद्ध विभागीय दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गई है। अत्एव श्री उमाशंकर सिंह, सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए इन्हें निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) इन्हें सहायक अभियंता के न्यूनतम प्रक्रम पर पदावनत किया जाता है।
बिहार राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव।14 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011 3 फरवरी 2011 सं॰ निग/सारा-4 (पर्षद)-निग- 07/08-1300 (एस)—श्री श्रीधर प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार सम्प्रति सेवानिवृत्त को मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार के पदस्थापन काल में विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन में बरती गयी अनियमितताओं के लिए अधिसूचना संख्या-8610, दिनांक 1 जुलाई 2008 द्वारा निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-1102 (एस), दिनांक 19 फरवरी 2009 द्वारा उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई एवं दिनांक 31 जनवरी 2009 को सेवानिवृत्त होने के कारण उक्त विभागीय कार्यवाही को संकल्प ज्ञापांक-8602 (एस), दिनांक 6 अगस्त 2009 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया। श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन में इनके विरुद्ध गठित आरोपों को यद्यपि प्रमाणित नही माना गया, परंतु विभागीय समीक्षोपरांत सभी योजनाओं में मापी की जॉच किये वगैर भुगतान करने, अंतिम विपत्र का निष्पादन नियमानुसार नहीं करने, अन्य लोगों कोे लाभ पहुॅचाने के लिए अभिलेखों मे छेड़-छाड़ करने, निविदा प्रकाशन की सूचना का सही प्रकाशन नहीं करने एवं स्वीकृत कार्यों को विघटित कर प्रावैधिकी स्वीकृति के लिए श्री प्रसाद को दोषी पाया गया। उक्त असहमति के विन्दुओं को अंकित करते हुए श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक-1587 (एस) अनु0, दिनांक 29 जनवरी 2010 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। 2. श्री प्रसाद ने अपने पत्रांक-1, दिनांक 16 फरवरी 2010 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में अंकित किया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों को प्रमाणित नही पाया गया। विभागीय समीक्षा के निष्कर्ष तथा उसकी तकनीकी आधार की छाया प्रति उपलब्ध कराने के पश्चात ही ये अपना स्पष्टीकरण समर्पित कर सकेंगे। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री प्रसाद की यह सोची समझी रणनीति है, क्योंकि द्वितीय कारण पृच्छा में असहमति के विन्दुओं को स्पष्ट किया जा चुका है। इस आधार पर उनके इस स्पष्टीकरण को ही द्वितीय कारण पृच्छा मानते हुए इन्हें उक्त प्रमाणित आरोप के लिए दोषी मानते हुए इनके पेंशन से 50 प्रतिशत (पचास प्रतिशत ) पेंशन कटौती के दंड प्रस्ताव पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-6397 (एस) अनु0, दिनांक 3 मई 2010 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की मांग की गयी। 3. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2221, दिनांक 1 दिसम्बर 2010 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर आयोग द्वारा सहमति व्यक्त की गयी। अतएव श्री श्रीधर प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार सम्प्रति सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता, सतपुरा कॉलनी, वैशाली भवन के पास, पथ संख्या-1, मकान संख्या-14/ए0, पोस्ट-रमना, जिला- मुजफ्फरपुर के विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दंड संसूचित किया जाता हैः- (क) इनके पेंशन से 50 प्रतिशत (पचास प्रतिशत ) कटौती की जाय। 4. इनकी निलंबन-अवधि के संबंध में कारण पृच्छा प्राप्त कर अलग से निर्णय लिया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव।
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20 जनवरी 2011
सं0-निग/सारा-आरोप-82/09-804 (एस)—श्री परमानन्द त्यागी, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, दरभंगा, सम्प्रति प्रावैधिक सचिव, मुख्य अभियंता (या0), उत्तर बिहार उपभाग, पथ निर्माण विभाग, दरभंगा द्वारा पथ अंचल दरभंगा के पदस्थापन काल में विभागीय निदेशों का ससमय अनुपालन नहीं किये जाने के फलस्वरूप पथ प्रमंडल, समस्तीपुर के अंतर्गत वाजिदपुर-दलसिंहसराय-रोसड़ा पथ में अवस्थित पुल के अवांछित भारवाले वाहन के आवागमन के फलस्वरूप ध्वस्त हो जाने जैसे आरोपों के लिए विभागाीय संकल्प ज्ञापांक-722 (एस) अनु0 दिनांक 14 जनवरी 2010 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई तथा संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1390 (ई) अनु0, दिनांक 13 अप्रील 2010 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के सम्यक् समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-9194 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-9195 (एस), दिनांक 18 जून 2010 द्वारा इन्हें "चेतावनी" की सजा दी गई। 2. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री त्यागी, अधीक्षण अभियंता द्वारा समर्पित अपील आवेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-28.06. 10 के समीक्षोपरांत पाया गया कि इस अपील आवेदन में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जो उन्हें सुविचारित दी गई शास्ति को क्षान्त करने योग्य हो। 3. अत्एव सरकार के निर्णयानुसार इनके अपील आवेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-28.06.10 को अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव।15 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011
21 जनवरी 2011
सं॰ निग/सारा-उड़नदस्ता-आरोप- 40/2009-903 (एस)—श्री महेन्द्र राम, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, सहरसा सम्प्रति अधीक्षण अभियंता निलंबित, अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय को पथ अंचल, सहरसा के पदस्थापन काल में नारायणपुर चौक-एन0एच0-57 झिल्ला शाहपुर पृथ्वी पट्टी-छिट्टी-सतनपट्टी-शाहटोला-पंडित टोला जगदीशपुर-करजाईन बाजार (एन0एच0-106) पथ के कि0मी0 1-7, 8 (p), 9 (p), 10-13, 14 (p), 15 (p),16-21 एवं 22 (p) तक कुल 19-92 कि0मी0 में क्रॉस ड्रेनेज एवं पथ बचाव कार्य सहित IRQP कार्य वर्ष-2008-09 की निविदा के वित्तीय बीड को खोलने एवं संवेदक विशेष के पक्ष में दरों में हेर-फेर करने जैसी अनियमितताओं के मामले में कार्यपालक अभियंता, उड़दस्ता प्रमंडल संख्या-2, पथ निर्माण विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर इनको बुलाकर आरोपों के संदर्भ में सुना गया तथा इनका कोई defence नहीं पाये जाने के फलस्वरूप इन्हें विभागीय अधिसूचना संख्या-4754 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-4755 (एस), दिनांक 15 मई 2009 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के अंतर्गत तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के सुसंगत कंडिकाओं के अनुसार इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होने का आदेश पारित किया गया।
2. इनके विरुद्ध उक्त आरोपों के लिए आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर साक्ष्य सहित विभागीय पत्रांक-7789 (एस) अनु0, दिनांक 15 जुलाई 2009 द्वारा इनसे बचाव वयान मांगा गया। श्री राम, निलंबित अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-शून्य दिनांक 20 जुलाई 2009 द्वारा समर्पित बचाव वयान के समीक्षोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक-12103 (एस) अनु0, दिनांक 29 अक्तूबर 2009 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 3. सी0डब्लू0जे0सी0सं0-16249/10 महेन्द्र राम बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 05 अक्तूबर 2010 को पारित न्यायादेश के आलोक में श्री राम, निलंबित अधीक्षण अभियंता द्वारा निलंबन से मुक्त करने हेतु समर्पित आवेदन दिनांक 11 अक्तूबर 2010 के समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में 15 से अधिक तिथियॉ बीत चुकी है तथा यह अद्यावधि संचालित है एवं इनकी निलंबन की अवधि डेढ़ वर्ष से अधिक हो चुकी है।
4. अत्एव सरकार के निर्णयानुसार तकनीकी आधार पर इन्हें तात्कालिक प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न निर्णय लिया जाता है :-
(i) इनकी निलंबन अवधि का विनियमन इनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के अंतिम फलाफल के आधार पर नियमानुसार किया जायेगा।
(ii) निलंबन से मुक्त होने के उपरांत इनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।
(iii) इनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही पूर्ववत् संचालित रहेगी।
बिहार राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव।
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18 जनवरी 2011
सं0-निग/सारा-आरोप-N.H-70/09-709-(एस)—श्री ओम प्रकाश गुप्ता, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति तकनीकी सलाहकार अधीक्षण अभियंता का कार्यालय, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, डेहरी-ऑन-सोन से राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल , गोपालगंज के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-85 के कि0मी0 66 से 92 तक की खराब स्थिति के संबंध में अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा स्थल निरीक्षण कर स्थिति की जानकारी देने, दिनांक 18 अगस्त 2009 को आयोजित विभागीय मासिक समीक्षात्मक बैठक में उनके द्वारा सड़क की खराब स्थिति की स्वीकारोक्ति किये जाने एवं इस बैठक में पथ के सुधार के सख्त निर्देश दिये जाने के बावजूद उनके अवकाश पर चले जाने तथा प्रमंडल अंतर्गत सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंताओं पर नियंत्रण नहीं होने और कार्य का पर्यवेक्षण नहीं करने जैसे आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-3456 (एस) अनु0, दिनांक 28 अगस्त 2009 एवं पत्रांक-1183 (एस), दिनांक 23 अक्तूबर 2009 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई। 2. श्री गुप्ता, कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पत्रांक-शून्य दिनांक 23 दिसम्बर 2010 के समीक्षोपरांत पाया गया कि अपने अधीनस्थ पदाधिकारी/कर्मचारी पर न तो इनका नियंत्रण था और न ही इनके द्वारा कार्यों का समुचित पर्यवेक्षण ही किया गया। इस प्रकार श्री गुप्ता अपने दायित्वों के निर्वहन में असफल रहे। अपने अनाधिकृत अनुपस्थिति को इन्होंने स्वास्थ्य के खराब होने का कारण बताया। 3. अतः सरकार के निर्णयानुसार निम्न निर्णय लिया जाता है :- (i) इनकी दो वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव।16 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011
5 जनवरी 2011
सं0 निग/सारा-2 (पथ)- 74/2003-201 (एस)—श्री प्रमोद कुमार सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शाहाबाद पथ प्रमंडल आरा, सम्प्रति सेवा निवृत को शाहाबाद पथ प्रमंडल आरा के पदस्थापन काल में बिना सक्षम पदाधिकारी के आदेश के दायित्व मद में भुगतान, पथ में परिवर्तन, स्वार्थपूर्ति के लिए भुगतान, सरकारी राशि का दुर्विनियोग, धोखा-धड़ी एवं गबन, आदेश की अवहेलना तथा मनमानी करने, अनियमित भुगतान करने इत्यादि आरोपों के लिए अधिसूचना संख्या-2612 (एस) दिनांक-04.05.2000 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-8092 (एस), दिनांक 14 नवम्बर 2000 द्वारा दस आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसमें संकल्प ज्ञापांक-5228 (एस), दिनांक 31 जुलाई 2001 द्वारा सकड्डी-चॉदी पथ के रेस्टोरेशन कार्य प्राक्कलन के अनुरूप नही कराये जाने तथा गलत विपत्र तैयार कर कुल 10,37,194 रू0 का भुगतान कर वित्तीय अनियमितता बरते जाने संबंधी एक अनुपुरक आरोप सम्बद्ध किया गया।
2. श्री सिन्हा के विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन में आरोप संख्या-2,7,9 तथा 10 को प्रमाणित, एवं आरोप संख्या-6 तथा अनुपूरक आरोप-1 को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप संख्या-8 एवं अनुपूरक आरोप-1 को भी प्रमाणित पाया गया। तदोपरान्त संचालन पदाधिकरी द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोप सं0-2,6,7,9,10 तथा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए प्रमाणित पाये गये आरोप सं0-8 एवं अनुपूरक आरोप-1 के संबंध में असहमति के बिन्दु को अंकित करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए 10 प्रतिशत पेंशन की कटौती एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नही होने के संबंध में विभागीय पत्रांक-8906 (एस), दिनांक 2 दिसम्बर 2005 द्वारा श्री सिन्हा से द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी।
3. श्री सिन्हा के पत्रांक-शून्य दिनांक 14 जनवरी 2006 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के परिप्रेक्ष्य में 10 प्रतिशत पेंशन की कटौती को सरकार द्वारा अनुपातिक नही माना गया। तदुपरांत सरकार के आदेशोपरांत विभागीय पत्रांक-5661 (एस), दिनांक 2 मई 2007 द्वारा 25 प्रतिशत पेंशन की कटौती एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नही होने के संबंध में पुनः द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
4. श्री सिन्हा के पत्रांक-शून्य दिनांक 28 अगस्त 2008 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में उनके द्वारा मुख्य रुप से दुबारा द्वितीय कारण पृच्छा को औचित्यहीन बतातें हुए संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन से असहमत होने के कारणों का उल्लेख किये बिना द्वितीय कारण पृच्छा करना विधि सम्मत नही बताते हुए मामले को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत चलाने तथा आरोप के लिए दिय गये साक्ष्य को भी प्रश्नवाचक बताया गया। इसके साथ ही संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन जिसमें आरोप संख्या-2,7,9 एवं 10 को प्रमाणित बताया गया है, को भी प्रश्नवाचक बताया है। आरोप संख्या-2 के संबंध में भुगतान विभागीय रूप से कराये गये कार्यों के लिए अधीक्षण अभियंता के आदेश के उपरांत सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता द्वारा किये जाने, आरोप संख्या-6 एवं 7 के लिए अधीक्षण अभियंता की स्वीकृति होने, आरोप संख्या-7 के लिए विभाग द्वारा साक्ष्य स्वरूप तुलनात्मक विवरणी नहीं देने एवं निविदा का निष्पादन अधीक्षण अभियंता द्वारा करने, आरोप संख्या-9 के लिए मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा अनुमोदन एवं आर्यावर्त में प्रकाशन होन,े आरोप संख्या-10 के संबंध में अधीक्षण अभियंता की स्वीकृति होने तथा अनुपूरक आरोप के लिए संदेह का लाभ दिये जाने के संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन को उद्धत करते हुए साक्ष्य के रूप मे प्रतिवेदन लिखने वाले पदाधिकारी का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण नहीं कराये जाने, अगले बरसात से पूर्व पथ में कालीकरण नहीं कराये जाने के कारण पथ के क्षतिग्रस्त होने की बात कही गयी । श्री सिन्हा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर के विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके द्वारा कोई नया तथ्य नही दिया गया है। अधिकांश आरोपों के लिए अधीक्षण अभियंता की स्वीकृति का उल्लेख किया गया । तदेन अधीक्षण अभियंता भी इसमें मामलें में आरोपित रहे हैं और वर्तमान में झारखंड में पदस्थापित हैं। इस प्रकरण में श्री सिन्हा के विरुद्ध आरा-नवादा थाना कांड संख्या-85/2000 भी दर्ज है। चूॅकि श्री सिन्हा के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में कोई ऐसा तथ्य नही हैं जो इनके विरूद्ध प्रमाणित आरोपों को क्षांत कर सकता है अतएव वे प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हे दोषी पाते हुए इनकी पेंशन से पच्चीस प्रतिशत की कटौती तथा निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कोई भुगतान नही किये जाने पर सरकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। तदुपरांत विभागीय पत्रांक-5178 (एस) दिनांक 9 अप्रील 2010 द्वारा अनुमोदित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति/परामर्श की मॉग की गयी।
5. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2450, दिनांक 21 दिसम्बर 2010 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर आयोग द्वारा सहमति व्यक्त की गयी। अतएव श्री प्रमोद कुमार सिन्हा, सेवा निवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हें निम्न दंड संसूचित किया जाता है-17 (cid:18)बहार गजट, 16 फरवर(cid:15) 2011 (i) इनकी पेंशन से 25 (पच्चीस) प्रतिशत की कटौती की जाती है।
(ii) निलंबन अवधि में इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कोई भुगतान देय नही होगा, परंतु अन्य प्रयोजनार्थ यह कर्तव्य पर बितायी गयी अवधि परिगणित की जाएगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव।
———— अधीMक, सUचवालय मुhणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा (cid:25)का(cid:26)शत एवं मुRhत। (cid:18)बहार गजट, 48—571+100-डी0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in