(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
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(2) क्रय प्रक्रिया के लाभ ः- राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वासभूमि रहित सुयोग्य श्रेणी के परिवारों के आवासीय प्रयोजन के लिए आवश्यकतानुसार रैयती भूमि का क्रय लोक निधि से किया जाएगा।
प्रस्तावित क्रय से निम्नांकित लाभ परिकल्पित हैंः-
(i) लाभुक अपनी इच्छा, अभिरूचि एवं आवश्यकता के अनुसार भूमि का चयन कर सकेंगे जिसमें क्रेता-विक्रेता दोनों की रजामंदी रहेगी ;
(ii) त्वरित रूप से प्रश्नगत भूमि विक्रेता द्वारा क्रेता को अन्तरित की जा सकेगी। (iii) परस्पर सहमति से क्रय विक्रय की व्यवस्था से क्रयोपरान्त क्रेता की दखल-दिहानी सुगम होगी। (iv) भूमि अर्जन की प्रक्रियात्मक जटिलता से मुक्ति होगी तथा वास हेतु भूमि उपलब्ध कराना सुगम होगा।2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 माच/ 2011 स्पष्टीकरण :- 1. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के परिपत्र संख्या 1263(6)/रा0 दिनांक 10 दिसम्बर 2009 के अनुसार सुयोग्य श्रेणी से तात्पर्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग अनुसूची-I एवं अनुसूची-II के वासभूमि रहित परिवारों से है जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय प्रयोजन से 3 (तीन) डीसमल भूमि सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाना है।
स्पष्टीकरण :- 2. वासभूमि रहित महादलित परिवारों के लिए वासभूमि हेतु रैयती भूमि का क्रय बिहार महादलित विकास योजनान्तर्गत रैयती भूमि की क्रय नीति जो राज्य में दिनांक 1 जनवरी 2010 से प्रवृत है, के अन्तर्गत होगी ।
(3) खासमहाल हस्तक के अन्तर्गत सरकार के स्तर से रैयती भूमि के क्रय का प्रावधान :- इस परिप्रेक्ष्य में बिहार सरकार खासमहाल हस्तक, 1953 का नियम-2 (2) द्रष्टव्य है जिसके अनुसार सरकार निजी अनुबंध से क्रय कर भू-सम्पदा अर्जित कर सकती है। धारा-2 का उद्धरण निम्नवत् हैः-
Government estates- How acquired.— Estates may be acquired by Government in the following ways :-
(1) Purchase at revenue sale (Section 58 of Act XI of 1859). (2) Purchase by private contract. (3) Escheat in default of legal heirs. (4) Forfeiture to Government for certain offences against the State. (5) Resumption of island chars (Regulation XI of 1825). (6) Acquisition for public purposes. (7) Accretion to estates, the property of Government. (8) Resumption of lands hitherto held by zamindars for the performance of police duties when they are relieved of those duties.
(4) अतः गृहस्थल योजना के तहत् सुयोग्य श्रेणी के वासभूमि विहीन परिवारों के आवासीय प्रयोजन हेतु बिहार सरकार खासमहाल हस्तक, 1953 के नियम-2 (2) के तहत् रैयती भूमि का क्रय कर लाभुकों के साथ बन्दोबस्त करने का प्रस्ताव है।
(5)(क) निबन्धन हेतु रैयती भूमि के मूल्य का निर्धारण एवं विक्रेता को भुगतान :- निबंधन विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम प्राक्कलित बाजार मूल्य तथा उसमें उक्त न्यूनतम प्राक्कलित बाजार मूल्य की 50 % राशि को जोड़कर प्रश्नगत रैयती भूमि के मूल्य का निर्धारण करते हुए अंचलाधिकारी द्वारा भू-स्वामी विक्रेता को उसका भुगतान किया जाएगा।
(ख) वासरहित सुयोग्य श्रेणी के परिवार को वास हेतु 3 (तीन) डीसमल रैयती भूमि क्रय कर उपलब्ध कराने हेतु अधिकतम राशि 20,000/-(बीस हजार रूपया) प्रति तीन डिसमल भूमि प्रति परिवार होगी।
(ग) वैसे वास रहित सुयोग्य श्रेणी के परिवार, जो BPL श्रेणी में आते हैं तथा जिन्हें वास भूमि क्रय हेतु भारत सरकार एवं बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इंदिरा आवास योजना के तहत 5,000/- 5,000/- रूपया कुल 10,000/- रू0 प्रति परिवार राशि उपलब्ध करायी जानी है उन्हें भी रैयती भूमि क्रय हेतु राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा अधिकतम राशि 20,000/-(बीस हजार रूपया) प्रति तीन डिसमिल भूमि प्रति परिवार उपलब्ध करायी जायेगी। भारत सरकार एवं बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इंदिरा आवास योजना के तहत 5,000/- 5,000/- रूपया कुल 10,000/- रू0 प्रति परिवार की राशि प्राप्त होने पर उक्त राशि समुचित शीर्ष में जमा कर प्रतिपूर्त्ति (Reimburse) कर दी जायेगी। (6) भूमि क्रय हेतु वित्तीय व्यवस्था :- (क) सुयोग्य श्रेणी के परिवारों के वास भूमि हेतु 3 (तीन) डीसमल रैयती भूमि प्रति परिवार क्रय के लिए आवश्यक निधि योजना एवं विकास विभाग/वित्त विभाग के द्वारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को गृहस्थल योजना मद में बजट उपबंध के अन्तर्गत उपलब्ध होगी।
(ख) किसी वित्तीय वर्ष में इस मद में किए गए बजट उपबन्ध के आलोक में किस-किस जिले को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए तथा उस जिले को कितनी राशि आवंटित की जाए, इसे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा निर्धारित किया जायेगा। तदनुसार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग उस जिले को राशि आवंटित करेगा।
(ग) अंचल अधिकारी चयनित भूमि के लिए विक्रेताओं को भूमि क्रय का मूल्य बैंक चेक के माध्यम से उपलब्ध करायेंगे।
(घ) राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आवंटन से निम्नांकित कार्य अनुमान्य होंगे :-
(i) भूमि के यथा पूर्वोक्त निर्धारित मूल्य का भुगतान । (ii) सेल डीड राइटर्स को निबन्धन विभाग द्वारा समय-समय पर निर्धारित शुल्क का भुगतान। (iii) अंचल अधिकारी द्वारा नियोजित अमीनों का भुगतान।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 माच/ 2011 (iv) जबतक बिहार काश्तकारी अधिनियम की धारा-26(A)(ii) के अंतर्गत देय Land Lord's fees के विमुक्ति के सम्बन्ध में निर्णय नहीं होता है तबतक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को प्राप्त आवंटन से इसका भुगतान किया जाएगा।
(v) कार्य सम्पादन हेतु आकस्मिक मद में तथा दस्तावेजों के Scanning पर होने वाला व्यय भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा इस योजना के तहत आवंटित राशि से अनुमान्य होगा। (7) भूमि क्रय हेतु मुद्रांक भुगतान से छूट ः- भारतीय मुद्रांक अधिनियम की धारा-29 (c) के अनुसार हस्तांतरण पत्र (Conveyance) के मामले में हस्तांतरिती (Grantee) को मुद्रांक ड्यूटी भुगतान करना है। वर्त्तमान मामले में प्रथम संव्यवहार में सरकार भूमि क्रय कर रही है। तथापि भारतीय मुद्रांक अधिनियम की धारा-3 के द्वितीय परन्तुक के खण्ड (1) के अनुसार सरकार के द्वारा या सरकार के पक्ष में निष्पादित किसी भी लिखत पर मुद्रांक ड्युटी देय नहीं होगा। तदनुसार इस नीति के तहत रैयती भूमि क्रय करने पर सरकार के पक्ष में निष्पादित लिखत पर मुद्रांक ड्युटी सरकार पर प्रभार्य नहीं होगा।
नोट :- (i) भारतीय मुद्रांक अधिनियम, 1899 की धारा-29(9) के अनुसार अनुसूची-I के आर्टिकल 58 (बन्दोवस्ती) में निष्पादक एवं 29(c) के अनुसार हस्तान्तरण-पत्र के हस्तान्तरिती के द्वारा मुद्रांक शुल्क देय है। इस त्रिपक्षीय निर्विवाद विक्रय-पत्र में एक साथ सम्पन्न दोनों संव्यवहारों के लिए सरकार द्वारा ही मुद्रांक शुल्क देय है। अतएव भारतीय मुद्रांक अधिनियम, 1899 की धारा-3 के द्वितीय परन्तुक की कंडिका-1 के आलोक में मुद्रांक शुल्क की देयता से विमुक्त किया गया है। (ii) एस0 ओ0-900, दिनांक 18 दिसम्बर 1990 द्वारा प्रकाशित निबंधन शुल्क तालिका में वर्णित विमुक्तियों की कंडिका (1) के अनुसार सरकार के द्वारा या सरकार के पक्ष में निष्पादित ऐसे विलेखों पर जिनमें मुद्रांक ड्युटी देय नहीं हो, निबंधन शुल्क भी विमुक्त रहेगा।
(iii) उपर्युक्त लिखत/विलेखों को कम्प्यूटरीकृत निबन्धन व्यवस्था के अन्तर्गत जिला स्कोर द्वारा प्रभार्य शुल्क से विमुक्त करने हेतु निबंधन विभाग से अनुरोध किया गया है। जबतक बाइस्कोर एवं जिला स्कोर द्वारा कम्प्यूटरीकृत निबंधन व्यवस्था के अन्तर्गत जिला स्कोर द्वारा प्रभार्य सेवा शुल्क से विमुक्ति का निर्णय नहीं ले लिया जाता है तबतक प्रभार्य शुल्क संबंधित पक्ष (लाभार्थी) द्वारा भुगतान किया जाएगा।
(8) प्रति परिवार भूमि क्रय की अधिसीमा एवं अवस्थिति :- सरकार द्वारा अधिकतम 3 डीसमल प्रति परिवार के अनुसार भूमि क्रय कर उस भूमि को उसी सेल डीड के द्वारा लाभुक के साथ बन्दोबस्त किया जायेगा। उपर्युक्त भूमि ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थित होगी।
(9) मानक सेल डीड में निबन्धन-परिशिष्ट-1 पर संलग्न मानक सेल डीड (Standard sale deed) में भूमि का निबंधन किया जायेगा।
(10) लाभुक की अवस्थितिः- लाभुक उसी मौजा या निकटवर्ती मौजों का वाशिंदा होना चाहिए। (11) क्रय भूमि की बन्दोबस्ती में महिलाओं के लिए आरक्षणः- इस योजना के तहत क्रय की गयी शत् प्रतिशत् भूमि संबंधित लाभुक परिवारों की महिलाओं के साथ बन्दोबस्त की जायगी। यदि लाभुक के परिवार में महिला नहीं हो तो पुरूष के साथ भूमि की बन्दोबस्ती की जायेगी। (12) क्रय की गई भूमि के अन्तरण पर रोक :- लाभुक या उसके उत्तराधिकारी द्वारा क्रय की गई भूमि का किसी भी प्रकार से अन्तरण नहीं किया जा सकता है। परन्तु इस नीति के अन्तर्गत क्रय की गई भूमि लाभुक के उत्तराधिकारियों को अनुवांशिक रूप से प्राप्तव्य (heritable) होगी। (13) क्रय की गई भूमि का उपयोग ः- लाभुक एवं उसके उत्तराधिकारी द्वारा क्रय की गयी भूमि का उपयोग मूलतः आवासीय प्रयोजन से किया जाएगा। तथापि, एकल या संकुल पारिवारिक आवासन में भूमि के आवासीय उपयोग के बाद, उपलब्ध रिक्त भूमि पर लाभुक/लाभुकों के द्वारा लघु एवं कुटीर उद्योग, लघु वाणिज्य-व्यवसाय, फलदार या अन्य वृक्षारोपण, सब्जी, मसालों आदि की खेती, पशुपालन, सरकार द्वारा सृजित सामुदायिक हित की संरचना का निर्माण आदि अनुमान्य होंगे। (14) क्रय की गई भूमि से सम्बन्धित सूचना का संधारणः-अंचल अधिकारी एक अलग पंजी में इस योजना के तहत् क्रय की गई भूमि से सम्बन्धित सम्पूर्ण विवरणी मौजा वार संधारित करेंगे तथा उसकी एक प्रति जिला कार्यालय में भी संधारित की जायेगी। (15) क्रय की गयी भूमि के दस्तावेजों एवं रोकड़बही का संधारणः- दस्तावेजों, रोकड़बही आदि की मूल प्रति अंचल कार्यालय में संधारित होगी तथा सुरक्षा प्रयोजन से उसकी दूसरी प्रति भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के कार्यालय में Scan करके संधारित की जाएगी। इस कार्य के सम्पादन हेतु आकस्मिक मद में सम्भावित व्यय भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा इस योजना के तहत आवंटित राशि से अनुमान्य होगा। (16) क्रय की गयी भूमि का संरक्षण एवं लाभुकों के हितों की रक्षाः-गृहस्थल योजना के तहत वास रहित सुयोग्य श्रेणी परिवार के वास हेतु क्रय की गयी भूमि के संरक्षण एवं लाभुक के हितों के रक्षा का दायित्व सम्बन्धित भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, जिसके क्षेत्राधिकार में प्रश्नग्त भूमि अवस्थित होगी, का होगा।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 माच/ 2011 4 (17) लाभुक के सहायतादाता (Facilitator) के रूप में अंचलाधिकारी के दायित्वः-
(i) लाभुक द्वारा प्रश्नगत् भूमि (3 डीसमल) की तलाश करने में अंचलाधिकारी सहायतादाता (facilitator) की भूमिका का निर्वहण करेंगे।
(ii) अंचलाधिकारी अंचलों में संधारित सर्वेक्षित भूमिहीन सुयोग्य श्रेणी परिवारों की सूची के आलोक में उन्हें इस आशय की सूचना भेजेंगे कि सरकारी लागत पर उन्हें प्रति परिवार 3 डीसमल की दर से वासगीत प्रयोजन से रैयती भूमि निबंधन विभाग द्वारा निबंधन हेतु निर्धारित न्यूनतम प्राक्कलित बाजार मूल्य तथा उसमें उक्त मूल्य की 50% राशि जोड़कर भुगतान करते हुए सरकार द्वारा क्रय करके उपलब्ध करायी जायेगी। अतः वे संभावित विक्रेताओं से सम्पर्क स्थापित कर भूमि/विक्रेता की पहचान करेंगे एवं पहचानोपरान्त अंचल कार्यालय में इस प्रयोजन से गठित विशेष कोषांग में भूमि तथा विक्रेता की उपलब्ध विवरणी उपलब्ध करायेंगे।
(iii) प्रश्नगत् भू-खण्ड का चयन लाभुक सम्प्रति जिस मौजा में निवास कर रहा हो, उसमें अथवा उसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र से ही की जायेगी।
(iv) भूमि क्रय में राजस्व विभाग द्वारा पूर्व से चिह्नित रैयती भूमि को भी ध्यान में रखा जायगा। यदि लाभुक या भू-धारी इच्छुक नहीं हों तो लाभुक द्वारा चिह्नित एवं विक्रेता से तय की गयी अन्य भूमि का क्रय किया जाएगा।
(v) लाभुकों का आवेदन पत्र प्राप्त होने पर अंचलाधिकारी एक सप्ताह के अन्दर अपने राजस्व अभिलेखों से विक्रेता के स्वत्वाधिकार की जाँच कर लेंगे तथा स्थलीय जांच में विचारगत भू-खंड पर विक्रेता के दखल का सत्यापन भी कर लेंगे। सही पाये जाने वाले समस्त मामलों का निबन्धन अवर निबन्धन/निबन्धन कार्यालय परिसर में शिविर आयोजित करके किया जाएगा। शिविर आयोजित करने की सूचना निबंधन कार्यालय एवं बैंकाें सहित सभी संबंधित को दी जायेगी।
(vi) अंचलाधिकारी यह प्रमाण पत्र निर्गत करेंगे जिसमें अंकित रहेगा कि किन-किन राजस्व अभिलेखों के आलोक में विक्रेता का विक्रय अधिकार पाया गया है। उक्त प्रमाण पत्र में दखल स्तम्भ देकर आवश्यक प्रविष्टि भी की जाएगी। वे यह भी प्रमाणित करेंगे कि प्रश्नगत् भूमि का क्रय वासरहित परिवारों के लिए गृहस्थल योजना के तहत किए जाने के प्रयोजन से उपर्युक्त प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है। प्रमाण पत्र पूर्वाग्रह रहित (without prejudice) निर्गत किया जायेगा। (vii) अंचलाधिकारी, अंचल निरीक्षक एवं हल्का कर्मचारी प्रश्नगत् भूमि की खरीद-बिक्री की निर्धारित तिथि को संबंधित अवर निबंधन/निबंधन कार्यालय स्थित शिविर में आवश्यक कागजात के साथ स्वयं उपस्थित रहेंगे।
(viii) संबंधित अंचलाधिकारी जमीन की नापी, सीमांकन एवं संबंधित सेल डीड में संलग्न करने के लिए प्रश्नगत् भू-खण्ड का स्केच मैप तैयार करने के लिए अपने स्तर से उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार वांछित संख्या में अमीनों को चिह्नित एवं कार्यरत करायेंगे। प्रत्येक अमीन को रू0 200/- (दो सौ रूपए) प्रति भूखण्ड (plot) पारिश्रमिक अनुमान्य होगा।
(ix) अंचलाधिकारी संबंधित विक्रेता से इस आशय का शपथ-पत्र प्राप्त कर लेंगे कि उन्हें बिक्री का अधिकार है तथा जमीन अवभार मुक्त (encumbrance- free) है।
(x) अंचलाधिकारी निबंधन कार्यालय से प्रश्नगत भूमि का अवभार मुक्त प्रमाण पत्र (non- encumbrance certificate) प्राप्त करेंगे।
(xi) निबंधन शिविर के दिन क्रेता एवं विक्रेता की पहचान के लिए पंचायत के वार्ड सदस्य एवं पंच सक्षम होंगे। अगर दोनों में कोई उपलब्ध नहीं हों तो कोई भी ग्रामवासी उपर्युक्त पहचान कर सकेंगे। पहचान की कार्रवाई अभिलेखबद्ध की जाएगी।
(xii) अंचलाधिकारी विक्रेता को यथा पूर्वोक्त निर्धारित बाजार मूल्य Post dated चेक के द्वारा भूमि के निबन्धन के दिन भुगतान करेंगे एवं इस दरम्यान दाखिल-खारिज तथा दखल-दिहानी की आवश्यक कार्रवाई पूरी करेेंगे।
(xiii) अंचलाधिकारी क्रय-विक्रय शिविर को संबंधित निबंधन कार्यालय में लगाने की तिथि एवं समय निर्धारित करेंगे एवं सभी संबंधित को औपचारिक रूप से सूचित करेंगे।
(xiv) सेल डीड के साथ क्रय किए जाने वाले भू-खण्ड का स्केच मैप भी संलग्न किया जायेगा।5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 माच/ 2011 (18) अनुश्रवण, पर्यवेक्षण एवं मूल्यांकनः- निम्नांकित स्तरों पर गृहस्थल योजना अन्तर्गत वासरहित सुयोग्य श्रेणी के परिवारों के आवासीय प्रयोजन हेतु वास भूमि क्रय योजना के क्रियान्वयन के अनुश्रवण एवं समकालीन मूल्यांकन (Concurrent evaluation) के लिए समितियाँ गठित की जायेंगी तथा यथावश्यक अनुदेश निर्गत किए जाएंगे :-
| क्रमांक | स्तर | समिति के गठन का दायित्व एवं अध्यक्षता |
| 1 | प्रमण्डल | प्रमण्डलीय आयुक्त |
| 2 | जिला | समाहर्त्ता |
| 3 | अनुमण्डल | अनुमण्डल पदाधिकारी |
प्रमण्डलीय आयुक्त, समाहर्त्ता तथा संबंधित अनुमण्डल पदाधिकारी इस नीति के कार्यान्वयन में स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं के निराकरण हेतु समिति में विचार-विमर्श कर आवश्यक कारवाई करेंगे।
(19) बिहार गृहस्थल योजनान्तर्गत रैयती भूमि की क्रय नीति संकल्प निर्गत की तिथि से प्रभावी होगी। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सी0 अशोकवर्धन, प्रधान सचिव।6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 माच/ 2011
निर्विवाद विक्रय-पत्र
1. प्रथम पक्ष का नाम एवं पूरा पता :-नाम-..........................................................................................................................
पिता/पति-.................................................................................ग्राम/मुहल्ला-...................................................................
वार्ड नं0-........................................................थाना-............................................पंचायत-............................................................
अंचल-.........................................................पोस्ट-...........................................जिला-...............................................................
(बिहार), राष्ट्रीयता-भारतीय।
2. द्वितीय पक्ष का नाम एवं पूरा पता :- श्री.......................................................................................... अंचलाधिकारी...................................................................................
अंचल, जिला-...................................................................................वास्ते बिहार सरकार।
3. तृतीय पक्ष का नाम एवं पूरा पता :-नाम-........................................................................................................................... पिता/पति-................................................................................ग्राम/मुहल्ला-...................................................................................
वार्ड नं0-........................................................थाना-...................................................पंचायत-............................................................
अंचल-.................................................................पोस्ट-...........................................जिला-.....................................................(बिहार), राष्ट्रीयता-भारतीय।
4. लेख्य प्रकार :-निर्विवाद विक्रय-पत्र।
5. प्रतिफल की राशि जिसे द्वितीय पक्ष द्वारा प्रथम पक्ष को भुगतान किया गया :-
मो0- ....................................................../-रू0 (शब्दों में) ................................................................................................................ रूपया मात्र।
6. सम्पत्ति का सम्पूर्ण विवरण जिसे प्रथम पक्ष द्वारा द्वितीय पक्ष को बेचा गया तथा द्वितीय पक्ष द्वारा तृतीय पक्ष को स्थायी बन्दोबस्त किया गया :-
मौजा-....................................परगना-...................................सर्वे रेवेन्यू थाना-..............................अंचल-...............................
जिला-...............................जिसका थाना नं0-.........................तौजी नं0-............................खाता नं0-.................................
खेसरा नं0-....................................। यह सम्पत्ति अवर-निबंधन कार्यालय...................................................तथा जिला निबंधन कार्यालय...............................................के क्षेत्राधिकार में अवस्थित है, जिसका वार्षिक लगान मो0-..........................................
अलावे सेस, बिहार सरकार को अंचलाधिकारी,................................................अंचल, के माध्यम से भुगतान किया जाता है, जिसका नापी एवं चौहद्दी निम्न प्रकार है :-
नापी
उत्तर-
दक्षिण-
पूरब -
पश्चिम-
चौहद्दी
उत्तर - दक्षिण- पूरब - पश्चिम-7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 माच/ 2011 उपर्युक्त भू-खंड का स्केच मैप इस दस्तावेज के साथ अनुलग्न है। उपरोक्त वर्णित सम्पत्ति प्रथम पक्ष को दस्तावेज सं0-................................वर्ष-.............................................. जो निबंधन कार्यालय...........................................में निबंधित हुआ, से प्राप्त है/उत्तराधिकार में प्राप्त सम्पत्ति है, जिसपर प्रथम पक्ष का वर्त्तमान समय तक निर्विवाद कब्जा है एवं सरकार के राजस्व कार्यालय के रजिस्टर-II में प्रथम पक्ष के नाम से अद्यतन नाम दर्ज है। तृतीय पक्ष, जो सुयोग्य श्रेणी के वासभूमि रहित परिवार के सदस्य हैं, को बिहार सरकार के संकल्प सं0-................................दिनांक-....................................से निर्गत बिहार गृहस्थल योजनान्तर्गत रैयती भूमि की क्रय की नीति, 2011 के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा 3 (तीन) डिसमिल जमीन स्थायी बन्दोबस्त करने हेतु जमीन की आवश्यकता थी। राज्य सरकार की ओर से द्वितीय पक्ष, प्रथम पक्ष से ............................../रू0 में जमीन खरीदने की बात तय होने के उपरांत प्रथम पक्ष को प्रतिफल की राशि द्वितीय पक्ष द्वारा चेक/ड्राफ्ट सं0-........................................ ..............दिनांक-.....................................................जो...............................................................में भुगतेय है, भुगतान कर दिया गया है। अब द्वितीय पक्ष से विक्रय राशि प्राप्त कर प्रथम पक्ष ने द्वितीय पक्ष, बिहार सरकार के पक्ष में विक्रय विलेख निष्पादित करना आवश्यक समझा। इस उद्देश्य से प्रथम पक्ष ने द्वितीय पक्ष के नाम यह दस्तावेज निष्पादित कर दिया। द्वितीय पक्ष को इस दस्तावेज द्वारा प्राप्त उपरोक्त वर्णित सम्पत्ति तत्काल तृतीय पक्ष के पक्ष में द्वितीय पक्ष द्वारा इस शर्त्त के साथ स्थायी बन्दोबस्त किया जाता है कि इस सम्पत्ति का उपयोग तृतीय पक्ष और उनके उत्तराधिकारियों द्वारा केवल आवासीय उद्देश्य के लिए किया जायेगा। तृतीय पक्ष अथवा उनके उत्तराधिकारी अन्य किसी व्यक्ति के नाम बिक्री/दान या किसी प्रकार का हस्तान्तरण नहीं करेंगें। तृतीय पक्ष द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के नाम उपर्युक्त संपत्ति की की गयी बिक्री/दान या हस्तान्तरण कानूनन अवैध होगा। उपरोक्त सम्पत्ति किसी भी प्रकार के विध्न, प्रतिबन्ध, भार एवं बाधा आदि से पूर्णतया मुक्त एवं स्वच्छ है। निबंधन के पश्चात् द्वितीय पक्ष द्वारा तृतीय पक्ष के नाम से भूमि का नामांतरण कर दिया जाएगा। अब प्रथम पक्ष का यह दायित्व होगा कि उनके या उनके उत्तराधिकारियों द्वारा उपरोक्त वर्णित सम्पत्ति पर किसी प्रकार का दावा नहीं करेंगे एवं तृतीय पक्ष का यह दायित्व होगा कि उनके या उनके उत्तराधिकारियों द्वारा इस सम्पत्ति का केवल निजी आवासीय उपयोग किया जाएगा तथा किसी भी परिस्थति में अन्य किसी व्यक्ति को हस्तान्तरित नहीं किया जाएगा। यह दस्तावेज आज दिनांक-............................................................को प्रथम पक्ष द्वारा द्वितीय पक्ष के पक्ष में तथा द्वितीय पक्ष के द्वारा तृतीय पक्ष के पक्ष में निष्पादित किया गया ताकि प्रमाण रहे। गवाहगण :- 1.
प्रथम पक्ष का हस्ताक्षर एवं तारीख 2.
द्वितीय पक्ष का हस्ताक्षर एवं तारीख
तृतीय पक्ष का हस्ताक्षर एवं तारीख
———— अधी0क, स1चवालय मु3णालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा (cid:27)का(cid:28)शत एवं मु53त। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 68-571+1000-डी0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in