Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 02 May 2011

Published 02 May 2011

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2011-05-02.166
Languages
English, Hindi
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जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, मधुबनी

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संकल्प

14 दिसम्बर 2009

पारिवारिक सर्वेक्षण प्रपत्र क के ऑकड़ों के कम्प्यूटीकरण कार्य हेतु निविदा के अनुसार न्यूनतम दर पर मेसर्स मिथिला देषम्‌ सेवा समिति, मधुबनी को इस कार्यालय के पत्रांक 86/जि0, दिनांक 15 जनवरी 2009 के द्वारा कार्य आवंटित किया गया था। साथ ही पत्रांक 604, दिनांक 02 मई 2009 एवं 701, दिनांक 18 मई 2009 के द्वारा कार्य प्रारम्भ करने का निदेष संस्था को दिया गया। लेकिन संस्था द्वारा इस दिषा में कोई कार्रवाई नहीं की गई और अंततः क्रय समिति की बैठक दिनांक 22 मई 2009 में लिए गये निर्णय के आलोक में मेसर्स मिथिला देषम्‌ सेवा समिति, मधुबनी को इस कार्यालय के संकल्प ज्ञापांक 2398, दिनांक 23 सितम्बर 2009 के द्वारा काली सूची में डालने का आदेष निर्गत किया गया।

उक्त संस्था द्वारा पत्रांक 09, दिनांक 15 अक्तूबर 2009 द्वारा यह सूचित किया गया कि लोक सभा चुनाव 2009 के कारण भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिनांक 16 अप्रील 2009 तक स्थापित आदर्ष आचार संहिता लागू रहने के कारण कार्य में प्रगति नहीं हुई। संस्था द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि आचार संहिता के बाद सामग्रियों के मूल्य में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण वे इस कार्य को स्वीकृत दर पर करने में असमर्थ है, जिसकी सूचना उन्होंने पूर्व में ही अपने आवेदन दिनांक 19 मई 2009 द्वारा समर्पितकर दी थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी संस्था को काली सूची में डालने से पूर्व किसी भी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं पूछा गया। उनका यह भी कहना है कि उनकी संस्था कला, संस्कृति, षिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में अच्छा कार्य किया है तथा 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 मई 2011 SGSY अन्तर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों के प्रषिक्षण में अहम भूमिका निभाई है। अतः उनकी संस्था को काली सूची से मुक्त किया जाए। सारे घटनाक्रम पर सरकारी वकील से राय प्राप्त की गई। उन्होंने अपने मन्तव्य में अंकित किया है कि इस संस्था के आचरण के विरुद्ध पूर्व से कोई षिकायत नहीं है तथा पहली बार निविदा में संस्था ने भाग लिया है। अतः इनके आचरण के संबंध में इस प्रकार का कठोर निर्णय लिया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है। उन्होनें संविधान के अनुच्छेद 14 एवं माननीय पटना उच्च न्यायालय के आदेष की व्यवस्था का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध माना है और अंततः विभिन्न विन्दुओं पर गुण एवं दोषों की विवेचना करते हुए संस्था को शैषवावस्था में रहने, पहली बार निविदा में भाग लेने एवं एका-एक उन्हें काली सूची में डाले जाने को नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध बताते हुए काली सूची से मुक्त करने का सुझाव दिया है। संस्था के स्पष्टीकरण एवं सरकारी वकील के मन्तव्य पर समीक्षोपरान्त इस संस्था को चेतावनी के साथ काली सूची से मुक्त किया जाता है, लेकिन इनके द्वारा जमा की गई जमानत की राषि रु0 10000 (दस हजार रु0 मात्र) जब्त की जाती है।

आदेष दिया जाता है कि इसे जिला गजट एवं राज्य गजट के असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से,

(ह0) अस्पष्ट,

उप-विकास आयुक्त।

———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 166-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 02 May 2011. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2011-05-02.166/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2011-05-02.166.