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सं॰ 5/सह0/ फ॰ बी॰-23/2010 - 4655 — भारत सरकार कृषि मंत्राालय, कृषि एवं सहकारिता विभाग, नई दिल्ली के पत्राांक 13011/02/2008-क्रेडिट-II (Pt) दिनांक 17 सितम्बर 2010 से प्राप्त प्रशासनिक स्वीकृति तथा इसी क्रम में भारत सरकार के पत्राांक 13011/02/2008-क्रेडिट-II दिनांक 22 सितम्बर 2010 पत्राांक 13011/02/ 2008-क्रेडिट-II (Pt) दिनांक 28 सितम्बर 2010 एवं राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के अनुश्रवण हेतु विकास आयुक्त, बिहार, पटना की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति की दिनांक 23 सितम्बर 2010 की आयोजित बैठक में लिये गये निर्णय तथा एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लि॰, पटना के पत्राांक 634, दिनांक 15 अक्तूबर 2010 एवं 650, दिनांक 26 अक्तूबर 2010 के आलोक में मोडिफायड राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS) रबी 2010-11 मौसम में निम्नरूपेण लागू करने का निर्णय लिया गया हैः-
| क्रम | बीमा हेतु चयनित जिलें | बीमा हेतु चयनित फसलें |
| 1 | मुंगेर | गेहूँ, चना, रबी-मक्का, मसूर एवं राई-सरसों। |
| 2 | जमुई | गेहूँ, चना, अरहर, राई-सरसों एवं ईख। |
| 3 | शिवहर | गेहूँ, रबी-मक्का, मसूर, राई-सरसों एवं ईख। |
एवं अन्य फसलों के लिए अंचल निर्धारित की जाती है। गेहूँ फसल हेतु चयनित जिले एवं अंचलों की सूची निम्नवत् है :-
(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 6 जून 2011 2| क्रम | जिला का नाम | आयोजित अंचलों का नाम एवं संख्या |
| 1 | मुंगेर | मुंगेर सदर, जमालपुर, धरहरा, तारापुर, खगड़पुर, संग्रामपुर, टेटियाबम्पर एवं बऱियारपुर - 8 अंचल। |
| 2 | जमुई | जमुई, खैरा, सिकन्दरा, लक्ष्मीपुर, झाझा, सोनो, चकाई, अलीगंज, वरहट एवं गिद्धौर - 10 अंचल। |
| 3 | शिवहर | शिवहर, पिपराही, तरियानी, डुमरी-कटसरी एवं पुरनहिया - 5 अंचल। |
2॰ इस योजना का कार्यान्वयन भारत सरकार द्वारा निर्गत मार्ग निर्देशिका में निदेशित विहित शर्तों के तहत किया जाएगा। भारत सरकार के एतद् सम्बंधी पत्रा एवं बीमा कंपनी से प्राप्त पत्रा के आलोक में इस योजना की कुछ प्रमुख शर्त्तें उल्लेखनीय हैं :-
(i) कुल देय प्रीमियम की राशि में कृषकों द्वारा भुगतान की गई प्रीमियम की राशि के पश्चात् अवशेष प्रीमियम की राशि अनुदान के रूप में 50ः50 के अनुपात में केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी।
(ii) बीमित राशि एवं फसल कटनी प्रयोग के आंकडे़ं के आधार पर क्षतिपूर्ति की राशि की गणना पूर्णतः एग्रीकल्चर इंश्योेरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰, पटना द्वारा किया जाएगा।
(iii) ऋणी कृषकों हेतु यह योजना अनिवार्य है जबकि गैर-ऋणी कृषकों के लिए यह योजना स्वैच्छिक है। इस योजना के तहत ऋणी कृषक से आशय उन कृषकों से है जिनका बैंकों द्वारा साख सीमा 31 दिसम्बर 2010 तक स्वीकृत कर दिया गया है।
(iv) ऋणी कृषक अपनी फसलों का बीमा 31 दिसम्बर 2010 तक निकट के केन्द्रीय सहकारी बैंक/क्षेत्राीय ग्रामीण बैंक/वाणिज्यिक बैंक की शाखाओं के माध्यम से करा सकेंगे। एतद संबंधी घोषणा पत्रा प्रीमियम की राशि के साथ बैंकों द्वारा बीमा एजेंसी को 31 जनवरी 2011 तक निश्चित रूप से प्राप्त करा दिया जायेगा।
(v) गैर-ऋणी कृषक दिनांक 31 दिसम्बर 2010 तक बीमा हेतु चयनित फसलों का बीमा निकट के केन्द्रीय सहकारी बैंक/क्षेत्राीय ग्रामीण बैंक/वाणिज्यिक बैंक की शाखाओं के माध्यम से करा सकेंगे। एतद संबंधी घोषणा पत्रा दिनांक 31 जनवरी 2011 तक प्रीमियम की राशि के साथ निश्चित रूप से संबंधित बैंक बीमा कम्पनी को उपलब्ध करायेंगे।
3॰ बीमित राशि :-
(क) ऋणी कृषकों के लिए बीमित राशि कृषक द्वारा किसी फसल विशेष हेतु उसके द्वारा घोषित उत्पादन क्षेत्राफल एवं प्रतिइकाई क्षेत्राफल अधिसूचना में अंकित बीमित राशि के गुणनफल के बराबर होगी जिसे कृषक के इच्छानुसार थ्रेशोल्ड उपज के मूल्य तक बढ़ाया जा सकता है। थे्रशोल्ड उपज मूल्य के प्रति इकाई क्षेत्राफल हेतु अधिसूचना के साथ संलग्न विवरणी में अंकित बीमित राशि से कम होने की दशा में अधिसूचना में प्रति इकाई क्षेत्रा हेतु अंकित बीमित राशि अनुमान्य होगी।
कृषक यदि चाहे तो थे्रशोल्ड उपज मूल्य के 100 प्रतिशत से अधिक औसत उपज के 150 प्रतिशत मूल्य तक की राशि का बीमा करा सकते हैं, परन्तु अंतर की बीमित राशि पर कोई प्रीमियम अनुदान देय नहीं होगा।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 6 जून 2011 (ख) गैर-ऋणी कृषकों के लिए बीमित राशि थ्रेशोल्ड उपज के मूल्य तक होगी। कृषक अपनी इच्छानुसार थे्रशोल्ड उपज के मूल्य के 100 प्रतिशत से अधिक औसत उपज के 150 प्रतिशत मूल्य तक की राशि का बीमा करा सकते हैं, परन्तु इस अंतर की बीमित राशि पर कोई प्रीमियम अनुदान देय नहीं होगा। 4॰ प्रीमियम दर का निर्धारण - एग्रीकल्चर इन्श्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰ पटना द्वारा उपलब्ध कराई गई विवरणी के अनुसार इस योजना के तहत् जिलावार, फसलवार कुल बीमित राशि प्रीमियम की दर की विवरणी अनुलग्नक-1 के रूप में सुलभ संदर्भ हेतु संलग्न है।
राज्य सरकार का दायित्व मात्रा प्रीमियम अनुदान तक सीमित है, सम्पूर्ण क्षतिपूर्ति की राशि बीमा कंपनी द्वारा वहन की जायगी।
5॰ फसल कटनी प्रयोग की इकाई - इस योजना के तहत् गेहूँ फसल हेतु फसल कटनी प्रयोग की इकाई ग्राम पंचायत तथा अन्य फसलों हेतु ईकाई अंचल रहेगी। पंचायत स्तर पर न्यूनतम 8 तथा अंचल स्तर पर न्यूनतम 16 फसल कटनी प्रयोग, निदेशक अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार, पटना द्वारा निश्चित रूप से सम्पादित कराये जायेंगे। यदि किसी कारण से निर्धारित संख्या में फसल कटनी प्रयोग के आँकड़े उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, वैसी स्थिति में निकट की इकाई के अधिकतम उपज दर के आँकड़े के आधार पर बीमा कंपनी फसल क्षति का आकलन सुनिश्चित करेगी।
6॰ क्षतिपूर्ति - प्रतिकूल मौसम के कारण सामान्य उपज में 50 प्रतिशत की कमी होने की स्थिति में दावा के 25% तक की राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा अग्रिम रूप में किया जायगा, जो कुल देय दावा के साथ समायोजित कर लिया जायगा।
यदि प्रीमियम एवं दावा का अनुपात 1ः5 से अधिक होता है, तब सरकार द्वारा बीमा कंपनी को संरक्षण प्रदान किया जायगा। इस तरह के दावे की क्षतिपूर्ति हेतु केन्द्र एवं राज्य सरकार के 50ः50 के अंशदान से राष्ट्रीय स्तर पर एक कोष का गठन किया जायगा।
7॰ गैर-ऋणी कृषकों के फसलों का बीमा करने से पूर्व बैंक द्वारा निम्नांकित बातों का अनुपालन करना आवश्यक होगा :-
(क) बीमा के इच्छुक कृषक का बैंक बचत खाता रहना अनिवार्य है।
(ख) कृषक द्वारा प्रस्ताव पत्रा पूर्णतः भरा गया हो।
8॰ सभी संबंधित केन्द्रीय सहकारी बैंक/वाणिज्य बैंक/क्षेत्राीय ग्रामीण बैंक माहबार/फसलवार/ इकाईवार (अंचलवार -जिलावार) बीमा प्रस्ताव-पत्रा एवं धोषणा-पत्रा दो प्रतियों में तैयार कर एक प्रति एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰ ग्रेंड प्लाजा, फ्रेजर रोड, पटना को किसानों से वसूली गयी बीमा प्रीमियम की राशि के बैंक ड्राफ्ट के साथ प्रेषित करेंगे। संबंधित सभी बैंक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछडी जाति के बीमित कृषकों का अलग-अलग घोषणा-पत्रा बीमा कंपनी को प्रेषित करेंगे ताकि उक्त कृषकों का वास्तविक आच्छादन एवं भुगतान की गयी क्षतिपूर्ति राशि की स्थिति स्पष्ट हो सके, जो बैंक एतद् संबंधी विवरणी उपलब्ध नहीं करायेंगे उनके द्वारा प्रेषित घोषणा-पत्रा आदि को बीमा कंपनी स्वीकार नहीं करेगी तथा इसकी सम्पूर्ण जवाबदेही संबंधित बैंक की होंगी।
ऋणी एवं गैर-ऋणी कृषको के प्रीमियम की राशि का अलग-अलग बैक ड्राफट/ चेक/ पे-आडर Agriculture Insurance Company of India Ltd., AXIS Bank Patna- A/ C No.142010200001441. के पक्ष में पटना में देय होना चाहिए।
9॰ इस योजना के संचालन की जिम्मेवारी एग्रीकल्चर इन्स्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰ पटना की है। आवश्यकतानुसार योजना के कार्यान्वयन संबंधी स्पष्टीकरण बीमा कम्पनी द्वारा समय-समय पर प्रेषित किये जायेेंगे। फसल क्षति का आंकलन एवं भुगतान पूर्णतः बीमा कंपनी द्वारा किया जायगा।
10॰ रबी 2010-11 मौसम की बीमित फसलों के कटनी प्रयोग के ऑंकड़े अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार, पटना के माध्यम से एग्रीकल्चर इन्श्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰ पटना को फसल कटनी की अवधि के एक माह के अन्दर प्राप्त हो जाना चाहिए। बीमा कंपनी द्वारा उक्त आंकडे़ के आधार पर ही फसल क्षति का आकलन किया जायेगा। फसल(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 6 जून 2011 4 कटनी प्रयोग का क्रियान्वयन जेनरल क्रॉप इस्टीमेशन सर्वे के आधार पर किया जाना है, न कि आनावारी/पैसावारी के आधार पर।
11॰ बैंक सेवा शुल्क - ऋणी एवं गैर-ऋणी कृषकों से प्राप्त कुल प्रीमियम की राशि का 2.5 प्रतिशत सेवाशुल्क के रूप में संबंधित बैंकों को मौसम समाप्ति के पश्चात भुगतान किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
लियान कुंगा,
सरकार के विशेष सचिव।
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अधी.क, सिचवालय मुिणालय,