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सं॰ 5/सह॰/फ॰ बी॰-43/2009-2594—भारत सरकार, कृषि मंत्रालय, कृषि एवं सहकारिता विभाग, नई दिल्ली के पत्रांक 13011/15/1999 क्रेडिट- II दिनांक 16 जुलाई 1999 एवं 13011/04/2004 क्रेडिट-II दिनांक 8 मार्च 2010 द्वारा परिचारित आदेश तथा योजना के तहत गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति की दिनांक 20 अप्रील 2010 की बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में खरीफ 2010 मौसम की निम्नांकित फसलों को राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत बीमा हेतु अधिसूचित किया जाता हैः-
(क) अगहनी धान :- इसके अन्तर्गत राज्य के 38 जिलों के 506 अंचलों को बीमा हेतु अधिसूचित किया जाता है।इसके लिए बीमा की इकाई अंचल होगा। राज्य के भोजपुर, मोतिहारी, खगड़िया, पूर्णियाँ एवं मुजफ्फरपुर जिलों की सभी पंचायतों को बीमा की इकाई निर्धारित किया जाता है।
(ख) भदई-मकई :- इसके अन्तर्गत राज्य के 27 जिले बीमा हेतु अधिसूचित किये जाते हैं। बीमा की
इकाई जिला होगा।
(ग) मिर्च फसल ः- इसके अन्तर्गत राज्य के 12 जिले बीमा हेतु अधिसूचित किये जाते हैं। बीमा की
इकाई जिला होगा।
(घ) जूट फसल ः- इसके अन्तर्गत राज्य के 06 जिले बीमा हेतु अधिसूचित किये जाते हैं। बीमा की
इकाई जिला होगा। जिलों ं अंचलों,एव पंचायतों का विस्तृत विवरण अनुलग्नक में दर्शाया गया है।
2॰ इस योजना में वाणिज्यिक बैंक/क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक एवं केन्द्रीय सहकारी बैंक से अल्पकालीन कृषि ऋण प्राप्त करने वाले कृषकों के साथ-साथ गैर ऋणी कृषक भी बीमा हेतु आच्छादित किये जा सकेंगे, जो अधिसूचित क्षेत्र में बीमा हेतु चयनित फसलों की खेती किये हो, किन्तु उनकी भागीदारी स्वैच्छिक होगी। वैेसे ऋणी कृषक, जो ऋण राशि से अधिक राशि का बीमा कराना चाहेंगे, उनके लिए गैर ऋणी कृषकों हेतु बीमा की अंतिम तिथि लागू होगी।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 6 जून 2011 2 3॰ बीमित राशि - बीमित राशि के तीन विकल्प हैः- (क) कुल वितरित ऋण राशि का बीमा ।
(ख) निर्धारित उपज के मूल्य तक बीमा। (ग) औसत उपज के 150.00 % तक की राषि का बीमा। परन्तु ऋणी कृषकों के मामले में कम से कम कुल वितरित ऋण राषि का बीमा कराना अनिवार्य होगा।
4॰ प्रीमियम दर का निर्धारणः- इस योजना में प्रीमियम की दो दरें निर्धारित की गई हैं (क) निश्चित दर, (ख) वास्तविक दर। मिर्च एवं जूट फसल हेतु केवल वास्तविक दर ही लागू होगी। एग्रीकल्चर इंश्योरेन्स कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰ पटना द्वारा उपलब्ध कराई गई विवरणी के आलोक में नीचे अंकित तालिका में प्रीमियम दर एवं बीमित राशि को दर्शाया गया हैः-
| क्र॰सं॰ | फसल का नाम | प्रीमियर दर | क्षतिपूर्ती का स्तर | बीमित राशि (प्रति हेक्टर) | ||
| निश्चित दर | वास्तविक दर | निर्धारित उपज दर के मूल्य तक | औसत उपज दर के 150 % मूल्य तक | |||
| 1. | 2. | 3. | 4. | 5. | 6. | 6. |
| 1. | अगहनी धान | 2.50 % | 10.90 | 60 | 13679 | 34197 |
| 2. | भदई मकई | 2.50 % | 6.70 | 60 | 7569 | 18923 |
| 3. | मिर्च फसल | लागू नहीं | 9.00 | 60 | 46012 | 115031 |
| 4 | जूट फसल | लागू नहीं | 5.30 | 80 | 18198 | 34122 |
अनुमान्य होगा। शेष राशि कृषकों द्वारा वहन किया जायेगा। 5. ऋण नीति के अनुसार बैंकों से ली गयी अल्पकालीन ऋण राशि पर प्रीमियम की निश्चित दर लागू होगी। निर्धारित उपज मूल्य तक गैर ऋणी कृषक हेतु निश्चित प्रीमियम दर एवं निर्धारित उपज मूल्य से अधिक, औसत उपज के 150 प्रतिशत तक मूल्य की बीमित राशि पर प्रीमियम की वास्तविक दर लागू होगी।
6. गैर ऋणी कृषकों के फसलों का बीमा करने से पूर्व बैंक द्वारा निम्नांकित बातों का अनुपालन करना आवश्यक होगा :-
क॰ कृषक द्वारा प्रस्ताव पत्र पूर्णतः भरा गया हो। ख. कृषक का बचत खाता बैंक में रहना चाहिए। ग॰ लधु एवं सीमान्त कृषक द्वारा अंचलाधिकारी से निर्गत वांछित प्रमाण पत्र जमा किया गया हो, जिसपर अनुदान की पात्रता दी जाय।
घ॰ किसान के प्रस्ताव पत्र के साथ भूमि प्रमाण-पत्र की अभिप्रमाणित छाया प्रति संलग्न की गई हो। 7॰ सभी संबंधित केन्द्रीय सहकारी बैंकों/वाणिज्यिक बैंकों/क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा माहवार/फसलवार/इकाईवार (अंचलवार-जिलावार) बीमा प्रस्ताव पत्र एवं धोषणा पत्र तैयार कर एग्रीकल्चर इंश्योरेन्स कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰,फ्रेजर रोड, पटना को किसानों से वसूली गयी बीमा प्रीमियम की राशि के बैंक ड्राफ्ट के साथ प्रेषित किये जायेंगे। सम्बंधित सभी बैंक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछडी जाति के बीमित कृषकों का अलग-अलग घोषणा-पत्र बीमा कंपनी को प्रेषित करेंगे ताकि उक्त कृषकों का वास्तविक आच्छादन एवं कर्णांकित उपबंध के अनुरूप भुगतान की गयी क्षतिपूर्ति राषि की स्थिति स्पष्ट हो सके। जो बैंक एतद् संबंधी विवरणी नहीं उपलब्ध करायेंगे, उनके द्वारा प्रेषित घोषणा-पत्र आदि को बीमा कंपनी स्वीकार नहीं करेगी।
ऋणी एवं गैर ऋणी कृषकों के प्रीमियम की राशि का अलग-अलग बैंक ड्राफ्ट/चेक/ पे-ऑडर " UTI Bank, Patna-A/c No. 142010200001441, Agriculture Insurance Company of India Ltd" के पक्ष में होना चाहिए।
8॰ ऋण वितरण करने की अवधि एवं घोषणा पत्र जमा करने की तिथि को निम्न तालिका द्वारा
| क्रमांक | ऋण वितरण की अवधि | घोषणा पत्र जमा करने की तिथि |
| क. | अप्रील माह में प्रदाय ऋण | 31 मई 2010 तक। |
| ख. | मई माह में प्रदाय ऋण | 30 जून 2010 तक। |
| ग. | जून माह में प्रदाय ऋण | 31 जुलाई 2010 तक। |
| घ. | जुलाई माह में प्रदाय ऋण | 31 अगस्त 2010 तक। |
| ङ | अगस्त माह में प्रदाय ऋण | 30 सितम्बर 2010 तक। |
| च. | सितम्बर माह में प्रदाय ऋण | 31 अक्तूबर 2010 तक। |
| छ. | अन्तिम | 30 नवम्बर 2010 तक। |
बीमा कम्पनी का कहना है कि प्रायः प्रत्येक मौसम में कुछ न कुछ बैंकों द्वारा उक्त समय सारिणी का पालन नहीं किया जाता है, अतः यह तय किया जाता है कि सभी बैंक निर्धारित अवधि का अक्षरषः पालन करेंगे। 9. गैर ऋणी कृषक एवं ऋण राशि से अधिक राशि का बीमा कराने के इच्छुक कृषकों के लिए प्रस्ताव पत्र भरने तथा बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2010 होगी। गैर ऋणी कृषक 31 जुलाई 2010 तक अपने निकटतम वाणिज्यिक बैंक/क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक या केन्द्रीय सहकारी बैंक की शाखा में प्रीमियम राशि जमा करके बीमा करायेगें। बैंकों द्वारा इससे संबंधित धोषणा पत्र दिनांक 31 अगस्त 2010 तक एग्रीकल्चर इंश्योरेन्स कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰ पटना को उपलब्ध कराया जायेगा।
10॰ इस योजना के संचालन की जिम्मेवारी एग्रीकल्चर इंश्योरेन्स कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰ पटना की है। आवश्यकतानुसार योजना के कार्यान्वयन संबंधी स्पष्टीकरण कम्पनी द्वारा समय-समय पर प्रेषित किये जायेेंगे। 11. खरीफ 2010 मौसम की बीमित फसलों यथा-अगहनी धान एवं भदई-मकई तथा जूट फसलों के कटनी प्रयोग के ऑंकड़े 31 मार्च 2011 तक तथा मिर्च फसल के आंकड़े 15 जून 2011 तक अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार, पटना के माध्यम से एग्रीकल्चर इंश्योरेन्स कम्पनी ऑफ इंडिया लि॰ पटना को प्राप्त हो जाना चाहिए। फसल कटनी प्रयोग का क्रियान्वयन जेनरल क्रॉप इस्टिमेषन सर्वे के आधार पर किया जायेगा न कि आनावारी/पैसावारी के आधार पर।
12. बीमा योजना के तहत् जिला/अंचल की इकाई हेतु न्यूनतम 16 फसल कटनी प्रयोग करना आवष्यक होगा। इसी तरह ग्राम पंचायत की इकाई हेतु न्यूनतम 8 फसल कटनी प्रयोग होना आवष्यक है। उक्त फसल कटनी प्रयोग के आँकड़े के आधार पर एग्रीकल्चर इंष्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लि॰ द्वारा फसल क्षति का आकलन किया जायेगा।
13. जमा वृद्धि का व्यवसाय करने वाले पैक्स गैर ऋणी कृषकों की फसलों का बीमा कर सकेेंगे। इसके लिए योग्य पैक्सों के चयन हेतु निदेष अलग से निर्गत किये जाऐंगे।
13. बैंक सेवा शुल्क :- ऋणी एवं गैर ऋणी कृषकों से प्राप्त कुल प्रीमियम की राशि का 2॰5 प्रतिशत सेवा शुल्क के रूप में संबंधित बैंकों को मौसम समाप्ति के पश्चात भुगतान किया जायेगा।
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अधी.क, सिचवालय मुिणालय,