िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 18181818 (cid:30)ये(cid:30)ये(cid:30)ये(cid:30)येंठंठंठंठ 1931931931933333 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 22223333 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ———————— 8888 जूनजूनजूनजून 2020202011111111 ((((ईईईई0000)))) भाग-1—िनयु(cid:18)0, पदःथापन, बदली, श(cid:18)0, छु 6ट(cid:15) और अ9य :य(cid:18)0गत सूचनाएं। 2-2
भाग-1-क—ःवयंसेवक गु=म? के समादेंटाओं के आदेश।
---
भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Hाओं के पर(cid:15)Hा-फल, कायJबम, छाऽवृ(cid:18)M ूदान, आNद।
---
भाग-1-ग—िशHा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Hाफल आNद ---
भाग-2—(cid:18)बहार-रा(cid:30)यपाल और कायाJOयH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आNद। 3-4 भाग-3—भारत सरकार, पPQम बंगाल सरकार और उSच 9यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और रा(cid:30)य गजट? के उUरण। ---
भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---
(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ
पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मX पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उZत (cid:18)वधान मंडल मX उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Nकये जानेवाले ूवर सिमितय? के ूितवेदन और उZत (cid:18)वधान मंडल मX पुर:ःथापन के पूवJ ूकािशत (cid:18)वधेयक।
---
भाग-7—संसद के अिधिनयम Pजनपर रांशपित क\ (cid:30)येंठअनुमित िमल चुक\ है। ---
भाग-8—भारत क\ संसद मX पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मX उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय? के ूितवेदन और संसद मX उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय? के ूितवेदन और संसद मX पुर:ःथापन के पूवJ ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-9—(cid:18)व]ापन
---
भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क\ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प^रवहन सूचनाएं, 9यायालय सूचनाएं और सवJसाधारण सूचनाएं इ_याNद। 5-10 पूरक
---
पूरक-क 11-192 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011
भागभागभागभाग----1111
िनयु(cid:18)0िनयु(cid:18)0िनयु(cid:18)0िनयु(cid:18)0, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)0श(cid:18)0श(cid:18)0श(cid:18)0, , , , छु 6ट(cid:15)छु 6ट(cid:15)छु 6ट(cid:15)छु 6ट(cid:15) और अ9यऔर अ9यऔर अ9यऔर अ9य वैय(cid:18)0क सूचनाएं वैय(cid:18)0क सूचनाएं वैय(cid:18)0क सूचनाएं वैय(cid:18)0क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
समाज कल्याण विभाग
———
अधिसूचना
25 अप्रील 2011
सं॰ स0क0स्था-10-28/07-1854—समाज कल्याण विभाग की अधिसूचना संख्या 2332, दिनांक 30 जून 2008 द्वारा पदस्थापित श्री मो0 अख्तर वासिफ, सहायक निदेषक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग, औरंगाबाद को तत्कालिक प्रभाव से आई0सी0डी0एस0 निदेषालय, बिहार, पटना में प्रतिनियुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से,
जवाहर प्रसाद, उप-सचिव।
ÑÑÑÑ
अधीHक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुNित।
(cid:18)बहार गजट, 12Ñ571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
3 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011भागभागभागभाग----2222
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----रा(cid:30)यरा(cid:30)यरा(cid:30)यरा(cid:30)यपाल और कायाJOयपाल और कायाJOयपाल और कायाJOयपाल और कायाJOयH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , , अिधसूचनाएं और िनयम आNद।अिधसूचनाएं और िनयम आNद।अिधसूचनाएं और िनयम आNद।अिधसूचनाएं और िनयम आNद।
ÑÑÑÑÑ
पत्र संख्या-1ए/ई1-अनु.नि.-19-10/2010-2532/वि0
वित्त विभागवित्त विभागवित्त विभागवित्त विभाग
———
पे्रषक मिमििमििमििहिर कुमार सिंह,हर कुमार सिंह,हर कुमार सिंह,हर कुमार सिंह, सचिव (व्यय) । सेवा में संयुक्त आयुक्तसंयुक्त आयुक्तसंयुक्त आयुक्तसंयुक्त आयुक्त (लेखा प्रशासन), भविष्य निधि निदेशालय, पंत भवन, पटना ।
पटना, दिनांक 18 मार्च 2011 अनुकम्पा के आधार पर वर्ग-3 के रिक्त पदों पर नियुक्ति के सम्बन्ध में । विषय :- अनुकम्पा के आधार पर वर्ग-3 के रिक्त पदों पर नियुक्ति के सम्बन्ध में । अनुकम्पा के आधार पर वर्ग-3 के रिक्त पदों पर नियुक्ति के सम्बन्ध में । अनुकम्पा के आधार पर वर्ग-3 के रिक्त पदों पर नियुक्ति के सम्बन्ध में । महाशय, निदेशानुसार कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के स्तर पर गठित विभिन्न जिला स्तरीय अनुकम्पा समितियों की अनुशंसाओं के आलोक में निम्न सूची के कॉलम-3 में अंकित कर्मियों के आश्रितों (जिनका नाम कॉलम-2 में अंकित है) की नियुक्ति अनुकम्पा के आधार पर वित्त विभाग के अधीन भविष्य निधि निदेशालय में उपलब्ध लिपिक संवर्ग के रिक्त पदों के विरुद्ध लिपिक के वेतनमान् 5200-20-20,200 (ग्रेड-1900) रुपये में एवं समय-समय पर सरकार द्वारा स्वीकृत अनुमान्य भत्तों के साथ पूर्णतया अस्थायी रूप से नियुक्त करने की स्वीकृति दी गई है-
| क्र क्र0000 क्र क्र | आश्रित का नाम एवं आश्रित का नाम एवं आश्रित का नाम एवं आश्रित का नाम एवं मृत कर्मी से सम्बन्ध मृत कर्मी से मृत कर्मी से मृत कर्मी से सम्बन्ध | पिता/पति का नाम | योग्यता | अनुकम्पा समिति अनुकम्पा समिति अनुकम्पा समिति अनुकम्पा समिति की अनुशंसा | अभ्युक्ति |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 |
| 1 श्रीमती मालती कुमारी/ तलाकसुदा पुत्री | स्व0 राम बालक सिंह, फरास, वित्त विभाग, बिहार, पटना | स्नातक, कम्प्यूटर ज्ञान | क न्द्रीय अनु. े समिति, वर्ग-3 | वर्ग-3 | |
| 2 श्री आनन्द कुमार/पुत्र | स्व0 इन्दु शेखर चौधरी, सगणक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री भण्डार, गुलजारबाग, पटना | मैट्रिक, कम्प्यूटर ज्ञान | क न्द्रीय अनु. े समिति, वर्ग-3/4 | वर्ग-3 | |
| 3 मो0 जाविर हुसैन/पुत्र | स्व0 नाजमा खातून, आदेशपाल, वित्त विभाग, बिहार, पटना | मैट्रिक | क न्द्रीय अनु. े समिति, वर्ग-3/4 | वर्ग-3 | |
| 4 श्री रंजीत कुमार/ पुत्र | स्व0 राम विलास ठाकुर, आदेशपाल, राजकीय लेखन सामग्री भण्डार, गुलजारबाग, पटना | मैट्रिक, कम्प्यूटर ज्ञान | क न्द्रीय अनु. े समिति, वर्ग-3/4 | वर्ग-3 |
2222.... उक्त प्रस्ताव में प्रधान सचिव का अनुमोदन प्राप्त है । 3333.... नियुक्ति पत्र/ आदेश निर्गत करने के पूर्व सम्बन्धित आश्रितों द्वारा प्रस्तुत प्रमाण-पत्रों की जाँच आप कर लेंगें ।
4444.... उपरोक्त सूची के स्तम्भ-'2' में अंकित आश्रितों को नियमानुसार नियुक्ति पत्र एवं पदस्थापन आदेश निर्गत करने की सूचना वित्त विभाग (स्थापना शाखा) को दे दी जायेगी ।
5555.... उक्त नव नियुक्त कर्मियों को योगदान के छः माह के अन्दर कम्प्यूटर टाईपिंग ज्ञान की जाँच परीक्षा में उत्तीर्णता प्राप्त करना होगा ।
6666.... जाँच परीक्षा में अनुत्तीर्ण कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी जाय या कायम रखी जाय का निर्णय करने का अधिकार संयुक्त आयुक्त (लेखा), भविष्य निधि निदेशालय को होगा । परन्तु निर्णय के पूर्व प्रधान सचिव, वित्त विभाग का आदेश/अनुमोदन इस सम्बन्ध में अवश्य प्राप्त कर लेगें ।
विश्वासभाजन, मिहिर कुमार सिंह, सचिव (व्यय) ।
——— अधीक्षक का कार्यालय पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पटना ——— निविदा शुद्धि-पत्र 24 मई 2011 सं॰ 5578—इस कार्यालय में दवा एवं सर्जिकल सामाग्री के क्रय हेतु दिनांक 19 एवं 20 मई 2011 को प्रकाषित विज्ञप्ति निविदा संख्या-1727(स्वा0) 2011-12 में प्रकाषित दवाओं की सूची के क्रमांक 01 में अंकित Rabies Immunoglobulin In Immunization & Preventive के स्थान पर Rabies Immunoglobulin (Equine) पढा जाय। निविदा की शेष शर्त्ते पूर्ववत् रहेगी। संषोधित सूची वेवसाईट www.prdbihar.org/www.prdbihar.gov.in एवं www.pmch.in पर देखा जा सकता है। निविदा पूर्व प्रकाषन की तिथि से 21 दिनों के अन्दर अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में प्राप्त हो जानी चाहिए। विलम्ब से प्राप्त निविदा पर कोई विचार नही किया जायेगा।
(ह॰) अस्पष्ट, अधीक्षक ।
ÑÑÑÑ
अधीHक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुNित।
(cid:18)बहार गजट, 12Ñ571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
5 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011भागभागभागभाग----9999((((खखखख))))
और सवJसाधारण सूचनाएं इ_याऔर सवJसाधारण सूचनाएं इ_याऔर सवJसाधारण सूचनाएं इ_याऔर सवJसाधारण सूचनाएं इ_याNद।Nद।Nद।Nद। ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
अधीक्षक का कार्यालय,अधीक्षक का कार्यालय,अधीक्षक का कार्यालय,अधीक्षक का कार्यालय, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पटना । ——— निविदा सूचना
सं॰ 5776—पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पटना के विभिन्न विभागों में वित्तीय वर्ष 2011-12 अन्तर्गत उपयोग आने वाले विविध सामग्री, विद्युत सामग्री, लीलेन सामग्री एवं उपस्करों के क्रय हेतु बिहार वाणिज्य-कर में निबंधित निर्माताओं, प्राधिकृत विक्रेताओं एवं आपूर्तिकर्त्ताओं से मुहरबंद कम्प्युटराईज टंकित निविदा, प्रकाषन की तिथि से 21 (इक्कीस) दिनों के अन्दर निबंधित डाक/स्पीड पोस्ट द्वारा सभी आवष्यक वॉछित अभिलेखों के साथ आमंत्रित किया जाता है।
निविदा दो भागों में होगी-तकनीकी एवं वित्तीय । निविदा अलग-अलग लिफाफे में मुहरबंद तथा लिफाफे के उपर विविध सामग्री, विद्युत सामग्री, लीलेन सामग्री एवं उपस्करों सामाग्री हेतु तकनीकी निविदा/वित्तीय निविदा सुस्पष्ट रूप से अंकित रहना अनिर्वाय होगा । निविदा सिर्फ निबंधित डाक या स्पीड पोस्ट से प्राप्त किया जायेगा । निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त निविदा, निबंधित डाक या स्पीड पोस्ट के आलावा किसी अन्य माध्यम से प्राप्त निविदा या फटा/खुला निविदा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नही किया जायेगा। साथ हीं निविदा में संलग्न सभी अभिलेख पूर्ण रूप से विषय सूची के साथ पृष्ठांकित होगी। इस निविदा के संबंध में सारी जानकारियाँ बिहार सरकार के वेब साइट-www.prdbihar.gov.in एवं पी॰एम॰सी॰एच॰ के वेब साइट-www.pmch.in पर प्राप्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त निविदा प्रकाशन के पश्चात् किसी भी कार्य दिवस को क्रय शाखा से निविदा शर्त्त एवं सूची प्राप्त किया जा सकता है। स्थान : पटनास्थान : पटनास्थान : पटनास्थान : पटना दिनांक :-27 मई 2011दिनांक :-27 मई 2011दिनांक :-27 मई 2011दिनांक :-27 मई 2011
(ह॰) अस्पष्ट,(ह॰) अस्पष्ट,(ह॰) अस्पष्ट,(ह॰) अस्पष्ट, अधीक्षकअधीक्षकअधीक्षकअधीक्षक ।।।।
निविदा शर्त्तनिविदा शर्त्तनिविदा शर्त्तनिविदा शर्त्त
निविदा दो प्रकार की होगी-तकनीकी एवं वित्तीय। दोनों ही निविदा अलग-अलग लिफाफे में कम्पयुटर टंकित एवं मुहरबन्द होगा। एक लिफाफे में दोनों निविदा देने पर वह स्वतः रद्द समझा जायेगा। लिफाफे के ऊपर स्पष्ट रूप से तकनीकी एवं वित्तीय लिखने के साथ-साथ निविदा का विषय अंकित करना होगा। और लिफाफे पर निविदा दाता का नाम, पूरा पता दूरभाष संख्या के साथ अंकित करना होगा।
तकनीकी निविदातकनीकी निविदातकनीकी निविदातकनीकी निविदा
1. बिहार वाणिज्य कर विभाग में निबंधन एवं किस व्यवसाय के लिए वाणिज्य-कर विभाग में निबंधित हैं का साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
2. बिहार वाणिज्य-कर में निबंधित निविदादाता निविदा स्वीकृत होने के उपरांत क्रय आदेष के पूर्व वाणिज्य-कर विभाग से अनापति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
3. अगर निविदादाता निर्माता हैं, तो उद्योग विभाग का पंजीयन पत्र एवं अद्यतन कार्यरत रहने का प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा।
4. लघु उद्योग इकाई को सरकार से मिलने वाली सुविधा से संबंधित कागजात संलग्न करना होगा। 5. निविदा दाता को 50000/-(पचास हजार) रुपये का बैंक ड्राफ्ट/एन॰एस॰सी॰ जो अधीक्षक, पी॰एम॰सी॰एच॰ के नाम से प्रतिभूत होगा अग्रधन के रूप में संलग्न करना है।6 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 6. निविदादाता किसी क्रिमिनल केस अथवा किसी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थान के द्वारा दंडित नहीं किये गये हैं, इस आशय का शपथ पत्र कार्यपालक दण्डाधिकारी के माध्यम से प्राप्त कर मुल रूप में निविदा में संलग्न करना होगा।
7. अगर निविदा दाता पूर्व में किसी सरकारी अथवा अर्द्धसरकारी संस्थान में आपूर्ति किये हों, तो उसका प्रमाण देना है।
8. सभी सामग्रियों ( जिनके सामने आई0एस0आई0/आई0एस0ओ0/सी0ई0 मार्क अंकित है) के लिए निर्गत सामग्रियों की सूची के अनुसार उनके नाम, निर्माता का नाम, सामग्रियों का विषिष्टीकरण एवं स्पेसिफिकेशन सहित निर्माता का कैटलाक(जिसमें साफ तौर पर कोट किये गये सामग्रियों का माडल न0 अंकित होना चाहिए) , निर्माता का प्राधिकार पत्र(इस निविदा एवं इसी वित्तीय वर्ष के लिए नामित हो) तकनीकी निविदा में संलग्न करना होगा। निविदा के साथ संलग्न अनुलग्नकों को पृष्ठांकित कर अग्रसारण पत्र पर प्रमाणित करना होगा। सभी पृष्ठ निविदादाता के द्वारा हस्ताक्षरित होगा। साथ हीं निविदा में संलग्न सभी अभिलेख पूर्ण रूप से विषय सूची के साथ पृष्ठांकित होगी। ऐसा नहीं करने पर आपके निविदा पर विचार नहीं किया जायेगा।
10. किसी भी विवाद का न्यायिक क्षेत्र पटना होगा।
11. अधोहस्ताक्षरी को बिना कारण बताये किसी भी निविदा को आवश्यकतानुसार आंशिक या पूर्णतः अस्वीकृत करने का पूर्ण अधिकार सुरक्षित होगा।
12. निर्गत सामग्रियों की सूची के अनुसार क्रमवार इनका नाम एवं निर्माता का नाम अंकित करना अनिवार्य होगा।
13. क्रय समिति में तकनीकी निविदा की स्वीकृति के पश्चात् ही वित्तीय निविदा खोला जायेगा। 14. स्वीकृत दर पर सामग्रियों की आपूर्त्ति नहीं करने पर जमानत की राशि जब्त कर ली जायेगी एवं फर्म को काली सूची में डाल दिया जायेगा।
वित्तीय निविदावित्तीय निविदावित्तीय निविदावित्तीय निविदा
वित्तीय निविदा में सामग्रियों का नाम निर्माता सहित प्रकार एवं उनके सामने कर सहित एवं कर रहित दर, अंकित करने के अलावे इसमें अन्य कोई कागजात संलग्न नहीं करना है। विषिष्टीकरण एवं स्पेषिफिकेषन के लिए एक से अधिक दर अनुमान्य नहीं होगा। निविदादाता सिर्फ उच्च कोटि के गुणवत्तायुक्त सामग्रियों का दर प्रेषित करेंगें।
सामग्रियों की सूचीसामग्रियों की सूचीसामग्रियों की सूचीसामग्रियों की सूची
विविध सामग्रीविविध सामग्रीविविध सामग्रीविविध सामग्री
1. वासिंग सोडा, टाटा ब्रान्ड/या समकक्ष
2. रील थ्रेड-वर्दमान/मोदी या समकक्ष
3. एन॰एम॰टी॰-थ्रेड नं॰ 40, वर्द्धमान/मोदी या समकक्ष
4. लाईफ ब्याय साबुन-बड़ा साईज, मेडिकेटेड
5. ताला, 7 लीभर/6 लीभर (लिंक/गोदरेज या इसे तरह के मानक निर्माता)
6. डी॰एन॰सी॰ बॉल, वर्द्धमान/मोदी या समकक्ष
7. चेन थ्रेड नं॰-10 वर्दमान/मोदी या समकक्ष
8. टार्च-बैट्री-एभररेडी/निप्पो या समकक्ष-1050 लीक प्रुफ
9. एल॰एस॰ बैट्री-1033,एभररेडी/निप्पो या समकक्ष, लीक प्रुफ
10. पेन्सिल बैट्री एभररेडी/निप्पो या समकक्ष, लीक प्रुफ
11. टार्च मेटल-दो सेल, तीन सेल/पाँच सेल, एभररेडी/निप्पो या समकक्ष
12. हवाई चप्पल-लखानी, रिलैक्सो/बाटा सभी साईज
13. निरमा सुपर-500 ग्राम पैक7 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 14. मीठा सोडा-टाटा ब्रान्ड या समकक्ष
15. ब्लीचिंग पाउडर-बिड़ला ब्रान्ड या समकक्ष
16. धोबी क्लॉथ इंक
17. टेबुल ग्लास 8 एम॰एम॰
18. शीशे का ग्लास-एयरा या समकक्ष
19. कप प्लेट बोन चाईना या समकक्ष
20. टेलर मशीन आइल
21. डस्ट बीन कभर के साथ 14" ऊँचाई
22. भीम पाउडर, 500 ग्राम पैकेट
विद्युत सामग्रीविद्युत सामग्रीविद्युत सामग्रीविद्युत सामग्री
1. सी॰एफ॰एल॰ बल्ब-23, 30, 35 , 75, एवं 85 वाट (आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क ) 2. इमरजेन्सी लाईट दो ट्यूब वाला ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
3. चॉक 40 वाट ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/ सी0ई0 मार्क )
4. रूम हीटर/1 रॉड/2 रॉड ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/ सी0ई0 मार्क )
5. ट्यूब लाइट 4 40 वाट/2 20 वाट ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क ) 6. स्टार्टर 40 वाट ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/ सी0ई0 मार्क )
7. 48'' एवं 56'' सीलिंग फैन (हैवेल्स/बजाज/उषा)
8. 2.5 MFD सीलिंग फैन का कन्डेंसर एल्लुमुनियम का (मानक निर्माता द्वारा निर्मित)
9. 3.15 MFD सीलिंग फैन का कन्डेंसर एल्लुमुनियम का (मानक निर्माता द्वारा निर्मित)
10. पैडेस्टर फैन पुरा मेटल का ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
11. हीटर 1500 वाट मोटा तार लगा हुआ।
12. एक्सटेंशन कॉड दस मीटर ताँबे का तार लगा हुआ।
13. हॉट एयर ब्लोयर (मानक निर्माता द्वारा निर्मित)
14. 250 वाट HPSV LAMP (फील्पिस/बजाज)
15. 250 वाट HPSV चॉक (फील्पिस/बजाज)
16. 250 वाट Ignitor (फील्पिस/बजाज)
17. 5/6 ंamps one way F/T switch (Kany/Anchor)
18. 15/16 amps, 6 pin SS combined (Kany/Anchor)
19. 6 amps bell push (ISI/ISO/CE)
20. Call Bell (Ding dong)
21. 3 pin top 6 amps ISI (Anchor/Cono/Kany)
22. 3 pin top 15 amps ISI (Anchor/Cono/Kany)
23. 40 amps rating TPN, MCB 10 KA(Havells/APL)
24. 63 amps rating TPN, MCB 10 KA(Havells/APL)8 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 25. 6 to 32 amps rating SP, MCB 10 KA(Havells/APL)
(ब्राण्डेड सामग्रियों का दर थोक बाजार दर से अधिक नहीं होना चाहिए।)
लीलन सामग्रीलीलन सामग्रीलीलन सामग्रीलीलन सामग्री
1. हरा कपड़ा 137 से॰मी॰ अर्ज (पतला)
2. हरा कपड़ा 137 से॰मी॰ अर्ज (मोटा)
3. हैन्ड टावेल 16" 26"(उजला)
4. टावेल बड़ा साईज(उजला)
5. अपरन का कपड़ा टेरीकोट डॉक्टर्स एवं पारामेडिकल स्टाफ के लिए (उजला)
6. रबराईज क्वायर मैटे्रस (एक पीस में; दो पीस में)
साईज 36" 78" 3" (आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰ ब्रान्ड)
7. रबराईज क्वायर मैटे्रस
साईज 54" 30" 3" (आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰ ब्रान्ड)
दोनों ही मैटे्रस रेक्सिन कभर के साथ होगा।
8. खाकी ड्रील, जीन्स टाईप
9. डाक्टर्स के लिए कुर्त्ता, पैजामा, शुद्ध सूती
10. लाल ऊनी हरा ऊनी कंबल, वजन दो किलो वाशेबुल
11. डाक्टर्स के लिए लाइनिंग वाला चादर एवं तकिया का खोल (शुद्ध सूती)
12. पर्दा खिड़की का, साईन 48" 54" टेरीकोट, पॉलिस्टर
13. मैकनी टॉस, डकबक
14. प्लास्टिक गाऊन, डाक्टर्स के लिए
15. मच्छरदानी, साईज (40" 82" 60")
16. पीलो कभर साईज (16" 26")
17. रैक्सीन कभर साईज 36" 78" 3" एवं 54" 30" 3"
18. दरवाजा पर्दा (बड़ा साईज)
19. पीलो साईन 15" 24" सेमल एवं फाइवर
20. लेबर टेबुल का गद्दा (आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰ ब्रान्ड)
21. अन्तरवासीय मरीज के लिए कुर्त्ता पैजामा एवं लेडिज मैक्सी/गाउन
उपरोक्त सभी सामग्री मानक स्तर के निर्माता के द्वारा निर्मित होगा। उपस्करउपस्करउपस्करउपस्कर 1. बेड साईड लॉकर (आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क)
2. हॉस्पीटल आईरन बेड ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
3. अटेन्डेंट बेड ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
4. हॉस्पीटल आइरन बेड, बैक रेस्ट के साथ ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क ) 5. पेडीऐट्रिक बेड ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
6. एनेस्थेसिया ट्रॉली ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )9 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 7. मेडिसीन ट्रॉली ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
8. इन्स्ट्रूमेन्ट ट्रॉली ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
9. स्ट्रेचर ट्रॉली ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
10. डाक्टर्स चेयर रिभालविंग ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
11. डाक्टर्स चेयर( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
12. हाफ एवं फुल सेकेरेटेरियट टेबुल (तीन ड्रावर के साथ)
13. रिभाल्ंिवग स्टूल चार लेग के साथ ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
14. प्लास्टिक स्टूल एवं चेयर ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
15. ऑफिस चेयर (उडेन)
16. मेकेनाईज्ड फुड ट्रॉली विथ एण्ड विथाउट वार्मर( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क ) 17. स्टील आलमीरा 20 से 22 गेज गुड मेन्टल बेस वाला (मानक निर्माता द्वारा निर्मित)
18. लकड़ी का धोबी बॉक्स लम्बाई 3' चौड़ाई 2)' एवं ऊँचाई 3'
19. स्टील वाल एवं इनामेल वाल 36" से॰मी॰ डाया(मानक निर्माता द्वारा निर्मित)
20. लीलेन सामग्री रखने के लिए स्टील बॉक्स स्टैन्ड के साथ साईज 3)' लम्बा 3' ऊँचा 2)' चौड़ा (20 गेज)
21. वॉवेल स्टैन्ड सिंगल एवं डबल( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क)
22. साईड स्क्रीन ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
23. किडनी टे्र, स्टील एवं इनामेल-आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 ब्रान्ड
24. रेक्टेंगूलर टे्र, स्टील एवं इनामेल (साईज-9''×6'' , 11''×7'', 12''×8'', 15''×12'', 18''×12'', 8''×3'', 14''×10'', 16''×4'') आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क
25. व्हील चेयर ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
26. ड्रेसिंग टेबुल ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
27. हाईड्रोलिक ऑपरेशन टेबुल ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
28. ऑक्सीजन फ्लोमीटर ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
29. स्टील टे्र विग साईन, 18" 12" ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
30. डे्रसिंग ड्रम (स्टेनलेस स्टील) ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
9" 9", 11" 12", 15" 12"
31. स्टील बॉल-45 सेंटीमीटर ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
32. साईडेक्स टे्र-प्लास्टिक बड़ा साईज (मानक निर्माता द्वारा निर्मित)
33. बी॰एच॰टी॰ होल्डर, क्लीप के साथ (मानक निर्माता द्वारा निर्मित)
34. एक्स-रे भिउ बाक्स (आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क)
35. स्टील बेबी ट्रे ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
36. आँक्सीजन सिलेन्डर ट्रॉली ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
37. आक्सीजन रिन्च10 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 38. एक्जामिनेषन टेबुल ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
39. एक्जामिनेषन काउँच ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
40. आई0 सी0 यू0 बेड ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
41. मलटीसीटर चेयर फूली आयरण विथ इपोक्सीफिनिश ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/ सी0ई0 मार्क ) 42. लेबर टेबुल स्टेनलेस स्टील का मैटे्रस के साथ ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क ) 43. अटेन्डे स्टूल पुरा स्टेनलेस स्टील का ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
44. क्रैस कार्ट ( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क )
45. बेड पैन पुरा स्टेनलेस स्टील का( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क)
46. यूरीन पोट पुरा स्टेनलेस स्टील का( आई॰एस॰आई॰/आई॰एस॰ओ॰/सी0ई0 मार्क)
स्थान :- पटना
;हद्ध अस्पष्ट,
दिनांक :- 27 मई 2011
अध्ीक्षक।
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अधीHक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुNित। (cid:18)बहार गजट, 12Ñ571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in11 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट काकाकाका पूरकपूरकपूरकपूरक((((अअअअ0000)))) ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतततत
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समाज कल्याण विभाग
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अधिसूचना
24 मार्च 2011
सं॰ स0क0निग0 30-79/10-1331—श्रीमती मीना कुमारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, इसमाइलपुर, भागलपुर का निरीक्षण आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर द्वारा किया गया । निरीक्षण प्रतिवेदन ज्ञापांक-311, दिनांक 10 मई 2010 से विभाग को प्रेषित किया गया । निरीक्षण प्रतिवेदन में पोषाहार वितरण में अनियमितता, सेविकाओं से प्रतिमाह एक निश्चित राशि रिश्वत के रूप में लेना एवं परियोजना अन्तर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण नहीं करना आदि कतिपय आरोप प्रतिवेदित किये गये हैं । इस संबंध में विभागीय पत्रांक-4151 दिनांक 18 सितम्बर 2010 एवं 5681 दिनांक 20 दिसम्बर 2010 द्वारा आरोपी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी । श्रीमती मीना कुमारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, इसमाइलपुर, भागलपुर ने अपने पत्रांक 15, दिनांक 18 जनवरी 2011 द्वारा विभाग को अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया है । उनका स्पष्टीकरण को समीक्षोपरांत संतोषप्रद नहीं पाया गया ।
उक्त आलोक में कत्र्तव्य के निर्वहन में लापरवाही बरतने, आंगनबाड़ी केन्द्रों का समुचित पर्यवेक्षण (निरीक्षण एवं पोषाहार वितरण में अनियमितता आदि में दोषी पाये जाने के कारण सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में श्रीमती मीना कुमारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, इसमाइलपुर, भागलपुर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14 के तहत ''निन्दन'' की सजा संसूचित किया जाता है, जिसकी प्रविष्टि संगत वर्ष 2010-11 में की जायेगी ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जवाहर प्रसाद, उप सचिव ।
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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचनाएं
27 मई 2011
सं॰ 22/नि0सि0(वीर0)-07-05/2006/615—श्री शंकर राम, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता जल संसाधन विभाग, वीरपुर के विरुद्व पूर्वी कोशी मुख्य नहर के वि0दू0-0.00 से 135.50 तक के पुर्नस्थापन कार्य स-समय पूरा नहीं करने, नहर तल से निकाली गयी मिट्टी को टर्फिग के द्वारा सुरक्षित करने के संबंध में दिये गये विभागीय निदेश का अनुपालन नहीं करने तथा पूर्वी कोशी मुख्य नहर के वि0दू0-2.25 पर अवस्थित सिल्ट इजेक्टर एवं भेंगाधार स्केप चैनल में वि0दू0-19.50 एवं 25.00 पर पुल निर्माण का कार्य विभागीय निर्देशो के बावजूद भी पूरा नहीं करने आदि प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री शंकर राम, मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, वीरपुर को विभागीय अधिसूचना सं0-596, दिनांक 7 जून 2006 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञाप सं0 956, दिनांक 15 सितम्बर 2006 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी।12 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 (2) सरकार द्वारा मामले के समीक्षोपरान्त अधिसूचना सं0 1233, दिनांक 4 दिसम्बर 2006 द्वारा श्री राम को तत्कालीक प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए इनके विरुद्व चलायी जा रही विभागीय कार्यवाही को पूर्ववत चलाते रहने तथा निलंबन अवधि के बारे में इसके निष्पादनोपरान्त निर्णय लिये जाने का आदेश निर्गत किया गया।
(3) माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-2762/10 एवं 20825/10 में क्रमशः दिनांक 26 अगस्त 2010 एवं 3 जनवरी 2011 को पारित न्याय निर्णय के अनुपालन में श्री राम के विरुद्व संकल्प सं0-956 दिनांक 15 सितम्बर 2006 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को आरोप सहित निरस्त करते हुए इनके निलंबन की अवधि दिनांक 7 जून 2006 से 3 दिसम्बर 2006 तक को कर्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानकर उक्त अवधि में उनके द्वारा लिये गये जीवन यापन भत्ता का समायोजन करते हुये पूर्ण वेतनादि भुगतान करने का निर्णय लिया जाता हैं ।
उक्त निर्णय श्री शंकर राम को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव ।
——— 19 मई 2011 सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/2003/572—श्री जगदीश प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, तारापुर/लक्ष्मीपुर से उनके उक्त पदस्थापन अवधि, वर्ष 2000-01 में खैराती खॅा उप वितरणी के चेन सं0-200 से 229 तक सफाई कार्य एवं हटाये गये बोल्डर में कमी पाये जाने, खैराती ख्ॅाा वितरणी के विभिन्न चेनों पर टूटान मरम्मति कार्य में पर्यवेक्षण का अभाव एवं गलत भुगतान होने, छत्रहार काजवे के पहुॅच पथ में बॅाध का कार्य नदीं में उपलब्ध बलुआही मिट्टी से कराने, बदुआ बायीं मुख्य नहर के चेन 530 पर टूटान मरम्मति कार्य विशिष्टि के अनुरूप नहीं होने, बदुआ बायॅा शाखा नहर के चेन सं0-638 पर साइफन मरम्मति एवं चेन सं0-637.5 आर0 पर आउटलेट मरम्मति कार्य में अधिक एवं गलत भुगतान करने तथा कार्य विशिष्टि के अनुरूप नहीं होने, सिंचाई प्रमण्डल सं0-1, लक्ष्मीपुर के अन्तर्गत आजन जलाशय योाजना में बायॅा मुख्य नहर के चेन 43.00 पर बॅाध मरम्मति कार्य में टूटान के प्री लेवेल की जॅाच असम्बद्व अभियन्ता से नहीं कराये जाने एवं कुल 15,565 रूपये बिना काम कराये भुगतान करने तथा बेलिया नहर के चेन सं0-204 से 266 तक तल सफाई कार्य में असम्बद्व प्रमण्डल से लेवल की जॅाच नहीं कराने आदि प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिये विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंट्रोल एण्ड अपील) रूल्स के नियम-55''ए'' के तहत विभागीय पत्रांक 338 दिनांक 10 जून 2004 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। (2) श्री सिन्हा से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभाग में सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि कार्य विशिष्टि के अनुरूप नहीं है तथा गलत भुगतान नहीं होने के लिये इनके द्वारा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। फलतः इनके स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुए निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया। (1) निन्दन वर्ष 2000-01 (2) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त निर्णय विभागीय अधिसूचना सं0 41, दिनांक 22 जनवरी 2009 द्वारा श्री सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया गया। (3) श्री सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा उक्त विभागीय अधिसूचना सं0 41, दिनांक 22 जनवरी 2009 के विरुद्व समर्पित अपील अभ्यावेदन, दिनांक 10 जून 2009 में उठाये गये विन्दुओं की समीक्षा विभाग में सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि आरोपों के संबंध में कोई नया तथ्य नहीं है एवं की गयी अनियमितता की जबाबदेही आरोपित की थी। फलतः इनके अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय श्री जगदीश प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव ।
———
19 मई 2011
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/2003/571—श्री सुरेश प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, भागलपुर से उनके उक्त पदस्थापन अवधि, वर्ष 2000-01 में सन्हौला ताउर वीयर योजना से निकली नहर का चेन 0.0 से 20 तक तल सफाई कार्य में 0 चेन से 3 चेन तक बांध पर कहीं कहीं काटी गयी मिट्टी फेका हुआ पाये जाने, नहर तल की चौड़ाई भिन्न-भिन्न चेनों पर भिन्न- भिन्न पाये जाने, विभागीय कार्य का समुचित ठंग से नहीं कराये जाने तथा कार्य के समुचित निरीक्षण के अभाव के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिये विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय पत्रांक 336, दिनांक 10 जून 2004 द्वारा सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंट्रोल एण्ड अपील) रूल्स के नियम-55''ए'' के तहत द्वारा स्पष्टीकरण किया गया।13 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 (2) श्री प्रसाद तत्कालीन सहायक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभाग में सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त इनके द्वारा आरोपों के विरुद्व दिये गये तर्क के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं दिये जाने के कारण इनके स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुए निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गयाः- (1) निन्दन वर्ष 2000-01 (2) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त निर्णय विभागीय अधिसूचना सं0 37, दिनांक 22 जनवरी 2009 द्वारा सुरेश प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया गया। (3) श्री प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता द्वारा उक्त विभागीय अधिसूचना सं0 37, दिनांक 22 जनवरी 2009 के संसूचित दण्ड को वापस लेने हेतु एक अभ्यावेदन दिनांक 22 अप्रील 2010 विभाग में समर्पित किया गया। श्री प्रसाद के उक्त अभ्यावेदन में उठाये गये विन्दुओं की समीक्षा विभाग में पुनः सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि उक्त अभ्यावेदन में श्री प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता द्वारा कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है एवं की गयी अनियमितता की जबादेही आरोपित की थी। फलतः सुरेश प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय श्री सुरेश प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव ।
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19 मई 2011
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/2003/570—श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता सिंचाई प्रमण्डल, तारापुर/ लक्ष्मीपुर से उनके उक्त पदस्थापन अवधि, वर्ष 2000-01 में सिंचाई प्रमण्डल सं0-1, लक्ष्मीपुर के अन्तर्गत आजन जलाशय योजना के बायॅा मुख्य नहर चेन 43.00 पर बांध मरम्मति कार्य में टूटान के प्री लेवेल की जॅाच किसी असम्बद्व अभियन्ता से नहीं कराये जाने, टूटान मरम्मति की लम्बाई मापपुस्त में अंकित लम्बाई के आधे से भी कम रहने, 15,565 रूपये बिना काम कराये भुगतान करने तथा बेलिया नहर के चेन 204 से 206 तक तल सफाई कार्य में असम्बद्व प्रमण्डल से लेवल की जॅाच नहीं कराये जाने आदि प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिये विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंट्रोल एण्ड अपील) रूल्स के नियम-55''ए'' के तहत विभागीय पत्रांक 335, दिनांक 10 जून 2004 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया।
(2) पर्याप्त समय प्रदान किये जाने के बावजूद श्री कुमार द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं करने की स्थिति में मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त उपलब्ध अभिलेख के आधार पर कार्य विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाये जाने तथा गलत भुगतान नहीं होने के लिये इनके द्वारा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहींं किये जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-39 दिनांक 22.01.09 द्वारा निम्नांकित दण्ड संसूचित किया गयाः-
(1) निन्दन वर्ष 2000-01 (2) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। (3) उक्त विभागीय अधिसूचना सं0 39, दिनांक 22 जनवरी 2009 द्वारा संसूचित दण्ड के विरुद्व श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता द्वारा समर्पित पुनर्विचार अपील अभ्यावेदन दिनांक 12 जनवरी 2010 की समीक्षा पुनः सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि पुनर्विचार अपील अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य नहीं है एवं की गयी अनियमितता की जबाबदेही आरोपित की थी। फलतः श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता के पुनर्विचार अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।
उक्त निर्णय श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव ।
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19 मई 2011
सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/2003-569—श्री परवेज अख्तर अंसारी, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, सिकन्दरा से उनके उक्त पदस्थापन अवधि, वर्ष 2000-01 में मोरवे बॉध के निम्नधार (डी0 एस0) के ढ़लान हेतु रेन कट्स की मरम्मति एवं सुदृढ़ीकरण में मिट्टी भराई कार्य में उच्च अधिकारियों द्वारा दिये गये निर्देश का अनुपालन नहीं करने मिट्टी कम्पेक्शन की जॉच नहीं कराने, बॉध ढ़लान की चौड़ाई का मापपुस्त में गलत मापी दर्ज करने, मोरवे बॉध के स्केप (लिंक नहर) के चेन 0.0 (आर) पर क्षतिग्रस्त सुरक्षात्मक कार्य तथा उच्चस्तरीय मुख्य नहर के चेन 114.0 (एस0 एल0 एवं आर0) तथा स्केप के 0.0 चेन पर क्षतिग्रस्त विंगवाल मरम्मति कार्य में स्टोन मेसीनरी की मापी मापपुस्त में अधिक दर्ज करने, कम कार्य कराकर माप पुस्त में ज्यादा मापी करने एवं पी0 सी0 सी0 कार्य नहीं करने आदि प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिये विभागीय उड़नदस्ता के जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर सिविल सर्विसेज (क्लासीफिकेशन, कंट्रोल एण्ड अपील) रूल्स के नियम-55 ''ए'' के तहत विभागीय पत्रांक 338, दिनांक 10 जून 2004 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया।14 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 (2) श्री अंसारी से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त इनके विरुद्व गठित आरोपों के विरुद्व दिये गये तर्क के लिये कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने के कारण इनके स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुए निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया। (1) निन्दन वर्ष 2000-01 (2) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त निर्णय विभागीय अधिसूचना सं0 40, दिनांक 22 जनवरी 2009 द्वारा श्री अंसारी, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया गया। (3) श्री अंसारी, तत्कालीन सहायक अभियन्ता द्वारा उक्त विभागीय अधिसूचना सं0 40, दिनांक 22 जनवरी 2009 के विरूद्व पुनर्विचार हेतु अपील अभ्यावेदन, दिनांक 26 फरवरी 2010 समर्पित किया गया। श्री अंसारी द्वारा पुनविर्चार हेतु अपील अभ्यावेदन में उठाये गये विन्दुओं की समीक्षा विभाग में पुनः सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि पुनर्विचार हेतु अपील अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य नहीं है एवं की गयी अनियमितता की जबाबदेही आरोपित की थी। फलतः श्री परवेज अख्तर अंसारी, तत्कालीन सहायक अभियन्ता के पुनर्विचार हेतु अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय श्री परवेज अख्तर अंसारी, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव ।
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5 अप्रील 2011
सं॰ 22/नि0सि0(सिवान0)-11-10/2010/399—श्री सत्येन्द्र नारायण सिंह, तत्कालीन अवर प्रमण्डल, पदाधिकारी (सहायक अभियन्ता) सारण नहर अवर प्रमण्डल, सिसवन, जिला-सिवान को अपने कर्तव्य के निर्वहन में घोर लापरवाही बरतने, समय पर नहर टूटान की सूचना नहीं देने एवं उच्चाधिकारियों के निदेशों का अनुपालन नहीं करने आदि प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिये विभागीय अधिसूचना सं0 1187, दिनांक 17 अगस्त 2010 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1443, दिनांक 24 सितम्बर 2010 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन जिसमें जॅाच पदाधिकारी द्वारा कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया है तथा श्री सिंह की मृत्यु भी दिनांक 6 जनवरी .2011 को हो गयी है। अतः समीक्षोपरान्त तकनीकी आधार पर एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए स्व0 सत्येन्द्र नारायण सिंह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता को निलबन की तिथि दिनांक 17 अगस्त 2010 से निलंबन मुक्त करते हुए दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। अतएव स्व0 सिंह को निलंबन की तिथि से निलंबन मुक्त तथा दोषमुक्त किया जाता हैं।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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28 मार्च 2011
सं0 22/नि.सि.(मोति)-8-06/2009-362—रेल थाना कांड सं0 006/2009 के प्राथमिकी अभियुक्त श्री ब्रजकिशोर झा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, घोड़ासहन नहर प्रमंडल, रक्सौल, जिन्हें हिरासत/जेल अवधि के लिये प्रथमतः अधिसूचना सं0 919, दिनांक 10 सितम्बर 2009 द्वारा निलंबित कर जमानत पर रिहा होने के बाद दिनांक 24 अगस्त 2009 को योगदान स्वीकृत करते हुये उसी तिथि अर्थात दिनांक 24 अगस्त 2009 के प्रभाव से अधिसूचना सं0 1075, दिनांक 13 अक्तूबर 2009 द्वारा पुनः निलंबित किया गया। 2. सम्यक् समीक्षोपरांत श्री झा को उनकी सेवा निवृत्ति की तिथि 31 जुलाई 2010 के प्रभाव से निलम्बन मुक्त करते हुये अधिसूचना सं0 64 दिनांक 18 जनवरी 2011 द्वारा संसूचित किया गया। 3. चूकि श्री झा को आपराधिक मामले में न्यायिक दंडाधिकारी (रेलवे) नरकटियागंज, बेतिया द्वारा दोषमुक्त कर दिया गया है और विभागीय कार्यवाही के संचालन पदा0 ने भी अपना अभिमत दिया है कि श्री झा के विरुद्ध आरोप प्रमाणित नही होता है, अतः मामले की समीक्षोपंरात श्री झा को दोषमुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। 4. तद्नुसार श्री झा को उक्त निर्णय संंसूचित किया जाता है, साथ ही श्री झा को निलम्बन अवधि मे दिये गये निर्वाह भत्ता को सामंजित करते हुए पूर्ण वेतनादि देय होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के. के. प्रसाद, उप-सचिव ।15 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011
11 मार्च 2011
सं॰ 22/नि0सि0(पट0)-3-10/2006/300—श्री रामचन्द्र प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमंडल, खगौेल अन्तर्गत उनके पदस्थापन काल में उनके द्वारा बरती गयी कतिपय अनियमितताओं के संबंध में प्राप्त परिवाद पत्र की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल, पटना के पत्रांक 23, दिनांक 23 मई 2006 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं निर्णय लिया गया कि सर्वप्रथम श्री सिन्हा से स्पष्टीकरण प्राप्त कर उसकी समीक्षा की जाए। उक्त के आलोक में विभागीय पत्रांक 831, दिनांक 12 अगस्त 2006 द्वारा श्री सिन्हा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी।
श्री सिन्हा द्वारा स्पष्टीकरण उनके पत्रांक 1771, दिनांक 15 सितम्बर 2006 द्वारा विभाग को उपलब्ध कराया गया। श्री सिन्हा से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जॅाच प्रतिवेदन की पुर्नसमीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं उक्त समीक्षा में श्री सिन्हा दोषी पाये गये। अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। उक्त परिपे्रक्ष्य में विभागीय पत्रांक 730 दिनांक 24 जुलाई 2009 द्वारा आरोप पत्र उड़नदस्ता का जॅाच प्रतिवेदन संलग्न करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही का स्पष्टीकरण श्री सिन्हा द्वारा उनके पत्रांक 06, दिनांक 27 मई 2010 एवं पत्रांक 8 दिनांक 2 जून 2010 द्वारा विभाग को समर्पित किया गया। श्री सिन्हा से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं यह निर्णय हुआ कि सदृश्य मामलों में दो वेतनवृद्वि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक की सजा दी गई है, तो ऐसी स्थिति में श्री सिन्हा के विरूद्व सेवाकाल से ही चल रहे विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 में परिवर्तित करते हुए दो वेतनवृद्वि के असंचयात्मक प्रभाव से रोक की सजा के समतुल्य छः (6) प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष तक रोक की सजा उनके द्वारा भुगतान में प्रक्रियात्मक गलती के लिए अधिरोपित की जाए। विभागीय दण्ड के प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री सहित मुख्य सचिव, बिहार के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री बिहार का अनुमोदन प्राप्त है।
वर्णित स्थिति में विभागीय पत्रांक 1087, दिनांक 22 जुलाई 2010 द्वारा उक्त विभागीय अनुमोदित दण्ड के प्रस्ताव के विन्दु पर इसके संसूचन के पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से सहमति प्रदान करने हेतु अनुरोध किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग ने अपने पत्रांक 2633, दिनांक 14 जनवरी 2011 द्वारा इस हेतु सहमति प्रदान की गयी है। तद्नुसार श्री सिन्हा को ''दो वेतनवृद्वि के असंचयात्मक प्रभाव से रोक के समतुल्य छः(6) प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष तक रोक'' की सजा अधिरोपित की जाती है।
उक्त विभागीय निर्णय श्री सिन्हा को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उपसचिव ।
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8 मार्च 2011
सं॰ 22/नि0सि0(डिं0)-14-28/2007/290—श्री महेन्द्र चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, (आई0 डी0-4372) सोन नहर प्रमंडल, विक्रमगंज के पदस्थापन अवधि में जिला पदाधिकारी भोजपुर द्वारा सोन नहर सेवापथ के कार्यो की गुणवत्ता दयनीय होने का प्रतिवेदन विभागीय आयुक्त एवं सचिव को प्राप्त होने पर निर्माणाधीन नहर सेवापथ के कार्यो के गुणवत्ता एवं विशिष्टियों की जॉच हेतु आई0 आर0 आई, खगौल के कार्यपालक अभियंता, प्रशिक्षण प्रमंडल-2 के नेतृत्व में विभागीय स्तर पर एक जॉच दल गठित की गयी। जॉच-दल द्वारा जॉच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया। जॉच-समिति के जॉचफल एवं जॉच प्रतिवेदन के आधार पर कार्यो की गुणवत्ता के संबंध में स्वतः स्पष्ट एवं आत्मभारित प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निदेश क्षेत्रिय मुख्य अभियंता, डिहरी को अभियंता प्रमुख (मध्य) द्वारा दिया गया। जॉच प्रतिवेदन के साथ मुख्य अभियंता, डिहरी के विस्तृत प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। तद्नुसार सेवापथ के निर्माण में बरती गयी अनियमितता के लिए श्री महेन्द्र चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर प्रमंडल विक्रमगंज के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में निहित प्रावधान के अनुसार विभागीय कार्यवाही चलाई गयी। संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन में आरोपी पदाधिकारियों से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आरोपी पदाधिकारी के विरूद्व आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। तदोपरान्त विभागीय समीक्षा के दौरान संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन से असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा के उपरांत व्यवहृत मेटल ग्रेड ।। एवं ।।। का साईज मान्य सीमा के अंदर है मात्र ग्रेड । का साईज कुछ हद तक ओभर साईज पाया गया है।
अतएव उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1347, दिनांक 25 नवम्बर 2009 द्वारा श्री महेन्द्र चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर प्रमंडल विक्रमगंज सम्प्रति सहायक अभियन्ता जल निःस्सरण अनुसंधान प्रमंडल, बेतिया को एक वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया।
उक्त दंडादेश के विरूद्व श्री चौधरी द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। उनसे प्राप्त अपील अभ्यावेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक् समीक्षोपरान्त मात्र मेटल ग्रेड । का साईज कुछ हद तक ओभर साईज पाया गया अर्थात् कार्य की reach की कुछ दूरी में ग्रेड । का मेटल ओभर साईज मेटल का प्रयोग हुआ है। वर्णित परिस्थिति में इनके अपील अभ्यावेदन को अमान्य मानते हुए अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है।16 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 उक्त निर्णय श्री चौधरी को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव ।
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8 मार्च 2011
सं॰ 22/नि0सि0(डिं0)-14-28/2007/289—श्री शंकर प्रसाद मंडल, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, (आई0 डी0-4451) सोन नहर प्रमंडल, विक्रमगंज के पदस्थापन अवधि में जिला पदाधिकारी भोजपुर द्वारा सोन नहर सेवापथ के कार्यो की गुणवत्ता दयनीय होने का प्रतिवेदन विभागीय आयुक्त एवं सचिव को प्राप्त होने पर निर्माणाधीन नहर सेवापथ के कार्यो के गुणवत्ता एवं विशिष्टियों की जॉच हेतु आई0 आर0 आई, खगौल के कार्यपालक अभियंता, प्रशिक्षण प्रमंडल-2 के नेतृत्व में विभागीय स्तर पर एक जॉच दल गठित की गयी। जॉच समिति के जॉचफल एवं जॉच प्रतिवेदन के आधार पर कार्यो की गुणवत्ता के संबंध में स्वतः स्पष्ट एवं आत्मभारित प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निदेश क्षेत्रिय मुख्य अभियंता, डिहरी को अभियंता प्रमुख (मध्य) द्वारा दिया गया। जॉच प्रतिवेदन के साथ मुख्य अभियंता, डिहरी के विस्तृत प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। तद्नुसार सेवापथ के निर्माण में बरती गयी अनियमितता के लिए श्री शंकर प्रसाद मंडल, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमंडल विक्रमगंज के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में निहित प्रावधान के अनुसार विभागीय कार्यवाही चलाई गयी। संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन में आरोपी पदाधिकारियों से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आरोपी पदाधिकारी के विरूद्व आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। तदोपरान्त विभागीय समीक्षा के दौरान संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन से असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा के उपरांत व्यवहृत मेटल ग्रेड ।। एवं ।।। का साईज मान्य सीमा के अंदर है मात्र ग्रेड । का साईज कुछ हद तक ओभर साईज पाया गया है। अतएव उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1348, दिनांक 25 नवम्बर 2009 द्वारा श्री शंकर प्रसाद मंडल, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमंडल विक्रमगंज सम्प्रति कार्यपालक अभियन्ता सिंचाई प्रमंडल-1 लक्ष्मीपुर, जमुई को एक वेतन वृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया।
उक्त दंडादेश के विरुद्व श्री मंडल द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। प्राप्त अपील अभ्यावेदन की सम्यक् समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक् समीक्षोपरान्त मात्र मेटल ग्रेड । का साईज कुछ हद तक ओभर साईज पाया गया अर्थात् कार्य की reach की कुछ दूरी में ग्रेड । का मेटल ओभर साईज मेटल का प्रयोग हुआ है। वर्णित परिस्थिति में इनके अपील अभ्यावेदन को अमान्य मानते हुए अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है।
उक्त निर्णय श्री मंडल को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
भरत झा, उप-सचिव ।
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1 फरवरी 2011
सं॰ 22/नि0सि0(ल0सिं0)-5-02/2000/117—श्री जनार्दन प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता लधु सिंचाई प्रमण्डल, सिमडेगा को उनके उक्त पदस्थापन अवधि में कुड़पानी मध्यम सिंचाई योजना, जिसका प्राक्कलन क्रमशः रूपये 4.98 लाख एवं रूपये 4.53 लाख था एवं निर्माण कार्य क्रमशः मार्च 1986 एवं अपै्रल 1983 में पूरा किया गया वे क्रमशः दिनांक 29 अगस्त 1987 एवं दिनांक 25 जुलाई 1985 को टूट गये के निर्माण कार्य में गंभीर त्रुटि बरतने, योजनाओं के अल्प अवधि में ही टूट कर बह जाने, प्राक्कलन के अनुसार काटे गये पत्थर का अधिक भुगतान करने आदि अनियमितताओं एवं कदाचार संबंधी आरोपों के लिये प्रथम द्रष्टया दोषी पाते हुए विभागीय आदेश सं0 37, दिनांक 27 फरवरी 1991 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरुद्व लधु सिंचाई विभाग के संकल्प ज्ञापांक 6051, दिनांक 7 सितम्बर 1991 एवं 3420, दिनांक 1 जुलाई 1992 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। (2) उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, श्री नवल किशोर सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, लधु सिंचाई विभाग, रॅाची के पत्रांक 1764, दिनांक 29 दिसम्बर 1992 एवं 1787, दिनांक 30 दिसम्बर 1992 द्वारा प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर किये जाने के उपरान्त श्री सिंह के विरुद्व निम्नांकित आरोप प्रमाणित पाये गयेः- (i) रानीकुदर एवं कुड़पानी मध्यम सिंचाई योजनाओं के संबंध में प्राक्कलन के विपरीत स्पीलवे क्रेस्ट की लम्बाई 125 फीट से 100 फीट करने के लिये न तो इनके वरीय पदाधिकारी का आदेश था और न इनके द्वारा इस संबंध में पूर्वानुमति ली गयी थी और साथ ही स्पीलवे पर जल प्रवाह की गणना भी ठीक ठंग से नहीं की गयी थी क्योंकि अधिक जल प्रवाह होने से स्पीलवे पर कुप्रभाव को अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। स्पीलवे तल की चौड़ाई पॅाच फीट रखे जाने के संबंध में पाया गया कि स्पीलवे क्रेस्ट के निर्माण हेतु फाउन्डेशन डेप्थ के लिये कोई गणना नहीं की गयी थी। फलस्वरूप तल की पॅाच फीट चौड़ाई जो अॅाकी गयी थी उसे पर्याप्त नहीं माना जा सकता हे।
(ii) मोर्टार मिश्रण में सिमेंट का अनुपात निर्धारित सीमा से कम था जिसके कारण जुड़ाई कमजोर हुई और योजना की संरचना अल्पावधि में ही ध्वस्त हो गयी।17 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 (iii) रानीकुदर एवं कुड़पानी मध्यम सिंचाई योजनाओं के प्राक्कलन में परिवर्तन के पूर्व अपने नियंत्री पदाधिकारी से लिखित पूर्वानुमति नहीं प्राप्त की गयी थी और स्थल का पर्यवेक्षण/निरीक्षण भी ठीक ठंग से नहीं किया था, जिसके कारण जुड़ाई में सिमेंट का प्रयोग सही अनुपात में नहीं किया गया। फलतः योजना अल्पावधि में ही ध्वस्त हो गयी।
(3) उक्त प्रमाणित आरोपों के लिये बर्खास्तगी का दण्ड अनुमोदित किये जाने के परिपे्रक्ष्य में श्री जर्नादन प्रसाद सिंह से विभागीय पत्रांक 928, दिनांक 5 अप्रील 1994 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त श्री सिंह को दोषी पाया गया। तदुपरान्त श्री जर्नादन प्रसाद सिंह के सेवा से बर्खास्तगी संबंधी विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 190, दिनांक 6 मार्च 1997 द्वारा सहमति प्राप्त होने के उपरान्त मंत्रिपरिषद की दिनांक 16 सितम्बर 1997 की बैठक में स्वीकृति प्राप्त की गयी।
(4) फलतः सरकार द्वारा श्री जर्नादन प्रसाद सिंह को गंभीर कदाचार, घोर अनियमितताओं जिसके कारण राजकीय घन एवं लोकहित की क्षति हुई, कार्य के प्रति घोर उपेक्षा, तकनीकी सुझबूझ की कमी, कार्य निरीक्षण/ पर्यवेक्षण का अभाव, दायित्वपूर्ण कार्य करने में पूर्ण अक्षम अभिभावी नियमों का उल्लंधन करने एवं घोर अनुशासनहीनता आदि आरोपों के लिये दोषी पाये जाने के कारण सरकारी सेवा से जनहित में बिहार एवं उड़ीसा सबोर्डिनेट सर्विसेज (रिविजन एण्ड अपील) रूल्स 1935 के नियम-2(viii) मिसलेनियस रूल्स अॅाफ बोर्ड अॅाफ रेवेन्यू के नियम-167 के तहत विभागीय आदेश सं0-1124 सह पठित ज्ञापांक 3128, दिनांक 25 सितम्बर 1997 द्वारा आदेश निर्गत होने की तिथि से सेवा से बर्खास्त किया गया। (5) उक्त विभागीय दण्ड आदेश के विरूद्व श्री जर्नादन प्रसाद सिंह सेवा से बर्खास्त अधीक्षण अभियन्ता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0सी0 सं0 2196/98 याचिका दायर किया गया, जिसमें दिनांक 31 अगस्त 1998 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री सिंह सेवा से बर्खास्त अधीक्षण अभियन्ता द्वारा महामहिम राज्यपाल के समक्ष अपील अभ्यावेदन दिनांक 27 सितम्बर 1997 प्रस्तुत किया गया। (6) श्री सिंह द्वारा उक्त अपील अभ्यावेदन में उठाये गये विन्दुओं की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं मंत्रिपरिषद द्वारा सम्पूर्ण मामले पर विचार करते हुए श्री सिंह को विभागीय आदेश सं0-1124 सह-पठित ज्ञापांक-3128, दिनांक 25 सितम्बर 1997 में सन्निहित दण्ड को तथ्यों पर आधारित एवं पूर्ण विधि सम्मत मानते हुए श्री जर्नादन प्रसाद सिंह सेवा से बर्खास्त अधीक्षण अभियन्ता के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिपरिषद के उक्त निर्णय के आलोक में श्री जर्नादन प्रसाद सिंह, सेवा से बर्खस्त अधीक्षण अभियन्ता के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने के प्रस्ताव पर महामहिम राज्यपाल का अनुमोदन प्राप्त किये जाने के उपरान्त विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1525, दिनांक 10 दिसम्बर 2002 द्वारा श्री सिंह के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय संसूचित किया गया।
(7) श्री जर्नादन प्रसाद सिंह सेवा से बर्खास्त अधीक्षण अभियन्ता द्वारा उक्त विभागीय दण्ड के विरूद्व पुनः माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर याचिका सी0 डब्लू0 जे0सी0 सं0-8681/2000 के मामले में दिनांक 29 अप्रील 2008 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0 424, दिनांक 26 मई 2009 यथा संशोधित अधिसूचना सं0 496 दिनांक 8 जून 2009 द्वारा श्री जर्नादन प्रसाद सिंह सेवा से बर्खास्त अधीक्षण अभियन्ता के विरूद्व पूर्व संसूचित विभागीय आदेश सं0 1124 सह-पठित ज्ञापांक-3128 दिनांक 25 सितम्बर 1997 एवं विभागीय अधिसूचना सं0 1525, दिनांक 10 दिसम्बर 2002 को निरस्त करते हुए विभागीय पत्रांक 519, दिनांक 16 जून 2009 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जॅाच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न कर संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन से असहमति के विन्दुओं को स्पष्ट रूप से अंकित करते हुए उनसे द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।
(8) श्री जर्नादन प्रसाद सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर, दिनांक 10 जुलाई 2009 की विन्दुवार समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरान्त निम्नांकित कारणों से श्री सिंह द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर को असंतोषजनक पाया गयाः-
(i) पी0 डब्लू0 डी0 कोड की घारा 294 के द्वारा कार्यपालक अभियन्ता को प्रदत्त शक्तियों के तहत डिजाईन में फेरबदल करने हेतु निर्माण एवं निष्पादन के दौरान उसके संरचनात्मक ब्यौरा में आवश्यकता पड़ने पर नगण्य फेरबदल मंजूर करना एवं अपनी कार्यवाही रिर्पोट अधीक्षण अभियनता को देना है। प्रस्तुत संरचना की स्वीकृत डिजाईन में संरचना की लम्बाई 140 फीट से धटाकर 125 फीट किया जाना नगण्य फेरबदल नहीं माना जा सकता है। साथ ही फेरबदल के पश्चात न तो इसकी घटनोत्तर स्वीकृति प्राप्त की गयी, न ही उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया। इससे संबंधित कोई भी अभिलेख इनके द्वारा समर्पित नहीं किया गया है अपितु इनकेद्वारा मौखिक सहमति प्राप्त करने की बात कही गयी है जिसे मानना संभव नहीं है एवं इसकी जॅाच भी अब संभव नहीं है।
(ii) 176 मि0मी0 की वर्षापात के प्रभाव से संरचना के क्षतिग्रस्त होने के आधार को सही नहीं माना जा सकता है क्योंकि अत्यधिक वर्षा के कारण जलाशय में प्राप्त जलश्राव का बहाव नीचे की तरफ निकलने हेतु ही स्पीलवे बनाया गया था। अतः अत्यधिक जलश्राव के कारण संरचना का क्षतिग्रस्त होना सही नहीं माना जा सकता हे। क्षतिग्रस्त होने का मूल कारण संरचना के कार्य में गुणवत्ता का अभाव एवं डिजाईन में फेरबदल किया जाना ही है।
(iii)योजना का कार्य कराये जाने हेतु केवल कनीय अभियन्ता एवं सहायक अभियन्ता को जिम्मेवार नहीं माना जा सकता है बल्कि इसके लिये कार्यपालक अभियन्ता भी जिम्मेवार है। कार्यपालक अभियन्ता द्वारा कम से कम पूरे कार्य का दस प्रतिशत चेकिंग की जानी है एवं वैसे कार्य जो बाद में छूप जाते है इसमें मूल्यवान कार्य भी चेकिंग की जानी जरूरी है।18 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 (लोक निर्माण लेखा संहिता की कंडिका-232 जिसमें सिंचाई विभाग के कार्यो के कार्यान्वयन में अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की संभावनाओं को समाप्त करने के संबंध में निदेश अंकित है) इसका पालन नहीं किया गया है।
(iv) कुड़पानी मध्यम सिंचाई योजना के क्षतिग्रस्त होने का मूल कारण संरचना का कार्य रूपांकण एवं प्राक्कलन के अनुरूप नहीं किये जाने के कारण ही है। संरचना के रूपांकण में किये गये परिवर्तन पर सक्षम पदाधिकारियों की स्वीकृति अप्राप्त रहने के कारण उसे सही नहीं माना जा सकता है।
(9) फलतः उक्त प्रमाणित आरोपों के लिये सरकार के स्तर पर श्री जर्नादन प्रसाद सिंह के द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर को अमान्य करते हुए उन्हें दिनांक 25 सितम्बर 1997 के प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में श्री सिंह के विरूद्व उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2129, दिनांक 19 नवम्बर 2010 द्वारा सहमति प्राप्त होने के उपरान्त मंत्रिपरिषद की दिनांक 18 जनवरी 2011 की बैठक में स्वीकृति प्राप्त की गयी।
(10) अतएव मंत्रिपरिषद की दिनांक 18 जनवरी 2011 की बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में श्री जर्नादन प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, लधु सिंचाई प्रमण्डल, सिमडेगा को दिनांक 25 सितम्बर 1997 के प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाता है।
उक्त निर्णय श्री जर्नादन प्रसाद सिंह तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
भरत झा, उप-सचिव ।
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1 फरवरी 2011
सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-1025/96/119—श्री राघव शरण शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सारण नहर प्रमण्डल, गोपालगंज के विरुद्व उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन कार्यकाल में वर्ष 1993-95 में बरती गयी कतिपय अनियमितताओं की जॅाच विभागीय उड़नदस्ता से कराया गया। उड़नदस्ता अंचल से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर सिविल सर्विसेस क्लाफिकेशन कन्ट्रोल एण्ड अपील रूल्स के नियम-55 के अन्तर्गत विभागीय संकल्प सं0 2395, दिनांक 3 नवम्बर 1996 के द्वारा उनके विरूद्व विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। लेकिन कतिपय कारणों से विभागीय कार्यवाही का निष्पादन उनके सेवाकाल में संपन्न नहीं हो सका अतः सरकार द्वारा उनके विरूद्व चलाये जा रहे विभागीय कार्यवाही को पत्रांक-69, दिनांक 8 मार्च 2000 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी0 में परिवर्तित करते हुए विभागीय कार्यवाही जारी रखने का निर्णय लिय गया । संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में श्री शर्मा के विरूद्व तीन आरोप प्रमाणित एवं चार आरोप प्रमाणित नहीं पाये गये।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री शर्मा को दंडित करने का निर्णय लिया गया। उक्त के आलोक में विभागीय पत्रांक 1001, दिनांक 26 मई 2001 द्वारा श्री शर्मा से निम्न तीन प्रमाणित आरोप एवं दो अप्रमाणित आरोपों पर असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
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(क) वर्ष 1993-94 में शीर्ष 2701 के तहत 1992-93 का 1.83 लाख रूपये का अनियमित समायोजन। (ख) 1994-95 में शीर्ष 2701 के तहत 2.89 लाख रूपये के वर्ष 93 के दायित्व का भुगतान करना। (ग) 1994-95 में शीर्ष 4701 के तहत 80,000 रुपये (अस्सी हजार रूपये) की निकासी सेल्फ चेक से करके हस्त रसीद पर भुगतान करना।
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(क) शीर्ष 2701 के तहत विभिन्न वित्तीय वर्ष में स्वीकृत प्राक्कलन के विरुद्ध दो-दो हजार रूपये के प्रथम एवंं अन्तिम विपत्र पर 2.56 लाख रूपये का भुगतान करना।
(ख) वर्ष 1993-94 में शीर्ष 4701 के अन्तर्गत 15.00 लाख रूपये के आवंटन 15,15,460 रूपये का खर्च अर्थात 15,460 रूपये का अधिक भुगतान।
द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर समर्पित करने हेतु श्री शर्मा को पे्रस विज्ञप्ति दिनांक 6.7.01 को प्रकाशित कर स्मारित किया गया परन्तु श्री शर्मा का उत्तर प्राप्त नहीं हुआ वर्णित परिस्थिति में मामले की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरानत श्री शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व निम्नांकित आरोप प्रमाणित पाये गयेः-
(1) वर्ष 1993-94 में शीर्ष 2701 के तहत 1992-93 का 1.83 लाख रूपये का अनियमित समायोजन। (2) वर्ष 1994-95 में शीर्ष 2701 के तहत 2.89 लाख रुपये के वर्ष 1993 के दायित्व का भुगतान करना। (3) वर्ष 1994-95 में शीर्ष 4701 के तहत 80.000 (अस्सी हजार रूपये) की निकासी सेल्फ चेक से करके उक्त रसीद पर भुगतान करना।
(4) शीर्ष 2701 के तहत विभिन्न वित्तीय वर्ष में स्वीकृत प्राक्कलन के विरूद्व दो-दो हजार रूपये के प्रथम एवं अन्तिम विपत्र पर 2.56 लाख रूपये का भुगतान करना।19 (cid:18)बहार गजट, 8 जून 2011 (5) वर्ष 1993-94 में शीर्ष 4701 के अन्तर्गत 15.00 लाख रूपये के आवंटन के विरूद्व 15,15,460 का खर्च अर्थात 15,460 रु0 का अधिक भुगतान।
(6) द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर पे्रस नोटिस के वावजूद अप्राप्त एवं इनके द्वारा पेंशन पेपर में दिये गये पते पर भेजा गया। द्वितीय कारण पृच्छा का पत्र वापस।
उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा विभागीय अधिसूचना सं0 2181, दिनाक 13 दिसम्बर 2001 द्वारा श्री राघव शरण शर्मा तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-
(1) बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत 75 प्रतिशत पेंशन पर पॅाच वर्षो तक रोक। (11) 15,460 रूपये की वसूली। उपरोक्त दण्डादेश के विरुद्ध श्री शर्मा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-6585/02 दायर किया गया। उक्त याचिका में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 14 सितम्बर 2006 को न्याय निर्णय पारित किया गया। पारित न्याय निर्णय में इनसे पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा को निरस्त करते हुए जॅाच पदाधिकारी से असहमति के दो विन्दुओं को स्पष्ट करते हुए पुनः द्वितीय कारण पृच्छा पूछने का माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निदेश दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा उपरोक्त याचिका में दिये गये निदेश के आलोक में निम्नलिखित असहमति के विन्दुओं को स्पष्ट करते हुए विभागीय पत्रांक 1168, दिनांक 16 नवम्बर 2006 द्वारा श्री शर्मा से द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गयाः-
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(1) सारण नहर प्रमण्डल, गोपालगंज के पदस्थापन अवधि के विभिन्न वित्तीय वर्ष में शीर्ष 2701 में नहर सम्पोषण कार्य को अपने स्वीकृत प्राक्कलन के विरूद्व 2000-2000 रूपये के विभिन्न प्रथम एवं अंतिम विपत्रों के माध्यम से 2.56 लाख रूपये का भुगतान करना।
(2) सारण नहर प्रमण्डल, गोपालगंज के पदस्थापन अवधि में आपने शीर्ष 4701 के अनतर्गत 15.00 लाख रूपये के प्राप्त आवंटन के विरुद्ध 15,15,460 रूपये का खर्च किया। अतः 15,460 रूपये का आवंटन से अधिक भुगतान करना।
श्री शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर हुई। समीक्षोपरान्त श्री शर्मा के विरूद्व उपरोक्त दोनों आरोपों को प्रमाणित पाते हुए सरकार द्वारा श्री शर्मा को निम्नलिखित दंड संसूचित करने का निर्णय लिया गया :-
(1) बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत 50 प्रतिशत पेंशन पर तीन वर्षो तक रोक। (2) 15,460 रूपये की वसूली। तदनुसार श्री राधव शरण शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सम्प्रति सेवानिवृत को उपरोक्त दण्ड अधिसूचना सं0 326, दिनांक 5 अप्रील 2007 द्वारा संसूचित किया गया।
श्री शर्मा के संबंध में विभागीय समीक्षा एवं दण्ड पर उक्त निर्णय लिये जाने में न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा (1 जनवरी 2007 ) समाप्त हो जाने के फलस्वरूप विभाग द्वारा माननीय उच्च न्यायालय से समय वृद्वि हेतु प्रार्थना पत्र एम0 जे0 सी0 सं0-3155/07 दायर किया गया जिसे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा खरिज कर दिया गया। जिसके कारण पूर्व में दायर वाद सं0 सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0 6585/02 में पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री शर्मा इस मामले में सभी आरोपो से मुक्त हो गये है एवं सेवान्त लाभाो के हकदार है।
अतः श्री शर्मा को इस मामले में सभी आरोपों से मुक्त करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड अधिसूचना सं0 326, दिनांक 5 अप्रील 2007 को निरस्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार प्रसाद, उप-सचिव ।
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अधीHक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुNित। (cid:18)बहार गजट, 12Ñ571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in