Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 10 June 2011

Published 10 June 2011

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2011-06-10.284
Languages
English, Hindi

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट

असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 20202020 (cid:31)ये(cid:31)ये(cid:31)ये(cid:31)येंठंठंठंठ 1933193319331933 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 222288884444) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, शुबवारशुबवारशुबवारशुबवार,,,, 10101010 जून जून जून जून 2011201120112011 laŒ 691 m|ksx foHkkx ——— ladYi 9 twu 2011 विषय : राज्य के त्वरित औद्योगिक विकास के लिए औद्योगिक प्रोत्साहन नीति, बिहार-2011

बिहार में Global Industrial Scenario में तेजी से बदलाव के मद्‌देनजर एवं राज्य में आन्तरिक और देश के बाहर से निवेश आकर्षित किए जाने के साथ-साथ राज्य के विद्यमान उद्योगों को पुनर्जीवन एवं विस्तारण के लिए समुचित माहौल एवं प्रोत्साहन के उद्वेश्य से औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2006 की समीक्षा की गई। समीक्षा के उपरान्त, वर्त्तमान परिपेक्ष्य में यह आवश्यक हो गया है कि नई औद्योगिक नीति बनाई जाए, जिसमें राज्य में सन्तुलित औद्योगिक विकास हो तथा राज्य के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान में उद्योगों का योगदान हो सके। उपर्युक्त परिपेक्ष्य में राज्य के प्रमुख औद्योगिक संघों यथा- बिहार उद्योग संघ, बिहार चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इन्डस्ट्रीज, लघु उद्योग भारती, हाजीपुर उद्योग संघ, आदि विभिन्न संस्थाओं एवं संबंधित सरकारी विभागों के साथ विचार-विमर्श एवं सुझाव प्राप्त किए गए और तदनुसार बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2011 तैयार की गई है। इस नीति को तैयार करने में विभिन्न पड़ोसी राज्यों की औद्योगिक नीतियों को भी ध्यान में रखा गया है।

प्रस्तावित नीति के अंतर्गत उत्पादन के पूर्व स्टाम्प ड्‌यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में शत-प्रतिशत छूट, औद्योगिक इकाइयों को पूँजीगत अनुदान, वैट की 80 प्रतिशत प्रतिपूर्त्ति की राशि में प्रवेश-कर को सम्मिलित किए जाने, कैपटिभ पॉवर जेनरेशन/डीजल जेनरेटिंग सेट पर विद्यमान इकाइयों को भी प्रोत्साहन एवं गैर-पारम्परिक श्रोतो से ऊर्जा उत्पादन पर अनुदान, परियोजना प्रतिवेदन बनाने पर हुए व्यय की प्रतिपूर्त्ति, तकनीकी जानकारी शुल्क, गुणवत्ता प्रमाणन पर छूट, विद्युत शुल्क आदि पर अनुदान/छूट आदि कई प्रोत्साहनों का प्रावधान है। औद्योगिक प्रोत्साहन नीति, बिहार-2011 के लागू होने से आशा की जाती है कि राज्य के विकास में काफी वृद्धि होगी तथा नियोजन के साथ त्वरित औद्योगिक विकास होगा। साथ ही बिहार के सभी नागरिकों के समग्र विकास में उद्योगों की सकारात्मक भूमिका होगी।

कार्यनीतिकार्यनीतिकार्यनीतिकार्यनीति

(i) राज्य में उद्योगों की स्थापना हेतु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की आधारभूत संरचनाओं का विकास करना ताकि राज्य में अधिक-से-अधिक देशी-विदेशी पूँजी निवेश आकर्षित हो सके।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 10 जून 2011 2 (ii) लैण्ड बैंक- उद्योग की स्थापना में भूमि की अहम्‌ भूमिका है। उद्योग एवं विकास योजनाओं के लिए भूमि की आवश्यकता को देखते हुए राज्य में लैण्ड बैंक की स्थापना की कार्रवाई की जाएगी, जिसके माध्यम से आवश्यकतानुसार विभिन्न उद्योग एवं विकास योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता हो सकेगी।

(iii) लघु, सूक्ष्म, ग्रामीण उद्योगों, हस्तशिल्प, हस्तकरघा, खादी, रेशम आदि उद्योगों को विकसित करते हुए इनके द्वारा उत्पादित सामग्रियों का विपणन की व्यवस्था करना।

(iv) रुग्ण इकाइयों के पुनर्वास हेतु ससमय रुग्णता के कारणों की पहचान कर समय पर आवश्यक उपाय करना, ताकि इकाई को रुग्ण होने से रोका जा सके तथा इसके लिए जिला स्तरीय अनुश्रवण प्रणाली विकसित कर रुग्णता को यथासंभव रोकने का प्रयास करना।

(v) राज्य सरकार द्वारा कारगर सिंगल विण्डो सिस्टम की व्यवस्था, परियोजनाओं को उपलब्ध कराना तथा आवश्यक आधारभूत सुविधाएँ यथा- सड़क, पानी एवं अबाधित विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

(vi) सभी प्रकार के आवंटन/अनुदान/एवं उद्यमियों से संबंधित प्रक्रियाओं का सरलीकरण एवं उसमें पारदर्शिता होना, यथा संभव ऑनलाईन सुविधाओं का प्रावधान सुलभ करना।

(vii) औद्योगिक प्रांगणों/क्षेत्रों में Common Effluent Treatment की व्यवस्था किया जाना। (viii) बिआडा द्वारा नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए औद्योगिक पार्क का निर्माण किया जाएगा, ताकि नए मध्यम एवं वृहत्‌ उद्योगों की स्थापना शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्र में हो। (ix) राज्य सरकार के निम्नांकित थ्रस्ट एरिया होंगे :- राज्य सरकार के निम्नांकित थ्रस्ट एरिया होंगे :- राज्य सरकार के निम्नांकित थ्रस्ट एरिया होंगे :- राज्य सरकार के निम्नांकित थ्रस्ट एरिया होंगे :- (1) खाद्य प्रसंस्करण (2) कृषि आधारित उद्योग (3) पर्यटन संबंधी उद्योग (4) सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (5) उच्च/तकनीकी अध्ययन संस्थान (6) सूचना प्रावैद्यिकी आधारित उद्योग (7) इलेक्ट्रोनिक हार्डवेयर उद्योग (8) वस्त्र उद्योग (9) ऊर्जा/गैर-पारम्परिक ऊर्जा

औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के सूत्रण किए जाने के लिए राज्य के उद्योगों को दी जाने वाली प्रोत्साहन ें को दी जाने वाली प्रोत्साहन ें को दी जाने वाली प्रोत्साहन ें को दी जाने वाली प्रोत्साहन औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के सूत्रण किए जाने के लिए राज्य के उद्योगा औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के सूत्रण किए जाने के लिए राज्य के उद्योगा औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के सूत्रण किए जाने के लिए राज्य के उद्योगा बिहार राज्य में औद्योगिक विकास में गति लाने एवं औद्योगिक विकास में पूँजी निवेश को बढ़ावा देने हेतु राज्य पूँजी निवेश को बढ़ावा देने हेतु राज्य पूँजी निवेश को बढ़ावा देने हेतु राज्य पूँजी निवेश को बढ़ावा देने हेतु राज्य बिहार राज्य में औद्योगिक विकास में गति लाने एवं औद्योगिक विकास में बिहार राज्य में औद्योगिक विकास में गति लाने एवं औद्योगिक विकास में बिहार राज्य में औद्योगिक विकास में गति लाने एवं औद्योगिक विकास में के उद्योगों कके उद्योगों कके उद्योगों कके उद्योगों को प्रोत्साहन/छूट की सुविधाएँ ो प्रोत्साहन/छूट की सुविधाएँ ो प्रोत्साहन/छूट की सुविधाएँ ो प्रोत्साहन/छूट की सुविधाएँ

1111.... उत्पादन पूर्व (उत्पादन पूर्व (उत्पादन पूर्व (उत्पादन पूर्व (Pre Production) सुविधाएँसुविधाएँसुविधाएँसुविधाएँ :-

स्टाम्प ड्‌यूटी एवं पंजीकरण शुल्क : स्टाम्प ड्‌यूटी एवं पंजीकरण शुल्क : स्टाम्प ड्‌यूटी एवं पंजीकरण शुल्क : स्टाम्प ड्‌यूटी एवं पंजीकरण शुल्क : (क) औद्योगिक भूखण्ड/शेड एवं प्राधिकार क्षेत्र के बाहर स्थापित होने वाले उद्योगों आदि के लीज/बिक्री/अन्तरण पर लगने वाले स्टाम्प ड्‌यूटी/पंजीकरण शुल्क से सूक्ष्म, लघु, मध्यम (MSME) एवं वृहत्‌ उद्योगों को शत्‌-प्रतिशत (100 प्रतिशत) छूट होगी। यह सुविधा प्रथम बार ही देय होगी एवं तदुपरान्त किए जाने वाले लीज/विक्रय/अन्तरण पर स्टाम्प ड्‌यूटी/पंजीकरण शुल्क की छूट देय नहीं होगी। यह सुविधा नई इकाइयों को ही देय होंगी।

(ख) वैसी कार्यरत औद्योगिक इकाइयाँ, जिनके द्वारा इकाई का विस्तार (Expansion) अथवा विशाखन (Diversification) किया जाता है तथा उनके उत्पादन क्षमता (Capacity) में 50 (पचास) प्रतिशत की वृद्धि हो तो उनको भी मात्र विस्तारीकरण के लिए आवश्यक अतिरिक्त भूमि पर ही यह सुविधा प्राप्त होगी।

(ग) किसी कारणवश अगर उपरोक्त छूट इकाई द्वारा नहीं प्राप्त की जाती है और भूमि का क्रय कर लिया जाता है तो उत्पादन के बाद (Post Production Stage) उपर्युक्त स्टाम्प ड्‌यूटी एवं पंजीकरण शुल्क की राशि की प्रतिपूर्त्ति विभाग द्वारा की जाएगी।

2. नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के अन्तर्गत निम्नांकित प्रोत्साहन औद्योगिक इकाइयों के वाणिज्यिक नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के अन्तर्गत निम्नांकित प्रोत्साहन औद्योगिक इकाइयों के वाणिज्यिक नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के अन्तर्गत निम्नांकित प्रोत्साहन औद्योगिक इकाइयों के वाणिज्यिक नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के अन्तर्गत निम्नांकित प्रोत्साहन औद्योगिक इकाइयों के वाणिज्यिक उत्पादन उत्पादन उत्पादन उत्पादन (Commercial Production) प्रारम्भ करने के पश्चात्‌ दिया जाएगा :-प्रारम्भ करने के पश्चात्‌ दिया जाएगा :-प्रारम्भ करने के पश्चात्‌ दिया जाएगा :-प्रारम्भ करने के पश्चात्‌ दिया जाएगा :-

(i) व्यवसायिक उत्पादन बाद व्यवसायिक उत्पादन बाद व्यवसायिक उत्पादन बाद व्यवसायिक उत्पादन बाद (Post Production) सुविधाएँ सुविधाएँ सुविधाएँ सुविधाएँ —इस नीति के अंतर्गत व्यवसायिक उत्पादन के बाद दिए जाने वाले विभिन्न प्रतिपूर्त्तियों (Re-imbursement) यथा- परियोजना प्रतिवेदन प्रोत्साहन, भूखण्ड/शेड पर दी जाने वाली प्रोत्साहन, तकनीकी जानकारी शुल्क पर आर्थिक सहायता, पूँजीगत अनुदान आदि पर औद्योगिक इकाइयों द्वारा जो भी प्रोत्साहन लिया जाएगा, उसकी कुल अधिकतम सीमा 600 लाख रु0 (छः सौ लाख रु0) (कैपटिव पॉवर3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 10 जून 2011 जेनरेशन/डी0जी0 सेट पर प्रोत्साहन अनुदान को छोड़कर) होगी। इसके तहत्‌ कंडिका-2 में उल्लिखित सुविधाओं का प्रावधान होगा।

(ii) परियोजना प्रतिवेदन प्रोत्सपरियोजना प्रतिवेदन प्रोत्सपरियोजना प्रतिवेदन प्रोत्सपरियोजना प्रतिवेदन प्रोत्साहनाहनाहनाहन—औद्योगिक इकाइयों द्वारा तैयार किए गए परियोजना पर हुए व्यय की 50 (पचास) प्रतिशत राशि (या अधिकतम 2 लाख रु0) प्रतिपूर्त्ति किया जाएगा। बशर्त्ते कि, उपर्युक्त परियोजना प्रतिवेदन उद्योग विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त किसी परामर्शी कन्सल्टेन्सी द्वारा बनाया गया हो। यदि परियोजना प्रतिवेदन कार्बन क्रेडिट तैयार करने हेतु बनाई जाती है तथा इकाई को कार्बन क्रेडिट प्राप्त होती है तो परामर्शी शुल्क का 50 (पचास) प्रतिशत, अधिकतम 15 (पन्द्रह) लाख रु0 प्रतिपूर्त्ति की जाएगी।

(iii) भूखण्ड/शेड पर दी जानेवाली सुविधाएँ भूखण्ड/शेड पर दी जानेवाली सुविधाएँ—औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार/निर्यात प्रोत्साहन भूखण्ड/शेड पर दी जानेवाली सुविधाएँ भूखण्ड/शेड पर दी जानेवाली सुविधाएँ औद्योगिक पार्क/फूड पार्क/एग्रो एक्सपोर्ट जोन द्वारा आवंटित भूखण्ड/शेड के मूल्यों पर तथा सरकारी भूमि अथवा निजी रूप से स्थापित औद्योगिक प्रांगण/पार्क की आवंटित भूमि पर निवेश पर सभी पात्र इकाइयों को निम्नप्रकार प्रोत्साहन/अनुदान देय होगा।

क्रमांक उद्योग अनुदान
1 सूक्ष्म/लघु इकाइयाँ वित्तीय सीमा 50 प्रतिशत या (अधिकतम 15 लाख रु0)
2 सभी वृहत/मध्यम/मेगा इकाइयाँ वित्तीय सीमा 25 प्रतिशत या (अधिकतम 30 लाख रु0)

(iv) तकनीकी जानकारी शुल्क पर आर्थिक सहायता तकनीकी जानकारी शुल्क पर आर्थिक सहायता—यदि कोई उद्यमी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता तकनीकी जानकारी शुल्क पर आर्थिक सहायता तकनीकी जानकारी शुल्क पर आर्थिक सहायता प्राप्त अथवा राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान से अपने उद्योग को स्थापित करने या बढ़ाने हेतु तकनीकी जानकारी (Technical Know How) प्राप्त करते हैं तो उसे उपर्युक्त संस्थान/संगठन द्वारा शुल्क के रूप में ली गई राशि का 30 प्रतिशत आर्थिक सहायता के रूप में अथवा अधिकतम सीमा 15 लाख रु0 (पन्द्रह लाख रु0) की प्रतिपूर्त्ति की जाएगी।

(v) कैपटिव पॉवर जेनरेशन/डीजल जेनरेटिंग सेट के प्लान्ट एवं मशीनरी पर हुए व्यय संबंधी कैपटिव पॉवर जेनरेशन/डीजल जेनरेटिंग सेट के प्लान्ट एवं मशीनरी पर हुए व्यय संबंधी कैपटिव पॉवर जेनरेशन/डीजल जेनरेटिंग सेट के प्लान्ट एवं मशीनरी पर हुए व्यय संबंधी कैपटिव पॉवर जेनरेशन/डीजल जेनरेटिंग सेट के प्लान्ट एवं मशीनरी पर हुए व्यय संबंधी प्रोत्साहन अनुदान :प्रोत्साहन अनुदान :प्रोत्साहन अनुदान :प्रोत्साहन अनुदान :----

(क) कैपटिव पॉवर जेनरेशन/डीजल जेनरेटिंग सेट के प्लान्ट एवं मशीनरी पर हुए व्यय की राशि का 50 प्रतिशत (पचास प्रतिशत) उद्योग को अनुदान देय होगा। इसके लिए अधिसीमा निर्धारित नहीं की गई है।

(ख) विद्यमान इकाइयों (Existing units) को औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2011 लागू होने के बाद कैपटिव पॉवर प्लान्ट या डी0जी0 सेट लगाने की स्थिति में उपर्युक्त अंश ''क'' का अनुदान देय होगा।

(ग) यह अनुदान कैपटिव पॉवर जेनरेशन हेतु गठित SPV को भी देय होगा, बशर्त्ते कि, उक्त SPV औद्योगिक क्षेत्र में अवस्थित इकाई हो अथवा उद्योग समूह के लिए गठित इकाई हो तथा उस SPV के अधिकांश सदस्य उन इकाइयों से हो, तथा उनके द्वारा औद्योगिक प्रांगण/औद्योगिक समूह में अवस्थित उद्योगों को विद्युत आपूर्त्ति की जाएगी। (घ) गैर-पारम्परिक श्रोतों से ऊर्जा उत्पादन करने हेतु प्लान्ट एवं मशीनरी पर हुए व्यय की राशि का 60% (साठ प्रतिशत) अनुदान उद्योग को देय होगा। इसके लिए अधिसीमा निर्धारित नहीं की गई है। यह सुविधा विद्यमान इकाइयों (Existing units) को भी देय होगा।

(vi) Monthly Minimum Charges/Minimum Base Energy Charge/ Demand/ Billing Demand से छूटसे छूटसे छूटसे छूट—वर्त्तमान में कार्यरत इकाइयों तथा नई इकाइयों को Monthly Minimum Charges/Minimum Base Energy Charge/Demand/Billing Demand अथवा बिहार विद्युत विनियामक आयोग के द्वारा निर्धारित tariff आदेश में वर्णित किसी अन्य नाम से Minimum Gurantee (Energy & Demand) शुल्क से छूट नई औद्योगिक नीति के प्रभावी होने की तिथि से दी जाएगी। यह सुविधा पाँच वर्षों के लिए देय होगी।

(vii) पूँजीगत अनुदान :पूँजीगत अनुदान :पूँजीगत अनुदान :पूँजीगत अनुदान :

(क) नई Micro, Small and Medium Enterprises औद्योगिक इकाइयों को प्लान्ट एवं मशीनरी पर किए गए पूँजी निवेश का 20 (बीस) प्रतिशत पूँजीगत अनुदान देय होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 75 लाख रु0 (पचहत्तर लाख रु0) होंगी।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 10 जून 2011 4 (ख) नई वृहत्‌ औद्योगिक इकाइयों को प्लान्ट एवं मशीनरी पर किए गए पूँजी निवेश का 20 (बीस) प्रतिशत पूँजीगत अनुदान देय होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 500 लाख रु0 (पाँच सौ लाख रु0) होंगी।

(ग) पूँजीगत अनुदान इस नीति के प्रभावी होने की तिथि के बाद उत्पादन में आए उद्योगों द्वारा प्लांट एवं मशीनरी पर किए गए पूँजी निवेश पर ही लागू होगा तथा यह सुविधा संबंधित औद्योगिक इकाई के वाणिज्यिक उत्पादन में आने के पश्चात्‌ ही देय होगी। (घ) चूँकि खाद्य प्रसंस्करण प्रक्षेत्र की इकाइयों को खाद्य प्रसंस्करण नीति के अन्तर्गत पूँजीगत अनुदान दिए जाने का प्रावधान है, अतः उन्हें उपर्युक्त पूँजीगत अनुदान देय नहीं होगा। (viii) गुणवत्ता प्रमाणन पर प्रोत्साहनगुणवत्ता प्रमाणन पर प्रोत्साहनगुणवत्ता प्रमाणन पर प्रोत्साहनगुणवत्ता प्रमाणन पर प्रोत्साहन—राज्य में लघु उद्योग इकाइयों को गुणवत्ता में सुधार करने के दृष्टिकोण से आई0एस0ओ0 मानक (या इसके समतुल्य) राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थाओं से प्रमाणन प्राप्त करने के क्रम में हुए व्यय (Expenditure incurred on the fees) के 75 (पचहत्तर) प्रतिशत की प्रतिपूर्त्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।

(ix) यदि कोई इकाई का प्रथम बार Mortgage दस्तावेज निबंधित कराया जाता है तो उस पर लगने वाले निबंधन शुल्क अथवा देय शुल्क की अधिसीमा निर्धारित की जाएगी। इस संबंध में निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग द्वारा अलग से अधिसूचना निर्गत की जाएगी। 3333.... कर संबंधी सुविधाएँकर संबंधी सुविधाएँकर संबंधी सुविधाएँकर संबंधी सुविधाएँ :ःःः (i) वैट एवं प्रवेश-कर की प्रतिपूर्त्ति :वैट एवं प्रवेश-कर की प्रतिपूर्त्ति :वैट एवं प्रवेश-कर की प्रतिपूर्त्ति :वैट एवं प्रवेश-कर की प्रतिपूर्त्ति :

(क) यह सुविधा नई एम0एस0एम0ई0/वृहत्‌ उद्योगों को देय होगी। पात्र औद्योगिक इकाइयों को राज्य सरकार द्वारा एक पासबुक (पेपर/इलेक्ट्रानिक) निर्गत किया जाएगा, जिसमें वित्त (वाणिज्य-कर) विभाग को बिहार वैट के मद में भुगतान किए गए करों का ब्यौरा रहेगा। पात्र औद्योगिक इकाइयों को महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र/प्रबंध निदेशक, बिआडा (जो भी लागू हो) द्वारा पास-बुक निर्गत किया जाएगा, जो इकाई द्वारा उत्पादन में रहने एवं इकाई द्वारा जमा की गई वैट राशि का सत्यापन करेंगे। उक्त इकाई के कार्यरत रहने के प्रमाण के आधार पर भुगतान का सत्यापन कर वित्त (वाणिज्य-कर) विभाग द्वारा प्रतिपूर्त्ति की कार्रवाई की जाएगी। (ख) नई इकाइयों के लिए सरकार के खाता में जमा की गई स्वीकृत वैट (VAT) की राशि के विरूद्ध 80 (अस्सी) प्रतिशत प्रतिपूर्त्ति सभी श्रेणियों के उद्योगों को 10 (दस) वर्ष की अवधि के लिए किया जाएगा। प्रतिपूर्त्ति की अधिकतम राशि पूँजी निवेश का 300(तीन सौ) प्रतिशत देय है। (ग) परंतु यह, कि ब्रिवरी एवं डिस्टलरी उद्योग की नई इकाइयों को वैट की प्रतिपूर्त्ति मात्र 25 प्रतिशत की अधिसीमा तक की जाएगी, जो 10 (दस) वर्षों के लिए होगी एवं पूँजी निवेश के 300 (तीन सौ) प्रतिशत तक ही देय होगी।

स्पष्टीकरण :-स्पष्टीकरण :-स्पष्टीकरण :-स्पष्टीकरण :- यह प्रोत्साहन राशि बिहार वित्त अधिनियम-1981/केन्द्रीय बिक्री-कर अधिनियम-1993 के अन्तर्गत अधिरोपित शास्ति की राशि एवं निर्धारित कर तथा स्वीकृत कर में अन्तर की राशि पर देय नहीं होगी।

प्रवेश-कर प्रवेश-कर प्रवेश-कर प्रवेश-कर (Entry Tax)—नई औद्योगिक इकाइयों को उत्पादन में आने के बाद इनके द्वारा वैट के अन्तर्गत आऊटपुट टैक्स (Output Tax) से प्रवेश-कर (Entry Tax) की राशि सामंजित होने की स्थिति में प्रवेश-कर मद में भुगतान की गई राशि को वैट की 80 प्रतिशत राशि की प्रतिपूर्त्ति में सम्मिलित किया जाएगा। यह सुविधा कार्यरत इकाइयों को भी देय होगी तथा उपरोक्त सभी प्रकार के इकाइयों को इस नीति के प्रभाव में आने के बाद ही देय होगी। प्रवेश-कर मद में अलग से यदि किसी छूट का निर्णय होता है तो तत्संबंधी अधिसूचना समय-समय पर वित्त (वाणिज्य-कर) विभाग द्वारा निर्गत किया जाएगा।

(ii) नई औद्योगिक इकाइयनई औद्योगिक इकाइयनई औद्योगिक इकाइयनई औद्योगिक इकाइयों को व्यवसायिक उत्पादन प्रारम्भ करने के पश्चात्‌ निम्नांकित सुविधाएँ ों को व्यवसायिक उत्पादन प्रारम्भ करने के पश्चात्‌ निम्नांकित सुविधाएँ ों को व्यवसायिक उत्पादन प्रारम्भ करने के पश्चात्‌ निम्नांकित सुविधाएँ ों को व्यवसायिक उत्पादन प्रारम्भ करने के पश्चात्‌ निम्नांकित सुविधाएँ उपलब्ध होंगी :-उपलब्ध होंगी :-उपलब्ध होंगी :-उपलब्ध होंगी :-

(क) लग्जरी टैक्स में 7 (सात) वर्षों के लिए 100 प्रतिशत की छूट

(ख) विद्युत शुल्क में 7 (सात) वर्षों के लिए 100 प्रतिशत की प्रतिपूर्त्ति

(ग) भूमि सम्परिवर्त्तन/(कन्वर्सन) शुल्क में 100 प्रतिशत की छूट

कार्यरत इकाइयों को वैट/प्रवेश-कर की प्रतिपूर्त्ति संबंधी प्रोत्साहन—वर्त्तमान में कार्यरत औद्योगिक (iii) कार्यरत इकाइयों को वैट/प्रवेश-कर की प्रतिपूर्त्ति संबंधी प्रोत्साहन कार्यरत इकाइयों को वैट/प्रवेश-कर की प्रतिपूर्त्ति संबंधी प्रोत्साहन कार्यरत इकाइयों को वैट/प्रवेश-कर की प्रतिपूर्त्ति संबंधी प्रोत्साहन इकाइयों को स्वीकृत वैट राशि के विरूद्ध राज्य सरकार के खाता में जमा वैट/प्रवेश-कर की राशि का 25 (पचीस) प्रतिशत प्रतिपूर्त्ति की जाएगी। यह प्रतिपूर्त्ति लगातार पाँच वर्षों की अवधि तक ही अनुमान्य होंगी। कार्यरत इकाइयों द्वारा विस्तार किए जाने पर उनको भी Expanded Portion की5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 10 जून 2011 सीमा तक यह सुविधा प्राप्त हो सकेंगी। यह सुविधा पूर्व से कार्यरत चीनी मिलों को भी मिलेगी, बशर्त्ते कि इस प्रकार की सुविधा उन्हें गन्ना प्रोत्साहन नीति के तहत्‌ नहीं हो।

केन्द्रीय बिक्री-कर केन्द्रीय बिक्री-कर केन्द्रीय बिक्री-कर केन्द्रीय बिक्री-कर (CST)—सक्षम स्तर से निबंधित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (MSME) उद्योगों द्वारा उत्पादित सामग्रियों पर केन्द्रीय बिक्री-कर एक प्रतिशत देय होगा।

नोट :-GST व्यवस्था लागू होने पर उपरोक्त सुविधाएँ उस व्यवस्था के तहत्‌ समान रूप से देय होगी। 4444.... अन्य विशेष सुविधाएँ :-अन्य विशेष सुविधाएँ :-अन्य विशेष सुविधाएँ :-अन्य विशेष सुविधाएँ :-

(i) उद्योग पुनर्वास निधि उद्योग पुनर्वास निधि उद्योग पुनर्वास निधि उद्योग पुनर्वास निधि (Corpus Fund)—रुग्ण उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए वाणिज्यिक बैंक, राज्य सरकार एवं उद्योग संघों एवं अन्य के सहयोग से एक कारपस निधि (Corpus Fund) की स्थापना की जाएगी। इसके माध्यम से रुग्ण, लघु एवं मध्यम इकाइयों, जिनका पुनर्वास पैकेज स्वीकृत किया गया हो, को कम समय में वित्तीय सहायता प्रदान किया जाएगा। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन-जाति/महिला/निःशक्त (ii) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन-जाति/महिला/निःशक्त अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन-जाति/महिला/निःशक्त अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन-जाति/महिला/निःशक्त

(क) इन वर्गों के उद्यमियों को अनुदान/छूट/प्रतिपूर्त्ति के रूप में इस नीति में निर्धारित सीमा से 5 (पाँच) प्रतिशत अधिक अनुमान्य होगा।

(ख) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन-जाति/महिला/निःशक्त श्रेणी के उद्यमियों, जो लघु एवं अतिलघु उद्योग लगाते हैं, को 30 लाख रु0 (तीस लाख रु0) प्रतिवर्ष बैलेंस सीट के अनुसार बिक्री से प्राप्त आय तक के लिए वैट के रूप में सरकार के खाता में जमा राशि की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्त्ति 10 (दस) वर्षों के लिए की जायेंगी।

उक्त छूट उन्हीं प्रतिष्ठानों को देय होगी, जो अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन-जाति/महिला/निःशक्त श्रेणियों के उद्यमियों के पूर्ण स्वामित्व में होगा।

(iii) नियोजन (रोजगार सृजनियोजन (रोजगार सृजनियोजन (रोजगार सृजनियोजन (रोजगार सृजन अनुदान) :- न अनुदान) :- न अनुदान) :- न अनुदान) :- किसी औद्योगिक इकाई द्वारा इस नीति के लागू होने के पश्चात्‌ अगर कम-से-कम 100(एक सौ) प्रत्यक्ष नियोजन (Direct Employment) सृजित (Generate) किया जाता हो, तो उन्हें उनके नियोजन की तिथि से 1(एक) वर्ष तक उनके नए कर्मचारियों (Employees) को जो ई0पी0एफ0 (EPF) की राशि इकाई द्वारा भुगतान की जायेंगी, उसके समतुल्य प्रोत्साहन राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। विस्तार/विशाखन/आधुनिकीकरण करने वाली इकाइयों की सुविधा—ऐसी विद्यमान इकाइयाँ, (iv) विस्तार/विशाखन/आधुनिकीकरण करने वाली इकाइयों की सुविधा विस्तार/विशाखन/आधुनिकीकरण करने वाली इकाइयों की सुविधा विस्तार/विशाखन/आधुनिकीकरण करने वाली इकाइयों की सुविधा जो अपनी क्षमता का विस्तार/विशाखन/आधुनिकीकरण करते हैं तो इन्क्रीमेन्टल उत्पादन पर ऐसी इकाइयों को कंडिका-2 एवं कंडिका-3 में वर्णित नई इकाइयों को देय सुविधा प्राप्त होगी। (v) वृहत्‌ उद्योगों को प्राथमिकता देने हेतु तथा राज्य में विभिन्न प्रकार के पूँजी निवेश को आकर्षित किए जाने के उद्वेश्य से 500 (पाँच सौ) करोड़ रु0 से अधिक पूँजी निवेश से संबंधित प्रस्तावों पर राज्य सरकार द्वारा इस नीति के अन्तर्गत प्राप्त सभी सुविधाओं के अलावे निम्न अतिरिक्त सुविधा/ प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा :-

इस नीति के कंडिका-2 (vii) (ख) में वर्णित पूँजीगत अनुदान 20 प्रतिशत देय होगी, परन्तु इसकी अधिसीमा 5 (पाँच) करोड़ के स्थान पर 30 (तीस) करोड़ रु0 होगी।

5555.... औद्योगिक रुग्णताऔद्योगिक रुग्णताऔद्योगिक रुग्णताऔद्योगिक रुग्णता (Industrial Sickness) रुग्ण इकाइयों का पुनर्वासरुग्ण इकाइयों का पुनर्वासरुग्ण इकाइयों का पुनर्वासरुग्ण इकाइयों का पुनर्वास—औद्योगिक रुग्णता औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया का एक अंग है। इसके फलस्वरूप बेरोजगारी, पूँजी निवेश का अवरूद्ध होना, राजस्व की हानि एवं परिसम्पत्तियों का उपयोग नहीं हो पाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि उपयुक्त कदम उठाए जायें, जिससे रुग्ण उद्योगों का पुनर्वास हो सके। सरकार इस संबंध में चिंतित है तथा रुग्णता को रोकने एवं रुग्ण इकाइयों का पुनर्वास करने के लिए निम्नांकित कदम उठाए जायेंगे। साथ ही प्राकृतिक आपदा के फलस्वरूप रुग्ण हुई इकाइयों के पुनर्वास हेतु भी कदम उठाए जायेंगे। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम (सूक्ष्म लघु एवं मध्यम (सूक्ष्म लघु एवं मध्यम (सूक्ष्म लघु एवं मध्यम (MSME) प्रक्षेत्रःप्रक्षेत्रःप्रक्षेत्रःप्रक्षेत्रः राज्य स्तरीय कमिराज्य स्तरीय कमिराज्य स्तरीय कमिराज्य स्तरीय कमिटटटटीीीी :ःःः

(i) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के पुनर्वास हेतु उद्योग निदेशक की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय शीर्षस्थ संस्था (स्टेट लेवल कमिटि) द्वारा निर्णय लिया जाएगा।

(ii) रुग्ण उद्योगों के पुनर्वास हेतु राज्य स्तरीय शीर्षस्थ संस्था को पर्याप्त वैधानिक शक्तियाँ प्रदत्त की जायेंगी, जिससे कि यह समिति पुनर्वास पैकेज को तैयार करने हेतु एजेन्सी का चयन करेगी, जिससे कि प्रभावी ढ़ंग से कार्यान्वित किया जा सके।

(iii) रिजर्व बैंक/एस0आई0डी0बी0आई0(SIDBI) के दिशा निर्देशों के अनुसार रुग्ण एवं सूक्ष्म लघु एवं मध्यम इकाइयों की पहचान की जायेंगी तथा पुनर्वास पैकेज तैयार करने हेतु एजेन्सी(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 10 जून 2011 6 का चयन करने में सहयोग करेगी, जिससे उनके पुनर्वास हेतु उपर्युक्त पुनर्वास पैकेज अनुमोदित किया जाएगा।

(iv) जिन रुग्ण इकाइयों का पुनर्वास हो रहा हो उन्हें प्रतिवर्ष रुग्णता प्रमाण-पत्र नहीं लेना पड़ेगा। अनुमोदित पुनर्जीवन पैकेज प्रत्येक रुग्ण इकाई के लिए पुनर्जीवन की अवधि विनिर्दिष्ट करेगा।

(v) राज्य स्तरीय शीार्षस्थ संस्था द्वारा पहचान की गई रुग्ण इकाइयाँ ही पुनर्वास हेतु बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं से रिजर्व बैंक के मार्गनिर्देश के अनुसार मिलने वाली छूट एवं रियायत के पात्र होंगे। यह छूट एवं रियायत एक निश्चित सीमा के अन्दर देने पर विचार किया जाएगा। (vi) रुग्णता की पहचान कर तीन माह के अन्दर पुनर्वास पैकेज तैयार किया जाएगा। राज्य स्तरीय शीर्ष संस्था द्वारा रुग्ण इकाइयों के पुनर्वास प्रक्रिया का अनुश्रवण किया जाएगा।

(vii) रुग्ण इकाइयाँ जिन्होंने पूर्व में किसी औद्योगिक नीति का लाभ उठाया हो, को पुनः दूसरी बार भी वैसी रुग्ण इकाई को इस नीति के अन्तर्गत लाभ मिलेगा। अगर कोई रुग्ण इकाई दूसरी बार औद्योगिक नीति का लाभ उठाना चाहती है तो उन्हें पूर्व में रुग्ण इकाई के रूप में प्राप्त सुविधाओं की राशि की मात्रा तथा अब नई नीति के अनुसार प्रस्तावित देय राशि में जो अन्तर होगा, मात्र वही राशि देय होगी, परन्तु इस प्रकार की सुविधा इकाई के पुनर्वास हेतु राज्य सरकार के द्वारा गठित संबंधित समिति की अनुशंसा पर ही देय होगी। इस प्रकार की सुविधा इकाई को अधिकतम दो बार ही मिल सकती है।

(viii) पुनर्वास पैकेज (Rehabilitation Package) में जो तिथि होगी, उसको कट-ऑफ-डेट मानते हुए सुविधा का निर्धारण किया जा सकेगा।

वृहत प्रक्षेत्र में रुग्णता :वृहत प्रक्षेत्र में रुग्णता :वृहत प्रक्षेत्र में रुग्णता :वृहत प्रक्षेत्र में रुग्णता :

(i) उद्योग सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जो वृहत्‌ प्रक्षेत्र में पुनर्जीवन की संभावना रखने वाले गैर बी0आई0एफ0आर0 रुग्ण औद्योगिक इकाइयों एवं लोक उपक्रमों के लिए उपयुक्त उपाय करेगी। इकाइयों के पुनर्जीवन हेतु यथावश्यक तथा नीतिगत वक्तव्य में वर्णित बिन्दुओं समेत रियायतों एवं सुविधाओं की अनुशंसा यह समिति करेगी एवं अनुशंसाएँ अन्तिम निर्णय हेतु राज्य सरकार के समक्ष मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पहले से गठित उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति के माध्यम से रखी जाएगी।

(ii) बी0आई0एफ0आर0 अथवा इस निमित्त सृजित वैधानिक संस्था, बिहार राज्य साख एवं विनियोग निगम (बिसिको), बिहार राज्य वित्त निगम (बी0एस0एफ0सी0) तथा बैंक की अन्तरसांस्थिक समिति द्वारा तैयार की गई पुनर्वास योजना के अन्तर्गत चुनी गई रियायतें एवं सुविधाएँ उद्योग सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष विचारार्थ एवं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पहले से गठित उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति के माध्यम से सरकार की अनुशंसा हेतु रखी जाएगी।

(iii) रुग्ण इकाई का अर्थ ऐसी इकाई से है जो औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण पर्षद्‌ (बी0आई0एफ0आर0) द्वारा निबंधित हो। उस इकाई को Relief & Concession बी0आई0एफ0आर (BIFR) द्वारा प्रचारित डी0आर0एस0 (Draft Rehabilitation Scheme) में अंकित कट-ऑफ-डेट से देय होगा।

(iv) रुग्ण इकाइयाँ जिन्होंने पूर्व में किसी औद्योगिक नीति का लाभ उठाया हो, को पुनः दूसरी बार भी उस रुग्ण इकाई को इस नीति के अन्तर्गत लाभ मिलेगा। अगर कोई रुग्ण इकाई दूसरी बार औद्योगिक नीति का लाभ उठाना चाहती है, तो उन्हें पूर्व में रुग्ण इकाइयों के रूप में प्राप्त सुविधाओं की राशि की मात्रा तथा अब नई नीति के अनुसार प्रस्तावित देय राशि में जो अन्तर होगा, मात्र वही राशि देय होगी, परन्तु इस प्रकार की सुविधा इकाई को पुनर्वास हेतु राज्य सरकार के द्वारा गठित संबंधित समिति की अनुशंसा पर ही देय होगी। इस प्रकार की सुविधा इकाई को अधिकतम दो बार ही मिल सकती है।

6666.... कार्यनीति की कंडिका कार्यनीति की कंडिका कार्यनीति की कंडिका कार्यनीति की कंडिका - (ix) में चिन्हित्‌ थ्रस्ट एरिया के उद्योगों के लिए इस औद्योगिक नीति में वर्णित प्रोत्साहनों के अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए संबंधित विभागों द्वारा अलग से प्रोत्साहन नीति निर्गत किया जाएगा।

उक्त थ्रस्ट एरिया में वर्णित सभी प्रकार के उद्योगों के लिए भूमि आवंटन के मामले में बिआडा द्वारा प्राथमिकता दी जाएगी।

थ्रस्ट एरिया में वर्णित उद्योगों को प्रोत्साहन देने के उद्वेश्य से तकनीकी परामर्श देने तथा परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने में सहयोग देने के लिए उद्योग मित्र में विशेष व्यवस्था की जाएगी।7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 10 जून 2011 7777.... हैण्डलूम एवं पॉवरलूम प्रक्षेत्र के विकास के लिए विशेष योजना तैयार की जाएगी, जिसमें विद्युत टैरिफ में ग्राण्ट, आधुनिक लूम एवं इससे संबंधित संयंत्र, क्लस्टर का विकास (वर्क शेड भूमि की व्यवस्था, अगर आवश्यक हो)े, इन्टीग्रेटेड टेक्सटाईल पार्क, अरबन हाट एवं प्रोसेसिंग इकाई आदि का विकास किया जाएगा। ऋण/सूद की माफी/अनुदान योजना को पॉवरलूम एवं हैण्डलूम बुनकरों के लिए और विस्तारित किया जाएगा। 8888.... इस नीति के अंतर्गत प्रावधानों के तहत्‌ देय सुविधाओं के साथ-साथ भूमि आवंटन आदि से संबंधित प्रक्रियाओं के निष्पादन हेतु विभाग द्वारा प्रक्रियाओं के सरलीकरण एवं समय-सीमा निर्धारण के संबंध में अलग से आदेश निर्गत किया जाएगा।

9999.... किसी भी इकाई, नई अथवा कार्यरत, को औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2011 के प्रावधानों के तहत्‌ देय सुविधाएँ तभी प्रदत्त होंगी, जबकि उस इकाई में उक्त मद में देय सुविधाएँ, सरकार की किसी अन्य नीति के तहत्‌ प्राप्त नहीं किया गया हो। इकाइयाँ सुविधाएँ लेते समय इस आशय का घोषणा-पत्र प्रस्तुत करेंगे।

10101010.... आरक्षण नीति का अनुपालन : आरक्षण नीति का अनुपालन : आरक्षण नीति का अनुपालन : आरक्षण नीति का अनुपालन : नियोजन में सरकार की आरक्षण नीति का अनुपालन करने वाली इकाइयों को वर्त्तमान नीति के अनुसार मिलने वाली सुविधा से 10 प्रतिशत अधिक प्रोत्साहन राशि देय होगी। यह सुविधा कंडिका-2 (i) में वर्णित 600 (छः सौ) लाख रु0 की अधिसीमा के अतिरिक्त होगी।

11111111.... अनुश्रवण एवं समीक्षाअनुश्रवण एवं समीक्षाअनुश्रवण एवं समीक्षाअनुश्रवण एवं समीक्षा : एक महीने के अन्दर सभी संबंधित विभाग एवं संगठन इस नीति के प्रावधानों को प्रभावी बनाने हेतु यथावश्यक अधिसूचनाएँ निर्गत करेंगे जो इस नीति के प्रभावी होने की तिथि से लागू होगा। राज्य सरकार द्वारा इसका समुचित रूप से अनुश्रवण किया जाएगा, जिससे राज्य सरकार इस नीति की मध्यावधि समीक्षा कर सकेगी।

12121212.... इस औद्योगिक प्रोत्साहन नीति में मिलनेवाली प्रोत्साहन/अनुदान/सुविधा उन्हीं नई औद्योगिक इकाइयों पर लागू होगी, जो दिनांक 01 जूलाई, 2011 की तिथि से पाँच वर्षों के अन्दर व्यावसायिक उत्पादन में आयेंगी।

13131313.... परिशिष्ट-परिशिष्ट-परिशिष्ट-परिशिष्ट- II में दी गई सूची में वंचित उद्योगों को कोई प्रोत्साहन/अनुदान देय नहीं होगा। 14141414.... इस नीति के तहत्‌ किसी भी प्रावधान की व्याख्या एवं समाधान के लिए प्रधान सचिव, उद्योग की अध्यक्षता में एक समिति होगी, जिसके सदस्य उद्योग निदेशक, निदेशक, तकनीकी विकास, वाणिज्य-कर विभाग एवं विद्युत बोर्ड के प्रतिनिधि (जहाँ आवश्यकता हो) एवं संबंधित औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार के प्रबंध निदेशक होंगे।

15151515.... परिशिष्ट-परिशिष्ट-परिशिष्ट-परिशिष्ट-I में दी गई संबंधित परिभाषाएँ इस नीति का अंश होंगी। 16161616.... यह नीति 01 जूलाई, 2011 से लागू होगी तथा अगले पाँच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी।

आदेश : आदेश दिया जाता है कि संकल्प की एक प्रति बिहार गजट के विशेष अंक, सुुविख्यात पत्रिकाओं और समाचार-पत्रों में प्रकाशित की जाए और सरकार के सभी विभागों/विभागाध्यक्षों और अधीनस्थ पदाधिकारियों के बीच परिचालित की जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सी0के0 मिश्रा, प्रधान सचिव।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 10 जून 2011 8 परिशिष्ट-परिशिष्ट-परिशिष्ट-परिशिष्ट-I (परिभाषाएँ)(परिभाषाएँ)(परिभाषाएँ)(परिभाषाएँ)

1111.... प्रभावी तिथिप्रभावी तिथिप्रभावी तिथिप्रभावी तिथि—प्रभावी तिथि से अभिप्राय वह तिथि है जब से इस नीति के प्रावधान प्रभाव में आए अर्थात्‌ दिनांक 01 जूलाई, 2011 से बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2011 पाँच वर्षों के लिए प्रभावी रहेंगी। 2222.... औद्योगिक इकाई/औद्योगिक पऔद्योगिक इकाई/औद्योगिक पऔद्योगिक इकाई/औद्योगिक पऔद्योगिक इकाई/औद्योगिक प्रतिष्ठान्रतिष्ठान्रतिष्ठान्रतिष्ठान—औद्योगिक इकाई/औद्योगिक प्रतिष्ठान से अभिप्राय ऐसी इकाई/प्रतिष्ठान से है जो निम्नांकित श्रेणी में आने वाले निर्माण/प्रसंस्करण/सेवा उद्योग में संलग्न हो अथवा संलग्न होने वाला हो।

(क) समय-समय पर यथा संशोधित उद्योग (विकास एवं विनिमय) अधिनियम-1951 की प्रथम अनुसूची में सूचीकृत उद्योग।

(ख) निम्नांकित बोर्डों/अभिकरणों के दायरे में पड़ने वाले उद्योग।

(1) लघु उद्योग बोर्ड (2) क्वायर बोर्ड (3) रेशम बोर्ड (4) अखिल भारतीय हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प बोर्ड (5) खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (6) औद्योगिक विकास हेतु केन्द्रीय सरकार अथवा बिहार सरकार द्वारा गठित कोई अन्य अभिकरण। (ग) अन्य श्रेणियाँअन्य श्रेणियाँअन्य श्रेणियाँअन्य श्रेणियाँ :

(1) खनन अथवा खनिज विकास। (2) किसी भी प्रकार की मशीनरी अथवा वाहन अथवा नौका अथवा मोटर वोट अथवा ट्रेलर अथवा ट्रैक्टर के रख-रखाव, मरम्मत जाँच सर्विसिंग।

(3) औद्योगिक क्षेत्र, औद्योगिक प्रांगण, समेकित आधारभूत संरचना विकास, निर्यात प्रोत्साहन औद्योगिक पार्क/निर्यात प्रोत्साहन जोन अथवा ग्रोथ सेंटर की स्थापना अथवा विकास। (4) औद्योगिक विकास की अभिवृद्धि हेतु विशिष्ट अथवा तकनीकी ज्ञान अथवा अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराना।

(5) उद्योग के लिए इंजिनियरिंग, तकनीकी, वित्तीय, प्रबंधन, विपणन अथवा अन्य सेवाएँ, अथवा सुविधाएँ प्रदान करना।

(6) सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार अथवा सम्पर्क तथा श्रव्य अथवा दृष्य केबल संचार सहित

इलेक्ट्रोनिक्स से संबंधित सेवा प्रदान करना।

(7) पर्यटन।

3333.... विद्यमान औद्योवििद्यमान औद्योवििद्यमान औद्योवििद्यमान औद्योगिक इकाई गक इकाई गक इकाई गक इकाई — ''विद्यमान औद्योगिक इकाई'' से अभिप्राय है ऐसी औद्योगिक इकाई से है जो वाणिज्यिक उत्पादन में है।

4444.... नई औद्योगिक इकाईनई औद्योगिक इकाईनई औद्योगिक इकाईनई औद्योगिक इकाई—''नई औद्योगिक इकाई'' से अभिप्राय है ऐसी औद्योगिक इकाई, जिसमें वाणिज्यिक उत्पादन कार्य दिनांक 01 जूलाई, 2011 से पाँच वर्षों के बीच आरंभ हुआ हो।

5555.... रुग्ण इकाईरुग्ण इकाईरुग्ण इकाईरुग्ण इकाई—''रुग्ण इकाई'' से अभिप्राय ऐसी औद्योगिक इकाई से है, जिसे रुग्ण औद्योगिक कम्पनियाँ (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1985 के अंतर्गत औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्रचना बोर्ड अथवा लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए उद्योग निदेशक की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय शीर्षस्थ संस्था (स्टेट लेवल कमिटि) द्वारा अथवा वृहत प्रक्षेत्रों के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा रुग्ण घोषित किया गया हो। 6666.... अचल पूँजी निवेश अचल पूँजी निवेश अचल पूँजी निवेश अचल पूँजी निवेश —''अचल पूँजी निवेश'' से अभिप्राय है भूमि, संयंत्र एवं मशीनरी तथा स्थायी प्रकृति की उत्पादक परिसम्पत्तियों में किए गए निवेश।

7777.... विस्तार/आधुनिकीकरण/विशाखनविस्तार/आधुनिकीकरण/विशाखनविस्तार/आधुनिकीकरण/विशाखनविस्तार/आधुनिकीकरण/विशाखन—किसी विद्यमान औद्योगिक इकाई के विस्तार/आधुनिकीकरण/ विशाखन से अभिप्राय है उक्त विद्यमान इकाई में अचल पूँजी निवेश के अनअवमूल्यित मूल्य का 50 प्रतिशत अथवा अधिक राशि का संयंत्र एवं मशीनरी में अतिरिक्त पूेँजी निवेश, जिसके फलस्वरूप आरंभिक अधिष्ठापित उत्पादन क्षमता से इंक्रीमेंटल उत्पादन क्षमता 50 प्रतिशत से कम न हो। प्रोत्साहन योग्य होने के लिए विस्तार/ आधुनिकीकरण/ विशाखन करने वाली इकाइयों को जिला के महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र अथवा प्रबंध निदेशक, औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार जो लागू हो, को लघु एवं मध्यम उद्योग के संबंध में तथा उद्योग निदेशक/ निदेशक, तकनीकी विकास को वृहत्‌ उद्योग के संबंध में विस्तार/आधुनिकीकरण/विशाखन कार्य आरंभ करने के पूर्व सूचना भेजनी चाहिए। इस प्रकार की सूचना के साथ प्रस्तावित अतिरिक्त पूँजी निवेश की निश्चित अवधि दर्शाते हुए विस्तार/आधुनिकीकरण/विशाखन का विवरणात्मक प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए।9 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 10 जून 2011 सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहत्‌ एवं आनुषांगिक औद्योगिक इकाई—ये ऐसी औद्योगिक इकाइयाँ हैं, जिसमें 8888.... सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहत्‌ एवं आनुषांगिक औद्योगिक इकाई सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहत्‌ एवं आनुषांगिक औद्योगिक इकाई सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहत्‌ एवं आनुषांगिक औद्योगिक इकाई

पूँजी निवेश की सीमा समय-समय पर तय करते हुए भारत सरकार के द्वारा इन्हें परिभाषित किया गया है। 9999.... उत्पादन की तिथिउत्पादन की तिथिउत्पादन की तिथिउत्पादन की तिथि—किसी औद्योगिक इकाई में उत्पादन प्रारंभ होने की तिथि का तात्पर्य उस तिथि से होगा, जबसे इकाई वास्तव में उस सामग्री का वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ कर लिया हो, जिसके लिए वह निबंधित की गई हो। लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन की तिथि के संबंध मेें संबंधित महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र अथवा प्रबंध निदेशक, औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार द्वारा निर्गत प्रमाण-पत्र मान्य होगा। वृहत उद्योगों के संबंध में निदेशक, तकनीकी विकास द्वारा निर्गत प्रमाण-पत्र मान्य होगा। उत्पादन की तिथि के संबंध में किसी विवाद की स्थिति में उद्योग सचिव का निर्णय अंतिम होगा।

विकल्प देने के संबंध में—ऐसी औद्योगिक इकाइयाँ, जो इस औद्योगिक नीति के लागू होने की तिथि 10101010.... विकल्प देने के संबंध में विकल्प देने के संबंध में विकल्प देने के संबंध में को वाणिज्यिक उत्पादन में नहीं आई है, परंतु जिनमें 50 (पचास) प्रतिशत पूँजी निवेश किया जा चुका है, वैसी इकाइयों को यह सुविधा प्रदत्त होगी कि वे औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2006 अथवा औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2011 में से किसी एक के तहत्‌ लाभ ले सकते हैं। वे दोनों नीतियों के तहत्‌ आंशिक लाभ के हकदार नहीं होंगे। इस नई नीति के प्रभावी होने की तिथि से तीन महीने के अंदर इस प्रकार का लिखित विकल्प इकाई द्वारा उद्योग निदेशक को देना होगा।

परिशिष्ट-परिशिष्ट-परिशिष्ट-परिशिष्ट-II (वंचित इकाइयों की सूची) (वंचित इकाइयों की सूची) (वंचित इकाइयों की सूची) (वंचित इकाइयों की सूची)

1. राईस हॉलर 2. आटा मिलें जिनमें बेसन, दाल एवं चूड़ा मिलें सम्मिलित हैं(50 टन प्रतिदिन से कम क्षमता वाली) 3. मसाले, पापड़ इत्यादि बनाना 4. कन्फेक्शनरी(यांत्रिकीकृत कन्फेक्शनरी को छोड़कर) 5. मिठाई एवं नमकीन इत्यादि बनाना (यांत्रिकृत नमकीन मध्यम/वृहत्‌ औद्योगिक इकाइयोें को छोड़कर)

6. पॉवरोटी बनाना (यांत्रिकीकृत बेकरी को छोड़कर) 7. आईस कैंडी तथा आईस फ्रूट का उत्पादन 8. सुपारी का उत्पादन एवं प्रसंस्करण 9. पटाखा बनाने वाली इकाइयाँ 10. कोयला/कोक स्क्रीनिंग 11. जलावन की लकड़ी तथा चारकोल उत्पादन 12. पेंटिंग तथा स्प्रे-पेंटिंग इकाइयाँ 13. उर्वरकों का भौतिक मिश्रण करने वाली इकाइयाँ 14. ईंट बनाने वाली इकाइयाँ (मेकेनाइज्ड/रिफैक्टरी ईंटें बनाने वाली तथा फ्लाई ऐश, लाल मिट्‌टी या समरूप औद्योगिक कचड़े से ईंटे बनाने वाली इकाइयों को छोड़कर)

15. कैनवास कपड़ों से तिरपाल का निर्माण 16. आरा मिल 17. बढ़ईगिरी 18. ड्रिलिंग रिंग्स, बोर वेल तथा ट्‌यूब वेल का अधिष्ठापन करने वाली इकाइयाँ 19. चाय को मिलाने या ब्लेंडिंग करने वाली इकाइयाँ 20. कच्चा तम्बाकू काटने एवं गुड़ का बुरादा बनाकर चबाने हेतु बनाने वाली तथा गुड़ाकू बनाने वाली इकाइयाँ

21. ड्रग्स, दवाओं/रसायनों का बिना प्रसंस्करण तथा मूल्य संबर्द्धन के बिना बोटलिंग/रिपैकिंग करने वाली इकाइयाँ (सूत्रीकरण तथा उत्पादक इकाइयों को छोड़कर)

22. नोटबुक तथा लिफाफे बनाना 23. फोटो कॉपी करना 24. डिस्टिल्ड वॉटर बनाने वाली इकाइयाँ 25. दर्जीगिरी (रेडीमेड वस्त्र निर्माण करने वाली इकाइयों को छोड़कर) 26. बुने कपड़े से बुने बोरों की सिलाई करना तथा उसकी रिपैकिंग करना 27. लॉन्ड्री/ड्राईक्लीनिंग 28. फोटोग्राफी के स्टूडियों तथा प्रयोगशालाएँ 29. क्लिनिकल/पैथोलॉजिकल प्रयोगशालाएँ/ क्लिनिक 30. ब्यूटी पार्लर 31. वीडियो पार्लर(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 10 जून 2011 10 32. मालवाहक 33. वीडियो/ऑडियो कैसेट रिकार्डिंग, घड़ीसाज की दुकान, वाहन मरम्मति तथा सर्विसिंग केन्द्र 34. चूना भट्‌ठा 35. पेट्रोल पम्प 36. मादक द्रव्य एवं मादक पेय (ब्रिवरी एवं डिस्टीलरी को छोड़कर)

टिप्पणीटिप्पणीटिप्पणीटिप्पणी—राज्य सरकार का यह अधिकार सुरक्षित होगा कि उपरोक्त सूची में समय-समय पर किसी प्रकार का परिवर्त्तन कर सके अथवा सूची में किसी भी इकाई के होने के संबंध में निर्णय ले सके।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सी0के0 मिश्रा, प्रधान सचिव।

————

अधी.क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु4ित।

(cid:18)बहार गजट (असाधारण) 284-571+1000-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 10 June 2011. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2011-06-10.284/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2011-06-10.284.