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आदेश
13 जुलाई 2011
सं0 क0/स्था0-02/2010-462—बिहार कृषक एवं ग्रामीण क्षेत्र विकास एजेन्सी अधिनियम-1978 की धारा-39(1) के अधीन fo'kयांकित सेवा-"krZ नियमावली-2010 की स्वीकृति गण्डक कमाण्ड क्षेत्र विकास अभिकरण, मुजफ्फरपुर के निदे"kक i'kZn द्वारा दिनांक 20 जून 2011 को सम्पन्न बैठक में दी गई है। अधिनियम की धारा-39(3) में यह प्रावधान है कि ऐसे निवियम "ाासकीय गजट में प्रकाि"ात किये जायेंगे जो प्रका"ान की तिथि से प्रभावी होगें।
गण्डक कमाण्ड क्षेत्र विकास अभिकरण, मुजफ्फरपुर द्वारा नियमावली-2010 की स्वीकृति की सूचना पत्रांक 539, दिनांक 25 जून 2011 के द्वारा दी गई है।
आदे"kः—इस vkns"k को राजपत्र के अगले अंक में izdkf"kr किया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदे"ा से,
मो0 सोहैल,
सरकार के अवर सचिव।2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011
भाग-1
अध्याय-1
1. यह विनियमावली बिहार कृषक एवं ग्रामीण क्षेत्र विकास एजेन्सी सेवा शत्र्त आचरण,अनुशासन,नियंत्रण एवं अपील नियमावली 2010 कहलाएगी ।
2. यह विनियमावली का उद्ेदश्य है सेवा शत्र्त, नियुक्तियॉ, प्रोन्नतियॉ, अपील एवं नियंत्रण आदि को परिनिश्चित करना ।
3. यह विनियमावली एजेन्सी द्वारा नियुक्त सभी कर्मचारियों पर लागू होगी । 4. एजेन्सी में प्रतिनियुक्त सरकारी सेवक की सेवा बिहार सेवा संहिता से निर्धारित होगी । 5. इस विनियमावली की कोई बात किसी व्यक्ति को किसी ऐसे विषय के संबंध में जिसके लिए उस व्यक्ति और एजेंसी के बीच हुई किसी संविदा या करार की शत्र्तो द्वारा कोेई विनिर्दिष्ट उपबन्ध किया गया है, कोई अधिकार या विशेषाधिकार प्रदान न करेगी ।
6. जब तक प्रत्यायोजन के निबंधनों में स्पष्ट रूप से अन्यथा उपबन्धित न हो, कोई भी प्राधिकारी जिसे कोई शक्ति प्रत्यायोजित की गई हो, उस शक्ति का प्रयोग उन कर्मचारी के संबंध में कर सकेगा, जो प्रयोजनार्थ उसके प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन हो । कोई भी प्राधिकारी किसी शक्ति का प्रयोग अपने हित में नही करेगा ।
7. सरकार की सहमति एवं बोर्ड का अनुमोदन प्राप्त कर एजेन्सी समय-समय पर सेवाओं के किसी वर्गीकरण को अपना सकेगी या संशोधित कर सकेगी, ग्रेडों का विन्यास कर सकेगी और एजेन्सी की सेवा में चयन एवं नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता विहित कर सकेगी साथ ही प्रोन्नति की कसौटी और प्रक्रिया निर्धारित कर सकेगी । एजेन्सी किसी व्यक्ति का संविदा के आधार पर सरकार की पूर्वानुमति एवं बोर्ड के अनुमोदनोपरान्त सहमति से नियुक्ति भी कर सकेगी । वर्ग 1, 2 एवं 3 के कर्मी उत्कृष्ट सेवा में जबकि वर्ग 4 के कर्मी निचली सेवा में होंगे ।
8. एजेन्सी कार्यालय की दैनिक कार्य अवधि क्षेत्रीय/ मुफस्सिल कार्यालयों हेतु समय से विनियमित होगी परन्तु यह सामान्यतः सप्ताह में छः दिन एवं पुर्वा0 10.00 बजे से संघ्या 5.00 बजे तक चलेगा। अघ्यक्ष अथवा प्रबंध निदेशक आवश्यकतानुसार इसमें वृद्धि कर सकते हैं ।
अध्याय-2
परिभाषा
9. जबतक कोई बात विषय या संदर्भ के विरुद्ध न हो, इस अध्याय में परिभाषित पदों के वही अर्थ होंगे, जो विनियमावली में दिये गये हैंं ।
10. अधिनियम से अभिप्रेत है बिहार कृषक एवं ग्रामीण क्षेत्र विकास एजेन्सी अधिनियम 1978 । 11. एजेन्सी से अभिप्रेत है अधिनियम की धारा 4(1) के अधीन गठित कमाण्ड क्षेत्र विकास अभिकरण बोर्ड ।
12. ''राज्य सरकार'' से अभिप्रेत है बिहार सरकार । 13. ''अध्यक्ष'' से अभिप्रेत है अधिनियमों के अधीन नियुक्त एजेन्सी के बोर्ड का अध्यक्ष । 14. सक्षम प्र्राधिकारी'' से अभिप्रेत है अध्यक्ष/बोर्ड या कोई ऐसा अन्य प्राधिकारी जिसे इस विनियमावली में किसी या सभी विनियमों के प्रयोजनार्थ अध्यक्ष/बोर्ड द्वारा प्राधिकार प्रत्यायोजित किया गया हो। 16. ''मास'' से अभिप्रेत पंचांग मास (बिहार सरकार द्वारा मुद्रित दिनपत्री)/मासें और दिनों में व्यक्त कालावधि की गणना करने में पहले पूरे पंचांग मास गिने जायेंगें चाहे हर मास दिनों की संख्या कुछ भी हो तब फुटकर दिनों की संख्या गिने जायेंगे ।
17. ''अवकाश'' से अभिप्रेत है रविवार और ऐसे अन्य दिन जिन्हें एजेन्सी ने अवकाश के रूप में विशेष रूप से घोषित किया हो ।
18. ''मुख्यालय'' किसी कर्मचारी के मुख्यालय से अभिप्रेत है, वह स्थान जहॅां उसके कार्यालय के अभिलेख रखे जाते हो या ऐसे स्थान जो एजेन्सी आदेश द्वारा विहित करें ।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 19. ''मानदेेय'' से अभिप्रेत है ऐसा कोई आवत्र्ती या अनावत्र्ती भुगतान जो एजेन्सी के किसी कर्मचारी को एजेन्सी की निधि से कभी-कभी होने वाले विशेष कार्य के लिए परिश्रामिक रूप में दी जायें । 20. ''कत्र्तव्य क्षेत्र'' से अभिप्रेत है वह क्षेत्र जिसे सक्षम प्राधिकारी कर्तव्य सम्पादन के लिए विनिर्दिष्ट करें ।
21. ''संवर्ग'' से अभिप्रेत है पृथक इकाई के रूप में स्वीकृत सेवा या सेवा के किसी भाग का कर्मचारी वर्ग ।
22. (क) ''कत्र्तव्य'' में निम्नलिखित शामिल हैंः-
1. परिक्ष्यमाण या शिशिक्षु के रूप में भारत में सेवा, यदि ऐसी सेवा के बाद एजेन्सी की सेवा में सम्पुष्टि या नियुक्ति की जाय ।
2. पद ग्रहण-काल ।
(ख) एजेन्सी आदेश जारी कर यह घोषणा कर सकेगी कि नीचे लिखित या वैसे ही परिस्थिति में एजेन्सी का कर्मचारी कत्र्तव्य पर समझा जायेगाः-
1. भारत या भारत केे बाहर शिक्षण या प्रशिक्षण की अविधि में । 2. ऐसी परीक्षा की तैयारी की अवधि में जिसमें बैठने के लिये एजेन्सी से विशेष अनुमति है। (फीस) से अभिप्रेत हेै एजेन्सी के राजस्व के अलावे अन्य किसी स्त्रोत से एजेन्सी के कर्मचारी का आवत्र्तक या अनावत्र्तक भुगतान ।
23. ''आयु''- सामन्यता सेवा में प्रवेश करने पर हरेक व्यक्ति अपनी जन्म-तिथि की घोषणा करेगा जिसके साक्ष्य स्वरूप यह निरपवाद रूप से नियोजन के समय सक्षम प्राधिकारी के समाधान के अनुरूप दस्तावेज प्रस्तुत करेगा ।
सरकार द्वारा सम्यक रूप से गठित/मान्यता प्राप्त संस्था द्वारा आयोजित समकक्ष परीक्षा के प्रमाण-पत्र में अभिलिखित जन्म-तिथि आयु का निरपवाद सबूत होगी ।
24. ''गहन'' (लियेन) से अभिप्रेत है एजेन्सी के किसी कर्मचारी का एक हक जिसके द्वारा वह न तो तुरन्त अनुपस्थिति की अवधि या अवधियों की समाप्ति के बाद सावधिक पद सहित किसी ऐसे स्थायी पद को मोैलिक रूप से धारण कर सकता हो जिस पद पर वह मौलिक रूप से नियुक्त हो ।
25. ''वेतन'' से अभिप्रेत है वह मूल वेतन जो किसी कर्मचारी को परिश्रम के रूप में प्रति माह मिलता है, किन्तु इसमें वैकल्पिक वेतन, विशेष वेतन प्रतिनियुक्त-भत्ता या किसी अन्य प्रकार का अतिरिक्त उपलब्धि शामिल नहीं है जिन्हें एजेन्सी वेतन के रूप में वर्गीकृत करें ।
26. ''अधिकायी वेतन'' से अभिप्रेत है, वह वेतन जिसके लिये कोई कर्मचारी किसी पद का उस पर स्थायी रूप से नियुक्त होते हुये धारण करने के कारण अथवा किसी संवर्ग में अधिकायी स्थान रहने के कारण हकदार है किन्तु इसमें विशेष वेतन वैयक्तिक वेतन, प्रतिनियुक्त भत्ता या अन्य कोई उपलब्धि जिसे एजेंसी वेतन के रूप में वर्गीकृत करें शामिल नहीं है ।
27. ''औसत वेतन'' से अभिप्रेत उस महीनें की ठीक पुर्ववर्ती पुरे दस महीनों के भीतर या अर्जित औसत मासिक वेतन, जिस महीनें में वह घटना घटे जिससे औसत वेतन की संगणना आवश्यक हो यदि उपर्युक्त इस महीने के किसी अंश कोई वेतन उपार्जित न किया गया हो, तो वह अंश न गिना जायेगा ओेैर औसत वेतन शेष अंश के भीतर उपार्जित वेतन के द्वारा अवधारित होगा ।
28. ''औेसत आधे, औेसत वेतन पर छुट्टी'' से अभिप्रेत है किसी कर्मचारी की दिए गए ओैसत वेतन के बराबर छुट्टी, वेतन छुट्टी ।
29. ''छुट्टी वेतन'' से अभिप्रेत है छुट्टी पर गए कर्मचारियों को एजेन्सी द्वारा दी जाने वाली वेतन राशि ।
(टिप्पणी-छुट्टी-वेतन की गणना करने के प्रयोजनार्थ वेतन के अन्तर्गत वैयक्तिक वेतन (विशेष वेतन, प्रतिनियुक्ति-भत्ता) को छोड़कर और ऐसी अन्य उपलब्धियां भी जिनका वर्गीकरण एजेन्सी इस प्रयोजनार्थ वेतन के रूप में करें । कर्मचारियों को वैसा जीवन यापन भत्ता भी देय होगा जो छुट्टी वेतन पर अनुमान्य हो ।)4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 30. ''पद ग्रहण काल'' से अभिप्रेत है एजेन्सी के कर्मचारी को दिया गया वह समय जिसमें उसे नए पद का पदग्रहण करना हो अथवा जहां पर पदस्थापित हो, उस अधिष्ठान की या वहां से यात्रा करना हो ।
31. ''प्रथम नियुक्ति'' से तात्पर्य है किसी ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति जो नियुक्ति के समय एजेन्सी के अधीन कोई पदधारण न करता हो, भले ही वह पहले ऐसा पदधारण कर चुका हो ।
32. (क) ''कालमान वेतन'' वह वेतनमान है जो दक्षताराोध की शर्ते पूरी करने या विभागीय परीक्षा पास करने या सक्षम प्र्र्राधिकारी द्वारा विहित किन्हीं अन्य शर्ते पुरी करने पर नियतकालिक वृद्धियों द्वारा न्यूनतम सेेे अधिकतम तक बढता हो । (ख) ''कालमान'' सभी परस्पर समान कहलाते है जब उनकालमानों का न्यूनतम सीमा, अधिकतम सेवा सीमा वृद्धि की कालावधि और वृद्धि की दर समान हो ।
(ग) ''विशेष वेतन'' से अभिप्रेत है वह वेतन जो किसी कर्मचारी के विशेष दायित्वों अथवा दूःसाध्य कार्य होने पर या अधिक उत्तरदायित्व वाले पद का प्रभार वहन करने कारण किया जाय ।
33. ''वैयक्तिक वेतन'' सेे अभिप्रेत है वह वेतन जो किसी कर्मचारी को मौलिक वेतन की हानि से बचाने के लिए अथवा अन्य व्यक्तिगत कारणों से ऐसे कर्मचारी को दिया जाय ।
34. ''स्थायी पद'' सेे अभिप्रेत है एजेन्सी की नियमित स्थान का वह पद जिसका नियत वेतन दर हो और जो बिना किसी काल-सीमा के बोर्ड द्वारा स्वीकृत हो ।
35. ''परिक्ष्यमान'' से अभिप्रेत है वैसा व्यक्ति जिनकी नियुक्ति किसी स्थायी रिक्त पद के विरूद्ध या उसके प्रति औपबन्धिक रूप से की गई हो तथा जिसने अभी तक परीवीक्षा-अवधि पूरी नहीं की हेै । 36. ''अस्थायी पद'' से अभिप्रेत वह पद जो सीमित काल के लिए मंजूर हो । 37. ''स्थायी कर्मचारी'' से अभिप्रेत वह कर्मचारी, जो एजेन्सी के किसी नियमित संवर्ग या पद पर सम्पुष्ट हो ।
38. ''अस्थायी कर्मचारी'' से अभिप्रेत है वह कर्मचारी है जो किसी भी पद पर स्थायी न हो । 39. ''स्थानान्तरणः या अन्तरण से अभिप्रेत है एजेन्सी के किसी कर्मचारी का या तो किसी नये पद का कत्र्तव्य ग्रहण करने के लिए या अपना मुख्यालय बदल जाने के फलस्वरूप एक मुख्यालय अधिष्ठान से जिसमें वह नियोजित हो किसी दूसरे मुख्यालय अधिष्ठान में जाना ।
टिप्पणीः- तीन या तीन से कम महीनें की प्रशिक्षण चर्या (टे्रनिंग कोर्स) में भेजा जाना स्थानान्तरण नही माना जायेगा ।
40. किसी पद पर स्थानापन्न रूप से काम करने से अभिप्रेत है किसी व्यक्ति द्वारा उस पद के कत्र्तव्यों का या तो उस पद पर प्रोन्नति द्वारा उसको सम्पुष्टि होने तक या वह पहले से ही कोई स्थायी या अस्थायी पदधारण करता हो तो उस पद पर उसकी नियमित नियुक्ति होने तक किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए सम्पादन करना । किन्तु कोई कर्मचारी किसी ऐसे रिक्त पद पर जिस पर कोई दूसरा व्यक्ति ग्रहनाधिकार (लियेन) नहीं रखता हो स्थानापन्न रूप से काम करने के लिए ऐसेे प्राधिकारी द्वारा नियुक्त किया जा सकेगा । जो उस रिक्त पद पर मौलिक नियुक्ति करने के लिए सक्षम हेै ।
41. ''बाह्य सेवा'' वह सेवा होगी जो एजेन्सी के कर्मचारी द्वारा प्रतिनियुक्ति आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के लिए बोर्ड की मंजुरी से किसी दुसरे निगम या एजेन्सी या किसी अन्य संविधिक निकाय में की गई हो ।
42. ''कर्मचारी'' से अभिप्रेत है एजेन्सी के सेवा में लगा कोई व्यक्ति किन्तु इसमें वैसा व्यक्ति शामिल नही है जो कार्यभारित स्थापना या मास्टर रौल या दैनिक मजदूरी पर रखा गया हो । प्रोन्नति की प्रक्रिया
43. प्रोन्नतिः- एजेन्सी या इसके किसी स्थापना के कर्मचारी को ऐसे किसी पद पर प्रोन्नति पाने का अधिकार नहीं होगा ।
(क) जो उसकी प्रोन्नति की पंक्ति में न पड़ता हो, (ख) जिस पद के नियत कृत्यों की समुचित निर्वाहता के लिए वह निर्धारित योग्यता न रखता हो ।5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (ग) जो उसके संवर्ग से बाहर का हो । (घ) यदि उसने वह न्यूनतम सेवा वर्ष पूरा न कर लिया हो जो उसके संवर्ग से संबंधित किसी विशिष्ट नियमावली द्वारा अथवा निम्न पद से उच्चतर पद पर प्रोन्नति के पात्र होने के लिए अपेक्षित न्यूनतम सेवा वर्ष नियत करनेवाले किसी सामान्य आदेश द्वारा विनिहित हो ।
(ड़) यदि वह विभागीय या प्रतियोगिता परीक्षा में, जो प्रोन्नति के लिए पात्र होने की न्युनतम कसौटी हेै, उत्तीर्ण होने में, असफल रहा हो किन्तु जब तक किसी संवर्ग में उच्चतम वेतनमान में प्रोन्नति हेतु कोई परीक्षा निर्धारित नही की गई हो तो वैसे मामलों में प्रोन्नति देते समय इस आशय की शत्र्त लगाई जायगी कि यदि बाद में कोई परीक्षा उस पद के लिये अनिवार्य होती है तो उसे दो वर्षो की अवधि में पास करना होगा ।
एजेन्सी के किसी कर्मचारी को अपने मौजूदा पद से प्रोन्नति नहीं दी जाएगी, यदि उसके किसी प्रकार के प्रत्यक्ष आरोप अथवा सत्यानिष्ठा के अभाव, कत्र्तव्य में गंभीर चुक और अनुशासनहीनता के कार्यवाले अन्य अरोपो की जॅांच संबित हो या उसके विरूद्ध कोई विभागीय कार्यवाही चल रही हो । नियुक्ति एवं प्रोन्नति में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण की नीति का पालन कठोरतापूर्वक किया जायगा । परन्तु नियुक्ति समिति की अनुशंसा पर एजेन्सी या सक्षम प्राधिकारी उपयुक्त मामलों में ऐसे पदों को ऐसे कर्मचारियों के लिए जॅांच का निपटाव होने तक सुरक्षित रखेगा ।
(च) एक पद से दूसरे पद पर प्रोन्नति हेतु कालावधि नहीं होगी जों इन पदों के लिए कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाएगी ।
44. प्रोन्नति निम्नलिखित तरीके से विनियमित की जायगीः- ( i) प्रोन्नति के सभी मामलों पर विचार इस प्रयोजनार्थ सभाकाल में गठित एजेन्सी की नियुक्ति समिति करेगी और प्रोन्नति के ऐसे मामले समय-समय पर एजेन्सी द्वारा निर्गत सामान्य अनुदेशों द्वारा विनियमित करेंगे तथा सामान्यतः ऐसे पदों पर प्रोन्नति नियुक्ति समिति की अनुशंसाओं के अनुसार ही नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा की जाएगी ।
( ii) सभी प्रोन्नतियॅां, वरीयता के आधार पर की जायेगी । (iii) दी गई प्रोन्नतियां भी चयन और उपयुक्तता के आधार पर निष्पादन होगी, जिनका निर्णय नियुक्ति समिति करेगी ।
(iv) एजेन्सी के कर्मचारी की प्रोन्नति के बाद उसका वेतन निर्धारण वित विभाग द्वारा निर्गत प्रक्रिया एवं नीति के अनुसार किया जायेगा । वेतन निर्धारण के ऐसे मामलो पर एजेन्सी के अध्यक्ष/प्रबन्ध निदेशक का निर्णय अंतिम होगा । परन्तु व्यक्ति कर्मचारी सक्षम प्राधिकारी के पास अभिवेदन कर सकेगा यदि प्रोन्नति सूची (पैनल) के विरूद्ध उसकी शिकायत नियुक्ति प्राधिकारी ने स्वीकार कर ली हो, ऐसे मामलों में एजेन्सी का निर्णय अंतिम होगा । कितनी रिक्तियां सीधी भर्ती द्वारा भरी जाएगी, और कितनी रिक्तियां प्रोन्नति द्वारा भरी जायगी इस संबंध में एजेन्सी का निर्णय अंतिम होगा । एजेन्सी अलग से संवर्ग गठन के सिद्धांत और किसी खास संवर्ग में कर्मचारियों की पारस्परिक वरीयता संबंधी कसौटियों को विनिमित करेगी । सेवा का प्रारम्भ
45. यदि कर्मचारी अपने कत्र्तव्य ग्रहण की रिपोर्ट पूर्वाहन में करेगा तो उसकी सेवा उस कार्य दिवस से प्र्रारम्भ मानी जाएगी जिस कार्य-दिवस को वह अपने कत्र्तव्य ग्रहण की रिपोर्ट करेगा और यदि वह अपने कत्र्तव्य ग्रहण की रिपोर्ट अपराह्न में करेगा, तो उसकी सेवा उस कार्य दिवस के अगले दिन से प्र्रारम्भ मानी जाएगी । वरीयता
46. निम्नलिखित शत्र्तो के अधीन रहते हुए एक ही पंक्ति (रेैंक) के कर्मचारियों की आपसी वरीयता का निर्धारण संकद्ध (ग्रेड) या पंक्ति (रैंेक) में उसके निरन्तर काम प्रारम्भ करने की तारीख के अनुसार किया जाएगा :-
6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011( i) यदि कई कर्मचारियों की नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा तैयार की गई एक ही गुणवता सूची के आधार पर की गई हो तो ऐसी सूची के आधार पर नियुक्त उम्मीदवार अपना वरीयता पर तब तक बने रहेगें ।
(ii) जब कतिपय कर्मचारियों की नियुक्ति किसी खास तारीख को किसी निम्न ग्रेड से प्रोन्नति देकर की जाय तब निम्न ग्रेड में उनकी जो वरीयता होगी उस पर वे तब तक कायम रहेगें ।
(iii) राज्य सरकार और अन्य संगठनों में प्रतिनियुक्त कर्मचारियों के बीच आपसी वरीयता अपने ग्रेड में नियुक्ति में तिथि के आधार पर मानी जाएगी ।
(iv) जब एजेन्सी का कोई कर्मचारी ओैर बाहर का कोई उम्मीदवार एक ही तारीख को नियुक्त किए जाए, तब एजेन्सी का कर्मचारी बाहर से नियुक्त उम्मीदवार से वरीय माना जाएगा ।
(v) उपर्युक्त कोटियों के कर्मचारियों के बीच आपसी वरीयता के निर्धारण में बोर्ड को अंतिम निर्णय करने का हक होगा । संविदा पर नियत अवधि के लिए नियुक्ति
47. एजेन्सी किसी व्यक्ति को किसी पद पर किसी नियत अवधि के लिए ऐसी शत्र्तो और निबन्धों पर नियुक्त कर सकेगी, जो उस व्यक्ति और एजेन्सी के बीच तय हो तथा बोर्ड द्वारा अनुमोदित हो । अनुकम्पा अनुदान
48. यदि पूनर्नियोजित व्यक्ति से भिन्न कोई कर्मचारी, जिसने एजेन्सी की सेवा दक्षता पूर्वक और निष्ठापूर्वक की जो अपने सेवाकाल में ही मृत्यु को प्राप्त हो तो एजेन्सी प्रत्येक मामले के औचित्य को देखते हुए उस मृत व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य की नियुक्ति एजेन्सी द्वारा अनुकम्पा के आधार पर उपयुक्त पद पर योग्यता के अनुसार नियुक्ति की जायगी । अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया कार्मिक एवं प्रशासनिक विभाग, बिहार सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित प्रक्रिया/योग्यता के अनुसार होगी । सेवा की सामान्य शत्र्ते
49. एजेन्सी के अधीन विभिन्न पदो पर नियुक्तियां एजेन्सी द्वारा सक्षम प्राधिकारी को निहित की गई शक्ति के अनुसार की जागी । परन्तु विनियमावली के प्रवृत होने के पूर्व की गई सभी नियुक्तियां इस विनियमावली के अधीन सम्यकरूप से की गई नियुक्तिया मानी जाएगी ।
50. (क) इस विनियमावली की कोई बात किसी व्यक्ति को ऐसी किसी बात के संबंध में जिसके लिए उस व्यक्ति और एजेन्सी के बीच की गई किसी संविदा या करार में कोई विशिष्ट उपबन्ध किया गया हो, कोई अधिकार या विशेषाधिकारियों प्रदत्त करने में प्रभावी नही होगी ।
(ख) एजेन्सी के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए ऐसी परीक्षा विहित की जायेगी जिसके एकरूपता की दृष्टि से ऐसी विहित परीक्षा सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के अनुसार की जानी चाहिये । जिसमें उत्तीर्ण होने के बाद ही ऐसी शत्र्ते निर्धारित की जायगी जिन्हें पूरा करने के बाद ही किसी व्यक्ति कोः-
( i) किसी पद पर नियुक्त किया जा सकेगा । ( ii) ऐेसे किसी उच्चतर पद पर, जहॅां ऐसे उच्चतर पद से संबंधित कत्र्तव्य के लिए उच्चतर स्तर का ज्ञान या शरीरिक क्षमता अपेक्षित है प्र्रोन्नत किया जा सकेगा ।
टिप्पणीः- ऐसा कोई भी व्यक्ति एजेन्सी की सेवा में नियुक्त होने या बने रहने का पात्र न हो जो किसी न्यायालय में नेैतिक अपकर्म के अपराध के लिए दोषी सिद्ध हुआ हो या रहा हो अथवा दिवालिया अधिनिर्णीत हुआ हो या रहा हो ।
51. श्रेणी 3 और 4 का कर्मचारी अपनी प्रथम नियुक्ति के समय एजेन्सी के चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा किसी असैनिक सहायक शल्य चिकित्सक द्वारा हस्ताक्षारित स्वस्थ्यता प्रमाण पत्र पेश करेगा किन्तु श्रेणी 1 और 2 का हरेक पदाधिकारी असैनिक शल्य चिक्सिक द्वारा हस्ताक्षारित स्वस्थ्यता प्रमाण पत्र पेश करेगा । चुने गये उम्मीदवारो को नियुक्ति से पहले उपर्युक्त प्राधिकारी के पास अपने स्वास्थ्य की परीक्षा कराने के लिए उपस्थित होना पड़ेगा स्वास्थ्य परीक्षा के लिए देय फीस उम्मीदवार को स्वंय वाहन करना होगा ।7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 52. स्वास्थ्य परीक्षा उन कर्मचारियों के लिए आवश्यक नही होगी जो एजेन्सी में प्रतिनियुक्त है या विशेष संविदा के आधार पर नियोजित हुए है ।
53. ऐसी स्थिति को छोड़कर जहॅां किसी खास सेवायें या पद पर होनेवाला भरती को विनियमित करने के लिए विनियमावली में विशेष रूप से अन्यथा उपबन्ध हो, जिस व्यक्ति की उम्र राज्य सरकार द्वारा समकक्ष के पद हेतु विचारोपरान्त आयु से अधिक हो गई हो वह एजेन्सी की सेवा में नियुक्त नहीं किया जा सकेगा । फिर भी एजेन्सी बोर्ड के अनुमोदन से विशेष मामलों में उम्र की सीमा को शिथिल कर सकेगी।
54. एजेन्सी के कर्मचारी को, प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार अपने कत्र्तव्य क्षेत्र या नियोजन स्थान के भीतर या बाहर एक पद सेे दूसरे पद पर अथवा भारत स्थित किसी भी स्थान में एजेंसी द्वारा अंंतरित किया जा सकेगा ।
55. इस विनियमावली में जहॅां अन्यथा उपबन्ध है वहॅां छोड़कर हरेक कर्मचारी की सेवा की उम्र की सीमा राज्य सरकार द्वारा समकक्ष पदो के लिए यथा निर्धारित सीमा होगी । एजेन्सी के अधीन कार्यरत कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 60 वर्ष होगी जिसे राज्य सरकार की पूर्वानुमति से बोर्ड द्वारा संशोधित किया जा सकेगा ।
56. एजेन्सी किसी ऐसे व्यक्ति को जो एजेन्सी की सेवा से अथवा राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार की सेवा से, अथवा किसी अन्य संविधिक निकाय की सेवा से निवृत्त हो चुका हो, पुनः नियोजित कर सकेगा परन्तु पुनर्नियोजित कर्मचारी 65 वर्ष की उम्र तक ही सेवा में रह सकेगा ।
पुनर्नियोजित होने पर उसका आरम्भिक वेतन और पेंशन (जिसमें मृत्यु-सह-सेवा निवृत्त उपादान का पेंशन प्रतिरय भी शामिल हो) दोनों मिलाकर उस वेतन से अधिक नहीं होना जो उसे सेवा निवृत्त के ठीक पहले मिला था ।
57. सक्षम प्राधिकारी अधिकाधिक आचरण, अनुशासन, नियंत्रण और अपील प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही किसी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त कर सकेगा या हटा सकेगा ।
58. जो कर्मचारी जान-बुझकर कत्र्तव्य से अनुपस्थित रहेगा अथवा अपनी छुट्टी/पद ग्रहण काल का अंत होने पर भी उपस्थित न होगा, यह इसके लिये अनुशासनिक कार्रवाई का पात्र होने के अलावा, ऐसी अनुपस्थिति की अवधि के छुट्टी वेतन से वंचित होगा और वह अवधि उसके छुट्टी लेखा में औसत वेतन पर छुट्टी के रूप में उसकी छुट्््टी से विकलित की जायेगी और यह अवधि वेतन वृद्धि के लिये गणना नहीं की जायेगी ।
59. जो कर्मचारी नियंत्रण पदाधिकारी को सूचित किये बिना लगातार 90 दिनों तक कत्र्तव्य से अनुपस्थिति रहेगा या अधिक ठहराव (ओबरस्टे) करेगा वह विहित कार्यवाही के उपरान्त सेवा से मुक्त कर दिया जा सकेगा ।
परन्तु इस तरह लगातार अनुपस्थिति या अधिक ठहराव के कारण किसी कर्मचारी की सेवा तब तक समाप्त न की जायेगी, जब तक उसे विनिर्दिष्ट तारीख के भीतर कत्र्तव्य पर लौट जाने के लिये चेतावनी नहीं दे दी जायेगी ।
60. जब तक एजेंसी मामले के विशेष परिस्थितियां को देखते हुए अन्यथा नही अवधारित करें, ऐसा कर्मचारी की सेवा में न रह जायेगा जो बाह्य सेवा में प्रतिनियुक्ति होने की छोड़कर अन्य स्थिति में चाहे छुट्टी के लगातार 5 वर्षो तक कत्र्तव्य से अनुपस्थित रहे ।
61. जहां स्पष्ट रूप से अन्यथा उपबन्ध है वहां छोड़ कर्मचारी का सारा समय एजेंसी के अधीन होगा जो उसको वेतन देती है ।
62. जब तक विशेष नियम या संविदा द्वारा अन्यथा उपबन्धित नही हो, एजेन्सी कर्मचारी अपने पद से सम्बवध वेतन और भत्ता उस तारीख से पाने लगेगा जिस दिन वह उस पद का कत्र्तव्य ग्रहण करे, और उसे उस दिन से वह मिलना बंद हो जायेगा जिस दिन वह एजेंसी की कर्मचारी-सूची (पेरोल) में न रह जायेगा ।8 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 63. जहां विशेष कारण से (जो अभिलिखित होने चाहिए) अन्तरण का आदेश देने वाला प्राधिकारी किसी खास मामले में अन्य स्थान में या अन्य रूप में करने की अनुज्ञा है या आदेश करें वहां छोड़ किसी पद के प्रभार का अपर््रण (मेकिंग ओवर) उसके मुख्यालय में हो, प्रभार मुक्त और प्रभावग्राही दोनो की उपस्थिति में किया जायेगा ।
64. कोई भी कर्मचारी सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना अपने कत्र्तव्य क्षेत्र के बाहर बिताई गई किसी अवधि के लिये वेतन या भत्ता पाने का हकदार नहीं होगा ।
65. (क) एक से अधिक कर्मचारी एक ही स्थायी पद पर एक ही काल में मौलिक रूप से नियुक्त नही किया जा सकेगा ।
(ख) कोई कर्मचारी किसी ऐसे पद पर जिस पर किसी अन्य कर्मचारी का ग्रहनाधिकार (लियेन) हो मोैलिक रूप से नियुक्त नही किया जा सकेगा ।
(ग) जब तक किसी मामले में इस विनियमावली के अधीन अन्यथा उपबन्धित न हो कोई कर्मचारी किसी स्थायी पद पर मौलिक पद पर मौलिक रूप से नियुक्त होने पर उस पर ग्रहनाधिकार (लियेन) वर्जित करेगा, और पुर्व में किसी पद पर उसे जो ग्रहनाधिकार प्राप्त रहा हो वह समाप्त हो जायेगा ।
66. स्थायी पद पर मौलिक रूप से नियुक्त कर्मचारी, यदि उसका ग्रहनाधिकार निलम्बित न हो गया हो, तब तक उस पद पर ग्रहनाधिकार रहेगा जब तक
(क) जब पद के कत्र्तव्य का सम्पादन करता रहे ।
(ख) बाहय सेवा में प्रतिनियुक्त हो अथवा कोई (अन्य) अस्थायी पद धारण करता रहे या अन्य पद पर स्थानापन्न रूप से काम करता रहे ।
(ग)किसी अन्य मद पर अन्तरण के क्रम में पदग्रहण -काल में रहे वशर्ते कि वह अन्तरण मौलिक रूप से किसी निम्नतर वेतनवाले पद पर न किया गया हो जिस स्थिति में उसका ग्रहनाधिकार अपने पुराने पद के कत्र्तव्यों से विरमित होने की तारीख से उस नये पद पर अन्तरित हो जायेगा ।
(घ) छुट्टी पर हो या (ड़) निलम्बित रहे ।
67. (क) किसी कर्मचारी का मौलिक रूप से धारित अपने स्थायी पद पर ग्रहनाधिकार निलम्बित हो जायेगा यदि वहः-
(I) किसी सावधि पद पर मौलिक रूप से या (II) अपने संवर्ग से बाहर के किसी स्थायी पद पर मौलिक रूप से या (III) ऐसे पद पर, जिस पर किसी अन्य कर्मचारी का ग्रहनाधिकार हो और इस विनियमावली के अधीन वह निलम्बित नहीं हो औपबन्धिक रूप से नियुक्त हो।
(ख) एजेन्सी किसी कर्मचारी द्वारा मौलिक रूप से धारित स्थायी पद पर उसके ग्रहनाधिकार को स्वेच्छा से निलम्बित कर सकेगा यदि वह कर्मचारी अपने संवर्ग से बाहर के किसी पद पर मौलिक या स्थानापन्न रूप से अन्तरित किया जाय और यदि ऐसा विश्वास करने का कारण है कि वह अपने ग्रहनाधिकार वाले पद से कम से कम तीन वर्षो तक अनुपस्थित रहने वाला है ।
(ग) उपरोक्त नियम के खंड (क) और (ख) में किसी बात के होते हुए भी, सावधि पद पर किसी कर्मचारी का ग्रहनाधिकार किसी भी स्थिति में निलम्बित नही होगाः यदि उस कर्मचारी का किसी अन्य स्थायी पद पर मौलिक रूप से नियुक्त हो जाए तो उस सावधि पद पर उसका ग्रहनाधिकार समाप्त हो जायेगा ।
(घ) यदि किसी पद पर किसी कर्मचारी का ग्रहनाधिकार इस विनियम के खंड (क) या (ख) के अधीन निलम्बित कर दिया जाय, तो उस पद की पूर्ति मौलिक रूप से की जायेगी, और उस पद को मौलिक रूप से से धारण करने के लिए नियुक्त कर्मचारी पद पर ग्रहनाधिकार अर्जित करेगा, परन्तु यह व्यवस्था उस समय उलट जाएगी जिस समय निलम्बित ग्रहनाधिकार उज्जीवित हो जायेगा ।
(ड़) खंड (क) के अधीन निलंबित किसी कर्मचारी का ग्रहनाधिकार तभी उज्जीवित हो जायेगा, तभी उसका ग्रहनाधिकार उस खंड में उल्लिखित किसी भी प्रकार के अन्य पर न रह जायेगा ।9 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (ग) किसी कर्मचारी का ग्रहनाधिकार किसी भी स्थिति में उसकी अपनी सहमति से भी समाप्त नही हो सकता है यदि उसका परिणाम ऐसा हो कि उसका ग्रहनाधिकार या निलम्बित ग्रहनाधिकार कहीं भी न रह जायेगा ।
अध्याय-4
वेतन
68. इस विनियमावाली में जहां अन्यथा उपबंध में वहां छोड़ कोई भी कर्मचारी अपना प्रारंभिक वेतन पायेगा अर्थात किस पद पर उसकी नियुक्ति या प्रोन्नति हुई उसके वेतनमान के निम्नतम प्रक्रम में प्राप्त करेगा ।
69. वेतन वृद्धि साधारणतया यथा क्रम मिलेगी जब तक कि वह दंडस्वरूप या दक्षतारोध पार करने वृद्धि वैसी विहित शत्र्तो में से किसी के पूरे नही होने के कारण रोक रखी जाय । वेतन वृद्धि रोक रखने का आदेश करने में सक्षम प्राधिकारी यह उल्लेख कर देगा कि किस अवधि तक वृद्धि रोक रखी जायेगी और इस स्थगन के कारण अगली वेतनवृद्धियां भी स्थागित होगी या नहीं ।
70. जब असमान वेतन में दक्षतारोध विहित हो, तब दक्षतारोध से ठीक उपर का वेतनवृद्धि सक्षम प्राधिकारी को विनिर्दिष्ट मंजुरी के बिना कर्मचारी को नहीं दी जायेंगी ।
71. यदि किसी पद पर किसी व्यक्ति की नियुक्ति परीवीक्षा पर दो वर्षो के लिये की जाये तो ऐसी परीवीक्षा अवधि की गणना वेतनवृद्धि के लिये की जा सकेगी । प्रथम वेतनवृद्धि एक वर्ष की अवधि पूरी होने पर देय होगी । किन्तु द्वितीय वेतनवृद्धि उसके संतोषप्रद सेवा पूरे होने पर हीं देय होगी । यदि परिवीक्षा की अवधि बढ़ा दी जॅांय तो वेतनवृद्धि बढ़ाई गई परिवीक्षा अवधि के संतोष रूप से पुरी होने पर ही भूतलक्षी प्रभाव से देय होगी ।
72. निम्नलिखित उपबंधो में वे शर्ते विहित है जिन पर की गई सेवाकाल वेतनमान मे वृद्धि के लिये गिनी जाएगी ।
(क) किसी काल वेतनमान वाले पद पर किया गया कत्र्तव्य उस काल वेतनमान में वेतन वृद्धि के लिये गिनी जाती है ।
(ख) जिस पद पर संबंधित कर्मचारी का ग्रहनाधिकार है उस पद के कालमान वेतन में तथा जिस पद पर जिन पदों उनका ग्रहनाधिकार होता है यदि ग्रहनाधिकार निलंबित न किया गया हो तो उस पदों के वेतन मे वृद्धियो के लिये कालावधियां गिनी जायेगीः-
1. कम वेतनवाले पद से भिन्न किसी पद पर चाहे मौलिक या स्थानापन्न रूप से की गयी सेवा । 2. प्रतिनियुक्ति पर की गई सेवा ।
3. बाह्य सेवा । 4. असाधारण छुट्टी के भिन्न छुट्टी ।
(ग) जिस पद कोई कर्मचारी स्थापन्न रूप से नियुक्त किया गया हो उस पद के कालमान वेतन में वृद्धियों के लिये निम्नलिखित कालाविधयां गिनी जायेगी, यदि वह उसी पद पर स्थापन्न रूप से काम करने के लिये लोैटे या पुनर्नियुक्त किया जाय अथवा एक ही कालमान वेतन के किसी पद पर नियुक्त या पुनर्नियुक्त किया जाय ।
1. उच्चतर वेतन पर किस पद पर स्थापन्न सेवा ।
2. उच्चतर वेतन पर किसी स्थायी पद पर सेवा ।
3. प्रतिनियुक्ति पर सेवा । 4. वाह्य सेवा और,
5. असाधारण छुट्टी से भिन्न सभी छुटियां ।
टिप्पणीः- (1) किसी स्थापन्न पद पर वेतन वृद्धि के लिये छुट्टी को कालावधि तभी गिनी जाती है जब सक्षम प्राधिकारी यह प्रमाणित करें कि कर्मचारी उस पद या उसके समकक्ष पद पर लगातार स्थानापन्न रूप से काम करता रहता, यदि वह छुट्टी पर नहीं जाता ।10 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 टिप्पणीः- (2) प्रत्येक मामले में एजेन्सी के विशेष आदेश के अधीन असाधारण छुट्टी वेतन वृद्धि के लिये गिनी जा सकती है, जबकि पद अस्वस्थता के आधार पर या कर्मचारी के नियंत्रण के परे किसी अन्य कारण से ली गई हो, अथवा जब कि कर्मचारी की व्यवहायिक योग्यता और ज्ञान में वृद्धि के निश्चित अध्ययन के लिये ली गई होः
परन्तु जब अध्ययन के लिये असाधारण छुट्टी पर जाने वाले किसी कर्मचारी के हित में इस ढंग का विशेष आदेश एजेंसी देगी तब वह कर्मचारी छुट्टी से लौटने पर डिग्री, डिप्लोमा या अन्य योग्यता पत्र के रूप में अथवा जहां अध्ययन कार्य पुरी किया हो उस संस्था के अध्यक्ष के प्रमाण-पत्र के रूप में इस बात का संतोषजनक साक्ष्य देगा कि अध्ययन सेे उसने लाभ उठाया है यदि कर्मचारी ऐसा साक्ष्य पेस न कर सके तो एजेंसी वेतन वृद्धि के लिये असाधारण छुट्टी गिनने के विशेष आदेश को रद्द कर सकेगा । 73. एजेंसी वास्तविक परिस्थितियों में जो अभिलिखित की जाय, किसी कर्मचारी को उनके अनुभाग ओर विशिष्ट कृति के आधार पर कालमान वेतन में समय पूर्व वेतन वृद्धि मंजुर कर सकेगा ।
अध्याय-5
अतिरिक्त वेतन
74. जब किसी कर्मचारी को उसके अपने कत्र्तव्य के अलावा एक या कई पदों को धारण करने के लिये कहा जाय तो उसे निम्नलिखित शत्र्तो को पूरा करने पर अतिरिक्त वेतन दिया जा सकेगा जो उस वेतनमान के लिए विभाग द्वारा उसके समकक्ष कर्मियो के लिए निर्धारित होः-
(क) अतिरिक्त प्रभार सक्षम प्राधिकारी के लिखित आदेश से धारण किया हो । (ख) अतिरिक्त प्रभार लगातार 60 दिनों से अधिक अवधि के लिये धारण किया गया हो । (ग) पद एक दूसरे के स्वतंत्र हो, अर्थात एक पद के धारक से दूसरे पद के कत्र्तव्य का सम्पादन प्रमाणित न हो ।
75. एजेंसी के आदेश से विशेष वेतन किसी पद के लिय या किसी भी कर्मचारी को प्रभार नियोजक कराराधिन किसी भी प्रतिनियुक्त व्यक्ति को दिया जा सकेगा ।
76. कर्मचारी एजेंसी द्वारा समय-समय पर यथा विहित क्षति-पुरक भत्ता, मकान किराया भत्ता या अन्य सुविधा पाने का हकदार होगा ।
77. एजेंसी अपने या पट्टे पर लिये गये भवन निवासार्थ अपने कर्मचारियों की आवंटित करने तथा उनसे लिये जानेवाले किराये के बारे में आदेश निकाल कर सिद्धांत तय कर सकेगा । ऐसे आदेशों में विभिन्न इलाकों के लिये विभिन्न श्रेणियों के अवासों के लिये निश्चित दरें निर्धारित भी कर सकेगी ।
अध्याय-6
क्षतिपूरक-भत्ते
78. क्षतिपूरक भत्ते की राशि उस प्रकार विनियमित होगी कि वह कुल मिलाकर पानेवालों के मुनाफे का साधन न बन जाय । सभी सामान्य या विशेष आदेश इसी सिद्धांत के अधीन होगें ।
79. किसी पद से संलग्न पूरा क्षतिपूरक भत्ता उसी कर्मचारी को मिलेगा जो उस पद के कत्र्तव्य का वस्तुतः सम्पादन करेगा न कि पूर्णतः या अंशतः किसी दूसरे व्यक्ति को ।
अध्याय-7
मानदेय और फीस
80. जब तक किसी मामलें में इस अध्याय में स्पष्ट रूप से कोई अन्यथा न हो किसी भी कर्मचारी का एजेंसी की पूर्व मंजुरी के बिना मानदेय न दिया जायेगा और न मानदेय या फीस लेने की अनुज्ञा दी जायेगी ।
81. यदि एजेंसी का समाधान हो जाय कि कोई खास सेवा पदीय कत्र्तव्य या उत्तरदायित्वों के बिना हानि पहुंचाए की जा सकती है, तो यह वह अपने कर्मचारी को किसी लोक निकाय के लिये कोई खास सेवा या सेवाएं करने की ओर यदि वे सेवाएं महत्वपूर्ण हो तो उनके लिये पारिश्रमिक के रूप में अनावत्र्तक या आवत्र्तक फीस लेने की अनुज्ञा दे सकता है ।11 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 जब किसी कर्मचारी द्वारा समय में किये गये काम में लिये फीस दी जाय, तो अन्यथा पदीय कत्र्तव्यों के सम्पादन में लगाया जाता है सो फीस एजेंसी के राजस्व में जमा कर दी जायेगी ।
82. कर्मचारी को उसके द्वारा सम्पादित ऐसे कार्य के लिये जो कभी-कभी होनेवाला हो और चाहे तो इतना श्रम साध्य या ऐसा उत्कृष्ट हो कि उसके लिये विशेष पुरस्कार उचित ठहरे पारिश्रमिक के रूप में एजेंसी राजस्व से मानदेय दिया जा सकता है या लेने की अनुज्ञा दी जा सकती है । जब ऐसा कार्य उसका सम्पादन करने वाला कर्मचारी के साधारण कत्र्तव्यों की सीमा में आता हो तो उसकी उत्कृष्टता की जांच बहुत कड़ाई से की जायेगी जहां इस उपबन्ध के प्रतिकुल जाने का विशेष कारण हो, जो लिख लिया जायेगा, वहां छोड़ अन्य किसी भी स्थिति में कोई मानदेय तभी दिया जायेगा लेने की अनुमति दी जायेगी जब मंजुर करने वाले पदाधिकारी को पूर्व सहमति से कार्य हाथ में लिया गया हो जहां तक संभव हो उसकी राशि भी पहले ही तय हो जाना चाहिए ।
83. फीस और मानदोय दोनों ही दशा में मंजुर करने वाला पदाधिकारी जांच लेगा कि इस विनियम में कठिन सामान्य सिद्धांत पर उचित ध्यान दिया गया है और कारण भी लिख लेगा जिनकी उसकी राय में अतिरिक्त पारिश्रमिक का औचित्य सिद्ध होता हो ।
84. मानदेय का फीस की राशि उस सेवा के मूल पर उचित ध्यान रखकर नियत की जायेगी जिसके बदले में वह दी जाय । मानदेय की राशि अध्यक्ष/प्रबन्ध निदेशक की अनुशंसा पर बोर्ड की सहमति से निर्धारित की जाएगी ।
अध्याय-8
छुट्टी
85. छुट्टी का अधिकार पूर्व उपभोग नहीं किया जा सकता । जब प्रशासन के लिये नितांत आवश्यक हो तो छुट्टी देनेे के लिये शक्तिमान प्राधिकारी अपने विवेक से किसी प्रकार की छुट्टी अस्वीकृत या रद्द कर सकता है ।
86. (1) निलंबित कर्मचारी को केवल असाधारण अवकाश दिया जा सकता है । (2) छुट्टी केवल कत्र्तव्य द्वारा उपार्जित होती है ।
(3) छुट्टी उस दिन से प्रारंभ होती है जिस दिन प्रभार का हस्तानान्तरण किया जाय यदि प्रभार का हस्तानान्तरण अपराह्न में किया जाय तो उसके अगले दिन प्रारम्भ होगी और
(4) छुट्टी उस दिन समाप्त होती है जिस दिन प्रभार का पुनः ग्रहण किया जाय ओैर यदि प्रभार का पुर्नग्रहण पूर्वाहन में किया जाय तो पिछले दिन समाप्त होगी ।
(5) जब किसी कर्मचारी को छुट्टी के शत्र्त में अवकाश जोड़ने की अनुमति दी जाती है तब उसकी छुट्टी उस दिन समाप्त हो जाती है जिस दिन अवकाश न जोड़ने पर समाप्त होती है ।
87. जिस कर्मचारी को स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र पर छुट्टी दी गयी हो तब प्राधिकृत चिकित्सा पदाधिकारी से प्राप्त स्वस्थ्यता प्रमाण-पत्र पेश किये बिना अपने कत्र्तव्य पर वापस नही लौट सकता ।
88. छुट्टी के समाप्ति के बाद कत्र्तव्य से जानबुझ कर अनुपस्थिति कदाचार समझी जायेगी । 89. छुट्टी पर गया कर्मचारी उसे नियुक्त करने के लिये सक्षम प्राधिकारी का पूर्व मंजुरी पाये बिना, कोई सेवा या कोई नियोजन स्वीकार नही कर सकता है ।
90. प्रत्येक कर्मचारी का छुट्टी स्वीकृति फार्म रखा जाएगा ।
91. छुट्टी के लिये या छुट्टी बढ़ाने के लिये प्रत्येक आवेदन उस प्राधिकारी के पास किया जायेगा जो इस प्रकार की छुट्टी मंजुर करने या बढ़ाने लिये सक्षम हो ।
92. छुट्टी मंजुर करने वाला सक्षम पदाधिकारी अध्यक्ष/प्रबन्ध निदेशक होगा या ऐसा अन्य पदाधिकारी होगा जिसे अध्यक्ष/प्रबन्ध निदेशक प्राधिकृत करें ।
93. कर्मचारी छुट्टी पर प्रस्थान करने के पूर्व छुट्टी अवधि भर का अपना पता अपने से उपर के पदाधिकारी को सूचित कर देगा ।12 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 94. छुट्टी के लिये आवेदन छुट्टी पर जाने के पहले ही किया जाय और मंजूर करा ली जाय तथा इस विनियम में तभी शिथिलता की जा सकती है जब अचानक बीमार पड़ जाने या अन्य आपवादिक परिस्थितियों का मामला छोड़ जिसका प्रमाण छुट्टी करने वाले प्राधिकारी के समक्ष देना होगा ।
95. इन विनियमों के अधीन अनुमान्य छुट्टी सेवा निवृत्ति की तारीख को स्थागित हो जायेगी । तद्नुसार, अनिवार्य सेवा निवृत्ति की तारीख के बाद या सेवा विस्तार के मामले में सेवा विस्तार की अवधि की समाप्ति की तारीख के बाद किसी भी कर्मचारी को छुट्टी नहीं दी जायेगी ।
96. जिस कर्मचारी ने अपने पद से इस्तीफा दिया है या जिसकी सेवा समाप्त कर दी गयी है वह सेवा समाप्ति या पदत्याग की स्वीकृति की तारीख के बाद किसी प्रकार की छुट्टी पाने का हकदार नहीं होगा । छुट्टी के प्रकार
97. (क) कर्मचारी को मिलने वाली छुट्टी का वर्गीकरण इस प्रकार है ।
(1) औसत वेतन पर छुट्टीः- यह औसत वेतन जिस माह में छुट्टी आरंभ होती है उससे ठीक पहले के दस पूरे मासों के दौरान अर्जित मासिक वेतन के बराबर होगा । (2) आधे वेतन पर छुट्टीः- अर्थात पद (1) के आधे वेतन पर (3) रूपान्तरित छुट्टीः- मद (1) के बराबर वेतन पर
(4) आदेय छुट्टी
(5) असाधारण छुट्टी (6) अध्ययन छुट्टी
(7) प्रसव छुट्टी (8) निरोधा छुट्टी
(9) आकस्मिक छुट्टी
(10) विशेष आवश्यकता छुट्टी (ख) आकस्मिक छुट्टी के मामले को छोड़कर एक प्रकार की छुट्टी किसी प्रकार की छुट्टी के साथ मिलाकर दी जा सकती है । औसत वेतन पर छुट्टी
98. स्थायी पद वाले कर्मचारी को अनुमान्य औसत वेतन पर छुट्टीः-
(क) श्रेणी 1, 2 और 3 के कर्मचारी की दशा में कत्र्तव्य कर बितायी गई कालावधि का 1/11 भाग होगा, जबकि श्रेणी 4 के कर्मचारी की दशा में यह 1/16 भाग होगा । किन्तु जब देय उपार्जित छुट्टी 240 दिन हो जायेगी तब ऐसी छुट्टी उपार्जित नहीं होगी । सेवा निवृति या सेवा काल में मृत्यु की स्थिति में यह अवधि अन्तिम 10 माह के औसत वेतन के आधार पर भूगतेय होगी ।
टिप्पणीः- औसत वेतन पर छुट्टी गणना करने में कत्र्तव्य पर बिताये गये दिनों की वास्तविक संख्या गिननी है और उसे यथास्थिति हो, तो भिन्नांक आधे से कम होने पर छोड़ दिया जायेगा और आध या आधा से अधिक होने पर एक दिन माना जायेगा ।
99. एजेंसी के स्थायी नियोजन में नहीं रहनेवाले किसी कर्मचारी को अनुमान्य औसत वेतन पर छुट्टीः- (क) श्रेणी 1, 2, 3 के कर्मचारी की दशा में कत्र्तव्य पर बितायी गई कालावधि का 1/22वां भाग वर्ग 4 हेतु 1/30 भाग होगा । परन्तु जब से उपार्जित छुट्टी 120 दिन रह जायेगी तब आगे ऐसी छुट्टी उपार्जित नही होगी । आधे वेतन पर छुट्टी
100. एजेंसी के स्थायी नियोजनकाल कर्मचारी के आधे वेतन पर छुट्टी में किसी सीमा के बिना, सेवा के दौरान सेवा के प्रति पुरे वर्ष के लिये निम्न दर से संचयित होगीः-
(क) श्रेणी 1 2 एवं 3 के कर्मचारी की दशा में 20 दिन और
(ख) श्रेणी 4 के कर्मचारी की दशा में 15 दिन13 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 स्पष्टीकरणः- इस विनिमय में प्रयुक्त सेवा या पूरा वर्ष पदावली से अभिप्रेत है एजेंसी के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि लगातार सेवा तथा उसके अंतर्गत कत्र्तव्य पर और छुट्टी (असाधारण छुट्टी सहित) पर बितायी गयी अवधि भी है ।
101. ऐसी छुट्टी निजी काम के लिये और स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र पर भी दी जा सकती है । निजी काम के लिये या स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र पर एक समय में आधें वेतन पर कितने दिनों की छुट्टी ली जा सकती है उसकी कोई सीमा नहीं होगी ।
102. एजेंसी के स्थायी नियोजन में नहीं रहनेवाले कर्मचारी की अनुमान्य आधे वेतन पर छुट्टीः- (1) श्रेणी 1, 2 एवं 3 के कर्मचारी की दशा में सेवा के प्रत्येक पूरे वर्ष के लिये 15 दिन । (2) श्रेणी 4 के कर्मचारी की दशा में सेवा के प्रत्येक पुरे वर्ष के लिये 10 दिन । (3) किसी अस्थायी या स्थापन्न कर्मचारी को उसकी सेवा के प्रथम तीन वर्षो के दोैरान आधे वेतन पर छुट्टी केवल स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र ही दी जायेगी ओेैर वह ऐसी छुट्टी को पूरे वेतन पर छुट्टी में बदलने का हकदार नहीं होगा ।
टिप्पणीः- आधे वेतन पर छुट्टी तब तक नहीं दी जायेगी जब तक छुट्टी मंजूर करने वाला सक्षम प्राधिकारी को एसेा विश्वास करने का आधार न हो कि कर्मचारी छुट्टी की समाप्ति के बाद कत्र्तव्य पर लौट जायेगा । रूपान्तरित छुट्टी
103. एजेंसी कर्मचारी अपनी पसन्द से आधे वेतन पर बाकी छुट्टी को पूरे वेतन पर उनकी आधी छुट्टी के रूप में बदल सकता है । इस तरह बदली गयी छुट्टी रूपान्तरित छुट्टी कहलाएगी । यह केवल स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र पर मिलेगी, किन्तु सम्पूर्ण सेवा काल में रूपांतरित छुट्टी श्रेणी 1 एवं 2 के कर्मचारियों के 180 दिन और श्रेणी 3 तथा 4 के कर्मचारियों को 120 दिन तक ही मिलेगी ।
104. रूपांतरित छुट्टी औसत वेतन पर छुट्टी के साथ जोड़ी जा सकती हेै, किन्तु यह श्रेणी 1, 2 एवं 3 के कर्मचारी की दशा में 180 दिनों और श्रेणी 4 के कर्मचारी की दशा 120 दिन से अधिक नहीं बढ़ेगी ।
परन्तु इस विनियम के अधीन रूपांतरित छुट्टी तब तक न दी जायेगी जब तक छुट्टी मंजुर करनेवाले प्राधिकारी को यह विश्वास करने का आधार न हो कि कर्मचारी छुट्टी समाप्त होने पर कत्र्तव्य पर लौट जायेगा । अदेय छुट्टी
105. सेवानिवृत्ति एवं छुट्टी के मामले को छोड़कर, अदेय छुट्टी स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र पर ही दी जा सकती हेै, किन्तु यह सम्पूर्ण सेवा काल श्रेणी श्रेणी 1 2 एवं 3 के कर्मचारी की दशा में 180 और श्रेणी 4 के कर्मचारी के दशा में 120 दिनों तक सीमित रहेगी । यह छुट्टी कर्मचारी द्वारा बाद में उपार्जित होने वाले आधे वेतन पर छुट्टी में काट ली जायेगी । अदेय छुट्टी तभी दी जायेगी जबकी छुट्टी मंजुर करने में सक्षम प्राधिकारी का समाधान हो जाने कि कर्मचारी के छुट्टी समाप्त होन पर कत्र्तव्य पर लौट आने और उसके बाद आधे वेतन पर उतनी ही छुट्टी उपार्जित करने की युक्तियुक्त माना है ।
टिप्पणीः- जहां कोई कर्मचारी जिसे इस विनियम में अधीन अदेय छुट्टी दी गयी हो, स्वेच्छा सेवा निवृत्ति के लिये आवेदन करें, वहां यदि अनुमति मिल जाये तो अदेय छुट्टी रद्द हो जायेगी और उसकी सेवा निवृत्ति ऐसी छुट्टी के प्रारम्भ की तारीख से प्रभावी होगी । कर्मचारी उक्त रकम को भी लौटा देगा जिसे उसने इस विनियम के अधीन छुट्टी वेतन के रूप में लिये हो । किन्तु यदि अस्वस्थता के कारण आगे सेवा करने में असमर्थ हो जाने के कारण कर्मचारी स्वेच्छा से सेवा निवृत्ति अनिवार्य हुई हो तो, उक्त रकम की वापसी पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए । असाधारण छुट्टी
106. बिना वेतन असाधारण छुट्टी विशेष परिस्थितियों में स्थायी कर्मचारी को तब दी जा सकेगी (1) जब विनियम के अधीन कोई दूसरी छुट्टी अनुमान्य न हो या (2) जब विनियम के अधीन दूसरी छुट्टी अनुमान्य होने पर संबंध कर्मचारी असाधारण छुट्टी के लिखित आवेदन करें ।14 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 अध्ययन छुट्टी
107. एजेंसी अपने विवके से किसी कर्मचारी को ऐसी शत्र्तो ओैर निबंधनों पर जो एजेंसी प्रत्येक मामले में विनिर्दिष्ट करें, संस्था के हित में भारत या भारत के बाहर वैज्ञानिक,तकनीकी और ऐसे ही अन्य सम्स्याओं का अध्ययन करने के लिये अथवा किसी विशेष शिक्षा-वर्ष (कोर्स) या प्रशिक्षण पाने के लिये विशेष अध्ययन छुट्टी दे सकेगा परन्तु यह अध्ययन अवकाश पूरे सेवा काल में 4 वर्ष से अधिक नहीं होगा । विशेष अशक्तता छुट्टी
108. एजेंसी अपने विचार से, ऐसे कर्मचारी को उतनी की उतनी अशत्ता छुट्टी दे सकेगी, जितनी कि एजेंसी उस कर्मचारी की अपने द्वारा अपनी ओर से सोपे गये कत्र्तव्य से समपादन क्रम में हुए क्षति या अशक्तता के लिये विधिवत करें । छुट्टी इतनी दी जायेगी, जितनी एजेंसी द्वारा सम्यक रूप से गठित चिकित्सक बोर्ड आवश्यक प्रमाणित करें ओर किसी भी दशा में 24 महीनें से अधीक न होगी । ऐसी छुट्टी की अवधि में छुट्टी वेतन (1) प्रथम चार महीने के लिये औसत वेतन के बराबर और शेष अवधि के लिये आधे औसत वेतन के बराबर होगा ।
टिप्पणीः- उपर्युक्त उप विनियम (2) के अधीन आधे औेसत वेतन पर छुट्टी की विनियम में दिये गये उपबंधानुसार रूपांतरित छुट्टी में परिवर्तित किया जा सकता है ।
109. (क) प्रसव छुट्टी बोर्ड की उन महिला कर्मचारियों को अनुमान्य है, जो बोर्ड की नियमित सेवा में है तथा जिन्होंने छुट्टी प्रारम्भ होने के पहले लगातार एक वर्ष सेवा पूरी कर ली है ।
(ख) सक्षम प्राधिकारी किसी महिला कर्मचारी को सम्पूर्ण सेवा काल में दो बार ओैसत वेतन पर प्रसुति छुट्टी दे सकेगा जिसकी कालावधि उसक प्रारम्भ की तारीख से तीन महीने बाद तक या प्रसव गृह जाने की तारीख से छः माह बाद तक जो भी पहले हो दी जा सकेगी । ऐसी छुट्टी सेवा में विकलित न की जायेगी तथा ऐसी छुट्टी का वेतन संबंध कर्मचारी को छुट्टी लेने के समय मिलने वाले वेतन के बराबर होगा ।
(ग) प्रसूतिः- छुट्टी किसी भी दूसरी तरह की छुट्टी (आकस्मिक छुट्टी को छोड़कर) के साथ जोड़ा जा सकती है, यदि अनुरोध स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र द्वारा समर्पित हो ।
टिप्पणीः- इस विनियमानुसार, गर्भपात (मिसकरेज) की दशा में भी प्रसूति छुट्टी दी जा सकेगी, वशत्र्ते कि (1) छुट्टी की कालावधि छः सप्ताह से अधिक न हो और
(2) छुट्टी का आवेदन प्राधिकृत चिकित्सक के प्रमाण-पत्र के साथ समर्पित हो । ऐसा कोई भी कर्मचारी जिसे चिकित्सा प्रमाण-पत्र पर छुट्टी दी गई हो स्वास्थ्यता प्रमाण पत्र पेश किए बिना कत्र्तव्य पर लौट नहीं सकेगा । निरोधा छुट्टी
110. निरोधा छुट्टी उस अनुपस्थिति के कारण से जिसमें कर्मचारी के वास्वतिक निवास वाले घर पर में किसी को संक्रमक रोग हो जाने से उस आदेश द्वारा कत्र्तव्य पर जाने से रोक दिया जाता है । जब कर्मचारी स्वयं संक्रमक रोग से ग्रस्त होता है तब यह अनुमान्य नही है । इस प्रकार की छुट्टी चिकित्सा या लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी से प्रमाणपत्र पर 21 दिनों से अधिक दिनों का अपवादिक परिस्थितियों में 30 दिनों की अवधि के लिए मंजुर करने वालें प्राधिकारी द्वारा दी जा सकती है । इस अवधि सीमा से अधिक छुट्टी आवश्यक होने पर साधारण छुट्टी के रूप में समझी जायेगी । निरोध छुट्टी उपर्युक्त अधिकतम सीमा के भीतर रहते हुए अन्य छुट्टी के क्रम में भी आवश्यकता पड़ने पर दी जा सकेगी । जो कर्मचारी निरोधा छुट्टी पर रहेगा उसे कत्र्तव्य से अनुपस्थिति नहीं माना जायगा तथा उसका वेतन रोका नहीं जायेगा । टिप्पणीः- इस विनियम के प्रयोजनार्थ हैजा,चेचक,प्लेग,डिपथिरिया,टाईफाईड ज्वर, स्वाइन फलू और सेरिग्रो स्वाइनल मेचिजाइटिस रोगों को संक्रमक रोग माना जा सकेगा । छोटी माता (चिकेन फोक्स) की हालत में निरोधा छुट्टी तबतक मंजुर न की जाने चाहिए जबतक कि उत्तरदायी स्वास्थ्य पदाधिकारी ऐसा न समझें कि रोग अर्थात् चेचक का संदिग्ध मामला होने की वजह से इस प्रकार की छुट्टी मंजुर की जा सकती है ।15 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 आकस्मिक छुट्टी
111. (क) आकस्मिक छुट्टी ऐसी छुट्टी नहीं मानी जाती है जो देय या उपार्जित होती है । आकस्मिक छुट्टी पर गये कर्मचारी की अनुपस्थिति के दिनों के लिये वेतन की निकासी ऐसे की जायेगी मानो वह कत्र्तव्य पर हेै । आकस्मिक छुट्टी को किसी अन्य प्रकार की छुट्टी पदग्रहण काल के साथ न तो जोड़ा जाय और न विस्तारित किया जाय । एजेंसी के कर्मचारी को वर्ष में 16 दिनों से अधिक की आकस्मिक छुट्टी नहीं दी जाएगी ।
टिप्पणीः- किसी वर्ष के बीच में नियुक्त व्यक्ति का जिस वर्ष में उसे नियोजित किया जाता है उस वर्ष के दो महीनों की संख्या के अनुपात में आकस्मिक छुट्टी दी जायेगी ।
(ख) रविवार और अवकाश के दिनों की आकस्मिक छुट्टी के आदि और अन्त में भी जोड़ा जा सकता है तथा आकस्मिक छुट्टी की अवधि के बीच में पड़नेवाला रविवार तथा अवकाश के दिनों की छुट्टी के अंश के रूप में नहीं गिना जायेगा किन्तु ऐसे सभी अवकाश के दिनों को मिलाकर अनुपस्थिति की अवधि एक समय 12 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए ।
(ग) आकस्मिक छुट्टी का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता है और कर्मचारी को आवेदन कर के सक्षम प्राधिकारी से इसकी मंजुरी पहले ही करा लेनी होगीः जो असाधारण परिस्थिति को देखते हुए पूर्व मंजुरी के बिना आकस्मिक छुट्टी पर अनुपस्थिति अनुज्ञात हो सकती है ।
112. तीन वर्ष लगातार सेवा पुरी करने पर स्थायी कर्मचारी भी इस विनियम में स्थायी कर्मचारी के संबंध में निर्धारित छुट्टी शत्र्तो से शासित होगीः, सिवाय इतना कि वे अदेय छुट्टी के हकदार नहीं होगे । औसत वेतन या आधे औेसत वेतन आदि छुट्टी से संबंधित उपबंध ऐसे मामलों में भुतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं होंगें अर्थात ये चौथे वर्ष की सेवा प्रारम्भ होने की तारीख से ही स्थायी कर्मचारियों के लिये अभिप्रेत दरों पर ओैसत वेतन वालों छुट्टी उपार्जित करने लगेंगें । छुट्टी स्वीकृत तथा अस्वीकृत करने के सिद्धांत
113. छुट्टी ऐसे हद तक नहीं देनी चाहिए कि उससे किसी सेवा या विभाग में काम करने वालों की बहुत कमी हो जाए । जब कर्मचारियों की संख्या को देखते हुए कम से कम दी जाए तब किसी प्रकार की ओैर छुट्टी नहीं देनी चाहिए । जहां आवश्यक मामले की बात अलग है, एजेंसी सेवा के हित में छुट्टी के सभी आवेदनों को स्वीकृत करना असंभव हो तब किन आवेदक को छुट्टी दी जाय यह निर्णय करने के लिए निम्नलिखित बातों पर विचार करना चाहिए :-
(क) किन कर्मचारियों के उस समय आसानी से छुट्टी दी जा सकती है साथ ही इस बात पर भी उचित ध्यान देना चाहिए कि जरूरत होने पर उन्हें सुविधापूर्वक छुट्टी से वापस बुलाया जा सकता है या नहीं।
(ख) विभिन्न आवेदकों का कितनी-कितनी छुट्टी बाकी है ।
(ग) पिछली बार छुट्टी से लौटने पर हर आवेदक ने कितनी औेर कैसी सेवा की है ।
(घ) किसी आवेदक को पिछली छुट्टी से अनिवार्यतः बुलाया गया था या नहीं । (ड़) किसी आवेदक को एजेंसी हित में पहले छुट्टी अस्वीकृत की गयी है या नहीं ।
114. छुट्टी मंजूर करने में सक्षम प्राधिकारी पूरी आवेदित छुट्टी अस्वीकार कर सकता है इस शक्ति का प्रयोग करके किसी कर्मचारी के छुट्टी से लौटने की तारीख इस तरह विनियम करनी चाहिए किः- (क) प्रशासन व्यवस्था में यथासंभव कम से कम परिर्वतन करना पडे़ और
(ख) कत्र्तव्य पर लौटने के बाद संबंधित कर्मचारी की औसत वेतन पर उपार्जित छुट्टी 30 दिन जरूर शेष रह जाए । फिर भी छुट्टी मंजुर करने वाला प्राधिकारी अपने विवेक से इस शत्र्त को शिथिल कर सकता हेै ।
115. यदि कोई कर्मचारी स्वास्थ्य के आधार पर थोडे़-थोडे़ अन्तराल पर छुट्टी के लिये आवेदन करें तो चिकित्सा प्रमाण-पत्र के बिना छुट्टी नहीं देनी चाहिए । ऐसे मामले में पहले बार ली गई छुट्टी स्वास्थ्य परीक्षायें की दृष्टि में लानी चाहिए और उन्हें विशेष सावधानी के साथ इस पर सलाह देने के लिये कहना चाहिए कि पूरे स्वास्थ्य लाभ में कितना समय लगेगा ।16 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 116. अनिवार्य सेवा निवृत्ति की तारीख से बाहर तक जानेवाली छुट्टी किसी भी परिस्थितियां में एजेंसी द्वारा ही स्वीकृत की नहीं जायेगी । इसका आशय यह नहीें है कि किसी कर्मचारी को अपनी सेवा निवृत्ति को तारीख के पहले छुट्टी न लेकर बाद में उसका उपभोग करने की स्वतंत्रता है । इस प्रकार की छुट्टी कदाचित ही तभी दी जायेगी, जबकि एजेंसी के कर्मचारी ने अपनी सेवा-निवृत्ति की तारीख से पहले छुट्टी लेने के लिये आवेदन किया हो, पर एजेंसी सेवा की अपेक्षा में उसका आवेदन अस्वीकृत कर दिया गया है, इन परिस्थितियों में भी ऐसी छुट्टी पर कोई निहित अधिकार नहीं है ।
117. संविदा पर कार्यरत कर्मियो की छुट्टी उसके संविदा शत्र्तो के आधार पर विनयमित होगी
अध्याय-9
पद ग्रहण काल
118. कर्मचारी को पद ग्रहणकाल दिया जा सकेगा जिससे कि वहः-
(क) उस नये पद को ग्रहण कर सके जिस पर वह अपने पुराने पद के कत्र्तव्य पर रहते हुए नियुक्त हुआ है तथा (ख)नया पद ग्रहण के लियेः-
1. औसत वेतन पर चार महीने से अधिक अवधि की छुट्टी से लौटने पर या, 2. भारत के बाहर छुट्टी से, चाहे छुट्टी की अवधि जो भी हो, लोैटने पर अपने घर गृहस्थी की व्यवस्था कर सके, अथवा
(ग) भारत में तीन महीने से अधिक या भारत के बाहर किसी कालावधि के वास्ते प्रशिक्षण पाने के लिये प्रस्थान करने पर प्रशिक्षण के स्थान की जा सके या वहां से लौटने पर पदस्थापन के अधिष्ठान की जा सके ।
119. किसी कर्मचारी का पद ग्रहण काल, जो अधिक से अधिक 15 दिनों का होगा, निम्नरीति से गिना जाता हैः-
1. तैयारी के लिये छः दिन और 2. हवाई जहाज से यात्रा के लिये प्रत्येक 800 की0 मी0 के लिये एक दिन, 3. रेल यात्रा के लिये प्रत्येक 400 कि0मी0 के लिये एक दिन 4. सड़क से यात्रा के लिये प्रत्येक 250 कि0मी0 के लिये एक दिन 5. स्टीमर से यात्रा के लिये 120 कि0मी0 के लिये एक दिन (ख) उप-विनियम (क) में विहित किसी दूरी के किसी खंडात्मक भाग के लिये एक अतिरिक्त दिन दिया जायेगा ।
(ग) यदि यात्रा रेल या सड़क से होगी तो स्टीमर द्वारा होने वाली यात्रा अलग से गिनी जायेगी जब कि वह 46 कि0मी0 तक की यात्रा की गिनती पद ग्रहण काल में नहीं की जायेगी ।
(ड़) इस विनियम के अनुसार गणना करने में रविवार एक दिन नहीं गिना जाता है । किन्तु 15 दिनों की अधिकतम सीमा की गणना में रविवार गिने जाते है ।
120. इस अध्याय के अधीन पदग्रहण काल को अध्यक्ष कम या रद्द कर सकेगा ।
121. यदि कोई कर्मचारी किसी एक पद से दूसरे पद के लिये प्रास्थित कोई कर्मचारी मार्ग में छुट्टी ले तो तब उस ने अपने पुराने पद का प्रभार सौंपा तब से बीती हुई कालावधि उसकी छुट्टी में अवश्य सम्मिलित की जायेगी जब कि छुट्टी स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र पर ली गई हो । पिछली स्थिति में कालावधि पदग्रहण काल मानी जा सकेगी, किन्तु ऐसा समझा जायेगा कि उसने पदग्रहण काल का उपभोग अपनी छुट्टी के अंत में किया ।
उदाहरणः- यदि एजेंसी का कर्मचारी 10 जून से मार्ग में हो और 12 जून को बीमार पड़ जाता है तथा स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र पद 13 जून से 26 तक छुट्टी लेता है और वह 30 जून को नये पद का भार ग्रहण करता है तो उसे 10 जून से 23 जून तक छुट्टी पर ओैर 24 जून से 29 जून तक पद ग्रहण काल में माना जायेगा ।17 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 122. यदि कर्मचारी चार महीनों के कालावधि की ओैसत वेतन पर छुट्टी पर रहते हुए नये पद पर नियुक्त हो, तो उसके पद ग्रहणकाल की गणना उसके पुराने अधिष्ठान से या उसे नियुक्त आदेश कि उस स्थान से की जायेगी, दोनों में जिस गणना से उसे कम पद ग्रहण काल का हक हो । तथापि यदि ऐसा कर्मचारी अपना निजी कार्य के निष्पादन के लिये वस्तुतः अपने पुराने मुख्यालय की यात्रा करें तो उसका पदग्रहण काल पुराने मुख्यालय से नये मुख्यालय तक के लिये गिना जायेगा । चाहे उससे जिस किसी भी स्थान में छुट्टी बिताई हो या पदस्थापन का आदेश पाया हो ।
123. पद ग्रहणकाल में कर्मचारी कत्र्तव्य पर माना जायेगा और निम्न प्रकार से भुगतान पाने का हकदार होगाः-
(क) यदि अपने पुराने पद पर कत्र्तव्य पर रहते हुए किसी नये पद का जिसके लिये उसकी नियुक्ति की गई है, ग्रहण करने के लिये पद ग्रहण काल से हो, तो वह उस वेतन का हकदार है जो वह स्थानान्तरण न होने पर पाता, या जो वह अपने नये पद का प्रभार ग्रहण करने पर पायेगा, इनमें जो भी कम हो ।
(ख) यदि वह (1) चार महीने से अधिक की ओैसत वेतन पर छुट्टी से लौटने पर किसी नये पद को ग्रहण करने के लिये या (2) भारत के बाहर की छुट्टी से, चाहे छुट्टी की अवधि जो भी हो, लौटने के बाद आने घरेलू कार्य की व्यवस्था के लिये जहाज से उतरने के स्थान से यात्रा करने के लिए पदग्रहण काल मे, हो तो वह निम्नलिखित वेतन का हकदार होगाः-
1. जब वह अन्य छुट्टी के क्रम मेें दी गई चोैदह दिनों से अधिक अवधि वाली असाधारण छुट्टी से लौट रहा हो, किसी भी भुगतान का हकदार नहीं होगा ।
2. जब वह किसी अन्य प्रकार की छुट्टी से लौट रहा हो, उस छुट्टी वेतन का हकदार होगा जो पिछले बार छुट्टी पर उसे मिला हो,
(ग) यदि भारत में तीन महीने से अधिक या भारत के बाहर किसी अवधि के लिये प्रशिक्षण वर्ष के लिये जाने या वर्ष से लौटने के लिए पदग्रहण काल में हो तो प्रशिक्षण के स्थान को जाने या वहां से पदस्थापन स्थान के लिये लौटने के क्रम में वह उस वेतन का हकदार है ।
1. ये प्रशिक्षण में सम्मिलित होने के पहले उसे मिलता था या जो उसे उस स्थान को लौटने पर मिलेगा जब वह प्रशिक्षण के बाद पदस्थापित हो,
2. जो उसे प्रशिक्षण काल में मिले हम दोनों में जो भी कम हो ।
124. निम्नलिखित परिस्थितियों में अध्यक्ष/प्रबन्ध निदेशक ऐसी शत्र्तो पर जो वह उचित समझे इन विनियमों के अधीन कर्मचारी को अनुमान्य पदग्रहण काल में वृद्धि कर सकता है, परन्तु 15 दिनों की विहित अधिकतम सीमा में नितांत विशेष कारणों से भी जिनका उल्लेख किया गया जाना चाहिये, बढ़ा सकेगा अन्यथा नहींः-
(क) जब अपनी ओर से सम्यक तत्परता बरतने के बावजूद कर्मचारी को विनियमों में अनुमत पद ग्रहण काल से अधिक समय लग गया हो, उदाहरणार्थः- यदि कर्मचारी, बिना अपनी जरूरत के रेल, स्टीमर या वायुयान न आ सके ।
(ख) जब एजेंसी के काम के दबाव के चलते इस प्रकार का विस्तार आवश्यक समझा जाय। 125. जो कर्मचारी अपने पद ग्रहणकाल के भीतर अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता वह पद ग्रहण काल के अन्त में किसी भी वेतन या छुट्टी का हकदार नहीं होगा ओैर इस विनियम में अन्तदिष्ट उपबंधो के अनुसार उस पर कार्रवाई की जा सकेगी ।
यात्रा-भत्ता एवं लीव ट्रेवल कन्सेशनः-
126. बिहार सरकार द्वारा निर्धारित यात्रा नियमावली के अनुसार एजेंसी के कर्मचारियों को यात्रा-भत्ता की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार द्वारा दी जाएगी ।
अभिकरण के अधीन नियमित रूप से नियुक्त एवं इस नियम के अधीन यात्रा प्रारंभ करने की तिथि को 10 वर्ष की लगातार सेवा (सेवा टूट अथवा निलम्बन की अवधि जोड़कर) पूरी कर चुके कर्मी को बिहार राज्य या राज्य के बाहर परन्तु देश में कहीं भी परिवार के सदस्यों (अधिकतम 4 माता-पिता एवं दो18 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 बच्चा तथा पति-पत्नी में से) के साथ यात्रा करने की सुविधा 4 वर्ष के ब्लाक में एक बार देय होगी । यह यात्रा केवल निकटतम मार्ग से अनुमान्य होगा एवं यात्रा के उपरांत निम्ललिखित अधिकतम दर से ही दावा प्रतिपूर्ति देय होगीः-
| क््रमांक | कर्मचारी का नाम | अधिकतम प्रतिपूर्ति की दर |
| क | चतुर्थ वर्ग | 750 रूपये |
| ख | त तीय वर्ग ृ | 1,000 रूपये |
| ग | द्वितीय एवं प्रथम वर्ग | 1,500 रूपये |
सम्बन्धित कर्मी चुने गये स्थान की अग्रिम सूचना नियंत्री पदाधिकारी को देंगे तथा इस हेतु नियमित रूप से स्वीकृत अवकाश के दौरान हीं यात्रा समाप्त होने के छः महीने के अन्दर यात्रा विपत्र समर्पित नहीं करने पर दावा प्रतिपूर्ति अमान्य हो जाऐगा । मंहगाई भत्ताः-
127. बिहार सरकार द्वारा समय-समय पर अथवा स्वीकृत मंहगाई भत्ता का एजेंसी अपने कर्मचारियों को स्वीकृत कर सकेगी । ऋण अग्रिमः-
128. एजेंसी द्वारा अपने कर्मचारियों को ऋण के रूप में या अग्रिम के रूप में मोटर साईकिल/साईकिल/विवाह आदि के लिये बिहार सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर प्रति वर्ष सूद की अर्जित राशि से दिया जाऐगा जिसकी वसूली भी वित विभाग, बिहार सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया एवं नियमो के आलोक में की जायेगी । चिकित्सा प्रतिपूर्ति :-
129. एजेन्सी के कर्मियों के चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पतालों या बिहार उपचार नियमावली के अधीन स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा अधिसूचित अस्पतालों में कराये जाने पर की जा सकती है । राज्य के भीतर कराई गई चिकित्सा से सम्बन्धित 2,000/- रू0 तक के दावे पर सिविल सर्जन द्वारा विपत्र की अनुमान्यता एवं शुद्धता की जॉच के उपरांत अनुमान्य राशि का विपत्र प्रतिहस्ताक्षरीत करने पर नियंत्रण पदाधिकारी के द्वारा प्रतिपूर्ति हेतु स्वीकृति दी जायेगी । यदि यह राशि 2,000/- रू0 से 20,000/- रू0 के बीच हो तो इसकी स्वीकृति क्षेत्रीय विकास आयुक्त-सह-अध्यक्ष द्वारा दी जायेगी । 20,000/- रू0 से अधिक दावे की अनुमान्यता एवं शुद्धता की जॉच अधीक्षक, पी0एम0सी0एच0, पटना के अधीन त्रिसदस्यीय समिति द्वारा की जायेगी जबकि राज्य से बाहर कराई गई चिकित्सा से सम्बन्धित सभी दावे, चाहे, वे किसी राशि के हो, अभिकरण द्वारा प्रशासी विभाग को प्रेषित किया जायेगा । प्रशासी विभाग द्वारा अधीक्षक, पी0एम0सी0एच0, पटना को विपत्र की अनुमान्यता एवं शुद्धता की जॉच के लिए प्रेषित किया जायेगा । जॉचोपरांत विपत्र राशि की स्वीकृति कार्यालय के सक्षम प्राधिकार द्वारा पारित किया जायेगा। यदि प्रतिपूर्ति की राशि 20,000 रू0 से 2.00 लाख रू0 तक हो तब उपरोक्त प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रशासी विभाग द्वारा प्रतिपूर्ति पर सहमति दिये जाने के उपरांत बोर्ड की स्वीकृति से प्रतिपूर्ति की जायेगी । यदि प्रतिपूर्ति की राशि 2.00 लाख रू0 से अधिक हो तो वित विभाग की सहमति अनिवार्य होगी। चिकित्सा हेतु यात्रा वायुयान अथवा वातानुकूलित रेल से अनुमान्य नहीं होगी । राज्य के बाहर अस्पतालों में चिकित्सा कराने हेतु सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल, इंदिरागॉधी आर्युविज्ञान संस्थान के विभागाध्यक्ष/ इंदिरा गॉधी आर्युविज्ञान संस्थान के निदेशक के अनुशंसा पर क्षेत्रीय विकास आयुक्त-सह-अध्यक्ष द्वारा अनुमति दी जायेगी ।
130. अनुग्रह अनुदानः-किसी चतुर्थ वर्गीय कर्मी को सेवा काल में मृत्यु होने पर एक मुस्त 3,000 हजार रूपये अनुग्रह अनुदान की स्वीकृति क्षेत्रीय विकास आयुक्त-सह-अध्यक्ष द्वारा दी जा सकेगी । अन्य भत्तेः-
131. राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत चिकित्सा भत्ता एवं बोनस की राशि की सुविधा उसी आधार पर एजेंसी के भी कर्मचारियों को देय होगा ।19 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 भविष्य निधि सह अंशदान पेंशन योजना
132. एजेंसी के कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि सह अंशदान पेंशन योजना बोर्ड के निर्णय से लागू की जा सकेगी । इस योजना में कर्मियो के मासिक वेतन से मूलवेतन अनुमान्य जीवन यापन भत्ता के योग की 10% राशि अनुदान के रूप में कटौती की जायेगी । एजेंसी द्वारा इतनी ही राशि अंशदान के रूप में उपलब्ध करायी जायगी । यह अंशदान ''गैर आहरण निधि'' में जमा होगी । जिसे जीवन बीमा निगम या किसी अन्य बीमा कम्पनी (बोर्ड जिसे उपयुक्त समझे) में रखी जायगी । एजेंसी कर्मी के 60 वर्ष के बार्द्धक्य सेवा निवृत्ति के समय संचित निधि (अंशदान सूद) एक मुस्त भुगतान कर्मी को कर दी जायगी । यदि बार्द्धक्य के सेवा निवृत्ति के पूर्व किसी कारण से एजेंसी के सेवा से अलग हो जाते है या उनकी मृत्यु हो जाती हेै तो उन्हें संचित निधि की पूरी राशि भुगतान कर दी जायगी । यदि कर्मी स्वंय चाहे तो बीमा कम्पनी में उस राशि को निवेश कर बीमा कम्पनी के नियमों के अनुसार पेंशन का लाभ उठा सकते है । परन्तु इस संबंध में किसी प्रकार का जोखिम या उत्तरदायित्व मात्र उस कर्मी का होगा एजेंसी का नहीं । 133. एजेंसी के कर्मियो के लिए ग्रूप बीमा के रूप में बोर्ड द्वारा जीवन बीमा निगम या किसी अन्य बीमा कम्पनी से (बोर्ड जिसे उपयुक्त समझे) वर्ग 2 एवं 3 के कर्मियों के लिए 50 रू0 प्रतिमाह की दर से बीमा निर्धारित करेगी जिसमें कर्मियो का योगदान क्रमशः 47.30 रू0 (बोर्ड द्वारा निर्धारित किया जाएगा) प्रतिमाह एवं 22.70 रू0 (बोर्ड द्वारा निर्धारित किया जाएगा) क्रमशः निर्धारित होगा शेष राशि एजेंसी द्वारा अंशदान के रूप में दी जायगी । इस राशि के लिए अभिकरण द्वारा बीमा कम्पनी से एकरानामा कर सेवाकाल में मृत्यु होने की स्थिति में दोनों समूह के लिए अलग-अलग बीमीत राशि का निर्धारिण कर आदेश निर्गत करेगी ।
भाग-2
अध्याय-10
आचरण,अनुशासन,नियंत्रण औेर अपील संबंधी ।
आचरण ओैर अनुशासन
134. एजेंसी का कर्मचारी निम्नलिखित आचरण, नियमावली का पालन करेगा । इस नियमावली का उल्लेख करने पर संबंधित कर्मचारियों पर इस विनियमावली के उपबंधानुसार कार्रवाई की जायेगी । (क) एजेंसी का प्रत्येक कर्मचारी अपने कत्र्तव्य सौप गये कार्य का संचालन सतनिष्ठा, वफादारी और तत्परता के साथ करेगा ।
(ख) प्रत्येक कर्मचारी अपने वरिष्ठ के प्रति आज्ञानुवत्ती होगा तथा वह जनसाधारण के साथ तथा अपने सहकर्मियों ओैर अधीनस्थ के साथ विनम्रता का वत्र्ताव करेगा ।
(ग) प्रत्येक कर्मचारी सभी विषयों में प्रक्रिया संबंधी विहित नियमावली का पालन करेगा तथा वह ऐसे नियम-विनियम आदेश परिपत्र का भी संपादन करेगा जो एजेंसी द्वारा अथवा एजेंसी के सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित किए जाये ।
(घ) प्रत्येक कर्मचारी नियम और या उसे सूचित समय पर यथा समय काम करेगा । ऐसे कर्मचारी को अनुपस्थित माना जा सकेगा जो अपने काम पर उपस्थित हो जाने के बाद काम के विहित समय के दौरान अपने वास्तविक कार्य-स्थल से बिना अनुमति अनुपस्थित हो जायेगा तथा उसके विरूद्ध वैसी अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकेगी जो सक्षम प्राधिकारी उचित समझें ।
(ड़) कोई कर्मचारी उसकी पत्नी या कर्मचारी के परिवार का ऐसा कोई सदस्य जो उस पर पूर्णतः निर्भर है, ऐसा कोई प्रतिदेय पुरस्कार स्वीकार नहीं करेगा जो एजेंसी के साथ उसके संबंध होने के फलस्वरूप किसी जन साधारण द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दिया जाय । परन्तु विवाह, श्राद्ध औेर धार्मिक अनुष्ठान जैेसे अवसर पर अपने संबंधियों और दोस्तों से उसने मूल्य प्रीतिदान देना या लेना वत्र्तमान धार्मिक या सामाजिक दृष्टि के अनुरूप हो । यदि यह प्रश्न उठे या किसी कर्मचारी को यह शक हो कि क्या अमुक दान उपर्युक्त कोटि के अन्तर्गत आता हेै या नहीं, तो ऐसा कर्मचारी इस बात को सक्षम प्राधिकारी के पास निर्दिष्ट करेगा ओैर उस प्राधिकारी व विनिश्चय अंतिम होगा ।20 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 स्पष्टीकरणः- इस नियम के प्रयोजनार्थ प्रीतिदान के अंतर्गत वैसा निःशुल्क परिवहन निःशुल्क भोजन-व्यवस्था, निःशुल्क आवास या अन्य सेवा या आर्थिक लाभ सम्मिलित है यदि उसकी व्यवस्था निकट संबंधी या अपने दोस्त से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा की गई हो जो उस कर्मचारी के साथ पदीय व्यवहार नहीं रखता हो, किन्तु इसके अंतर्गत नैतिक भोज, नैतिक प्रीतिदान या अन्य सामाजिक आतिथ्य सत्कार नहीं है।
टिप्पणीः- कर्मचारी ऐसे किसी व्यक्ति से जो उनके साथ पदीय व्यवहार रखता हो, अर्थात ओैद्योगिक या वाणिज्यिक कर्म, संपदन, आदि राजकीय आतिथ्य से परहेज करेगा ।
(2) कर्मचारी शिलान्यास करते समय या किसी सार्वजनिक भवन का समारोह का उद्घाटन करते समय उसे दी गई करना चाहिये या इस तरह की अन्य वस्तुओं के ग्रहण से परहेज करेगा ।
(च) विवाह, जन्म-दिन, अन्तयेष्टि और धार्मिक समारोह जैसे अवसरों पर जब प्रीतिदान देना प्रचलित धार्मिक या सामाजिक रीति रिवाज के अनुरूप किया जाय, तब कर्मचारी मात्र अपने निकट संबंधियो से प्रतिदान स्वीकार कर सकेगा, किन्तु यदि प्रीतिदान की रकम 500 रू0 से अधिक होगी तो वह उसकी रिपोर्ट एजेंसी को करेगा ।
(छ) उप-नियम (च) में विनिर्दिष्ट अवसरों पर कर्मचारी अपने ऐसे दोस्तों से प्रीतिदान स्वीकार कर सकेगा जो उसके साथ पदीय व्यवहार नही रखतें है, किन्तु यदि ऐसे प्रीतिदान की रकम 200 रू0 से अधिक होगी, तो वह इसकी रिपोर्ट एजेंसी को करेगा ।
(ज) अन्य किसी भी मामलें में कर्मचारी एजेंसी या विहित प्राधिकारी की मंजूरी के बिना कोई प्रीतिदान स्वीकार नहीं करेगा, यदि श्रेणी-1 या श्रेणी-2 के पद धारण करने वाले कर्मचारी की दशा में प्रीतिदान की रकम 100 रू0 से अधिक और श्रेणी-3 या श्रेणी-4 के पद धारण करने वाले कर्मचारी की दशा में 25 रू0 से अधिक होः-
परन्तु जहां कर्मचारी के लिये एजेंसी या विहित प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी प्राप्त करना संभव न हो, वहां वह प्रीतिदान स्वीकार करने के एक महीने के भीतर यथास्थिति एजेंसी या विहित प्राधिकारी को इसकी रिपोर्ट करेगा । जिसमें वह उन परिस्थितियों का उल्लेख करेगा जिनमें प्रीतिदान स्वीकार किया गया । यदि बोर्ड या सक्षम प्राधिकारी इसकी स्वीकृति का अनुमोदन नहीं करते है तो कर्मचारी प्राप्त प्रीतिदान दाता को लौटा देगा ।
(क) किसी भी प्रयोजन के लिये कोई कर्मचारी सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना न चन्दा मांगेगा, न स्वीकार करेगा अथवा न कोई निधि उगाहने में अपने को अन्यथा लगाऐगा ही ।
(ख) एजेंसी का कर्मचारी ऐसे किसी या निकाय के साथ जो एजेंसी के संंबंध या व्यवहार रख सकता हो रूपया उधार को लेन देन नहीं करेगा और न उसके साथ अन्यथा ही अपने को वित्तीय दायित्व में डालेगा ।
(1) एजेंसी का कोई भी कर्मचारी, एजेंसी की सेवा में प्रवेश करने के समय अपने द्वारा वस्तुतः धारित अचल संपत्ति का धारण कर सकेगा तथा इसके बाद उत्तराधिकार, दान या वसीयत द्वारा अथवा बोर्ड की या कोई द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत पदाधिकारी की पूर्व अनुमति के क्रय या प्रीतिदान द्वारा कोई अचल सम्पति आर्जित कर सकेगा ।
(2) एजेंसी का प्रत्येक कर्मचारी अपनी नियुक्ति के बाद एजेंसी की वैसी सभी अंचल सम्पत्तियो का एक घोषणा पत्र देगा जो उसके द्वारा अपनी पत्नी द्वारा अथवा उसके साथ रहनेवाले या उसके उपर आश्रित अपने परिवार के किसी सदस्य द्वारा धारित हो तथा वह प्रतिवर्ष अप्रेैल मास के प्रथम सप्ताह में अपने अचल सम्पत्ति में होने वाले हेर फेर का एक नया घोषणा-पत्र पेश करेगा और ऐसे हेर-फेर के कारण का भी उल्लेख करेगा ।
(3) एजेंसी या इस नियुक्ति उसके द्वारा नियुक्त कोई प्राधिकारी, किसी भी समय सामान्य या विशेष द्वारा ऐसे किसी कर्मचारी से जिसका मासिक वेतन 10,000 रू0 या उससे अधिक रहा है, अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर अपने द्वारा या अपनीपत्नी द्वारा आदेश में यथा विनिर्दिष्ट अपने परिवार के किसी सदस्य द्वारा धारित या अर्जित चल या अचल सम्पत्ति का एक पूरा विवरण प्रस्तुत21 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 करें ।यदि एजेंसी या इस प्रकार सक्षम प्राधिकारी अपेक्षा करेगा, तो ऐसे विवरण में वैसे सभी साधनों या श्रोतों का व्यौरा दिया जायेगा जिनमें ऐसा सम्पत्ति अर्जित की गई है । (4) एजेंसी का कोई भी कर्मचारी ऐसा कोई निदेश
खंड (ख) से (1) के अधीन पूर्व अनुमति प्राप्ति का किये गये अचल सम्पत्ति के क्रय से भिन्न नहीं करेगा या अपने परिवार के किसी सदस्य को ऐसा निदेश करने की अनुमति नहीं देगा, जिससे कि वह अपने कत्र्तव्यों के संपादन में कठिनाई में पडे़ जाये या उससे प्रभावित हो जाये जहॅां कर्मचारी इस प्रकार का निदेश करने से अपने परिवार के किसी सदस्य को रोक नहीं सकता वहां आशय की एक रिपोर्ट अध्यक्ष के पास तुरंत करेगा । परंतु ऐसा कर्मचारी किसी निबंधित सोसाइटी, बैंक या पब्लिक कम्पनी में धन लगा सकेगा अथवा स्टाक,शेयर या प्रतिभुति खरीद सकेगा किन्तु वह ऐसी किसी सोसाइटी या पब्लिक कम्पनी में धन नहीें लगायेगा जो सट्टा लगता हो ।
(ड) एजेंसी का कोई भी कर्मचारी, अध्यक्ष/प्रबन्ध निदेशक की अथवा उसके द्वारा या उसके कत्र्तव्यो के वास्तिवक निबंधन के निमित शक्ति सम्पन्न किसी अन्य प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना रेडियो प्रशारण/समाचार पत्र लेखन/टी0वी0 इंटरव्यू में भाग लेगा, न किसी पत्रिका में दूसरे नाम से या अपने नाम से या किसी अन्य व्यक्ति के नाम से कोई, समाचार भेजेगा और न कोई पत्र लिखेगा ।
परन्तु यदि ऐसा प्रसारण या लेख साहित्यीक, कलात्मक या शेैक्षाणिक हो, तो इस तरह की अनुमति की अपेक्षा नहीं होगी ।
(ड) जहॅां विधि द्वारा अपेक्षित हो वहां छोड़कर, एजेंसी का कोई कर्मचारी एजेंसी की या उसके द्वारा यथा प्राधिकृत के मंजूरी के बिना प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी व्यक्ति की कोई दस्तावेज या उसमें अन्तदिष्ट कोई तथ्य अथवा एजेंसी के कर्मचारी के रूप में उसे प्राप्त कोई जानकारी समुचित, नियंत्रण नहीं करेगा, वशत्र्ते कि ऐसा संसुचन एजेंसी के कर्मचारी के रूप में उसके अपने कत्र्तव्यों के निर्वाहन के लिये आवश्यक न हो ।
(ड) एजेंसी का कोई भी कर्मचारी अपने निकटतम वरिष्ट अधिकारी के पूर्व अनुमति लिये बिना, खण्ड (ट) में निर्दिष्ट किसी प्रश्न के संबंध में एजेंसी के उच्चतर पदाधिकारी के पास पैरबी नहीं करेगा, किन्तु सामान्यतः ऐसी अनुमति अस्वीकृत नहीं की जा सकी है और यदि ऐसा कोई अनुमति अस्वीकृत कर दी जाय, तो निकटतम वरिष्ट आधिकारी के माध्यम से प्रस्तुत करेगा ।
(त) एजेंसी का कोई कर्मचारी न तो किसी विधायी निकाय या स्थानीय प्राधिकारी के किसी निर्वाचन में उम्मीदवार के रूप में खड़ा होगा न ऐसे निकाय या प्राधिकार का सदस्य ही बना रहेगा और न ऐसे निर्वाचन में प्रचार या अन्य कार्य करते हुए किसी तरह भाग लेगा । निदाय यह कि वह मतदान करने के लिये योग्य होने पर ऐसे निर्वाचन में मतदान कर सकेगा ।
(थ) एजेंसी का कर्मचारी, एजेंसी को या उसके द्वारा नियुक्ति किसी प्राधिकारी की विशेष अनुमति के बिना, एजेंसी के बाहर किसी पद के लिये न तो आवेदन करेगा और न कोई सेवा करेगा ।
(द) एजेंसी का कोई भी कर्मचारी किसी व्यवसाय या कारोवार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में नहीं लगेगा और न कोई नियोजन स्वीकार करेगा ।
परन्तु कोई कर्मचारी, सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से सामाजिक या परोपकारी ढंग से मान्य कार्य या साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक ढंग का काम कर सकता है वशत्र्ते कि उसके पदीय कत्र्तव्य में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो ।
(ध) एजेंसी का कर्मचारी अपने निजी कार्यो का व्यवस्था इस प्रकार करेगा कि वह आदतन कर्ज और या दिवालिया न हो जाय । जिस कर्मचारी पर दिवालिया की विधिक कार्यवाही चलायी गयी हो । वह अपने कार्यालय प्रधान को पूरे तथ्यों का रिपोर्ट तुरंत देगा । अपराधों का वर्गीकरण
135. अपराधों को दो दो कोटियों में वगीकृत किया गया है । यथाः- (1) छोटी चॅूंके और (2) कदाचार का काम ।
136. निम्नलिखित छोटी चॅुंको के अतंर्गत हैः-22 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 1. महीने में तीन से अधिक दिन विलम्ब से उपस्थित होना 2. अनियमित उपस्थिति 3. पूर्व अनुमति के बिना अनुपस्थिति 4. बिना पर्याप्त कारणों के छुट्टी बढ़ाने की मांग 5. अस्तव्यस्तता लापरवाही और 6. छोटे मोटे प्रकार की असावधानी के उदाहरण 7. कत्र्तव्य निर्वाह में थोड़ी उपेक्षा 8. ढीले पर्यवेक्षण के उदाहरण 9. काम निपटाने में विलम्बकारिता 10. सौंपे गये कार्य के सम्पादन में ढिलाई और मुस्तैेदी का अभाव 11. छोटे मोटे विषयों में असावधानी बरतना 12. सह-कर्मियो और अधीनस्थों के प्रति सामान्य शिष्टाचार के अभाव के उदाहरण 13. वरिष्ट पदाधिकारियों के प्रति सम्मान भाव का अभाव (जो अनादार या अविनय के तुल्य नहीं हो ।)
14. जनता के साथ अशिष्टता और अशोभनीय व्यवहार (जो गुस्ताखी या अपमान के तुल्य न हो) आदि
टिप्पणीः- यह सूची केवल इस बात का घोतक है किसी छोटी चुक समझें । यह न तो पूर्ण है और न विस्तृत है और बोर्ड समय समय पर इस सूची में वैेसा रूपान्तर कर सकता है जैसा वह आवश्यक समझे ।
137. निम्नलिखित कार्य कदाचार समझे जाते है ।
1. एजेंसी का सम्पत्ति का दुरूपयोग या अप्रयोग जिसमें एजेंसी की गड़ियों का अप्राधिकृत इस्तेमाल भी आता है ।
2. एजेंसी की सामग्री या सम्पत्ति में हानि पहुंचाना । 3. एजेंसी को उसके राजस्व या अन्य पावनाें से वंचित करने की नियम से किसी व्यक्ति के साथ सांठ-गांठ रखना ।
4. ऐसी घोर उपेक्षा जिसके परिणाम स्वरूप एजेंसी की सम्पत्ति की हानि हो या संबंधित 5. एजेंसी की सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना अथवा एजेंसी की सम्पत्ति को नुकसान या हानि से बचाने में चुकना, जहां कि बचाना आवश्यक और संभव होगा ।
6. अनुशासन हीनता । 7. संगठन में किसी प्रकार के विघटनात्मक कार्रवाई । 8. पदीय कत्र्तव्य के सिलसिले में उतश्रृंखल व्यवहार । 9. अवज्ञा, गुस्ताखी, धृष्टता, और अभद्र व्यवहार । 10. उच्च पदाधिकारी या वरीय पदाधिकारी के किसी आदेश की अवहेलना । 11. एजेंसी के कार्यो या सम्पत्ति के संबंध में चोरी, गठन, धोखाधड़ी लेखा में गलत अंकन कार्यालय के कागजात को टेम्पर करना न्याय भंग, दुर्विनियोग या बेईमानी ।
12. एजेंसी के प्रति गैर-वफादारी के काम । 13. आदेश की अवज्ञा करने या कत्र्तव्य से विरत होने या जहां तत्समय प्रभूत किसी विधि के उपबन्धों के अनुसार अनुमत है वहां छोड़ काम से हड़ताल करने के लिए दूसरो को उकसाना ।
14. जहां तत्समय प्रभूत किसी विधि के उपबंधो के अनुसार अनुमत है वहां छोड़, अप्राधिकृत तोेैर पर काम को रोकना या काम को रोकने के लिये कोई उच्च कार्रवाई अथवा काम के सम्पादन में जानबूझ कर मन्दता लाना या उसके लिये उकसाना या बहकाना ।23 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 15. स्टाफ या कारगीरों के बीच असंतोष पैदा करना या ऐसी संभावनाएं करना जो उस संगठन में असंतोष पैदा कर सकती है ।
16. प्रच्छन्न धात करना । 17. कत्र्तव्य के क्रम में हाथ लगी किसी दस्तावेज या जानकारी का अप्राधिकृत प्रकट करना।
18. कोई अनुग्रह या फेवर/ पक्षपात करने या उसके लिये बचने देने के रास्ते, अथवा कोई पदीय काम करने या न करने वास्ते, अथवा भविष्य में किसी सुविधा या अनुग्रह से लिये अनुकूल संबंध बनाएं रहने के वास्ते स्टाफ में किसी व्यक्ति में या किसी जनसाधारण से कोई वर्जित प्रीतिदान अनुदान, परितोषिक इनाम, घुस अथवा नगदी या जिससे कोई प्रतिकुल प्रत्यक्षतः या परोक्षतः करना या अपने परिवार के किसी सदस्य को ग्रहण करने की अनुज्ञा देना ।
19. कत्र्तव्य की उपेक्षा करना । 20. सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना एजेंसी के अपने या उसके कब्जे के परिसर के भीतर किसी अन्य टे्रड यूनियन, संस्था, विकास या संघटन के लिये चन्दा करना या सदस्य बनने के लिये प्रेरित करना ।
21. एजेंसी के अधीन नियोजन ग्रहण करते समय किसी प्राइवेट कारवार, व्यापार पैसा या सेवा से अपना संबंध पूरा पूरा न छोड़ना ।
22. एजेंसी की सेवा में रहते हुए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्राइवेट कारवार करना, किसी व्यापार या पेशा में संलग्न रहना ।
23. एजेंसी या उसके द्वारा प्रत्योजित शक्ति के संबंध में किसी प्राधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना किसी बाहरी संस्था या निकाय में वेतनभोगी पदाधिकारी के रूप में अवैतनिक (मान्य) हैसियत से कोई नियुक्ति या भार औफर ग्रहण करना ।
टिप्पणीः- किसी क्लब या सामाजिक या व्यावसायिक संस्था का अवेैतनिक (मान्य) हैसियत होना खण्ड (22) अैर (23) के अर्थ में नियोजन नहीं है वशत्र्ते कि इससे बोर्ड के अधीन कत्र्तव्य सम्पादन में बाधा न होती हो ।
24. गलत बयान या परिवाद करना । 25. दिवालिया या आदतन कर्जदार होना ।
टिप्पणीः- यह सूची केवल इस बात की सूचक है कि क्या कदाचार समझा जा सकता है । यह सर्वथा परिपूर्ण नही है । एजेंसी इस सूची में वैेसा सुधार कर सकती है जैसा वह उचित समझें । यदि कोई कर्मचारी ऐसी अनियमितताएं या अपराध करें जो इस सूची में समाविष्ट नहीं है किन्तु आम तौर से या व्यापक रूप से अनुशासन और सद्व्यवहार की मर्यादा के प्रतिकूल माने या समझे जाते हो, तो वे अनियमितताएॅं या अपराध इस सूची में पहले से ही समाविष्ट रहें ।
नियंत्रण एवं अपील भाग-II अध्याय-1
निलम्बन
138. निलम्बन का आदेशः- (1) नियुक्ति प्राधिकार या ऐसा कोई भी प्राधिकार जिसका नियुक्ति प्राधिकार अधीनस्थ हो या अनुशासनिक प्राधिकार या सरकार के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा इस निमित प्राधिकृत कोई अन्य प्राधिकार किसी एजेंसी सेवक को निलंबित कर सकेगा, जबः-
(क) एजेंसी कर्मी ने नियम 134 अथवा/शेष नियम 135 के अधीन अपराध किया हो । (ख) एजेंसी कर्मी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही चलायी जानी हो या लंबित हो, अथवा (ग) उपर्युक्त प्राधिकार की राय में एजेंसी कर्मी राज्य के सुरक्षा-हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालनेवाले क्रियाकलाप में संलिप्त हो, अथवा24 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (घ) एजेंसी सेवक के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला अन्वेषण, जॅांच या विचारण के अधीन हो और सक्षम प्राधिकार का यह समाधान हो गया हो कि लोकहित में एजेंसी सेवक को निलंबित करना समीचीन है ।
(2) कोई एजेंसी सेवक नियुक्ति प्राधिकार के किसी आदेश द्वारा निम्नलिखित तिथि के प्रभाव से निलंबित किया गया समझा जायेगा, तबः- (क) उसके कारा-निरोध की तिथि, वह या तो आपराधिक आरोप पर या अन्य अड़तालिस घंटों से अधिक अवधि के लिये, अभिरक्षा में निरूद्ध किया गया हो; (ख) उसकी दोषसिद्धि की तिथि से, यदि किसी अपराध के लिये दोष्सिद्धि की दशा में उसे अड़तालिस घंटो से अधिक की कारावास की अवधि से दंडादिष्ट किया गया हो और ऐसी दोषसिद्धि के परिणामस्वरूप उसे तत्काल सेवाच्युत या बर्खास्त या अनिवार्य सेवानिवृत्त नहीं किया गया हो । व्याख्याः- इस उप-नियम के खंड (ख) में निर्दिष्ट अड़तालिस घंटों की अवधि की संगणना दोषसिद्धि के पश्चात् कारावास प्रारम्भ होने की तिथि से की जायेगी और इस प्रयोजनार्थ कारावास की अन्तर्विरामी कालावधियॅां, यदि कोई हो, परिगणित की जायेंगी ।
(3) (i) उप-नियम (2) के अधीन कारावास अवधिके बाद एजेंसी सेवक द्वारा योगदान किये जाने पर निलंबित समझे जाने की अवधि समाप्त समझी जायेगी और योगदान स्वीकार किया जायेगा ।
(ii) यदि उप-नियम (1) (क) या (ख) या (ग) के अधीन एजेंसी सेवक को पुनः निलंबित करने का कोई निर्णय लिया जाता है तो ऐसी कार्रवाई उपर्युक्त खंड (i) के अनुसार योगदान स्वीकार करने के बाद ही एवं अलग से आदेश निर्गत कर की जा सकेगी ।
(4) जहॅां निलम्बनाधीन कर्मी पर सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की अधिरोपित शास्ति इस नियमावली के अधीन अपीय या पुनरीक्षण में निरस्त कर दी जाती है और मामले को अगली जॅांच या कार्रवाई या कोई अन्य निदेश के साथ विप्रेषित कर दी जाती है, वहॅां उसके निलम्बन का आदेश सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मूल आदेश की तिथि को एवं लगातार प्रवृत समझा जायेगा तथा अगले आदेश तक प्रवृत रहेगा ।
(5) जहॅां कर्मी पर सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की अधिरोपित शास्ति किसी न्यायालय के किसी आदेश द्वारा निरस्त कर दी जाती है या के परिणामस्वरूप शून्य घोषित होती है या शून्य हो जाती है और अनुशासनिक प्राधिकार, मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के पश्चात्, ऐसी परिस्थिति में यदि न्यायालय ने मामले के गुणावगुण पर विचार किये बिना मात्र तकनीकी आधार पर आदेश पारित किया हो, सरकार सेवक के विरूद्ध ऐसे आरोपों, जिन पर सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की शथस्त मूलतः अधिरोपित की गयी थी, की पुनः जॅांच करने का विनिश्चय करता है वहॅां एजेंसी सेवक सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मूल आदेश की तिथि से नियुक्ति प्राधिकार द्वारा निलंबित किया हुआ समझा जायेगा और अगले आदेश तक निलम्बनाधीन रहेगा ।
(6) (क) इस नियम के अधीन किया गया अथवा किया हुआ समझा गया कोई निलम्बनादेश तबतक प्रवृत्त रहेगा जबतक सक्षम प्राधिकार द्वारा उसे संशोधित न किया जाय या वापस न लिया जाय ।
(ख) जहॅां कोई एजेंसी कर्मी निलंबित किया गया हो अथवा निलंबित किया गया समझा गया हो (चाहे किसी अनुशासनिक कार्यवाही के संबंध में या अन्यथा) तथा उस निलम्बन के दौरान उसके विरूद्ध कोई अन्य अनुशासनिक कार्यवाही प्रारम्भ की गयी हो तब उसे निलंबित करने हेतु सक्षम प्राधिकार, ऐसे कारणों से जो उसके द्वारा अभिलिखित किये जायेंगे, ये यह निदेश दे सकेगा कि एजेंसी कर्मी का ऐसी कार्यवाहियों में से सभी या किसी की समाप्ति तक निलंबित रहेगा ।
(ग) इस नियम के अधीन किया गया या किया हुआ समझा गया कोई निलम्बनादेश किसी भी समय, उसी प्राधिकार द्वारा संशोधित किया जा सकेगा या वापस लिया जा सकेगा जिसने या जिसके अधीनस्थ प्राधिकार ने ऐसा आदेश पारित किया हो ।
(7) निलंबनादेश के निर्गत होने की तिथि से छः माह के भीतर आरोप-पत्र गठित कर दिया जायेगा जिसके नहीं होने पर तीन माह की समाप्ति पर निलंबनादेश वापस लिया जायेगा जबतक कि निलंबनादेश25 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 निर्गत करनेवाला प्राधिकार आरोप-पत्र गठित किये जाने में विलम्ब के कारणों को अभिलिखित करते हुए अगले चार माह तक के लिये निलंबन को नवीकृत करने संबंधी आदेश पारित न करेः परन्तु यह कि विस्तारित छः माह की अवधि की समाप्ति के पश्चात् यदि आरोप-पत्र गठित नहीं किया जाता है तो निलंबनादेश स्वतः वापस ले लिया गया समझा जायेगा ।
139. निलम्बन के दौरान जीवन भत्ताः- (1) निलम्बनाधीन या निलम्बनाधीन समझा गया कोई एजेंसी कर्मी अर्द्ध औसत वेतन के बराबर जीवन-निर्वाह भत्ता और इसके अतिरिक्त ऐसे अर्द्ध वेतन पर अनुमान्य महॅंगाई भत्ता प्राप्त करने का हकदार होगाः परन्तु यह कि जहॅां निलम्बन की अवधि बारह माह से अधिक हो गयी हो वहॅां वह प्राधिकार, जिसने ऐसा निलम्बनादेश पारित किया हो, प्रथम बारह माह के पश्चात्वर्ती किसी अवधि के लिये जीवन-निर्वाह-भत्ता की रकम में निम्नलिखित रूप में परिवर्तन करने में सक्षम होगा-
(i) यदि उक्त प्राधिकार की राय में निलम्बन की अवधि लम्बे समय तक रही हो जिसके लिये, अभिलिखित किये जानेवाले कारणों से, एजेंसी कर्मी उत्तरदायी नहीं हो तो जीवन-निर्वाह भत्ता की रकम एक ऐसी समुचित रकम द्वारा बढ़ायी जा सकेगी जो प्रथम बारह महीने की अवधि के दौरान अनुमान्य जीवन-निर्वाह भत्ता के पचास प्रतिशत से अधिक नहीं होगी । (ii) यदि उक्त प्राधिकार की राय में निलम्बन की अवधि लम्बे समय तक रही हो जिसके लिये, अभिलिखित किये जानेवाले ऐसे कारणों से, एजेंसी कर्मी उत्तरदायी हो तो जीवन-निर्वाह भत्ता की रकम एक ऐसी समुचित रकम तक घटायी जा सकेगी जो प्रथम बारह महीने की अवधि के दोैरान अनुमान्य जीवन-निर्वाह-भत्ता के पचास प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
(iii) महंगाई भत्ता की दर इस नियम के उप-खंड (i) या उप-खंड (ii) के अधीन, यथास्थिति, बढ़ी हुई अथवा घटी हुई अनुमान्य जीवन-निर्वाह-भत्ता की दरों पर आधारित होगी : परन्तु यह कि एजेंसी कर्मी केवल उसी अवधि के लिये जीवन-निर्वाह-भत्ता पाने का हकदार होगा जब निलम्बन अवधि के दौरान वह मुख्यालय में वास्तव में उपस्थित रहा हो । उससे ऐसे एजेंसी कर्मी के लिये बनायी गयी उपस्थिति-पंजी में अपनी उपस्थिति दर्ज करने की अपेक्षा की जायेगी :
परन्तु यह और कि चॅूंकि कारावास अवधि के लिए मुख्यालय का निर्धारण नहीं हो सकता है, अतः कारावास अवधि के लिए ऐसी उपस्थिति दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी ।
(4) इस नियम के उप-नियम (3) के अधीन आनेवाले मामलों में निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिये कत्र्तव्य पर बितायी अवधि मानी जायेगी ।
(5) इस नियम के उप-नियम (2) और (3) के अधीन आनेवाले मामलों से भिन्न मामलों में एजेंसी कर्मी को इस नियम के उप-नियम (8) तथा (9) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, पूरे वेतन तथा भत्ते के इस अनुपात का, जैसा कि अनुशासनिक प्राधिकार विनिश्चत करे, भुगतान किया जायेगा जिसके लिये वह तब हकदार होता जब उसे लिंबित नहीं किया गया होता । अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा ऐसा विनिश्चयन एजेंसी कर्मी को प्रस्तावित राशि की नोटिस देने के पश्चात् और एजेंसी कर्मी द्वारा, उक्त नोटिस के तामिल होने की तिथि से साठ दिनों के अन्दर, उस संबंध में उसके द्वारा प्रस्तुत किये गये अभ्यावेदन, यदि कोई हो, पर विचार करने के बाद दिया जायेगा ।
(6) जहॅां अनुशासनिक कार्यवाही या किसी न्यायालय में कार्यवाही के अंतिम निर्णय के लंबित रहते हुए निलंबन वापस लिया जाता है वहॅां एजेंसी कर्मी के विरूद्ध कार्यवाही पूरी होने के पहले इस नियम के उप-नियम (1) के अधीन पारित किसी आदेश की, अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा स्वप्रेरणा से कार्यवाही की समाप्ति के पश्चात् समीक्षा की जायेगी और उसके द्वारा यथास्थिति, उप-नियम (3) या उप-नियम (5) के अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार एक आदेश पारित किया जायेगा ।
(7) इस नियम के उप-नियम (5) के अधीन आनेवाले मामलों में निलंबन अवधि तबतक कत्र्तव्य पर बितायी गयी अवधि नहीं मानी जायेगी जबतक कि अनुशासनिक प्राधिकार विनिर्दिष्ट रूप से यह निदेश न दे कि यह अवधि किसी विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिये बितायी गयी अवधि होगी ।26 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (8) इस नियम के उप-नियम (2), उप-नियम (3) या उप-नियम (5) के अधीन भत्तों का भुगतान उन अन्य सभी शर्तो के अधीन होगा जिनके अधीन ऐसे भत्ते अनुमान्य हाें । (9) इस नियम के उप-नियम (3) के परन्तुक या उप-नियम (5) के अधीन शर्तो निश्चित किये गये पूर्ण वेतन एवं भत्ते का अनुपात न तो पूर्ण वेतन एवं भत्ते के बराबर होगा ओैर न ही जीवन-निर्वाह-भत्ता से कम ।
140. अपील के परिणामस्वरूप सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पश्चात् पुनःस्थापन पर सेवा का निरूपण एवं वेतन एवं भत्ते की अनुमान्यताः- (1) जब किसी एजेंसी कर्मी, जिसे सेवाच्युत, बर्खास्त या अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया गया हो, को अपील के परिणामस्वरूप पुनः स्थापित किया जाता है अथवा इस प्रकार पुनः स्थापित होता यदि निलंबन में रहते हुए उसकी वार्धक्य सेवानिवृत्ति नहीं हुई होती तो अनुशासनिक प्राधिकारः-
(क) यथास्थिति सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवा-निवृत्ति से पूर्व निलंबन की अवधि सहित एजेंसी कर्मी की कत्र्तव्य से अनुपस्थिति की अवधि के लिये उसे भुगतान किये जानेवाले वेतन एवं भत्ते, और (ख) उक्त अवधि को कत्र्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी अथवा नहीं, के संबंध में विचार करेगा और विशिष्ट आदेश पारित करेगा । (2) इस नियम के उप-नियम (6) के उपबंधों के अधीन रहते हुए एजेंसी कर्मी को निम्नलिखित मामलों में पूर्ण वेतन एवं भत्ते का भुगतान किया जायेगा जो उसे अनुमान्य होता यदि वह यथास्थिति ऐसी सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पूर्व सेवाच्युत, बर्खास्त या अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त नहीं किया जाताः- (i) जहॅां अनुशासनिक प्राधिकार का यह समाधान हो जाय कि एजेंसी कर्मी, जिसे सेवाच्युत, बर्खास्त या अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया गया था, को पूर्णरूप से दोषमुक्त कर दिया गया हो, अथवा
(ii) जहॅां इस नियमावली के अनुपालन नहीं होने के आधार-मात्र पर अपीलीय प्राधिकार द्वारा सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवा-निवृत्ति संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया गया हो और आगे कोई जॅांच किया जाना प्रस्तावित नहीं होः
परन्तु यह कि जहॅां ऐसे प्राधिकार का यह समाधान हो जाय कि एजेंसी कर्मी के विरुद्ध संस्थित कार्यवाही के समापन में विलम्ब के लिये एजेंसी कर्मी ही सीधे तौर पर जवाबदेह है तो वह उसे अभ्यावेदन देने एवं सुनवाई का अवसर देकर और उसके द्वारा समर्पित अभ्यावेदन, यदि कोई्र हो, पर विचार कर, कारणों को अभिलिखित करते हुए, निदेश दे सकेगा कि उप-नियम (7) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए एजेंसी कर्मी को ऐसे विलम्ब की अवधि के लिये ऐसे वेतन एवं भत्ते के मात्र ऐसे अनुपात का भुगतान किया जायेगा, जो उस प्राधिकार द्वारा निश्चित की जाय । (3) इस नियम के उप-नियम (2) के अधीन आनेवाले किसी मामले में, यथास्थिति सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पूर्व निलम्बन की अवधि सहित कत्र्तव्य से अनुपस्थिति की अवधि सभी प्रयोजनों के लिये कत्र्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी ।
(4) इस नियम के उप-नियम (2) द्वारा आच्छादित मामलों से भिन्न मामलों में, उपनियम (6) एवं (7) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, एजेंसी कर्मी को पूर्ण वेतन एवं भत्ते के ऐसे अनुपात का, जो अनुशासनिक प्राधिकार विनिश्चित करे, भुगतान किया जायेगा जो उसे तब अनुमान्य होता जब वह यथास्थिति, ऐसी सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति अथवा निलंबित नहीं किया जाता । भुगतान के अनुपात का ऐसा विनिश्चयन अनुशासनिक प्राधिकार एजेंसी कर्मी को प्रस्तावित अनुपात का नोटिस देकर एवं एजेंसी कर्मी को तामिल की गयी नोटिस की तिथि से साठ दिनों के अन्दर प्राप्त अभ्यावेदन, यदि कोई हो, पर विचार कर सकेगा । (5) इस नियम के उप-नियम (4) के अधीन मामलों में, यथास्थिति, सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पूर्व उसके निलंबन की अवधि सहित कत्र्तव्य बितायी गयी अवधि तबतक नहीं समझी जायगी जब तक कि अनुशासनिक प्राधिकार विशेष रूप से यह निदेश नहीं दे कि किसी विनिर्दिष्ट प्रयोजन हेतु इसे वैसी अवधि समझी जायः27 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 परन्तु यह कि यदि कोई एजेंसी कर्मी ऐसा अभ्यावेदन दे, तो ऐसा प्राधिकार विचारण के बाद यह निदेश दे सकेगा कि यथास्थिति, उसकी सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पूर्व निलंबन की अवधि सहित अनुपस्थिति की अवधि को एजेंसी कर्मी को देय और अनुमान्य किसी प्रकार की छुट्टी के रूप में परिवर्तित किया जायेगा । (6) उप-नियम (2) या उप-नियम (4) के अधीन भत्तों का भुगतान उन सभी शर्तो के अधीन होगा जिनके अन्तर्गत भत्ते अनुमान्य हों ।
(7) उप-नियम (2) या उप-नियम (4) के अधीन विनिश्चित पूर्ण वेतन एवं भत्ते का अनुपात, यथास्थिति, न तो पूर्ण वेतन एवं भत्ते के बराबर होगा और न ही नियम 10 के अधीन अनुमान्य जीवन-निर्वाह एवं अन्य भत्तों से कम ।
(8) पुनस्र्थापन होने पर इस नियम के अधीन किसी एजेंसी कर्मी को किसी भी प्रकार का भुगतान, यथास्थिति, बर्खासतगी, सेवाच्युति या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की तिथि और पुनस्र्थापन की तिथि के बीच की अवधि के दौरा किसी नियोजन के माध्यम से उसके द्वारा अर्जित रकम, यदि कोई हो, से समंजन के अधीन रहते हुए किया जायेगा । जहॅां इस नियम के अधीन अनुमान्य वेतन एवं भत्ते अन्यत्र ऐसे नियोजन के दौरान अर्जित रकम के बराबर या उससे कम होंगे, वहॅां एजेंसी कर्मी को कुछ भी भुगतान नहीं किया जायेगा।
141. जहॅां सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृति किसी न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया जाय वहॅां पुनःस्थापन, सेेवा का निरूपण एवं वेतन और भत्ते की अनुमान्यताः- (1) जहॅां किसी एजेंसी कर्मी की सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति किसी न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया जाय और ऐसा एजेंसी कर्मी, आगे किसी और जॅांच किये बिना पुनःस्थापित कर दिया जाय, वहॅां कत्र्तव्य से अनुपस्थिति की अवधि विनियमित कर दी जायेगी तथा न्यायालय के निदेशों, यदि कोई हो, के अध्यधीन इस नियम के (2) या (3) के उपबंधों के अनुसार एजेंसी कर्मी को वेतन और भत्ते का भुगतान किया जायेगा । (2) (i) इस नियम के उप-नियम (3) द्वारा आच्छादित मामलों से भिन्न मामलों में, एजेंसी कर्मी को पूरे वेतन और भत्ते के उस अनुपात का भुगतान किया जायेगा जो उसे, यथास्थिति, सेवाच्युत नहीं किये जाने, बर्खास्त नहीं किये जाने या अनिवार्य सेवानिवृत्त नहीं किये जाने अथवा ऐसी सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पूर्व निलंबित नहीं किये जाने पर अनुमान्य होता, और जैसा कि अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित किया जाय । भुगतान के अनुपात का ऐसा विनिश्चत अनुशासनिक प्राधिकार प्रस्तावित राशि के बारे में एजेंसी कर्मी को नोटिस देकर और एजेंसी कर्मी को उपर्युक्त नोटिस तामिल किये जाने की तिथि से साठ दिनों के भीतर इस संबंध में उसके द्वारा प्रस्तुत अभयावेदन, यदि कोई हो, पर विचार करने के बाद, करेगाः परन्तु यह कि एजेंसी कर्मी को इस उप-नियम के अधीन कोई भुगतान, यथास्थिति, न तो पूर्ण वेतन एवं भत्ते के बराबर होगा और न ही नियम 10 के अधीन अनुमान्य जीवन-निर्वाह-भत्ता एवं अन्य भत्तों से कम । (ii) सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पूर्व निलंबन की अवधि सहित यथास्थिति, सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की तिथि न्यायालय के निर्णय की तिथि के बीच की अवधि नियम 140 के उप-नियम (5) में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार विनियमित की जायेगी । (3) जहॅां एजेंंसी कर्मी की सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति किसी न्यायालय द्वारा मामले के गुणागुण पर निरस्त की गयी हो, अथवा जहॅां एजेंसी कर्मी सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति किसी न्यायालय द्वारा इस नियमावली के प्रावधानों का अनुपालन नहीं होने मात्र के आधार पर निरस्त की गयी हो और आगे कोई जॅांच किया जाना प्रस्तावित न हो, वहॅां, यथास्थिति सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की तिथि के बीच की अवधि सभी प्रयोजनों के लिये कत्र्तव्य पर मानी जायेगी । फलस्वरूप उस अवधि के लिये एजेंसी कर्मी को पूरे वेतन एवं भत्ते का भुगतान किया जायेगा, जो उसे, यथास्थिति, पदच्युत28 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 नहीं कियें जाने अथवा ऐसी सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पूर्व निलंबित नहीं किये जाने पर अनुमान्य होता ।
(4) इस नियम के उप-नियम (2) या उप-नियम (3) के अधीन भत्तों का भुगतान उन सभी अन्य शर्तो के अधीन होगा जिनके अन्तर्गत ऐसे भत्ते अनुमान्य हों । पुनस्र्थापन होने पर, एजेंसी कर्मी को इस नियम के अधीन किसी राशि का भुगतान सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति और सेवा में पुनस्र्थापन की तिथि के बीच की अवधि में, किसी नियोजन के माध्यम से उसके द्वारा अर्जित राशि, यदि कोई हो, के समायोजन के अधीन रहते हुए होगा । जहॅां इस नियम के अधीन अनुमान्य वेतन और भत्ते अन्यत्र ऐसे नियोजन के दौरान अर्जित राशि के बराबर या उससे कम हो वहॅां एजेंसी कर्मी को कुछ भी भुगतान नहीं किया जायेगा । शास्तियॅां और अनुशासनिक प्राधिकार
142. लघु एवं वृहत् शास्तियॅांः- समुचित और यथेष्ट कारणों से तथा इसमें इसके बाद यथाउपबंधित, निम्नलिखित शास्तियॅां, एजेंसी कर्मी पर अधिरोपित की जा सकेगी, यथाः- लघु शास्तियॅां
(i) निन्दन; (ii) प्रोन्नति की रोक; (iii) लापरवाही या आदेशोल्लंघन के कारण सरकार को उसके द्वारा पहूॅंचायी गयी किसी वित्तीय हानि की उसके वेतन से पूरी या अांशिक वसूली;
(iv) तीन वर्षो से अनधिक अवधि के लिये, असंचयात्मक प्रभाव से कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति;
(v) वेतनवृद्धियों की रोक;
वृहत शास्तियॅां (vi) इस नियम के खंड (iv) में यथा उपबंधित के सिवाय, कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिये अवनति, इन निदेशों के साथ भी कि ऐसी अवनति की अवधि के दौरान एजेंसी कर्मी वेतनवृद्धियॅां अर्जित करेगा या नहीं तथा ऐसी अवधि की समाप्ति के बाद उक्त अवनति का प्रभाव उसकी भावी वेतनवृद्धियों को स्थगित रखने पर होगा या नहीं; (vii) निम्नतर कालमान वेतन, कोटि, पद या सेवा में अवनति, जो सामान्यतया एजेंसी कर्मी, को उस कालमान वेतन, कोटि, पद या सेवा में (जिससे वह अवनत किया गया हो) प्रोन्नति के लिये उस कोटि या पद या सेवा में (जिससे एजेंसी कर्मी अवनत किया गया हो) प्रत्यावत्र्तन की शर्तो तथा उस कोटि, पद या सेवा में ऐसेप्रत्यावत्र्तन के फलस्वरूप उसकी वरीयता एवं वेतन के संबंध में दिये जानेवाले अगले निदेशों के साथ या के बिना, अवरोधक होगा; (viii) अनिवार्य सेवानिवृत्ति;
(ix) सेवाच्युति, जो सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिये निरर्हता नहीं होगी;
(x) सेवा से बर्खास्तगी, जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिये निरर्हता होगीः परन्तु यह कि ऐसे हरेक मामले में जिसमें किसी पदीय कार्य करने या से प्रविरत करने के लिये हेतु या पुरस्कार के रूप में किसी व्यक्ति से, वेैध पारिश्रमिक से भिन्न, कोई परितोषण स्वीकार किया जाना सिद्ध हो जाये, खंड (ix) या (x) में उल्लिखित शास्ति अधिरोपित की जायेगीः परन्तु यह भी कि किसी आपवादिक मामले में तथा विशेष कारणों से जिन्हें अभिलिखित किया जायेगा, कोई अन्य शास्ति अधिरोपित की जा सकेगी । स्पष्टीकरणः- इस नियम के अर्थान्तर्गत निम्नलिखित को शास्ति नहीं माना जायेगा, यथाः (i) किसी एजेंसी कर्मी की, जिसे सेवा में वह या जो पद वह धारण करता है उसे शासित करनेवाले नियमों या आदेशों या उसकी नियुक्ति के निर्बन्धनों के अनुसार किसी विभागीय परीक्षा में उतीर्ण नहीं होने पर, वेतन-वृद्धि रोक रखना;
29 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011(ii) किसी एजेंसी कर्मी की, चाहे वह मौलिक या स्थानापन्न हैसियत में हो, किसी सेवा कोटि या पद जिसके लिये अर्हक् हो) के लिये उसके मामले पर विचारोपरान्त प्रोन्नति रोक देना; (iii) किसी एजेंसी कर्मी को, चाहे वह मौलिक या स्थानापन्न हैसियत में हो, किसी सेवा कोटि या पद (जिसके लिये वह अर्हक हो) के लिये उसके मामले पर विचारोपरान्त प्रोन्नति नहीं मिलना; (iv) उच्चतर सेवा, कोटि या पद पर स्थानापन्न रूप में कार्यरत किसी एजेंसी कर्मी का, उसके आचरण से अनजुड़े किसी प्रशासनिक आधार पर निम्नतर सेवा, कोटि या पद पर प्रतिवत्र्तन; (v) परिवीक्षा पर किसी अन्य सेवा, कोटि या पद पर नियुक्त किसी एजेंसी कर्मी का, उसकी नियुक्ति के निर्वन्धनों और शर्तो या ऐसी परिवीक्षा को शासित करनेवाले नियमों एवं आदेशों के अनुसार, परिवीक्षा अवधि की समाप्ति या उसके दौरान उसकी स्थायी सेवा, कोटि या पद पर प्रतिवत्र्तन;
(vi) किसी एजेंसी कर्मी की सेवा का, जिसकी सेवाएॅं किसी राज्य सरकार से या किसी राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन के किसी प्राधिकार से उधार ली गयी हो, उस राज्य सरकार या उस प्राधिकार में प्रतिस्थापन, जिससे ऐसे एजेंसी कर्मी की सेवा उधार ली गयी थी;
(vii) अधिवार्षिकी या सेवानिवृत्ति से संबंधित उपबंधों के अनुसार किसी एजेंसी कर्मी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति;
(viii) सेवा-समाप्तिः-
(क) परिवीक्षा पर नियुक्त किसी एजेंसी कर्मी की, उसकी परिवीक्षा अवधि के दौरान या उसकी समाप्ति पर, उसकी नियुक्ति के निबंधनों और शर्तो या ऐसी परिवीक्षा को शासित करनेवाले नियमों एवं आदेशों के अनुसार, अथवा
(ख) करार के अधीन नियोजित किसी एजेंसी कर्मी की, ऐसे करार के निर्बन्धनों और शत्र्तो के अनुसार ।
143. अनुशासनिक प्राधिकारः-
(1) बोर्ड एजेंसी नियम 142 में विनिर्दिष्ट कोई भी शास्ति अधिरोपित कर सकेगी ।
(2) उप-नियम (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी एजेंसी कर्मी पर, नियुक्ति प्राधिकार या कोई प्राधिकार जिसके अधीनस्थ नियुक्ति प्राधिकार हो, द्वारा अथवा सरकार के सामान्य या विशेष ओदश द्वारा, इस हेतु शक्ति प्रदत्त किसी अन्य प्राधिकार द्वारा नियम 142 में विनिर्दिष्ट कोई भी शास्ति अधिरोपित की जा सकेगी ।
144. कार्यवाही संस्थित करने का प्राधिकारः-
(1) सरकार या नियुक्ति प्राधिकार या कोई प्राधिकार जिसके अधीनस्थ नियुक्ति प्राधिकार हो, या सरकार के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा शक्ति प्रदत्त कोई अन्य प्राधिकारः- (क) किसी एजेंसी कर्मी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित कर सकेगा;
(ख) अनुशासनिक प्राधिकार को निदेश दे सकेगा कि किसी एजेंसी कर्मी, जिस पर अनुशासनिक प्राधिकार इस नियमावली के अधीन नियम 142 में विनिर्दिष्ट शास्तियों से कोई अधिरोपित करने में सक्षम हो, के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करे । (2) नियम 14 के खंड (i) से (v) में विनिर्दिष्ट शास्तियों में से कोई अधिरोपित करने के लिये इस नियमावली के अधीन सक्षम कोई अनुशासनिक प्राधिकार, इस बात के होते हुए भी कि ऐसा अनुशासनिक प्राधिकार नियम 142 के खंड (vi) से (x) के अधीन शास्तियों में से कोई अधिरोपित करने के लिये इस नियमावली के अधीन सक्षम नहीं हेै, नियम 142 के खंड (vi) से (x) में विनिर्दिष्ट शास्तियों में से कोई अधिरोपित करने हेतु किसी एजेंसी कर्मी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित कर सकेगा । शास्तियॅां अधिरोपित करने हेतु प्रक्रिया
145. वृहत् शास्तियॅां अधिरोपित करने हेतु प्रक्रियाः-
(1) जहॅां तक हो सके इस नियमावली में उपबंधित रीति से जॅांच किये बिना नियम 142 के खंड (vi) से (x) में विनिर्दिष्ट शास्तियों में से कोई अधिरोपित करने हेतु आदेश नहीं किया जायेगा ।30 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (2) जहॅां कहीं अनुशासनिक प्राधिकार की राय हो कि किसी एजेंसी कर्मी के विरूद्ध अवचार या कदाचार के किसी लांछन की सच्चाई के बारे में जॅांच करने के आधार हैं, वहॅां वह स्वयं इसकी जॅांच कर सकेगा अथवा उसकी सच्चाई के बारे में जॅांच के लिये इस नियमावली के अधीन कोई प्राधिकार नियुक्त कर सकेगा । स्पष्टीकरणः- जहॅां अनुशासनिक प्राधिकार स्वयं जॅांच करता हो वहॅां जॅांच प्राधिकार से संबंधित इस नियम के उप-नियम (7) से उप-नियम (20) में तथा उप-नियम (22) में जॅांच प्राधिकार के प्रति कोई निर्देश अनुशासनिक प्राधिकार के प्रति निर्देश समझा जायेगा ।
(3) जहॅां इस नियम के अधीन एजेंसी कर्मी के विरुद्ध जॅांच करना प्रस्तावित हो वहॅां अनुशासनिक प्राधिकारः- (i) अवचार या कदाचार के लांछनों के सार को एक सुनिश्चित एवं सुस्पष्ट आरोप के मद के रूप में लेखबद्ध करेगा या लेखबद्ध करवायेगा; (ii) आरोप के प्रत्येक मद के समर्थन में अवचार या कदाचार के लांछनों का अभिकथन लेखबद्ध करेगा या लेखबद्ध करवायेगा, जिसमें
(क) एजेंसी कर्मी द्वारा कि गयी कोई स्वीकृति या संस्वीकृति सहित सभी सुसंगत तथ्यों का एक अभिकथन, और
(ख) उन दस्तावेजों की एक सूची तथा उन साक्षियों की एक सूची, जिनके द्वारा आरोप की मदों को सिद्ध करना प्रस्तावित हो, अतर्विष्ट रहेंगी ।
(4) अनुशासनिक प्राधिकार एजेंसी कर्मी को आरोप मदों की एक प्रति, अवचार या कदाचार, के लांछनों के उसे अभिकथन तथा उन दस्तावेजों और साक्षियों की सूची, जिनके द्वारा आरोप की मदों का सिद्ध होना प्रस्तावित हो देगा या दिलवायेगा तथा एजेंसी कर्मी से अपेक्षा करेगा कि यथाविनिर्दिष्ट समय के भीतर अपने बचाव का एक लिखित अभिकथन प्रस्तुत करे और यह अभिकथित करे कि क्या वह चाहता है कि स्वयं उसे व्यक्तिशः सुना जाय ।
(5) (क) बचाव का लिखित कथन प्राप्त होने पर अनुशासनिक प्राधिकार आरोप की उन मदों के बारे में जॅांच-पड़ताल स्वयं कर सकेगा जिन्हें स्वीकार न किया गया हो, अथवा यदि वह इस नियम के उप-नियम (2) के अधीन इस प्रयोजनार्थ जॅांच प्राधिकार नियुक्त करना आवश्यक समझे, तो वह वैसा कर सकेगा और जहॅां एजेंसी कर्मी द्वारा अपने बचाव के लिखित कथन में सभी आरोप के मदों को स्वीकार कर लिया गया हो वहॅां अनुशासनिक प्राधिकार ऐसे साक्ष्य लेते हुए जिसे वह उचित समझे, प्रत्येक आरोप पर अपना निष्कर्ष अभिलिखित करेगा तथा नियम 18 में दी गयी रीति से कार्रवाई करेगा ।
(ख) यदि एजेंसी कर्मी द्वारा बचाव का कोई लिखित अभिकथन प्रस्तुत नहीं किया गया हो तो अनुशासनिक प्राधिकार आरोप की मदों की जॅांच-पड़ताल स्वयं कर सकेगा अथवा यदि वह इस नियम के उप-नियम (2) के अधीन इस प्रयोजनार्थ जॅांच प्राधिकार की नियुक्ति करना आवश्यक समझे तो वह वैसा कर सकेगा ।
(ग) जहॅां अनुशासनिक प्राधिकार आरोप के किसी मद के बारे में जॅांच-पड़ताल स्वयं करे अथवा ऐसे आरोप के बारे में जॅांच-पड़ताल करने के लिये जॅाच प्राधिकार की नियुक्ति करे, वहॅां वह आरोप की मदों के समर्थन में मामला को उसकी ओर से प्रस्तुत करने के लिये, एक आदेश द्वारा किसी एजेंसी कर्मी को या किसी विधि व्यवसायी को 'प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी' के रूप में नियुक्त कर सकेगा ।
(6) अनुशासनिक प्राधिकार, जहॅां वह जॅांच प्राधिकार न हो, जॅांच प्राधिकार को निम्नलिखित अभिलेख अग्रसारित करेगाः-
(i) आरोप की मदों तथा अवचार या कदाचार के लांछनों के विवरण की एक प्रति; (ii) एजेंसी कर्मी द्वारा समर्पित बचाव का लिखित अभिकथन, यदि कोई हो की एक प्रति; (iii) इस नियम के उप-नियम (3) में विनिर्दिष्ट साक्षियों, यदि कोई हो, के अभिकथन की एक प्रति; (iv) इस नियम के उप-नियम (3) में विनिर्दिष्ट दस्तावेजों को एजेंसी कर्मी को उपलब्ध कराया जाना साबित करनेवाला साक्ष्य; और31 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (v) 'प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी' की नियुक्ति संबंधी आदेश की एक प्रति । (7) एजेंसी कर्मी, आरोप की मदों तथा अवचार या कदाचार के लांछनों का विवरण उसके द्वारा प्राप्त किये जाने की तिथि से दस कार्य दिवसों के भीतर, उस तिथि और उस समय पर, जो जॅांच प्राधिकार इस निमित लिखित नोटिस द्वारा विनिर्दिष्ट करें, अथवा जॅांच प्राधिकार द्वारा यथाविनिर्दिष्ट उस अतिरिक्त दस दिनों से अनधिक समय के भीतर, जॅांच प्राधिकार के समक्ष स्वयं उपस्थित होगा ।
(8) (क) एजेंसी कर्मी, अपनी ओर से मामला प्रस्तुत करने के लिये, अपने मुख्यालय में या जहॅां जॅांच की जा रही हो उस स्थान पर, किसी कार्यालय में पदस्थापित अन्य एजेंसी कर्मी की सहायता ले सकेगाः
परन्तु यह कि वह इस प्रयोजनार्थ किसी विधि व्यवसायी न हो, अथवा मामले की परिस्थितियों का ध्यान रखते हुए, अनुशासनिक प्राधिकार ऐसी अनुमति न देः
परन्तु यह भी कि यदि अनुशासनिक प्राधिकार, मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और अभिलिखित कारणों से, ऐसा न करने की अनुमति दे तो एजेंसी कर्मी किसी अन्य स्थान पर पदस्थापित किसी अन्य एजेंसी कर्मी की सहायता ले सकेगाः
परन्तु यह और कि एजेंसी कर्मी किसी ऐसे अन्य एजेंसी कर्मी की सहायता नहीं ले सकेगा, जिसके पास ऐसे तीन लम्बित अनुशासनिक मामले हों जिनमें उसे सहायता देनी हो ।
(ख) सरकार द्वारा इस निमित्त समय-समय पर सामान्य या विशेष आदेश द्वारा यथाविनिर्दिष्ट शर्तो के अध्यधीन एजेंसी कर्मी अपनी ओर से मामला प्रस्तुत करने के लिये किसी सेवा-निवृत्त एजेंसी कर्मी का सहायता ले सकेगा ।
(9) यदि एजेंसी कर्मी, जिसने अपने बचाव के लिखित अभिकथन में आरोप के किसी मद को स्वीकार न किया हो या बचाव में कोई लिखित अभिकथन प्रस्तुत न किया हो, जॅांच प्राधिकार के समक्ष उपस्थित होता है तो वह प्राधिकार उससे पूछेगा कि वह दोषी है या नहीं अथवा अपने बचाव के लिये उसे कुछ कहना है या नहीं और यदि वह आरोप के किसी मद का दोषी होने का अभिवचन करता हो तो जॅांच प्राधिकार उस अभिवचन को अभिलिखित करेगा, अभिलेख पर हस्ताक्षर करेगा तथा उस पर एजेंसी कर्मी से हस्ताक्षर करा लेगा
(10) आरोप के जिन मदों के संबंध में एजेंसी कर्मी ने दोषी होने का अभिवचन किया हो जॅांच प्राधिकार उन दोषों पर अपना निष्कर्ष वापस कर देगा ।
(11) यदि एजेंसी कर्मी, विनिर्दिष्ट समय के भीतर उपस्थित होने में विफल हो अथवा अभिवचन से इनकार करता हो या अभिवचन नहीं करता हो, तो जॅांच प्राधिकार, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी से अपेक्षा करेगा कि वह उन साक्ष्यों को प्रस्तुत करे जिनके द्वारा आरोप की मदों को वह साबित करना चाहता हो और मामले को तीस दिनों से अनधिक की बाद की तिथि के लिये स्थगित कर देगा और इस आशय का आदेश अभिलिखित करेगा कि एजेंसी कर्मी अपना प्रतिवाद तैयार करने के लियेः-
(i) आदेश किये जाने के पॅांच दिनों के भीतर अथवा जॅांच प्राधिकार द्वारा यथा अनुमत पॅांच दिनों से अनधिक अतिरिक्त समय के भीतर इस नियम के उप-नियम (3) में सूची में विनिर्दिष्ट दस्तावेजों का निरीक्षण कर सकता है;
(ii) अपनी ओर से परीक्षण किये जानेवाले साक्षियों की सूची प्रस्तुत कर सकता है; टिप्पणीः- यदि एजेंसी कर्मी उप-नियम (3) में निर्दिष्ट सूची में उल्लिखित साक्षियों के बयानों की प्रतियॅां उपलब्ध कराने का लिखित आवेदन करे तो जॅांच प्राधिकार यथाशीघ्र उसे ऐसी प्रतियॅां दे देगा । (iii) आदेश किये जाने के दस दिनों के भीतर या जॅांच प्राधिकार द्वारा अनुमत अतिरिक्त समय के भीतर ऐसे किसी दस्तावेज की खोज करने या पेश करने की नोटिस दे सकेगा जो सरकार के पास हो, किन्तु इस नियम के उप-नियम (3) में विनिर्दिष्ट सूची में उल्लिखित न होः
परन्तु यह कि एजेंसी कर्मी खोज किये जानेवाले या सरकार द्वारा पेश किये जानेवाले उसके द्वारा अपेक्षित कागजातों की सुसंगति इंगित करेगा ।32 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (12) दस्तावेजों को खोजने या पेश करने की नोटिस प्राप्त होने पर जॅांच प्राधिकार उसे या उसकी प्रतिलिपियों एक अध्यापेक्षा के साथ उस प्राधिकार को, जिसकी अभिरक्षा या कब्जे में दस्तावेज रखे गये हों, अध्यपेक्षा में यथाविनिर्दिष्ट तिथि तक दस्तावेज पेश करने हेतु अग्रसारित कर देगा :
परन्तु यह कि जॅांच प्राधिकार, अपने द्वारा लिखित रूप में अभिलिखित किये जानेवाले कारणों से, ऐसे दस्तावेजों की अध्यपेक्षा को अस्वीकार कर सकेगा जिन्हें वह मामले के लिये अप्रासंगिक समझे । (13) इस नियम के उप-नियम (12) में विनिर्दिष्ट अध्यपेक्षा प्राप्त होने पर, अध्यपेक्षित दस्तावेजों को अभिरक्षा या कब्जा में रखनेवाला हरेक प्राधिकार उन्हें जॅांच प्राधिकार के समक्ष पेश करेगा : परन्तु यह कि अध्यपेक्षित दस्तावेजों को अभिरक्षा या कब्जा में रखनेवाले प्राधिाकार का उसके द्वारा लिखित रूप में अभिलिखित किये जानेवाले कारणों से, यदि यह समाधान हो जाय कि ऐसे दस्तावेजों में से सभी या किसी को पेश करना लोकहित या राज्य की सुरक्षा के विरूद्व होगा तो वह तद्नुसार जॅंांच प्राधिकार को सूचित करेगा और इस तरह सूचित किये जाने पर, जॅांच प्राधिकार, यह जानकारी एजेंसी कर्मी को संसूचित करेगा तथा ऐसे दस्तावेजों को पेश करने या खोजने के लिये की गयी अध्यपेक्षा को वापस ले लेगा। (14) जॅांच के लिये नियत तिथि को, मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य जिनके आधार पर आरोप की मदों को साबित करना प्रस्तावित हो, अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा या उसकी ओर से प्रस्तुत किया जायेगा । साक्षियों का परीक्षण प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा या उसकी ओर से किया जायेगा और एजेंसी कर्मी द्वारा या उसकी ओर से प्रतिपरीक्षण किया जा सकेगा । प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी उन बिन्दुओं पर साक्षियोंका पुनर्परीक्षण करने का हकदार होगा जिन पर उनका प्रतिपरीक्षण किया गया हो, किन्तु जॅांच प्राधिकार की अनुमति के बिना किसी नये विषय पर प्रतिपरीक्षण नहीं करेगा । जॅांच प्राधिकार भी साक्षी से ऐसे प्रश्न पूछ सकेगा जिसे वह उचित समझे ।
(15) अनुशासनिक प्राधिकार की ओर से मामला बन्द किये जाने के पूर्व यदि आवश्यक प्रतीत हो तो जॅांच प्राधिकार स्वविवेक से प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी को ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकेगा जो एजेंसी कर्मी को दी गयी सूची में सम्मिलित न हो या स्वयं नये साक्ष्यों की मॅांग कर सकेगा अथवा किसी साक्षी को पुनः बुलाकर उसका पुनर्परीक्षण कर सकेगा और ऐसी दशा में एजेंसी कर्मी, यदि मॅांग करे तो पेश किये जाने के लिये स्थगन लेने का हकदार होगा, जिसमें स्थगन का दिन एवं जिस दिन के लिये जॅांच स्थगित की गयी हो शामिल नहीं रहेंगे । अभिलेख पर लिये जाने के पूर्व जॅांच प्राधिकार उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का अवसर एजेंसी कर्मी को देगा । जॅांच प्राधिकार एजेंसी कर्मी को भी नये साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकेगा यदि उसकी यह राय बने कि न्याय के हित में ऐसे साक्ष्यों को पेश करना आवश्यक है : परन्तु यह कि साक्ष्य की अनुपूर्ति के लिये नया साक्ष्य देने या मॅांगने या किसी साक्षी को फिर से बुलाने की अनुमति नहीं दी जायेगी । ऐसे साक्ष्य की मॅांग तभी की जा सकेगी जब मूलतः पेश किये गये साक्ष्य में कोई अन्तर्निहित कमी या दोष हों । (16) जब अनुुशासनिक प्राधिकार के लिये मामला बन्द हो जाय तब एजेंसी कर्मी से अपेक्षा की जायेगी कि वह मौखिक या लिखित, जैसा वह पसंद करे, अपने प्रतिवाद का अभिकथन करे । यदि प्रतिवाद मोैखिक रूप से किया जाय तो उसे अभिलिखित किया जायेगा और एजेंसी कर्मी से अभिलेख पर हस्ताक्षर करने की अपेक्षा की जायेगी । दोनों ही दशाओं में प्रतिवाद अभिकथन की प्रति नियुक्त प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, यदि कोई हो, को दी जायेगी । (17) उसके बाद एजेंसी कर्मी की ओर से साक्ष्य पेश किया जायेगा । एजेंसी कर्मी यदि चाहे, तो अपनी ओर से स्वयं परीक्षण कर सकेगा । उसके बाद, एजेंसी कर्मी द्वारा पेश किये गये साक्षियों का परीक्षण किया जायेगा और वे अनुशासनिक प्राधिकार के साक्षियों पर लागू उपबंधों के अनुसार जॅांच प्राधिकार द्वारा परीक्षण किये जाने, प्रतिपरीक्षण किये जाने एवं पुनर्परीक्षण किये जाने के दायी होंगे ।33 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (18) यदि एजेंसी कर्मी ने स्वयं परीक्षण न किया हो, तो एजेंसी कर्मी द्वारा अपना मामला बन्द किये जाने के पश्चात् जॅांच प्राधिकार, एजेंसी कर्मी के विरूद्ध साक्ष्य में दिखनेवाली परिस्थितियों के संबंध में उसकी स्थिति स्पष्ट करने के प्रयोजनार्थ उससे सामान्य पूछताछ करेगा ।
(19) साक्ष्यों को पेश किया जाना पूरा हो जाने पर जॅांच प्राधिकार, नियुक्त प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, यदि कोई हो, और एजेंसी कर्मी को सुनेगा या यदि वह चाहे, तो उन्हें अपने-अपने मामले का लिखित पक्ष कथन दाखिल करने की अनुमति देगा ।
(20) यदि एजेंसी कर्मी, जिसे आरोप की मदों की एक प्रति दी गयी हो, बचाव का लिखित अभिकथन, इस प्रयोजनार्थ विनिर्दिष्ट तिथि को या उससे पूर्व पेश न करे अथवा जॅांच प्राधिकार के समक्ष स्वयं उपस्थित न हो अथवा इस नियम के उपबंधों का अनुपालन करने में अन्यथा विफल रहे या अस्वीकार करे तो जॅांच प्राधिकार एकपक्षीय जॅांच कर सकेगा । (21) (क) जहॅा नियम 142 के खंड (i) से (v) में विनिर्दिष्ट शास्तियों में से कोई अधिरोपित करने के लिये सक्षम कोई अनुशासनिक प्राधिकार लेकिन नियम 14 के खंड (vi) से (x) में विनिर्दिष्ट शास्तियों में से कोई अधिरोपित करने के लिय सक्षम नहीं हो स्वयं आरोप की किसी मद की जॅांच की हो या जॅांच करवायी हो और अपने निष्कर्ष अथवा अपने द्वारा नियुक्त किसी जॅांच प्राधिकार के निष्कर्ष पर अपने विनिश्चय को ध्यान में रखते हुए यदि उसकी यह राय हो कि नियम 14 के खंड (vi) से (x) में विनिर्दिष्ट शास्तियॅां एजेंसी कर्मी पर अधिरोपित की जानी चाहिए तो वह प्राधिकार जॅांच अभिलेख ऐसे अनुशासनिक प्राधिकार को प्रेषित कर देगा जो नियम 11 के खंड (vi) से (x) में विनिर्दिष्ट शास्तियॅां अधिरोपित करने में सक्षम हो । (ख) अनुशासनिक प्राधिकार, जिसे उपर्युक्त प्रकार से अभिलेख प्रेषित किये गये हों, अभिलेख में दिये गये साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई कर सकेगा, अथवा यदि उसकी यह राय हो कि न्याय के हित में साक्षियों में से किसी की आगे और जॅांच करना आवश्यक है तो वह साक्षियों को बुलाकर उनका परीक्षण, प्रतिपरीक्षण और पुनर्परीक्षण कर सकेगा तथा एजेंसी कर्मी पर ऐसी शास्तियॅां अधिरोपित कर सकेगा, जेैसा वह इस नियमावली के अनुसार उचित समझे । (22) जब कभी किसी जॅांच में संपूर्ण साक्ष्य या इसके किसी भाग को सुनने और अभिलिखित किये जाने के पश्चात् किसी जॅांच प्राधिकार को उसमें अधिकारिता न रह जाय तथा अन्य जॅांच प्राधिकार प्रभार ग्रहण करे जिसे ऐसी अधिकारिता हो और जो उस अधिकारिता का प्रयोग करे, तो वह उत्तरवर्ती जॅांच प्राधिकार अपने पूर्ववर्ती द्वारा तथा अांशिक रूप से स्वयं द्वारा अभिलिखित किये गये साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई कर सकेगाः परन्तु यह कि यदि उत्तरवर्ती जॅांच प्राधिकार की राय हो कि साक्षियों में से किसी की, जिसका साक्ष्य पहले अभिलिखित किया जा चुका हो, पुनः आगे जॅांच न्यायहित में आवश्यक है, तो वह किसी ऐसे साक्षी को बुला सकेगा, उसका परीक्षण, प्रतिपरीक्षण और पुनर्परीक्षण कर सकेगा, जैसा कि इसमें पूर्व-उपबंधित है । (23) (i) जॅांच की समाप्ति के पश्चात् एक अभिलेख तैयार किया जायेगा और उसमें निम्नलिखित अन्तर्विष्ट होंगेः-
(क) आरोप की मदों और अवचार अथवा कदाचार के लांछन की विवरणी; (ख) प्रत्येक आरोप की मद के संबंध में एजेंसी कर्मी का प्रतिवाद;
(ग) प्रत्येक आरोप की मद के संबंध में साक्ष्य का निर्धारण;
(घ) प्रत्येक आरोप की मद पर निष्कर्ष और उसके कारण । स्पष्टीकरण- यदि जॅांच प्राधिकार की राय में जॅांच की कार्यवाही आरोप की मूल मदों से भिन्न किसी आरोप की मद को सिद्ध करे, तो वह ऐसे आरोप की मद पर अपना निष्कर्ष अभिलिखित कर सकेगाः परन्तु यह कि ऐसे आरोप की मद पर निष्कर्ष तबतक अभिलिखित नहीं किये जायेंगे, जबतक कि एजेंसी कर्मी ने ऐसे तथ्यों को, जिन पर ऐेसे आरोप की मद आधारित हो, या तो स्वीकार न कर लिया हो या ऐसे आरोप की मद के विरूद्ध अपना प्रतिवाद करने के लिये उसे युक्तियुक्त अवसर न दिया गया हो ।34 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (ii) जॅांच प्राधिकार, जहॅां वह स्वयं अनुशासनिक प्राधिकार न हो, जॅांच-अभिलेख अनुशासनिक प्राधिकार को प्रेषित कर देगा जिसमें निम्नलिखित सम्मिलित होंगे- (क) इस उप-नियम के खंड (i) के अधीन उसके द्वारा तैयार किया गया प्रतिवेदन; (ख) एजेंसी कर्मी द्वारा समर्पित किये गये बचाव का लिखित अभिकथन, यदि कोई हो; (ग) जॅांच के दौरान प्रस्तुत किये गये मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य; (घ) जॅांच के दौरान प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी या एजेंसी कर्मी या दोनों के द्वारा दाखिल किये गये लिखित पक्ष-कथन, यदि कोई हो; और
(ड़) अनुशासनिक प्राधिकार तथा जॅांच प्राधिकार द्वारा जॅांच से संबंधित किये गये आदेश, यदि कोई हो ।
146. जॅांच प्रतिवेदन पर कार्रवाई-(1) अनुशासनिक प्राधिकार, यदि वह स्वयं जॅांच प्राधिकार न हो, लिखित रूप में अभिलेखित किये जानेवाले कारणों से, पुनः आगे जॅांच करने एवं प्रतिवेदन देने के लिये मामले को जॅांच प्राधिकार के पास वापस प्रेषित कर सकेगा तथा जॅांच प्राधिकार उस पर, जहॅां तक हो सके नियम 145 के उपबंधों के अनुसार पुनः आगे जॅांच करेगा । (2) नियम 145 (23) (ii) या उप-नियम (1) के अनुसार जॅांच प्रतिवेदन के प्राप्त होने पर, अनुशासनिक प्राधिकार यदि वह आरोप की किसी मद पर जॅांच प्राधिकार के निष्कर्ष से असहमत हो तो ऐसी असहमति के लिये अपने कारणों को अभिलेखित करेगा तथा ऐसे आरोप से संबंधित स्वयं का निष्कर्ष अभिलेखित करेगा, यदि उस प्रयोजनार्थ अभिलेख में उल्लेखित साक्ष्य पर्याप्त हो । (3) अनुशासनिक प्राधिकार जॅांच प्रतिवेदन की प्रतिलिपि, उप-नियम (2) में यथा उपबंधित स्वयं के निष्कर्ष, यदि कोई हो, के साथ, एजेंसी कर्मी को भेेजेगा या भेजवायेगा, जो यदि वह ऐसा चाहे, अपना लिखित अभ्यावेदन या निवेदन अनुशासनिक प्राधिकार को पन्द्रह दिनों के अन्दर समर्पित कर सकेगा । (4) अनुशासनिक प्र्राधिकार, उप-नियम (5) एवं (6) में यथा निर्दिष्ट अग्रेतर कार्रवाई करने के पूर्व, एजेंसी कर्मी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन या निवेदन, यदि कोई हो, पर विचार करेगा । (5) आरोप की सभी अथवा किसी मद पर अपने निष्कर्ष को ध्यान में रखते हुए तथा जॅांच के दौरान दिये गये साक्ष्य के आधार पर यदि अनुशासनिक प्राधिकार की यह राय हो कि नियम 14 के खंड (vi) से (x) में विनिर्दिष्ट शास्तियों में से कोई एजेंसी कर्मी पर अधिरोपित की जानी चाहिए, तो वह ऐसी शास्ति अधिरोपित करते हुए आदेश देगा । (6) आरोप की सभी अथवा किसी मद पर अपने निष्कर्ष को ध्यान में रखते हुए तथा जॅांच के दौरान दिये गये साक्ष्य के आधार पर यदि अनुशासनिक प्राधिकार की यह राय हो कि नियम 14 के खंड (vi) से (x) में विनिर्दिष्ट शास्तियों में से कोई एजेंसी कर्मी पर अधिरोपित की जानी चाहिए, तो वह ऐसी शास्ति अधिरोपित करते हुए आदेश देगा और अधिरोपित होनेवाली प्रस्तावित शास्ति पर एजेंसी कर्मी को अभ्यावेदन करने का कोई अवसर देना आवश्यक नहीं होगा
(7) उप-नियम (5) एवं (6) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी हरेक मामले में, जहॅां आयोग से परामर्श करना आवश्यक हो, वहॅां आयोग से परामर्श किया जायेगा और एजेंसी कर्मी पर कोई शास्ति अधिरोपित करने संबंधी कोई आदेश देने के पूर्व उसके परामर्श पर विचार किया जायेगा ।
147. लघु शास्तियॅां अधिरोपित करने हेतु प्रक्रिया- (1) नियम 146 के उप-नियम (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी एजेंसी कर्मी पर नियम 142 के खंड (i) से (v) में विनिर्दिष्ट को शथस्त अधिरोपित करने संबंधी कोई आदेश निम्नांकित कार्रवाइयों के किये बिना नहीं दिया जायेगा-
(क) उसके विरूद्ध कार्रवाई करने के लिये प्रस्ताव तथा कदाचार अथवा अवचार का लांछन, जिसके आधार पर कार्रवाई प्रस्तावित हो, की एजेंसी कर्मी को लिखित जानकारी, और उसे ऐसा अभ्यावेदन करने का युक्तियुक्त अवसर, जैसा वह प्रस्ताव के विरूद्ध करना चाहे; (ख) हरेक मामले जिसमें अनुशासनिक प्राधिकार की राय में ऐसी जॅांच आवश्यक हो नियम 145 के उप-नियम (3) से (23) तक में विहित रीति से जॅांच;
35 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011(ग) एजेंसी कर्मी द्वारा खंड (क) के अधीन समर्पित अभ्यावेदन तथा खंड (ख) के अधीन की गयी जॅांच, यदि कोई हो, पर विचार; (घ) प्रत्येक अवचार या कदाचार पर निष्कर्ष का अभिलेखन; और
(ड़) आयोग से परामर्श करना जहॅां ऐसा परामर्श करना आवश्यक हो । (2) ऐसे मामलों में कार्यवाही के अभिलेख में निम्नांकित शामिल रहेंगे- (i) एजेंसी कर्मी को उसके विरूद्ध प्रस्तावित कार्रवाई की सूचना की एक प्रतिलिपि; (ii) उसे उपलब्ध कराये गये अवचार या कदाचार के लांछन के अभिकथन की एक प्रतिलिपि; (iii) उसका अभ्यावेदन, यदि कोई हो; (iv) जॅांच के दौरान प्रस्तुत किये गये साक्ष्य; (v) आयोग का परामर्श, यदि कोई हो; (vi) अवचार या कदाचार के प्रत्येक लांछन के बारे में निष्कर्ष; और (vii) मामले पर, कारणों के साथ, आदेश ।
148. कतिपय मामलों में विशेष प्रक्रिया- नियम 145 से 147 अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी- (i) जहॅां किसी एजेंसी कर्मी पर कोई शास्ति किसी आपराधिक आरोप के संबंध में उसकी दोषसिद्धि की ओर ले जानेवाले आचरण के आधार पर अधिरोपित किया जाय, अथवा (ii) जहॅां अनुशासनिक प्राधिकार का अपने द्वारा लिखित रूप में अभिलेखित किये जाने वाले कारणों से यह समाधान हो जाय कि इस नियमावली में उपबंधित रीति से जॅांच करना युक्तियुक्त रूप से व्यवहार्य नहीं है, अथवा (iii) जहॅां सरकार का समाधान हो जाय कि इस नियमावली में उपबंधित रीति से कोई जॅांच करना राज्य के हित में समीचीन नहीं तो अनुशासनिक प्राधिकार मामलें की परिस्थितियों पर विचार कर सकेगा तथा ऐसा आदेश दे सकेगा जो वह ठीक समझेः
परन्तु यह कि खंड (i) के अधीन किसी मामले में कोई आदेश करने के पूर्व अधिरोपित की जानेवाली प्रस्तावित शास्ति पर एजेंसी कर्मी को अभ्यावेदन देने का एक अवसर दिया जायेगा : परन्तु यह और कि इस नियम के अधीन किसी मामले में कोई आदेश करने के पूर्व आयोग से परामर्श किया जायेगा जहॅां ऐसा परामर्श आवश्यक हो ।
149. आदेशों का संसूचनः- अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा दिये गये आदेश एजेंसी कर्मी को संसूचित किये जायेंगे जिसे आरोप के प्रत्येक मद पर निष्कर्ष, अथवा जहॅां अनुशासनिक प्राधिकार जॅांच प्राधिकार नहीं है, वहॅां जॅांच प्राधिकार के निष्कर्षो के एक अभिकथन की प्रति और आयोग के परामर्श, यदि कोई हो, की प्रति, तथा जहॅां अनुशासनिक प्राधिकार ने आयोग का परामर्श स्वीकार नहीं किया हो, वहॅां ऐसे अस्वीकार किये जाने के कारणों का संक्षिप्त अभिकथन भी उपलब्ध कराये जायेंगे ।
150. सम्मिलित कार्यवाहीः-(1) जहॅां किसी मामले में दो या अधिक एजेंसी कर्मचारी संबंधित है, वहॅां सरकार या ऐसे सभी एजेंसी कर्मियों की सेवा से बर्खास्तगी संबंधी शास्ति अधिरोपित करने में सक्षम कोई अन्य प्राधिकार आदेश द्वारा निदेशित कर सकेगा कि उन सभी के विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई एक सम्मिलित कार्यवाही के तहत् की जा सकती हेै ।
टिप्पणी-यदि ऐसे एजेंसी कर्मी की सेवा से बर्खास्तगी संबंधी शास्ति अधिरोपित करने में सक्षम प्राधिकार विभिन्न हों तो सम्मिलित कार्यवाही के तहत् अनुशासनिक कार्रवाई करने का आदेश ऐसे प्राधिकारों में उच्चतम द्वारा अन्यों की सहमति से दिया जा सकेगा ।
(2) किसी ऐसे आदेश में निम्नांकित विनिर्दिष्ट रहेगा- (i) ऐसी सम्मिलित कार्यवाही में अनुशासनिक प्राधिकार के रूप में कार्य कर सकनेवाला प्राधिकार; (ii) नियम 142 में निर्दिष्ट शास्तियॅां जिन्हें ऐसा अनुशासनिक प्राधिकार अधिरोपित करने में सक्षम होगा;
(iii) नियम 145 एवं नियम 146 या नियम 147 में निहित प्रक्रिया का अनुसरण कार्यवाही में होगा या नहीं ।36 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 अपील
151. आदेश के विरूद्ध अपील- कोई एजेंसी कर्मी निलम्बन-आदेश अथवा दंड-आदेश के विरूद्ध अपील कर सकेगा ।
152. अपीलीय प्राधिकार- (1) कोई एजेंसी कर्मी, ऐसे व्यक्ति सहित, जो एजेंसी सेवा में नहीं रह गया हो, नियम 151 में विनिर्दिष्ट आदेशों के विरूद्ध, सरकार के सामान्य अथवा विशेष आदेेश द्वारा इस निमित विनिर्दिष्ट प्राधिकार के समक्ष अपील कर सकेगा अथवा जहॅां ऐसा प्राधिकार विनिर्दिष्ट न हो, वहॅां- (i) जहॅां ऐसा एजेंसी कर्मी सेवक सिविल सेवा समूह-क या समूह-ख का सदस्य हो या अथवा सिविल पद समूह-क या समूह-ख पदधारी हो या था-
(क) नियुक्ति प्राधिकार के समक्ष अपील कर सकेगा, यदि अपीलाधीन आदेश उसके अधीनस्थ प्राधिकार द्वारा दिया गया हो; अथवा
(ख) सरकार के समक्ष अपील कर सकेगा, यदि ऐसा आदेश किसी अन्य प्राधिकार द्वारा दिया गया हो;
(ii) जहॅां ऐसा एजेंसी कर्मी सिविल सेवा समूह-ग या समूह-घ का सदस्य हो या था, वहॅां उस प्राधिकार के समक्ष अपील कर सकेगा, जिसके ठीक नीचे के अधीनस्थ प्राधिकार द्वारा अपीलाधीन आदेश दिया गया हो ।
(2) सरकार के आदेश के विरूद्ध कोई अपील नहीं की जा सकेगी, हालॅांकि ज्ञापन के रूप में पुनर्विलोकन अर्जी दाखिल की जा सकेगी ।
(3) यदि अपीलाधीन आदेश पारित करनेवाला व्यक्ति अपनी पश्चात्वर्ती नियुक्ति के कारण या अन्यथा उस आदेश के संबंध में अपीलीय प्राधिकार हो जाय तो उस आदेश के विरूद्ध कोई अपील उस प्राधिकार के समक्ष, जिसके ठीक नीचे वह व्यक्ति है, या बोर्ड द्वारा इस प्रयोजनार्थ विशेष रूप से प्राधिकृत प्राधिकार के समक्ष की जायेगी ।
153. अपील हेतु परिसीमा-कालः- इस भाग के अधीन की जानेवाली कोई अपील तब तक ग्रहण नहीं की जायेगी जब तक कि वह अपील में अन्र्तग्रस्त आदेश की प्रति अपीलार्थी को दे दिये जाने की तिथि से पैंतालिस दिनों के अन्दर की गयी हो :
परन्तु यदि अपीलीय प्राधिकार का यह समाधान हो जाय कि अपीलार्थी को समय पर अपील नहीं करने का पर्याप्त कारण था तो वह उक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगा । 154. अपील के प्रारूप एवं विषय वस्तुः-
(1) अपील करनेवाला प्रत्येक व्यक्ति ऐसा अपील पृथक् रूप से और अपने नाम से करेगा । (2) अपील उस प्राधिकार के समक्ष प्रस्तुत की जाय जिसके समक्ष अपील दाखिल की जा सके। अपीलार्थी द्वारा अपील की एक प्रति उस प्राधिकार को अग्रसारित की जायेगी जिसके आदेश के विरूद्ध अपील की जा रही हो । इसमें ऐसे सभी तथ्य एवं तर्क अन्तर्विष्ट होंगे जिन पर अपीलार्थी विश्वास करता हो तथा इसमें अनादरपूर्ण या अनुचित भाषा का प्रयोग नहीं किया जायेगा और यह अपने आप में पूर्ण होगा।
(3) वह प्राधिकार, जिसके आदेश के विरूद्ध अपील किया गया हो, अपील की एक प्रति के बाद, उस पर अपनी टिप्पणियों के साथ प्रासंगिक अभिलेखों को, बिना किसी परिहार्य विलम्ब के साथ अपीलीय प्राधिकार से किसी निदेश का इंतजार किये बिना, अपीलीय प्राधिकार को अग्रसारित करेगा ।
155. अपील पर विचारणः- (1) निलम्बन-आदेश के विरूद्ध अपील की दशा में, अपीलीय प्राधिकार यह विचार करेगा कि नियम 137 के उपबंधों के आलोक में तथा मामलें की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निलम्बन-आदेश न्यायोचित है या नहीं और तद्नुसार वह इस आदेश की पुष्टि करेगा अथवा इसे वापस लेगा या उपांतरित करेगा ।
(2) नियम 142 में विनिर्दिष्ट शास्तियों में से कोई अधिरोपित करने वाले आदेश के विरूद्ध अपील की दशा में, अपीलीय प्राधिकार विचार करेगा किः-37 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 (क) क्या इस नियमावली में विहित प्रक्रिया का पालन किया गया है, यदि नहीं, तो क्या ऐसा अनुपालन नहीं किये जाने से भारत के संविधान के किसी उपबंध का उल्लंघन हुआ है अथवा न्याय नहीं हो पाया है;
(ख) क्या अनुशासनिक प्राधिकार का निष्कर्ष अभिलेख पर रखे साक्ष्य द्वारा समर्थित है; और (ग) क्या अधिरोपित शास्ति पर्याप्त, अपर्याप्त अथवा कठोर है; तथा (i) शास्ति की पुष्टि, वृद्धि, कमी या उसे निरस्त करते हुए; अथवा (ii) शास्ति को अधिरोपित करनेवाले या किसी अन्य प्राधिकार को, ऐसे निदेश सहित जैसा वह मामले की परिस्थिति में उचित समझे, मामला प्रेषित करते हुए आदेश पारित करेगा; परन्तु यह किः- (i) सभी मामलों में आयोग से, परामर्श किया जायेगा जहॅां ऐसा परामर्श आवश्यक हो । (ii) यदि अपीलीय प्राधिकार द्वारा अधिरोपित किये जाने हेतु प्रस्तावित बढ़ायी गयी शास्ति नियम 142 के खंड (i) से (v) में विनिर्दिष्ट शास्तियों में से एक हो तथा इस मामलें में नियम 148 के अधीन पहले से जॅांच नहीं की गयी हो, तो अपीलीय प्राधिकार, नियम 147 के उपबंधों के अध्यधीन, स्वयं ऐसी जॅांच करेगा अथवा नियम 145 के उपबंधों के अनुसार ऐसी जॅांच के लिये निदेश देगा और तत्पश्चात् ऐसी जॅांच की कार्यवाहियों पर विचारण करने तथा अपीलार्थी को नियम 146 के खंड (4) के उपबंधों के अनुसार ऐसी जॅांच के दौरान प्रस्तुत किये साक्ष्य के आधार पर प्रस्तावित शास्ति के विरूद्ध अभ्यावेदन करने का एक युक्तियुक्त अवसर देने के बाद ऐसा आदेश देगा, जो वह ठीक समझे । (iii) यदि अपीलीय प्राधिकार द्वारा अधिरोपित किये जाने हेतु प्रस्तावित बढ़ायी गयी शास्ति नियम 142 के खंड (i) से (v) में विनिर्दिष्ट शास्तियों में, से एक हो और इस मामले में नियम 145 के अधीन पहले ही जॅांच की जा चुकी हो, तो अपीलीय प्राधिकार अपीलार्थी को प्रस्तावित शास्ति के विरूद्ध अभ्यावेदन करने का एक युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् ऐसा आदेश देगा जो वह ठीक समझे; और (iv) किसी अन्य मामले में बढ़ायी गयी शास्ति अधिरोपित करनेवाला आदेश तबतक नहीं दिया जायेगा जबतक अपीलार्थी को बढ़ायी गयी शास्ति के विरूद्ध अभ्यावेदन देने का एक युक्तियुुक्त अवसर नहीं दे दिया जाता ।
(3) अपीलीय प्राधिकार मामले की सभी परिस्थितियों पर विचार करेगा तथा ऐसा आदेश देगा जो वह न्यायसंगत एवं सम्योचित समझे ।
भाग-3
स्थानातरण एवं पदस्थापन
156. राज्य सरकार द्वारा प्रतिनियुक्ति पर उपलब्ध कराये गये पदाधिकारी/ कर्मचारी का स्थानान्तरण/ पदस्थापन सम्बन्धित प्रशासनिक विभाग के सक्षम प्राधिकार द्वारा किया जायेगा ।
157. किसी कारणवश अध्यक्ष को यह विश्वास करने का यथोचित कारण उपलब्ध हो कि अमुक कर्मी की सेवा एजेन्सी के हित में नहीं है तो कारण सहित उसकी सेवा वापस करने की अनुशंसा सम्बन्धित प्रशासनिक विभाग से की जायेगी जिसपर प्रशासनिक विभाग द्वारा निर्णय लिया जायेगा ।
158. एजेन्सी कर्मियों का सामान्य स्थानान्तरण/ पदरस्थापन साल में एक बार जून माह में किया जायेगा । प्रोन्नति, कार्यहित एवं प्रशासनिक कारणों से स्थानान्तरण/ पदस्थापन कभी भी किया जा सकता है लेकिन ऐसे कारणों में सक्षम प्राधिकार स्तर से एक स्तर उपर का अनुमोदन आवश्यक होगा ।
159. पदाधिकारी/ कर्मचारी जो तीन वर्ष की अवधि एक स्थान पर पुरी कर चुके हो उनके स्थानान्तरण/ पदस्थापन हेतु संचिका में प्रस्ताव मई महीने में सक्षम प्राधिकार के समक्ष उपस्थापित की जायेगी। 160. सेवा-निवृति के अंतिम वर्ष में पदाधिकारी/ कर्मचारी द्वारा दिये गये तीन चयनित स्थानों में से किसी एक स्थान पर स्थानान्तरण/ पदस्थापन के संबंध में पद रिक्त रहने पर विचार किया जायेगा । 161. यदि कोई पदाधिकारी/ कर्मचारी स्थानान्तरण/ पदस्थापन के सम्बन्ध में कोई अभ्यावेदन देना चाहे तो 30 अप्रैल तक दिया गया अभ्यावेदन मान्य होगा । उसके उपरांत दिये गये अभ्यावेदन पर विचार नहीं38 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जुलाई 2011 किया जायेगा । साथ हीं अभ्यावेदन पर किया गया स्थानान्तरण/ पदस्थापन के संबंध में यात्रा भत्ता तथा पदग्रहण-काल अनुमान्य नहीं होगा ।
162. यदि किसी कर्मी द्वारा अपने स्थानान्तरण/ पदस्थापन के संबंध में किसी वाह्य व्यक्ति से सिफारीस कराई जाती है तो उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समीक्षोपरांत यह बात उनके चारित्री में दर्ज की जायेगी ।
163. किसी कर्मी के पत्नी द्वारा दिये गये अभ्यावेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा । 164. यदि पति एवं पत्नी दोनों एजेन्सी के कर्मी हो तो यथा संभव पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थापित किया जायेगा ।
165. किसी एजेन्सी कर्मी द्वारा सीधे विभागीय मंत्री/ प्रशासी विभाग को स्थानान्तरण/पदस्थापन के संबंध में प्रार्थना पत्र समर्पित नहीं किया जायेगा । ऐसे प्रार्थना-पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी । परन्तु एजेन्सी में किसी कर्मी द्वारा दिये गये अभ्यावेदन पर यदि कार्रवाई नहीं की जा रही है अथवा कार्रवाई में विलम्ब हो रहा है तो ऐसे मामले में प्रशासी विभाग को स्मार पत्र समर्पित किया जा सकता है ।
166. किसी पदाधिकारी/ कर्मचारी का पदस्थापन गृह जिला में नहीं किया जायेगा । 167. स्थानान्तरण/ पदस्थापन हेतु सक्षम प्राधिकार निम्नवत होंगेः-
(क) चतुर्थवर्ग कर्मी- सचिव
(ख) वर्ग-3 के कर्मी- प्रबंध निदेशक/ अध्यक्ष
(ग) कनीय अभियंता या उससे उच्च पद के कर्मी- अध्यक्ष (घ) विशेष परिस्थिति में स्थानान्तरण- बोर्ड
168. स्थानान्तरण आदेश निर्गत होने पर नियंत्री पदाधिकारी अपने अधिनस्थ कर्मी को आदेश निर्गत होने के अधिकतम तीन दिनों के अन्दर प्रभार हस्तानान्तरण सुनिश्चित कर विरमित करेंगेें ।
भाग-4
प्रभाव एवं संशोधन
169. यह नियमावली बोर्ड की स्वीकृति के उपरांत आदेश निर्गत होने की तिथि से लागू माना जायेगा ।
170. इस नियमावली में संशोधन करने के लिए बोर्ड सक्षम प्राधिकार होगा परन्तु वैसे संशोधन जिसके कार्यान्वयन में राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान का उपयोग होगा अथवा भविष्य में राज्य सरकार का वित्तीय भार बढने की संभावना पर बोर्ड में विचारार्थ रखने के पुर्व राज्य सरकार की सहमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा ।
बिहार-राज्यपाल के आदे"ा से, मो0 सोहैल, सरकार के अवर सचिव।
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अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु4ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 327-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।