(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 31 31 31 31 भािभािभािभाि 1933193319331933 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 551551551551) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, वृहःपवृहःपवृहःपवृहःपितवारितवारितवारितवार,,,, 22222222 िसत+बिसत+बिसत+बिसत+बरररर 2020202011111111 सं0 3एम-2-5वे0पु0-28/99—8824 वित्त विभाग
-------
संकल्प
21 सितम्बर 2011 विषयः—सुनिश्चित वृत्ति उन्न्यन योजना नियमावली, 2003 के नियम 4(2) का एक बार (One Time) शिथिलीकरण के संबंध में।
मूल ए0सी0पी0 नियमावली, 2003 के नियम 4 उप-नियम (2) में यह प्रावधान था कि सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से किये गये चयन के आधार पर उच्चतर पद पर की गयी नियुक्ति स्कीम के अधीन वित्तीय उन्नयन की मंजूरी के प्रयोजनार्थ सीधी नियुक्ति मानी जायेगी और निम्नतर वेतनमान में की गयी सेवा की गणना नहीं की जायेगी, अगर सुसंगत भर्त्ती नियमावली में सीधी नियुक्ति का प्रावधान किया गया हो । परन्तु यदि सुसंगत भर्त्ती नियमावली में निम्नतर वेतनमान के कर्मियों के लिए प्रोन्नति का कोटा नियत किया गया हो, तो ऐसी नियुक्ति को स्कीम के अधीन वित्तीय उन्नयन के लाभ की मंजूरी के प्रयोजनार्थ प्रोन्नति माना जायेगा और वित्तीय उन्नयन के लाभ की मंजूरी के लिए पूर्व सेवा की गणना की जायेगी।
2. ए0सी0पी0 की मूल नियमावली के नियम-3 के स्पष्टीकरण (1) में निम्नांकित प्रावधान था "दो स्तरों के पदों के संविलियन (merger) के फलस्वरूप हुए वित्तीय उन्नयन को ए0सी0पी0 स्कीम के निमित्त वित्तीय उन्नयन माना जायेगा और स्कीम के अधीन लाभ की मंजूरी पर विचार के समय इसे ध्यान में रखा जायेगा।" अधिसूचना सं01802 वि(2), दिनांक 23 मार्च 2006 की कंडिका 3 द्वारा 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 22 flrEcj 2011 3. उपर्युक्त दोनों प्रावधान लागू होने के क्रम में निजी सहायक संवर्ग में विशेष प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से नियुक्त हुए कर्मियों की तुलना में उसी संवर्ग के वैसे कर्मियों को ए0सी0पी0 का लाभ पहले प्राप्त हो रहा है, जो आषुलिपिक और निजी सहायक संवर्ग के संविलियन का लाभ प्राप्त किये थे। इसका कारण यह है कि विशेष प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से नियुक्त कर्मियों के मामले में ए0सी0पी0 की स्वीकृति हेतु कुल सेवा की गणना करने में पूर्ववर्ती पद की सेवा को नहीं जोड़ा जाना है जबकि उसी संवर्ग के वैसे कर्मियों, जो विशेष प्रतियोगिता परीक्षा में सफल नहीं हुए थे, अथवा परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे, को विशेष परीक्षा के बाद उत्क्रमण के साथ उच्चतर कोटि में संविलियन कर दिये जाने के फलस्वरूप ए0सी0पी0 की स्वीकृति हेतु पूर्ववर्ती न्यूनतर आषुलिपिक के पद पर की गयी सेवा की गणना का लाभ प्राप्त हो रहा है। यह विषय उच्च न्यायालय के समक्ष गया और सी0डब्ल्यू0जे0सी0 सं0 4944/93 (जंग बहादुर शर्मा एवं अन्य बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विशेष सीमित परीक्षा द्वारा नियुक्त निजी सहायक को आशुलिपिक/आशुटंकक पद पर नियुक्ति की तिथि से सभी लाभ देने का निर्देश दिया गया है।
4. सामान्य प्रशासन विभाग (तत्कालीन कार्मिक एवं प्रशासन सुधार विभाग) के कार्यालय आदेश सं0 06, दिनांक 10 जनवरी 1986 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा निजी सहायकों के लिए आयोजित आशुटंकक/टंककों के लिए विशेष परीक्षा के परीक्षाफल के आधार पर 20 (बीस) टंकक एवं 27 (सताईस) आषुटंकक कुल 47 (सैंतालीस) सफल उम्मीदवारों को निजी सहायक के पद पर नियुक्त किया गया था।
5. उपर्युक्त न्यायादेश के बाध्यकारी अनुपालन की स्थिति को दृष्टिपथ में रखते हुए विशेष प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा नियुक्त कर्मियों में से 27 (सताईस) निजी सहायकों को आशुटंकक के पद पर नियुक्ति की तिथि से सेवा की गणना हेतु सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन नियमावली, 2003 के नियम 4(2) का एक बार (One Time) शिथिलीकरण किया जाता है। आदेशः—आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र में जनसाधारण के सूचनार्थ प्रकाशित की जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
अरूण कुमार सिंह,
सरकार के संयुक्त सचिव।
———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 551-571+100-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in