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सं॰ 1042—गोपालगंज जिलान्तर्गत थावे में अवस्थित श्री श्री माँ दुर्गा मंदिर एक प्रसिद्ध पौराणिक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जहां सदियों से देश के विभिन्न भागों से काफी संख्या में भक्तगण श्रद्धापूर्वक दर्शन करने आते हैं । भगवती दुर्गा पहले निवर्तमान हथुआ राज की कुल देवी मानी जाती रही हैं जो परमसिद्ध दलित संत रहषु स्वामी के आह्वान पर यहां आयी थीं । इस मंदिर का जीर्णोद्धार गोपालगंज जिले के पूर्व जिलाधिकारी श्री एच0 आर0 श्रीनिवास ने जनता के आर्थिक सहयोग से काफी पैसा लगा कर कराया था ।
जनवरी, 2007 में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम में व्यापक संशोधन किया गया और यह प्रावधान बनाया गया कि जिन मंदिरों में सार्वजनिक चढ़ावा चढ़ता हो या दान लिया जाता हो वे सार्वजनिक मंदिर की श्रेणी में आयेंगे । इस संशोधन के बाद इस मंदिर की जांच गोपालगंज के पूर्व जिलाधिकारी द्वारा की गयी और यहां चढ़ावा तथा दान प्राप्त करने के कारण इस कार्यालय की अधिसूचना संख्या 2255, दिनांक 2 मार्च 2010 द्वारा इसे सार्वजनिक न्यास घोषित किया गया । इस अधिसूचना का प्रकाशन गोपालगंज जिला गजट के असाधारण अंक 01 में दिनांक 17 मार्च 2010 को प्रकाशित किया गया । उसमें इस बात का उल्लेख था कि यदि किसी को कोई आपत्ति हो तो प्रकाशन के 30 दिनों के अंदर वे आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं और ''उनकी आपत्तियों पर सम्यक विचारोपरांत इस न्यास की सुव्यवस्था एवं संचालन तथा सम्यक विकास के लिए न्यास समिति गठन करने का निर्णय लिया जायेगा ।'' इस पर बहुत से लोगों की आपत्तियां आयीं । इसकी सुनवाई 23 जुलाई 2010 को अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल एवं सेवा-निवृत्त न्यायमूर्ति श्री पी0 के0 सिन्हा की पीठ द्वारा हुई । इसमें बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के प्रावधानों का विष्लेषण करने के बाद यह निर्णय लिया गया कि अधिनियम की धारा-28 (2) (प) के निर्णय की समीक्षा नहीं की जा सकती क्योंकि यह इस प्रकार उल्लिखित है -
''ऐसे सभी विवादों में इस अधिनियम की धारा-2 (ठ) के अधीन परिभाषा के अनुसार निर्णय लेना कि क्या कोई न्यास सार्वजनिक न्यास है या निजी और पर्षद का यह आदेश तबतक लागू रहेगा, जबतक कि उसे किसी सक्षम न्यायालय द्वारा अपास्त न कर दिया जाये ।''
अतः पीठ की ओर से यह बतलाया गया कि आदेश जो पारित हुआ वह तो तबतक लागू रहेगा जबतक किसी सक्षम न्यायालय द्वारा अपास्त नहीं किया जाये, किंतु न्यास समिति के गठन एवं सम्यक संचालन के लिए वे लोग अपना सुझाव दे सकते हैं । तत्पष्चात् प्रशासन एवं समाज के अनेक वर्गों के महानुभावों के साथ विचार-विमर्श के बाद इस न्यास समिति के लिए एक योजना का निरूपण गया और उसके सम्यक संचालन के (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 31 अ*तूबर 2011
2 लिए न्यास समिति के गठन का आदेश अतीत में दिया गया । किंतु जब जिला-गजट में प्रकाषन के लिए इसे भेजा गया, तब तत्कालीन जिलाधिकारी, गोपालगंज ने उसे प्रकाषित नहीं कर एक पत्र 1434/सी0, दिनांक 11 सितम्बर 2010 पर्षद् कार्यालय को भेजा । जब इस कार्यालय के पत्रांक 965, दिनांक 23 सितम्बर 2010 द्वारा कुछ बिन्दुओं पर उनका मंतव्य मांगा गया, तब कोई जवाब उन्होंने नहीं दिया । इस बीच इस अधिसूचना को पर्षद की बैठक में मैंने स्थगित करवाया था । जिलाधिकारी को इस कार्यालय के पत्रांक 391, दिनांक 8 जून 2011 द्वारा पुनः स्मार दिया गया । दूरभाष पर भी अनेक बार सम्पर्क किया गया। जब जिलाधिकारी से इस पर कोई उत्तर नहीं मिला, तब दिनांक 23 सितम्बर 2011 की पर्षदीय बैठक में इस पर विचार किया गया और आष्विन नवरात्रि के पूर्व आदेष पारित करने का निर्णय लिया गया । उसी क्रम में येाजना के निरूपण एवं न्यास समिति के गठन की यह अधिसूचना जारी की जा रही है । उप-विधि में संषोधन के बाद यह अधिसूचना अब राज्य-गजट में छपेगी । उक्त परिस्थिति के आलोक में मैं, किशोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद उक्त अधिनियम की धारा-32 के तहत इस न्यास की सुव्यवस्था, संचालन एवं सम्यक विकास हेतु एक योजना का निरूपण निम्न प्रकार करता हूँ :-
(1) इस योजना का नाम ''श्री श्री माँ दुर्गा मंदिर, योजना, थावे,'' होगा । इसको मूर्त्त रूप देने के लिए एक समिति का गठन होना आवश्यक है जिसका नाम'' श्री श्री माँ दुर्गा मंदिर न्यास समिति'' होगा।
(2) इस न्यास समिति का मुख्य कर्तव्य होगा कि भगवती दुर्गा माँ की पूजा, अर्चना, राग-भोग, उत्सव समैया परंपरागत ढंग से शास्त्रीय विधान से, किंतु युग धर्म की आवश्यकताओं को देखते हुए किया जायेगा ।
(3) इस मंदिर के दर्शन में भक्तों को बहुत असुविधा होती है । जब ये दर्शन को जाते हैं तो अधिकांषतः इनका आर्थिक किया जाता है । बहुत सारे भक्तों की षिकायत है कि काफी रूपये पहले दिये बिना मन्दिर में प्रवेष नहीं करने दिया जाता है। दर्षन के बाद भी प्रचुर दक्षिणा देने के लिए परेषान किया जाता है। इस शोषण को समाप्त करने के लिए न्यास समिति कारगर कदम उठायेगी ।
(4) मंदिर में प्राप्त होने वाली समग्र राशि के सम्यक लेखा का संधारण किया जायेगा और पास के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर न्यास की आय का संधारण होगा । न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा । अभी मंदिर में प्राप्त चढ़ावे को कुछ लोग अपनी जेबों में रख लेते हैं, उस प्रथा को समाप्त किया जायेगा और मंदिर के बाहर कुछ लोग जो अवैध ढंग से रसीद काट कर अनधिकृत ढंग से चंदा वसूलते हैं उसे भी समाप्त किया जायेगा। मंदिर की आय का आकलन करने के बाद उस आय का कुछ अंश मंदिर के पंडा समाज को उनके कल्याण हेतु दिया जायेगा ।
(5) मंदिर एवं पूरे परिसर को पूरा स्वच्छ रखा जायेगा और यात्रियों को दर्शन एवं अन्य कार्यों में बेहतर सेवा सुलभ करायी जायेगी । मंदिर का वातावरण व्यावसायिक नहीं बनाकर आध्यात्मिक बनाया जायेगा ।
(6) मंदिर के दर्शन में श्रद्धालु भक्तों के साथ किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं बरता जायेगा । भक्तों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जायेगा ।
(7) न्यास समिति मंदिर परिसर में कोई अतिक्रमण हो तो उसको हटाने के लिए कानूनी कार्रवाई करेगी और यदि किसी और प्रकार से भूमि का अन्य-संक्रमण ( alienation) हुआ हो, तो उसको भी वापस लेने की चेष्टा करेगी ।
(8) अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में एक बैठक बुलायेंगे । बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे। निर्णय बहुमत के आधार पर होगा । बराबरी के मतों की स्थिति में अध्यक्ष का निर्णायक मत होगा । सचिव न्यास समिति के कार्यपालक अधिकारी होंगे तथा समिति द्वारा पारित प्रस्तावों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे । उनके इस कार्य में सह-सचिव सहायक होंगे । कोषाध्यक्ष मंदिर के आय-व्यय के संघारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे ।
(9) न्यास समिति के सम्यक संचालन के लिए अन्य बिन्दुओं पर न्यास समिति अपनी विस्तृत योजना एवं नियमावली बनाकर पर्षद के पास अनुमोदन के लिए भेजेगी।
यह न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के प्रावधानों के तहत बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के तहत कार्यरत रहेगी और भक्तों के हित का सर्वोपरि कल्याण रखेगी।
(10) यह योजना 28 सितम्बर 2011 से प्रवृत होगी । 3
(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 31 अ*तूबर 2011 न्यास समिति में सरकारी पदाधिकारियों एवं श्री कौस्तुभमणि शाही को छोड़कर अन्य सदस्यों का कार्यकाल 05 वर्षों का होगा ।
न्यास समिति की योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन किया जाता है ।
1. श्री सुनील कुमार, भा0 पु0 से0(नामतः) पुलिस उप महानिरीक्षक, सारण (छपरा) प्रमंडल - अध्यक्ष 2. अनुमंडल पदाधिकारी, गोपालगंज - पदेन सचिव 3. श्री कौस्तुभमणि शाही, हथुआ राज, हथुआ जिला-गोपालगंज - सह-सचिव 4. श्री दारोगा सिंह, सेवा-निवृत मुख्य प्रबन्धक, सेन्ट्रल बैंक, रामनरेष नगर, गोपालगंज - कोषाध्यक्ष 5. श्री ब्रह्म दत्त ओझा, संस्कृत विद्वान, जिला-गोपालगंज - सदस्य 6. श्री प्रदीप कुमार दास, रहषू स्वामी मंदिर, ग्रामपो0-थावे, जिला-गोपालगंज - सदस्य 7. श्री रूदल प्रसाद, अधिवक्ता, ग्राम-रेवतीथ, बैकुंठपुर, गोपालगंज - सदस्य 8. डा0 शषि शेखर सिंह, अस्पताल मोड़, गोपालगंज - सदस्य 9. श्री गोपीचन्द यादव, अधिवक्ता, हरिबासा, थानाजिला-गोपालगंज - सदस्य इसके अतिरिक्त दो और सदस्यों का मनोनयन बाद में होगा। पंडा समाज द्वारा प्रस्ताव मिलने पर उनके प्रतिनिधि का समावेष समिति में किया जायेगा।
न्यास समिति अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित उक्त योजना के क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए उत्तरदायी होगी ।
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
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अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 598-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in