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सं0 22/नि0सि0(भाग0)-09-08/2007/1255—श्री विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, सिकन्दरा को वर्ष 2007-08 के उक्त पदस्थापन अवधि में लोअर कियुल वैली योजना के बाये नहर प्रणाली के गरसंडा वितरणी में सही ठंग से मेजरमेंट नहीं लेने, नियंत्री पदाधिकारी के आदेश का उल्लंधन करने, 1.49 करोड़ रुपये का चेक प्रमण्डल का प्रभार सौपने के बाद बैक डेट में हस्ताक्षरित करने, आर0 एस0 भी0 वाई0 (राष्ट्रीय सम विकास योजना) के तहत लोअर कियुल वैली योजना के बाये नहर प्रणाली के कार्यो का गलत प्रयोजन से तथा बिना विभागीय अनुमति के कार्य कराने आदि आरोपों के लिये विभागीय अधिसूचना 1075, दिनांक 21 नवम्बर 2007 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1099, दिनांक 3 दिसम्बर 2007 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ किया गया। (2) विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर किया गया एवं समीक्षोपरान्त श्री सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को आर0 एस0 भी0 वाई0 (राष्ट्रीय सम विकास योजना) के अन्तर्गत विभागीय स्वीकृति के बिना लोअर कियुल वैली योजना के वाये नहर प्रणाली में योजनाओं का कार्य कराने का दोषी पाया गया। फलतः सरकार के स्तर पर श्री सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गयाः-
1. एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। 2. निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ देय नहीं होगा, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशनादि के लिये की जायेगी।
सरकार का उक्त निर्णय विभागीय अधिसूचना सं0 62, दिनांक 13 फरवरी 2009 द्वारा श्री सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को संससूचित किया गया। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 नव+बर 2011 कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 45 बी0 में अन्तर्निहित प्रावधानों के अन्तर्गत सम्परिवर्तित करते हुए विभागीय पत्रांक 865, दिनांक 8 जून 2010 द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा किया गया। (4) श्री विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा, सेवा-निवृत कार्यपालक अभियन्ता से विभागीय पत्रांक 865, दिनांक 8 जुन 2010 के प्रसंग में दिनांक 15 जून 2010 का प्राप्त उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि श्री सिन्हा द्वारा अपने उत्तर में उन्हीं तथ्यों को दोहराया गया है जो उनके द्वारा पूर्व में संचालित विभागीय कार्यवाही के स्पष्टीकरण में दिया गया था।
फलतः सरकार के स्तर पर श्री विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा, सेवा-निवृत कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया हैः-
1. तीन प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिये रोक। 2. निलंबन अवधि में जीवन यापन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशनादि के प्रयोजनार्थ की जायेगी।
(5) कंडिका-4 में अंकित दण्ड पर माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। (6) कंडिका-4 में अंकित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग का सहमति भी प्राप्त है। उपर्युक्त कंडिका-4 में अंकित दण्ड श्री विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा, सेवा-निवृत कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता हैं।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, सरकार के उप-सचिव।
———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 640-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in