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अधिसूचना
9 सितम्बर 2011
सं0 22/नि0सि0(पट0)-3-07/2005/1152—श्री रियाज अहमद आतिश, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, फुलवरिया नहर प्रमण्डल, सिरदला, नवादा/तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन पटना सम्प्रति अधीक्षण अभियन्ता (सेवा-निवृत) के विरुद्ध उक्त पदस्थापन अवधि में विभिन्न आरोपों के संबंध में तीन अलग अलग विभागीय कार्यवाही संचालित की गई जिसका सार निम्नवत् हैः-
(क) संचिका सं0 22/नि0सिं0(पट0)03-07/2005-श्री आतिश के विरुद्व कार्यपालक अभियन्ता, फुलवरिया नहर प्रमण्डल, सिरदला, नवादा में पदस्थापन काल से संबंधित श्री रामदेव प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता सेवा-निवृत से प्राप्त परिवाद पत्र की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित निम्न आरोपों के लिये श्री आतिश पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी।ः- (i) व्यक्तिगत दूरभाष सं0 25090 के कॅाल शुल्क 5,934 रु0 (पॅाच हजार नौ सौ चौतीस रुपये) का भुगतान सरकारी मद से करना।
(ii) अधीनस्थ सहायक अभियन्ता के एक ही वेतन को दो बार निकासी करने के फलस्वरूप उस अधिकारी विशेष के सामान्य भविष्य निधि मद में 660 रु0 (छः सौ साठ रु0) की कटौती राशि करवाकर सरकार इतनी ही राशि का वित्तीय धाटा लगवाना।2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 नव,बर 2011 (iii) अनुसेवकों को वर्दी आपूर्ति में घोटाला करना। दस (10) व्यक्तियों को 2,817 रु0 (दो हजार हजार आठ सौ सतरह रु0) की देय वर्दी आपूर्ति पर 10,000 रु0 (दस हजार) रु0 का भुगतान दिखाना। इस तरह सरकार को 7,183 रु0 (सात हजार एक सौ तिरासी रु0) की वित्तीय क्षति पहुॅचाना।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड हेतु श्री आतिश से द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी। श्री आतिश से प्राप्त द्वितीय कारण-पृच्छा के जबाव की विभागीय समीक्षा की गयी एवं उक्त तीनों आरोपों में से मात्र दो आरोप सं0-(i) एवं (iii) प्रमाणित पाया गया एवं प्रमाणित आरोपों के लिए पांच (5) प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
(ख) संचिका सं0 22/नि0सिं0(पट0)03-09/2005-श्री आतिश के विरुद्व दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरी बांध एवं बादलगढ़ रोहतास स्थल पर दो अद्द हाई मास्ट प्रकाश स्तम्भ की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन से संबंधित निविदा निष्पादन में कतिपय अनियमितता बरतने का आरोप है। तत्संबंधी प्रथम द्रष्टया प्रमाणित अरोपों के लिए आतिश पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त श्री आतिश के विरुद्व निम्नलिखित आरोप प्रमाणित पायेः-
(1) वर्ष 2003-04 में दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरीबांध एवं बादलगढ़ रोहतास स्थल पर दो अद्द हाई मास्ट लाईट की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन हेतु निविदाओं के निस्तार में अनियमितता बरतने, दर निर्धारण में गड़बड़ी करने एवं विभागीय क्रय समिति के समक्ष पूर्ण तथ्यों को नहीं रखने के पीछे सरकार को वित्तीय क्षति पहुचाने की आपराधिक मंशा थी रु0 4,99,777 के स्थान पर रु0 6,55,544 की प्रति सेट की दर इन्होंने अनुमोदित किया एवं अतिरेक भुगतान कराया।
(2) जॅाच पदाधिकारी का स्पष्ट मंतव्य है कि दिनांक 17 दिसम्बर 2003 को आयोजित क्रय समिति के लिए तैयार संलेख में पूर्व के आमंत्रित दो निविदाओं के दर को उद्धत नहीं करना एवं मौखिक रूप से इसकी जानकारी क्रय समिति को नहीं देना, इनके आपराधिक मंशा को प्रमाणित करता है। इसका अभिप्राय आपूर्तिकत्र्ता मेसर्स एक्सेल को आर्थिक लाभ पहुॅचाना था। इस कारण विभाग को प्रति सेट 1,55,000 रु0 की दर से दो हाई मास्ट लाईट की आपूर्ति पर 3,10,000 (तीन लाख दस हजार) रु0 का घाटा विभाग को उठाना पड़ा।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभाग द्वारा दस (10) वर्षों तक शत-प्रतिशत पेंशन के भुगतान पर रोक का दण्ड प्रस्तावित किया गया।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड पर श्री आतिश से द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी। श्री आतिश से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जबाब की विभागीय समीक्षा की गयी एवं द्वितीय कारण-पृच्छा के उतर से असहमत होते हुए पूर्व के प्रस्तावित दण्ड को यथावत् रखने का निर्णय लिया गया।
(ग) संचिका सं0-22/नि0सिं0(पट0)03-11/2005-श्री आतिश, तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन को उनके पदस्थापन अवधि में निम्न आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी'-
(i) मे0 केशरी बायर प्रोडक्ट्स प्रा0 लि0, मोगलपुरा ,पटना सिटी को वर्ष 2004 में विभिन्न प्रमण्डलों के लिए बी0 ए0 बायर आपूर्ति करने का आदेश दिया गया जिसका क्रयादेश सं0 44, दिनांक 31 जनवरी 2004 था, जिसमें जल पथ प्रमण्डल, गया के लिए 27 मे0टन बी0 ए0 बायर की आपूर्ति 30,650 रु0 प्रति मे0टन की दर से करना था। उनके द्वारा इस क्रयादेश को पत्रांक 626, दिनांक 24 सितम्बर 2009 द्वारा अांशिक संशोधन करते हुए 17.30 मे0 टन बी0 ए0 बायर आपूर्ति करने के लिए स्वीकृत दर में 4 प्रतिशत अधिक एक्साइज ड्यूटी की वृद्वि3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 uoEcj 2011 करके (अर्थात रु0 1,226 प्रति मे0टन कुल रु0 21,209.80 (इक्कीस हजार दो सौ नौ रु0 अस्सी पै0) का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया गया, जो नियमानुकूल नहीं है।
(ii) उसी फर्म को वर्ष 2004 में क्रयादेश सं0 160, दिनांक 15 जून 2004 द्वारा शीर्ष कार्य प्रमण्डल, वीरपुर एवं गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, दीधा को 140 मे0टन बी0ए0 वायर आपूर्ति करने का क्रयादेश दिया गया जिसके लिए स्वीकृत दर 30,500 रु0 प्रति मे0टन था। इस क्रयादेश को क्रयादेश सं0 248, दिनांक 3 सितम्बर 2004 द्वारा संशोधित करते हुए 134.63 मे0टन बी0 ए0 बायर आपूर्ति करने के लिए स्वीकृत दर प्रति मे0 टन में 4 प्रतिशत अधिक एक्साइज ड्यूटी के वृद्वि करके कुल 1,64,248 रु0 का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया गया जो नियमानुकूल नहीं है। इस प्रकार कुल 1,85,458.40 रु0 (एक लाख पचासी हजार चार सौ अठावन रु0 चालीस पै0) अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश उनके द्वारा दिया गया, जिसके लिए वे दोषी है।
जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड पर श्री आतिश से द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी। द्वितीय कारण-पृच्छा के जबाव की विभागीय समीक्षा की गयी एवं द्वितीय कारण-पृच्छा के उतर से असहमत होते हुए कुल 1,80,937=62 रु0 (एक लाख अस्सी हजार नौ सौ सैतीस रु0 बासठ पैसे) की सरकारी क्षति की वसूली तक पेंशन से 50 प्रतिशत की राशि की वसूली तथा 5 वर्ष तक 20 प्रतिशत पेंशन पर रोक एवं एक वर्ष तक 5 प्रतिशत पेंशन पर रोक का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
(2) उपर्युक्त तीनों संचिकाओं में अलग-अलग विभागीय कार्यवाहियों के प्रतिफलों को एक साथ समेकित कर विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी और समीक्षा के क्रम में पाया गया कि श्री आतिश द्वारा अपने सेवाकाल में मनमाने ठंग से विभागीय कार्यो का सम्पादन किया जाता रहा है एवं सरकार को इनके कृत्यों से वित्तीय क्षति पहुॅची है जबकि इन्हें समय रहते हुए तत्कालीन आयुक्त एवं सचिव द्वारा आगाह भी किया गया था।
(3) उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री रियाज अहमत आतिश के विरुद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 में अन्तर्विहित प्रावधानों के अन्तर्गत संचालित विभागीय कार्यवाही एवं पूछी गयी द्वितीय कारण-पृच्छा से संबंधित प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त श्री आतिश के विरुद्ध सभी आरोपों को समेकित करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है, जिस पर विभागीय मंत्री एवं मुख्य सचिव, बिहार के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री बिहार का अनुमोदन प्राप्त है।
''आदेश निर्गत की तिथि से पूर्ण पेंशन पर दस (10) वर्षो तक रोक।''
(4) सरकार के उक्त निर्णय में बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त हैं।
(5) सरकार का उक्त निर्णय श्री रियाज अहमद आतिश सेवा-निवृत अधीक्षण अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
भरत झा,
सरकार के उप-सचिव।
———— अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु4ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 648-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in