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असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 26262626 काित ककाित ककाित ककाित क 1933193319331933 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 666657575757) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, वृहःपवृहःपवृहःपवृहःपितितितितवारवारवारवार,,,, 17171717 नव,बनव,बनव,बनव,बरररर 2020202011111111 जल संसाधन विभाग ------- अधिसूचना 29 जुलाई 2011
सं0 22/नि0सि0(यॅा0)-132/94/937—श्री श्रीनेत राय, कार्यपालक अभियन्ता (सेवा-निवृत्त) द्वारा यांत्रिक प्रमण्डल, मोहम्मदगंज (नया नाम- औरंगा निर्माण यांत्रिक प्रमण्डल, पॅाकी) के पदस्थापन अवधि माह अगस्त 88 से दिlम्बर 89 के बीच की गयी अनियमितताओं के लिए उनके सेवा-काल में ही विभागीय संकल्प सं0 1620, दिनांक 28 जुलाई 1990 द्वारा विभागीय कार्यवाही चलायी गयी जो इनकी सेवा-निवृति तक पूरी नहीं हो सकी। विभागीय कार्यवाही में इन्हें दोषी पाया गया। सरकार द्वारा सम्यक समीक्षोपरान्त श्री राय पर निम्न आरोप प्रमाणित पाये गयेः- (1) 17.52 लाख रुपये (सतरह लााख बावन हजार) का क्रय श्री नेत राय, कार्यपालक अभियन्ता द्वारा बिना बजट, बिना अवंटन बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति एवं बिना आवश्यकता के किया गया।
(2) 196 अद्द सामग्रियों का डी0 जी0 एस0 डी0 से क्रय उनके द्वारा बिना आवश्यकता के किया गया। उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए इनसे विभागीय पत्रांक 538, दिनांक 15 फरवरी 1997 द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी तथा उनसे प्राप्त उतर की पुर्नसमीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त उपर्युक्त आरोपों के लिए दोषी पाया गया। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 नव,बर 2011 उपर्युक्त दोनों दण्डादेशें के विरूद्व श्रीनेत राय द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0 10101/97 दायर किया गया। उक्त वाद में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 17 अगस्त 2010 को न्याय निर्णय पारित किया गया। न्याय निर्णय की कंडिका-8 में एनेक्सचर 12 एवं 13 को निरस्त करते हुए मामले को अनुशासनिक प्राधिकार को रिमाड करते हुए यह स्वतंत्रता दी गयी है कि विभागीय कार्यवाही में पाये गये तथ्यों से संबंधित संचालन पदाधिकारी के जॅाच प्रतिवेदन से असहमति के विन्दु पर साक्ष्य के साथ याचिकत्र्ता को कारण पृच्छा/सूचना निर्गत की जाए तथा अगर आवेदक द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं हो तो द्वितीय कारण पृच्छा करते हुए निर्णय लिया जाए।
तद्नुसार विभागीय अधिसूचना, ज्ञापांक 1929, दिनांक 22 दिसम्बर 2010 द्वारा विभागीय आदेश सं0 771, दिनांक 26 अगस्त 1997-सह-पठित ज्ञापांक 2577, दिनांक 26. अगस्त 1997 एवं विभागीय आदेश ज्ञापांक 1792, दिनांक 25 अगस्त 1995 को इस शर्त्त के साथ निरस्त किया गया कि उक्त आदेश इस मामले में की जानेवाली द्वितीय कारण-पृच्छा के फलाफल से प्रभावित होगा।
कारण-पृच्छा से संबंधित पत्रांक 14, दिनांक 05 जनवरी 2011 श्री राय को दिनांक 19 जनवरी 2011 को विशेष दूत के माध्यम से हस्तगत कराया गया। पत्र में जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय निर्धारित था परन्तु श्री राय द्वारा कोई उत्तर प्राप्त नहीं होने पर विभागीय ज्ञापांक 190, दिनांक 18 फरवरी 2011 द्वारा प्रेस विज्ञप्ति भी प्रकाशित कराई गई। दिनांक 22 फरवरी 2011 को ''प्रभात खबर'' एवं दिनांक 23 फरवरी 2011 को दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशन के बाद भी श्री राय द्वारा कारण-पृच्छा का कोई जवाब नहीं दिया गया।
उपर्युक्त के आलोक में सरकार द्वारा समीक्षोपरान्त एवं पूर्ण विचारोपरांत, और चूंकि आरोप प्रमाणित हुए जिसके लिए वृहत दंड का समाधान हुआ, अतः श्री नेत राय को निम्नलिखित सजा देने ''पूर्ण पेंशन पर सदा के लिए रोक'' का निर्णय लिया गया है।
श्री राय को एवं सभी संबंधित को यह निर्णय संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, सरकार के उप-सचिव।
———— अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु4ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 657-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in