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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 17 November 2011

Published 17 November 2011

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2011-11-17.663
Languages
English, Hindi
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सामग्रियों की आपूर्ति अपैल 89 से अगस्त 89 के बीच की गयी। कार्यपालक अभियन्ता श्री कृष्ण कुमार कमल द्वारा उक्त सामग्रियों के क्रयादेश की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी। उप महालेखाकार अंकेक्षण ने अपने अर्द्वसरकारी पत्रांक 577 दिनांक 12 सितम्बर 1990 द्वारा मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी को उक्त क्रय में अनियमितता की जानकारी दी। उक्त मामले की जॅाच अधीक्षण अभियन्ता, गंडक रूपांकण एवं गुण नियंत्रण अंचल, मोतिहारी द्वारा की गयी। जॅाच के दौरान कार्यपालक अभियन्ता श्री कमल के विरुद्ध अनिष्ट मंशा से पे्ररित होकर खास फार्म को लाभ पहुॅचाने के लिए रू0 10.62 लाख का क्रय आदेश बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति के डी0 जी0 एस0 एण्ड डी0 दर के माध्यम से निर्गत करने, इस मद में 98 प्रतिशत भुगतान डी0 जी0 एस0 एण्ड डी0 दर के माध्यम से करने तथा तत्संबंधी अभिलेखों को गायब कराने आदि आरोप प्रमााणित पाये गये। इन प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय आदेश सं0 31, दिनांक 20 फरवरी 1991 द्वारा श्री कमल को निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प सं0 789, दिनांक 15 मार्च 1991 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत जॅाच प्रतिवेदन में आरोप प्रमाणित पाया गया, जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सभी विन्दुओं के समीक्षोपरान्त श्री कमल के विरुद्व निम्नांकित आरोप प्रमाणित पाये गयेः- (1) क्रय में क्रय संबंधी नियमों की अवहेलना की गयी। (2) बिना आवश्यकता के सामग्रियों का क्रय किया गया, जिसके फलस्वरूप सामग्रियों का व्यवहार नहीं हुआ। (3) लोकनिधि से 10.62 लाख रुपये का अनिष्ट मंशा से निरर्थक व्यय कर इतनी बड़ी राशि का अनावश्यक व्यय इस बात का घोतक है कि श्री कमल द्वारा यह कार्य निजी स्वार्थ से पे्ररित होकर धनार्जन की मंशा से किया गया, जिससे घोर कदाचार प्रमाणित होता है। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 नव+बर 2011 उक्त आरोपों के लिए बर्खास्तगी का दण्ड अनुमोदन किये जाने के परिपे्रक्ष्य में श्री कमल से द्वितीय कारण पृच्छा विभागीय पत्रांक 1802, दिनांक 20 जून 1994 द्वारा पूछा गया तथा उनसे स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने की स्थिति में मामले के समीक्षोपरान्त श्री कमल उक्त सभी आरोपों एवं राजकीय कोष की क्षति पहुचाने, अनावश्यक खरीद करने, कागजात गायब कराने आदि आरोपों के लिए दोषी पाये गये। अतः राज्य सरकार द्वारा श्री कमल को गंभीर कदाचार, घोर अनियमितताओं यथा राजकीय धन का अपव्यय, अनिष्ट मंशा एवं कागजात गायब करने, क्रय में क्रय संबंधी नियमों की अवहेलना करने एवं घोर अनुशासनहीनता आदि प्रमाणित आरोपों के लिए दोषी पाये जाने के फलस्वरूप विभागीय पत्रांक 351, दिनांक 14 फरवरी 1998 सह पठित ज्ञापांक 734, दिनांक 14 फरवरी 1998 द्वारा श्री कमल को बिहार सिविल सर्विसेज (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) रूल्स के नियम-49 के तहत आदेश निर्गत की तिथि से सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय संसूचित किया गया। उक्त आदेश के विरुद्व श्री कमल के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0 2486/98 दाखिल किया गया। याचिका के लंबित अवधि में ही श्री कमल की मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु के पश्चात उनकी पत्नी श्रीमती संध्या देवी एवं तीन पुत्र क्रमशः श्री राकेश रंजन, श्री नीलकमल एवं श्री राजकमल का नाम वादी के रूप में आई0ए0नं0-601/08 के आधार पर दर्ज हुआ। माननीय उच्च न्यायालय, पटना ने दिनांक 7 अक्तूबर 2010 को पारित अपने न्याय निर्णय में श्री कमल के विरूद्व विभाग द्वारा निर्गत दण्डादेश को समानुपातिक सिद्वान्त के विपरीत बताते हए इसे रद्व कर दिया है तथा स्व0 कमल की मृत्यु को ध्यान में रखते हुए मामले को फिर से विचार कर दण्ड के संबंध में आदेश की प्राप्ति की तिथि से छः माह के अन्दर निर्णय लेने का निदेश दिया है। (2) एक अन्य मामले में श्री कृष्ण कुमार कमल, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता,यांत्रिक के विरुद्व दुर्गावती भीतरीबॅाध परियोजना में कार्यरत मिचीगन स्क्रेपर मशीन की मरम्मती में की गयी कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना सं0 1618, दिनांक 8 अगस्त 1996 द्वारा उन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गयाः- (1) निन्दन की सजा, जिसकी प्रविष्टि चारित्री वर्ष 1987-88 में की जायेगी। (2) सात वार्षिक वेतनवृद्वियों असंचयात्ममक प्रभाव से रोक। (3) राज्य सरकार की हुई क्षति के लिए प्रतीक के तौर पर रु0 46,113 (छियालीस हजार एक सौ तेरह रुपये मात्र) की वसूली श्री कमल के वेतन से दो हजार रुपये प्रतिमाह की दर से 23 माह तक तथा शेष राशि 113 (एक सौ तेरह रुपये) की वसूली चौबीसवें माह में की जायेगी। उक्त दण्डादेश के विरुद्व श्री कमल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-8532/96 दायर किया गया। सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-8532/96 में दिनांक 2 सितम्बर 1998 को पारित अन्तरिम आदेश के आलोक में विभागीय आदेश सं0 1398, दिनांक 27 नवम्बर 2008 सह पठित ज्ञापांक 3439, दिनांक 27 नवम्बर 1998 द्वारा 46,113 रु0 की राशि की वसूली अगले आदेश तक स्थगित रखने का आदेश निर्गत है तथा शेष बाते यथावत रहने का आदेश निर्गत है। सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-8532/96 में दिनांक 9 नवम्बर 2010 को पारित आदेश में याचिका को निरस्त कर दिया गया है।

वर्णित स्थिति में स्व. कमल से संबंधित उपरोक्त दोनों मामलों को समेकित करते हए उनके विरुद्ध निर्गत विभागीय आदेश सं0 351-सह-पठित ज्ञापांक 734, दिनांक 14 फरवरी 1998 एवं विभागीय अधिसूचना सं0 1618, दिनांक 8 अगस्त 1996 को निरस्त करते हुए निम्न निर्णय लिया गया हैः-

1. बर्खास्तगी की तिथि से अनिवार्य सेवानिवृत्ति। 2. देय पेंशन राशि से एक मुश्त 46,113 रु0 (छियालीस हजार एक सौ तेरह रुपये मात्र) की वसूली (अगर इस राशि की वसूली पूर्व में नहीं की गई हो।)

सरकार का उक्त निर्णय स्व0 कमल की पत्नी श्रीमती संध्या देवी एवं उनके तीनों पुत्र क्रमशः श्री राकेश रंजन, श्री नील कमल एवं श्री राजकमल को संसूचित किया जाता हैं।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, सरकार के उप-सचिव।

———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 663-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 17 November 2011. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2011-11-17.663/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2011-11-17.663.