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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 24 November 2011

Published 24 November 2011

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2011-11-24.677
Languages
English, Hindi
िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

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सं0 निग/सारा-3 (एन0एच0) (एस0)-29/2006-9533(एस)—श्री सुरेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-1, भागलपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, भवन निरूपण अंचल-2, पटना द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-1, भागलपुर के पदस्थापन काल में भागलपुर और कहलगॉव के बीच गेरूआ नदी पर निर्मित पीपा पुल की सुरक्षा एवं संधारण में घोर लापरवाही बरते जाने, उपायुक्त साहेबगंज के स्तर से अपेक्षित मदद मिलने पर भी पीपा पुल के पुनस्र्थापन एवं भागलपुर वापस ले जाने में कोई अभिरूचि नहीं दिखाए जाने के कारण लगभग एक माह तक भागलपुर का सम्पर्क कहलगॉव से टूटा रहा एवं आवागमन बाधित होने से जनसाधारण को कठिनाईयों का सामना करना पड़ा तथा इससे चुनाव कार्य में भी बाधा उत्पन्न हुआ। श्री प्रसाद द्वारा बरती गयी उक्त लापरवाही एवं अकर्मण्यता के लिए उन्हें अधि0सं0 11930 (एस), दिनांक 17 अक्तूबर 2006 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक 13197 (एस), दिनांक 25 नवम्बर 2006 द्वारा चार आरोपों के लिए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

2. श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में उनके विरूद्ध गठित चार आरोपों में से किसी भी आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के विभागाीय समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न कर एवं असहमति के बिन्दुओं को अंकित करते हुए विभागीय पत्रांक-3455 (एस) दिनांक 13 अप्रील 2009 द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी। 3. श्री प्रसाद के पत्रांक-शून्य दिनांक 24 अप्रील 2009 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा में उनके द्वारा मुख्य रूप से कतिपय नियमों का हवाला देते हुए इसकी वैधता पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को विभागीय समीक्षा में निम्नांकित कारणों से स्वीकार योग्य नहीं पाया गया :-

(क) द्वितीय कारण-पृच्छा के साथ संलग्न जिलाधिकारी, भागलपुर के पत्रांक-2152, दिनांक 07 अक्तूबर 2006, आरक्षी अधीक्षक कटिहार के पत्रांक-3244, दिनांक 01 अक्तूबर 2006, जिला पदाधिकारी, कटिहार के पत्रांक-3069/सी0, दिनांक 04 अक्तूबर 2006 आरोपित श्री सुरेन्द्र प्रसाद को उपलब्ध कराया गया था और उक्त पत्रों से स्पष्ट है कि पूरे प्रकरण में इन्होंने अपने कार्यों एवं दायित्वों का निर्वहन सतही ढंग से किया जिसके फलस्वरूप बहे हुए पुल का पुनस्र्थापन ससमय नहीं किया जा सका। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 24 नव+बर 2011

(ख) मात्र एल0सी0टी0 घाट मैनेजर को रु0 7,025 उपलब्ध करा देने से ही वे अपने दायित्वों से ये मुक्त नहीं हो जाते, जबकि उपायुक्त, साहेबगंज ने एल0सी0टी0/मोटर बोट की व्यवस्था की थी, तो उसके द्वारा कार्यान्वयन सही समय पर कराया जाना उनका दायित्व बनता था, क्योंकि इस कार्य हेतु वे ही सक्षम प्राधिकार थे।

(ग) ऊपर की कंडिका में अंकित वरीय पदाधिकारियों के पत्र से स्पष्ट होता है कि यदि इनके द्वारा पुल पुनस्र्थापन की समुचित कार्रवाई की जाती तो इतने वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा इस तरह के पत्र निर्गत नहीं किये जाते। अतः जबकि पत्र उन्हें उपलब्ध करा दिये गये थे तब पुनः प्रक्रियागत बातों की वैधता पर प्रश्न लगाना अपने आप में हास्यास्पद है तथा अपने विरूद्ध लगाये गये आरोपों से बचने के लिए एक सोची समझी रणनीति के तहत्‌ बाद का बहाना (After thought) मात्र है।

इस प्रकार श्री प्रसाद का द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर स्वीकार्य नहीं पाते हुए सम्यक्‌ रूप से विचारोपरांत श्री प्रसाद को निलंबन से मुक्त करने तथा प्रमाणित आरोपों के लिए तीन वार्षिक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक, आरोप वर्ष 2006-2007 के लिए निन्दन, निलंबन अवधि में जीवनयापन-भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होने, पूरे सेवाकाल में अकार्य पद पर पदस्थापन के दंड पर सरकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। अधि0सं0 11588 (एस), दिनांक 16 अक्तूबर 2009 द्वारा श्री प्रसाद को निलंबन से मुक्त किया गया एवं विभागाीय पत्रांक 12179 (एस), दिनांक 30 अक्तूबर 2009 द्वारा अनुमोदित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति/परामर्श की मांग की गयी।

4. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2451, दिनांक 21 दिसम्बर 2010 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर आयोग द्वारा सहमति व्यक्त की गयी। तदुपरांत विभागीय पत्रांक-557 (एस), दिनांक 14 जनवरी 2011 द्वारा श्री प्रसाद से निलंबन अवधि में जीवन यापन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होने के संबंध में कारण-पृच्छा की गयी।

5. श्री प्रसाद के पत्रांक 114, दिनांक 09 मार्च 2011 द्वारा समर्पित कारण-पृच्छा में सारतः उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित नहीं पाये जाने, संचालन पदाधिकारी के साक्ष्य आधारित प्रतिवेदन के आलोक में पीपा पुल के पुनस्र्थापन में कोई लापरवाही तथा अकर्मण्यता नहीं बरते जाने, संचालन पदाधिकारी से असहमत होने का कोई ठोस साक्ष्य/आधार नहीं होने इत्यादि का उल्लेख करते हुए निलंबन अवधि में पूर्ण वेतन भुगतान करने का अनुरोध किया गया है। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित कारण-पृच्छा के समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके बचाव बयान में ऐसा कोई तथ्य उन्होनें नहीं दिया है जिसके आलोक में निलंबन अवधि में जीवन यापन भत्ता के अतिरिक्त अन्य कोई भुगतान किया जाय।

6. अतएव श्री सुरेन्द्र प्रसाद, कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हें निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) तीन वार्षिक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है। (ii) आरोप वर्ष 2006-07 के लिए "निन्दन"। (iii) निलंबन अवधि में इन्हें जीवन यापन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा। (iv) पूरे सेवाकाल में अकार्य पद पर पदस्थापन।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, सरकार के विशेष सचिव।

———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 677-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 24 November 2011. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2011-11-24.677/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2011-11-24.677.