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14 vDrwcj 2011 la0 1125—सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि रोहतास जिलान्तर्गत दावथ अंचल के अतंर्गत दावथ पंच मंदिर एक सार्वजनिक धर्मिक न्यास है, जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के तहत निबंधित है, जिसकी निबंधन संख्या 945/06 सितम्बर 1960 है । इस न्यास की व्यवस्था पर्षद द्वारा गठित एक ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति द्वारा किया जाता था, जिसका कार्य संतोषजनक नहीं रहने के कारण उक्त न्यास समिति को पर्षदीय आदेष ज्ञापांक-08, दिनांक 01 अप्रील 2010 द्वारा भंग करते हुए अंचलाधिकारी, दावथ को एक वर्ष की अवधि के लिये अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया था। इस आदेष के विरुद्ध श्री संजय कुमार मिश्र ने मा0 उच्च न्यायालय पटना के समक्ष एक सिविल रिट याचिका संख्या 9885/2010 दायर किया था, जिसमें उन्होने अपने को न्यासधारी नियुक्त करने का दावा किया था। जब तक इस याचिका का निष्पादन होता इसी बीच अंचलाधिकारी का एक वर्ष का अस्थायी न्यासधारी का कार्यकाल समाप्त हो गया। ऐसी स्थिति में धारा 32 के तहत न्यास समिति गठन करने तक अंचलाधिकारी को अगले आदेष तक न्यास का प्रभार संभालने का आदेष दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय ने उक्त याचिका में पारित अपने आदेष दिनांक 05 सितम्बर 2011 में कहा है कि जबतक धारा 32 के अधीन अंतिम रूप से जबतक योजना का निरूपण नहीं हो जाता है, तबतक के लिए रिट आवेदक को न्यासी नियुक्त करने पर विचार किया जाये। माननीय न्यायालय ने रिट आवेदक एवं उनके भाईयों को इस हेतु समुचित आवेदन पर्षद में दाखिल करने का आदेष दिया तथा पर्षद को इस मामले को चार सप्ताह में निष्पादन करने का निर्देष दिया। माननीय उच्च न्यायालय के उक्त आदेष दिनांक 05 सितम्बर 2011 के अनुपालन में रिट आवेदक अथवा उनके भाईयों ने दिनांक 29 सितम्बर 2011 तक पर्षद में आवेदन नही दिया था, ऐसी परिस्थिति में मा0 उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले का निष्पादन हेतु दिये गये समय सीमा को ध्यान में रखते हुये पर्षद से स्थानीय जाँच हेतु भेजा गया। जाँच पदाधिकारी ने सभी सम्बन्धित पक्षों एवं स्थानीय लोगों से जॉंच पड़ताल कर अपना प्रतिवेदन पर्षद में दिनांक 10 सितम्बर 2011 को दाखिल किया। उक्त जॉंच प्रतिवेदन एवं पर्षद में उपलब्ध कागजातों एवं इस न्यास से संबंधित न्यास पत्रक दिनांक 02 फरवरी 1915 के अवलोकन से पता चलाता है कि इस न्यास की स्थापना स्व0 बाबू महादेव सिंह ने किया था, जिनकी मृत्यु के बाद इनकी पत्नियां मोस्मात दीपलीखा कुँवर एवं मोस्मात मोतीरानी कुँवर ने एक रजिस्टर्ड दान पत्र 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 *दस,बर 2011 02 फरवरी 1915 ई0 के द्वारा पंच मंदिर में स्थापित पंच देवों श्री ठाकुर जी महाराज, गणेष जी महाराज, षिवजी, सूर्य भगवानजी एवं अन्नपूर्णा देवी जी के नाम मंदिर समेत 26 बिगहा 09 कट्ठा अपनी जमीन दान दी थी। उक्त दान पत्र में कोकिल सिंह जो मोस्मात दीपलीखा कुँवर के भाई थें, को मोतवली बनाया गया था। उक्त दान-पत्र में यह वर्णित है कि चन्द्रषेखर मिश्र को डीड लिखने वाली के पति स्व0 महादेव सिंह ने पंच मंदिर का पुजारी नियुक्त किया था। डीड के अनुसार कोकिल सिंह मुतवली मंदिर का राग-भोग करेगें और जिस तरह पुजारी चन्द्रषेखर मिश्र मंदिर का पुजा-पाठ करते हैं, उसे उसी तरह करते रहेगें। मुतवली कोकिल सिंह के मरने के बाद पुजारी चन्द्रषेखर मिश्र या उनके वारीसान उसी तरह राग-भोग, पुजा-पाठ का इंतजाम किया करेगें। डीड में यह व्यवस्था है कि देवतान को दान दी गयी सम्पति को अपने मसरफ में खर्च करने का अधिकारी नहीं है और न होगा। यहाँ यह भी उल्लेख करना है कि न्यास में लगभग 26 बीघा 9 कट्ठा जमीन दान देने वाली मोस्मात दीपलीखा कुँवर एवं मोस्मात मोतिरानी कुँवर में से एक मोस्मात मोतिरानी कुँवर ने बाद में देेवतान को दान की गयी जमीन में से 05 बीघा जमीन पुजारी चन्द्रषेखर मिश्र को मंदिर की पुजा-पाठ के एवज में लिख दिया। समर्पित सम्पत्ति को लिखने का उन्हे कोई हक व अख्यितयार नहीं था। सबसे ज्यादा विवाद का कारण पुजारी को दिया गया 05 बिगहा जमीन है जो विवाद के कारण अधिकांष समय परती हीं रहती है। न्यास डीड के अनुसार कोकिला सिंह वल्द ठाकुर सिंह को मुतवली एवं चन्द्रषेखर मिश्र को पुजारी बनाया गया था। इन दोनों का स्वर्गवास हो चुका है। न्यास डीड में यह कहीं नहीं वर्णण है कि स्व0 कोकिला सिंह के बाद कौन मुतवली बनेगें इसलिए पर्षद स्वतंत्र है कि वो किसी भी योग्य व्यक्ति को न्यासधारी बना सकती है या न्यास समिति का गठन कर सकती है। न्यासी पद के कई दावेदार हैं, जिसमें से कई दावेदारों ने न्यास समिति गठन करने का लिखित अनुरोध किया है। श्री विजय कुमार मिश्रा का कोई दावा पर्षद को जाँच के दौरान प्राप्त नहीं हुआ है। उपर्युक्त परिस्थ्तिियों में सम्पूर्ण मामले पर विचार करते हुए इस न्यास की सुव्यवस्था, संचालन एवं सम्यक् विकास के लिए अधिनियम की धारा-32 के तहत निम्नलिखित व्यक्तियों की न्यास समिति के गठन का निर्णय लिया जाता हैः-
(1) श्री शम्भु नाथ मिश्र वल्द स्व0 गंगाधर मिश्र अध्यक्ष (2) श्री जगरनाथ राम (पूर्व पैक्स अध्यक्ष) वल्द स्व0 राजपति राम सचिव (3) श्री संजय कुमार मिश्र वल्द स्व0 यमुनाधर मिश्र (4) श्रीमती सुषमा देवी जौजे श्री धर्मेन्द्र सिंह (5) श्री सीताराम यादव वल्द स्व0 मोतीलाल यादव (6) श्री रामध्यान पासवान वल्द स्व0 हरि राम (7) श्री मनोज कुमार वल्द स्व0 कमलनाथ यादव (8) श्री शेषनाथ राम वल्द स्व0 सरयुग राम (9) श्री संत पाल वल्द स्व0 गरीवा पाल (10) श्री संजय दुवे वल्द स्व0 महेन्द्र दुवे (11) श्री वंषीधर सिंह वल्द स्व0 रामाधार सिंह सभी निवासी ग्रामपो0थाना-दावथ, जिला-रोहतास न्यास समिति निम्नलिखित योजना का क्रियान्वयन एवं संचालन करेगी।
योजनायोजनायोजनायोजना
1. इस योजना का नाम दावथ पंच मंदिर योजना होगा। इस योजना के अतंर्गत् न्यास की सारी चल अचल सम्पत्तियाँ न्यास समिति में निहित होगी। न्यास समिति का नाम होगा - दावथ पंच मंदिर न्यास समिति। 2. न्यास समिति इस न्यास के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यकतानुसार एक योजना बनायेगी तथा पर्षद से अनुमोदन के पश्चात उसे कार्यान्वित करेगी ।
3. न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में अवश्य होगी । प्रत्येक कार्यवाही की प्रति तथा किये गये कार्यों का प्रगति प्रतिवेदन न्यास समिति पर्षद को भेजेगी।
4. आय-व्यय में पारदर्शिता रखना न्यास समिति की जिम्मेवारी होगी, जिससे कि समिति कार्य परिलक्षित हो सके।
5. न्यास समिति अपनी पहली बैठक में समिति के कोषाध्यक्ष का चुनाव कर पर्षद के अनुमोदनार्थ भेजेगी। न्यास समिति में षामिल अन्य व्यक्ति न्यास समिति के सदस्य होंगे।
6. न्यास समिति की प्रत्येक बैठकों की अध्यक्षता न्यास समिति के अध्यक्ष करेंगे। सचिव अध्यक्ष की अनुमति से बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति के प्रत्येक निर्णय के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सचिव को होगी ।
7. अध्यक्ष को समिति के कार्य-कलाप के सामान्य पर्यवेक्षण का अधिकार होगा। मत समानता की स्थिति में उन्हें निर्णायक मत देने का अधिकार होगा।
8. न्यास समिति के सचिव द्वारा कार्यवाही पुस्तिका संधारित की जायेगी । कोषाध्यक्ष को न्यास की सभी आय-व्यय का समग्र लेखा के संधारण सत्यापित पंजी में करने का दायित्व होगा । 3
(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 *दस,बर 2011 9. न्यास समिति में कोई पद, आकास्मिक दुर्घटना अथवा त्याग-पत्र देने के कारण रिक्त होने पर पर्षद मनोनयन करेगी ।
10. समिति का कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा। गलत कार्य करने वाले सदस्य को कारण पृच्छा देकर उनके स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद उस पर सम्यक विचारोपरांत निर्णय लेकर निष्कासित किया जा सकता है। 11. श्री संजय कुमार मिश्र एवं न्यास समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य न्यासधारी समझे जाएँगे और ये अथवा इनके परिवार के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास की संपत्ति एवं आय से लाभ नहीं उठाएँगे। न्यास समिति का कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ लेते पाये जायेंगे तो सदस्य होने की उनकी पात्रता समाप्त हो जायेगी ।
12. इस योजना के परिवर्तन, परिवर्धन एवं संशोधन का अधिकार पर्षद में निहित होगा । 13. यह आदेष तत्काल प्रभाव से लागू होगा। ह0/-
vkns"k से, किशोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना।
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अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु*ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 732-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in