िनबंधन सं(cid:27)या पी0ट*0-40 िनबंधन सं(cid:27)या (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार गजटगजटगजटगजट (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत 30 30 30 30 अमहायणअमहायणअमहायणअमहायण 1933193319331933 ((((शशशश0000))))
((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 783783783783) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना
टनाटनाटनाटना,,,, बुधबुधबुधबुधवारवारवारवार,,,, 21212121 &दस(ब&दस(ब&दस(ब&दस(बरररर 2020202011111111 ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=äÑéçâóX=
CCCCCCCCC=
îÑLäïéìâ=
U=ÑåäbÅà=OMNN=
ä~M= Ñç∫ä∫Ñç∫CPV]OMNNCPPUN]Ñç∫ä∫
∫ä∫Ñç∫CPV]OMNNCPPUN]Ñç∫ä∫—{{ÑÅÖâà= îâÇÑiÉÇêâ= ÑìÑL= Eä~DââëLìF= ÑçLëXÇz= OMNNGGz=
{{ÑÅÖâà= îâÇÑiÉÇêâ= ÑìÑL= Eä~DââëLìF= ÑçLëXÇz= OMNNGGz= íâë= ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=Éë~=Ñåìâ~Ç=MU=ÑåäbÅàz=OMNN=Çâë=áè
äeââ=ÇÜ=áòÑÕXâ=êcââ=ÇâXw= MU=ÑåäbÅàz=OMNN=Çâë=áèàBicââÑáê=Öèîâ=cââz=ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=ÇÜ=áòÑÕXâ=êcââ=ÇâXw= ä~éâóì=ÑìXÉâçóÜ=Çë=ÑìXÉCNNS=Çë=îrêñwê=ã∞ëDX=îâpà=Öëêè=äÑÖê=áòÇâÑDâê=ÑÇXâ=íâêâ=Öp=^= ä~éâóì=ÑìXÉâçóÜ=Çë=ÑìXÉCNNS=Çë=îrêñwê=ã∞
ÑñàÜDâ=[âz=
áòeââàÜ=äÑéçz= áòeââàÜ=
ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ^= ÑÅÖâà=Ñç2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 &दस(बर 2011
बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) विधेयक, 2011
[Ñç∫ä∫ÑçCPM]OMNN⁄
प्रस्तावनाः-बिहार आकस्मिकता निधि अधिनियम, 1950 (बिहार अधिनियम 19, 1950) का संशोधन करने के लिए विधेयक ।
चूँकि, राज्य में अनियमित मानसून एवं भू-जल स्तर गिरने के कारण कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव तथा पेयजल की समस्या उत्पन्न होने तथा कुछ क्षेत्रों में बाढ़ आने की सम्भावना को देखते हुए राहत एवं पुनर्वास के उपायों को आपात और व्यापक पैमाने पर करना पड़ सकता था इसलिए बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) अधिनियम 2011 विधेयक संख्या-14 के द्वारा आकस्मिकता निधि का काय अस्थायी रूप से बढ़ाकर 30 मार्च 2012 तक 1000 (एक हजार) करोड़ रूपये अस्थायी रूप से किया गया था। उपरोक्त सभी उद्देश्यों को पूर्ण करने के अलावे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए पैक्स के माध्यम से धान की अधिप्राप्ति की जानी है। इसलिए अब, भारत गणराज्य के बासठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः- 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ ।-(1) यह अधिनियम बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) अधिनियम, 2011 कहा जा सकेगा।
(2) यह 01 अप्रील 2011 के प्रभाव से प्रवृत्त होगा। 2. बिहार अधिनियम 19, 1950 की धारा-4 का संशोधन। - बिहार आकस्मिकता निधि अधिनियम, 1950 (बिहार अधिनियम 19, 1950) की धारा-4 का परन्तुक निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा :-
''परन्तु बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) अधिनियम, 2011 के प्रभावी होने की तिथि से प्रारम्भ होकर 30 मार्च, 2012 तक की अवधि के दौरान इस धारा का प्रभाव, इस उपांतरण के अधीन रहते हुए, होगा कि शब्द 'एक हजार करोड़' शब्द ''एक हजार एक सौ पचास करोड़'' द्वारा प्रतिस्थापित किये जायेंगे।''
वित्तीय संलेख
बिहार आकस्मिकता निधि का स्थायी काय 350 (तीन सौ पचास) करोड़ रूपये का है। इस वर्ष के प्रारंभ में अनियमित मॉनसून एवं भू-जलस्तर गिरने के कारण कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने एवं पेयजल की समस्या उत्पन्न होने तथा कुछ क्षेत्रों मे बाढ़ आने की संभावना को देखते हुए बिहार आकस्मिकता निधि के स्थायी काय को बढ़ाकर 1000 करोड़ रूपये किया गया था। बाद में मॉनसून की स्थिति नियमित होने के कारण कृषि पर अच्छा प्रभाव पड़ा और इस वर्ष राज्य में कृषि की पैदावार अभूतपूर्व अच्छी हुई है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए पैक्स के माध्यम से धान अधिप्राप्ति की जानी है, जिसका अनुमानित मूल्य 2700 करोड़ रूपये होगा। बिहार राज्य सहकारिता बैंक के माध्यम से चरणबद्ध तरीकों से पैक्सों को क्रियाशील पूंजी उपलब्ध करायी जाएगी। इसके अलावे पैक्स के सक्रिय नहीं रहने वाले पंचायतों में राज्य खाद्य निगम द्वारा अधिप्राप्ति की जाएगी। बिहार राज्य सहकारिता बैंक एवं राज्य खाद्य निगम को राशि की उपलब्धता हो सके इसके लिए बिहार राजकोष से ऋण के रूप में 800 करोड़ रूपये उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। राशि का प्रावधान अनुपूरक मांग में नहीं किया गया है। राशि व्यय हेतु दिया जाना अपेक्षित है इसलिए बिहार आकस्मिकता निधि अधिनियम 1950 की धारा-4 का संशोधन कर स्थायी काय को अस्थायी तौर पर बढ़ाकर 1150(एक हजार एक सौ पचास) करोड़ रूपये करने की आवश्यकता है। राशि का उपयोग उपरोक्त वर्णित उद्देश्यों से किया जाएगा और राशि की वृद्धि दिनांक 30 मार्च 2012 तक प्रभावी रहेगी। इस प्रकार से चालू वित्तीय वर्ष के लिए बिहार आकस्मिकता निधि का स्थायी काय अस्थायी रूप से 1150 (एक हजार एक सौ पचास) करोड़ रूपये का होगा। इसी उद्देश्य से बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) विधेयक, 2011 को अधिनियमित कराना आवश्यक है।
अतएव प्रस्ताव है कि बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) विधेयक, 2011 की स्वीकृति दी जाय। (सुशील कुमार मोदी) भारसाधक सदस्य।3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 &दस(बर 2011
उद्देश्य एवं हेतु
बिहार आकस्मिकता निधि का स्थायी काय 350 (तीन सौ पचास) करोड़ रूपये का है। इस वर्ष की शुरूआत में अनियमित मॉनसून एवं भू-जलस्तर गिरने के कारण कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने एवं पेयजल की समस्या उत्पन्न होने तथा कुछ क्षेत्रों मे बाढ़ आने की संभावना को देखते हुए बिहार आकस्मिकता निधि के स्थायी काय को अस्थायी रूप से बढ़ाकर 1000 करोड़ रूपये किया गया था। बाद में मॉनसून की स्थिति नियमित होने के कारण कृषि पर अच्छा प्रभाव पड़ा और इस वर्ष राज्य में कृषि की पैदावार अभूतपूर्व अच्छी हुई है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए पैक्स के माध्यम से धान अधिप्राप्ति की जानी है, जिसका कुल अनुमानित मूल्य 2700 करोड़ रूपये होगा। बिहार राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से चरणबद्ध तरीकों से पैक्सों को क्रियाशील पूंजी उपलब्ध करायी जाएगी। जिन पंचायतों के पैक्स सक्रिय नहीं होंगे वहां राज्य खाद्य निगम द्वारा सीधे किसानों से धान की अधिप्राप्ति की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा अधिप्राप्ति के तुरंत बाद किसानों को धान का मूल्य उपलब्ध कराया जाना है। बिहार राज्य सहकारी बैंक एवं राज्य खाद्य निगम को राशि की उपलब्धता हो सके इसके लिए बिहार राजकोष से ऋण के रूप में 800 करोड़ रूपये उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इस उद्देश्य से बजट में उपबंधित राशि के अतिरिक्त 150 (एक सौ पचास) करोड़ रूपये की आवश्यकता पड़ेगी जिसके लिए बिहार आकस्मिकता निधि अधिनियम 1950 की धारा-4 का संशोधन कर 1150(एक हजार एक सौ पचास) करोड़ रूपये करने की आवश्यकता है। राशि का उपयोग उपरोक्त वर्णित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाएगा और राशि की वृद्धि दिनांक 30 मार्च 2012 तक प्रभावी रहेगी। इसलिए यह अब आवश्यक हो गया है कि उक्त राशि 1150 (एक हजार एक सौ पचास) करोड़ रूपये का शोधन और विनियोग करने हेतु इसे विधेयक के रूप में लाया जाए तथा जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ठ है।
(सुशील कुमार मोदी) भारसाधक सदस्य
पटनाः
गिरीश झा, दिनांकः 08 दिसम्बर, 2011
प्रभारी सचिव, बिहार विधान-सभा।
————
अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु&ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 783-571+10-ड*0ट*0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in