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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 21 December 2011

Published 21 December 2011

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2011-12-21.785
Languages
English, Hindi

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बिहार भूमि दाखिल खारिज विधेयक, 2011

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प्रस्तावना ।-भूमि के दाखिल खारिज की प्रक्रिया को वर्त्तमान समय की आवश्यकताओं के साथ सहगामी बनाने और इसे विनियमित करने हेतु उपबन्ध करने के लिए विधेयक।

भारत गणराज्य के बासठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नरूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय-I प्रारंभिक 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ।-(1) यह अधिनियम बिहार भूमि दाखिल खारिज अधिनियम, 2011 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह सरकार द्वारा बिहार राजपत्र में यथा अधिसूचित तिथि से प्रवृत्त होगा। 2. परिभाषाएँ।- इस अधिनियम में, जबतक कोई बात विषय या संदर्भ में विरुद्ध न हो, (1) "दाखिल खारिज" से अभिप्रेत है किसी व्यक्ति का किसी होल्डिंग अथवा उसके भाग में अधिकार के अंतरण के फलस्वरूप चालू खतियान, अभिधारी खाता-पंजी तथा खेसरा पंजी के इन्द्राजों में निम्नलिखित किसी उपाय/लिखत द्वारा परिवर्त्तन :- (क) क्रय-विक्रय, दान; (ख) विनिमय; (ग) होल्डिंग का बंटवारा; (घ) विरासत/निर्वसीयत उत्तराधिकार अथवा वसीयती ; (ङ) विल; (च) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन न्यायालय का आदेश/डिक्री; (छ) बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 के अधीन न्यायालय का आदेश/डिक्री;

(ज) सक्षम प्राधिकार द्वारा लोक भूमि की बन्दोबस्ती/अंतरण/समनुदेशन; (झ) भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के अन्तर्गत अर्जन; (ञ) बिहार भूदान यज्ञ अधिनियम, 1954 के अधीन प्रदत्त भूमि; (ट) बिहार प्रश्रय प्राप्त व्यक्ति वासगीत काश्तकारी अधिनियम, 1947 के अधीन वासगीत स्थल की बन्दोबस्ती;

(ठ) क्रय नीति, 2010 के अधीन महादलित परिवारों के लिए रैयती भूमि का त्रिपक्षीय क्रय; (ड) कोशी क्षेत्र (रैयतों को भूमि-वापसी) अधिनियम, 1951 के अधीन पूर्व रैयत को भूमि का प्रत्यावर्त्तन;

(ढ) भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के अधीन पूर्व रैयत को भूमि का प्रत्यावर्त्तन; (ण) बिहार भूमि सुधार (अधिकतम सीमा निर्धारण एवं अधिशेष भूमि अर्जन) अधिनियम, 1961 के अधीन अधिशेष भूमि की बन्दोबस्ती, अथवा;

(त) किसी अन्य उपाय/लिखत द्वारा जिसे सरकार समय-समय पर अधिसूचित कर सकती है।

(2) "खतियान" से अभिप्रेत है बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 के अध्याय-X के अधीन अंतिम रूप से प्रकाशित नवीनतम अधिकार-अभिलेख; (3) "चालू खतियान" से अभिप्रेत है विहित प्रपत्र में संधारित अंतिम रूप से प्रकाशित अंतिम अधिकार-अभिलेख के पश्चात्‌ अद्यतन किया गया अधिकार-अभिलेख जो किसी व्यक्ति के किसी होल्ंिडग अथवा उसके भाग में अधिकार के परिवर्त्तन को दर्शाता है; (4) "अभिधारी खाता पंजी" से अभिप्रेत है विहित प्रपत्र में संधारित राजस्व ग्रामवार पंजी जो राजस्व ग्राम के विभिन्न अभिधारियों द्वारा धारित भूमि का ब्यौरा तथा भूमि धारण के फलस्वरूप सालाना लगान एवं सेस के साथ ही साथ उनसे सालाना लगान एवं सेस की वसूली दर्शाता है; (5) "सक्षम प्राधिकार" से अभिप्रेत है सम्बन्धित अधिनियम/नियमावली/हस्तक के अधीन किसी लोक भूमि को बन्दोबस्त/अंतरण/समनुदेशन करने हेतु प्राधिकृत प्राधिकारी; (6) "अंचल अधिकारी" से अभिप्रेत है सरकार द्वारा इस रूप में नियुक्त पदाधिकारी या इस अधिनियम के अधीन अंचल अधिकारी के किसी एक या सभी कृत्यों के निर्वहन के लिए सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य पदाधिकारी; (7) "भूमि सुधार उप समाहर्त्ता" से अभिप्रेत है सरकार द्वारा इस रूप में नियुक्त पदाधिकारी या इस अधिनियम के अधीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के किसी एक या सभी कृत्यों के निर्वहन करने के लिए सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य पदाधिकारी;

3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 'दस)बर 2011

(8) "समाहर्त्ता" से अभिप्रेत है जिला का समाहर्त्ता; (9) "अपर समाहर्त्ता" से अभिप्रेत है जिला का अपर समाहर्त्ता या इस अधिनियम के अधीन अपर समाहर्त्ता के किसी एक या सभी कृत्यों के निर्वहण के लिए सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य पदाधिकारी; (10) "कर्मचारी" से अभिप्रेत है समाहर्त्ता द्वारा इस रूप में नियुक्त कोई कर्मचारी या इस अधिनियम के अधीन किसी हल्का के कर्मचारी के किसी एक या सभी कृत्यों के निर्वहण के लिए समाहर्त्ता द्वारा अधिसूचित कोई अन्य कर्मचारी; (11) "अंचल निरीक्षक" से अभिप्रेत है सरकार द्वारा इस रूप में नियुक्त कोई पदाधिकारी या इस अधिनियम के अधीन अंचल निरीक्षक के किसी एक या सभी कृत्यों के निर्वहण के लिए सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य पदाधिकारी; (12) "हल्का" से अभिप्रेत है कर्मचारी के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन राजस्व प्रशासन की सबसे छोटी प्रशासनिक ईकाई; (13) "अभिधारी" शब्द का वही अर्थ है जो बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 में इसके प्रति समनुदेशित किया गया हो; (14) "होल्डिंग" से अभिप्रेत है किसी रैयत द्वारा धारित भूमि का एक या अनेक ऐसे खण्ड जो एक पृथक अभिधृति के अंग हो; (15) "रैयत" शब्द का वही अर्थ है जो बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 में इसके प्रति समनुदेशित किया गया हो; (16) "निबंधित" से अभिप्रेत है भारतीय निबंधन अधिनियम, 1908 के अधीन निबंधित कोई दस्तावेज; (17) "निबंधन प्राधिकार" से अभिप्रेत है भारतीय निबंधन अधिनियम, 1908 के अधीन निबंधन प्राधिकारी; (18) "शुद्धि-पत्र" से अभिप्रेत है अंचल अधिकारी द्वारा किसी होल्डिंग अथवा उसके भाग के दाखिल खारिज करने के आदेश पारित करने के उपरांत आदेश के अनुरूप चालू खतियान, अभिधारी खाता पंजी एवं खेसरा पंजी में परिवर्त्तन करने हेतु विहित प्रपत्र में अंचल अधिकारी द्वारा निर्गत पर्ची; (19) "विहित" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनायी गयी नियमावली द्वारा विहित; (20) "प्रपत्र" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनायी गयी नियमावली द्वारा विहित प्रपत्र; (21) "खेसरा पंजी" से अभिप्रेत है विहित प्रपत्र में संधारित पंजी जो राजस्व ग्राम के खेसरों के ब्यौरों के साथ उनके अभिधारियों को दर्शाती है; (22) "दाखिल खारिज याचिका पंजी" से अभिप्रेत है विहित प्रपत्र में संधारित पंजी जिसमें अंचल अधिकारी के समक्ष दायर की गयी दाखिल खारिज याचिकाएँ पंजीकृत की जाती हैं; (23) "दाखिल खारिज पंजी" से अभिप्रेत है विहित प्रपत्र में संधारित पंजी जिसमें अंचल अधिकारी द्वारा पारित किए गए दाखिल खारिज आदेश दर्ज किए जाते हैं; (24) "राजस्व ग्राम" से अभिप्रेत है राजस्व ग्राम के रूप में अधिसूचित कोई ग्राम जिसकी एक अलग राजस्व थाना संख्या हो; (25) "सरकार" से अभिप्रेत है बिहार सरकार; (26) "जमाबंदी" से अभिप्रेत है अभिधारी खाता पंजी में प्रत्येक अभिधारी को आवंटित पन्ना की संख्या जिसमें उनके अभिधृतियों के ब्यौरे के साथ ही साथ लगान एवं सेस की माँग एवं वसूली दर्ज की जाती है; (27) "लोक भूमि" से अभिप्रेत है कोई भूमि जिसे बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के अधीन लोक भूमि परिभाषित की गयी हो।

अध्याय-II दाखिल खारिज याचिका को दायर करने की प्रक्रिया 3. दाखिल खारिज हेतु याचिका दायर किया जाना।-(1) कोई व्यक्ति किसी होल्डिंग या उसके भाग में किसी विधि/लिखत द्वारा हित अर्जित होने पर, उस हित के अर्जन के 90 दिनों के भीतर उस क्षेत्र के अंचल अधिकारी के समक्ष जिसके क्षेत्राधिकार में वह होल्डिंग या उसका भाग अवस्थित हो, उस होल्डिंग या उसके भाग के सम्बन्ध में अपना नाम चालू खतियान, अभिधारी खाता पंजी तथा खेसरा पंजी में दाखिल खारिज करने हेतु विहित प्रपत्र में याचिका देगा। (2) किसी होल्डिंग या उसके भाग में विक्रय, दान, विनिमय, बंटवारा द्वारा चाहे न्यायालय द्वारा अथवा अ न्यथ् ा ा ि नव र् स ी य त उत्त् ा रा ि ध क ा र अ थ् ा व ा व स ी यती , ि व ल, स क्ष म प ्र ा ि ध क ा र द्वा र ा ल ा ेक भ् ा ूि म क ी बन्दोबस्ती/अंतरण/समनुदेशन, भूदान यज्ञ समिति द्वारा भूमि के अनुदान, बिहार प्रश्रय प्राप्त व्यक्ति वासगीत काश्तकारी अधिनियम, 1947 के अधीन प्रदत्त अभिधृति अधिकार, बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 के अधीन दर रैयत के रूप में अधिभोगी अधिकार का अर्जन, भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के अधीन पूर्व रैयत को होल्डिंग या उसके भाग का प्रत्यावर्त्तन, वास भूमि रहित महादलित परिवारों के लिए रैयती भूमि की क्रय नीति, 2010 के अधीन क्रय की गयी वास भूमि, कोशी क्षेत्र (रैयतों को भूमि वापसी) अधिनियम, 1951 के अधीन पूर्व रैयत को होल्डिंग या उसके भाग का प्रत्यावर्त्तन, बिहार भूमि सुधार (अधिकतम सीमा निर्धारण एवं अधिशेष भूमि अर्जन) अधिनियम, 1961 के अधीन अधिशेष भूमि की बंदोबस्ती, किसी न्यायालय के आदेश/डिक्री अथवा सरकार द्वारा अधिसूचित अन्तरण का कोई अन्य उपाय/लिखत में हित अर्जित करने वाला कोई व्यक्ति, उस अंचल अधिकारी,4 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 'दस)बर 2011 जिसके क्षेत्राधिकार में वह होल्डिंग अथवा उसका भाग अवस्थित है, के कार्यालय में या अंचल अधिकारी द्वारा उस क्षेत्र की दाखिल खारिज याचिकाओं को प्राप्त करने हेतु, आयोजित शिविर में विहित रीति से उस होल्ंिडग या उसके भाग के संबंध में चालू खतियान, अभिधारी खाता पंजी तथा खेसरा पंजी में अपनेे नाम से दाखिल खारिज करने के लिए याचिका दे सकेगा। (3) कार्यालय अथवा शिविर में दाखिल खारिज हेतु याचिका प्राप्त होने पर, अंचल अधिकारी याचिका कर्त्ता को विहित रीति से पावती रसीद देगा। (4) अंचल अधिकारी प्रत्येक दाखिल खारिज याचिका को अंचल कार्यालय में संधारित दाखिल खारिज याचिका पंजी में उनकी प्राप्ति के क्रम में पंजीकृत कराएगा। (5) अंचल अधिकारी प्रत्येक दाखिल खारिज याचिका के लिए विहित रीति से एक पृथक अभिलेख खुलवाएगा।

अध्याय - III अंचल अधिकारी को अभिसूचित करने के लिए प्राधिकार 4. किसी होल्ंिडग या उसके भाग में किसी व्यक्ति के हित के अर्जन के संबंध में अंचल अधिकारी को सूचित करने के लिए उत्तरदायी प्राधिकारी।-(1)क्रय-विक्रय, विनिमय, बंटवारा, दान अथवा अंतरण के किसी अन्य ढंग द्वारा किसी होल्ंिडग या उसके भाग के अंतरण के लिखत के निबंधन के बाद, निबंधन प्राधिकारी निबंधित विलेख की छाया प्रति के साथ विहित प्रपत्र में उस निबंधन की सूचना उस क्षेत्र के अंचल अधिकारी, जिसके क्षेत्राधिकार में होल्ंिडग या उसका भाग अवस्थित हो, को देगा। (2) डिक्री प्राप्तकर्त्ता को डिक्री के निष्पादन में क्रेता को न्यायालय के निलामी/विक्रय में होेल्ंिडग या उसके भाग पर दखल दिए जाने या जब सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 अथवा बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 के अधीन बंटवारा की अन्तिम डिक्री पारित होने के उपरांत यथास्थिति वह न्यायालय, जिसके द्वारा डिक्री का क्रियान्वयन किया गया हो अथवा वह न्यायालय, जिसके द्वारा बंटवारा हेतु अन्तिम डिक्री पारित की गयी हो, उस क्षेत्र के अंचल अधिकारी, जिसके क्षेत्राधिकार में होल्ंिडग अथवा उसका भाग अवस्थित है, को विहित प्रपत्र में इस तथ्य की सूचना देगा। (3) लोक भूमि की बन्दोबस्ती/अंतरण/समनुदेशन के संबंध में अन्तिम आदेश पारित करने वाला तथा बिहार भूमि सुधार (अधिकतम सीमा निर्धारण एवं अधिशेष भूमि अर्जन) अधिनियम, 1961 के अधीन अर्जित भूमि के वितरण, बिहार प्रश्रय प्राप्त व्यक्ति वासगीत काश्तकारी अधिनियम, 1947 के अधीन वासगीत का पर्चा देने, वास भूमि रहित महादलित परिवारों के लिए रैयती भूमि की क्रय नीति 2010 के अधीन महादलित परिवारों को वास भूमि देने, बिहार काश्तकारी अधिनियम,1885 के अधीन दर रैयत को अधिभोग अधिकार देने, कोशी क्षेत्र (रैयत को भूमि वापसी) अधिनियम, 1951 के अधीन पूर्व रैयत को भूमि प्रत्यावर्तित करने वाला प्राधिकारी उस क्षेत्र के अंचल अधिकारी, जिसके क्षेत्राधिकार में भूमि अवस्थित हो, को उस आदेश की सूचना विहित प्रपत्र में देगा। (4) बिहार भूदान यज्ञ अधिनियम, 1954 के अधीन भूमि अनुदान के संबंध में, बिहार भूदान यज्ञ समिति का सम्बन्धित अधिकारी उस क्षेत्र के अंचल अधिकारी, जिसके क्षेत्राधिकार में भूमि अवस्थित हो, को विहित प्रपत्र में सूचना देगा। (5) भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के अधीन भूमि के अर्जन के लिए उत्तरदायी प्राधिकारी, उस क्षेत्र के अंचल अधिकारी जिसके क्षेत्राधिकार में भूमि अवस्थित हो, को इसकी विहित प्रपत्र में सूचना देगा। (6) भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के अधीन पूर्व रैयत को भूमि प्रत्यावर्तित करने हेतु उत्तरदायी प्राधिकार उस क्षेत्र के अंचल अधिकारी जिसके क्षेत्राधिकार में भूमि अवस्थित हो, को इसकी सूचना विहित प्रपत्र में देगा। (7) बंटवारा, निर्वसीयत या वसीयती उत्तराधिकार अथवा किसी अन्य उपाय/लिखत द्वारा किसी होल्डिंग या उसके भाग में हित के अर्जन के संबंध में, उस क्षेत्र का कर्मचारी विहित रीति से जानकारी प्राप्त करेगा तथा इसकी सूचना विहित प्रपत्र में अंचल अधिकारी को देगा। (8) कोई व्यक्ति किसी होल्ंिडग या उसके भाग में किसी उपाय/लिखत द्वारा हित अर्जित करता है तो वह उस क्षेत्र के अंचल अधिकारी को, जिसके क्षेत्राधिकार में होल्ंिडग या उसका भाग अवस्थित हो, होल्ंिडग या उसके भाग में हित के अर्जन के संबंध में, हित अर्जन के 90 दिनों के भीतर, विहित रीति से सूचित करेगा।

अध्याय - IV जाँच-पड़ताल और प्रतिवेदन 5. दाखिल खारिज मामलों में जांच-पड़ताल और प्रतिवेदन।-(1) दाखिल खारिज की याचिका प्राप्त होने पर या होल्ंिडग अथवा उसके भाग में हित अर्जन के सम्बन्ध में प्राधिकार द्वारा सूचित किए जाने पर या स्वप्रेरणा से यदि अंचल अधिकारी का सामाधान हो जाय कि होल्ंिडग या उसके भाग में हित अर्जित हुआ है जो दाखिल खारिज होने के लिए पर्याप्त है, अंचल अधिकारी कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक से विहित प्रपत्र में दाखिल खारिज याचिका के संबंध में विस्तृत जांच प्रतिवेदन देने का आदेश देते हुए दाखिल खारिज की कार्यवाही प्रारंभ करेगा तथा उस आदेश को कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक को संसूचित करवाएगा। (2) दाखिल खारिज याचिका के संबंध में जांच-प्रतिवेदन का आदेश प्राप्त होने पर, कर्मचारी विहित रीति से जांच-पड़ताल करेगा तथा अंचल निरीक्षक को विहित प्रपत्र में जांच-प्र्र्र्र्रतिवेदन समर्पित करेगा।5 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 'दस)बर 2011 (3) कर्मचारी से जांच-प्रतिवेदन प्राप्त होने पर, अंचल निरीक्षक कर्मचारी के जांच-प्रतिवेदन की सत्यता का परीक्षण करेगा तथा अपना निष्कर्ष एवं अनुशंसा विहित रीति से अभिलिखित करेगा। (4) अंचल निरीक्षक विहित प्रपत्र में अपने निष्कर्ष एवं अनुशंसा के साथ कर्मचारी का जांच- प्रतिवेदन अंचल अधिकारी को प्रेषित करेगा। (5) यदि अंचल अधिकारी कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक की जांच-पड़ताल से संतुष्ट नहीं हो तो उस रीति से, जिसे वह उचित समझे, वह स्वयं जांच कर सकेगा तथा अपना निष्कर्ष विहित रीति से अभिलिखित करेगा। अध्याय-V निपटारा 6. दाखिल खारिज मामलों का निपटारा।-(1) अंचल अधिकारी, कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक से दाखिल खारिज याचिका के संबंध में जांच-प्रतिवेदन प्राप्त होने पर, विहित रीति से अथवा इस अधिनियम की धारा-5 (5) के अधीन स्वयं अपने द्वारा जाँचोपरान्त, उन व्यक्तियों, जिनका होल्ंिडग या उसके भाग में हित निहित हो, के साथ-साथ जन साधारण से विहित रीति से आपत्ति आमंत्रित करने के उपरांत दाखिल खारिज मामलों का या तो - (क) अपने कार्यालय में होने वाले नियमित दाखिल खारिज न्यायालय में, अथवा (ख) उस क्षेत्र के दाखिल खारिज मामलों के निपटारा हेतु जिस क्षेत्र में होल्ंिडग अथवा उसका भाग अवस्थित हो, आयोजित शिविर न्यायालयों में निपटारा करेगा। (2) आपत्ति की प्राप्ति के उपरांत, अंचल अधिकारी संबंधित पक्षों को सुनवाई एवं साक्ष्य, यदि कोई हो, प्रस्तुत करने हेतु युक्तियुक्त अवसर देगा तथा आपत्ति का निपटारा करेगा एवं जैसा वह उचित समझे वैसा आदेश पारित करेगा। (3) जिन मामलों में आपत्ति दायर करने की अन्तिम तिथि की समाप्ति के उपरांत कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, उनमें अंचल अधिकारी, जैसा उचित समझे, वैसा आदेश पारित कर उनका निपटारा करेगा। (4) जिन मामलों में आपत्तियाँ प्राप्त होती हैं, उनमें पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा। (5) दाखिल खारिज याचिका को अस्वीकृत किए जाने की स्थिति मे,ं अंचल अधिकारी आदेश फलक में उन आधारों को अभिलिखित करेगा जिनके आधार पर उसे अस्वीकृत किया गया हो तथा याचिका कर्त्ता को, उन आधारों का, जिन पर याचिका अस्वीकृत की गयी हो, संक्षिप्त विवरण देते हुए, विहित रीति से, सूचित करेगा। (6) जिन मामलों में दाखिल खारिज की स्वीकृति दी जाती है उनमें अंचल अधिकारी अपने दाखिल खारिज आदेश को कार्यान्वित करने हेतु विहित प्रपत्र में शुद्धि पत्र निर्गत करेगा तथा याचिका कर्त्ता को विहित रीति से सूचित करेगा। (7) कर्मचारी, उस राजस्व ग्राम को, जिसमें होल्ंिडग अथवा उसका भाग अवस्थित हो, चालू खतियान, अभिधारी खाता पंजी तथा खेसरा पंजी में, शुद्धि पत्र में परिवर्त्तन हेतु दिए गए आदेश को दर्शाते हुए प्रविष्टियों में परिवर्त्तन करेगा। (8) अभिधारी खाता पंजी की प्रविष्टियों में किए गए परिवर्त्तन के आधार पर कर्मचारी संबंधित जमाबंदी में वार्षिक लगान एवं सेस की मांग में परिवर्त्तन करेगा। (9) क्रय-विक्रय, दान अथवा विनिमय के द्वारा अंतरण के आधार पर दाखिल खारिज का दावा स्वीकृत नहीं किया जाएगा जबतक वह निबंधित न हो। (10) विल के आधार पर दाखिल खारिज का दावा स्वीकृत नहीं किया जाएगा जबतक सक्षम न्यायालय द्वारा विल का प्रोबेट सम्यक्‌ रूप से विनिश्चित न किया गया हो। (11) न्यायालय अथवा निबंधित विलेख से अन्यथा, बंटवारा के आधार पर दाखिल खारिज का दावा स्वीकृत नहीं किया जाएगा जबतक सभी हिस्सेदारों की, बंटवारा के लिए, सहमति न हो। (12) होल्डिंग या उसके भाग के दाखिल खारिज के वैसे मामलों में स्वीकृति नहीं दी जाएगी जिनमें होल्ंिडग या उसके भाग के संबंध में, सक्षम न्यायालय में स्वत्ववाद लंबित हो। (13) होल्ंिडग या उसके भाग के वैसे मामलों में दाखिल खारिज की स्वीकृति नहीं दी जाएगी जिनमें होल्ंिडग या उसके भाग में हित अर्जन करने वाले का उस होल्डिंग या उसके भाग पर भौतिक रूप से दखल न हो।

अध्याय-VI अपील एवं पुनरीक्षण 7. अपील।-(1) अंचल अधिकारी के आदेश के विरुद्ध, आदेश की तारीख के 30 दिनों के भीतर, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के समक्ष अपील की जाएगी। (2) भूमि सुधार उप-समाहर्त्ता को यदि समाधान हो जाय कि विलम्ब होने के समुचित कारण हैं तो वह अपील दायर होने में हुए विलम्ब को क्षांत कर सकता है। (3) भूमि सुधार उप-समाहर्त्ता द्वारा जिस आदेश के विरुद्ध अपील की गयी हो उसे उपान्तरित, परिवर्तित या अपास्त करने वाला कोई आदेश तबतक नहीं दिया जाएगा जबतक सम्बद्ध पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो।6 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 'दस)बर 2011 (4) दाखिल खारिज अपील के निपटारा की समय सीमा दाखिल खारिज अपील दायर करने की तिथि से तीस (30) कार्य-दिवस होगी। 8. पुनरीक्षण।-(1) इस अधिनियम के अधीन समाहर्त्ता/अपर समाहर्त्ता अपने पास आवेदन दिए जाने पर या इस अधिनियम या इसके अधीन बनी नियमावली के अधीन किसी प्राधिकारी या पदाधिकारी द्वारा किए गए किसी आदेश की वैधता या औचित्य के संबंध में अपना समाधान करने के लिए ऐसे प्राधिकारी या पदाधिकारी के समक्ष विचाराधीन या निपटाए गए किसी मामले के अभिलेखों की मांग और परीक्षा कर सकेगा और, जैसा वह उचित समझ,े आदेश पारित कर सकेगा। (2) भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, उस आदेश के 30 दिनों के भीतर समाहर्त्ता/अपर समाहर्त्ता के समक्ष पुनरीक्षण हेतु आवेदन दायर कर सकेगा। (3) समाहर्त्ता/अपर समाहर्त्ता को यदि समाधान हो जाय कि विलम्ब के समुचित कारण हैं तो वह आदेश के विरूद्ध पुनरीक्षण हेतु आवेदन दायर करने में हुए विलम्ब को क्षांत कर सकेगा। (4) समाहर्त्ता/अपर समाहर्त्ता किसी प्राधिकारी या पदाधिकारी द्वारा दिए गए किसी आदेश को उपान्तरित, परिवर्तित या अपास्त करने का आदेश तबतक पारित नहीं करेगा जबतक कि संबद्ध पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो। (5) दाखिल खारिज पुनरीक्षण आवेदन के निपटारा की समय-सीमा पुनरीक्षण के लिए आवेदन की प्राप्ति की तिथि से तीस (30) कार्य-दिवस होगी।

अध्याय-VII जमाबन्दी का रद्‌दीकरण 9. जमाबन्दी का रद्‌दीकरण।-(1) अपर समाहर्त्ता को, स्वप्रेरणा से अथवा आवेदन पर, किसी जमाबन्दी जो वर्त्तमान में लागू किसी विधि के उल्लंघन में अथवा इस निमित्त किसी कार्यपालक निर्देश के अतिलंघन में सृजित की गयी हो, के सम्बन्ध में जाँच-पड़ताल करने की शक्ति होगी। अपर समाहर्त्ता, जिसके क्षेत्राधिकार में भूमि अवस्थित हो; सम्बन्धित पक्षकारों को उपस्थित होने, साक्ष्य प्रस्तुत करने तथा सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के उपरान्त, वैसी जमाबन्दी रद्‌द करने, उसके अन्तर्गत दावा करने वाले व्यक्ति को बेदखल तथा उन शर्त्तों पर, जो अपर समाहर्त्ता को उचित एवं न्यायपूर्ण प्रतीत होता हो, वैध स्वामी/अभिरक्षक को दखल सौंप सकेगा। (2) जमाबन्दी में हित रखने वाले पक्षों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना उप-धारा (1) के अधीन जमाबन्दी रद्‌द नहीं की जाएगी। (3) कोई व्यक्ति, जिसका किसी जमाबन्दी की भूमि अथवा उसके भाग में हित हो, उस अपर समाहर्त्ता, जिसके क्षेत्राधिकार में भूमि अथवा उसका भाग अवस्थित हो, के समक्ष जमाबन्दी के रद्‌दीकरण हेतु याचिका दायर कर सकेगा। (4) जमाबन्दी रद्‌द करने हेतु दायर याचिका अथवा सरकारी विभाग, जिसका उस भूमि अथवा उसके भाग में हित निहित हा,े के निर्देश अथवा स्वप्रेरणा से, अपर समाहर्त्ता, जिसके क्षेत्र में भूमि अथवा उसका भाग अवस्थित हो, जमाबन्दी में हित रखने वाले व्यक्तियों को सूचना निर्गत करते हुए जमाबन्दी के रद्‌दीकरण हेतु कार्यवाही प्रारम्भ कर सकेगा। (5) अपर समाहर्त्ता, जिसके क्षेत्राधिकार में भूमि अथवा उसका भाग अवस्थित हो, स्वयं अपने अथवा अपने द्वारा प्राधिकृत अन्य किसी पदाधिकारी द्वारा जाँच के उपरांत, जैसा वह उचित समझे, आदेश पारित करेगा। (6) (क) अपर समाहर्त्ता के आदेश के विरूद्ध अपील जिला के समाहर्त्ता के समक्ष, उस आदेश के, जिसके विरूद्ध अपील की गयी हो, 30 दिनों के भीतर संस्थित होगी। (ख) जिला के समाहर्त्ता को यदि समाधान हो जाय कि विलम्ब के लिए पर्याप्त कारण हैं तो अपील दायर होने में हुए विलम्ब को क्षांत कर सकेगा। (ग) जिला के समाहर्त्ता द्वारा, जिस आदेश के विरूद्ध अपील की गयी हो, उसे उपान्तरित, परिवर्तित या अपास्त करने वाला कोई आदेश तबतक नहीं किया जाएगा जबतक कि सम्बद्ध पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो। (7) (क) जिला के समाहर्त्ता के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति उस आदेश के 30 दिनों के भीतर प्रमण्डल के आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण हेतु आवेदन दायर कर सकेगा। (ख) प्रमण्डलीय आयुक्त को यदि समाधान हो जाय कि विलम्ब के लिए पर्याप्त कारण हैं तो पुनरीक्षण हेतु आवेदन दायर करने में हुए विलम्ब को क्षांत कर सकेगा। (ग) प्रमण्डलीय आयुक्त, अपने पास आवेदन दिए जाने पर या इस अधिनियम या इसके अधीन बनी नियमावली के अधीन किसी प्राधिकार या पदाधिकारी द्वारा दिए गए किसी आदेश की वैधता या औचित्य के सम्बन्ध में अपना समाधान करने के लिए ऐसे प्राधिकार या पदाधिकारी के समक्ष विचाराधीन या निपटाए गए किसी मामले के अभिलेखों की माँग और परीक्षा कर सकेगा और, जैसा वह उचित समझे, आदेश पारित कर सकेगा। (घ) प्रमण्डलीय आयुक्त किसी प्राधिकारी या पदाधिकारी द्वारा दिए गए किसी आदेश को उपान्तरित, परिवर्तित या अपास्त करने का आदेश तबतक पारित नही करेगा जबतक कि सम्बद्ध पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो।7 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 'दस)बर 2011 अध्याय-VIII

खाता पुस्तिका का निर्माण 10. खाता पुस्तिका का निर्माण एवं फीस लेकर अभिधारियों को उसकी आपूर्त्ति।- (1) यथाविहित रीति से किसी राजस्व ग्राम में अभिधारी की अभिधृति की एक खाता पुस्तिका तैयार की जाएगी तथा यथाविहित फीस के भुगतान तथा समय सीमा के अन्तर्गत, जिसके क्षेत्राधिकार में अभिधृति अवस्थित है, के अंचलाधिकारी के द्वारा सम्बन्धित अभिधारी को उपलब्ध कराई जाएगी। (2) खाता पुस्तिका में निम्नलिखित विवरण होंगे- (i) अभिधारी द्वारा धारित भूमि के संदर्भ में चालू खतियान तथा अभिधारी खाता पंजी का सुसंगत उद्धरण, (ii) लगान तथा सेस की माँग और वसूली, (iii) सरकार अथवा अन्य वित्तीय संस्थाओं द्वारा दिया गया ऋण एवं उसका वापसी-भुगतान। (3) खाता पुस्तिका, भूमि के प्रत्येक दाखिल-खारिज के बाद, यथाविहित रीति से अद्यतनीकरण के लिए अभिधारी के द्वारा सम्बन्धित अंचलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

अध्याय-IX

विविध

11. संक्षिप्त कार्यवाही।-इस अधिनियम के अधीन सारी कार्यवाहियाँ संक्षिप्त कार्यवाहियाँ होंगी। 12. नियमित दाखिल खारिज न्यायालय में दाखिल खारिज मामलों के निपटारे की समय-सीमा।-(1) नियमित दाखिल खारिज न्यायालय में दाखिल खारिज मामला,ें जिसमें कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हो, के निपटारे की समय-सीमा दाखिल-खारिज याचिका की प्राप्ति की तिथि से इक्कीस (21) कार्य-दिवस, अठारह (18) कार्य-दिवस आदेश पारित करने के लिए एवं तीन (03) कार्य-दिवस शुद्धि पत्र निर्गत करने के लिए, की होगी। (2) नियमित दाखिल खारिज न्यायालय में दाखिल खारिज वादों, जिनमें आपत्तियाँ प्राप्त हुई हों, के निपटारे की समय-सीमा दाखिल खारिज याचिका की प्राप्ति की तिथि से तैंतीस (33) कार्य-दिवस, तीस (30) कार्य-दिवस आदेश पारित करने के लिए एवं तीन (03) कार्य-दिवस शुद्धि पत्र निर्गत करने के लिए, की होगी। 13. शिविर न्यायालय में दाखिल खारिज मामलों के निपटारे की समय-सीमा।- (1) शिविर न्यायालय में दाखिल खारिज मामलों, जिनमें कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हो, के निपटारे की समय-सीमा दाखिल खारिज याचिका की प्राप्ति की तिथि से अठारह (18) कार्य-दिवस, पन्द्रह (15) कार्य-दिवस आदेश पारित करने के लिए एवं तीन (03) कार्य-दिवस शुद्धि पत्र निर्गत करने के लिए, की होगी। (2) शिविर न्यायालय में दाखिल खारिज याचिकाओं, जिनमें आपत्तियाँ प्राप्त हुई हों, के निपटारे की समय-सीमा दाखिल खारिज याचिका की प्राप्ति की तिथि से तैंतीस (33) कार्य-दिवस, तीस (30) कार्य-दिवस आदेश पारित करने के लिए एवं (03) कार्य-दिवस शुद्धि पत्र निर्गत करने के लिए, की होगी। 14. दाखिल खारिज याचिकाओं के निपटारे में हुए विलम्ब के कारणों को अभिलिखित करना।-वैसे मामलों में, जिनमें पूर्वगामी धाराओं में उपबन्धित समय-सीमा के अन्तर्गत दाखिल खारिज याचिकाओं का निपटारा नहीं किया गया है, अंचल अधिकारी विलम्ब के कारणों को आदेश-फलक में अभिलिखित करेगा जो जिला समाहर्त्ता के द्वारा विहित रीति से संवीक्षा के अधीन होगा। 15. निपटारे में विलम्ब हेतु उत्तरदायित्व।-दाखिल खारिज मामलों के निपटारे में विलम्ब का दायित्व सम्बन्धित पदाधिकारी पर होगा जिसके कारण वह विलम्ब हुआ हो। 16. प्राधिकारों को व्यवहार न्यायालय की शक्ति।-इस अधिनियम के अध्यधीन, समाहर्त्ता, अपर समाहर्त्ता, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता तथा अंचल अधिकारी को साक्ष्य ग्रहण करने, किसी व्यक्ति को सम्मन करने और हाजिर कराने तथा शपथ पर उनकी परीक्षा करने, दस्तावेजों को पेश करने के लिए बाध्य करने एवं खर्चा दिलवाने के मामलों में वही शक्तियाँ होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन किसी न्यायालय में निहित हों। 17. न्यायालय फीस।-इस अधिनियम के अधीन दायर की गयी प्रत्येक याचिका, अपील के ज्ञापन या पुनरीक्षण के आवेदन पर यथा विहित मूल्य का न्यायालय फीस स्टाम्प लगा रहेगा। 18. प्रमाणित प्रतिलिपियाँ और जानकारी।-राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर, इस निमित्त, यथाविहित नियमों के अधीन और फीस के भुगतान करने पर, आदेश फलक, शुद्धि-पत्र, चालू खतियान तथा अभिधारी-खाता-पंजी से जानकारी और प्रमाणित उद्धरण तथा उनकी प्रमाणित प्रतिलिपि, विहित प्रपत्र में आवेदन करने वाले व्यक्तियों को दी जाएगी। 19. निदेश, नियंत्रण तथा अधीक्षण।-अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप-समाहर्त्ता तथा अपर समाहर्त्ता, इस अधिनियम के अधीन अपने कर्त्तव्यों के अनुपालन तथा शक्तियों के प्रयोग में, जिला समाहर्त्ता के सामान्य निदेश, नियंत्रण तथा अधीक्षण के अधीन होंगे। 20. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति।-राज्य सरकार, परिस्थिति के अनुसार, आदेश द्वारा जो इस अधिनियम के उपबंधों सेे असंगत न हो, ऐसा कोई कार्य कर सकेगी या करने का निदेश देे सकेगी ताकि अधिनियम को लागू करने में होने वाली कठिनाइयों को दूर किया जा सके।8 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 'दस)बर 2011 21. अधिनियम का अन्य विधियों पर अभिभावी नहीं होना।-इस अधिनियम के उपबन्ध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी उपबन्ध के अल्पीकरण में न होकर उसके अतिरिक्त होंगे। 22. सरकार को नियम बनाने की शक्ति।-(1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के सभी या किसी एक प्रयोजन को कार्यान्वित करने के लिए ऐसे नियम बना सकेगी जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हो। (2) इस धारा के अधीन बना प्रत्येक नियम, बनने के पश्चात्‌, यथाशीध्र, राज्य विधान मंडल के प्रत्येक सदन, में जब वह सत्र में हो, कुल चौदह दिनों की कालावधि तक, जो एक सत्र में समाविष्ट हो या दो उत्तरवर्त्ती सत्रों में, रखा जाएगा और यदि जिस सत्र में रखा जाय, उस सत्र के या ठीक पश्चात्‌वर्त्ती सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन नियम में कोई उपांतरण करने पर सहमत हों अथवा दोनों सदन सहमत हाें कि नियम बनाया ही न जाय, तो तदुपरांत नियम, यथास्थिति, ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी या निष्प्रभावी होगा, किन्तु ऐसा उपांतरण या बातिलिकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किए गए किसी कार्य की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। 23. निरसन और व्यावृत्ति।-(1) बिहार अभिधारी होल्डिंग (अभिलेखों का अनुरक्षण) अधिनियम, 1973 (बिहार अधिनियम, 28, 1975) को एतद्‌ द्वारा निरसित किया जाता है। (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अधिनियम के अधीन अथवा के द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में किया गया कोई कार्य या की गयी कार्रवाई इस अधिनियम के द्वारा अथवा अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में किया गया या की गयी मानी जाएगी, मानों उस दिन यह अधिनियम प्रवृत्त था।

वित्तीय संलेख

बिहार भूमि दाखिल-खारिज विधेयक, 2011 में भूमि के हस्तांतरण के आलोक में दाखिल-खारिज करने हेतु व्यापक प्रावधान किए गए हैं। साथ ही साथ राज्य के सभी अभिधारियों के होल्ंिडग की अलग-अलग खाता पुस्तिका तैयार करने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित विधेयक की धारा-10 में यथाविहित रीति से किसी राजस्व ग्राम में अभिधारी के होल्ंिडग की एक खाता-पुस्तिका तैयार करने का प्रस्ताव है। इस विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि संबंधित होल्ंिउग के अभिधारी को यथाविहित फीस के भुगतान किए जाने पर एक तय समय-सीमा के अन्तर्गत खाता-पुस्तिका उपलब्ध करायी जाएगी।

उपर्युक्त विधेयक के लाए जाने से वृहद्‌ लोकहित में निश्चित समय-सीमा के अन्तर्गत पारदर्शी रूप से दाखिल-खारिज की प्रक्रिया विनिश्चित करने के साथ-साथ राज्य के सभी अभिधारियों को खाता-पुस्तिका उपलब्ध कराई जा सकेगी, जिसमें उनके होल्ंिडग से संबंधित विवरण दर्ज होंगे। विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है ।

(रमई राम)

भारसाधक सदस्य।9 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 'दस)बर 2011

उद्‌देश्य एवं हेतु

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य वृहत्तर सार्वजनिक हित में राज्य में विभिन्न रिति से हस्तांतरित भूमि के दाखिल-खारिज मामलों के त्वरित एवं पारदर्शी निष्पादन के लिए कानूनी उपबन्ध करना है। प्रस्तावित विधेयक में भूमि के अन्तरिती को अवांछित तत्वों द्वारा दोहन से संरक्षण देना, दाखिल-खारिज याचिकाओं के नियमित दाखिल-खारिज न्यायालयों के अतिरिक्त नियत अवधि पर आयोजित किए जाने वालों शिविरों में निष्पादन के लिए कानूनी उपबन्ध करना तथा लोकोनमुखता द्वारा वृहत्तर पारदर्शिता एवं दाखिल-खारिज वादों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करना, और वर्त्तमान में लागू किसी विधि का उल्लंघन कर इस निमित्त निर्गत किसी कार्यपालक निर्देश का उल्लंघन कर सृजित जमाबन्दी को रद्‌द करना तथा किसी भी अनधिकृत जमाबन्दी को बातिल करने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में अवैध रूप से खोली गयी जमाबन्दियों को रद्‌द करने का मूल क्षेत्राधिकार अपर समाहर्त्ता का तथा अपीलीय एवं पुनरीक्षण हेतु क्रमशः जिला के समाहर्त्ता एवं प्रमंडलीय आयुक्त के क्षेत्राधिकार का प्रावधान भी किया गया है। इसके साथ ही राज्य में रैयतों के लिए खाता पुस्तिका के निर्माण का प्रावधान भी किया गया है। नियमित दाखिल-खारिज न्यायालय एवं शिविर न्यायालय में दाखिल-खारिज मामलों के निपटारे की समय-सीमा तय की गयी है तथा निपटारे में विलम्ब के लिए दायित्व के निर्धारण का प्रावधान भी किया गया है। सारांशतः इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य एवं हेतु राज्य में भूमि के क्रयोपरान्त क्रय की गयी भूमि का दाखिल-खारिज करने हेतु कानूनी उपबन्ध करना है, जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ट है।

(रमई राम)

भारसाधक सदस्य पटनाः

गिरीश झा, दिनांकः 07.12.2011

प्रभारी सचिव,

बिहार विधान-सभा।

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अधी.क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु'ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 785-571+10-ड+0ट+0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 21 December 2011. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2011-12-21.785/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2011-12-21.785.