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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 21 December 2011

Published 21 December 2011

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2011-12-21.790
Languages
English, Hindi

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ÑÅÖâà=ÑçLââìCäeââ^ ÑÅÖâà=ÑçLââìCäeââ^2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 %दस'बर 2011

बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त विधेयक, 2011

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प्रस्तावनाः-(i) चूँकि अद्यतन अधिकार-अभिलेखों का निर्माण एवं संधारण वह मूलाधार है जिसपर राजस्व एवं भूमि संसाधन प्रबन्धन तथा प्रशासन आधारित है; (ii) चूँकि अनुभव बताता है कि राज्य के कुछ भागों में, पारम्परिक पद्धतियों से कराए जा रहे सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त प्रचालन, दीर्घसूत्री, संश्लिष्ट तथा अत्यधिक खर्चीले हुए हैं; (iii) चूँकि पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज तथा अररिया में 1952 से 1986 तक; मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर एवं वैशाली में 1959 से 1988 तक; सहरसा, मधेपुरा एवं सुपौल में 1962 से 2002 तक पुनरीक्षण सर्वे प्रचालन संचालित किए गए तथा ये प्रचालन दरभंगा, मधुबनी एवं समस्तीपुर में 1965 से; भोजपुर, बक्सर, रोहतास तथा कैमूर में 1959 से; गया, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद तथा नवादा में 1965 से; भागलपुर तथा बाँका में 1965 से एवं पटना में 1986 से अब तक जारी हैं; (iv) चूँकि पुनरीक्षण सर्वे एवं बन्दोबस्त का प्रयोजन ही विफल हो जाता है यदि जिस कालखंड पर इसे लिया जाता है, वह पूर्व में यथा दर्शित सुदीर्घ हो; (v) चूँकि राज्य के 12 जिलों, यथा, मुंगेर प्रमंडल में बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, शेखपुरा, जमुई तथा मुंगेर; सारण प्रमंडल में सारण, सीवान तथा गोपालगंज; तिरहुत प्रमंडल में पूर्वी चम्पारण तथा पश्चिमी चम्पारण एवं पटना प्रमंडल में नालन्दा में कैडस्ट्रल सर्वेक्षण के बाद से कोई पुनरीक्षण सर्वे एवं बन्दोबस्त नहीं कराया जा सका; (vi) चूँकि चालू खतियान (पंजी-1-B), खेसरा पंजी एवं पंजी-II (Tenants' Ledger) जिन्हें अंचल कार्यालयों में अद्यतन रूप से संधारित किया जाना था, तदनुसार संधारित नहीं किए जा सके एवं परिणाम स्वरूप, समय-समय पर, हो रहे अन्तरण, उत्तराधिकार, दाखिल-खारिज आदि, उनमें प्रतिबिम्बित नहीं होते; (vii) चूँकि भारत सरकार द्वारा कुछ वर्ष पूर्व यथा प्रायोजित भू-अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण में समरूप दृष्टिकोण का अनुपालन नहीं किया गया; (viii) चूँकि कम्प्यूटर में प्रविष्ट तथ्यों का सरजमीन की अद्यतन वास्तविकताओं से तालमेल के अभाव में स्वामित्व के अनुवर्त्ती दावों तथा भू-अभिलेखों में उनके प्रतिबिम्बन के बीच खाई है; (ix) चूँकि सर्वेक्षण भाग पर लागत समय को न्यूनतम करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी उपलब्ध है, जबकि बन्दोबस्ती के पहलू का, गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा शिकायत-निवारण का परित्यजन किए बिना, न्यायसंगत संक्षेपीकरण किया जा सकता है; (x) चूँकि भूमि विकासात्मक गतिविधियों का मूलाधार है; हाल स्वामित्व, दखल एवं भूमि के वर्गीकरण को अन्तिम रूप से सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है ताकि भू-अर्जन का प्रचालन निराधार दावों, कपट तथा जालसाजी से दूषित न हो और साथ ही कृषि-ऋण, अनुदान, साहाय्‌य तथा बीमा से सम्बन्धित गतिविधियाँ सुगमतापूर्वक चलाई जा सकें; (xi) चूँकि आधुनिक प्रौद्योगिकी के द्वारा तैयार किए गए डिजिटल मानचित्रों कोे पारम्परिक विधियों से तैयार मानचित्रों से सत्यापित एवं तुलित करने की आवश्यकता है, साथ ही उनका सरजमीनी सत्यापन भी आवश्यक है, तकनीकी योग्यता रखने वाले अनुज्ञप्ति प्राप्त सर्वेयर को यह दायित्व दिया जा सकता है; (xii) चूँकि मानचित्र निर्माण के बाद के चरण में अद्यतन स्वत्व, स्वामित्व एवं दखल तथा भूमि की अन्य आवश्यक विवरणी को ध्यान में रखते हुए आधारभूत अधिकार अभिलेख तैयार करना आवश्यक है तथा पूर्वोक्त तकनीकी योग्यता प्राप्त व्यक्तियों को यह दायित्व एक नियमित आधार पर दिया जा सकता है; (xiii) चूँकि मानचित्र सहित, अधिकार अभिलेखों के संधारण की अन्तर्भूत कम्प्यूटरीकृत तथा डिजिटल व्यवस्था समस्त विकास प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है तथा पूर्वोक्त तकनीकी योग्यता प्राप्त व्यक्तियों को यह दायित्व एक नियमित आधार पर दिया जा सकता है। भारत गणराज्य के बासठवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नरूप में यह अधिनियमित हो :- 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ।-(1) यह अधिनियम बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त अधिनियम, 2011 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह उस तिथि से प्रवृत्त होगा जो सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे।3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 %दस'बर 2011 अध्याय-1 परिभाषाएँ 2. परिभाषाएँ।-(1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो, बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885, बिहार सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त हस्तक, 1959 तथा बिहार अभिधारी होल्डिंग (अभिलेखों का अनुरक्षण) अधिनियम, 1973 में उपबन्धित परिभाषाएं प्रचलित रहेंगी। (2) विशेष परिभाषाएँ।-इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न होः- (i) "अधिनियम" से अभिप्रेत है बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त अधिनियम, 2011; (ii) "समाहर्त्ता" से अभिप्रेत है जिला का समाहर्त्ता; (iii) "प्रारूप प्रकाशन" से अभिप्रेत है अधिकार-अभिलेख के प्रारूप का प्रकाशन, ताकि सर्वेक्षण प्राधिकारों के द्वारा की गयी प्रविष्टियों के बारे में जानने हेतु जनता को समर्थ किया जा सके। कोई भी व्यक्ति, जिसे प्रविष्टियों के विरूद्ध शिकायत हो, आपत्ति दायर कर सकेगा जिनकी सुनवाई एवं निपटारा किया जायेगा; (iv) "सरकार" से अभिप्रेत है बिहार सरकार ; (v) "अन्तिम प्रकाशन" से अभिप्रेत है खतियानों की स्वच्छ प्रतियाँ तैयार करना तथा सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त कार्यान्वयनों में उनका अन्तिम प्रकाशन; (vi) "जाँच" से अभिप्रेत है आपत्तियों के निपटारे के बाद की गयी अभिलेखों की अन्तिम जाँच; (vii) "खानापुरी" से अभिप्रेत है खतियान के स्तम्भों यथा- रैयत का नाम, खेसरा, दखल इत्यादि का सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त कार्यान्वयनों के प्रारम्भिक अभिलेख-लेखन चरण में, भरा जाना। (viii) "खेसरा" से अभिप्रेत है मानचित्र के अनुसार क्रमानुसार संख्यांकित भूखण्डों की, दखलकारों, रकबा तथा भू-खंडवार वर्गीकरण दर्शानेवाली सूची; (ix) "खतियान" से अभिप्रेत हैं भूमि की भू-खंड संख्या, रकबा, गुणवत्ता तथा दखल सहित रैयतों के अधिकारों का एक अभिलेख; (x) "भूधारी" से अभिप्रेत है बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 में परिभाषित भूधारी; (xi) "अनुज्ञप्तिधारी सर्वेयर" से अभिप्रेत भूखण्डों की नापी, माप के अनुसार स्केच मैप/मैप बनाने में तकनीकी रूप से अर्हताप्राप्त, सर्वेक्षण तथा बन्दोबस्ती से सम्बन्धित कार्य तथा समय-समय पर यथा समनुदेशित ऐसे कार्य को क्रियान्वयन, के लिए निदेशक, भू-अभिलेख एवं परिमाप, बिहार से अनुज्ञप्ति प्राप्त व्यक्ति; (xii) "विहित" से अभिप्रेत है इस अधिनियम एवं इसके अधीन बनी नियमावली द्वारा विहित;

(xiii) "विहित फीस" से अभिप्रेत है अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर की सेवाएँ लेने के लिए रैयतों के द्वारा भुगतेय राशि; (xiv) "पारिश्रमिक" से अभिप्रेत है अनुज्ञप्ति प्राप्त सर्वेयर की सेवा लेने के लिए सरकार या किसी अन्य सार्वजनिक निकाय के द्वारा भुगतेय राशि; (xv) ''किस्तवार'' से अभिपे्रत है कृषि के अनुसार भूमि का परिमापन तथा भूखंडकरण; (xvi) ''मुकाबला'' से अभिपे्रत है तुलना; (xvii) ''रदीफ'' से अभिप्रेत है व्यवस्थित करना; (xviii) ''अधिकार-अभिलेख'' से अभिप्रेत है श्रेणी, स्वामित्व, स्वरूप, रकबा इत्यादि के साथ सर्वेक्षित भूमि की प्रविष्टि। अन्तिम प्रकाशन के बाद, इसकी शुद्धता की कानूनी उपधारणा होती है; (xix) ''विश्रान्ति'' से सामान्यतया अभिपे्रत है वह चरण जिसके दौरान खानापुरी चरण के बाद वाले चरण के लिए अभिलेख तैयार किए जाते हैं; (xx) ''पुनरीक्षण सर्वेक्षण'' से अभिप्रेत है भू-अभिलेखों को अद्यतन करने हेतु कैडस्ट्रल सर्वेक्षण के नील मानचित्र के आधार पर प्रारम्भ किए गए तथा संचालित सर्वेक्षण कार्यान्वयन; (xxi) ''सफाई'' से अभिप्रेत है स्वच्छ प्रति तैयार करना; (xxii) ''बन्दोबस्त'' से अभिप्रेत है किसी जिले या किसी क्षेत्र में भू-राजस्व निर्धारण निश्चित करने हेतु प्रचालित सर्वे का कार्यान्वयन; (xxiii) ''राज्य'' से अभिपे्रत है बिहार राज्य; (xxiv) ''तरमीम'' से अभिप्रेत है शुद्धीकरण आदेश का अनुपालन; (xxv) ''तरतीब'' से अभिप्रेत है अभिलेखों का व्यवस्थापन; रैयतों के नामों के अनुसार खतियान को वर्णानुक्रम में व्यवस्थित करना।4 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 %दस'बर 2011 अध्याय-2 विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त 3. राजपत्र में आशय की अधिसूचना।-राजपत्र में अधिसूचना के द्वारा, सरकार सम्पूर्ण राज्य या इसके किसी भाग में, इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त चलाने का आशय अभिव्यक्त कर सकेगी। 4. चालू सर्वेक्षण कार्यान्वयनों का पुनर्गठन।-सरकार, आदेश के द्वारा, सम्बन्धित जिलों में चालू पुनरीक्षण सर्वे कार्यान्वयनोंं को, इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप, जहाँ तक यह आवश्यक समझा जाए, विहित रीति से, लाने के लिए पुनर्गठन कर सकेगी तथा इस परिवर्त्तन के कारण पूर्ववर्त्ती कार्यवाहियों को किसी हद तक अवैध नहीं समझा जाएगा। 5. भूधारियों द्वारा स्वघोषणा।-धारा-3 के अधीन अधिसूचना के उपरान्त, कोई भूधारी अपने स्वामित्व के/धारित भू-खण्डों की, स्वघोषणा, विहित रीति स,े सम्बन्धित अंचल कार्यालय/शिविर कार्यालय में समर्पित कर सकेगा। अंचल कार्यालय स्वघोषणा का सत्यापन उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर करेगा एवं सत्यापन प्रमाण-पत्र निर्गत करेगा। 6. आधुनिक तकनीक द्वारा किस्तवार।-(1) किसी राजस्व ग्राम के किस्तवार का क्रियान्वयन, आधुनिक प्रौद्योगिकी के द्वारा, धरातल मानचित्रण, सीमांकन तथा जमीनी सत्यापन के सहित, इस निमित्त अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकेगा। (2) किस्तवार कार्यान्वयन, स्थानीय स्तर पर, पंचायती राज संस्थाओं तथा सम्बन्धित ग्रामों की जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने एवं सुविधा देने के लिए सम्यक्‌ रूप से प्रचारित किया जायेगा। 7. खानापुरी दलों का गठन तथा अधिकार-अभिलेख प्रारूप की तैयारी।-(1) किस्तवार कार्यान्वयनों के लिए उत्तरदायी अभिकरण एवं अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयरों के सहयोग से आधारभूत अधिकार अभिलेख को अद्यतन तथा तैयार करने के लिए सम्बन्धित राजस्व ग्रामों में खानापुरी दलों का गठन किया जायेगा। (2) खानापुरी दल में समाविष्ट होंगे : (i) सम्बन्धित अंचल कार्यालय का एक पदाधिकारी/राजस्व कर्मचारी; (ii) निदेशक, भू-अभिलेख एवं परिमाप के प्रतिनिधि; (iii) कोई अन्य पदाभिहित पदाधिकारी/कर्मी। (3) सरकार, रैयतों के लिए सूचनाओं की तैयारी एवं सम्बन्धित रैयतों को उनका तामिला करने तथा उनपर आपत्तियाँ आमंत्रित करने सहित, पूर्णतः या अंशतः प्रारम्भिक अधिकार अभिलेख की तैयारी में किसी निजी एजेन्सी को लगा सकेगी। सूचनाओं पर आपत्तियाँ विहित रीति से संग्रहित एवं संकलित की जाएंगी। (4) आधारभूत अधिकार अभिलेख तैयार करते समय खानापुरी दल रैयती जोतों के अधिकार, स्वत्व तथा स्वामित्व के निर्धारण के विषय में अद्‌यतन जमीनी वास्तविकताओं, परिवर्त्तनों, अन्तरणों, उपविभाजनों, बंटवारों, आनुवंशिक न्यागमन, बदलैन तथा ऐसी अन्य बातों का ध्यान रखेगा। (5) खानापुरी दल लोक भूमि, सरकारी भूमि, सार्वजनिक परिसम्पत्ति, संसाधन के रूप में ली जानेवाली भूमि तथा अन्य ऐसी भूमि की पहचान तथा सीमांकन करेगा एवं उसे अधिकार- अभिलेख में अभिलिखित करेगा। (6) दावोंं एवं आपत्तियों, अगर कोई हाें, का निपटारा कानूनगो/अंचल निरीक्षक/सहायक चकबंदी पदाधिकारी से अन्यून पंक्ति के कर्मचारी/पदाधिकारी द्वारा, विहित रीति से, किया जायेगाः परन्तु लोक भूमि से सम्बन्धित दावों एवं आपत्तियों का निपटारा सहायक बन्दोबस्त पदाधिकारी/अंचल अधिकारी/चकबंदी पदाधिकारी की पंक्ति से अन्यून पदाधिकारी द्वारा किया जायेगा। उपर्युक्त रीति से तैयार किए गए अधिकार-अभिलेख को अधिकार-अभिलेख प्रारूप कहा जाएगा। 8. खानापुरी अधिकार-अभिलेख प्रारूप का प्रकाशन।-किस्तवार एवं खानापुरी के दौरान तैयार किए गए मानचित्रों सहित अधिकार-अभिलेख प्रारूप को, सम्बन्धित राजस्व ग्राम में, इस सम्बन्ध में विहित प्रक्रिया के अनुसार, प्रकाशित किया जाएगा। 9. खानापुरी अधिकार-अभिलेख पर आपत्तियों को आमन्त्रित किया जाना।-सम्बन्धित राजस्व ग्राम में खानापुरी कार्यान्वयन के अन्त में दावों एवं आपत्तियों का आमंत्रण एवं संकलन किया जायेगा तथा सहायक बन्दोबस्त पदाधिकारी/अंचल अधिकारी/चकबंदी पदाधिकारी की पंक्ति से अन्यून पदाधिकारी द्वारा, विहित रीति से, निपटारा किया जायगाः परन्तु वैसे मामलों की, जिसमें दावों एवं आपत्तियों पर निर्णय इस अधिनियम की धारा-7 के अधीन सहायक बन्दोबस्त पदाधिकारी/अंचल अधिकारी/चकबंदी पदाधिकारी के द्वारा किया गया हो, सुनवाई एवं निपटारा उसी पदाधिकारी द्वारा नहीं किया जाएगा। 10. विश्रान्ति के दौरान कार्य।-अधिनियम की क्रमशः धारा-7 एवं 9 के अनुसार आपत्तियों तथा अपीलों के निपटारा के बाद, विश्रान्ति में जाँच, सफाई, मुकाबला, रदीफ, तरतीब, तरमीम इत्यादि विहित रीति से किये जाएंगे।5 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 %दस'बर 2011 11. अधिकार-अभिलेख का अन्तिम प्रकाशन।-(1) अधिनियम की धारा-10 के अधीन विश्रान्ति के दौरान कार्य समापन के उपरान्त, किसी राजस्व ग्राम के अधिकार-अभिलेख का अन्तिम प्रकाशन, विहित रीति स,े जिला के समाहर्त्ता के हस्ताक्षर एवं मुहर के अधीन किया जाएगा। (2) अधिकार-अभिलेख के सम्बन्ध में दावे एवं आपत्तियाँ, उसके अंतिम प्रकाशन के 3 माह के भीतर दायर किये जा सकेंगेे तथा वैसे दावों एवं आपत्तियों का निपटारा, विहित रीति से, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता से अन्यून पंक्ति के पदाधिकारी द्वारा किया जायेगा। (3) अन्तिम रूप से प्रकाशित अधिकार-अभिलेख की एक प्रति सम्बन्धित अंचल कार्यालय को दिन-प्रतिदिन के राजस्व प्रशासन में अनुवर्त्ती कार्रवाई के लिए पे्रषित की जाएगी। 12. अधिकार अभिलेख के अंतिम प्रकाशन की उपधारणा एवं शुद्धता।-(1) इस अधिनियम के अधीन अंतिम रूप से तैयार एवं प्रकाशित अधिकार-अभिलेख अंतिम रूप से प्रकाशित उपधारित किया जाएगा। (2) राज्य सरकार, किसी क्षेत्र विशेष के सम्बन्ध में, अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि उस क्षेत्र के भीतर सभी ग्रामों के अधिकार-अभिलेखों को अंतिम रूप से प्रकाशित कर दिया गया है तथा उक्त अधिसूचना उस प्रकाशन का निर्णायक साक्ष्य मानी जाएगी। (3) उस प्रकार प्रकाशित अधिकार-अभिलेख की प्रत्येक प्रविष्टि उक्त प्रविष्टि से सम्बन्धित विषय का साक्ष्य होगी, तथा उसे तबतक शुद्ध उपधारित किया जायेगा, जब तक साक्ष्य द्वारा उसे अशुद्ध साबित नहीं कर दिया जाता। 13. विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त के बाद चकबन्दी।-(1) इस अधिनियम के अधीन विशेष सर्वेक्षण तथा बन्दोबस्त से आच्छादित राजस्व ग्रामों में बिहार जोत समेकन एवं खंडकरण निवारण अधिनियम, 1956 में यथा उपबन्धित चकबन्दी का प्रचालन किया जाएगा। विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त में लगे कार्यबल को, आवश्यकतानुसार चकबन्दी प्रचालनों में लगाया जा सकेगा। (2) स्वैच्छिक चकबन्दी/भूमि के विनिमय को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा उसके लिए सम्यक्‌ लोक सूचना आधार सृजित किया जाएगा। 14. डिजिटल प्ररूप में अभिलेखों का संधारण।-सृजित अभिलेखों की प्रति को, विहित रीति से, डिजिटल प्ररूप में संधारित किया जा सकेगा।

अध्याय-3 अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर 15. अनुज्ञप्ति दिया जाना तथा सूचीकरण।-(1) निदेशक, भू-अभिलेख एवं परिमाप, बिहार, इस निमित्त अधिकथित नियमों के अनुसार अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयरों के रूप में नामांकित होने के लिए इच्छुक व्यक्तियों से आवेदन आमंत्रित करेंगे। (2) अनुज्ञप्ति की मंजूरी हेतु इच्छुक आवेदक के पास इस निमित्त अधिकथित नियमों में तकनीकी अर्हता एवं अनुभव होना चाहिए। (3) निदेशक, भू-अभिलेख एवं परिमाप, बिहार उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का नामांकन करेंगे तथा सूची को जिला समाहर्त्ताओं के पास जैसे, जब और जहाँ अपेक्षित हो, इस संबंध में निर्गत होनेवाले कार्यपालक अनुदेशों के अनुसार, उपयोग हेतु भेज देंगे। 16. अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयरों के कर्त्तव्य।-(i) यथा रैयतों के द्वारा आवेदित स्केच/स्केल मैप तैयार करना; (ii) किसी सरकारी प्राधिकार या सार्वजनिक निकाय के द्वारा यथापेक्षित स्केल मैप तैयार करना; (iii) भू-अर्जन कार्यवाहियों में अधियाची निकाय के द्वारा यथापेक्षित स्केल मैप तैयार करना; (iv) कैडस्ट्रल तथा पुनरीक्षण सर्वेक्षणों के दौरान तैयार किए गए मानचित्रों को अद्यतन करना; (v) आधुनिक प्रौद्योगिकी के द्वारा तैयार किए गए डिजिटल मानचित्रों को सत्यापित करना एवं सरजमीन सत्यापन कार्य करना; (vi) क्षेत्रीय सर्वेक्षण तथा बन्दोबस्त प्रचालनों के दौरान, मानचित्र-निर्माण के बाद के चरण में अधिकार-अभिलेख तैयार करना, साथ ही, राजस्व कार्यालयों में संधारित राजस्व अभिलेखों के अद्यतनीकरण में सहायता पहुँचाना; (vii) राजस्व कार्यालयों के बीच अन्तर-सम्बद्धीकरण में सहायता पहुँचाना; (viii) चकबन्दी की कार्यवाहियों के दौरान मानचित्र एवं अधिकार-अभिलेख तैयार करना; (ix) निदेशक, भू-अभिलेख एवं परिमाप, बिहार/किसी जिला के समाहर्त्ता के द्वारा प्रदत्त कोई अन्य अनुषंगी दायित्व। 17. अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयरों के बीच कार्य-वितरण।- समाहर्त्ता या जिले का अन्य कोई राजस्व पदाधिकारी संबंधित राजस्व कार्यालय में उपलब्ध अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयरों के बीच कार्य का वितरण कर सकेगा। 18. फीस तथा पारिश्रमिक।-(1) राज्य सरकार द्वारा नाम निर्दिष्ट प्राधिकार अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर द्वारा किए जाने वाले विभिन्न कार्यांे के लिए फीस/पारिश्रमिक निश्चित करने हेतु सक्षम होगा।6 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 %दस'बर 2011 (2) धारा-5 में उपबंधित कार्य किसी निजी व्यक्ति को सेवाएँ अर्पित करने की दशा में वह व्यक्ति, आवेदन प्रपत्र के साथ, यथा विहित राशि संबंधित राजस्व कार्यालय में जमा करेगा। राजस्व पदाधिकारी फीस का कुछ हिस्सा, यथाविहित रीति से, वर्त्तमान अधिकार-अभिलेख की प्रतिया,ँ अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर को आपूरित करने के निमित्त, अनुषंगी व्यय के रूप में काट लेगा। शेष राशि, बतौर फीस, उस अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर को, जिसे कार्य आवंटित हुआ हो, कार्य के संतोषजनक समापन के उपरान्त भुगतेय होगी।

(3) अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर के द्वारा तैयार किए गए स्केच मैप/स्केल मैप का संबंधित अंचल के पदाधिकारी/स्टाफ के द्वारा सत्यापन किया जाएगा तथा निष्कर्ष, लिखित रूप में, अभिलिखित किए जाएँगे। कार्य असंतोषजनक पाये जाने की दशा में, संबंधित अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर को, विषय, नए सिरे से कार्य क्रियान्वित करने के लिए, पुनपर््रेषित कर दिया जाएगा।

(4) यदि किसी अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर को, किसी सरकारी विभाग, भू-अर्जन से सम्बन्धित अधियाची निकाय या किसी सार्वजनिक निकाय, संस्था या प्राधिकार के द्वारा, कोई कार्य सौंपा गया हो, तो अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर को, विहित रीति से, पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा।

(5) यदि अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर को सर्वेक्षण, बन्दोबस्त या चकबन्दी प्रचालनों के दौरान मानचित्र/अधिकार-अभिलेख को तैयार करने से संबंधित या अधिकार-अभिलेख के अद्यतनीकरण तथा इसी प्रकार का कार्य दिया जाता है तो उसे, विहित रीति से, पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा। 19. अनुज्ञप्ति का रद्दकरण।-कर्त्तव्यों की अवहेलना, असंतोषप्रद क्रिया-कलाप अथवा अन्य किसी सिद्ध कदाचार के मामले में, निदेशक, भू-अभिलेख एवं परिमाप द्वारा या तो स्वप्रेरणा से अथवा जिला के समाहर्त्ता द्वारा इस आशय से की गयी अनुशंसा पर, अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर की अनुज्ञप्ति रद्द की जा सकेगी।

अध्याय-4 विविध 20. अधिनियम का अन्य विधियों पर अभिभावी होना।-(1) तत्समय प्रवृत्त अन्य किसी विधि या परम्परा या प्रचलन, जिन्हें किसी विधि या संविदा या न्यायनिर्णय का बल प्राप्त हो, किसी न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकार के डिक्री या आदेश में, अंतर्विष्ट इन प्रावधानों से असंगत होने पर भी इस अधिनियम के प्रावधान अभिभावी होंगे। (2) बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885, बिहार सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त हस्तक, 1959, तकनीकी नियमावलियों तथा बिहार अभिधारी होल्डिंग (अभिलेखों का अनुरक्षण) अधिनियम, 1973, में अधिकथित सर्वे एवं बन्दोबस्त के लिए प्रक्रिया, इस अधिनियम के प्रावधानों, इसके अधीन निर्मित नियमों तथा उसके अधीन बनाये गए हस्तक तथा अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए, समय-समय पर, निर्गत मार्गदर्शनों द्वारा यथास्थिति, अवक्रमित, संशोधित या अनुपूरित मानी जाएगी। स्पष्टीकरण।- तत्समय प्रवृत्त उपयुक्त विधि के अधीन की गई पूर्व में सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त कार्यवाही इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के बाद किसी भी हदतक अवैध नहीं मानी जायेगी। 21. कतिपय मामलों में राज्य का अनिवार्य पक्षकार होना।-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के किसी प्रावधान में किसी बात के अन्तर्विष्ट होने पर भी, ऐसे मामलों में, जो ऐसी भूमि या उसके अंश से सम्बन्धित हों, जो पूर्व में किसी भी नामकरण से लोक भूमि के रूप में, अभिलिखित हो, राज्य एक अनिवार्य पक्षकार होगा। 22. कार्यवाहियों का संक्षिप्त निपटारा।-इस अधिनियम के अधीन सभी कार्यवाहियों का, इस अधिनियम के प्रावधानों एवं इसके अधीन निर्मित नियमों के अनुसार, संक्षिप्त निपटारा किया जाएगा। 23. अन्तिम प्रकाशन तक अधिकारिता का वर्जन।-इस अधिनियम में उपबंधित स्पष्ट रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, पटना उच्च न्यायालय तथा भारत के उच्चतम न्यायालय को छोड़कर, इस अधिनियम या इसके अध्यधीन निर्मित नियमों के अधीन किसी प्राधिकार के द्वारा पारित किसी आदेश या लिए गए निर्णय को निरस्त या उपांतरित करने हेतु या उसकी वैधता को प्रश्नगत करने वाले या इस अधिनियम के दायरे में पड़नेवाले किसी मामले के सम्बन्ध में किसी वाद या अन्य कार्यवाही को ग्रहण नहीं करेगा जबतक इस अधिनियम की धारा-12 के अधीन अधिकार-अभिलेख का अन्तिम प्रकाशन नहीं हो जाता है। 24. निदेश देने की शक्ति।-राज्य सरकार, इस अधिनियम को प्रभावी करने के प्रयोजनार्थ, राज्य के अधीनस्थ किसी अधिकारी, प्राधिकार या व्यक्ति को यथोचित निदेश निर्गत करने में सक्षम होगी। 25. तकनीकी मार्गदर्शिका निर्मित करने की शक्ति।-निदेशक, भू-अभिलेख एवं परिमाप, बिहार को, इस अधिनियम के सभी या किन्हीं प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए, तकनीकी मार्गदर्शिका निर्मित करने की शक्ति होगी। 26. सद्‌भाव से किए गए कार्यों का संरक्षण।-इस अधिनियम के अधीन या इसके अध्यधीन निर्मित नियमों के अधीन सद्‌भावना पूर्वक किए गए या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए, किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य कानूनी कार्यवाहियाँ संस्थित नहीं की जाएंगी। 27. कठिनाइयाँ दूर करने की शक्ति।-यदि इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार बिहार राजपत्र में आदेश द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों और प्रावधानों से संगत ऐसे प्रावधान कर सकेगी जो कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक तथा समीचीन प्रतीत हो।7 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 %दस'बर 2011 28. नियमावली बनाने की सरकार की शक्ति।-(1) इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों या किसी प्रयोजन को क्रियान्वित करने के लिए, सरकार, राजपत्र में अधिसूचना के द्वारा, नियमावली बना सकेगी। (2) विशेष रूप से तथा पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निम्नलिखित सभी या किसी विषय के लिए नियम का प्रावधान कर सकेगी :- (i) कार्यवाही के संक्षिप्त निपटारे की रीति; (ii) सक्षम प्राधिकार के द्वारा प्रतिवेदन तथा रिटर्न समर्पित किए जाने की रीति; (iii) सक्षम प्राधिकार के द्वारा आवेदनों की सुनवाई करने की रीति; (iv) किसी धनराशि को सरकारी लेखा में जमा किए जाने की रीति; (v) स्थानीय जांच पड़ताल के लिए नियुक्त कमीशन की शक्तियां; (vi) अभिलेखों एवं पंजियों का संधारण एवं नोटिसों का प्रदर्शन; (vii) दायर आवेदन या शिकायत दर्ज करने की रीति; (viii) कोई अन्य विषय जिसे विहित किया जाना अपेक्षित हो या जिसे विहित किया जाए।

वित्तीय संलेख

बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त विधेयक, 2011 में आधुनिक प्रौद्योगिकी के द्वारा तैयार किए गए डिजिटल मानचित्रों को पारम्परिक विधियों से तैयार मानचित्रों से सत्यापित करने एवं तुलित करने तथा उनके सरजमीनी सतयापन की आवश्यकता को देखते हुए तकनीकी योग्यता रखनेवाले अनुज्ञप्ति प्राप्त सर्वेयर को यह दायित्य देने का प्रावधान किया गया है।

इस हेतु विधेयक की धारा-18 (1) में राज्य सरकार द्वारा नाम निर्दिष्ट प्राधिकार को सक्षम प्राधिकार बनाया गया है जो अनुज्ञप्ति प्राप्त सर्वेयर द्वारा किए जानेवाले विभिन्न कार्यों के लिए फीस/पारिश्रमिक निश्चित करेगा । प्रस्तावित विधेयक की धारा-18 (2) में किसी भूधारी द्वारा अपने स्वामित्व के भूखंडों के सत्यापन के लिए आवेदन देकर यथा विहित राशि सम्बन्धित राजस्व कार्यालय में जमा करने का प्रस्ताव है। इस राशि में से कुछ हिस्सा वर्त्तमान अधिकार अभिलेख की प्रतियाँ अनुज्ञप्ति प्राप्त सर्वेयर को जिसे कार्य आवंटित हुआ है, कार्य के संतोषजनक समापन के उपरान्त बतौर फीस भुगतान करने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित विधेयक की धारा-18 (4) में किसी सरकारी विभाग, भू-अर्जन से सम्बन्धित अधियाची निकाय या किसी सार्वजनिक निकाय, संस्था या प्राधिकार के द्वारा अनुज्ञप्ति प्राप्त सर्वेयर को सौंपे गए किसी कार्य के लिए विहित रीति से भुगतान करने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित विधेयक की धारा-18 (5) में अनुज्ञप्ति प्राप्त सर्वेयर को सर्वेक्षण, बन्दोबस्त या चकबन्दी प्रचालनों के दौरान मानचित्र/अधिकार अभिलेख को तैयार करने से सम्बन्धित या अधिकार अभिलेख के अद्यतनीकरण या इसी प्रकार का कार्य दिए जाने पर उसे विहित रीति से पारिश्रमिक दिए जाने का प्रस्ताव है। उपर्युक्त विधेयक के लाए जाने से लोक हित में कम से कम समय में आधुनिक प्रौद्योगिकी एवं नयी प्रक्रियाओं के तहत भू-अधिकार अभिलेखों का निर्माण हो सकेगा।

विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।

(रमई राम) भारसाधक सदस्य8 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21 %दस'बर 2011 उद्‌देश्य एवं हेतु

इस विधेयक का उद्देश्य कम से कम समय में नई प्रक्रियाओं के हित भू-अधिकार अभिलेखों का निर्माण करना है। ऐसा प्रावधान किया जा रहा है कि सर्वेक्षण प्रक्रिया में आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए बन्दोबस्ती प्रक्रिया की गुणवत्ता तथा शिकायत निवारण का परित्यजन किए बिना, न्यायसंगत तरीके से समस्त प्रक्रिया का संक्षेपीकरण किया जाए। इस विधेयक में आधुनिक प्रौद्योगिकी के द्वारा तैयार किए गए डिजीटल मानचित्रों को पारम्परिक विधियों से तैयार मानचित्रों से सत्यापित एवं तुलित करने तथा उनके सरजमीन पर सत्यापन करने हेतु तकनीकी योग्यता रखनेवाले अनुज्ञप्ति के रद्दकरण से सम्बन्धित प्रावधान भी किए गए हैं। जिन राजस्व ग्रामों में विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्ती की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है, उन ग्रामों में बिहार जोत समेकन एवं खंडकरण निवारण अधिनियम, 1956 के तहत चकबन्दी का प्रचालन करने तथा बन्दोबस्ती प्रक्रिया में लगे कार्यबल को आवश्यकतानुसार चकबन्दी प्रचालनों में लगाने का प्रावधान इस विधेयक में किया गया है। इसके साथ ही विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबसती के बाद निर्मित अभिलेखों की प्रति को डिजीटल प्रारूप में रखने का भी प्रावधान किया गया है।

सारांशतः इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य एवं हेतु अल्प समय में अधिकार अभिलेखों का निर्माण करना एवं अन्तर्भूत कम्प्यूटरीकृत तथा डिजीटल व्यवस्था के तहत भू-अधिकार अभिलेखों का संधारण करना है, जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ठ है।

(रमई राम) भारसाधक सदस्य पटनाः दिनांकः 07.12.2011

गिरीश झा, प्रभारी सचिव, बिहार विधान-सभा।

———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु%ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 790-571+10-ड)0ट)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 21 December 2011. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2011-12-21.790/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2011-12-21.790.