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(दर0) 16-02/05/1374—श्री श्रीकान्त ठाकुर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी श्रीकान्त ठाकुर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी सं॰ 22/नि.सि. (दर0) 16-02/05 कोशी नहर प्रमंडल सं0-1, सकरी को उनके पहले पत्नी को जीवित रहते हुए उनकी इच्छा के विरूद्ध दूसरी शादी 1, सकरी को उनके पहले पत्नी को जीवित रहते हुए उनकी इच्छा के विरूद्ध दूसरी शादी 1, सकरी को उनके पहले पत्नी को जीवित रहते हुए उनकी इच्छा के विरूद्ध दूसरी शादी दिनांक 19 अप्रील 2005 करने तथा पहली पत्नी को प्रताड़ित करने के आरोप में विभागीय आदेश ज्ञापांक 1499 करने तथा पहली पत्नी को प्रताड़ित करने के आरोप में विभागीय आदेश ज्ञापांक 1499, दिनांक 19 विभागीय कार्यवाही द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प सं0 427, दिनांक 6 मई 2005 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प सं0 427 प्रांरभ की गई। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर करने के विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर करने के विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर करने के 811/2006 दायर किया गया। उक्त क्रम में ही श्री ठाकुर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका सी.डब्लू.जे.सी. 811/2006 दायर किया गया। उक्त क्रम में ही श्री ठाकुर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका सी 06 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया कि वादी श्री ठाकुर मामलों में दिनांक 24 जनवरी 2006 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया कि वादी श्री ठाकुर 06 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया कि वादी श्री ठाकुर के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में जॉच पदा0 से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन पर तीन माह के अन्दर निर्णय लिया के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में जॉच पदा0 से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन पर तीन माह के अन्दर निर्णय लिया के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में जॉच पदा0 से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन पर तीन माह के अन्दर निर्णय लिया जाय। न्याय निर्णय के आलोक में जॉंच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि इस आरोप के न्याय निर्णय के आलोक में जॉंच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि इस आरोप के संबंध में श्री ठाकुर की प्रथम पत्नी द्वारा एक मामला व्यवहार न्यायालय में दायर किया गया है, जो माननीय संबंध में श्री ठाकुर की प्रथम पत्नी द्वारा एक मामला व्यवहार न्यायालय में दायर किया गया है, जो माननीय संबंध में श्री ठाकुर की प्रथम पत्नी द्वारा एक मामला व्यवहार न्यायालय में दायर किया गया है, जो माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। अतएव मामले के सम्यक् विचारोपरांत सरकार द्वारा निम्न निर्णय लिया गयाः- न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। अतएव मामले के सम्यक् विचारोपरांत सरकार द्वारा निम्न निर्णय लिया गयाः- न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। अतएव मामले के सम्यक् विचारोपरांत सरकार द्वारा निम्न निर्णय लिया गयाः- (i) तत्काल श्री ठाकुर को निलम्बनमुक्त कि तत्काल श्री ठाकुर को निलम्बनमुक्त किया जाय। (ii) निलम्बन अवधि के वेतनादि के संंबंध में निर्णय व्यवहार न्यायालय में चल रहे मामले के समाप्ति निलम्बन अवधि के वेतनादि के संंबंध में निर्णय व्यवहार न्यायालय में चल रहे मामले के समाप्ति निलम्बन अवधि के वेतनादि के संंबंध में निर्णय व्यवहार न्यायालय में चल रहे मामले के समाप्ति के बाद माननीय न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय के आधार पर लिया जाएगा। के बाद माननीय न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय के आधार पर लिया जाएगा।
सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना-सह-ज्ञापांक 406, दिनांक 17 सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना-सह-ज्ञापांक 406 दिनांक 17 अप्रील 2006 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 29 (दस*बर 2011 तदुपरांत पारित न्याय निर्णय के आलोक में पूरे मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक् समीक्षोपरांत श्री ठाकुर को दोषमुक्त करने का निर्णय लेते हुए निलम्बन अवधि को कत्र्तव्य अवधि मानते हुए जीवन निर्वाह भत्ता की भुगतान की गई राशि से समायोजित कर पूर्ण वेतनादि भुगतान करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उक्त निर्णय श्री श्रीकान्त ठाकुर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवा-निवृत अधीक्षण अभियंता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, सरकार के उपसचिव ।
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अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु(ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 816-571+10-ड,0ट,0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in