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सं॰ 22/नि0सि0(डा0)-13-01/2005
बहार से दिनांक 30 सितम्बर 2004 को सेवा-निवृत हो जाने के कारण जल संसा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। पाया गया 22/नि0सि0(डा0)-13-01/2005/1373—श्री श्यामानन्द राम, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता श्री श्यामानन्द राम, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता जल संसाधन विभाग, डाल्टेनगंज (झ 04 द्वारा उक्त पद जल संसाधन विभाग, डाल्टेनगंज (झारखण्ड) सम्प्रति सेवा-निवृत दिनांक 30 सितम्बर 2004 द्वारा उक्त पद पर पदस्थापन अवधि वर्ष 2003 में सोलह(16) चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को तृतीय वर्ग में दी गई अनियमित पर पदस्थापन अवधि वर्ष 2003 में सोलह(16) चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को तृतीय वर्ग में दी गई अनियमित पर पदस्थापन अवधि वर्ष 2003 में सोलह(16) चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को तृतीय वर्ग में दी गई अनियमित प्रोन्नति की जॅाच जल संसाधन विभाग, झारखण्ड द्वारा की गई। इस बीच श्री राम मुख्य अभियन्ता जल प्रोन्नति की जॅाच जल संसाधन विभाग, झारखण्ड द्वारा की गई। इस बीच श्री राम मुख्य अभियन्ता जल प्रोन्नति की जॅाच जल संसाधन विभाग, झारखण्ड द्वारा की गई। इस बीच श्री राम मुख्य अभियन्ता जल निवृत हो जाने के कारण जल संसाधन संसाधन विभाग, बिहार से दिनांक 30 सरकारी पत्रांक 983 दिनांक 10 मार्च 2005 द्वारा संबंधित अभिलेखों की 05 द्वारा संबंधित अभिलेखों की विभाग, झारखण्ड, रॅाची के अर्द्ध-सरकारी पत्रांक 983 दिनांक 10 -निवृत मुख्य अभियन्ता के विरुद्ध बिहार छाया प्रति जल संसाधन विभाग, बिहार भेजते हुए श्री राम सेवा-निवृत मुख्य अभियन्ता के विरुद्ध छाया प्रति जल संसाधन विभाग, बिहार भेजते हुए श्री राम सेवा यमावली के नियम 43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही करने की अनुशंसा की गई। यमावली के नियम 43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही करने की अनुशंसा की गई। पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही करने की अनुशंसा की गई। जल संसाधन विभाग, झारखण्ड, रॅाची से प्राप्त अभिलेखों के आलोक में मामले की सरकार के स्तर जल संसाधन विभाग, झारखण्ड, रॅाची से प्राप्त अभिलेखों के आलोक में मामले की सरकार के स्तर जल संसाधन विभाग, झारखण्ड, रॅाची से प्राप्त अभिलेखों के आलोक में मामले की सरकार के स्तर पर समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त उक्त वर्णित प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम सेवा-निवृत मुख्य पर समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त उक्त वर्णित प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम सेवा पर समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त उक्त वर्णित प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम सेवा 3 बी0 के तहत विभागीय संकल्प सं0 1440, बिहार पेेशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत विभागीय संकल्प सं0 अभियन्ता के विरुद्ध बिहार पेेशन नियमावली के नियम 4 05 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। दिनांक 17 नवम्बर 2005 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की कि श्री राम के विरुद्ध निम्न आरोप गठि
निम्न आरोप गठित किए गये।
मुख्य अभियन्ता, डाल्टेनगंज में अपने कार्यवधि में आपने (श्री राम) 16 अद्द चतुर्थवर्गीय (1) मुख्य अभियन्ता, डाल्टेनगंज में अपने कार्यवधि में आपने (श्री राम) 16 अद्द चतुर्थवर्गीय मुख्य अभियन्ता, डाल्टेनगंज में अपने कार्यवधि में आपने (श्री राम) 16 अद्द चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को तृतीय वर्ग कर्मचारी के पद पर अपने अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए कर्मचारियों को तृतीय वर्ग कर्मचारी के पद पर अपने अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए कर्मचारियों को तृतीय वर्ग कर्मचारी के पद पर अपने अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए प्रोन्नति अनियमित रूप से कर दिया जिसके लिए आप(श्री राम) दोषी है। प्रोन्नति अनियमित रूप से कर दिया जिसके लिए आप(श्री राम) दोषी है।
की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है अर्थात प्रोन्नति स्थापना समिति से न कर स्थापना (2) प्रोन्नति की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है अर्थात प्रोन्नति स्थापना समिति से न कर स्थापना की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है अर्थात प्रोन्नति स्थापना समिति से न कर स्थापना (3) कार्मिक एवं प्रशा
समिति की प्रत्याशा में की गयी जो नियमानुकूल नहीं है। समिति की प्रत्याशा में की गयी जो नियमानुकूल नहीं है। सितम्बर 1992 के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के संकल्प सं0 335, दिनांक 16 सितम्बर 19 अनुसार चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में प्रोन्नति सीमित प रीक्षा के आधार पर वरीयता एवं अनुसार चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में प्रोन्नति सीमित परीक्षा के आधार पर वरीयता एवं योग्यता की अधिमानता 60ः40 के अनुपात में देते हुए किया जाना है जबकि प्रसंगाधीन योग्यता की अधिमानता 60ः40 के अनुपात में देते हुए किया जाना है जबकि प्रसंगाधीन योग्यता की अधिमानता 60ः40 के अनुपात में देते हुए किया जाना है जबकि प्रसंगाधीन2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 29 (दस*बर 2011 मामले में आपके (श्री राम के) द्वारा इसका अनुपालन नहीं किया गया। स्पष्ट है कि आपके द्वारा (श्री राम के द्वारा) सरकारी नियमों की अवहेलना की गयी जिसके लिए आप (श्री राम) दोषी है।
श्री राम सेवा-निवृत मुख्य अभियन्ता द्वारा बचाव बयान में मुख्य रूप से निम्न तथ्य दिया गया हैं (1) मुख्य अभियन्ता के कार्यालय में चतुर्थवर्ग से तृतीय वर्ग में दी गयी प्रोन्नति, औपबंधिक (तदर्थ) एवं अस्थायी रूप से दी गयी थी।
(2) स्थापना समिति की अनुशंसा की प्रत्याशा में विभागीय मंत्री एवं सचिव के मौखिक आदेश की बाध्यता के कारण पत्र निर्गत किया गया।
(3) कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्रांक 335 दिनांक 16 सितम्बर 1992 के अनुरूप 60ः40 के अनुपात में अस्थायी प्रोन्नति की प्रक्रिया अपनायी गयी थी।
(4) वर्तमान में प्रोन्नति रद्द कर दी गयी है। न्याय निर्णय में आरोपित पदाधिकारी को प्रोन्नति के लिए गलत नहीं ठहराया गया है।
संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपित के बचाव बयान के आलोक में समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में मुख्य रूप से निम्न विन्दु दिये गये है।
(1) चतुर्थवर्ग के कर्मचारियों को तृतीय वर्ग में प्रोन्नति, स्वीकृत पद के विरुद्ध कार्मिक एवं वित्त विभाग द्वारा निर्गत परिपत्रों के आलोक में देने के लिए मुख्य अभियन्ता सक्षम है अतएव आरोपी के विरुद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होता हैं।
(2) उच्चाधिकारियों के मौखिक निदेश/आदेश का लिखित साक्ष्य नहीं होता है। परन्तु दिये गये निदेश का अनुपालन किया जाता है उक्त आदेश के अनुपालन के तहत कुल रिक्त पद के 50 प्रतिशत अर्थात 32 रिक्त पद के विरुद्ध 16 अद्द चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को तृतीय वर्ग के पद पर प्रोन्नति दी गयी।
(3) नव पदस्थापित स्थान पर प्रभार लेने के उपरान्त श्री राम के द्वारा पत्रांक 58/गो0, दिनांक 17 सितम्बर 2003 द्वारा सचिव से इसकी सम्पुष्टि का अनुरोध किया गया। अतः औपबंधिक रूप से दी गयी प्रोन्नति की सम्पुष्टि के लिए उनके द्वारा प्रयास किया गया अतएव आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
(4) आरोपी के बचाव बयान से ज्ञात होता है कि डाल्टेनगंज परिक्षेत्र में विभागीय नियमानुसार 64 पद रिक्त थे जिसके विरुद्ध मात्र 16 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को ही सशर्त प्रोन्नति दी गयी इससे सरकारी नियमों का उल्लंधन नहीं हैं। अतएव आरोप सं0 3 भी प्रमाणित नहीं होता है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षा के क्रम में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री राम सेवा-निवृत मुख्य अभियन्ता के विरुद्ध आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया है लेकिन संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन से असहमत होने के पर्याप्त आधार है। समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 1863, दिनांक 10 दिसम्बर 2010 द्वारा श्री राम सेवा-निवृत मुख्य अभियन्ता से जॅाच प्रतिवेदन के निम्नांकित असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। (2) बिहार सरकार कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के ज्ञाप सं0 335, दिनांक 16 सितम्बर 1992 की कंडिका 2.2 में निम्न प्रावधान है।
(क) पत्राचार लिपिक अथवा लिपिकों के 50 प्रतिशत पर सीधी भत्र्ती की प्रक्रिया से भरे जाएगें। (ख) 50 प्रतिशत पदों पर अपेक्षित योग्यता अधिकतम आयु सीमा छोड़कर रखनेवाले चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों से भरे जाएगें।
उक्त नियमावली के कंडिका 03 में प्रावधान है कि मुफसिल कार्यालय के पत्राचार लिपिक अथवा लिपिकों से 50 प्रतिशत पदों पर चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को सीमित प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा नियुक्ति में वरीयता को अधिमानता दी जाएगी। वरीयता एवं योग्यता में अधिमानता का क्रम 60ः40 के अनुपात में निर्धारित किया जाएगा। योग्यता का माप दण्ड सीमित प्रतियोगिता परीक्षा होगा।
उक्त वर्णित नियमावली से स्पष्ट है कि चतुर्थवर्गीय कर्मियों की योग्यता निर्धारण सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर करते हुए तृतीयवर्ग के पदों पर नियुक्ति का प्रावधान है परन्तु उक्त नियमो का अवहेलना करते हुए श्री राम मुख्य अभियन्ता द्वारा प्रोन्नति दी गयी जिसके लिए वे सक्षम नहीं थें।
(2) श्री राम मुख्य अभियन्ता के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि विभागीय मंत्री एवं सचिव के दबाव में प्रोन्नति दी। इसके समर्थन में इनके द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया।3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 29 (दस*बर 2011 (3) प्रोन्नति की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है श्री राम द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है जिसमें ज्ञात होता हो कि इनके द्वारा सदृश अन्य कर्मियों के प्रोन्नति पर विचार किया गया है।
(4) इनके द्वारा प्रोन्नति रद्द नहीं की गयी। श्री राम मुख्य अभियन्ता के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। श्री राम द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में निम्न तर्क दिये गये ।
(1) वरीयता एवं योग्यता की अधिमानता के अनुरूप 60ः40 के अनुपात में ही प्रोन्नति की प्रक्रिया अपनायी गयी थी जिसे संचालन पदाधिकारी द्वारा सही माना गया।
(2) विभागीय मंत्री एवं सचिव के मौखिक आदेश का कोई साक्ष्य नहीं होता है परन्तु नीचे के पदाधिकारियों को उच्चाधिकारियों के मौखिक आदेश के अनुपालन की बाध्यता रहती है जिसे संचालन पदाधिकारी द्वारा भी स्वीकार किया गया है।
(3) प्रोन्नति की प्रक्रिया पारदर्शी थी एवं अधिसूचना निर्गत करने वक्त ही इसे रद्द करने की शर्त आदेश में अंकित किया गया था।
श्री राम सेवा-निवृत मुख्य अभियन्ता द्वारा प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री राम सेवा-निवृत मुख्य अभियन्ता द्वारा उन्हीं तथ्यों का उल्लेख द्वितीय कारण पृच्छा में किया गया है जो उनके द्वारा पूर्व में समर्पित बयाव बयान में किया गया था उनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में कोई नया तथ्य या साक्ष्य नहीं दिया गया है समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री राम सेवा-निवृत मुख्य अभियन्ता के विरुद्ध विभागीय नियमों के विपरित चतुथवर्गीय कर्मचारियों को तृतीय वर्ग में प्रोन्नति दिये जाने का उक्त वर्णित आरोप प्रमाणित पाया गया। उक्त वर्णित प्रमााणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री राम सेवा-निवृत मुख्य अभियन्ता को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गया।
(क) दस प्रतिशत पेंशन पर रोक। उक्त वर्णित स्थिति में श्री श्यामानन्द राम , तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, डाल्टेनगंज (झारखंड) सम्प्रति जल संसाधन विभाग बिहार से सेवा-निवृत को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है।
(क) दस प्रतिशन पेंशन पर रोक। उक्त दण्ड श्री राम सेवा-निवृत मुख्य अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, सरकार के उप-सचिव ।
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अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु(ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 817-571+10-ड,0ट,0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in