िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
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((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 47474747) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, बुधबुधबुधबुधवारवारवारवार,,,, 1111 फरफरफरफरवर(cid:15) वर(cid:15) वर(cid:15) वर(cid:15) 2012201220122012 जल संसाधन विभाग ------- अधिसूचना 16 जनवरी 2012
सं0 22/नि0सि0(मुक0)-देव-19-33/2004/28—श्री विष्णुदेव सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, कटहराटांड़ शि0-बटिया सम्प्रति सेवा-निवृत द्वारा वर्ष 2000-01 में उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन अवधि में मेसर्स गैमन इंडिया लिमिटेड मुम्बई का 2.30 करोड़ रूपये का बैंक गारंटी समाप्त होनेे के बावजूद भी बैंक गारन्टी रिन्यूवल नहीं कराने और उसे रिभोक नहीं कराने से संबंधित प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह को विभागीय आदेश सं0-190, दिनांक 27.5.2000 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प सं0 1041, दिनांक 10.8.2000 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त उक्त आरोप प्रमाणित पाये गये। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा इन्हें ''सेवा से बर्खास्त'' करने का निर्णय लिया गया। इस बीच श्री सिंह दिनांक 31.1.2003 को सेवा-निवृत हो गये। तत्पश्चात बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गई। इनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर के समीक्षोपरान्त उक्त वर्णित आरोप प्रमाणित पाये गये। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0 687, दिनांक 6.9.04 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- (क) बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के अन्तर्गत शत प्रतिशत पेंशन एवं उपादान पर सदा के लिए रोक। (ख) निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा। उक्त दण्डादेश दिनांक 6.9.04 के विरु़द्ध श्री सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-13752/04 (विष्णुदेव सिंह बनाम बिहार सरकार एवं अन्य) दायर किया गया जिसमें दिनांक 16.5.08 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा न्याय निर्णय पारित करते हुए श्री सिंह को पॅाच (5) प्रतिशत पेंशन रोकते हुए दण्डादेश को संशोधित करने का आदेश पारित किया गया। उक्त न्याय निर्णय के विरूद्व विभाग द्वारा एल0 पी0 ए0 सं0-699/08 (बिहार सरकार एवं अन्य बनाम विष्णुदेव सिंह एवं अन्य) दायर किया गया। साथ ही श्री विष्णुदेव सिंह द्वारा भी एल0 पी0 ए0 सं0-669/08 (विष्णुदेव सिंह बनाम बिहार सरकार एवं अन्य) दायर किया गया। उक्त दोनों एल0 पी0 ए0 मेें माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 30.11.10 को न्याय निर्णय पारित किया गया जिसमें अनुशासनिक प्राधिकार को न्याय निर्णय प्राप्त होने2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 1 फरojh 2012 के छः माह के अन्दर विभागीय जॅाच पूरी करने और अगले तीन माह में अंतिम निर्णय लेने का आदेश दिया गया। उक्त न्याय निर्णय की सत्यापित प्रति दिनांक 19.4.11 को विभाग में प्राप्त हुई। उक्त वर्णित दोनों एल0 पी0 ए0 में दिनांक 30.11.10 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री विष्णुदेव सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, कटहराटांड,़ देवधर सम्प्रति सेवा-निवृत के विरूद्व विभागीय संकल्प सं0-504, दिनांक 28.4.11 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा जॅाच प्रतिवेदन एवं विभागीय कार्यवाही का अभिलेख की छाया प्रति प्राप्त करायी गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। यह पाया गया कि श्री सिंह के विरूद्व मुख्य रूप से जो आरोप है वह है कि ''बैंक गारंटी सं0-182/98 में मेसर्स गैमन इंडिया लिमिटेड मुबंई से लिए गये 2.30 करोड़ रुपये का बैंक गारंटी दिनांक 3.6.2000 को लैप्स करा दिया गया। दिनांक 3.6.2000 के पहले इसकी वैलीडिटी पीरियड के एक्सटेनसन के लिए न कोई प्रयास किया गया न ही बैंक से इसे रिभोक करने की कोई कार्रवाई की गयी। इस संबंध में उन्हें पूर्ण सतर्क रहना चाहिए था क्योंकि बैंक गारंटी उनके कार्यालय में रहती है। इसमें उनकी सीधी जिम्मेवारी बनती है। अतः श्री विष्णुदेव सिंह की लापरवाही से 2.30 करोड़ रुपये का बैंक गारंटी लैप्स हुआ जिससे सरकार को 2.30 करोड़ रूपये की क्षति हुई। आरोपित पदाधिकारी द्वारा बचाव बयान में मुख्य रूप से निम्न बाते कही गयी। (क) उक्त बैंक गांरटी प्रमण्डलीय चेस्ट में नहीं था। प्रमण्डलीय कैशियर द्वारा समर्पित पत्र में उक्त बैंक गारंटी के चेस्ट में रहने की बात माननीय न्यायालय द्वारा फोर्ज इंट्री पाया गया। (ख) दिनांक 4.12.98 को हुए द्विपक्षीय समझौते एवं उक्त बैंक गारंटी का जिक्र से संबंधित मेसर्स गैमन इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर याचिका सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-11890/99 में कंडिका-7(ए) से 7(एच) तक की तथ्यात्मक विवरणी उनके द्वारा तैयार नहीं किया गया। (ग) उक्त बैंक गारंटी की जानकारी दिनांक 3.6.2000 के पूर्व न तो अपने कार्यालय द्वारा, न ही उच्चाधिकारी द्वारा, न ही मेसर्स गैमन इंडिया लिमिटेड द्वारा ही उन्हें दी गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा जॅाच प्रतिवेदन में मुख्य रूप से निम्न बाते कही गईः- (1) उक्त आरोप के लिए साक्ष्य के रूप में मुख्य अभियन्ता, देवधर के पत्रांक 2142, दिनांक 8.7.2000 संलग्न किया गया है जिसमें श्री सिंह के उक्त बैंक गारंटी की जानकारी रहने के संबंध में दो तर्क दिए गये है। (2) प्रमण्डलीय कैशियर द्वारा समर्पित पत्र जिसे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-13752/04 में पारित न्याय निर्णय में कैशियर द्वारा बाद में अंकित किये जाने के तथ्य को स्वीकार किया गया है। (3) मेसर्स गैमन इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर याचिका सं0-11890/99 के कंडिका-7(ए) से 7(एच) की तथ्यात्मक विवरणी में श्री सिंह के द्वारा कोई कमेन्ट नहीं दिया गया है।दिनांक 3.6.2000 के पूर्व किसी पत्र के द्वारा उक्त बैंक गारंटी की जानकारी श्री सिंह को नहीं दी गई। उक्त तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सिंह के विरूद्व उक्त आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। समीक्षोपरान्त पाया गया कि संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के असहमत होने के आधार है जो निम्न हैः- vlgefr ds foUnq :- ''संचालन पदाधिकारी के जॅाच प्रतिवेदन में उल्लेखित तथ्य कि ''श्री सिंह द्वारा मेसर्स गैमन इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर याचिका सं0-11890/99 के कंडिका-7(ए) से 7(एच) तक की तथ्यात्मक विवरणी तैयार नहीं किया गया है'' को मान्य नहीं किया जा सकता है क्योंकि उक्त याचिका में श्री सिंह द्वारा ही प्रतिशपथ पत्र दायर किया गया है। जिससे आरोप पत्र में उल्लेखित बैंक गारंटी इसकी वैधता तिथि की जानकारी होने की पुष्टि होती है। उक्त वर्णित असहमति के विन्दु पर विभागीय पत्रांक 1463, दिनांक 25.11.11 द्वारा श्री विष्णुदेव सिंह सेवा-निवृत कार्यपालक अभियन्ता से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। श्री सिंह के द्वारा अपने बचाव में इस तथ्य को आधार बनाया गया है कि उन्हें बैंक गारंटी, कार्यालय में उपलब्ध रहने तथा उसकी बैघता की तिथि 3.06.2000 तक होने की जानकारी दिनांक 01.07.2000 को इुई तबतक बैंक गारंटी लैप्स हो गया था। दिनांक 3.6.2000 के पूर्व उन्हें इसकी जानकारी नहीं रहने के कारण बैंक गारंटी की वैधता को विस्तारित नहीं किया जा सका। परंतु सभी अभिलेखों की समीक्षा की गई तब यह पाया गया कि उनका बचाव का कथन पूर्णतया झूठा एवं सरकार को गुमराह करने के नियत से दिया जा रहा है क्योंकि मेसर्स गैमन इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर याचिका सी0 डब्लू0 जे0 सी संं0-11890/99 के प्रतिशपथ पत्र दायर करने हेतु तथ्य कथन जो तैयार हुआ था उस पर श्री विष्णुदेव सिंह ने दिनांक 25.2.2000 को अपना हस्ताक्षर किया था तथा अधीक्षण अभियन्ता, रूपांकण अंचल, देवघर द्वारा दिनांक 1.3.2000 को इसे हस्ताक्षरित किया था। मुख्य अभियन्ता, देवघर ने अपने पत्रांक 743 दिनांक 9.3.2000 द्वारा इस तथ्य कथन को संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार को अनुमोदन हेतु भेजी गयी तथा उक्त पत्र की प्रतिलिपि श्री सिंह को देते हुए प्रतिशपथ पत्र दायर करने का निदेश दिया गया।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 1 फरojh 2012 उक्त याचिका के लिए तैयार किये गये तथ्य कथन देखने से यह स्पष्ट है कि श्री सिंह द्वारा स्पष्टतः गलत बयानी की गई है। अर्थात् झूठ कहा गया है और झूठ पर अपना बचाव आधारित किया गया है। मेसर्स गैमन इंडिया के द्वारा दायर याचिका में यह उल्लेखित है कि उक्त वर्णित बैंक गारंटी को दिनांक 9.12.98 को कार्यालय में जमा किया गया था। श्री सिंह के द्वारा दिनांक 25.2.2000 को तैयार तथ्य कथन के कंडिका 23 एवं 25 में जबाव बनाया गया है। अतः उपरोक्त वर्णित स्थिति से स्पष्ट होता है कि श्री सिंह को पूर्ण जानकारी थी कि उनके कार्यालय में मेसर्स गैमन इंडिया द्वारा दो करोड़ तीस लाख रूपये की बैंक गारंटी जमा थी जिसे उन्होंने स-समय विस्तारित नहीं कराया जिसके व्ययगत हो जाने से सरकार को 2.30 करोड़ रूपये की आर्थिक क्षति हुई। इसके लिए श्री सिंह तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, कटहराटांड सम्प्रति सेवा-निवृत पूर्णरूप से जिम्मेवार है। समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा उक्त वर्णित आरोप प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है :- (क) पेंशन से 25 प्रतिशत (पच्चीस प्रतिशत) की कटौती सदा के लिए एवं पूर्ण उपादान पर सदा के लिए रोक। (ख) निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा लेकिन उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जाएगी। उल्लेखनीय है कि श्री सिंह को पूर्व में अधिसूचना सं0 687, दिनांक 6.9.04 द्वारा संसूचित दण्ड ''शत प्रतिशत पेंशन एवं उपादान पर सदा के लिए रोक'' पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की सहमति प्राप्त है। वर्तमान दण्ड बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा पूर्व में दी गयी सहमति के अन्तर्गत हैं। उपरोक्त वर्णित स्थिति में श्री विष्णुदेव सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सिंचाई प्रमण्डल, कटहराटांड़ शि0-बटिया सम्प्रति सेवा-निवृत को पूर्व में संसूचित दण्डादेश अधिसूचना सं0 687, दिनांक 6.9.04 को निरस्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :- (क) पेंशन से 25 प्रतिशत (पच्चीस प्रतिशत) की कटौती सदा के लिए एवं पूर्ण उपादान पर सदा के लिए रोक। (ख) निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा लेकिन उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जाएगी। उक्त आदेश श्री सिंह सेवा-निवृत कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अफजल अमानुल्लाह, प्रधान सचिव।
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अधी+क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु0ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 47-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।