िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
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---
भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Jाओं के पर(cid:15)Jा-फल, कायKबम, छाऽवृ(cid:18)N ूदान, आOद।
---
भाग-1-ग—िशJा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Jाफल आOद ---
भाग-2—(cid:18)बहार-राPयपाल और कायाKQयJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आOद। 7-15 भाग-3—भारत सरकार, पRSम बंगाल सरकार और उUच ;यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राPय गजटA के उWरण। ---
भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---
पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ उपःथा(cid:18)पत
या उपःथा(cid:18)पत Oकये जानेवाले ूवर
सिमितयA के ूितवेदन और उ\त (cid:18)वधान
मंडल मZ पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक।
---
भाग-7—संसद के अिधिनयम Rजनपर रांशपित क^
Pयेंठअनुमित िमल चुक^ है। ---
भाग-8—भारत क^ संसद मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक,
संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयA के
ूितवेदन और संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर
सिमितयA के ूितवेदन और संसद मZ पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-9—(cid:18)व_ापन
---
भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क^ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प`रवहन सूचनाएं,
;यायालय सूचनाएं और सवKसाधारण
सूचनाएं इaयाOद। 17-22 पूरक
---
पूरक-क 23-312 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012
भागभागभागभाग----1111
िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)2श(cid:18)2श(cid:18)2श(cid:18)2, , , , छु 8ट(cid:15)छु 8ट(cid:15)छु 8ट(cid:15)छु 8ट(cid:15) और अ;य और अ;य और अ;य और अ;य वैय(cid:18)2क सूचनाएं वैय(cid:18)2क सूचनाएं वैय(cid:18)2क सूचनाएं वैय(cid:18)2क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
स्वास्थ्य विभाग
——— अध्सिूचना 1 अक्तूबर 2011 सं 15/ख 24-12/2001-1647-;15द्ध—खाद्य सुरक्षा एवं मानक अध्निियम 2006 की धरा-36 एवं 37 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित खाद्य निरीक्षकों को उनके नाम के सामने अंकित प्रमंडल/जिला में अभिहित अध्किारी (Designated Officer) / खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer) के रूप में उक्त अध्निियम के अन्तर्गत विहित कर्त्तव्यों एवं शक्तियों के निवर्हन हेतु तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया जाता है-
| क्र0 सं0 | नाम एवं वर्तमान पदस्थापन स्थान | गृह जिला | नव पदस्थापन स्थल |
| 01 | श्री आशीष कुमार सिंह, खाद्य निरीक्षक, वैशाली | पटना | अभिहित अध्किारी (Designated Officer), तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्रपफरपुर ;अपने कायो ं के अतिरिक्त खाद्य र् सुरक्षा आयुक्त को मुख्यालय मे ं सहयोग प्रदान करने का भी कार्य करे ंगेद्ध। |
| 02 | श्री सुरेन्द्र कुमार, खाद्य निरीक्षक, पटना | गया | अभिहित अध्किारी (Designated Officer), पटना प्रमंडल, पटना । |
| 03 | श्री टुन्ना साह, खाद्य निरीक्षक, मुजफ्रपफरपुर | समस्तीपुर | अभिहित अध्किारी (Designated Officer), पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां। |
| 04 | श्री सुरेश प्रसाद सिंह, खाद्य निरीक्षक, पटना | नालन्दा | अभिहित अध्किारी (Designated Officer), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर |
| 05 | श्री शशि भूषण सिंह, खाद्य निरीक्षक, सासाराम | भोजपुर | अभिहित अध्किारी (Designated Officer), मुॅंगेर प्रमंडल, मुॅंगेर । |
| 06 | श्री पशुपति नाथ चतुवे दी, खाद्य निरीक्षक, र् सिवान | सिवान | अभिहित अध्किारी (Designated Officer), मगध् प्रमंडल, गया । |
| 07 | श्री श्रीमोहन झा, खाद्य निरीक्षक, पटना | दरभंगा | अभिहित अध्किारी (Designated Officer), सारण प्रमंडल, छपरा । |
| 08 | श्री बालेश्वर चौध्री, खाद्य निरीक्षक, पटना | पटना | अभिहित अध्किारी (Designated Officer), कोशी प्रमंडल, सहरसा । |
| 09 | श्री राजेन्द्र प्रसाद, खाद्य निरीक्षक, भोजपुर | नालन्दा | अभिहित अध्किारी (Designated Officer), दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा । |
| 10 | श्री अनिल कुमार, खाद्य निरीक्षक, दरभंगा | मुॅंगेर | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां । |
| 11 | श्री मुकेश जी कश्यप, खाद्य निरीक्षक, गया | पटना | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्रपफरपुर । |
| 12 | श्री नारायण राम, खाद्य निरीक्षक, बेतिया | औरंगाबाद | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), पटना प्रमण्डल, पटना । |
| 13 | श्री मो0 इकबाल, खाद्य निरीक्षक, सारण | समस्तीपुर | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर । |
| 14 | श्री राजेश्वर प्रसाद, खाद्य निरीक्षक, औरंगाबाद | पटना | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), मुॅगेर प्रमंडल, मुॅंगेर । |
| 15 | श्री बीरेन्द्र कुमार, खाद्य निरीक्षक, मोतिहारी | बेतिया | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), मगध् प्रमंडल, गया । |
| 16 | श्री तपेश्वरी सिंह, खाद्य निरीक्षक, बेगूसराय | पटना | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), सारण प्रमण्डल, छपरा । |
| 17 | श्री अजु न प्रसाद, र् खाद्य निरीक्षक, मध्ुबनी | नवादा | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), कोशी प्रमण्डल, सहरसा । |
| 18 | श्री अजय कुमार, खाद्य निरीक्षक, खगड़िया | नालन्दा | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा । |
| 19 | श्री रमेश कुमार, खाद्य निरीक्षक, समस्तीपुर | गया | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), मुॅंगेर जिला । |
| 20 | श्री राजेश कुमार, खाद्य निरीक्षक, पटना | मु ंगेर | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), मुजफ्रपफरपुर जिला । |
| 21 | श्री अशोक कुमार सिन्हा, खाद्य निरीक्षक, भागलपुर | पटना | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), गया जिला । |
| 22 | श्री जितेन्द्र प्रसाद, खाद्य निरीक्षक, सहरसा | पटना | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), भागलपुर जिला । |
| 23 | श्री सुदामा चौध्री, खाद्य निरीक्षक, मुॅंगेर | जहानाबाद | खाद्य सुरक्षा अध्किारी (Food Safety Officer), पटना जिला । |
2. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
संजय कुमार,
खाद्य सुरक्षा आयुक्त-सह-सचिव ।
———
कृषि विभाग
———
अधिसूचना
30 जनवरी 2012
सं॰ 01/ए॰ जी॰ (प्रो॰)-15/09-517/—॰—विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या 01/ए0 जी0 (प्रो0)-15/09-6981, दिनांक 17 अक्तूबर 2011 द्वारा कृषि अधिनस्थ सेवा, कोटि-7 (उद्यान) से उसी कोटि के वर्ग-2 (वेतनमान-9300-34,800, पी0 वी0-2, ग्रेड पे-4800) में प्रोन्नति के फलस्वरुप निम्नांकित पदाधिकारियों को उनके नाम के सामने स्तंभ- 3 में अंकित पद एवं स्थान पर तत्कालिक प्रभाव से पदस्थापित किया जाता है :-
| क्र॰ | पदाधिकारी का नाम एवं वर्तमान पदस्थापन | नव पदस्थापित पद एवं स्थान |
| 1 | 2 | 3 |
| 1. | श्री नागेश्वर ठाकुर, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, समस्तीपुर | जिला उद्यान पदाधिकारी, समस्तीपुर |
| 2. | श्री महेश कांत लाल, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, मधेपुरा | जिला उद्यान पदाधिकारी, मधेपुरा |
| 3. | श्री मो0 दाऊद, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, शेखपुरा | जिला उद्यान पदाधिकारी, मधुबनी |
| 4. | श्री मो0 सईद, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, भागलपुर | जिला उद्यान पदाधिकारी, सारण |
| 5. | श्री भगवान जी प्रसाद, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, शिवहर | सहायक निदेशक उद्यान, गया |
| 6. | श्री सुरेन्द्र प्रसाद राय, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, मधुबनी | सहायक निदेशक उद्यान, सहरसा |
| 7. | श्री अमीर चंद यादव, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, सासाराम | सहायक निदेशक उद्यान, सारण |
| 8. | श्री प्रभु नारायण, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, नवगछिया | जिला उद्यान पदाधिकारी, जहानाबाद |
| 9. | श्री सुरेन्द्र सिंह, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, बेतिया | सहायक निदेशक उद्यान, दरभंगा |
| 10. | श्री एनामुल हक वहीदी, अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी, सुपौल | सहायक निदेशक उद्यान, भागलपुर |
2. संबंधित नियंत्री पदाधिकारी, स्तंभ-2 के पदाधिकारी को स्थानीय व्यवस्था करके तुरंत विरमित करेंगे। 3. बिहार कृषि सेवा वर्ग-2 के उपरोक्त पद का पदभार ग्रहण करने की तिथि से ही विाीय लाभ देय होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश प्रसाद चौहान, संयुक्त सचिव।
———
सहकारिता विभाग
———
अधिसूचनाएं
3 जनवरी 2012
सं॰ 1/रा॰स्था॰-वि॰स॰से॰-(स्थानां॰)-14/2011-32—विभागीय अधिसूचना संख्या 5605, दिनांक 21 दिसम्बर 2011 द्वारा बिहार सहकारिता सेवा (प्रषासनिक प्रभाग) के पदाधिकारियों के स्थानान्तरण के फलस्वरुप हुए रिक्त पदों का अतिरिक्त प्रभार निम्नांकित पदाधिकारियों को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ-4 में अंकित कार्यालय का प्रभार ग्रहण की तिथि से अगले आदेष तक के लिए सौंपा जाता है-
| क्र॰सं॰ | पदाधिकारी का नाम | वर्त्तमान पदस्थापन | अतिरिक्त प्रभार |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | श्री संदीप कुमार ठाकुर | प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक , सीतामढ़ी । | जिला सहकारिता पदाधिकारी, सीतामढ़ी। |
| 2 | श्री नयन प्रकाष | सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, सीतामढ़ी। | सहायक निबंधक,स0स0,पुपरी (सीतामढ़ी)। |
| 3 | श्री सैयद सरवर हुसैन | सहायक निबंधक, स॰स॰, पटना सिटी । | सहायक निबंधक, स॰स॰, मसौढ़ी, (पटना) |
| 4 | सुश्री लवली | सहायक निबंधक, स॰स॰, (औपबंधिक) समस्तीपुर । | सहायक निबंधक, स॰स॰, पटोरी, समस्तीपुर |
| 5 | श्री बबन मिश्र | जिला सहकारिता पदाधिकारी, सासाराम | सहायक निबंधक, स॰स॰, सासाराम एवं सहायक निबंधक, स॰स॰, विक्रमगंज, रोहतास |
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, मो॰ मुजीब, अवर सचिव।
———
21 दिसम्बर 2011
सं॰ 1/रा॰स्था॰-वि॰स॰से॰-(स्थानां॰)-14/2011-5605—बिहार सहकारिता सेवा (प्रषासनिक प्रभाग) के निम्नांकित पदाधिकारियों को कार्यहित में स्थानान्तरित करते हुए एवं पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहे पदाधिकारी को निम्न रूप में पदभार ग्रहण करने की तिथि से अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है :-
| क्र॰सं॰ | पदाधिकारी का नाम | वर्त्तमान पदस्थापन स्थान | नवपदस्थापन स्थान |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | श्री संतोष कुमार झा | पदस्थापन की प्रतीक्षा में (दिनांक 20.10.11 के अपराह्न से) | जिला सहकारिता पदाधिकारी, मधुबनी |
| 2 | श्री सत्येन्द्र कुमार प्रसाद | महा प्रबंधक, आई॰सी॰डी॰पी॰, सारण, छपरा | जिला सहकारिता पदाधिकारी, किषनगंज |
| 3 | श्री इंदीवर पाठक | सहायक निबंधक, स॰स॰, पुपरी अंचल पुपरी | जिला सहकारिता पदाधिकारी, औरंगाबाद |
| 4 | श्री विद्याभूषण मिश्र | सहायक निबंधक, स॰स॰, मसोैढ़ी | जिला सहकारिता पदाधिकारी, लखीसराय |
| 5 | श्री मो॰ जैनुल आब्दीन अंसारी | सहायक निबंधक, स॰स॰, पटोरी | जिला सहकारिता पदाधिकारी, मधेपुरा |
| 6 | श्री निकेष कुमार | सहायक निबंधक, स॰स॰, सासाराम | जिला सहकारिता पदाधिकारी, शेखपुरा |
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, मो॰ मुजीब, अवर सचिव।
———
23 दिसम्बर 2011
सं॰ 1/सह॰-वि॰सह॰से॰-राज॰स्था॰-22/2011-5653—श्री रमण झा, (वरीयता क्रमांक 13/09) जिला सहकारिता पदाधिकारी, सीतामढ़ी को उनके आवेदन पत्रांक 495, दिनांक 17 सितम्बर 2011 पर सम्यक विचारोपरान्त बिहार सेवा संहिता के नियम 74 (ख) (i) एवं वित्त विभाग के परिपत्र संख्या 6190, दिनांक 27 अप्रील 1979 में निहित प्रावधान के आलोक में दिनांक 31 दिसम्बर 2011 के अपराह्न के प्रभाव से ऐच्छिक सेवा-निवृत्ति की स्वीकृति प्रदान की जाती है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से,
मो॰ मुजीब, अवर सचिव।
ÑÑÑÑ
अधीJक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित।
(cid:18)बहार गजट, 47Ñ571+100-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
6 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 7 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012भागभागभागभाग----2222
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राPयराPयराPयराPयपाल और कायाKQयपाल और कायाKQयपाल और कायाKQयपाल और कायाKQयJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , , अिधसूचनाएं और िनयम आOद।अिधसूचनाएं और िनयम आOद।अिधसूचनाएं और िनयम आOद।अिधसूचनाएं और िनयम आOद।
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पर्यावरण एवं वन विभाग
———
अधिसूचना
27 जनवरी 2012
सं॰ एस0 ओ0-वन्य प्राणी-08/07-89 (ई0)/प0व0—वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा-38 x के अंतर्गत गठित वाल्मीकि व्याघ्र संरक्षण फाउंडेशन/न्यास के नियमावली 2010 के नियम 1.9 के प्रावधानों केे अनुरूप वाल्मीकि व्याघ्र संरक्षण फाउंडेशन के शासी परिषद (Governing Body) का निम्नांकित रूप से गठन किया जाता हैः-
- सदस्य
(1) मंत्री, पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार - अध्यक्ष (2) प्रधान सचिव/सचिव, पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार - उपाध्यक्ष (3) प्रधान सचिव/सचिव, वित्त विभाग, बिहार - सदस्य (4) प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार - सदस्य (5) अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह- मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक, बिहार - सदस्य-सचिव (6) क्षेत्र निदेशक,वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना, बेतिया - सदस्य (7) उप-निदेशक, वाल्मीकि व्याघ्र प्रमंडल0-I, बेतिया - सदस्य (8) उप-निदेशक, वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना प्रमं॰-II, बेतिया (9) श्रीमती भागीरथी देवी, सदस्य, विधान-सभा, रामनगर विधान-सभा क्षेत्र - सदस्य (10) अध्यक्ष, जिला परिषद् प॰ चम्पारण - सदस्य (11) डॉ0 समीर सिन्हा, मैनेजर, वाईल्ड लाईफ ट्रस्ट ऑफ इण्डिया, नोएडा (एन0सी0आर)
- सदस्य
2. शासी परिषद के जो सदस्य विभिन्न पदाें के पदधारक की हैसियत से सदस्य है, इस फाउण्डेशन के स्थायी सदस्य होंगे और उक्त पद के पदधारण की अवधि तक ही सदस्य रहेंगे। 3. क्रमांक-9 एवं 11 के सदस्य राज्य सरकार द्वारा नामित कियेे गये हैं और इन नामित सदस्यों का कार्यकाल, अधिसूचना निर्गत की तिथि से तीन वर्षाे की अवधि के लिए होगा। 4. शासी परिषद् की बैठक एक वर्ष में कम से कम दो बार होगी जिसके लिए समय, तिथि और स्थान का निर्धारण परिषद के अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रामावतार राम, विशेष सचिव।
——— समाज कल्याण विभाग ——— अधिसूचनाएं 23 जनवरी 2012 बिहार राज्य महिला आयोग (संशोधन) नियमावली 2011
सं॰ स0क0विविध(म0आ0)60-16/08-355—बिहार राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 (बिहार अधिनियम 6, 1999) की धारा-17 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार एतद् द्वारा बिहार राज्य महिला आयोग नियमावली 2010 में तुरंत के प्रभाव से निम्नलिखित संशोधन है :-
8 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012संशोधन बिहार राज्य महिला आयोग नियमावली 2010 के नियम 3 (i) में प्रयुक्त अंक, शब्द एवं कोष्ठक ''21,000/- (इक्कीस हजार)'' अंक, शब्द एवं कोष्ठक ''79,000/- (उन्नासी हजार)'' द्वारा तथा अंक, शब्द एवं कोष्ठक ''15,000/- (पन्द्रह हजार)'' अंक, शब्द एवं कोष्ठक ''47,400/- (सैंतालीस हजार चार सौ)'' द्वारा प्रतिस्थापित किये जायेंगे ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संदीप पौण्डरीक, सचिव ।
———
23rd January 2012
BIHAR STATE WOMEN COMMISSION (Amendment) RULES-2011
No. स0क0विविध(म0आ0)60-16/08-355—In exercise of the powers conferred by section 17 the Bihar State Commission for Women Act, 1999 (Bihar Act 6, 1999), the State Government hereby makes the following amendment in the Bihar State Commission for Women Rules, 2010 with immediate effects:-
Amendment Used in Rule 3(i) of the Bihar State commission for women Rules 2010 the figures, words and brackets "Rs. 21,000/- (Rupees Twenty one thousands)" are substituted the figures, words and brackets by "Rs. 79,000/- (Rupees Seventy nine thousands)" and the figures, words and brackets "Rs. 15,000/- (Rupees Fifteen thousands)" the figures, words and brackets by "Rs. 47,400/- (Rupees Forty seven thousand four hundreds)".
By order of Governor of Bihar, Sandeep Poundrik, Secretary.
——— सं॰ आई.सी.डी.एस.(प्रो0)-20/2010-145 समाज कल्याण विभाग ——— संकल्प 16 जनवरी 2012 समेकित बाल विकास योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु राज्य, जिला, प्रखंड एवं आँगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं समेकित बाल विकास योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु राज्य, जिला, प्रखंड एवं आँगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं समेकित बाल विकास योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु राज्य, जिला, प्रखंड एवं आँगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं समेकित बाल विकास योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु राज्य, जिला, प्रखंड एवं आँगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा समितियों के गठन हेतु मार्गदर्षिकासमीक्षा समितियों के गठन हेतु मार्गदर्षिकासमीक्षा समितियों के गठन हेतु मार्गदर्षिकासमीक्षा समितियों के गठन हेतु मार्गदर्षिका
बिहार सरकार कल्याण विभाग द्वारा समेकित बाल विकास सेवा योजना के कार्यान्वयन एवं सफल संचालन के उद्देष्य से विभागीय संकल्प संख्या 437, दिनांक 8 दिसम्बर 1997, 4038, दिनांक 3 अगस्त 1996, 4040, दिनांक 3 अगस्त 1996, 406, दिनांक 14 फरवरी 1996, 405, दिनांक 14 फरवरी 1996 एवं 2187, दिनांक 6 नवम्बर 1998 द्वारा राज्य, जिला, प्रखंड एवं आँगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय समन्वय समितियों का गठन किया गया था।
1. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आँगनबाड़ी केन्द्रों/परियोजना के अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण हेतु विभिन्न स्तर के पदाधिकारियों द्वारा क्षेत्र भ्रमण के संबंध में मार्गनिर्देष प्राप्त होते रहे है। आँगनबाड़ी केन्द्रों के क्रियाकलापों के अनुश्रवण हेतु पंचायती राज संस्थाओं की सहभागिता भी सुनिष्चित की गई है। ये सभी कदम समेकित बाल विकास योजनाओं की वर्त्तमान अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण पद्धति को सुदृढ़ बनाने के उद्देष्य से किए गये है।
2. भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, के पत्रांक F.No-16-8/2010-M.E., दिनांक 31 मार्च 2011 में निहित मार्गनिर्देष के आलोक में आई.सी.डी.एस. के सर्वव्यापीकरण के साथ उच्चतर गुणवत्ता वाली सेवायें प्रदान करने, विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर योजना को सफल बनाने तथा आई.सी.डी.एस. योजना के प्रभावकारी अनुश्रवण के उद्देष्य से पूर्व में गठित समितियों को अवक्रमित करते हुए राज्य, जिला, प्रखंड एवं आँगनबाड़ी केन्द्र स्तर पर निम्न प्रकार से विभिन्न स्तरीय समितियों का गठन किया जाता हैः- 1111.... राज्य स्तरीय अनुश्रवणराज्य स्तरीय अनुश्रवणराज्य स्तरीय अनुश्रवणराज्य स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा एवं समीक्षा एवं समीक्षा एवं समीक्षा समिति समिति समिति समिति
गठनगठनगठनगठन (1) मुख्य सचिव अध्यक्ष (2) प्रधान सचिव, योजना एवं विकास विभाग सदस्य (3) प्रधान सचिव, वित्त विभाग सदस्य (4) प्रधान सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सदस्य (5) प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग सदस्य (6) प्रधान सचिव, पंचायती राज विभाग सदस्य (7) प्रधान सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग सदस्य (8) प्रधान सचिव, मानव संसाधन विकास विभाग सदस्य9 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 (9) सचिव, कृषि विभाग सदस्य (10) प्रधान सचिव, खाद्य एवं आपूर्त्ति विभाग सदस्य (11) सचिव, समाज कल्याण विभाग सदस्य (12) 5 (पॉंच) माननीय सांसद (राज्य सरकार द्वारा नामित) * सदस्यगण (13) 5 (पॉंच) माननीय सदस्य विधान-सभा (राज्य सरकार द्वारा नामित) * सदस्यगण (14) कार्यपालक निदेषक, (एन.आर.एच.एम.) NRHM सदस्य (15) क्षेत्रिय निदेषक, NIPCCD सदस्य (16) प्रतिनिधि, खाद्य एवं पोषण बोर्ड, राज्य/क्षेत्रीय कार्यालय सदस्य (17) प्राचार्य, मध्य स्तरीय प्रषिक्षण केन्द्र * * सदस्य (18) प्राचार्य, ऑंगनबाड़ी सेविका प्रषिक्षण केन्द्र * * सदस्य (19) निदेषक, आई0सी0डी0एस0 सदस्य सचिव * संसद एवं राज्य विधान-सभा के माननीय सदस्य एक वर्ष के लिए रोटेषन के आधार पर समिति के सदस्य होंगे एवं उनका चयन इस प्रकार किया जाएगा कि यथासंभव अधिक से अधिक राजनैतिक दलों को प्रतिनिधित्व मिल सके।
** मध्यस्तरीय प्रषिक्षण केन्द्र एवं ऑंगनबाड़ी सेविका प्रषिक्षण केन्द्रों के प्राचार्यो का चयन प्रत्येक वर्ष रोटेषन के आधार पर किया जाएगा।
नोटः-नोटः-नोटः-नोटः-
• राज्य में आई0सी0डी0एस0 कार्यक्रम के सहयोगी पार्टनर एवं प्रमुख संस्थाओं के विषेषज्ञों/प्रतिनिधियों को भी विषेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया जा सकता है।
• समिति प्रति छः माह पर बैठक करेगी अथवा अध्यक्ष की अनुमति से छः माह के पूर्व भी बैठक कर सकती है। मुख्य सचिव छः माह में एक बार बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
राज्य स्तरीय समिति के कार्य राज्य स्तरीय समिति के कार्य राज्य स्तरीय समिति के कार्य राज्य स्तरीय समिति के कार्य राज्य स्तरीय समिति निम्नलिखित विषयों का अनुश्रवण एवं समीक्षा कर उचित कार्रवाई हेतु अनुषंसा करेगीः- (i) निम्न विषयों के सनिम्न विषयों के सनिम्न विषयों के सनिम्न विषयों के संबंध में सम्पूर्ण प्रगति की समीक्षाः- ंबंध में सम्पूर्ण प्रगति की समीक्षाः- ंबंध में सम्पूर्ण प्रगति की समीक्षाः- ंबंध में सम्पूर्ण प्रगति की समीक्षाः-
• आई0सी0डी0एस0 के सर्वव्यापीकरण- स्वीकृत परियोजनाओं/ऑंगनबाड़ी केन्द्रों की क्रियाषीलता की स्थिति-सभी टोलों/गॉंव का पूर्ण आच्छादन एवं इस कार्य में आने वाली बााधाएॅं;
• राज्य के आई0सी0डी0एस0 के APIP की तैयारी एवं क्रियान्वयन; • छः वर्ष के कम के बच्चों के पोषण की स्थिति- वजन, WHO वृद्धि मानक की शुरूआत, संयुक्त मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड, जिलावार कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों की अनुपातिक तुलना, अर्धवार्षिक आधार पर उनको दूर करने एवं प्रगति लाने के उपाय;
• ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर अनौपचारिक स्कूल पूर्व षिक्षा की प्रगति तथा बच्चों की सहभागिता एवं विधि, स्थानीय तौर पर विकसित षिक्षा एवं खेल की सामग्रियों का उपयोग, खिलौना बैंक एवं अन्य प्रयास;
• खराब प्रदर्षन करने वाले जिलों एवं उसके कारणों की पहचान इत्यादि की सम्पूर्ण प्रगति की समीक्षा।
(ii) संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेन्सः-संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेन्सः-संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेन्सः-संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेन्सः-
(क) स्वास्थ्य/ NRHM ः- आँगनबाड़ी केन्द्रों पर सम्पूर्ण टीकाकरण की स्थिति, ante-natal एवं स्वास्थ्य जॉंच के प्रावधान, ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर रेफरल सेवायें एवं माइक्रोन्यूट्रीएन्टस की आपूर्त्ति (Vit.- A, IFA, De-worming Tablets) VHND, VHSC की क्रियाषीलता एवं IYCF को प्रोत्साहन। (ख) पेयजल एवं स्वच्छताः- ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर सम्पूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम एवं राजीव गॉंधी राष्ट्रीय पेयजल मिषन या राज्य सरकार की कोई अन्य योजना के साथ समन्वय द्वारा पेयजल एवं स्वच्छता का प्रावधान;
(ग) सर्व षिक्षा अभियानः- प्राथमिक विद्यालयों के साथ ऑंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन, केन्द्रों पर स्कूल पूर्व षिक्षा का संयोग, सर्व षिक्षा अभियान के साथ सहयोग आदि।
(घ) पंचायती राज संस्थाएॅं- ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर सेवाओं को लागू करने हेतु पंचायती राज संस्थाओं एवं समुदाय का सहयोग प्राप्त करना;
(iii) सर्वेक्षित जनसंख्या के विरूद्ध सामान्य एवं विषेषकर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अल्पसंख्यक समुदाय के लाभार्थियों का आच्छादान;
10 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012(iv) कार्यक्रम के कार्यान्वयन से संबंधित अन्य विषयों से संबंधित कार्यः- कार्यक्रम के कार्यान्वयन से संबंधित अन्य विषयों से संबंधित कार्यः- कार्यक्रम के कार्यान्वयन से संबंधित अन्य विषयों से संबंधित कार्यः- कार्यक्रम के कार्यान्वयन से संबंधित अन्य विषयों से संबंधित कार्यः-
(क) आँगनबाड़ी केन्द्रों के कार्याे की निरन्तरता- संपूर्ण एवं विषेषकर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अल्पसंख्यक टोलों मे स्थित केन्द्रों के संबंध में;
(ख) आँगनबाड़ी सेविका/पर्यवेक्षिका/बाल विकास परियोजना पदाधिकारियोें स्तर की रिक्तियाँ एवं उनके प्रषिक्षण की स्थिति;
(ग) आवंटन की उपलब्धता एवं आँगनबाड़ी सेविकाओेें/सहायिकाओं के मानदेय का ससमय भुगतान; (घ) POL (Petroleum oil Lubricant) फंड की उपलब्धता, जिला/परियोजना स्तर पर आकस्मिकता तथा पुर्नरीक्षित नियमों के आधार पर आँगनबाड़ी केन्द्रों के स्तर पर Flexi fund की उपलब्धता;
(ड.) पुर्नरीक्षित नियमों के आधार पर आँगनबाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषाहार की आपूर्ति मेें बाधा एवं इसके कारण, वितरण की विधि एवं स्वयं सहायता समूहों को लगाना;
(च) आँगनबाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषाहार की सुदृढ़ीकरण एवं आयोडिनयुक्त नमक का प्रयोग; (छ) आँगनबाड़ी केन्द्रों पर अनौपचारिक स्कूल-पूर्व षिक्षा में बच्चों के सहभागिता की विधि; (ज) आँगनबाड़ी केन्द्रों पर आवष्यक सामग्रियों की उपलब्धता, प्रोक्योरमेंट और आपूर्ति- मेडिसिन किट्स, स्कूल पूर्व षिक्षा किट्स, वजन मषीन, संयुक्त मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड, WHO ग्रोथ चार्ट, आदि;
(झ) नियमानुसार पदाधिकारियों द्वारा विभिन्न स्तरों पर अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण भ्रमण; (ञ) आई.सी.डी.एस. कर्मियो का गैर-आई.सी.डी.एस. क्रियाकलापों में संलग्नता एवं इन कार्याें से उनकी मूक्ति की व्यवस्था;
(ट) कोई अन्य कार्य;
(v) आँगनबाड़ी केन्द्रों की आधारभूत संरचनाओं का विकास-आँगनबाड़ी केन्द्रों के भवनों का विभिन्न योजनाओं जैसे- BRGF, MSDP, MPLAD आदि के मद से निर्माण;
(vi) आई.सी.डी.एस. सेवाओं/स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे विषयों के संबंध में जागरूकता बढ़ाने हेतु IEC का प्रयोग।
जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा समिति 2222.... जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा समिति जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा समिति जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा समिति गठनगठनगठनगठन (1) जिला पदाधिकारी अध्यक्ष (2) उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी उपाध्यक्ष (3) जिला विकास पदाधिकारी, जिला परिषद् सदस्य (4) मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य (5) जिला योजना पदाधिकारी सदस्य (6) जिला कल्याण पदाधिकारी सदस्य (7) जिला कृषि/बागवानी पदाधिकारी सदस्यगण (8) जिला कार्यक्रम समन्वय पदाधिकारी, मनरेगा सदस्य (9) कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ अभियंत्रण विभाग सदस्य (10) जिला षिक्षा पदाधिकारी सदस्य (11) जिला के माननीय सांसद सदस्य (12) माननीय सदस्यगण, विधान-सभा सदस्यगण (13) प्राचार्य, मध्य स्तरीय प्रषिक्षण केन्द्र * सदस्य (14) प्राचार्य, ऑंगनवाड़ी सेविका प्रषिक्षण केन्द्र (किसी दो) * सदस्य (15) बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (किसी तीन) सदस्यगण (16) जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आई0सी0डी0एस0 सदस्य सचिव
* प्राचार्य, मध्य स्तरीय प्रषिक्षण केन्द्र एवं ऑंगनवाड़ी सेविका प्रषिक्षण केन्द्र का चयन एवं जिले की किसी तीन बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों का चयन प्रतिवर्ष रोटेषन के आधार पर जिला पदाधिकारी द्वारा किया जाएगा। नोट :-नोट :-नोट :-नोट :- समिति प्रति तिमाही एक बार बैठक करेगी अथवा अध्यक्ष के आदेषानुसार कभी भी आवष्यकतानुसार बैठक करेगी। समिति अपना समीक्षा प्रतिवेदन मुख्य सचिव/सचिव, महिला बाल विकास, विभाग (समाज कल्याण) को जिला स्तर पर की गई कार्रवाई के साथ देगी एवं राज्य सरकार से किन-किन बिन्दुओं पर सहयोग की अपेक्षा हैं, इस संबंध में भी प्रतिवेदन देगी।11 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 जिला स्तरीय समिति के कार्य जिला स्तरीय समिति के कार्य जिला स्तरीय समिति के कार्य जिला स्तरीय समिति के कार्य जिला स्तरीय समिति प्रखंड/परियोजनावार आई0सी0डी0एस0 योजनाओं की निम्न विषयों पर प्रगति एवं क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी एंव उचित सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए सुक्षाव देगीः-
(i) निम्न विषयों पर प्रगति की समीक्षाः- निम्न विषयों पर प्रगति की समीक्षाः- निम्न विषयों पर प्रगति की समीक्षाः- निम्न विषयों पर प्रगति की समीक्षाः- (क) सभी स्वीकृत परियोजनाओं/ऑंगनबाड़ी केन्द्रों की क्रियाषीलता की स्थिति/जिला के सभी टोलो/गॉंवों विषेषकर अनु0जाति/अनु0जनजाति एवं अल्पसंख्यक समुदाय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लाभार्थियों का आच्छादन;
(ख) लाभार्थियों का आच्छादनः- पूरक पोषाहार एवं स्कूल पूर्व षिक्षा के निबंधित बनाम वास्तविक लाभार्थियों की परियोजनावार समीक्षा;
(ग) ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर आपूर्ति किए जाने वाले पूरक पोषाहार की गुणवता एवं आपूर्ति में नियमितताः- टेक होम राषन का प्रावधान, सुबह का नाष्ता एवं गर्म पका हुआ भोजन एक माह में निष्चित दिनों तक आपूर्ति एवं परियोजनावार तुलनात्मक समीक्षा;
(घ) 0-3 वर्ष एवं 3-6 वर्ष के बच्चों के पोषण की स्थिति- वजन, WHO मानक के अनुसार वृद्धि एवं संयुक्त मातृृृृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड, परियोजनावार कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों की अनुपातिक तुलना। अर्धवार्षिक आधार पर उसको दूर करने एवं प्रगति लाने के उपाय;
(ङ) ऑंगनबााड़ी केन्द्रों पर अनौपचारिक स्कूल पूर्व षिक्षा की प्रगति;
(ii) अन्य संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्अन्य संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्अन्य संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्अन्य संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेन्स एवं समन्वयः- वर्जेन्स एवं समन्वयः- वर्जेन्स एवं समन्वयः- वर्जेन्स एवं समन्वयः-
(क) स्वास्थ्य/NRHM ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के टीकाकरण, प्रसव पूर्व स्वास्थ्य जॉंच,रेफरल सेवाएॅं एवं माइक्रोन्यूटीएन्टस की आपूर्ति (Vit.-A, IFA, डिवार्मिंग टेबलेट्स) VHSC, VHND की क्रियाषीलता एवं IYCF को प्रोत्साहन देना, ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर स्वास्थ्य एवं आई0सी0डी0एस0 पदाधिकारियों का संयुक्त भ्रमण;
(ख) पेयजल एवं स्वच्छता-ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर स्वच्छता एवं शुद्ध पेयजल की सुविधा हेतु प्रावधान; (ग) सर्व षिक्षा अभियान-प्राथमिक विद्यालयों के साथ ऑंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन, ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर स्कूल पूर्व षिक्षा, सर्व शिक्षा अभियान से सहयोग, इत्यादि;
(घ) पंचायती राज संस्थाएँ-ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर सेवायें प्रदा करने हेतु इनकी सहभागिता;
(iii) योजना के कार्यान्वयन के संबंध में अन्य विषयों की समीक्षा जैसेः- योजना के कार्यान्वयन के संबंध में अन्य विषयों की समीक्षा जैसेः- योजना के कार्यान्वयन के संबंध में अन्य विषयों की समीक्षा जैसेः- योजना के कार्यान्वयन के संबंध में अन्य विषयों की समीक्षा जैसेः-
(क) ऑंगनबाड़ी केन्द्रों की क्रियाषीलता की नियमितता- संपूर्ण एवं विषेषकर अनु0जाति/अनु0जन जाति/अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में;
(ख) ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर सेविका/पर्यवेक्षिका/बाल विकास परियोजना पदाधिकारी स्तर तक की रिक्ति एवं प्रषिक्षण की स्थिति;
(ग) ऑंगनबाड़ी सेविका/सहायिकाओं को मानदेय एंव पर्यवेक्षिकाओं को यात्रा-भाा का भुगतान; (घ) ऑंगनबाड़ी केन्द्रों की आधाभूत संरचना- ऑंगनबाड़ी केन्द्र भवनों का अन्य योजनाओं के समन्वय से निर्माण;
(ङ) ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर आवष्यक सामग्रियों की आपूर्ति- मेडिसीन किटृस, स्कूल पूर्व षिक्षा किट्स, तौल/वजन मषीन, संयुक्त मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड, WHO ग्रोथ चार्ट, आदि;
(च) जिला एवं प्रखंड स्तर पर POL fund एवं आकस्मिकता फंड तथा ऑंगनबाड़ी केन्द्र स्तर पर Flexi fund की उपलब्धता;
(छ) बाल विकास परियोजना पदाधिकारी/पर्यवेक्षिका की गतिषीलता- इनके लिए वाहन की उपलब्धता एवं कार्यक्रमों से संबंधित वाहनों की अधियाचना नहीं होना;
(ज) बाल विकास परियोजना पदाधिकारी/पर्यवेक्षिका द्वारा ऑंगनबाड़ी केन्द्रों का नियमानुसार अनुश्रवण भ्रमण तथा प्रतिवेदन देना;
(झ) आँगनबाड़ी केन्द्रों पर पूरक भोजन आपूर्ति की व्यवस्था- स्वयं सहायता समूह का सहयोग तथा केन्द्राें पर आयोडिनयुक्त नमक तथा पत्तेदार सब्जियों का प्रयोग;
(ञ) आँगनबाड़ी केन्द्रों पर अनौपचारिक स्कूल पूर्व षिक्षा में बच्चों की सहभागिता की विधि, स्थानीय तौर पर विकसित खेल एवं सीखने की सामग्रियों का प्रयोग, खिलौनों का बैंक एवं अन्य प्रयास; (ट) आई.सी.डी.एस. कर्मियों का गैर-आई.सी.डी.एस. कार्यों में लगाना एवं इससे उन्हें मुक्त करने के उपाय;
(ठ) आई.सी.डी.एस. योजनाओं के क्रियान्वयन में कम प्रर्दषन करने वाले परियोजनाओं एवं इसके कारणोें की पहचान;
(iv) आर्थिक विषयः-आर्थिक विषयः-आर्थिक विषयः-आर्थिक विषयः- आवंटन की प्राप्ति-प्रतिवेदित अवधि में विषयवार आवंटन एवं व्यय की स्थिति एवं भारत सरकार के वित्तीय नियमों का अनुपालन;
12 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012(v) षिकायत एवं षिकायत निवारण पद्धतिः- षिकायत एवं षिकायत निवारण पद्धतिः- आँगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन, आई.सी.डी.एस. सेवाओं को षिकायत एवं षिकायत निवारण पद्धतिः- षिकायत एवं षिकायत निवारण पद्धतिः- लागू करने, पूरक पोषाहार की गुणवत्ता एवं आई.सी.डी.एस. कर्मियों के संबंध में पंचायतीराज संस्थाओं, समुदाय, व्यक्तियों से प्राप्त षिकायतें एवं उनपर की गई कार्रवाई;
(vi) आईआईआईआई....ईईईई....सीसीसीसी....---- आई.ई.सी. संबंधित कार्य योजना की तैयारी, केन्द्रों की स्थिति, आई.सी.डी.एस. प्रदत्त सेवायें, लाभार्थियों की सुयोग्यता, षिकायत निवारण पद्धति आदि;
नोट :-नोट :-नोट :-नोट :- जिला स्तरीय बैठक में निम्नलिखित पर भी चर्चा की जा सकती है-
(1) प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठकों की कार्यवाही एवं प्रतिवेदन; (2) प्रखंड स्तरीय मासिक प्रगति प्रतिवेदन एवं प्रखंड वार्षिक स्थिति प्रतिवेदन की समीक्षा; (3) समिति के सदस्यों द्वारा किए गए क्षेत्र भ्रमणों का प्रतिवेदन;
(4) आम जन/मीडिया से प्राप्त प्रतिवेदन। (यदि कोई हो);
3333.... प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा समिति प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा समिति प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा समिति प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण एवं समीक्षा समिति गठनगठनगठनगठन
(1) अनुमंडल दंडाधिकारी अध्यक्ष (2) प्रखंड विकास पदाधिकारी उपाध्यक्ष (3) प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य (4) प्रखंड षिक्षा प्रसार पदाधिकारी सदस्य (5) प्रखंड कृषि पदाधिकारी सदस्य (6) नगर पंचायत/पंचायत प्रमुख सदस्य (7) प्राचार्य, ऑंगनबाड़ी प्रषिक्षण केन्द्र ** सदस्य (8) अस्थानीय गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि (दो) सदस्य (9) बाल विकास परियोजना पदाधिकारी संयोजक
*अगर हो तो।
नोट : -नोट : -नोट : -नोट : -
• समिति प्रति तिमाही में एक बार बैठक करेगी एवं अपना प्रतिवेदन जिला स्तरीय समिति को देगी एवं एक प्रतिलिपि राज्य निदेषालय, आई0सी0डी0एस0 को देगी।
• आवश्यकतानुसार पशुपालन/डेयरी/मत्स्य विभाग के प्रतिनिधियाें को आमंत्रित किया जा सकता है। • परियोजना के दो-तीन पर्यवेक्षिकाओं (ICDS) को भी रोटेशन के आधार पर बैठक में आमंत्रित किया जा सकता है। प्रखंड स्तरीय समिति के कार्यप्रखंड स्तरीय समिति के कार्यप्रखंड स्तरीय समिति के कार्यप्रखंड स्तरीय समिति के कार्य यह समिति निम्न विषयों की समीक्षा करेगी एवं उचित कार्रवाई का सुझाव देगी या कार्रवाई करेगीः- (i) निम्न विषनिम्न विषनिम्न विषनिम्न विषयों के संबंध में सम्पूर्ण प्रगति की समीक्षाः- यों के संबंध में सम्पूर्ण प्रगति की समीक्षाः- यों के संबंध में सम्पूर्ण प्रगति की समीक्षाः- यों के संबंध में सम्पूर्ण प्रगति की समीक्षाः-
(क) परियोजना के सभी टोलों/गॉंवों विषेषकर SC/ST एवं अल्पसंख्यक समुदाय के टोलों एवं दूरस्थ क्षेत्रों में ऑंगनबाड़ी केन्द्रों का आच्छादान;
(ख) लाभार्थियों का आच्छादन- केन्द्रों पर सर्वेक्षित जनसंख्या के विरूद्ध पूरक पोषाहार एवं स्कूल पूर्व षिक्षा केे निबंधित बनाम वास्तविक लाभार्थियों की सेक्टरवार समीक्षा;
(ग) पूरक पोषाहार की गुणवत्ता; (घ) 0-3 वर्ष एवं 3-6 वर्ष के बच्चों के पोषण की स्थिति- वजन, WHO के मानक के अनुसार वृद्धि एवं संयुक्त मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड, परियोजनावार कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों की अनुपातिक तुलना। अर्धवार्षिक आधार पर उसको दूर करने एवं प्रगति लाने के उपाय; (ङ) प्रतिवेदित माह में 21 दिनों से ज्यादा टी0एच0आर0, सुबह का स्नैक्स एवं गर्म पकाया हुआ भोजन देने वाले ऑंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या;
(च) मासिक VHND आयोजित करने वाले ऑंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या-VHND के दिन की गतिविधियॉं;
(ii) संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेन्सः-संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेन्सः-संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेन्सः-संबंधित विभागों/कार्यक्रमों के साथ कन्वर्जेन्सः-
(क) स्वास्थ्य/NRHM- आँगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के स-समय टीकाकरण लागू करने हेतु संयुक्त योजना, प्रसव-पूर्व स्वास्थ्य जाँच, केन्द्रों पर रेफरल सेवायें एवं माइक्रोन्यूट्रीएनट्स की आपूर्ति (Vit.- A, IFA, डी-वार्मिंग टेवलेट्स), VHND एवं VHSC की क्रियाषीलता तथा IYCF को प्रोत्साहन, आँगनबाड़ी केन्द्रों का ANM द्वारा भ्रमण;
(ख) पेयजल एवं स्वच्छता- आँगनबाड़ी केन्द्रों पर पेयजल एवं स्वच्छता की सुविधा का प्रावधान; (ग) पंचायती राज संस्थायें-ऑंगनबाड़ी केन्द्रों पर सेवाओं को लागू करने हेतु पंचायती राज संसथाओं एवं समुदाय का सहयोग प्राप्त करना;
13 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012(iii) कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु अन्य विषयों की समीक्षाः- कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु अन्य विषयों की समीक्षाः- कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु अन्य विषयों की समीक्षाः- कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु अन्य विषयों की समीक्षाः-
(क) आँगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन की नियमितता- सभी आँगनबाड़ी केन्द्र एवं विषेषकर अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ अल्पसंख्यक जनसंख्या के निवासवाले क्षेत्र तथा आँगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा मासिक प्रगति प्रतिवेदन (MPR) जमा करने की स्थिति;
(ख) बाल विकास परियोजना पदाधिकारी/पर्यवेक्षक/आँगनबाड़ी सेविका स्तरों पर रिक्तियों एवं उनके प्रषिक्षण की स्थिति;
(ग) आँगनबाड़ी सेविकाओं/सहायिकाओं को मानदेय एवं पर्यवेक्षिकाओं को यात्रा भत्ता भुगतान की स्थिति;
(घ) आँगनबाड़ी केन्द्रों की संरचना- आँगनबाड़ी केन्द्र भवनों का अन्य योजनाओं/कार्यक्रमों के समन्वय से निर्माण;
(ड.) आँगनबाड़ी केन्द्रों पर सभी आवष्यक सामग्रियों के आपूर्ति की स्थिति- (मेडिसीन किट्स, स्कूल पूर्व षिक्षा किट्स, वजन मषीन, संयुक्त मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड, WHO ग्रोथ चार्ट, आदि); (च) पेट्रोलियम आयल ल्युब्रिकेन्टस (POL) फंड, आकस्मिता की प्रखंड स्तर पर उपलब्धता एवं ऑंगनबाड़ी केन्द्र स्तर पर फ्लेक्सी फंड (Flexi fund) की उपलब्धता;
(छ) आँगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा महत्वपूर्ण संपर्क अवधि में गृह भ्रमण-स्वास्थ्य एवं पोषण के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर दो वर्ष के बच्चों के परिवारों तथा धातृ माताओं एवं गर्भवती महिलाओं को परामर्ष देना;
(ज) पर्यवेक्षिकाओं द्वारा मदद देने के दृष्टिकोण से पर्यवेक्षेण, सेक्टर स्तर पर समीक्षा बैठक का आयोजन, MPR का विष्लेषण (पर्यवेक्षक स्तर के भ्रमणों की समीक्षा तथा भ्रमणों की संख्या कम होने के कारण);
(झ) VHND मनाया जाना- इसमें ANM एवं पंचायती राज के सदस्यों की सहभागिता; (ञ) आँगनबाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषाहार प्रदान करने का विधि- इसमें स्वयं सहायता समूहों को संलग्न करना तथा केन्द्रों पर आयोडिनयुक्त नमक का उपयोग;
(ट) आँगनबाड़ी केन्द्रों पर अनौपचारिक स्कूल पूर्व षिक्षा में बच्चों की सहभागिता एवं विधि-स्थानीय तौर पर विकसित खेलने एवं सीखने की सामग्रियों का उपयोग, खिलौना बैेंक एवं अन्य प्रयास;
(ठ) आँगनबाड़ी सेविकाओं एवं पर्यवेक्षिकाओं का गैर-आई.सी.डी.एस. कार्यो में संलिप्तता तथा उन्हें इससे मुक्त करने की व्यवस्था;
(ड) आई.सी.डी.एस. के तहत खराब प्रदर्षन करने वाले आँगनबाड़ी केन्द्रों/सेक्टर की पहचान एवं इसके कारण;
(ढ़) कोई अन्य विषय।
(iv) षिकायतें/षिकायत निवारण पद्धति- षिकायतें/षिकायत निवारण पद्धति- षिकायतें/षिकायत निवारण पद्धति- षिकायतें/षिकायत निवारण पद्धति- आई.सी.डी.एस. कार्यक्रमों जैसे पूरक पोषाहार की गुणवत्ता, आँगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन, इत्यादि के संबंध में पंचायती राज संस्थाओं, समुदाय एवं व्यक्तियों से प्राप्त षिकायतों एवं पर्यवेक्षिकाओं/आँगनबाड़ी सेविकाओं की कर्त्तव्यहीनता के संबंध में प्राप्त षिकायतों के संबंध में की गई कार्रवाई;
नोट :-नोट :-नोट :-नोट :- समीक्षा बैठक में निम्न स्त्रोतों से प्राप्त जानकारियों का भी प्रयोग किया जा सकता हःै-
(क) आँगनबाड़ी स्तरीय अनुश्रवण समिति के बैठक की कार्यवाही एवं प्रतिवेदन; (ख) आँगनबाड़ी स्तरीय मासिक प्रगति प्रतिवेदन (MPR) एवं वार्षिक स्थिति प्रतिवेदन (ASR) का विष्लेषण;
(ग) जिला/प्रखण्ड के अन्य पदाधिकारियों एवं समिति के सदस्यों द्वारा आँगनबाड़ी केन्द्रों के भ्रमण संबंधी प्रतिवेदन;
(घ) आम जनता/मीडिया से प्राप्त प्रतिवेदन (यदि कोई हो); 4444.... ऑंगनवाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं सहयोग समिति ऑंगनवाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं सहयोग समिति ऑंगनवाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं सहयोग समिति ऑंगनवाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं सहयोग समिति गठनगठनगठनगठन
(1) ग्राम पंचायत/वार्ड सदस्य (प्राथमिकतानुसार महिला सदस्य) अध्यक्ष (2) महिला मंडल की दो सदस्य (रोटेषन के अनुसार) सदस्य (3) आषा कार्यर्काा सदस्य निम्न के प्रतिनिधिः- (4) समुदाय आधारित संस्था (2) सदस्यगण (5) समुदाय (षिक्षक/सेवानिवृत सरकारी कर्मी/ऑंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों के अभिभावक) (कुल3) सदस्य (6) सखी (सबला कार्यक्रम के तहत) (यदि कोई हो) सदस्य (7) ऑंगनबाड़ी सेविका संयोजक14 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 नोटः-नोटः-नोटः-नोटः-
• समिति अपने पोषण क्षेत्र के गॉंवों/वार्ड/दलित बस्तियों के विभिन्न विषयों पर नियमित मासिक बैठक करेगी एंव बैठक की कार्यवाही तैयार करेगी। बैठक की कार्यवाही की एक प्रति प्रखंड स्तरीय समिति एवं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को भी देगी।
• आवष्यकता के अनुसार महिला पर्यवेक्षिका, ANM, LHV को आमंत्रित किया जाएगा। ऑंगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं सहयोग समिति का कार्य ऑंगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं सहयोग समिति का कार्य ऑंगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं सहयोग समिति का कार्य ऑंगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय अनुश्रवण एवं सहयोग समिति का कार्य आँगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय समिति आँगनबाड़ी केन्द्रों पर आई.सी.डी.एस. सेवाओें को लागू एवं सुधार करने हेतु की जाने वाले कार्रवाईयों की समीक्षा करेगी/सुझाव प्राप्त करेगी एवं उसे लागू करेगी। समिति निम्न कार्रवाई करने हेतु प्राधिकृत होगीः-
(i) आँगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन की नियमितता की जाँच; (ii) सर्वेक्षित जनसंख्या के विरूद्ध सभी सुयोग्य लाभार्थियों का आच्छादन, सुनिश्चित करना; (iii) एक माह में कम से कम 21 दिनों तक सभी लाभार्थियों को पूरक खाद्यान की आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा;
(iv) 0-3 वर्ष एवं 3-6 वर्ष के बच्चों के पोषण की स्थिति की समीक्षा, वजन, WHO मानक के अनुसार नये ग्रोथ चार्ट की उपलब्धता, संयुक्त मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड, कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों की संख्या एवं उठाये गये कदम;
(v) अनौपचारिक स्कूल पूर्व षिक्षा की क्रियाषीलता की समीक्षा-प्रतिदिन की गतिविधियाँ, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध षिक्षा एवं खेल सामग्री, अभिभावकों की बैठकों का आयोजन।
(vi) VHSC बैठकों में आँगनबाड़ी सेविकाओं की सहभागिता; (vii) VHND की मासिक बैठक में प्रति आँगनबाड़ी केन्द्रों पर कम से कम समिति के एक सदस्य (सेविका, आषा एवं ANM को छोड़कर) की सहभागिता तथा यह सुनिष्चित करना कि उक्त बैठक सुव्यवस्थित हो एवं उपस्थिति अच्छी हो तथा उस दिन सभी देय सेवायें दी जा रही हो;
(viii) आँगनबाड़ी केन्द्रों पर स्थापित नियमोें के आलोक में उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा (आधारभूत संरचना-स्वच्छ पेयजल, शौचालय, खेलने की जगह, स्कूल पूर्व षिक्षा किट्स, मेडिसिन किट्स, खाना बनाने हेतु बर्त्तन, आदि सहित); (यह समिति ऑंगनबाड़ी केन्द्रों की आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण हेतु समुदाय, अन्य योजनाओं से सहयोग प्राप्त करने हेतु स्थानीय तौर पर प्रयास करेगी); (ix) केन्द्र पर दवाओं एवं पूरक पोषाहार की प्राप्ति एवं उपयोगिता तथा भंडारण की समीक्षा;
• निर्धारित नियमों के तहत कोई भी कमी रहने पर कारण का पता लगाना या, भंडारण में अनियमितता का कारण पता करना;
• इस तरह की कमी अथवा अनियमितताओं के संबंध में प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण समिति तथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को प्रतिवेदित करना;
(x) ऑंगनबाड़ी केन्द्र या सेविका के संबंध में किसी स्थानीय विवाद को सुनना तथा इस तरह के विवादों का शांतिपूर्वक निपटारा करना, विवादित विषयों को ग्राम पंचायत या प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण समिति को भेजना;
(xi) ऑंगनबाड़ी केन्द्र पर दिए जाने वाले सेवाओं में किसी कमी के संबंध में कारण जानने हेतु आई.
सी.डी.एस. पर्यवेक्षिका तथा ऑंगनबाड़ी सेविका से विमर्ष करना, स्थानीय स्तर पर सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा कमियों को दूर करने का प्रयास करना और अनसुलझें विषयों के संबंध में प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण समिति को प्रतिवेदित करना तथा इसकी प्रति CDPO/MO/PHC तथा ग्राम पंचायत को देना। (xii) कोई अन्य विषय।
नोटः- नोटः- नोटः- नोटः-
(i) उपर्युक्त सभी कार्यों/किसी एक कार्य हेतु आँगनबाड़ी केन्द्र स्तरीय समिति निम्न उपाय करेगीः- • आई.सी.डी.एस. कार्यक्रम के उद्देष्य एवं भावना से खुद को परिचित करायेगी। • आई.सी.डी.एस. से संबंधित मार्गदर्षिका के प्रति प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण समिति से प्राप्त कर उससे परिचित होगी। प्रखंड स्तरीय समिति के सदस्यों, या पर्यवेक्षिका या बाल विकास परियोजना पदाधिकारी या LHV/MO/PHC से विचार विमर्ष करेगी तथा किसी भी नियम के संबंध में जानकारी प्राप्त करेगी।15 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 • आँगनबाड़ी केन्द्र का समय-समय पर भ्रमण करेगी तथा समुदाय के अन्य सदस्यों से संपर्क कर आँगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन के संबंध में पूछताछ करेगी।
• अपने कार्यो के संबंध में एक मासिक बैठक केन्द्र के मासिक प्रगति प्रतिवेदन तैयार होने के शीघ्र बाद आयोजित करेगी और बैठक की कार्यवाही में सदस्यों की उपस्थिति, समीक्षा किए गए विषय, निष्कर्ष एवं की गई कार्रवाई संबंधी प्रतिवेदन तैयार करेगी। • मासिक बैठक की कार्यवाही की प्रति प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण समिति को भेजेगी। (ii) किसी भी विषय पर यद्धपि हमेषा वार्ता तथा एकमत से निर्णय लिया जाना चाहिए, फिर भी उपस्थित सदस्य मार्ग निर्देषिका तथा नियमों के आलोक में निर्णय ले सकते हैं। अनसुलझे विषयों को उच्चतर समिति को निदेष हेतु भेज सकते हैं।
(iii) समिति एवं इसके सदस्य अपना कार्य इस तरीके से करेंगें कि आँगनबाड़ी सेविका एवं ऑंगनबाड़ी केन्द्र के दैनिक कार्य बाधित न हों।
आदेष- आदेष दिया जाता है कि सर्वसाधारण की जानकारी के लिए बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित कराया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संदीप पौण्डरीक, सचिव ।
ÑÑÑÑ
अधीJक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित।
(cid:18)बहार गजट, 47Ñ571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
16 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 17 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012भागभागभागभाग----9999((((खखखख))))
और सवKसाधारण सूचनाएं इaयाऔर सवKसाधारण सूचनाएं इaयाऔर सवKसाधारण सूचनाएं इaयाऔर सवKसाधारण सूचनाएं इaयाOद।Oद।Oद।Oद।
ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
अधीक्षक का कार्यालय पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पटना। ——— अल्पकालीन निविदा सूचनाअल्पकालीन निविदा सूचनाअल्पकालीन निविदा सूचनाअल्पकालीन निविदा सूचना
सं0 1470—पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पटना में वित्तीय वर्ष 2011-12 में विभिन्न विभागों के उपयोग में आने वाले मषीनों के लिए Reagent इत्यादि के क्रय हेतु बिहार वाणिज्य-कर में निबंधित निर्माताओं/ प्राधिकृत विक्रेताओं से मुहरबन्द कम्प्यूटराईज/ टंकित निविदा इस निविदा प्रकाषन तिथि से 15(पन्द्रह) दिनों के अन्दर निबंधित डाक/ स्पीड पोस्ट द्वारा सभी आवष्यक अभिलेखों के साथ आमंत्रित किया जाता है। बिहार के बाहर के फर्म जो बिहार वाण्ाििज्य कर में निबंधित नहीं हैं, वे भी निविदा में इस शर्त के साथ भाग ले सकते है। परन्तु दर अनुमोदन के पष्चात् क्रय आदेष के पूर्व उन्हें बिहार वाणिज्य-कर में निबंधन कराना अनिवार्य होगा।अन्यथा उनका आदेष रद्द कर दिया जायेगा एवं द्वितीय अनुमोदित दर वाले निविदादाता को आपूर्ति आदेष निर्गत किया जायेगा। निविदा दो भागों में होगी- तकनीकी निविदा एवं वित्तीय निविदा अलग-अलग लिफाफे में मुहरबन्द होगी और लिफाफे के उपर Reagent हेतु तकनीकी निविदा एवं वित्तीय निविदा स्पष्ट रूप से अंकित करना होगा। निविदा सिर्फ निबंधित डाक या स्पीड पोस्ट से ही प्राप्त किया जायेगा। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त निविदा निबंधित डाक या स्पीड पोस्ट के अलावा किसी अन्य माध्यम से प्राप्त निविदा या फटा निविदा स्वीकृत नहीं किया जायेगा। विस्तृत सूचना एवं सामग्रियों की सूची का विवरणी इत्यादि www.prdbihar.org & www.pmch.in से डाउनलोड कर प्राप्त किया जा सकता है या कार्यालय अवधि में किसी भी दिन आवेदन देकर कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। तकनीकी निविदा के साथ सभी अभिलेखों के साथ 50000/- (पचास हजार) रूपये मात्र का बैंक ड््राफ्ट अग्रधन के रूप में जमा करना होगा। आपूर्ति नहीं करने की स्थिति में अग्रधन की राषि जब्त कर ली जाएगी। निविदा के सभी पृष्टों को पृष्टांकित करते हुए विस्तृत उल्लेख अग्रसारण पत्र में अवष्य रूप से अंकित होना चाहिए।
(ह॰)अस्पष्ट, अधीक्षक,
स्थानः पटना दिनांकः 31 जनवरी 2012 पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पटना।
TERMS & CONDITIONS
1. Tender will be of two type (1) Technical bid & (2) Financial Bid .which will be sent in two separate and sealed Envelope. If not the same will be rejected. On the Envelope clearly mention Technical Bid and Financial Bid.
2. Tenderer will write his Name with full address and Telephone Number. 3. All relevant document attached in technical Bid, such as authority letter (Against the particular tender) , Pan card , quality certificate, sales Tax registration , Sales tax Clearance certificate ( As per circular) , Drug licensees Etc .
4. Superintendent reserve rights to rejects any tender without assigning any reason. 5. Tender should be Computer typed only. Handwritten and overwriting tender will be rejected. and page no will be mention in every page and the same has been declared on forwarding letter of the tender.
6. Tax will be deducted from the bill and deposited in Govt. account as per govt. norms. 7. Only standard manufacturer and company will be accepted .Quality of Reagents items and rate approve of the items will be decided by the purchase committee only.
18 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 20128. In financial tender only rate will be given with and without tax with name of manufacturer and pack size.
9. If the awarded supplier is unable to supply at the L1 rate in given time frame than award can be given to L2 bidders by purchase committee .
10. The Committee reserves the right to cancel the bid at any time without assigning any reason. for further enquires contact superintendent office hours on working days
11. In case the selected company firm declines to take up the task at the quoted and approved rates, it would be barred from applying for any tender from PMCH, Patna and will be recommended for black listing by govt of Bihar .also the tender /security money will be forfeited
12. Any matter according of dispute leading to court case will be within preview of Patna district only.
13. Tenderer who will quoted the rate of close system reagent will attach the company rate of those reagent in their Financial bid will not more than MRP.
14. Tender will attached their affidavit through 1st class Executive magistrate to insure the purchase committee that the rate quoted by them is less than M.R.P/Company rate for the reagent of close system. In future if any question will arise, tenderer will be fully responsible for that.
15. Product should be ISO/FDA/CE/ other national or international Quality certification approved copy of certificate should be enclosing with technical bid.
16. Tenderer should be registered in Bihar sales Tax. If they are not registered at the time of tender, then after selection they have to be registered with Bihar sale tax before the order is placed.
17. The Tendered should have to Deposited as Rs. 50000/- (fifty thousand) rupees only as Earnest money with the Technical Tender in the form of Bank Draft. In favour of SUPERINTENDENT, P.M.C.H., Patna. Sd./ Illegible,
Superintendent,
Place: Patna Date: 31st January 2012 Patna Medical College Hospital, Patna.
1. REAGENT FOR ERYTHROPOITIN ASSAY MACHINE(CLIA)
| New Description |
| ACTH KIT |
| CORTISOL KIT |
| EPO KIT |
| FERRITIN KIT |
| FOLIC ACID KIT |
| VITAMIN B12 KIT |
| IML. CALCITONIN KIT |
| CK-MB KIT |
| IML. HOMOCYSTEINE KIT |
| ALBUMIN KIT |
| C-PEPTIDE KIT |
| INSULIN KIT |
| IGFBP-3 KIT |
| IML. CMV IGG |
| IML. H. PYLORI IGG SEMI-QUANT. |
| IML. ANTI-HBC IGM KIT |
| IMM.HBSAG CONFIRMATORY KIT |
| IML. HERPES IGG KIT |
| **IML. IL6 MONO/POLY KIT |
| IML. CARBAMAZEPINE KIT |
| DIGOXIN KIT |
| IML. PHENYTOIN KIT |
| THEOPHYLLINE KIT |
| IML. VALPROIC ACID KIT |
| AFP (SEQUENTIAL) KIT |
| DHEA SULFATE KIT 100T |
| ESTRADIOL KIT 100T |
| FSH KIT 100T |
| LH KIT 100T |
| PROGESTERONE KIT |
| PROLACTIN KIT |
| FREE T3 KIT 500T |
| T3 KIT 500T |
| FREE T4 KIT 500T |
| TOTAL T4 KIT 500T |
| TBG KIT 100T |
| THYROGLOBULIN KIT 500T |
| IML. ANTI-THYROGLOBULIN KIT 500T |
| ANTI-TPO KIT 500T |
| THIRD GENERATION TSH 500T |
| CEA KIT 100T |
| THIRD GENERATION PSA 500T |
| IML. TURBO CK-MB KIT 100T |
| IML. TURBO MYOGLOBIN KIT 100T |
| *IML. TURBO NT-PROBNP KIT 100T |
| IML. TURBO INTACT PTH KIT 50T |
| IML. TURBO TROPONIN I KIT 500T |
| BETA-2-MICROGLOBULIN 100T |
| IML. ANTI-HBC IGM SAMPLE DILU |
| IML. ANTI-HBc IgM SAMPLE DILU |
| IML. CALCITONIN SPLE DILUENT |
| CORTISOL SAMPLE DILUE |
| ESTRADIOL SAMPLE DILU |
| FOLIC ACID SAMPLE DIL |
| IML. GASTRIN SAMPLE DILUENT |
| HBSAG SAMPLE DILUENT |
| CEA SAMPLE DILUENT |
| DHEA-SO4 SAMPLE DILUE |
| EPO SAMPLE DILUENT |
| FERRITIN SAMPLE DILUE |
| FSH SAMPLE DILUENT |
| HGH SAMPLE DILUENT |
| IGFBP-3 SAMPLE DILUEN |
| INSULIN SAMPLE DILUEN |
| T3 SAMPLE DILUENT |
| TOTAL T4 SAMPLE DILUE |
| THEOPHYLLINE SAMPLE D |
| THYROGLOBULIN SAMPLE DILUENT |
| IMM.ANTI-TG SAMPLE DILUENT |
| Accessories |
| PROBE CLEANING |
| SAMPLE CUPS (1000) |
| SAMPLE CUP CAPS (1000 |
| WATER TEST KIT |
| SUBSTRATE MODULE (1000 t) |
| PROBEWASH |
| GMMI |
| 446400 |
| 446410 |
| 446440 |
| 446450 |
| 446460 |
| 446470 |
| 446480 |
| 446090 |
| 447020 |
| 447070 |
| 447160 |
| 447280 |
| 447410 |
| 447440 |
| 447450 |
| 447460 |
| 447470 |
| 447480 |
| 447600 |
| 447610 |
| 447620 |
| 447630 |
| 447690 MICROALBUMIN RGNT |
| 447700 |
| 447710 |
| 447720 |
| 447730 |
| 447740 |
| 447750 |
| 447760 447780 447790 474620 474630 822330118 822330141 822330284 |
| 844101510 844101511 A20424 |
| A20634 |
| 441400 |
| 441470 |
| 449560 |
| 449730 |
| 465365 |
| 468429 |
| 469283 |
| 469700 |
| 469884 |
| 469975 |
| 474020 |
| 663940 |
| A20426 |
| 622330142 |
| 844101505 |
| 844330427 |
| 465376 |
| A16489 |
| 663860 |
| A20427 |
| 844101506 |
| 844101508 |
| 844330428 |
| 844330429 |
| 446398 |
| A32542 |
| A32543 |
| 447040 |
| 447050 |
| 447420 |
| 447650 |
| 449770 |
| 663600 |
| A20425 |
| A07420 |
| 467640 |
| 465290 |
| 465300 |
| 450120 |
| 450125 |
| 450130 |
| 450162 |
| 450163 |
| 450164 |
| 465440 |
| 469905 |
| 465980 |
| 465981 |
| 465984 |
| 822330265 |
| A38656 |
| 470706 |
| 470704 |
| 470708 |
| 447170 |
| 470070 Mixer |
| 652730 |
| 651412 |
| 470717 |
| 470718 |
| 470719 |
| 470720 |
| 470724 |
| 470725 |
| 966602 |
Superintendent,
Sd./ Illegible, Place: Patna Date: 31st January 2012 Patna Medical College Hospital, Patna.
ÑÑÑÑ
अधीJक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित।
(cid:18)बहार गजट, 47Ñ571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
23 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट काकाकाका पूरकपूरकपूरकपूरक((((अअअअ0000)))) ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत
ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
समाहरणालय, गोपालगंज
(जिला स्थापना शाखा)
आदेश
9 जनवरी 2012
सं॰ 35/स्था0 (आदेश सं0 02/2012)—अनुमण्डल पदाधिकारी, हथुआ द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, भोरे नेे पत्रांक- 497, दिनांक 24 जुलाई 2004 से पूर्व प्रखण्ड नाजीर श्री राजेन्द्र कुमार को प्रखण्ड नजारत का प्रभार श्री राजकुमार राजहंस, सहायक को सौंपने का निदेश दिया था, किन्तु उनके द्वारा प्रभार नहीं सौंपा गया तदोपरान्त प्रखण्ड नजारत में हुई लेखा की गड़बड़ी की जाँच करने हेतु कार्यालय अधीक्षक, जिला लेखा पदाधिकारी, गोपालगंज एवं कार्यपालक दण्डाधिकारी, अनुमण्डल कार्यालय हथुआ की एक त्रि-सदस्यीय टीम का गठन किया गया। जाँच टीम के समक्ष भी श्री राजेन्द्र कुमार तत्कालीन प्रखण्ड नाजीर उपस्थित नहीं हुए और जाँच कार्य में भी सहयोग नहीं किये। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी लेखा बहियों की जाँच के क्रम में रु0 44,975.00 (चौवालिस हजार नौ सौ पचहत्तर) का अस्थायी गबन का मामला प्रकाश में आया। इस प्रकार, श्री राजेन्द्र कुमार, तत्कालीन प्रखण्ड नाजीर, भोरे प्रखण्ड को सरकारी राशि के गबन, स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता एवं उच्च पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना के आरोप में इस कार्यालय के आदेश सं0 77/04-सह- पठित ज्ञापांक-1124, दिनांक 22 सितम्बर 2004 द्वारा निलंबित कर अनुमण्डल कार्यालय, हथुआ में मुख्यालय निर्धारित किया गया।
उपरोक्त वर्णित वित्तीय अनियमितता के आरोप में प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, भोरे से श्री कुमार के विरुद्ध प्रपत्र-''क'' में आरोप पत्र प्राप्त हुआ। प्राप्त प्रपत्र-''क'' को अनुमोदित कर विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करने हेतु श्री गिरीशनन्दन सिंह, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, गोपालगंज को इस कार्यालय के आदेश ज्ञापांक-753, दिनांक 02 जुलाई 2005 द्वारा संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
इस कार्यालय के आदेश सं0 137/06-सह-पठित ज्ञापांक-963, दिनांक 10 अक्तूबर 2006 द्वारा श्री राजेन्द्र कुमार, निलंबित सहायक को निलंबन से मुक्त किया गया तथा विभागीय कार्यवाही चलती रही। श्री सिंह के सेवा-निवृत्ति के कारण पुनः इस कार्यालय के आदेश सं0 13/07-सह-पठित ज्ञापांक 130/स्था0, दिनांक 2 फरवरी 2008 द्वारा श्री अंजनी कुमार सिन्हा, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, गोपालगंज को विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। परन्तु श्री सिन्हा का स्थानान्तरण हो जाने केे कारण उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन की प्रक्रियापूर्ण नहीं किया जा सका।
पुनः इस कार्यालय के आदेश सं0 61/09-सह-पठित ज्ञापांक-514/स्था0, दिनांक 22 जून 2009 द्वारा श्री उपेन्द्रनाथ पाण्डेय, भूमि सुधार उप-समाहर्त्ता, हथुआ को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। सभी पक्षों के द्वारा समर्पित साक्ष्य के अवलोकन तथा पक्षों को सुनने के पश्चात् भूमि सुधार उप-समाहर्त्ता, हथुआ-सह-संचालन पदाधिकारी ने विभागीय कार्यवाही संचालन की प्रक्रिया पूर्ण कर अपना जाँच प्रतिवेदन पत्र सं0 1966, दिनांक 14 सितम्बर 2009 द्वारा समर्पित किया।24 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 संचालन पदाधिकारी-सह-भूमि सुधार उप-समाहर्त्ता, हथुआ से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में पुनः इस कार्यालय के ज्ञापांक 1317, दिनांक 8 दिसम्बर 2009 द्वारा श्री राजेन्द्र कुमार, (सहायक, भोरे प्रखण्ड) से द्वितीय कारण पृच्छा की मांंग की गयी, जिसके आलोक में श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इन्होने संचालन पदाधिकारी के समक्ष विभागीय कार्यवाही के दौरान, जो कारण पृच्छा समर्पित किया है, उसी पर कायम है।
इस प्रकार श्री कुमार आरोपी से द्वितीय कारण पृच्छा प्राप्त होने के पश्चात् विभागीय कार्यवाही/अभिलेख में संलग्न साक्ष्य एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन आरोपों की विवेचना के लिए पर्याप्त आधार है। कंडिकावार विवेचना निम्नवत् हैः-
आरोप कंडिका-1
प्रखण्ड नजारत में लेखा की गड़बड़ी का पता चलने पर जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के आदेश ज्ञापांक-2443(सी0), दिनांक 18 जून 2004 के आलोक में दिनांक 01 जुलाई 2004 को जिला लेखा पदाधिकारी, गोपालगंज एवं कार्यालय अधीक्षक, गोपालगंज प्रखण्ड नजारत में जाँच हेतु प्रखण्ड मुख्यालय में आए परन्तु उक्त तिथि को श्री राजेन्द्र कुमार, प्रखण्ड नाजीर बिना किसी सूचना के अनाधिकृत रुप से अनुपस्थित पाये गये। दिनांक 01 जुलाई 2004 को जाँच के समय श्री सादात अनवर, कार्यपालक दण्डाधिकारी, हथुआ भी उपस्थित थे। जाँच के क्रम में पाया गया कि श्री राजेन्द्र कुमार, प्रखण्ड नाजीर कई रोकड़ बही लेकर फरार है। जाँच के समय प्रखण्ड नाजीर के अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने एवं रोकड़ बहियों का अनाधिकृत रुप से कार्यालय से गायब करने से यह स्पष्ट हुआ कि उनके द्वारा सरकारी राशि का गबन किया गया है, और इस तथ्य को छुपाने के उद्देश्य से ही वे सरकारी रोकड़ बही के साथ फरार हुए है।
स्पष्टीकरण :-
यह कि मेरे विरुद्ध आरोप लगाया गया है कि दिनांक 01 जुलाई 2004 को जिला लेखा पदाधिकारी, गोपालगंज एवं कार्यालय अधीक्षक, गोपालगंज द्वारा प्रखण्ड नजारत की जाँच के समय में अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाया गया। इस संबंध में मुझे स्पष्ट करना है कि दिनांक 01 जुलाई 2004 को मैं अवकाश में था तथा रोकड़ बहियों को अलमीरा में रख दिया था। रोकड़ बहियों को मैने कही छुपाया नहीं था और न ही अपने साथ ले गया था।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः-
आरोप की कंडिका (1) में यह लिखा है कि श्री राजेन्द्र कुमार रोकड़ पंजी अपने साथ लेकर फरार है। सरकारी अभिलेखों/पंजियों/दस्तावेजों के साथ घटित होने वाली ऐसी घटनाओं के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई के प्रावधान विचारित है जो संभवतः इस मामले में नहीं हुआ है। तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी श्री किशोरी पासवान सम्प्रति अनुमण्डल पदाधिकारी, दरभंगा सदर के रूप में पदस्थापित है, इसलिए आरोप की इस कंडिका के संबंध में कुछ किया जाना कानून की दर्पण में प्रतिविम्बित नहीं हो पा रहा है।
समीक्षा :-
आरोपी के स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट है कि वे 01 जुलाई 2004 को कार्यालय में उपस्थित नहीं थे, जबकि उस दिन जाँच दल के द्वारा प्रखण्ड नजारत में लेखा संबंधी गड़बड़ी की जाँच करनी थी। यह भी सम्भव नहीं है कि आरोपी, जो तत्कालीन नाजीर थे, उन्हें जाँच दल की आने की सूचना नहीं दी गई हो। इस प्रकार जाँच के दिन आरोपी का अनुपस्थित होना या अवकाश में रहना, इस तथ्य को सम्पुष्ट करता है कि रोकड़ पंजी की गड़बड़ी को छिपाने के उद्वेश्य से ही वे कार्यालय नहीं आये थे। साथ ही रोकड़ पंजी में गड़बड़ी इस बात की ओर इंगित करता है कि कही-न- कही सरकारी राशि का गबन/दुरूपयोग किया गया है।
आरोप है कि कई रोकड़ पंजी लेकर आरोपी गायब थे। स्पष्टीकरण में आरोपी द्वारा कहा गया है कि रोकड़ पंजी अलमीरा में था तो फिर जाँच दल के समय वांछित रोकड़ पंजी तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा क्यों नहीं उपस्थापित किया गया। कुछ रोकड़ पंजी का होना और कुछ रोकड़ पंजी का नहीं होना, इस तथ्य को साबित करता है कि रोकड़ पंजी आरोपी द्वारा हटाया गया, क्योंकि रोकड़ पंजी के Custodian आरोपी ही थे। यद्यपि संचालन पदाधिकारी द्वारा इस संबंध में गहन अन्वेषण नहीं कर मंतब्य दिया गया है कि रोकड़ पंजी को लेकर फरार होने की स्थिति मंें तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना चाहिए था, जो नहीं किया गया। वावजूद, आरोपी इस आरोप की वे कुछ रोकड़ पंजी लेकर फरार थे, खारिज नहीं करा सका है।25 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 उपर्युक्त विवेचना से स्पष्ट है कि आरोपी के द्वारा रोकड. पंजी में गवनित राशि को छिपाने के उद्वेश्य से ही रोकड़ पंजी लेकर ही जाँच के दिन कार्यालय से जानबुझकर अनुपस्थित रहें। इस प्रकार, आरोपी पर गठित यह आरोप साबित होता है।
आरोप कंडिका-2 :-
उपलब्ध सामान्य रोकड़ बही को जाँचने के क्रम में ऐसा पाया गया कि प्रत्येक पृष्ट के जोड़ पर कई बार कटिंग किया गया है एवं ह्वाइटनर का प्रयोग किया गया है। प्रखण्ड नाजीर के द्वारा लेखा में हुयी गड़बड़ी को छुपाने के लिए ऐसा किया गया है।
स्पष्टीकरणः-
यह की रोकड़ बही, जोड़-घटाव करने में जहाँ गलती हुयी थी, उसे सही करने के क्रम में व्हाईटनर का प्रयोग किया गया था न कि लेखा में हुयी गड़बड़ी को छुपाने के लिए ऐसा किया गया था। जब सरकार द्वारा व्हाईटनर प्रयोग करने की मान्यता है तो उसके प्रयोग से लेखा में गड़बडी नहीं कही जा सकती है।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-
रोकड़ पंजी में प्रत्येक पृष्ट के जोड़ पर कटिंग किये जाने का अरोप तथा ह्वाइटनर से मिटाने एवं संशोेधित करने का आरोप है, जो मुख्य रोकड़ पंजी के अवलोकन से स्पष्ट होता है। निश्चय ही संशोधन के दृष्टिकोण से पुनर्लेखन किया गया है। आरोपित ने अपने स्पष्टीकरण में इसे स्वीकार भी किया है, परन्तु प्रधान रोकड़ पंजी तथा साथ के अन्य सहायक पंजियों के अवलोकन से अंकित रााशि में कोई फर्क नहीं देखा गया, जिसके आधार पर गड़बड़ी अथवा गबन का मामला कहा जा सकें। क्योंकि गबन एवं गड़बड़ी सिद्ध होने के लिए रोकड़ पंजी एवं प्रधान रोकड़ पंजी में संधारित एतद संबंधी राशि में फर्क होना अनिवार्य होता है, जो यहाँ नहीं पाया गया।
समीक्षा :-
आरोपी के द्वारा स्वीकार किया गया है कि रोकड़ पजी के जोड़-घटाव जहाँ गलती हुई थी, को ठीक करने के उद्वेश्य से ह्वाइटनर का उपयोग किया गया है। संचालन पदाधिकारी ने जाँच के क्रम में पाया है कि मुख्यरोकड़ पंजी में ह्वाइटनर का प्रयोग किया गया है। यद्यपि संचालन पदाधिकारी का कहना है कि सहायक रोकड़ पंजी तथा मुख्य रोकड़ पंजी में राशि का अन्तर नहीं है। किन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सहायक रोकड़ पंजी एवं मुख्य रोकड़ पंजी में ह्वाइटनर का प्रयोग आरोपी द्वारा किस परिस्थिति में किया गया है। अर्थात् संचालन पदाधिकारी द्वारा गहनता से रोकड़ पंजी की जाँच कर विश्लेषण नहीं किया गया है, वल्कि सतही ढंग से इस आरोप की जाँच किया गया है। वित्तीय नियमावली तथा बिहार कोषागार संहिता के मुताविक रोकड़ पंजी में ह्वाइटनर का प्रयोग वर्जित है। राशि के आकड़े के हेर-फेर करने के उद्वेश्य से ही ह्वाइटनर का प्रयोग आरोपी द्वारा किया गया है ताकि सहायक एवं रोकड़ पंजी में भिन्नता को मिटाया जा सके।
अतः संचालन पदाधिकारी का तर्क स्वीकार योग्य नहीं है। वल्कि यह स्पष्ट है कि राशि के गबन को छिपाने तथा आकड़ों को मिटाने के उद्वेश्य से सहायक एवं मुख्य रोकड़ पंजी में आरोपी द्वारा ह्वाइटनर का प्रयोग किया गया है। इस प्रकार, आरोपी पर यह आरोप भी साबित होता है।
आरोप कंडिका-3 :-
रोकड़ बहियों का संधारण तिथिवार न करके मनमाने ढंग से रोकड़ बही संधारित किया गया है। कोषागार से पारित कुछ विपत्रों को बैंक से भुगतान होने के पूर्व हीं रोकड़ बही में प्राप्त एवं व्यय दिखाया गया है। ऐसे विपत्रों की विवरणी निम्नप्रकार है-
| क्र0 सं0 | विपत्र संख्या | शीर्ष | राशि | कोषागार से निकासी तिथि | रोकड़ बहियों में प्रविष्टि की तिथि |
| 1. | 9/03-04 | 8005ं 2053 | 25,000=00 | 23.5.03 | 16.5.03 |
| 2. | 10/03-04 | 8005 | 25,000=00 | 23.5.03 | 16.5.03 |
| 3. | 20/03-04 | 2515 | 2,623=00 | 22.7.03 | 16.5.03 |
| 4. | 47/03-04 | 2515 | 9,263=00 | 29.9.03 | 11.9.03 |
| 5. | 65/03-04 | 2235 | 6,930=00 | 11.12.03 | 24.10.03 |
| 6 | 94/03-04 | 2515 | 9,263=00 | 27.2.04 | 23.3.04 |
स्पष्टीकरणः-
जहाँ तक लेखा बही संधारित करने का प्रश्न है जिन-जिन तिथियों को ट्रान्जेक्सन हुआ है उन्ही तिथियों में रोकड़ बहियों में प्रविष्टियाँ की गयी है। जहाँ तक कोषागार से पारित कुछ विपत्रों को बैंक से भुगतान होने से पूर्व हीं रोकड़ बहियों में प्राप्त एवं व्यय दिखाने का प्रश्न है, जानकारी के अभाव में विपत्र पारित होने के बाद विपत्र पंजी के अनुसार रोकड़ बहियों में आय-व्यय की प्रविष्टि कर दी गयी, परन्तु इसे अनियमितता कही जा सकती है, न कि गबन।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः-
इस कंडिका में आरोपित तथ्य सही पाये गये तथा आरोपित सहायक ने अपने स्पष्टीकरण में भी स्वीकार किया है, परन्तु यह बात आश्चर्य में डालने लायक है कि कोषागार द्वारा विपत्र का निस्तारण बाद में होता है, जबकि उनका निस्तारण रोेकड़ पंजी में एक सप्ताह पहले किया गया है। पूछे जाने पर आरोपित सहायक इसका उत्तर देते हुए अपनी अनभिज्ञता को स्वीकार किया है। इस प्रकरण पर नजर डालने से तत्कालीन नाजीर श्री राजेन्द्र कुमार की अनभिज्ञता एवं अदक्षता सिद्ध होती है। चूँकि इस कंडिका में वर्णित सभी विपत्र वेतनादि की राशि से संबंधित है। जिसका गबन इसलिए नहीं सिद्ध होता, क्योकि किसी कर्मी द्वारा उस अवधि में अपने विपत्र की राशि प्राप्त नहीं किये जाने का अलग से आरोप अथवा शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
समीक्षा :-
आरोपी के द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया है कि उनके द्वारा वित्तीय अनियमितता वरती गई है। संचालन पदाधिकारी इस आरोप की गहराई से जाँच करने मे असफल रहे है। आरोपी नाजीर थे। अतः उनका दायित्व था कि वित्तीय नियम एवं अनुशासन में सरकारी राशि का संधारण रोकड़ पंजी में करें। किन्तु मनमाने ढंग से रोकड़ पंजी का संधारण किया जाना उनकी अनभिज्ञता या उदासीनता अदक्षता नहीं दर्शाता है। वल्कि ऐसी गंभीर वित्तीय अनियमितता के लिए दोषी है। इस प्रकार यह आरोप भी साबित होता है।
आरोप कंडिका- 4 :-
प्रखण्ड नाजीर द्वारा जानबुझकर प्रखण्ड में चेक पंजी एवं बैंकों में जमा राशि की पंजी का संधारण नहीं किया गया ताकि लेखा की गड़बड़ी को लम्बी अवधि तक छुपाया जा सके।
स्पष्टीकरण :-
यह कि चेक पंजी एवं बैंकों में जमा राशि की पंजी का संधारण करने का प्रश्न है, इस संबंध में मुझे स्पष्ट करना है कि इन पंजियों का मुझे कोई प्रभार नही मिला था तथा निरीक्षण के क्रम में किसी पदाधिकारी द्वारा इस तरह का कोई निदेश भी दिया गया था कि इन पंजियो का संधारण आवश्यक है। यदि इस तरह का निदेश मुझे प्राप्त हुआ होता तो मैं इन पंजियों संधारण अवश्य किया होता ।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-
प्रखण्ड में चेक पंजी एवं बैंको में जमा राशि की पंजी का संधारण नहीं किया गया होेना एक ऐसा आरोप है, जिसके लिए उस कार्यालय का नियंत्री पदाधिकारी ही जिम्मेवार माना जा सकता है, क्योकि यह एक गम्भीर लापरवाही है, जिसको प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को सुनिश्चित कराना चाहिए था परन्तु गठित आरोप की कंडिका (4) में जितना संक्षिप्त आरोप अंकित किया गया है, उसके आधार पर इस प्रकरण को वित्तीय गबन का मामला नहीं माना जा सकता है, इतनी बात विल्कुल स्पष्ट है कि आरोपित श्री राजेन्द्र कुमार वित्तीय मामलों के लिए सर्वथा अयोग्य एवं अदक्ष कर्मी है जिन्हे प्रखण्ड नाजीर का दायित्व कदापि नहीं सौंपा जाना चाहिए था।
समीक्षा :-
27 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012इस संबंध में आरोपी का कहना है कि बैंक पंजी तथा चेक पंजी प्रभार में नहीं मिला, जिस कारण उनके द्वारा संधारण नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी के इस संबंध में केवल तर्क का सहारा लेकर गहनता से अवलोकन करने में सफल नहीं रहे है।
आरोपी के स्पष्टीकरण से यह तथ्य प्रकाशित होता है कि आरोपी को इस बात की जानकारी थी कि नजारत में बैंक पंजी तथा चेक पंजी का भी संधारण किया जाता है। ऐसी परिस्थिति में नाजीर का दायित्व बनता था कि अपने पदाधिकारी से कहकर दोनों पंजी का संधारण करना चाहिए था। किन्तु ऐसा नहीं करके सचमुच, आरोपी द्वारा लेखा की गड़बड़ी की लम्बी अवधि तक छुपाने का प्रयास किया गया। इस प्रकार यह आरोप भी साबित होता है।
आरोप कंडिका-5 :-
सामान्य इंदिरा आवास योजना की सहायक रोकड़ बही पंजी की जाँच से यह स्पष्ट हुआ कि दिनांक 31 मार्च 2004 को इस मद में मो0 79,000/- रुपये व्यय दिखाया गया है, परन्तु सामान्य रोकड़ बही में मो0 1,56,000.00 रुपये की राशि को व्यय दिखाते हुए घटाया गया है। इस प्रकार मो0 77,000/- रुपये की राशि का अन्तर पाया गया। प्रखण्ड नाजीर के द्वारा इस रोकड़ बही के पृष्ट सं0 76 पर दिनांक 25 फरवरी 2012 की तिथि में यह कि यह अंकित किया गया है कि उस दिन लाभुकों को कुल मों0 8,06,000.00 रुपये का भुगतान किया गया है, परन्तु सामान्य रोकड़ बही में मो0 7,29000.00 रुपये ही घटाया गया है। इस प्रकार मो0 70,000/- रुपये खर्च में छोड़ दिया गया है। नाजीर द्वारा दिनांक 31 मार्च 2004 को सामान्य इंदिरा आवास में पूर्व के अवशेष व्यय मो0 70,000/- रुपये के बजाय मो0 77,000.00 रुपये जोड़कर सामान्य रोकड़ बही से मो01,56,000=00 रुपये घटाया गया है, जिसमें मो0 7000/- रुपये बिना किसी मद में हुए व्यय को नाजीर द्वारा सीधे घटा दिया गया है। यह पूर्ण रूप से गबन का मामला है। जिला लेखा पदाधिकारी ने नाजीर से उक्त राशि को वसूलनीय बताया है।
स्पष्टीकरण :-
यह कि दिनांक 25 फरवरी 2002 को लाभूकों को वास्तव में मो0 8,06,000.00 रुपये का ही भुगतान किया गया था परन्तु जोड़ में गलती होने से मो0 7,29,000.00 रुपये ही रोकड़ बही में दिखाया गया। 8,06,000.00 में से 7,29,000.00 घटाने पर वास्तव में 77,000.00 ही होता है जिसे आरोप में 77,000.00 के बजाय 70,000.00 दिखाया गया है। दिनांक 31 मार्च 2004 को पूर्व के अवकाश मो0 77,000.00 रुपये जोड़कर सामान्य रोकड़ बही में से मो0 1,56,000.00 रुपया घटाने पर कोई भी अंतर नहीं आता है। इस प्रकार 7000.00 रु0 जो गबन और वसूलनीय राशि दिखाया गया है, वह सरासर गलत है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-
कंडिका 5 में इंदिरा आवास की राशि सात हजार के गबन का उल्लेख किया गया है, जिसका अवलोकन किया गया तथा पाया गया कि दिनांक 31 मार्च 2004 को रोकड़ पंजी को संशोधित करने की चेष्टा की गयी है तथा अंतर की राशि की खानापूर्ति कर ली गई है। वर्ष 2002 में दिनांक 25 फरवरी 2002 अगर तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा इस मामलों से संबंधित साक्ष्यों को एकत्रित कर कार्रवाई सुनिश्चित की गई होती तो साक्ष्य में हेराफरी की स्थिति नहीं बनती, परन्तु अधोहस्ताक्षरी द्वारा जाँच किये जाने की तिथि में संशोधित साक्ष्य ही प्रस्तुत किये गये जिसकी सत्यासत्य पर विचारण करने का क्षेत्राधिकार संचालन पदाधिकारी की नहीं होती है, क्योेकि अबतक रोकड़ पंजी में सभी भूलों को सुधारते हुए शत-प्रतिशत समायोजन प्रदर्शित कर दिया गया है। ऐसा लगता है कि अगर तत्कालीन अवधि में बड़ी गड़बड़ी की साजिश की गयी होगी तो उसे सुधारने का पुरा समय प्रचलित शासकीय प्रणाली द्वारा प्रदान कर दिया गया है तथा आज लिपापोती कर साक्ष्य प्रदर्शित किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में विभागीय कार्यवाही का संचालन की गम्भीरता को दुखद आघात पहुँचता है।
समीक्षा :-
इस संबंध में आरोपी का कहना है कि सामान्य रोकड. पंजी में 25 फरवरी 2002 का अन्तर राशि (8,06,000-7,29,000)=77000 रुपया 31 मार्च 2004 को जोड़ गया है जबकि आरोप पत्र में 70000 रुपया ही दर्शाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि 31 मार्च 2004 को रोकड़ पंजी में संशोधन करने की चेष्टा की गई है। स्पष्टीकरण तथा जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा करने के पश्चात् स्पष्ट है कि 25 फरवरी 2002 को इंदिरा आवास मद में व्यय राशि का इन्दराज सहायक रोकड़ पंजी एवं सामान्य रोकड़ पंजी में गलत हुआ है। आरोपी द्वारा करीब दो वर्षो के बाद कैशबुक में संशोधन किया गया, जो अस्थायी गबन को दर्शाता है।28 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 चूँकि 31 मार्च 2004 को रोकड़ पंजी में लिपापोती हुआ है, ऐसी स्थिति में पूर्ण सम्भव है कि आरोपी द्वारा 70000 रुपये को 77000 रुपये बनाय गया है । यद्यपि संचालन पदाधिकारी ने इस संबंध सतही प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार आरोपी पर अस्थायी गबन का आरोप साबित होता है, क्योकि जाँच दल द्वारा सूक्ष्मता से रोकड़ पंजी की जाँच कर प्रतिवेदन समर्पित किया गया है तथा 7000 रुपये आरोपी से वसूलनीय दर्शाया गया है।
आरोप कंडिका-6 :-
शीर्ष 2015 निर्वाचन की सहायक रोकड़ पंजी में दिनांक 31 मार्च 2004 की अवशेष राशि मो0 80,191.00 रुपये अंकित है, परन्तु सामान्य रोकड़ बही में अवशेष के रुप में मो0 80,181.00 रुपये दर्ज है। इस प्रकार मो0 10.00 दस रुपये की राशि कम दर्शायी गयी है। यह अस्थायी गबन का मामला है। जिला लेखा पदाधिकारी ने नाजीर से उक्त राशि को वसूलनीय बताया है।
स्पष्टीकरण :-
यह कि निर्वाचन के सहायक रोकड़ पंजी में दिनांक 31 मार्च 2004 के अवशेष राशि में मो0 10=00 रूपये का जो अन्तर दर्शाया गया है, उसे मैने पूर्व में ही जमा कर दिया है।
आरोप कंडिका-7 :-
बायो गैस की सहायक रोकड़ बही में दिनांक 31 मार्च 2004 का अवशेष राशि मो0 54,430.85 पैसा अंकित है, परन्तु सामान्य रोकड़ बही में यह राशि मो0 54,430.00 रुपये अवशेष के रूप में अंकित है। इस प्रकार उन्होनें रोकड़ बही में 0.85 पैसे की राशि को कम दर्शाया गया है, जो वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
स्पष्टीकरणः-
यह कि बायोगैस के सहायक रोकड़ पंजी में जो 0.85 पैसे का अन्तर दिखाया गया है, उसे मैने जमा कर दिया है। आरोप कंडिका-8 :-
शीर्ष आई0आर0डी0पी0 योजना की सहायक रोकड़ पंजी में दिनांक 31 मार्च 2004 को अवशेष राशि मो0 11,10,823.
80 पैसा अंकित है, सामान्य रोकड़ बही में यह राशि मो0 11,10,828.08 रुपये दर्ज है। इस प्रकार सामान्य रोकड़ बही में मो0 5=00 रुपये अधिक दर्शाया गया है, जो वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। श्री कुमार इस गबन के लिए पूर्णरुपेण उतरदायी हैं।
स्पष्टीकरण :-
यह कि आई0आर0डी0पी0 के सहायक रोकड़ पंजी में दिनांक 31 मार्च 2004 को अवशेष राशि भूलवश मो0 11,10,824.00 रुपया के बजार मो0 11,10,828.08 पैसा दर्शाया गया है, स्पष्टतः इसमें 5/- रु0 अधिक नाजीर को ही देय है, इसमें गबन का प्रश्न नहीं उठता है, यह आरोप सरासर गलत है।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कंडिका 6,7 एवं 8 :-
आरोप पत्र की कंडिका 6 में योग मे 10 रुपये का अन्तर, कंडिका 7 में योग मे 85 पैसे का अन्तर कंडिका 8 में योग मे 5 रुपये का अन्तर आरोप के रूप में अंकित किया गया है, जो गबन को नहीं परन्तु आरोपित नाजीर की अदक्षता एवंं लापरवाही को उजागर करता है। परन्तु यह व्यवहारिक है कि नाजीर द्वारा संधारित रोकड़ पंजी की अंतिम जाँच कार्यालय के प्रधान सहायक द्वारा की जाती है तथा संबंधित नियंत्री पदाधिकारी भी आत्म तुष्टि के पश्चात् ही अपना हस्ताक्षर करते है। इसलिए महज 10 रुपये 5 रुपये एवं 85 पैसे का अन्तर योग में बारी-बारी से पाया जाना यह प्रमाणित करता है कि रोकड़ पंजी के संधारण एवं अभिलेख के संबंध में तत्कालीन प्रधान सहायक एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा भी अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया है।यह मामूली तथ्य है, परन्तु लापरवाही की प्रवृति मामूली नहीं है। यहाँ आरोपित नाजीर की व्यक्तिगत अदक्षता सिद्ध होती है।
समीक्षा :- कंडिका-6,7, एवं 8
आरोपी के स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त पाया गया कि 31 मार्च 2004 को रोकड़ आरोपी द्वारा रोकड़ पंजी के संधारण में व्यापक गड़बड़ी की गई है तथा राशि का अस्थायी गबन करने का प्रयास29 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 किया गया है। इस प्रकार आरोप 6, 7 एवं 8 भी साबित होता है। प्रखण्ड नाजीर श्री कुमार द्वारा रोकड़ बही पर लेखापाल के रूप में भी अपना हस्ताक्षर बदलकर किया गया है, जो गम्भीर वित्तीय अनियमितता है।
आरोप कंडिका-9 :-
प्रखण्ड नाजीर श्री कुमार द्वारा रोकड़ बही पर लेखापाल के रूप में भी अपना हस्ताक्षर बदल कर किया गया है, जो गम्भीर वित्तीय अनियमितता है।
स्पष्टीकरण :-
यह कि तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के निर्देशानुसार ही मैने लेखापाल और नाजीर के स्थान पर अपना हस्ताक्षर किया है।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-
कंडिका 9 में लेखापाल के स्थान पर आरोपित द्वारा हस्ताक्षर किये जाने को वित्तीय अनियमितता की संज्ञा दी गयी है, जबकि यह अपराधिक कृत्य है, परन्तु तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी ने अपना दायित्व सिर्फ आरोप पत्र गठित करना समझा है। तत्कालीन घटना के आधार पर विधि सम्मत दायित्व का पालन नहीं किया गया है।
समीक्षा :-
आरोपी के द्वारा लेखापाल के स्थान पर अपना हस्ताक्षर बदल कर किया गया है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोप सही पाया गया है तथा इस कृत्य को अपराधिक कृत्य माना है। इस प्रकार समीक्षोपरांत पाया गया कि आरोपी के विरुद्ध लगाया गया यह गम्भीर आरोप सही है।
आरोप कंडिका-10 :-
प्रखण्ड नाजीर श्री कुमार द्वारा सामाजिक सुरक्षा पेेंशन की राशि मो0 3,80,000.00 रुपये दिनांक 31 मार्च 2004 को जिला से प्राप्त किया गया है। प्राप्त राशि में से मो0 2,50,000.00 रुपये दिनांक 29 जून 2004 को एवं मो0 92,630.00 रुपये दिनांक 29 जून 2004 को एवं मो0 92,630.00 रुपये दिनांक 14 जुलाई 2004 को क्षे0ग्रा0 बैंक, भोरे में संधारित प्रखण्ड के खाता सं0 2088 में जमा किया गया है एवं अवशेष राशि मो0 37,970.00 रुपये बैंक में जमा नही कर मनमाने ढंग से अभिश्रव में सामंजित कर दिया गया है जिसे गंभीर अनियमितता की संज्ञा दी जा सकती है। साथ ही यह सरकारी राशि के अस्थायी गबन की श्रेणी में भी आता है।
स्पष्टीकरण :-
यह कि सामाजिक सुरक्षा पेेंशन मद में दिनांक 29 जून 2004 को मो0 2,50,000.00 एवं 29 जून 2004 को 92,630.00 एवं 14 जुलाई 2004 को मो0 4,35,260.00 होता है जो जिला प्राप्त राशि मो0 3,80,000.00 बहुत अधिक होता है। इस प्रकार आरोप में दर्शाया गया जमा राशि स्पष्टतः गलत है। मो0 37,970.00 रु0 का सामंजन अभिश्रव के विरुद्ध जोे किया गया है, वह नियमित एवं कानूनी सही है।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-
कंडिका 10 में राशि 37,970.00 का बैंक में जमा नहीं होने का जिक्र है जो अधोहस्ताक्षरी जाँच के दौरान सामंजित किया गया पाया गया है। इस तरह इस आरोप के संबंध में भी यह कहा जा सकता है कि आरोपित को इस सामंजन के लिए सिस्टम द्वारा छः वर्षो का समय स्वतः प्रदान कर दिया गया है, जिसे अब गबन कैसे कहा जा सकता है।
समीक्षा :-
आरोपी के स्पष्टीकरण तथा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि जो आरोपी द्वारा जिला से प्राप्त किया गया है, उसमें से 37,970 रुपये बैंक में जमा नहीं करके अपने पास रख लिए तथा मनमाने ढंग से अभिश्रव के माध्यम से समायोजन किया गया। आरोपी के द्वारा किस परिस्थिति में 37,570 रुपये बैंक में जमा नहीं कर अपने पास रखा गया, कोई कारण नहीं दर्शाया गया। सरकारी राशि को बैंक मे जमा नहीं कर अपने पास रखा जाना ही अस्थायी गबन है, जो आरोप पूर्णतः साबित होता है।30 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 आरोप कंडिका-11 :-
प्रखण्ड कार्यालय के पत्रांक-497 दिनांक 24 जुलाई 2004 के द्वारा श्री राजेन्द्र कुमार को नजारत का प्रभार श्री राज कुमार राजहंस को सौपने का आदेश दिया गया परन्तु श्री कुमार द्वारा पदाधिकारी के आदेश की उपेक्षा कर श्री राज हंस सहायक को नजारत का प्रभार नहीं सौंपा गया। श्री कुमार द्वारा प्रखण्ड नजारत में की गड़बड़ी को उजागर होने से रोकने के उद्देश्य से भार सौपने में अनाकानी एवं टालमटोल की नीति अपनायी गयी।
स्पष्टीकरण :-
यह कि प्रखण्ड कार्यालय के पत्रांक-497 दिनांक 24 जुलाई 2004 के आलोक में मैने नजारत का प्रभार श्री राज कुमार राजहंस को सौंप दिया, मैने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के आदेश का उल्लंघन नहीं किया गया है। अतः यह अरोप गलत एवं निराधार है।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-
कंडिका 11 में आरोपित द्वारा नजारत का प्रभार राजहंस को नही ंशौपें जाने का आरोप अंकित है, परन्तु जाँच के दौरान इस तरह का आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसमें प्रभार सौंपे जाने का आदेश वर्णित हो।
समीक्षा :-
आरोपी के स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त पाया गया कि आरोपी द्वारा आदेश की अवहेलना करने की प्रवृति रही है।
आरोप कंडिका-12 :-
श्री कुमार का आचरण संदिग्ध है और उनके कार्य-कलाप स्वेच्छारिता, अनुशासनहीनता, कर्तव्यहीनता एवं सरकारी सेवक के प्रतिकूल आचरण रखने की मंशा को सरकारी कागजातों के साथ छेड़-छाड़ करने एवं सरकारी राशि को अपनी सम्पति समझकर व्यय करने करने के साथ-साथ प्रखण्ड नजारत में हुए अस्थायी गबन के लिये वे पूर्ण रूपेण दोषी है। स्पष्टीकरण :-
यह कि मेरे विरुद्ध लगाया गया स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता, कर्तव्यहीनता का आरोप तथ्यहीन एवं गलत है। इस कंडिका में लगाये गये सारे आरोप गलत एवं बेबुनियाद है।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-
इस प्रकार तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा गठित आरोप अगर तथ्यपरक रहा होगा तो इस पर तत्काल कारवाई एवं आरोपों के साथ संबंधित स्पष्ट साक्ष्य का होना अनिवार्य था, परन्तु आज एक लंबी अवधि व्यतीत होने के पश्चात् साक्ष्यों में संशोधन एवं रदद्ोबदल कर दिया गया है, जिसे स्पष्ट करने का क्षेत्राधिकार संचालन पदाधिकारी का नहीं बनता है। इस मामले में अनुसंधान से यह निष्कर्ष निकलता है कि श्री राजेन्द्र कुमार आरोपित सहायक वित्तीय संबंधी कार्यो के लिए कदापि योग्य नहीं है तथा इन्हे इस तरह का कोई भी गंभीर कार्य आवंटित नहीं होना अंधिक उचित होगा, जिसकी गम्भीरत स्वयं सिद्ध है।
समीक्षाः-
आरोपी द्वारा प्रभार के लिए टाल मटोल करना, रोकड़ पंजी के साथ गायब रहना, जाँच दल के समक्ष उपस्थित नहीं रहना, लेखापाल की जगह हस्ताक्षर बदल कर करना, रोकड़ पंजी में मनमाने ढंग से राशि का इन्दराज करना, वगैरह आरोपी के स्वेच्छारिता एवं कर्त्तव्यहीनता जैसे प्रतिकूल आचरण को दर्शाता है।
निष्कर्ष :-
श्री राजेन्द्र कुमार, तत्कालीन नाजीर, प्रखण्ड कार्यालय, भोेरे वर्तमान लिपिक, मांझा प्रखण्ड के विरुद्ध लगाये गये आरोप, उपलब्ध साक्ष्य, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन तथा श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं द्वितीय कारणपृच्छा तथा कंडिकावार आरोपों के विवेचना से स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा रोकड़ बही के संंधारण में जानबुझकर सभी स्थापित नियमों को नजरअंदाज करते हुए रोकड़ बही मेेंं कपटपूर्ण ढंग से हेरा-फेरी कर अधिक राशि अंकित किया गया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन की पूरी राशि बैंक में जमा नहीं कर अपने पास ही रखकर लम्बे समय के अन्तराल में गलत ढंग से अभिश्रव समायोजन किया गया है। कैश बैंक में वित्तीय मापदण्ड का उलंघन कर व्हाटनर का उपयोग किया गया है। ये31 (cid:18)बहार गजट, 8 फरवर(cid:15) 2012 सभी कृत्य आरोपी के अस्थायी गबन को साबित करता हैै। साथ ही लेखापाल की जगह छद्म हस्ताक्षर करना, रोकड़ पंजी को जाँच दल के समक्ष उपस्थापित नहीं करके कार्यालय से अनुपस्थित रहने जैसी स्वेच्छारिता एवं अनुशासनहीनता जैसे प्रतिकूल आचरण के लिए भी आरोपित कर्मी दोषी है।
अतः श्री राजेन्द्र कुमार पूर्व नाजीर भोरे, प्रखण्ड वर्तमान मांझा प्रखण्ड के द्वारा छद्मपूर्ण व्यवहार कार्य के प्रति लापरवाही, वित्तीय मानदण्डो का उल्लंघन व सरकारी राशि का अस्थायी गबन जैसा कुकृत्य किया गया है। इनके विरुद्ध सभी आरोप प्रमाणित होता है। यह बिहार बोर्ड प्रकीर्ण नियमावली के नियम-165 तथा 166 एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14(viii) के अधीन यथा वर्णित वृहद दण्ड को आकर्षित करता है और इस तरह प्रमाणित आरोपों के आलोक में श्री राजेन्द्र कुमार सरकारी सेवा में रहने लायक नहीं है।
अतः मैं पंकज कुमार, भा0प्र0से0, जिला पदाधिकारी, गोपालगंज यथावर्णित प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में बिहार बोर्ड प्रकीर्ण नियमावली के नियम-165 एवं 166 एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14(viii) के आलोक में श्री राजेन्द्र कुमार, पूर्व नाजीर, भोरे प्रखण्ड वर्तमान लिपिक, मांझा प्रखण्ड को आदेश निर्गत की तिथि से अनिवार्य सेवानिवृत्त करता हूँ।
यह आदेश मेरे हस्ताक्षर एवं कार्यलय मुहर से आज दिनांक 09 जनवरी 2012 को निर्गत किया गया। श्री राजेन्द्र कुमार से संबंधित विवरण निम्न प्रकार है- 1. सरकारी सेवक का नाम- श्री राजेन्द्र कुमार 2. पिता का नाम- श्री अहमद अली 3. पदनाम- लिपिक 4. कार्यालय का नाम- प्रखण्ड कार्यालय, मांझा 5. नियुक्ति की तिथि- 03-10-1983 6. जन्म तिथि- 03-11-1957 7. स्थायी पता- स्टेशन मोड़ दक्षिण टोला, जिला-सिवान।
आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, जिला पदाधिकारी।
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अधीJक, सिचवालय मुिणालय,