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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 12 April 2012

Published 12 April 2012

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-04-12.151
Languages
English, Hindi

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट

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विषयः-मुख्यमंत्री शोध, अध्ययन एवं मूल्यांकन प्रोत्साहन योजना

बिहार में हाल में आर्थिक विकास की प्रक्रिया तेज करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं । पर यह अनुभव किया गया है कि सम्प्रति राज्य में सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर अध्ययन एवं शोध की अत्यंत कमी है । इस कारण नई योजनाओं के सूत्रण एवं वर्तमान योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन शोधपरक नहीं हो पाता। आर्थिक विकास की प्रक्रिया को और अधिक तेज बनाने के लिए यह आवश्यक है कि बिहार की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति के संबंध में निरंतर अध्ययन होता रहे, जिसके परिणाम के आधार पर राज्य में योजनाओं का सूत्रण एवं परिमार्जन अबाध गति से जारी रखा जा सके । इसी संदर्भ में राज्य में सामाजिक-आर्थिक शोध एवं मूल्यांकन कार्यों के लिए वित्तीय सहायता की योजना चलाने का प्रस्ताव है। जहाँ यह राज्य के भीतर एवं बाहर के शोधकर्त्ताओं को राज्य में शोध के लिए प्रेरित करेगा, वहीं इससे राज्य के विकास के लिए एक आधार भी तैयार होगा। इस माध्यम से प्रदेश के विकास में जन भागीदारी बढ़ेगी और योजनाओं को कार्यान्वित करने में आने वाले अवरोधों की पहचान कर उन्हें समय से हटाना सम्भव हो सकेगा। योजना का नाम इस योजना का नाम मुख्यमंत्री शोध, अध्ययन एवं मूल्यांकन प्रोत्साहन योजना होगा। उद्देश्य • बिहार की विकासपरक मुद्दे से संबंधित अध्ययन एवं शोध को प्रोत्साहित करना। • विकासपरक नीतियों के कार्यान्वयन एवं राज्य में चलाई जा रही योजनाओं के मूल्यांकन अध्ययन को प्रोत्साहित करना। • राज्य में शोध एवं मूल्यांकन से जुड़ी संस्थानों में शोध की क्षमता वृद्धि करना। गतिविधियॉं

इस योजनान्तर्गत राज्य के विकासात्मक मुद्दों से संबंधित निम्नलिखित गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगीः-(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 अूील 2012 2 (क) मूल्यांकन हेतु वित्तीय सहायता। (ख) शोध एवं अध्ययन के लिए वित्तीय सहायता । (ग) सेमिनार अथवा कार्यशाला के आयोजन के लिए वित्तीय सहायता । (घ) प्रकाशन के लिए वित्तीय सहायता । 1. मूल्यांकन हेतु वित्तीय सहायता मूल्यांकन निदेशालय द्वारा समय-समय पर सरकार की नीतियों एवं योजनाओं के कार्यान्वयन के मूल्यांकन हेतु नीतियों/योजनाओं को चिन्हित किया जाएगा । इन मूल्यांकनों के लिए निम्न प्रकार की प्रक्रियाएँ अपनायी जायेंगी : 1.1 विभागीय तौर पर मूल्यांकन निदेशालय द्वारा राज्य के अंदर एवं बाहर के विविध विषयों के मूल्यांकन विशेषज्ञों की एक सूची तैयार की जायेगी । इस सूची पर राज्य मूल्यांकन समिति का अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा। सूचीबद्ध विशेषज्ञों से चिन्हि्‌त मूल्यांकन विषयों पर परियोजना तैयार कर समर्पित करने का अनुरोध किया जायेगा तथा बिहार वित्त नियमावली के अधीन नॉमिनेशन के आधार पर राज्य मूल्यांकन समिति के अनुमोदनोपरांत मूल्यांकन कार्य आवंटित किया जायेगा । 1.2 संस्थाओं के माध्यम से मूल्यांकन निदेशालय द्वारा नीतियों एवं योजनाओं के मूल्यांकन हेतु योग्य संस्थाओं की पहचान कर उनका सूचीकरण किया जायेगा । इन्हीं सूचीबद्ध संस्थाओं के माध्यम से मूल्यांकन का कार्य निम्न प्रक्रिया के अनुसार संपादित किया जायेगा । 1.3 संस्थाओं का सूचीकरण मूल्यांकन निदेशालय द्वारा संस्थाओं के सूचीकरण हेतु एक मापदंड तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर समाचार पत्रों में विज्ञापन निकालकर सूचीकरण हेतु इच्छुक संस्थाओं से आवेदन माँगे जाएँगें। संस्थाओं से प्राप्त आवेदनों का निर्धारित मापदंड के अनुसार ग्रेडिंग किया जायेगा तथा निर्धारित अंक के ऊपर के संस्थाओं की सूची तैयार की जायेगी जिसे राज्य मूल्यांकन समिति के समक्ष अनुमोदन हेतु उपस्थापित किया जायेगा । अनुमोदनोपरांत संस्थाओं का तीन वर्षों के लिए सूचीकरण किया जायेगा। तीन वर्षों के बाद पुनः एक एप्रेजल/ निरीक्षण किया जायेगा, जिसके आधार पर सूचीबद्ध संस्थाओं का अगले तीन वर्षों के लिए नवीकरण संभव हो सकेगा। 1.4 सूचीबद्ध संस्थाओं से प्रस्ताव मूल्यांकन निदेशालय द्वारा समय समय पर चिन्हित विषयों पर मूल्यांकन हेतु बिहार वित्त नियमावली के अंतर्गत निरुपित प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए सूचीबद्ध संस्थाओं से एक निश्चित तिथि एवं समय तक तकनीकी एवं वित्तीय प्रस्ताव समर्पित करने हेतु कहा जायेगा । तकनीकी एवं वित्तीय बोली के आधार पर संस्था का चयन किया जायेगा तथा कार्य आवंटन किया जायेगा । 1.5 राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के संस्थानों से एम0ओ0यू0 ऐसे किसी विशिष्ट विषय जिस पर राज्य मूल्यांकन समिति द्वारा मूल्यांकन कराने की आवश्यकता महसूस की जाती है तथा इस प्रकार का मूल्यांकन राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थानों से कराया जाना आवश्यक समझा जाता है, वैसी स्थिति में नामित राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को नॉमिनेशन के आधार पर कार्य आवंटन किया जायेगा परन्तु उसमें बिहार वित्त नियमावली के अंतर्गत निरुपित प्रक्रिया एवं प्रावधान का अनुपालन करना अनिवार्य होगा । 1.6 मूल्यांकन हेतु सहायता राशि का संवितरण मूल्यांकन अध्ययन के लिए वित्तीय सहायता का संवितरण तीन किस्तों में होगा जो निम्नांकित हैः- (क) स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत प्रथम किस्त के रुप में संवितरित होगी । यह राशि तभी देय होगी जब कार्यान्वयन ऐजेन्सी द्वारा यथा निर्धारित मूल्य के गैर न्यायिक मुद्रांक बॉंड पर कार्य आवंटन के लिए मूल्यांकन निदेशालय द्वारा निर्धारित शर्त्तों पर सहमति संसूचित की जायेगी । इसके साथ संस्था को मूल्यांकन अध्ययन का प्रारुप, संरचना/ गैर संरचना प्रश्नावली, प्रत्येक स्तर पर संग्रहित की जानेवाली डाटा/ अध्ययन की अनुसूची संलग्न करना होगा । प्रथम किस्त की राशि की विमुक्ति प्रश्नावलियों/ अनुसूचियों की समीक्षा के उपरांत की जायेगी । (ख) स्वीकृत राशि का 45 प्रतिशत द्वितीय किस्त के रुप में संवितरित होगी । द्वितीय किस्त की राशि का संवितरण एजेंसी द्वारा समर्पित अध्ययन का ड्राफ्ट प्रतिवेदन अथवा विस्तृृत प्रगति प्रतिवेदन के आधार पर की जा सकेगी । प्रगति प्रतिवेदन में अध्ययन की प्रगति यथा ऑंकड़ा संग्रहण तथा सारणीकरण, अध्ययन कार्य का संक्षिप्त विश्लेषण/ प्रतिवेदन शामिल किया जाना अनिवार्य होगा। साथ ही एजेंसी द्वारा प्रथम किस्त की विमुक्त राशि का मदवार व्यय विवरणी प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा । (ग) स्वीकृत राशि का 05 प्रतिशत तृतीय एवं अंतिम किस्त के रुप में संवितरित होगी । यह राशि मूल्यांकन अध्ययन के अंतिम प्रतिवेदन की वांछित संख्या में प्रतियों, सी0डी0-ROM जिसमें अंतिम प्रतिवेदन डाला गया हो, कुल स्वीकृत राशि की अग्रिम प्राप्ति रसीद तथा अध्ययन पर हुए व्यय की विवरणी जो संस्था के प्रमुख द्वारा हस्ताक्षरित हो, के उपलब्ध कराने के उपरांत होगी। 2. शोध एवं अध्ययन के लिए वित्तीय सहायता शोध एवं अध्ययन के प्रस्ताव (जिनमें एक्शन रिसर्च, सामाजिक शोध आदि सम्मिलित हो सकते हैं) विकासात्मक मुद्दों पर ही केन्द्रित होंगे। शोध एवं अध्ययन हेतु दो श्रेणियों में प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएँगे -3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 अूील 2012 • याचित प्रस्ताव अर्थात्‌ ऐसे प्रस्ताव जिसमें शोध एवं अध्ययन की आवश्यकता एवं स्वरूप राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया गया हो

• स्वयाचित प्रस्ताव अर्थात्‌ ऐसे प्रस्ताव जिसमें शोध एवं अध्ययन की आवश्यकता एवं स्वरूप के निर्धारण के लिए आवेदक स्वतंत्र हो

2.1 शोध एवं अध्ययन प्रस्तावः याचित प्रस्ताव मूल्यांकन निदेशालय द्वारा समय-समय पर शोध एवं अध्ययन के मुख्य विषय चिन्हित किया जाएगा । चिन्हित मुख्य विषय पर शोध/ अध्ययन का प्रस्ताव (निवेदन) योजना एवं विकास विभाग/मूल्यांकन निदेशालय के वेबसाईट पर डाला जाएगा तथा मूल्यांकन हेतु वित्तीय सहायता के लिए निर्धारित प्रक्रिया 1.1, 1.2, 1.3, 1.4 एवं 1.5 के अनुरुप कार्य आवंटित किया जायेगा । 2.2 शोध एवं अध्ययन प्रस्तावः स्वयाचित प्रस्ताव शोध संस्था, विश्वविद्यालय, स्वयंसेवी संस्था या अन्य अलाभकारी संस्थाएँ बिहार के विकास से सम्बंधित मुद्दों पर शोध एवं अघ्ययन से जुड़े प्रस्ताव (निवेदन) मूल्यांकन निदेशालय में समर्पित कर सकेंगे । सरकार द्वारा गठित राज्य मूल्यांकन समिति अथवा इसकी उप-समिति के समक्ष इन प्रस्तावों को विचारार्थ उपस्थापित किया जायेगा । समिति/उप-समिति द्वारा प्राप्त प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जायेगा तथा उपयुक्त प्रस्तावों की स्वीकृति दी जायेगी । राज्य मूल्यांकन समिति द्वारा समय-समय पर मूल्यांकन हेतु वित्तीय सीमा का निर्धारण किया जायेगा एवं इस सीमा के अधीन प्रस्ताव की स्वीकृति दी जायेगी । तत्काल यह सीमा 10,00000 (दस लाख) रु0 तक की होगी । 2.3 शोध एवं अध्ययन हेतु सहायता राशि का संवितरण शोध/अध्ययन के लिए वित्तीय सहायता का संवितरण तीन किस्तों में निम्न प्रकार से किया जायेगा :- (क) स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत प्रथम किस्त के रुप में संवितरित होगी । यह राशि तभी देय होगी जब कार्यान्वयन एजेन्सी द्वारा यथा निर्धारित मूल्य के गैर न्यायिक मुद्रांक बॉंड पर कार्य आवंटन के लिए मूल्यांकन निदेशालय द्वारा निर्धारित शर्त्तों पर सहमति संसूचित की जायेगी । इसके साथ संस्था को अध्ययन का प्रारुप, संरचना/ गैर संरचना प्रश्नावली, प्रत्येक स्तर पर संग्रहित की जानेवाली डाटा / अध्ययन की अनुसूची संलग्न करना होगा । प्रथम किस्त की राशि की विमुक्ति प्रश्नावलियों/ अनुसूचियों की समीक्षा के उपरांत किया जायेगी । (ख) स्वीकृत राशि का 45 प्रतिशत द्वितीय किस्त के रुप में संवितरित होगी । द्वितीय किस्त की राशि का संवितरण एजेंसी द्वारा समर्पित अध्ययन का ड्राफ्ट प्रतिवेदन अथवा विस्तृृत प्रगति प्रतिवेदन के आधार पर की जा सकेगी । प्रगति प्रतिवेदन में अध्ययन की प्रगति यथा ऑंकड़ा संग्रहण तथा सारणीकरण, अध्ययन कार्य का संक्षिप्त विश्लेषण/ प्रतिवेदन शामिल किया जाना अनिवार्य होगा । साथ ही एजेंसी द्वारा प्रथम किस्त की विमुक्त राशि का मदवार व्यय विवरणी प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा । (ग) स्वीकृत राशि का 05 प्रतिशत तृतीय एवं अंतिम किस्त के रुप में संवितरित होगी । यह राशि अध्ययन के अंतिम प्रतिवेदन की वांछित संख्या में प्रतियों, सी0डी0-ROM जिसमें अंतिम प्रतिवेदन डाला गया हो, कुल स्वीकृत राशि की अग्रिम प्राप्ति रसीद तथा अध्ययन पर हुए व्यय की विवरणी जो संस्था के प्रमुख द्वारा हस्ताक्षरित हो, के उपलब्ध कराने के उपरांत होगी। 3. सेमिनार अथवा कार्यशाला के आयोजन के लिए वित्तीय सहायता किसी विश्वविद्यालय, सरकारी या स्वयंसेवी संस्थाओं के द्वारा बिहार राज्य से जुड़े विकासात्मक मुद्दों या शोध पद्धतियों, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन से संबंधित सेमिनार/कार्यशाला के प्रस्ताव वित्तीय सहायता के लिए अनुमान्य होंगे। 3.1 सेमिनार / कार्यशाला हेतु वित्तीय सहायता एवं परिसीमा

सेमिनार/कार्यशाला हेतु वित्तीय सहायता की सीमा निम्न प्रकार अथवा राज्य मूल्यांकन समिति द्वारा समय-समय पर निर्धारित परिसीमा के अधीन होगी : (क) राज्य स्तरीय सेमिनार/कार्यशाला, जिसमें विभिन्न जिलों के प्रतिभागी हाें, के लिए वित्तीय सहायता की राशि रु0 400 (चार सौ रुपये) प्रति प्रतिभागी प्रतिदिन अथवा पूरे सेमिनार/कार्यशाला के लिए अधिकतम चालीस हजार रुपये होगी।

(ख) राष्ट्रीय सेमिनार/कार्यशाला, जिसमें 10 प्रतिशत या कम से कम 5 व्यक्ति तक, जो भी अधिक हो, अन्य राज्यों के प्रतिभागियों की सहभागिता हो, के लिए वित्तीय सहायता राशि रु0 600 (छः सौ रुपये) प्रति प्रतिभागी प्रतिदिन अथवा पूरे सेमिनार/कार्यशाला के लिए अधिकतम एक लाख रूपये होगी।

(ग) अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार/कार्यशाला, जिसमें 10 प्रतिशत या कम से कम 5 व्यक्ति तक, जो भी अधिक हो, अन्य देशों की सहभागिता हो, के लिए वित्तीय सहायता की राशि रु0 1000 (एक हजार रुपये) प्रति प्रतिभागी प्रतिदिन अथवा पूरे सेमिनार/कार्यशाला के लिए अधिकतम तीन लाख रुपये होगी।

नोटः- अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार/कार्यशाला की स्थिति में आयोजकों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे गृह मंत्रालय के निदेश के अनुरूप आवश्यक मंजूरी प्राप्त कर लेें।

(घ) सेमिनार/कार्यशाला के आयोजन से संबंधित सभी प्रस्ताव राज्य मूल्यांकन समिति के समक्ष स्वीकृति हेतु उपस्थापित किये जायेेंगे। राज्य मूल्यांकन समिति की स्वीकृति के उपरान्त सेमिनार/कार्यशाला के आयोजन हेतु स्वीकृत्यादेश निर्गत किया जायेगा तथा राशि की किस्तवार विमुक्ति की जायेगी।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 अूील 2012 4 3.2 सेमिनार/कार्यशाला हेतु राशि संवितरण सेमिनार/कार्यशाला के लिए वित्तीय सहायता का संवितरण निम्नांकित दो किस्तों में होगा : (क) स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत प्रथम किस्त के रूप में तब संवितरित होगी, जब आयोजक एजेंसी के प्रमुख द्वारा यथा निर्धारित मूल्य के गैर न्यायिक मुद्रांक बाँड पर मूल्यांकन निदेशालय द्वारा आयोजन के शर्त्तों की सहमति संसूचित की जायेगी । साथ ही एजेंसी द्वारा मुख्य प्रतिभागियों की सेमिनार में भाग लेने की सहमति पत्र उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा । अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार की स्थिति में नोडल / प्रशासनिक मंत्रालय से प्राप्त मंजूरी की प्रति प्राप्त होने के उपरांत राशि संवितरित होगी ।

(ख) स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत द्वितीय एवं अंतिम किस्त के रूप में संवितरित होगी। यह राशि सेमिनार /कार्यशाला कीे कार्यवाही की पाँच प्रतियाँ, सी0डी0 सहित जिसमें सेमिनार की पूर्ण कार्यवाही दर्ज हो, स्वीकृत राशि की अग्रिम प्राप्ति रसीद तथा सेमिनार पर हुए व्यय की अभिप्रमाणित विवरणी जो संस्था के प्रमुख द्वारा हस्ताक्षरित हो, की प्राप्ति के उपरांत संवितरित होगी।

3.3 सेमिनार /कार्यशाला की आयोजन हेतु अन्य शर्त्तें (क) सेमिनार/कार्यशाला आयोजित करने हेतु किसी अनुदानग्राही के एक वित्तीय वर्ष में सिर्फ एक ही प्रस्ताव स्वीकार किए जाएँगें। (ख) एक ही अनुदानग्राही एजेंसी को एक वर्ष में एक बार से अधिक सेमिनार / कार्यशाला आयोजित करने के लिए अनुदान राशि को अप्रोत्साहित किया जाएगा तथा नए एजेंसियों को वित्तीय सहायता के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।

(ग) सेमिनार / कार्यशाला हेतु वित्तीय सहायता की घटनोत्तर स्वीकृति पर विचार नहीं किया जाएगा। (घ) वैयक्तिक शोधकर्त्ता द्वारा सेमिनार / कार्यशाला के लिए वित्तीय सहायता का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

4 प्रकाशन के लिए वित्तीय सहायता किसी एजेंसी अथवा संस्था/विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्था के द्वारा बिहार राज्य के विकासात्मक मुद्दों से संबंधित किए गए शोध/मूल्यांकन प्रतिवेदन के प्रकाशन हेतु सभी प्रस्ताव राज्य मूल्यांकन समिति के समक्ष स्वीकृति हेतु उपस्थापित किये जायेंगे। राज्य मूल्यांकन समिति की स्वीकृति के उपरान्त शोध/मूल्यांकन के प्रतिवेदन के प्रकाशन हेतु स्वीकृत्यादेश निर्गत किया जायेगा तथा राशि की किस्तवार विमुक्ति की जायेगी। इसी प्रकार राज्य सरकार के शोध संस्थानों, विश्वविद्यालय/डीम्ड विश्वविद्यालयों के स्नातकोत्तर विभागों एवं स्नातकोत्तर डिग्री या डिप्लोमा स्तर के शिक्षण में लगी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित किये जाने वाले जर्नल के लिए प्रकाशन हेतु सहायता के प्रस्ताव निवेदित एवं स्वीकृत किये जा सकेंगे । राज्य मूल्यांकन समिति की स्वीकृति पर निम्न वित्तीय सीमा तक प्रकाशन हेतु सहायता दी जा सकेगी :- 4.1 प्रकाशन हेतु वित्तीय सहायता की राशि किसी एजेंसी अथवा संस्था/विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्था द्वारा उच्च स्तरीय शोध कार्य के प्रकाशन के लिए वित्तीय सहायता इस शर्त पर अनुमोदित होगी कि इसका विस्तृत संदर्भ राज्य के विकासात्मक योजना के शोध से संबंधित हो। (क) शोध कार्य के प्रकाशन हेतु वित्तीय सहायता की राशि अधिकतम चालीस हजार रुपये अथवा राज्य मूल्यांकन समिति द्वारा समय-समय पर निर्धारित परिसीमा के अधीन होगी । सहायता की राशि प्रकाशित की जानेवाली सामग्री की संख्या एवं प्रतियाें पर भी निर्भर होगी । (ख) राज्य सरकार के शोध संस्थानों, विश्वविद्यालय/डीम्ड विश्वविद्यालयों के स्नातकोत्तर विभागों एवं स्नातकोत्तर डिग्री या डिप्लोमा स्तर के शिक्षण में लगी संस्थाओं या शोध/मूल्यांकन में लगी स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा शोध, अनुश्रवण या मूल्यांकन आधारित जर्नल (पत्रिका) के प्रकाशन हेतु चालीस हजार रुपये प्रति जर्नल की सीमा अथवा राज्य मूल्यांकन समिति द्वारा समय-समय पर निर्धारित परिसीमा के अधीन तक दी जा सकेगी। 4.2 प्रकाशन सहायता हेतु राशि का संवितरण प्रकाशन के लिए वित्तीय सहायता का संवितरण निम्नांकित दो किस्तों में होगाः- (क) स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत प्रथम किस्त के रूप में तब संवितरित होगी, जब एजेंसी के प्रमुख द्वारा यथा निर्धारित मूल्य के गैर न्यायिक मुद्रांक बाँड पर मूल्यांकन निदेषालय द्वारा निर्धारित शर्त्तों पर सहमति संसूचित की जायेगी तथा जिसका प्रारूप संरचना अथवा प्रस्तावित प्रकाशन सामग्री का सारांश संलग्न हो। (ख) स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत द्वितीय एवं अंतिम किस्त के रूप में संवितरित होगी। यह राशि प्रकाशित पुस्तक की पाँच प्रतियाँ, सी0डी0 जिसमें पूर्ण प्रकाशन से संबंधित सामग्री डाली गई हो, स्वीकृत राशि की अग्रिम प्राप्ति रसीद तथा प्रकाशन पर हुए व्यय की विवरणी जो संस्था के प्रमुख द्वारा हस्ताक्षरित हो, की प्राप्ति के उपरांत होगी। साथ ही सहायता प्राप्त करने वाली एजेंसी अथवा संस्था द्वारा मूल्यांकन निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराए गए सूची के अनुसार पुस्तकालयों /सरकारी विभागों अथवा संस्थाओं को एक-एक प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराने की बाध्यता होगी। 5. वित्तीय सहायता संबंधी सामान्य अनुदेश 5.1 संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने की योग्यता संस्थाओं को वित्तीय सहायता हेतु तभी योग्य समझा जायेगा यदि5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 अूील 2012 (क) संस्था सोसाईटी निबंधन अधिनियम 1860 अथवा भारतीय ट्रस्ट अधिनियम 1882 अथवा कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 25 अथवा अन्य अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत हो अथवा विश्वविद्यालय या डीम्ड विश्वविद्यालय से सम्बद्ध या मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान हो ।

(ख) वे तीन वर्षों से कार्यरत हों। परन्तु राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित संस्थाओं पर यह शर्त्त लागू नहीं होगा। (ग) उनके द्वारा (I) योजना आयोग, भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों/राज्य सरकार ( II) यू0 जी0 सी0, आई0सी0एस0एस0आर0, सी0एस0आई0आर0, (III) अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्थाओं, विश्व बैंक, डी0एफ0आई0डी0(यू0के0) अथवा राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थाओं द्वारा सौंपे गये किसी शोध/ मूल्यांकन कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया गया हो।

(घ) उनके पास शोध/मूल्यांकन कार्यों में दक्ष मानव संसाधन की उपलब्धता हो। (च) उनके पास शोध/मूल्यांकन कार्यों के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध हो। 5.2 संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु अयोग्यता किसी भी संस्था को एक समय में तीन से अधिक शोध/मूल्यांकन कार्य आवंटित नहीं किया जाएगा । संस्था जिन्हें शोध/मूल्यांकन कार्य आवंटित किया गया है, को तब तक अगले वित्तीय सहायता पर विचार नहीं किया जाएगा, जब तक उनके द्वारा उन्हें पूर्व आवंटित शोध/मूल्यांकन कार्य का अंतिम प्रतिवेदन समर्पित नहीं किया गया हो । 5.3 वित्तीय सहायता की अन्य शर्त्तें

1. योजना से प्राप्त वित्तीय सहायता से किसी प्र्रकार का पूंजीगत व्यय नहीं किया जा सकेगा ।

2. सौंपे गये कार्य अनुबंध में अंकित समय-सीमा के अन्दर पूरा किया जाना अनिवार्य होगा ।

3. कार्यान्वयन एजेन्सी द्वारा समय-सीमा के उपरान्त शोध प्रतिवेदन आदि समर्पित किये जाने पर अनुबंध में अंकित दण्ड- प्रावधान के अनुसार कार्रवाई की जाएगी ।

4. कार्यान्वयन एजेन्सी द्वारा आवंटित कार्य में अपरिहार्य कारणों से हुए विलम्ब के कारण समय सीमा की अवधि विस्तारित की जाएगी बशर्त्ते कि एजेन्सी द्वारा यथोचित कारण-पृच्छा समर्पित किया गया हो ।

5. अध्ययन/ शोध कार्य/ आवंटित कार्य की लागत में बढ़ोत्तरी के लिए कोई अतिरिक्त राशि देय नहीं होगी । 6. शोध कार्य के दौरान सक्षम प्राधिकार द्वारा टी0ओ0आर0 (टर्मस ऑफ रेफरेन्स) एवं अन्य शर्त्तों को आवश्यकतानुसार संशोधित किया जा सकेगा ताकि शोध के विषय क्षेत्र अथवा आच्छादन में परिवर्त्तन किया जा सके । ऐसा अनुदानग्राही संस्था के साथ विमर्श उपरान्त अध्ययन के लागत अथवा अवधि में किसी प्रकार के परिवर्त्तन के बिना किया जा सकेगा ।

7. सक्षम प्राधिकार द्वारा शोध, अध्ययन, सेमिनार, प्रकाशन की प्रगति अथवा उपलब्धि को संतोषप्रद नहीं पाये जाने की स्थिति में अनुदानग्राही संस्था कोें मिलने वाली वित्तीय सहायता बंद कर दी जाएगी एवं कार्यान्वयन ऐजेन्सी से पूर्व में भुगतान की गई राशि वसूल कर ली जाएगी, यदि अनुदानग्राही संस्था द्वारा किये गये अनुबंध की शर्त्तों के अन्तर्गत यह आवश्यक हो ।

8. प्रस्ताव के समर्पण, उसकी जांच तथा स्वीकृति के संबंध में योजना एवं विकास विभाग द्वारा अलग से मार्गदर्शिका निर्गत की जाएगी ।

9. मूल्यांकन निदेशालय द्वारा प्रथम किस्त जारी करने की तिथि शोध कार्य प्रारंभ करने की तिथि मानी जाएगी।इसी तिथि से शोध अध्ययन की अवधि/कार्य पूर्ण करने की अवधि निर्धारित की जा सकेगी।प्रगति प्रतिवेदन/प्रारुप प्रतिवेदन/अंतिम प्रतिवेदन की जांच में लगाया गया समय अध्ययन की अवधि में शामिल नहीं होगा ।

5.4 संस्थाओं द्वारा समर्पित प्रस्ताव के साथ दिये जाने वाले दस्तावेज

सहायता प्रस्ताव के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को उपलब्ध कराना वांछनीय होगा :

(1) निबंधन प्रमाण पत्र (नवीकरण के मामले में नवीकरण प्रमाण पत्र)

(2) संस्था का उप नियम (बाई-लॉ), (अद्यतन संशोधन सहित)

(3) संस्था की कार्यकारी अथवा प्रबंधन समिति के सदस्यों की अद्यतन सूची(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 अूील 2012 6 (4) गत तीन वर्षों का संस्था का वार्षिक प्रतिवेदन

(5) विगत तीन वर्षों का आय-व्यय, प्राप्ति-भुगतान से संबंधित लेखा का बैलेंस शीट की अंकेक्षित प्रति

(6) आयकर का पैन न0 तथा 12-ए में निबंधन संबंधी आयकर विभाग का प्रमाण पत्र अथवा आयकर प्राधिकार को इन दस्तावेजों के लिए भेजे गये अनुरोध पत्र की प्रति

(7) संस्था द्वारा किये गये मुख्य शोध कार्यों का सार

नोटः- प्रस्ताव के साथ समर्पित दस्तावेजों का प्रत्येक पृष्ठ संस्था प्रमुख द्वारा अभिप्रमाणित होनी चाहिए तथा उसपर संस्था का मुहर लगा होना चाहिए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

विजय प्रकाश,

सरकार के प्रधान सचिव।

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अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 151-571+100-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 12 April 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-04-12.151/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-04-12.151.