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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 27 April 2012

Published 27 April 2012

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-04-27.191
Languages
English, Hindi

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संक/पसंक/पसंक/पसंक/प

18 अूील 2012

1. —षि के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा —षि रोडमैप की स्वी—ति प्रदान की गई है। —षि रोडमैप के निम्न उद्देश्य हैंः-

• किसानों के आमदनी में वृद्धि • खाद्यान्न सुरक्षा • पोषण सुरक्षा • रोजगार का सृजन तथा मजदूरों के पलायन पर रोक • —षि विकास का समावेशी मानवीय आधार तथा महिलाओं की व्यापक भागीदारी • प्रा—तिक संसाधनों का संरक्षण तथा सतत उपयोग • प्रत्येक भारतीय के थाल में बिहार का एक उत्पाद

2. —षि रोडमैप कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार हैः-

2.1 जल संसाधन प्रक्षेत्र में सिंचाई सघनता को वर्तमान 82 प्रतिषत से बढ़ाकर 2017 में 159 प्रतिषत तथा 2022 में 209 प्रतिषत तक किया जायेगा। यह वृद्धि मुख्यतः 14.64 लाख नये निजी नलकूपों के माध्यम से आयेगी।

2.2 नलकूपों से सिंचाई, डीजल के प्रयोग पर आधारित है जिसके कारण सिंचाई का मूल्य, डीजल के मूल्य में वृद्वि के साथ-साथ दिनोदिन बढ़ता जा रहा है तथा अब यह बड़े एवं मध्यम किसानों के भी पहुँच के बाहर हो गया है। सिंचाई के लिए बिजली अत्यंत आवष्यक है अतः विद्युत प्रक्षेत्र में 2022 तक सभी नलकूपों पर बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 27 अूील 2012 2.3 भूमि प्रबंधन के लिए पूरे राज्य में 3 वर्षों में सर्वेक्षण का कार्य एवं इसके उपरांत पॉंच वर्षों में चकबंदी का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

2.4 कृषि उत्पादन के भण्डारण के लिए गोदाम क्षमता को वत्र्तमान 8.87 लाख टन से बढ़ाकर 5 वर्षों में 65 लाख टन तथा 10 वर्षों में 83 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है। शीत भंडारण क्षमता को इसी प्रकार वत्र्तमान 11 लाख टन से बढ़ाकर 5 वर्षों में 75 लाख टन तथा 10 वर्षों में 100 लाख टन किया जायेगा।

2.5 बाजार विकास के लिए सभी प्रक्षेत्रों को बराबर अवसर दिया जायेगा। निजी प्रक्षेत्र, सरकारी प्रक्षेत्र, सहकारी प्रक्षेत्र एवं पी0पी0पी0 प्रक्षेत्र सभी को समान प्रोत्साहन तथा समर्थन दिया जायेगा। मिल्क फेडरेषन की तर्ज पर फल एवं सब्जी सहकारी फेडरेषन बनाने का भी विचार है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान एवं गेहूँ के अधिप्राप्ति हेतु प्रयास किया जायेगा।

2.6 प्रसंस्करण प्रक्षेत्र में विद्युत उत्पादन के साथ चावल मिल, मक्का आधारित औद्योगिक ईकाईयॉं, चीनी मिल आदि की योजना बनाई गई है। साथ ही यह लक्ष्य भी रखा गया है कि फल एवं सब्जी के प्रसंस्करण के स्तर को बढ़ाकर 2017 तक 20 प्रतिषत तथा 2022 तक 30 प्रतिषत किया जाय एवं बर्बादी के स्तर को 5 प्रतिषत से भी नीचे घटाया जाय। ये सभी उत्पादन इकाईयाँं सरकारी सहयोग से निजी प्रक्षेत्रों में स्थापित होगी।

2.7. बाजार एवं प्रस्संस्करण व्यवस्था को 250 से ज्यादा आबादी वाले सभी टोलो को पक्की सड़क से जोड़कर सुलभ परिवहन का समर्थन दिया जायेगा।

2.8. एक हरियाली मिशन शुरू की जायेगी तथा वर्ष 2017 तक वर्तमान वृक्षाच्छादन को बढ़ाकर 15 प्रतिशत क्षेत्र में वृक्षाच्छादन किया जायेगा।

2.9 कृषि षिक्षा के प्रति युवा वर्ग में आकर्षण पैदा करने के लिये इसे हाईस्कूल पाठ्‌यक्रम में शामिल किया जायेगा तथा इण्टरमीडिएट स्तर पर कृषि विज्ञान की शिक्षा शुरू की जायेगी। कृषि स्नातक षिक्षा प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को स्टाईपेन्ड का भुगतान किया जायेगा। कृषि सेवाओं को पुनगर्ठित एवं उत्क्रमित (अपग्रेड) किया जायेगा। विष्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्रों, कार्यालयों तथा किसानों के बीच में एक मजबूत संबंध तथा कड़ी स्थापित करने के लिए सूचना एवं संचरण प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जायेगा।

2.10 फसल उत्पादकता को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री तीब्र बीज विस्तार योजना तथा बीज ग्राम योजना को समेकित किया जायेगा तथा इसके साथ चरणबद्व कार्यक्रम के अनुसार उत्पादित बीज के क्रय की व्यवस्था की जायेगी। कृषि विज्ञान केन्द्रों में उपलब्ध वैज्ञानिकों का प्रयोग संकर बीज ग्राम कार्यक्रमों के माध्यम से संकर बीज उत्पादन में किया जायेगा। चूॅंकि धान एवं गेहूॅं का बीज विस्थापन दर एक संतोषप्रद स्तर तक आ गया है; दलहन के बीज विस्थापन दर को प्रमुखता दी जायेगी। जैविक खेती के कार्यक्रमों को विस्तारित करते हुए 5 वर्षों की अवधि में प्रत्येक किसान एवं प्रत्येक प्लॉट तक हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट तथा वायोफर्टिलाईजर का प्रयोग पहुॅंचाया जायेगा। कृृषि यांत्रिकरण के कार्यक्रम को बढ़ाया जायेगा तथा महंगेे कृषि यंत्रों के लिए कस्टम हायरिंग को प्रोत्साहन दिया जायेगा। उद्यान प्रक्षेत्र में पुराने बागों के विकास, नये बागों के लिए सघन रोपन, अन्तर्वर्त्ती फसल, आम तथा लीची के लिए उत्तम कृषि क्रियाओं का प्रोत्साहन, संरक्षित सब्जी तथा फल उत्पादन आदि को प्राथमिकता दी जायेगी। जैविक विधि से सब्जी उत्पादन योजना को विस्तारित किया जायेगा तथा पटना शहर में जगह-जगह पर इसकी बिक्री के लिए आवष्यक व्यवस्था की जायेगी।

2.11 पशु संसाधन प्रक्षेत्र में दुधारू पशुओं के लिए कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण तथा पशु आहार के कार्यक्रम पर विषेष बल दिया जायेगा। बकरी पालन, मुर्गी पालन इत्यादि कार्यक्रमों को दो स्तरों पर चलाया जायेगा। व्यवसायिक स्तर के कार्यक्रम में प्रजनन की व्यवस्था की जायेगी तथा इसे आजीविका के स्तर पर 'आजीविका-कार्यक्रम' के माध्यम से समाज के कमजोर वर्ग को उपलब्ध कराया जायेगा। दुग्ध प्रसंस्करण को प्राथमिकता दी जायेगी तथा दुग्ध सहकारिता नेटवर्क को विस्तृत एवं सुदृढ़ किया जायेगा। मछली पालन प्रक्षेत्र के लिए राज्य के जल जमाव वाले क्षेत्रों में जल निस्सरण के साथ-साथ तालाबों के निर्माण की योजना चलायी जायेगी ताकि जमा जल का समुचित उपयोग हो सके। मछली बीज तथा मछली आहार के कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जायेगी।

2.12 द्वितीय कृषि रोड मैप के कार्यान्वयन से कृषि, बागवानी, पशुपालन आदि सभी प्रक्षेत्रों की उत्पादकता एवं उत्पादन में अभूतपूर्व वृृद्वि अपेक्षित है। खाद्यान्न उत्पादन वर्त्तमान 129.81 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2017 में 252.21 लाख टन तथा वर्ष 2022 में 324.65 लाख टन होने की आषा है। इसी प्रकार फल का उत्पादन वर्त्तमान 38.53 लाख टन से बढ़कर 2017 में 60.37 लाख टन तथा वर्ष 2022 में 80 लाख टन हो जायेगा। जहॉं तक सब्जी उत्पादन का प्रष्न है यह भी वर्त्तमान 136.27 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2017 में 186.11 लाख टन एवं वर्ष 2022 में 225 लाख3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 26 अूील 2012 टन हो जाने की आषा है। फसल सधनता में वर्त्तमान 151 प्रतिषत से बढ़कर वर्ष 2017 में 180 प्रतिषत तथा वर्ष 2022 में 200 प्रतिषत तक की वृद्धि अनुमानित है।

2.13 इसी प्रकार दूध, मांस तथा अण्डा के उत्पादन में भी वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में प्रति वर्ष दुग्ध उत्पादन 6516 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2017 में 10035 हजार मीट्रिक टन एवं 2022 में 14867 हजार मीट्रिक टन होने की आषा है। दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता 2060 हजार लीटर प्रति दिन से बढाकर वर्ष 2017 में 8260 हजार लीटर प्रति दिन एवं वर्ष 2022 में 13160 हजार लीटर प्रति दिन होने की आशा है। अंडा उत्पादन प्रतिवर्ष 11002 लाख से बढकर वर्ष 2017 में 216000 लाख तथा वर्ष 2022 में 234000 लाख होने की आशा है। मांस का वार्षिक उत्पादन 218 हजार टन से बढकर वर्ष 2017 में 1314 हजार टन तथा वर्ष 2022 में 1423.5 हजार टन होने की आशा है। मतस्य का वर्तमान उत्पादन 2.88 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2017 में 8.86 लाख टन तथा वर्ष 2022 में 10.25 लाख टन होने की आशा है।

3. इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए 5 वर्षों की अवधि में निजी तथा सरकारी निवेष को मिलाकर कुल 149859.00 करोड़ रुपये (सरकारी निवेश 129334.00 करोड़ तथा निजी निवेश-20525.00 करोड़ रुपये) लाख करोड़ रुपये की आवष्यकता होगी। इस राषि की व्यवस्था करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक रिसोर्स मैनेजमेंट ग्रुप का गठन किया गया है।

4. दिनांक 03.04.2012 को मंत्रिपरिषद्‌ की बैठक में —षि रोडमैप का वर्ष 2022 तक सांकेतिक लक्ष्य तथा वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 तक कुल 149859.00 करोड़ रुपये (सरकारी निवेश 129334.00 करोड़ तथा निजी निवेश 20525.00 करोड़ रुपये) की लागत से रोडमैप कार्यक्रमों की सैद्धान्तिक स्वी—ति दी गई है। रोडमैप में शामिल विभागों के द्वारा रोडमैप योजनाओं का उद्‌व्यय तथा बजट उपबंध प्राप्त कर सक्षम प्राधिकार की स्वी—ति उपरांत कार्यान्वयन किया जायेगा। प्रत्येक विभाग अपने प्रक्षेत्र की योजनाओं को स्वी—ति कराते समय यह स्पष्ट रूप से उल्लेख करेंगे कि प्रस्तावित कार्यक्रम —षि रोडमैप का भाग है। इन विभागों के द्वारा कार्यक्रमों को लगातार परिवर्द्धित किया जा सकेगा ताकि किसानों तक योजनाओं को सुलभता से पहुँचाया जा सके।

आदेश ः आदेश ः आदेश ः आदेश ः आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में सर्वसाधारण की जानकारी हेतु प्रकाशित किया जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, एन॰ विजयलक्ष्मी, सचिव।

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अधी2क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु7ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 191-571+50-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 27 April 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-04-27.191/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-04-27.191.