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विगत वर्षों में राज्य में पर्यटकों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है । केन्द्र सरकार द्वारा प्रदत्त आँकड़ों के अनुसार जहाँ वर्ष 2006 में केवल 10764714 पर्यटक ही बिहार आये थे वहीं वर्ष 2011 में पर्यटकों की संख्या बढ़कर 18521035 हो गई है । विदेशी पर्यटकों की संख्या में तो काफी बढ़ोत्तरी हुई है । वर्ष 2006 के 94446 विदेशी पर्यटकों की संख्या की तुलना में वर्ष 2011 में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़कर 862963 हो गई है । पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि जितने भी पर्यटन परिपथ हैं, उन पर मार्गीय सुविधाएँ विकसित की जाएँ । इन मार्गीय सुविधाओं को विकसित करने के मुख्यतया दो विकल्प हो सकते हैं :-
(क) विभाग की ओर से भू-अर्जन किया जाना एवं तत्पश्चात् उस पर मार्गीय सुविधाओं का निर्माण कराया जाना ।
(ख) पर्यटन परिपथों पर वर्तमान में संचालित अथवा संचालन हेतु प्रस्तावित निजी क्षेत्रों के ढाबों/होटलों एवं समरूप सुविधाओं के उन्नयन हेतु उन्हें प्रोत्साहन देना ।
यद्यपि विभाग के द्वारा प्रथम विकल्प पर भी काम किया जा रहा है, परन्तु मार्गीय सुविधाओं के त्वरित विकास के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि द्वितीय विकल्प पर भी कार्य किया जाए । इसी परिप्रेक्ष्य में पर्यटन परिपथों पर मार्गीय सुविधाओं के विकास एवं उनके उन्नयन तथा मानकीकरण हेतु प्रोत्साहन देने के लिए यह नीति निरूपित की जा रही है । इसके अवयव निम्न प्रकार होंगे :-
(क) यह योजना राज्य के चिन्हित पर्यटन परिपथों पर अवस्थित निजी क्षेत्रों के द्वारा संचालित एवं संचालन हेतु प्रस्तावित मार्गीय सुविधाओं यथा ढाबों/लाईन होटलों आदि के उन्नयन एवं मानकीकरण की प्रोत्साहन नीति-2012 के नाम से जानी जाएगी । (ख) इस नीति का विस्तार पूरे बिहार राज्य क्षेत्र अंतर्गत होगा ।2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 23 मई 2012 (ग) इस नीति का उद्देश्य होगा राज्य के चिन्हित पर्यटन परिपथों पर अवस्थित एवं निजी क्षेत्रों द्वारा संचालित ढाबों/लाईन होटलों/मोटलों आदि का उन्नयन एवं मानकीकरण किया जाना ताकि पर्यटक वहाँ की सुविधाओं का लाभ उठा सकें ।
(घ) इस हेतु पर्यटन विभाग द्वारा उचित प्रक्रिया के माध्यम से चयनित व्यक्तियों/संस्थाओं को एक पूंजीगत अनुदान (Capital Subsidy) दिया जाएगा जिसके एवज में उन्हें एक निर्धारित मानक के अनुसार संचालित मार्गीय सुविधाओं को संधारित करना होगा ।
(ङ) इस नीति के कार्यान्वयन के लिए निम्न प्रक्रिया अपनाई जाएगी :-
(i) सर्वप्रथम राज्य के मुख्य पर्यटन परिपथों पर अवस्थित ढावों/लाईन होटलों/मोटलों आदि को चिन्हित किया जाएगा साथ ही वैसे स्थलों को भी चिन्हित किया जाएगा जहाँ भविष्य में मार्गीय सुविधाएँ विकसित की जा सकें । इन ढाबों/लाईन होटलों/मोटलों आदि के मानकीकरण एवं उन्नयन हेतु प्रस्ताव विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से उनके संचालकों से माँग की जाएगी । यह विज्ञप्ति पर्यटन विभाग द्वारा दी जायेगी, जिसमें संचालकों से यह अनुरोध किया जायेगा कि वे अपना आवेदन संबंधित जिला पदाधिकारियों के समक्ष समर्पित करेंगे।
(ii) यदि कोई व्यक्ति/ संस्था/ इकाई, जिनके पास मार्गीय सुविधाओं के विकास हेतु उपयुक्त भू-खण्ड है तथा वे उस भू-खण्ड पर मार्गीय सुविधा का विकास करना चाहती है, तो वे भी इसके लिये आवेदन दे सकते हैं।
(iii) संबंधित जिला पदाधिकारी /उनके द्वारा गठित समिति प्राप्त आवेदनों/प्रस्ताव के अह्र्ता संबंधी सभी पहलुओं पर विचारोपरान्त सूचीबद्ध करते हुए अपनी अनुषंसा पर्यटन विभाग को समर्पित करेंगे। चयन करते समय निम्न अर्हताधारियों को प्राथमिकता दी जाएगी :- (क) संबंधित होटल/ढाबा मालिक के अधीन भूमि का स्वामित्व हो अथवा कम से कम 15
वर्षों या अधिक अवधि के लिये जमीन लीज पर प्राप्त हो।
(ख) संबंधित होटल/ढाबा मालिक को इस क्षेत्र में कम-से-कम 3 (तीन) वर्षों का अनुभव हो। (ग) इसके अतिरिक्त प्रस्तावित स्थल की उपयुक्तता, भूमि का रकवा भी अतिरिक्त अह्र्ता मानी जायेगी।
(iv) जिला पदाधिकारी की अनुषंसा के आधार पर आवेदकों का चयन करते हुए उनके उन्नयन एवं विकास हेतु परियोजना प्रतिवेदन के निर्माण के लिये पर्यटन विभाग के स्तर से वास्तुविदों् की प्रतिनियुक्ति की जायेगी।
(v) प्रतिनियुक्त वास्तुविद्ों द्वारा निर्मित परियोजना प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित होटल मालिक/ भू-धारकों द्वारा स्वंय अथवा किसी वित्तीय एजेन्सी से ऋण प्राप्त कर परियोजना का कार्यान्वयन किया जायेगा।
(vi) परियोजना के कार्यान्वयन एवं संचालन आरंभ होने के उपरान्त पर्यटन विभाग द्वारा परियोजना की कुल राषि का 50 प्रतिषत अथवा पाँच लाख रूपये, जो भी कम हो, उसे कैपिटल सब्सिडी के रूप में संबंधित होटल/मोटल/ढाबा मालिकाें को दी जायेगी। उक्त राषि का 20-20 प्रतिषत राषि लगातार 5 (पाँच) वर्षों तक संबंधित होटल मालिकों/भू-धारकों को सरकार द्वारा चयनित स्वतन्त्र परामर्षी एवं विभागीय पदाधिकारी का निरीक्षण प्रतिवेदन संतोषजनक पाये जाने के उपरान्त समान किस्तों में अनुदान स्वरूप उपलब्ध करायी जायेगी। अनुदान देने की प्रक्रिया विभाग द्वारा निर्धारित की जाएगी ।
(vii) निर्मित संरचना में देय सुविधाओं / मापदण्डों के निरीक्षण हेतु विभाग द्वारा चयनित एक स्वतन्त्र निरीक्षण समिति गठित की जा सकेगी जिसमें आवश्यकतानुसार स्वतंत्र परामर्शी, विभागीय पदाधिकारियों को रखा जा सकेगा । निरीक्षण हेतु कैलेण्डर का निर्माण किया जायेगा, जिसमें न्यूनतम 3 (तीन) महीनाें के अन्तराल पर निरीक्षण का कार्य अनिवार्य होगा। उक्त गठित समिति द्वारा परिसर की साफ-सफाई/ गुणवत्ता/ सैनिटेषन/ गैर कानूनी व्यापार आदि की जाँच की जायेगी।
(viii) पर्यटन विभाग उपर्युक्त अनुसार चयनित एवं संधारित मार्गीय सुविधाओं के लिए एक मानक का निर्धारण करेगा जिसमें निम्न बातों पर विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा :- (क) उक्त को दी जाने वाली सुविधाएँ यथा रसोई एवं संबंधित उपकरण, पार्किंग, फर्निचर, प्रकाश व्यवस्था आदि ।
(ख) साफ सफाई एवं स्वच्छता की व्यवस्था । (ग) पेयजल की व्यवस्था । (घ) अन्य व्यवस्था जिसे विभाग उचित समझे ।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 23 ebZ 2012 (ix) गठित समिति के निरीक्षण के दौरान प्राप्त सुझावाें के अनुरूप प्रत्येक इकाई को कार्य करना होगा तथा सुझाव के अनुरूप कार्य नहीं करने पर अनुमान्य/ देय अनुदान बन्द कर दिया जायेगा।
(x) इस योजना के लाभार्थियों द्वारा कैपिटल सब्सिडी दिये जाने की प्रथम किस्त की तिथि से न्यूनतम 10 (दस) वर्ष की अवधि तक होटल/ढाबा को पर्यटन विभाग द्वारा तय किये गये मानक के अनुसार चलाना होगा। इस न्यूनतम समय-सीमा का पालन न करने वाले लाभार्थियों से कैपिटल सब्सिडी के रूप में दी गयी धन-राषि की वसूली की जा सकेगी।
आदेषः-आदेष दिया जाता है कि संकल्प की एक प्रति बिहार गजट के विषेष अंक, सुविख्यात पत्रिकाओं और समाचार-पत्रों में प्रकाषित की जाय और सरकार के सभी विभागों/विभागाध्यक्षों और अधीनस्थ पदाधिकारियों के बीच परिचालित की जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, डी0 के0 श्रीवास्तव, सरकार के विषेष सचिव।
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अधी.क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 208-571+500-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in