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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 23 May 2012

Published 23 May 2012

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-05-23.21
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 2222 (cid:29)ये(cid:29)ये(cid:29)ये(cid:29)येंठंठंठंठ 1931931931934444 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 21212121 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ———————— 23232323 मईमईमईमई 2020202011112222 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)0, पदःथापन, बदली, श(cid:18)0, छु 6ट(cid:15) और अ9य :य(cid:18)0गत सूचनाएं। 2-4 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु=म> के समादेंटाओं के आदेश।

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भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Gाओं के पर(cid:15)Gा-फल, कायIबम, छाऽवृ(cid:18)L ूदान, आMद।

---

भाग-1-ग—िशGा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Gाफल आMद ---

भाग-2—(cid:18)बहार-रा(cid:29)यपाल और कायाINयG> (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आMद। 5-13 भाग-3—भारत सरकार, पOPम बंगाल सरकार और उRच 9यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और रा(cid:29)य गजट> के उTरण। ---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मW पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उYत (cid:18)वधान मंडल मW उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Mकये जानेवाले ूवर सिमितय> के ूितवेदन और उYत (cid:18)वधान मंडल मW पुर:ःथापन के पूवI ूकािशत (cid:18)वधेयक।

---

भाग-7—संसद के अिधिनयम Oजनपर रांशपित क[ (cid:29)येंठअनुमित िमल चुक[ है। ---

भाग-8—भारत क[ संसद मW पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मW उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय> के ूितवेदन और संसद मW उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय> के ूितवेदन और संसद मW पुर:ःथापन के पूवI ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:18)व]ापन

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भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क[ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प^रवहन सूचनाएं, 9यायालय सूचनाएं और सवIसाधारण सूचनाएं इ_याMद। ---

पूरक

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पूरक-क

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2 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012

भागभागभागभाग----1111

िनयु(cid:18)0िनयु(cid:18)0िनयु(cid:18)0िनयु(cid:18)0, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)0श(cid:18)0श(cid:18)0श(cid:18)0, , , , छु 6ट(cid:15) और अछु 6ट(cid:15) और अछु 6ट(cid:15) और अछु 6ट(cid:15) और अ9य9य9य9य वैय(cid:18)0क सूचनाएं वैय(cid:18)0क सूचनाएं वैय(cid:18)0क सूचनाएं वैय(cid:18)0क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ कृषि विभाग

क्र॰ पदाधिकारी का नाम ग्र ड े पदस्थापित पद एवं स्थान अभ्युक्ति
1 2 3 4 5
1 श्री धनंजयपति त्रिपाठी I संयुक्त कृषि निदेशक (योजना), बिहार, पटना अपने ही वेतनमान में।
2 श्री मो0 अलाउद्दीन II अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, हिलसा, (नालंदा)
3 श्री कमला कांत यादव II अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, बाँका।

------ अधिसूचना 10 मई 2012 सं0 1/ए॰जी॰-42/2010-2574/—॰-बिहार कृषि सेवा, कोटि-1 (शष्य) के पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत निम्नलिखित पदाधिकारियों को तत्‌कालिक प्रभाव से उनके नाम के सामने स्तंभ- 4 में अंकित पद एवं स्थान पर पदस्थापित किया जाता है। क्र॰ पदाधिकारी का नाम ग्रेड पदस्थापित पद एवं स्थान अभ्युक्ति 1 2 1 श्री धनंजयपति त्रिपाठी I संयुक्त कृषि निदेशक (योजना),

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश प्रसाद चौहान, संयुक्त सचिव।

——— नगर विकास एवं आवास विभाग ------ अधिसूचना 9 मई 2012 सं0 4 (न) नीति-102/2001-1585—चूँकि राज्य सरकार ने नवगठित नगर निगम, मुंगेर का आम निर्वाचन, जून, 2012 में कराने का निर्णय लिया है,

और चूँकि उक्त प्रयोजनार्थ बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा-13 के परन्तुक के अंतर्गत प्रत्येक निर्वाचन के पूर्व वार्डों/पार्षदों की संख्या राज्य सरकार द्वारा नियत कर अधिसूचित की जानी है,

अतः बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा-13 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए उक्त नगर निगम का आम निर्वाचन, 2012 के लिए निम्नवत्‌ वार्डों/पार्षदों की संख्या नियत की जाती हैः-

क्र0 सं0 नगर निकाय का नाम नियम वार्डो /पार्षदों की संख्या ं
1 2 3
1 नगर निगम, मु गेर ं 45 (पैंतालीस)

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अरविन्द कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।

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बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार

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अधिसूचनाएं

12 मई 2012

सं0 नि॰प्रा॰/नि॰ 1-01/2011/6473—बिहार राज्य निर्वाचन प्राध्किार अध्निियम, 2008 की धरा-5 ;3द्ध के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सभी अनुमंडल पदाध्किारियों को अपने क्षेत्रााध्किार के लिए प्रखंड स्तरीय मत्स्यजीवी सहयोग समिति के निर्वाचन, 2012 के निमित्त पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाता है।3 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012 2. निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति तक नियुक्त पर्यवेक्षक प्राध्किार के निदेशन, नियंत्राण एवं अनुशासन के अध्ीन कार्य करेंगे। सामान्यतया निर्वाचन अवध् िके दौरान उन्हें अवकाश स्वीकृत नहीं किया जायगा पर अतिआवश्यक होने पर उन्हें अवकाश पर जाने की स्वीकृति जिला निर्वाचन पदाध्किारी ;स॰ स॰द्ध की अनुशंसा के आलोक में प्राध्किार द्वारा दी जायगी।

3. पैक्स निर्वाचन, 2009 के समय पर्यवेक्षकों के कर्त्तव्य एवं दायित्व से संबंध्ति विस्तृत अनुदेश की प्रतिलिपि संलग्न है। यथा आवश्यक संशोध्नो सहित ;Mutatis Mutandisद्ध ये अनुदेश मत्स्यजीवी सहयोग समिति के संदर्भ में भी लागू होंगे।

आदेश से,

एन0 एस0 माध्वन,

मुख्य चुनाव पदाध्किारी।

------

12 मई 2012

सं0 नि॰प्रा॰/नि॰ 1-08/2012/ 6476—बिहार सहकारी सोसाईटी ;संशोध्नद्ध अध्निियम, 2011 के धरा-14 ;कद्ध ;1द्ध के प्रावधानों के आलोक में सहकारिता विभाग की अध्सिूचना संख्या 1273, दिनांक 01.03.2012 द्वारा बिहार सहकारिता अध्निियम, 1935 के अध्ीन निबंध्ति सहकारी समितियों के प्रबंध् समिति के निर्वाचन संचालन का दायित्व बिहार राज्य निर्वाचन प्राध्किार को सौंपा गया है।

2. उक्त परिप्रेक्ष्य में बिहार राज्य निर्वाचन प्राध्किार अध्निियम, 2008 की धरा-5 ;2द्ध एवं बिहार राज्य निर्वाचन प्राध्किार नियमावली, 2008 के नियम-6 ;2द्ध के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार सहकारी अध्निियम, 1935 के तहत निबंध्ति सभी सहकारी समितियों के निर्वाचन संचालन के लिए सभी जिला पदाध्किारी को अपने क्षेत्रााध्किार के लिए जिला निर्वाचन पदाध्किारी ;सहयोग समितियाँद्ध पदनामित किया जाता है।

3. उक्त सभी सहकारी समितियों के निर्वाचन संचालन के लिए सभी उप-विकास आयुक्त/ सभी अनुमंडल पदाध्किारी/ सभी जिला सहकारिता पदाध्किारी को अपने क्षेत्रााध्किार के लिए जिला उप-निर्वाचन पदाध्किारी ;सहयोग समितियाँद्ध पदनामित किया जाता है। उक्त सभी पदाध्किारी जिला निर्वाचन पदाध्किारी ;सहयोग समितियाँद्ध के निर्देशन एवं नियंत्राण में उक्त सभी सहकारी समितियों का चुनाव संबंध्ी कार्य करेंगे।

4. उक्त सहकारी समितियों का चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही उक्त सभी पदनामित पदाध्किारी बिहार राज्य निर्वाचन प्राध्किार अध्निियम, 2008 की धरा-4 के अन्तर्गत बिहार राज्य निर्वाचन प्राध्किार के पर्यवेक्षण, निदेशन एवं नियंत्राण में निर्वाचन का संचालन करेंगे।

आदेश से,

एन0 एस0 माध्वन,

मुख्य चुनाव पदाध्किारी।

------

12 मई 2012

सं0 नि॰प्रा॰/नि॰ 1-08/2012/ 6477—बिहार सहकारी सोसाईटी ;संशोध्नद्ध अध्निियम, 2011 के धरा-14 ;कद्ध ;1द्ध के प्रावधानों के आलोक में सहकारिता विभाग की अध्सिूचना संख्या 1273, दिनांक 01.03.2012 द्वारा बिहार सहकारिता अध्निियम, 1935 के अध्ीन निबंध्ति सहकारी समितियों के प्रबंध् समिति के निर्वाचन संचालन का दायित्व बिहार राज्य निर्वाचन प्राध्किार को सौंपा गया है।

2. उक्त परिप्रेक्ष्य में बिहार राज्य निर्वाचन प्राध्किार अध्निियम 2008 की धरा-5 ;2द्ध एवं बिहार राज्य निर्वाचन प्राध्किार नियमावली 2008 के नियम-6 ;2द्ध के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार सहकारी समितियाँ अध्निियम, 1935 के तहत निबंध्ति सभी सहकारी समितियों के निर्वाचन के लिए सभी प्रखंड विकास पदाध्किारी/ अंचलाध्किारी को अपने क्षेत्रााध्किार के लिए निर्वाचन पदाध्किारी ;सहयोग समितियांद्ध नियुक्त किया जाता है। सामान्य तौर पर प्रखंड विकास पदाध्किारी ही निर्वाचन पदाध्किारी ;सहयोग समितियांद्ध होंगे। किन्तु विशेष परिस्थिति में उनकी अनुपस्थिति में या कार्यहित में जिला पदाध्किारी-सह-जिला निर्वाचन पदाध्किारी ;ससद्ध की अनुशंसा पर अंचल अध्किारी भी उस कार्य का निर्वहन करेंगे।

3. बिहार सहकारी सोसाईटी ;संशोध्नद्ध नियमावली, 2008 के नियम-10 ;खद्धiii के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्वाचन पदाध्किारी के अध्ीन उक्त निबंध्ति सहकारी समितियों के उप-निर्वाचन पदाध्किारी के रूप में कार्य करने हेतु प्रखंड4 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012 पर्यवेक्षीय पदाध्किारी को नियुक्त करने के लिए संबंध्ति जिला पदाध्किारी -सह- जिला निर्वाचन पदाध्किारी ;सहयोग समितियाँद्ध को प्राध्किृत किया जाता है।

आदेश से,

एन0 एस0 माध्वन,

मुख्य चुनाव पदाध्किारी।

------ निर्वाचन विभाग ------- अधिसूचना 14 मई 2012 सं0 ई2-1-105/2006-2398—बिहार सेवा संहिता के नियम-227, 230 एवं 248 में निहित प्रावधानों के अंतर्गत श्री अंगद प्रसाद लोहरा, तत्कालीन अवर निर्वाचन पदाधिकारी, षिवहर अनुमंडल, षिवहर सम्प्रति अवर निर्वाचन पदाधिकारी, राजगीर अनुमंडल, जिला-नालन्दा को दिनांक 26.08.2007 से 04.09.2007 तक के लिये कुल 10 (दस) दिनों का तथा दिनांक 13.07.2008 से 05.11.2008 तक कुल 116 (एक सौ सोलह) दिनों के उपार्जित अवकाष की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से,

आर॰ के॰ प्रसाद, संयुक्त सचिव।

ÑÑÑÑ

अधीGक, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुMित। (cid:18)बहार गजट, 10Ñ571+100-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in5 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012

भागभागभागभाग----2222

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----रा(cid:29)यरा(cid:29)यरा(cid:29)यरा(cid:29)यपाल और कायाINयपाल और कायाINयपाल और कायाINयपाल और कायाINयG> (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमG> (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमG> (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमG> (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , ,

िधसूचनाएं और िनयम आMद। अअअअिधसूचनाएं और िनयम आMद। िधसूचनाएं और िनयम आMद। िधसूचनाएं और िनयम आMद।

ÑÑÑÑÑ

स्वास्थ्य विभाग

------

अधिसूचना

8 मई 2012

सं0 15/ख -25-01/2012-657—खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम - 2006 की धारा - 68 के अन्तर्गत प्रत्येक जिले में Adjudicating Officer (न्याय निर्णयक पदाधिकारी) को अधिसूचित करने का प्रावधान है एवं Adjudicating officer की अर्हत्ता उक्त धारा में निर्धारित है। अतएव, साधारण खण्ड अधिनियम - 1897 (अधिनियम सं0 10 सन्‌ 1897 ) की धारा - 21 के साथ पठित खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम-2006 (अधिनियम सं0 34 सन्‌ 2006) की धारा - 68 के अधीन प्रदत्त षक्ति का प्रयोग करते हुए सभी जिलों के अपर समाहर्त्ता को पदनाम से अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से, उक्त जिला के लिए Adjudicating officer (न्याय निर्णायक पदाधिकारी ) के रूप में अधिसूचित किया जाता है। इसमें सामान्य प्रषासन विभाग की सहमति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह0) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

अनुसूची

क्रम संख्या जिला का नाम न्याय निर्णायक अधिकारी Adjudicating Officer
1 2 3
1 श्षेखपुरा अपर समाहर्त्ता
2 पूर्णिया अपर समाहर्त्ता
3 वैषाली अपर समाहर्त्ता
4 कैमूर अपर समाहर्त्ता
5 मधुबनी अपर समाहर्त्ता
6 बेगूसराय अपर समाहर्त्ता
7 सहरसा अपर समाहर्त्ता
8 बक्सर अपर समाहर्त्ता
9 बॉका अपर समाहर्त्ता
10 पूर्वी चंपारण अपर समाहर्त्ता
11 खगड़िया अपर समाहर्त्ता
12 दरभंगाा अपर समाहर्त्ता
13 सारण अपर समाहर्त्ता
14 किषनगंज अपर समाहर्त्ता
15 गोपालगंज अपर समाहर्त्ता
16 बेतिया अपर समाहर्त्ता
17 अरवल अपर समाहर्त्ता
18 समस्तीपुर अपर समाहर्त्ता
19 जहानाबाद अपर समाहर्त्ता
20 मुजफ्फरपुर अपर समाहर्त्ता
21 भागलपुर अपर समाहर्त्ता
22 सीतामढ़ी अपर समाहर्त्ता
23 जमुई अपर समाहर्त्ता
24 मु गेर ं अपर समाहर्त्ता
25 लखीसराय अपर समाहर्त्ता
26 रोहतास अपर समाहर्त्ता
27 नालंदा अपर समाहर्त्ता
28 भोजपुर, आरा अपर समाहर्त्ता
29 षिवहर अपर समाहर्त्ता
30 कटिहार अपर समाहर्त्ता
31 पटना अपर समाहर्त्ता
32 नवादा अपर समाहर्त्ता
33 सीवान अपर समाहर्त्ता
34 गया अपर समाहर्त्ता
35 अररिया अपर समाहर्त्ता
36 मधेपुरा अपर समाहर्त्ता
6 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह0) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

------ सं0 यो04/एम0पी0लैड्‌स-1/2012-1782/यो0वि0 योजना एवं विकास विभाग ------ संकल्प 10 मई 2012 विभागीय संकल्प संख्या 3756, दिनांक 10.11.2011 द्वारा प्रचालित ''बिहार राज्य में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना'' की कार्यान्वयन की रूपरेखा से संबंधित मार्गदर्षिका की कंडिका संख्या 3.2 एवं कंडिका संख्या 7 (ग) में सांख्यिकी एवं कार्यान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संषोधन का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। भारत सरकार के उक्त अनुरोध के आलोक में कंडिका संख्या 3.2 एवं कंडिका संख्या 7 (ग) में निम्न प्रकार संषोधन करने का निर्णय लिया गया हैः- (क) मार्गदर्षिका की कंडिका संख्या 3.2 को संषोधन के पश्चात इस प्रकार पढ़ा जाय- ''प्रत्येक सांसद वित्तीय वर्ष के दौरान संबंधित जिला योजना पदाधिकारी को अनुसूची-।।। में दिए गए प्रपत्र में वार्षिक पात्रता की सीमा तक के कार्यों की अनुषंसा करेंगे। (ख) मार्गदर्षिका की कंडिका संख्या 7 (ग) को संषोधन के पश्चात इस प्रकार पढ़ा जाय- ''इस संबंध में कार्यक्रम के तहत निर्माण कार्यों का कार्यान्वयन बिहार लोक निर्माण संहिता के प्रावधानों के अनुरूप निविदा के माध्यम से कराये जाने के लिए कार्यकारी एजेन्सी सक्षम स्तर से सांसद से अनुषंसा प्राप्त होने की तिथि से 75 दिनों के भीतर अनुमान्य सभी योजनाओं की प्रषासनिक स्वीकृति प्राप्त करेंगे। जिला योजना पदाधिकारी सांसद से अनुषंसा प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर अस्वीकृति के संबंध में सांसद को उसके कारणों सहित सूचित करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, विजय प्रकाष, प्रधान सचिव।

------ यो03/मु0क्षे0वि0यो0-1/2010-1875/यो0वि0 योजना एवं विकास विभाग ------ संकल्प 16 मई 2012 विषय :-''मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना'' की संषोधित मार्ग-दर्षिका।

राज्य के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित क्षेत्रीय विकास के उद्देश्य से राज्य सरकार के द्वारा योजना एवं विकास विभाग के प्रषासनिक नियंत्रणाधीन ''मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना'' के नाम से एक बहुआयामी विकास योजना को वर्ष 2011-12 से लागू की गयी है जिसके मार्गदर्षिका को कार्यक्रम के कार्यान्वयन के क्षेत्रीय अनुभव के आधार पर निम्नरूपेण संषोधित किया जाता है।7 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012 उद्देश्य

2. मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलित क्षेत्रीय विकास लाने के लिए आधारभूत संरचनाओं का विकास है।

योजना का प्रसार

3. यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू होगी।

योजना का कार्य क्षेत्र

4. राज्य के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र

जिला चयन समिति

5. मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के लिए परियोजनाओं का चयन जिला स्तर पर गठित चयन समिति के द्वारा किया जायेगा। (क) इस समिति के निम्नांकित सदस्य होंगे :-

(i) जिला के प्रभारी मंत्री - अध्यक्ष (ii) जिला के सभी विधान-सभा सदस्य - सदस्य (iii) वैसे विधान परिषद के सदस्य जिसका निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित नहीं है, वे राज्य के किसी एक जिला को इस कार्यक्रम के लिए चयनित करेंगे। यदि विधान परिषद के ऐसे सदस्य निर्धारित तिथि तक जिला का चयन नहीं कर पाते है तो वैसी स्थिति में उस जिला को इस कार्यक्रम के लिए चयनित माना जायेगा जिस जिला के मतदाता सूची में उनका नाम होगा।

(iv) उन विधान परिषद के निर्वाचित सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र राज्य के कई जिलों में विस्तारित होगा, उनसे जिलावार अनुषंसित राषि का प्रतिषत प्राप्त किया जा सकेगा। यदि जिलावार प्रतिषत निर्धारित तिथि तक प्राप्त नहीं हो पाता है तो निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले जिलों की जनसंख्या के अनुसार राज्य स्तर पर राषि विभाजित कर संबंधित जिलों को प्राप्त करायी जायेगी। संबंधित विधान परिषद्‌ सदस्य उक्त सीमा तक योजनाओं की अनुषंसा कर सकेंगे।

(नोटः- 1. जिला का चयन पूरे कार्यकाल में एकबार बदला जा सकेगा। 2. संबंधित सदस्य जिले के चयन की सूचना योजना एवं विकास विभाग के द्वारा निर्धारित तिथि तक विभाग को उपलब्ध करा देंगे।)

(v) राज्य सरकार द्वारा मनोनीत अधिकतम तीन गैर सरकारी सदस्य - सदस्य (vi) जिला पदाधिकारी - सदस्य सचिव (vii) जिला योजना पदाधिकारी - संयोजक

(ख) इस समिति के निम्नांकित आमंत्रित सदस्य होंगे :- (i) उप-विकास आयुक्त (ii) जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (iii) संबंधित प्रमण्डल के क्षेत्रीय योजना पदाधिकारी (iv) संबंधित जिला के स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संभाग के सभी कार्यपालक अभियंता (v) जिला पंचायती राज पदाधिकारी (ग) जिला पदाधिकारी किसी अन्य पदाधिकारी को भी किसी बैठक में अध्यक्ष की अनुमति से आवष्यकता पड़ने पर भाग लेने के लिए आमंत्रित कर सकेंगे। (घ) जिला चयन समिति में सदस्य के रुप में माननीय मुख्यमंत्री/उप मुख्यमंत्री/विधान परिषद्‌ के सभापति/विधान-सभा के अध्यक्ष/मंत्रीगण/विधान परिषद्‌ के उप सभापति/विधान-सभा के उपाध्यक्ष समिति की बैठक में स्वयं के भाग नहीं लेने की स्थिति में बैठक में भाग लेने के लिए अपना प्रतिनिधि नामित कर सकेंगे। (च) समिति के किसी भी सदस्य की अनुपस्थिति/रिक्ति के कारण बैठक की कार्यवाही बाधित नहीं होगी। योजनाओं का चयन 6. मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत निम्नलिखित योजनाओं का कार्यान्वयन कराया जाएगा :-

(1) भवनहीन पंचायत सरकार भवनों का निर्माण (2) भवनहीन आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण (3) गोदाम का निर्माण (4) गली एवं नाली का निर्माण (5) सामुदायिक भवन, सार्वजनिक बस पड़ाव, यात्री शेड, सार्वजनिक पुस्तकालय आदि का निर्माण (6) नदी एवं सार्वजनिक तालाबों में घाट का निर्माण (7) हाट एवं मेला स्थलों का विकास (8) कला मंच/खेल के मैदान का निर्माण (9) सार्वजनिक चबूतरा का निर्माण (10) अन्य योजनाएँ, जो समय-समय पर सरकार द्वारा निदेषित होें।8 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012 चयन के सिद्धान्त 7. जिला स्तर पर योजनाओं के चयन के लिए मुख्यतः निम्नलिखित मार्गदर्षी सिद्धान्त होंगेः-

(1) इस कार्यक्रम के तहत प्रति विधान-सभा, सदस्य एक करोड़ रूपये की सीमा तक की योजनाओं की अनुषंसा करेंगे।

(2) इस कार्यक्रम के तहत प्रति विधान परिषद्‌ सदस्य भी एक करोड़ रूपये की सीमा तक की योजनाओं की अनुषंसा कर सकेंगे।

(3) विधान परिषद्‌ के उन निर्वाचित सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र राज्य के कई जिलों में विस्तारित होगा उनसे जिलावार अनुषंसित राषि का प्रतिषत प्राप्त किया जायेगा। यदि जिलावार प्रतिषत 15 जून तक प्राप्त नहीं हो पाता है तो निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले जिलों की जनसंख्या के अनुसार विभाजित राषि के अनुरूप उनसे जिलावार अनुषंसा प्राप्त की जा सकेगी।

(4) वैसे विधान परिषद्‌ सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित नहीं है, वे राज्य के किसी एक जिला को इस कार्यक्रम के लिए चयनित करेंगे। यदि विधान परिषद्‌ के ऐसे सदस्य 15 जून तक जिला का चयन नहीं कर पाते हैं तो वैसी स्थिति में उस जिला को इस कार्यक्रम के लिए चयनित माना जायेगा जिस जिला की मतदाता सूची में उनका नाम होगा। तदनुसार ऐसे सदस्य उक्त चयनित जिला के लिए प्रति वर्ष एक करोड़ रूपये की सीमा तक की योजनाओं की अनुषंसा हेतु सक्षम होंगे।

(5) 30-बेलसण्ड विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र के परसौनी और बेलसण्ड प्रखण्ड सीतामढ़ी जिला के भाग हैं तथा इसी विधान-सभा क्षेत्र का तीसरा तरियानी प्रखण्ड षिवहर जिला के अंतर्गत आता है। अतः इस स्थिति में 30-बेलसण्ड विधान-सभा क्षेत्र के माननीय सदस्य सीतामढ़ी एवं षिवहर दोनों जिलों के लिए जिला चयन समिति के सदस्य के रूप में नामित रहेंगे तथा उनसे जिलावार योजनाओं की अनुषंसा प्राप्त की जायेगी।

निधि का आवंटन 8. जिला को निम्न सिद्धान्त के आधार पर निधि का आवंटन किया जायेगा।

(1) इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रति विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र वार एक करोड़ रूपये प्रति वर्ष का आवंटन देय होगा। (2) विधान परिषद्‌ के निर्वाचन क्षेत्रवार एक करोड़ रूपये प्रति वर्ष का आवंटन देय होगा। (3) विधान परिषद्‌ के उन निर्वाचित सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र राज्य के कई जिलों में विस्तारित होगा उनसे जिलावार अनुषंसा के आलोक में आवंटित राषि का प्रतिषत निर्धारित किया जायेगा। यदि जिलावार प्रतिषत 15 जून तक प्राप्त नहीं हो पाता है तो निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले जिलों की जनसंख्या के अनुसार विभाजित राषि के अनुरूप आवंटन दिया जायेगा।

(4) वित्तीय वर्ष 2012-13 में पूववर्ती वित्तीय वर्ष 2011-12 के लिए इसी सिद्धान्त पर राषि आवंटित कर संबंधित कार्य प्रमण्डलों को उपावंटित की जायेगी।

(5) वैसे विधान परिषद्‌ सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित नहीं है, वे राज्य के किसी एक जिला को इस कार्यक्रम के लिए चयनित करेंगे। यदि विधान परिषद्‌ के ऐसे सदस्य 15 जून तक जिला का चयन नहीं कर पाते हैं तो वैसी स्थिति में उस जिला को इस कार्यक्रम के लिए चयनित माना जायेगा जिस जिला की मतदाता सूची में उनका नाम होगा। तदनुसार उक्त चयनित जिला को प्रति वर्ष एक करोड़ रूपये का आवंटन दिया जायेगा।

(6) बेलसण्ड विधान-सभा क्षेत्र के लिए आवंटन सीतामढ़ी एवं षिवहर दोनों जिला को आवंटित होगी। आवंटन का जिलावार प्रतिषत बेलसण्ड विधान-सभा क्षेत्र के सदस्य के द्वारा अनुषंसित राषि के आधार पर होगा। यदि जिलावार प्रतिषत 15 जून तक प्राप्त नहीं हो पाता है तो निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले जिलों की जनसंख्या के अनुसार विभाजित राषि के अनुरूप आवंटन दिया जायेगा।

(7) संबंधित कार्य प्रमण्डल, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन को निधि का आवंटन उपरोक्त व्यवस्था के अनुसार समेकित रूप में किया जायेगा।

विशेष योजना 9. राज्य सरकार विषेष परिस्थिति में आवष्यकतानुसार इस कार्यक्रम के अंतर्गत योजनाओं के चयन, स्वीकृति एवं कार्यान्वयन के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं/प्रावधानों को षिथिल करते हुए किसी योजना के लिए बजटीय उपबंध के अंतर्गत राषि उपाबंटित कर सकेगी। इस राषि का आवंटन मुख्यमंत्री की स्वीकृति से किया जा सकेगा। योजनाओं के कार्यान्वयन की पद्धति 10. इस योजना का कार्यान्वयन निम्न प्रकार किया जायेगा :-

(1) प्रत्येक विधानमण्डल सदस्य योजना कार्यों की अनुषंसा विधान मण्डल के पत्र शीर्ष पर विधिवत रूप से हस्ताक्षर करके भेजेंगे।

(2) विधान मण्डल सदस्यों के प्रतिनिधि (प्रतिनिधियों) द्वारा की गई अनुषंसा अनुमान्य नहीं होगी। (3) प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए प्रत्येक विधानमण्डल सदस्यों के द्वारा 125 प्रतिषत तक की वार्षिक सीमा के अधीन अनुषंसा की जा सकेगी परन्तु जिला चयन समिति अंतिम रूप में वार्षिक सीमा तक ही योजनाएँ पारित कर सकेगी।

(4) इस योजना के अंतर्गत विभाग को प्राप्त बजटीय उपबंध के आलोक में जिलों को वार्षिक निधि उपलब्धता की सूचना दे दी जायेगी।9 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012 (5) इस योजना के कार्यान्वयन के लिए एक अभियंत्रण संभाग गठित है। (6) इस योजना के अन्तर्गत राषि स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन को आवंटित की जायेगी। (7) जिला चयन समिति अगले वित्तीय वर्ष से प्रतिवर्ष जनवरी माह के प्रथम पक्ष में अपनी बैठक कर संसूचित राषि के अनुसार अगले वर्षाें के लिए योजनाओं का चयन कर लेगी । योजनाओं के चयन के बाद उनकी सूची जिला स्तरीय अभियंत्रण संभाग के प्रभारी को सौंप देगी जो उनका प्राक्कलन अधिकतम दो माह के अन्दर तैयार करेगी।

(8) इन योजनाओं का कार्यान्वयन बिहार लोक निर्माण के प्रावधानों के आधार पर किया जायेगा। (9) जिला चयन समिति की सहमति के बिना अनुषंसित कार्य एवं कार्य के निष्पादन के लिए चयनित कार्य स्थल को बदला नहीं जाएगा।

(10) विधान मंडल सदस्यों से अनुषंसित सभी योजनाओं की अनुषंसा प्राप्त होने की तिथि से यथा संभव सात कार्य दिवसों के अन्दर जिला योजना पदाधिकारी के द्वारा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के कार्य प्रमंडल को प्राक्कलन तैयार करने हेतु भेजा जायेगा। कार्यकारी एजेंसी के द्वारा यथा संभव 15 दिनों की अवधि के भीतर प्राक्कलन जिला योजना कार्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। विषेष प्रकृति की योजना जिसके प्राक्कलन के साथ सामग्रियों की प्रयोगषाला जॉंच अथवा सर्वे आदि प्रतिवेदन सन्निहित होंगी उनका प्राक्कलन यथासंभव एक माह में तैयार कराया जाय। कार्यकारी एजेंसी के द्वारा सामान्यतया प्राक्कलन इस प्रकार से तैयार किया जायेगा जिससे योजना का समग्र रूप से लोकहित में उपयोग हो सके। प्राक्कलन के साथ योजना की उपयोगिता/सार्थकता, सरकारी भूमि की उपलब्धता आदि के प्रतिवेदन के साथ प्राक्कलन प्राप्त होते ही उसे पुनः संबंधित विधान मंडल सदस्य को अवलोकन हेतु प्राप्त कराया जायेगा। विधान मंडल सदस्य के द्वारा प्राक्कलन एवं संबंधित प्रतिवेदन प्राप्ति के एक पक्ष के अंदर योजनाओं की प्राथमिकता सूची दी जायेगी जिसे जिला चयन समिति के स्वीकृति/अनुमोदन हेतु उपस्थापित किया जायेगा।

(11) कार्य को तभी स्वीकृत एवं कार्यान्वित कराया जायेगा जब जिला चयन समिति द्वारा कार्यान्वयन पर सहमति दे दी गई हो एवं सरकारी भूमि की उपलब्धता सुनिष्चित हो गयी हो।

परियोजनाओं की स्वीकृति 11. मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत चयनित योजनाओं की प्रषासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति हेतु निम्नलिखित प्रावधान लागू होंगे :-

सक्षम पदाधिकारी प्रशासनिक स्वीकृति हेतु अधिसीमा
प्रधान सचिव/सचिव, योजना एवं विकास विभाग दो करोड़ से उपर
क्षेत्रीय योजना पदाधिकारी पचास लाख रुपये से उपर दो करोड़ तक
जिला योजना पदाधिकारी दस लाख से उपर पचास लाख तक
सहायक योजना पदाधिकारी दस लाख तक
सक्षम पदाधिकारी तकनीकी स्वीकृति हेतु अधिसीमा
मुख्य अभियंता दो करोड़ से उपर
अधीक्षण अभियंता पचास लाख रुपये से उपर दो करोड़ तक
कार्यपालक अभियंता दस लाख से उपर पचास लाख तक
सहायक अभियंता दस लाख तक

योजनाओं पर प्रशासनिक/तकनीकी स्वीकृति हेतु समय सीमा 12. योजना प्रस्ताव की प्राप्ति से निम्न निर्धारित समय सीमा के अन्दर प्रषासनिक/तकनीकी स्वीकृति प्रदान की जाएगीः-

प्रशासनिक/तकनीकी स्वीकृति हेतु सक्षम पदाधिकारी प्रशासनिक/तकनीकी स्वीकृति देने हेतु निर्धारित समय सीमा
प्रधान सचिव/सचिव, योजना एवं विकास विभाग पन्द्रह कार्यकारी दिवस
क्षेत्रीय योजना पदाधिकारी दस कार्यकारी दिवस
जिला योजना पदाधिकारी सात कार्यकारी दिवस
सहायक योजना पदाधिकारी पाँच कार्यकारी दिवस
मुख्य अभियंता पन्द्रह कार्यकारी दिवस
अधीक्षण अभियंता दस कार्यकारी दिवस
कार्यपालक अभियंता सात कार्यकारी दिवस
सहायक अभियंता पाँच कार्यकारी दिवस
10 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012

(1) स्वीकृति पत्र/आदेष में कार्यान्वयन अभिकरण के लिए कार्य समापन की समय-सीमा निर्धारित की जाएगी। कार्य समापन के लिए समय-सीमा सामान्य तौर पर एक वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि किसी विषेष मामले में, जहां कार्यान्वयन समय एक वर्ष की सीमा को पार कर जाता है, स्वीकृत पत्र/आदेष में उसके लिए विषेष कारण शामिल किए जाएंगे। स्वीकृति पत्र/आदेष में राज्य सरकार की क्रियाविधि के अनुसार निर्धारित समय में कार्य पूर्ण करने में असफल रहने पर कार्यान्वयन अभिकरण के विरुद्ध उचित कार्रवाई की शर्त भी शामिल की जाएगी। संबद्ध विधान मंडल सदस्य को भी स्वीकृति पत्र/आदेष की प्रतिलिपि भेजी जाएगी। (2) विधान मंडल सदस्य द्वारा अनुषंसित और सक्षम स्तर से प्रषासनिक स्वीकृति किए गए कार्य को केवल जिला चयन समिति की अनुमति से ही रद्द किया जा सकता है, बषर्ते कार्य का कार्यान्वयन प्रारम्भ नहीं हुआ है तथा उसे रद्द करने के परिणामस्वरूप सरकार पर किसी भी प्रकार की संविदात्मक वित्तीय देयता/लागत का भार नहीं पड़ता है। यदि किसी अनिवार्य कारण से, चालू कार्य को रोकना/स्थगित करना अत्यावष्यक हो जाता है तो राज्य सरकार एवं संबद्ध विधान मंडल सदस्य को सूचना देते हुए मामले को पूर्ण औचित्य के साथ राज्य सरकार को भेज दिया जाना चाहिए।

(3) योजना के अंतर्गत जैसे ही कार्य पूरा होता है उसे आम जनता के उपयोग के लिए खोल दिया जाना चाहिए। लोगोें की अधिक जानकारी के लिए मु.क्षे.वि.यो. के अंतर्गत सभी कार्यों के लिए मुख्यमंत्री स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, कार्य की लागत, उसके शुरू होने, पूर्णता तिथि, कार्य को अनुषंसित करने वाले विधान मंडल सदस्य के नाम के साथ एक पटि्‌टका (पत्थर/धातु) स्थायी रूप से लगाई जानी चाहिए।

(4) जिला योजना पदाधिकारी के कार्यालय में मु.क्षे.वि.यो. निधियों से पूर्ण किए गए और चालू कार्यों की सूची भी लगाई जानी चाहिए और आम जनता को सूचनार्थ वेबसाइट पर भी डाली जानी चाहिए।

(5) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में दिए गए प्रावधानों और उसमें बनाए गए नियमों के अनुसार सभी नागरिकों को मु.क्षे.वि.यो. के किसी भी पक्ष और उसके अंतर्गत अनुषंसित/स्वीकृति/क्रियान्वित कार्यों के बारे में सूचना प्राप्त करने का अधिकार है।

वित्तीय वर्ष में विधान परिषद सदस्य के रूप में अवधि पात्रता
3 माह से कम शून्य
9 माह तक वार्षिक आवंटन का 50%
9 माह से अधिक वार्षिक आवंटन का 100%

बेंचमार्क सर्वेक्षण /मॉनीटरिंग 14. किसी राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त संस्थान को इस कार्य हेतुु पहचान की जायेगी और कार्यक्रम की मॉनीटरिंग व मध्यावधि मूल्यांकन करने के लिए बेंचमार्क सर्वेक्षण कराया जायेगा। प्रथम चरण में वर्तमान सुविधाओं/संसाधनों का सर्वेक्षण कराया जायेगा जिससे भविष्य में किए जाने वाले मूल्यांकनों हतु बेंचमार्क उपलब्ध होगा। एक एम0आई0एस0 भी तैयार की जायेगी जिसमें प्रत्येक तिमाही में योजनाओं की वास्तविक और वित्त्तीय प्रगति इंगित की जाएगी। तिमाही के आधार पर प्रत्येक परियोजना हेतु संगत आउटपुट सूचकों का उल्लेख किया जायेगा जिससे उसके आधार पर प्रगति को मॉनिटर किया जा सके। वेबसाईट का निर्माण 15. प्रत्येक जिला के लिए एक बेबसाइट तैयार किया जायेगा, जिसपर जिले की पृष्ठभूमि की सूचना, जिला योजना, बेंचमार्क सर्वेक्षण के परिणाम और तैयार की गई एम0आई0एस0 की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। योजनाओं की प्रगति को दर्शाने के लिए बेवसाईट पाक्षिक रुप से अद्यतन किया जायेगा।

(1) प्रत्येक जिला को परियोजना शुरू करने के पहले तथा परियोजना के पूरा होने के पश्चात स्थिति को दर्शाने तथा संबंधित जिला के अर्थ व्यवस्था में सुधार लाने में इस कार्यक्रम के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए संगत दृश्य रिकार्डिग (फोटो/विडियोग्राफी) कराया जायेगा जो योजना अभिलेखों के साथ संधारित होगी। इसे एम0एम0एस0 के माध्यम से योजना एवं विकास विभाग को प्राप्त कराया जायेगा।

(2) योजना के कार्यान्वयन में अभियंताओं के साथ-साथ संवेदकों को भी प्रबंधन एवं तकनीकी उन्नयन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण का प्रावधान किया जायेगा, जिसमें प्रशिक्षण, सेमिनार, कार्यशाला, अध्ययन दौरा आदि शामिल होंगे।

(3) योजनाओं में नयी तकनीक का उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित किये जाने का प्रावधान किया जायेगा।11 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012 (4) आउटसोर्सिंग के आधार पर उच्चतर एवं विशिष्ट तकनीक एवं प्रबंधन संबंधी सेवाओं/ विशेषज्ञों की सेवा प्राप्त करने, कन्सलटेंट की सेवा प्राप्त करने एवं लेखा संधारण हेतु चार्टर्ड एकाउन्टेंट/अंकेक्षकों की सेवा प्राप्त करने का प्रावधान किया जायेगा।

16. कार्यान्वयन अभिकरणों की भूमिकाः-

(1) यह कार्यान्वयन अभिकरण के अधिकारियों की जिम्मेवारी होगी कि कार्य स्थलों का नियमित दौरा करें और सुनिष्चित करें कि कार्य, निर्धारित कार्यविधि और विनिर्देषों और समय अनुसूची के अनुसार संतोषजनक प्रगति कर रहें हैं।

(2) कार्यान्वयन अभिकरण प्रत्येक कार्य की वास्तविक एवं वित्तीय प्रगति से जिला योजना पदाधिकारी को प्रत्येक माह अवगत कराएंगे। इसकी एक प्रति संबद्ध राज्य विभाग को भी प्रस्तुत की जाएगी। कार्यान्वयन अभिकरण सॉफ्ट फॉरमेट में भी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

(3) कार्यान्वयन अभिकरण, कार्य समाप्त होने के एक माह के अंदर जिला योजना पदाधिकारी को समापन रिपोर्ट/प्रमाणपत्र और उपयोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे।

17. दिषा-निर्देषों का लागू किया जानाः-

(1) यह दिषा-निर्देष तत्काल रूप से प्रभावी होंगे। मु.क्षे.वि.यो. संबंधी यह दिषा-निर्देष, वर्त्तमान दिषा-निर्देषों (विभागीय संकल्प संख्या 1458 दिनांक 04.05.2011 द्वारा निर्गत) और उनके अन्तर्गत जारी किए गये अन्य निर्देषों को संषोधित करता है।

(2) मु.क्षे.वि.यो. के दिषा-निर्देषों से संबंधित स्पष्टीकरण अथवा इन दिषा-निर्देषों में दिये गये प्रावधानों की व्याख्या योजना एवं विकास विभाग के समक्ष रखी जायेगी। इस विषय पर विभाग का निर्णय अंतिम होगा। (3) मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के उपर्युक्त दिषा-निर्देष के कण्डिकाओं में वर्णित किसी प्रावधान को संषोधित/षिथिल करने के साथ किसी अन्य कण्डिका को सम्मिलित किया जाना मुख्यमंत्री के आदेष से किया जा सकेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, विजय प्रकाष, प्रधान सचिव।

-------- बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ————— अधिसूचना 27 फरवरी 2012

सं0 2035—सिवान जिलान्तर्गत पचरूखी अंचल के ग्राम-तरवारा स्थित श्री राम जानकी मंदिर न्यास पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-2747 है।

उक्त न्यास के न्यासधारी म0 रघुनाथ दास थे जिनका देहावसान 1994 में ही हो गया। इसमें स्थानीय जनता से न्यास सम्पत्तियों के दुरूपयोग की षिकायतें मिलते रहें हैं। इसी बीच समाहर्ता, सिवान ने अपने पत्रांक 91 I/रा0 दिनांक 15वीं फरवरी, 2011 द्वारा उप-समाहर्ता, भूमि सुधार, सिवान सदर का एक विस्तृत जांच प्रतिवेदन पर्षद को भेजा जिसमें न्यास द्वारा धारित भूमि का ब्यौरा तथा इन पर आवास/दुकान/खेती करने वाले कब्जाधारियों का नाम भी अंकित था। इसमें यह भी उल्लेखित है कि वर्त्तमान मठाधीष श्री महेष जी तिवारी सार्वजनिक जन वितरण प्रणाली के बिक्रेता हैं तथा सामान्य गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हैं। इसमें स्थानीय जनता के हवाले से यह आरोप लगाया गया कि पूर्व एवं वर्त्तमान मठाधीष द्वारा मंदिर की जमीन को अवैध राषि लेकर किरायेनामा का दस्तावेज बनाया गया है और बनाया जा रहा है। दूसरी ओर इस पौराणिक मंदिर की स्थिति अत्यन्त जर्जर है और धूप-आरती हेतु राषि भी पुजारी को उपलब्ध नहीं कराया जाता है। जांच प्रतिवेदन से यह भी स्पष्ट है कि श्री महेष जी तिवारी द्वारा अपने कर्त्तव्यों का निवर्हन समुचित ढ़ंग से नहीं किया जा रहा है। उनके पास न्यास के आय-व्यय का कोई लेखा-जोखा नहीं है। जांच पदाधिकारी की अनुषंसा थी कि न्यास के सुचारू प्रबंधन के लिए न्यास समिति गठित की जाए, जो न्यास के सुचारू प्रबंधन तथा सम्पत्तियों की सुरक्षा हेतु आवष्यक कार्रवाई करे।

तत्पष्चात्‌ पर्षदीय पत्रांक 90, दिनांक 16.04.2011 द्वारा श्री महेष जी तिवारी को उक्त प्रतिवेदन की प्रतिलिपि संलग्न करते हुए कारण-पृच्छा की नोटिस दी गयी और समाहर्त्ता, सिवान से न्यास समिति के गठन के लिए ग्यारह व्यक्तियों का नाम भेजने का आग्रह किया गया।

श्री महेष जी तिवारी ने कारण-पृच्छा का जबाब दिनांक 05.05.2011 को प्रस्तुत किया जिसमें उल्लेख किया कि स्व0 म0 रघुनाथ दास द्वारा वर्ष 1993 में लिखित मोख्तारनामा द्वारा प्राप्त जिम्मेवारी का निवर्हन कर रहें है और महंत जी के स्वर्गवासी होने के पष्चात्‌ भण्डारा के समय साधु-संतों और ग्रामीणों द्वारा इन्हें चादर सौंपी गयी थी। इन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इन्हें कोई नियम, कायदा-कानून की जानकारी नहीं है और स्व0 महंत जी द्वारा प्राप्त निदेषानुसार मंदिर का प्रबंध करते चले आ रहें है। इन्होंने अपने जवाब के साथ अन्य कागजातों के अलावा मोख्तारनामा की प्रतिलिपि भी प्रस्तूत किया था। उक्त मोख्तारनामा दिनांक 15.12.1993 में श्री महेष जी तिवारी को मुकदमों की पैरवी, किराया वसूलने, किराये के लिए नयी बन्दोबस्ती तथा महंत जी की अनुपस्थिति में मंदिर में पूजा-पाठ, राग-भोग करने के लिए अधिकृत किया गया था। इसमें इनका पेषा गृहस्थी अंकित है, कहीं भी इन्हें षिष्य नहीं लिखा गया है।12 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012 श्री महेष जी तिवारी ने पुनः दिनांक 25.06.2011 को एक आवेदन पत्र दिया जिसमें लिखा है कि यह मंदिर एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है और इसके साथ वर्ष 1994-95 से 2010-11 का विवरण एक ही प्रपत्र पर दाखिल किया। इन्होंनें दिनांक 27.12. 2011 को एक आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जिसमें लिखा कि मंदिर के लिए एक न्यास समिति के गठन की आवष्यकता है, जिसके लिए ग्यारह व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव करते हुए अपने को सचिव नियुक्त करने का निवेदन किया। तत्पष्चात्‌ समाहर्त्ता, सिवान सेे उनकेे पत्रांक 13/रो0, दिनांक 6.01.2012 द्वारा न्यास समिति के गठन हेतु ग्यारह व्यक्तियों का नाम, उनके बायोडाटा सहित पर्षद को प्राप्त हुआ।

उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि इस मंदिर के पूर्व न्यासी दिवंगत महंथ रघुनाथ दास ने श्री महेष जी तिवारी को मंदिर का किराया वसूलने, मुकदमों की देख-रेख करने तथा तीर्थाटन आदि के लिए बाहर रहने पर इन्हें पूजा-पाठ के लिए मोख्तारनामा लिखा था, जो महंथ जी की मृत्यु के बाद अस्तित्वविहीन हो गया। दूसरी ओर श्री महेष जी तिवारी गृहस्थ जीवन व्यतीत कर रहें हैं और इन्होंनें अवैध रूप से मंदिर पर कब्जा कर इसकी सम्पत्तियों एवं आय का दुरूपयोग किया है। इनके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण को भी पूर्ण विचारोपरान्त असंतोषप्रद पाते हुए अस्वीकृत किया गया है।

उपर्युक्त परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि श्री राम जानकी मंदिर तरवारा की सम्पत्तियों एवं आय का दुरूपयोग हो रहा है, भगवान का पूजा-पाठ, राग-भोग की समुचित व्यवस्था नहीं हैं तथा मंदिर अत्यन्त जीर्ण-षीर्ण अवस्था में है, इसलिए इसके समुचित प्रबंधन हेतु योजना का निरूपण एवं इसके सुसंचालन हेतु न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।

अतः मैं, किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, श्री राम जानकी मंदिर तरवारा के सुचारू प्रबंधन, सम्यक विकास तथा सम्पतियों की सुरक्षा हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा-32 के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करते हुए इसके क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजनायोजनायोजनायोजना

1. इस योजना का नाम '' श्री राम जानकी मंदिर तरवारा न्यास योजना'' होगा तथा इस योजना को मूर्त्त रूप देने हेतु पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति केा नाम ''श्री राम जानकी मंदिर न्यास समिति, तरवारा'' होगा, जिसमें मठ की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास सम्पत्तियों की सुरक्षा, सुव्यवस्था और मंदिर की परम्परा के अनुकूल पूजा-पाठ, राग-भोग एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

3. मठ की आय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली परख होगी।

4. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, बजट, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्यवृत्त आदि सम्यक रूप से प्रेषित करेगी।

5. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेगें। समिति की बैठक साल में कम से कम चार बार अवष्य होगी।

6. न्यास समिति के सचिव समिति की बैठकों में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होगें और कोषाध्यक्ष लेखा का सम्यक संधारण करेगें।

7. न्यास की समग्र आय किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा और सचिव तथा कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खाता का संचालन किया जायेगा।

8. न्यास समिति के कोई सदस्य अपने कर्त्तव्यों के निवर्हन में विफल रहेगें या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेगें तो समिति के अध्यक्ष या सचिव इसकी सूचना पर्षद को देगें ताकि इस पर विचार कर समुचित निर्णय लिया जा सके। 9. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाये जायेगें या आपराधिक पृष्ठभूमि के होगें तो समिति के सदस्य होने की उनकी पात्रता समाप्त हो जायेगी।

10. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन एवं संषोधन का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

11. इस योजना को मूर्त्तरूप देने तथा इसके संचालन के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों को न्यास समिति का सदस्य मनोनित किया जाता है :-

(1). श्री विजेन्द्र कुमार सिंह, ग्रामपो0- तरवारा, जिला- सिवान - अध्यक्ष

(2). श्री राम रतन पासवान, ग्रामपो0- तरवारा, जिला- सिवान -सचिव

(3). श्री रूदल साह, ग्रामपो0- तरवारा, जिला- सिवान -कोषाध्यक्ष

(4). श्री जवाहर प्रसाद, ग्रामपो0- तरवारा, जिला- सिवान -सदस्य

(5). श्री हरिमुन तिवारी, ग्राम-भरतपुर, पो0- तरवारा, जिला-सिवान -सदस्य13 (cid:18)बहार गजट, 23 मई 2012 (6). श्री शम्भु तिवारी, ग्राम-भरतपुर, पो0- तरवारा, जिला- सिवान -सदस्य

(7). श्री ब्रिजेष साह, ग्रामपो0- तरवारा, जिला- सिवान -सदस्य

(8). श्री अषोक गिरि, ग्रामपो0- तरवारा, जिला- सिवान -सदस्य

(9). श्री हरिहर तिवारी, ग्रामपो0- तरवारा, जिला- सिवान -सदस्य

(10). श्री ब्रजेन्द्र कुमार सिंह, पिता- हृदयानन्द सिंह, ग्रामपो0- तरवारा,

जिला- सिवान -सदस्य

(11). श्री भगवान जी प्रसाद जयसवाल, पिता- हृदयानन्द सिंह,

ग्रामपो0- तरवारा, जिला - सिवान -सदस्य

यह योजना आदेष की तिथि से लागू होगी और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा।

आदेश से,

किषोर कुणाल,

अध्यक्ष।

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अधीGक, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुMित।

(cid:18)बहार गजट, 10Ñ571+100-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 23 May 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-05-23.21/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-05-23.21.