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सं॰ 22/नि0सि0(जम0)-12-03/2005/342—श्री बांके बिहारी प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, आई0डी0-1387 केन्द्रीय भंडार एवं शिविर प्रमण्डल, चांडिल, सम्प्रति जल संसाघन विभाग, बिहार से सेवानिवृत द्वारा उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन अवधि वर्ष 2002-03 में चांडिल बांध स्थित दॅाया एवं बॅाया तटबंघ शिविर के मरम्मति में घोर अनियमितता बरती गयी। जल संसाघन विभाग, झारखण्ड से इससे संबंघित प्राप्त अभिलेखेां के समीक्षोपरान्त उक्त आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय संकल्प सं0-1179 दिनांक 18.11.06 द्वारा बिहार सरकारी (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय प्रारम्भ की गयी। उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाघिकारी द्वारा जॅाच प्रतिवेदन प्राप्त नहीं कराये जाने के कारण विभागीय आदेश सं0 270, दिनांक 7.4.09 द्वारा दूसरे संचालन पदाघिकारी एवं प्रस्तुतीकरण पदाघिकारी को नियुक्त किया गया।
संचालन पदाघिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी । इनके विरूद्व निम्न आरोप गठित किये गये।
'' केन्द्रीय भंडार एवं शिविर प्रमण्डल, चांडिल के अन्तर्गत अपने पदस्थापन अवधि में चांडिल बांध स्थित दॅाया एवं बॅाया तट शिविर के मरम्मति में उनके द्वारा घोर अनियमितता वित्तीय वर्ष 2002-03 में किया गया है जॅाच से यह तथ्य उजागर हुआ है कि सम्पादित कार्य प्राक्कलित राशि का क्रमशः 48 प्रतिशत एवं 27.28 प्रतिशत है। एतद् कार्य के जॅाच के समय दिनांक 5.7.03 से 6.7.03 तक आवास का कार्य चल रहा था। इससे स्पष्ट है कि मार्च 2003 में कार्य पूर्ण नहीं हुआ था इसके बावजूद दिनांक 31.3.03 तक उनके द्वारा संवेदक को 8,66,899 रुपये का भुगतान किया गया। इस प्रकार बिना पूरा कार्य कराये ही इनके द्वारा संवेदक को उक्त वर्णित राशि का भुगतान कर सरकार को गंभीर वित्तीय क्षति पहुचाया गया है। उपरोक्त आरोप इनके विरुद्व प्रथम द्रष्टया प्रमाणित है।''
संचालन पदाधिकारी द्वारा मुख्य रूप से निम्न मंतव्य दिया गयाः-
आरोपित पदाधिकारी श्री प्रसाद द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया जिसमें मुख्य रूप से उल्लेखित किया गया है, कि उनके द्वारा किये गये कार्य का, जॅाच दल द्वारा किये गये आकलन अपूर्ण एवं अविश्वसनीय है। जुलाई 03 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 जून 2012 में किये जा रहे कार्य के संबंध में श्री प्रसाद का कहना है कि अंतिम विपत्र तैयार करने हेतु संभवतः पूर्व में कराये गये कार्य में संवेदक द्वारा सुधार किया जा रहा होगा।
संचालन पदाधिकारी द्वारा जॅाच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया है कि जॅाच दल द्वारा आरोपित पदाधिकारी श्री प्रसाद के संदर्भित यांत्रिक कार्य की जॅाच 20-21 जुलाई 03 को की गयी। जॅाच दल द्वारा एकरारित राशि 8,69,166.28 रुपये के विरुद्व 8,66,899 रुपये भुगतान दिनांक 3.3.03 तक पाया गया है जो 99.73 प्रतिशत है। (क) जॅाच दल द्वारा ''ई'' प्रकार के भवनों में कार्यो का अनुमानित लागत के आधार पर 27.28 प्रतिशत कार्य पाया।
(ख) इसी प्रकार ''एफ'' आकार के भवनों में अनुमानित लागत के आधार पर 48 प्रतिशत कार्य पाया। विन्दु ''क'' एवं ''ख'' के कार्यो का आकलन किस आधार पर किया गया इसका उल्लेख नहीं है जॅाच दल का प्रतिवेदन अपूर्ण है। जॅाच का आधार मापी होना चाहिए था। जिसका उल्लेख जॅाच समिति द्वारा नहीं किया गया है। अतः उनके प्रतिवेदन से आरोप पूर्ण रूप से प्रमाणित नहीं होता हैं।
संदर्भित कार्य मरम्मति एवं संपोषण मद से संबंधित है जिसे मार्च माह तक ही समान्यतः पूर्ण किया जाता है। जबकि जुलाई माह में कार्य को चालू पाया गया।
आरोपित पदाधिकारी श्री प्रसाद द्वारा अंतिम विपत्र तैयार करवाने के लिए माह जुलाई में संवेदक द्वारा कार्य सुधार करवाने की संभवना व्यक्त की गई है। यदि जॅाच दल द्वारा कराये गये कार्यो की मापी अंकित की गई होती तो स्पष्ट रूप से पता चल जाता कि माह मार्च तक कितने कार्य हुए थें एवं जुलाई में कौन कार्य चल रहे थे परन्तु जॅाच दल द्वारा समर्पित प्रतिवेदन अधूरे रहने के कारण निष्कर्ष पर नहीं पहुॅचा जा सकता है।
अतएव उपरोक्त आरोप अांशिक प्रमाणित समझा जा सकता हैं
संचालन पदाघिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। पाया गया कि मार्च, 03 तक जॅाच दल द्वारा 37.65 प्रतिशत कार्य प्रतिवेदित किया गया जबकि प्राक्कलित राशि 8,69,166.28 रुपये के विरूद्व 8,66,899 रुपये का भुगतान मार्च, 03 तक कर दिया गया। जॅाच दल द्वारा माह जुलाई में कार्य चालू पाया गया। श्री प्रसाद का कहना है कि अंतिम विपत्र तैयार करने हेतु माह जुलाई में संवेदक द्वारा कार्य सुघार कराया जा रहा होगा को मान्य नहीं किया जा सकता। वर्णित स्थिति में श्री प्रसाद के विरुद्व संचालन पदाघिकारी द्वारा आरोप अांशिक प्रमाणित पाये जाने से सहमत होते हुए इनसे द्वितीय कारण पृच्छा करने का निर्णय लिया गया। इस बीच श्री प्रसाद, कार्यपालक अभियन्ता दिनांक 31.7.09 को सेवानिवृत हो गये। अतः उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत जारी रखते हुए विभागीय पत्रांक 636 दिनांक 13.4.10 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री प्रसाद सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में मुख्यतः निम्न बाते कही गयी हैः-
आरोप की समीक्षा में संचालन पदाधिकारी का अभिमत है कि जॅाच का आधार मापी होना चाहिए था। जिसका कोई उल्लेख जॅाच दल के द्वारा अपने प्रतिवेदन में नहीं किया गया है जिससे आरोप प्रमाणित नहीं होता है जिससे स्पष्ट है, कि जॅाच समिति के द्वारा बिना आधार के ही कराये गये कार्य के प्रतिशत का आकलन किया गया। आरोप के दूसरे भाग के संबंध में श्री प्रसाद का कहना है कि संचालन पदाधिकारी का अभिमत है कि यदि जॅाच दल द्वारा कराये गये कार्यो की मापी अंकित की गई होती तो स्पष्ट रूप से पता चल जाता कि माह जुलाई, 03 में कौन सा कार्य चल रहा था परन्तु विभाग द्वारा मात्र अांशका एवं संभावना के आधार पर आरोप को अांशिक रूप से प्रमाणित माना जा रहा है जो नैसर्गिक न्याय के प्रतिकूल है।
श्री प्रसाद का कहना है कि संचालन पदाघिकारी द्वारा आरोपों को आशिक रूप से प्रमाणिकता का मंतव्य नहीं दिया गया है।
श्री प्रसाद सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। पाया गया कि श्री प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में उनके द्वारा कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है। बल्कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित न पाये जाने का उल्लेख करते हुए दोषमुक्त करने का अनुरोध किया गया है।
समीक्षा में यह भी पाया गया कि जॅाच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा चांडिल बांध स्थित दॅाया एवं बॅाया तट शिविर मरम्मति कार्यो से संबंधित आरोपों को अंशतः प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन से सहमति व्यक्त करते हुए ही इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गयी है। अतः वर्णित स्थिति में श्री प्रसाद सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता का कहना कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया है सही नहीं है। समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्व उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए 3
(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 जून 2012
सरकार द्वारा श्री बॅाके बिहारी प्रसाद, सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गया।
(1) 15 प्रतिशत पेंशन पर दो वर्षो तक के लिए रोक।
उपरोक्त वर्णित स्थिति में श्री बांके बिहारी प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, आई0डी0-1387 केन्द्रीय भंडार एवं शिविर प्रमण्डल, चांडिल, सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है।
(1) 15 प्रतिशत पेंशन पर दो वर्षो तक के लिए रोक।
उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की सहमति प्राप्त है। उक्त दण्ड श्री प्रसाद सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, सरकार के उप-सचिव।
———— अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 249-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in