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सं0 निग/सारा-4 (पथ)-43/03-6115 (एस)—श्री सत्यनारायण पासवान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल वैशाली सम्प्रति कार्यापालक अभियंता, ग्रामीण कार्य प्रमंडल-2, औरंगाबाद के विरूद्ध पथ प्रमंडल, वैशाली के पदस्थापन काल में महात्मा गांधी सेतु के उत्तरी छोर पर पथ कर संग्रह में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना सं0 3586 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-3587 (एस) दिनांक 29.05.98 द्वारा निलंबित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3940 (एस) अनु0 दिनांक 06.06.98 द्वारा विभागीय जांच आयुक्त, बिहार, पटना के संचालन में विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री पासवान को अधिसूचना संख्या 8761 (एस) दिनांक 13.10.03 द्वारा विभागीय कार्यवाही जारी रखते हुए निलंबन मुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 1022, दिनांक 04.10.2001 द्वारा प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत दंड पर लिये गये निर्णय के आलोक में उक्त सभी कागजातों को संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 11198 (एस) अनु0 दिनांक 30.12.03 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग के परामर्श/सहमति की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा विभागीय प्रस्ताव से सहमति अपने पत्रांक-1620 दिनांक 27.10.04 द्वारा दी गयी जिसके उपरांत अधिसूचना संख्या 5404 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-5405 (एस) दिनांक 25.05.06 द्वारा श्री पासवान को निम्न दंड संसूचित किया गयाः-
(I) श्री सत्यनारायण पासवान को कार्यपालक अभियंता (असैनिक) के पद से सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर पदावनत किया जाता है।
(II) इनके निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा। (III) इनके द्वारा गबन की गई राशि ` 6,40,099 का 50 प्रतिशत राशि अर्थात ` 3,20,050 की वसूली इनके वेतन एवं अन्य भुगतेय राशि से की जायेगी। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जून 2012 2. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री पासवान द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन को विभागीय अधिसूचना संख्या 11302(एस) दिनांक 26.09.06 द्वारा अस्वीकृत किया गया। तत्पश्चात निर्गत दंडादेश के विरूद्ध श्री पासवान द्वारा माननीय न्यायालय में याचिका संख्या 15965/06 दायर किया गया जिसमें माननीय न्यायालय ने दिनांक 25.07.07 को पारित न्यायादेश द्वारा श्री पासवान के विरूद्ध निर्गत दंडादेश को निरस्त करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा सूचना निर्गम स्तर से पुनः कार्रवाई आरंभ करने हेतु इस मामले को प्राधिकार को वापस किया गया। तदआलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या 14592 दिनांक 14.12.07 द्वारा श्री पासवान के विरूद्ध निर्गत दंडादेश को निरस्त करते हुए श्री पासवान से द्वितीय कारण पृच्छा कर उनसे उत्तर प्राप्त होने के उपरांत दंड के बिन्दु पर पुनः निर्णय लिया जायेगा का आदेश निर्गत किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के आलोक में श्री पासवान से पूर्व संचालित विभागीय कार्यवाही एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर स्पष्ट रूप में असहमति के बिन्दु पर असहमति के कारणों को अंकित करते हुए विभागीय पत्रांक-14589 (एस) अनु0 दिनांक 14.12.07 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री पासवान के पत्रांक-शून्य दिनांक 12.06.09 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा को समीक्षोपरांत इसे असंतोषजनक पाते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री पासवान को कार्यपालक अभियंता (असैनिक) के पद से सहायक अभियंता (असैनिक) के निम्नतम प्रक्रम पर पदावनत करने, निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी भुगतान नहीं करने परन्तु अन्य प्रयोजन हेतु इसे कर्तव्य पर बिताई गयी अवधि माने जाने एवं गबन की गयी वास्तविक राशि ` 1,98,871 (एक लाख अठानवे हजार आठ सौ एकहत्तर रुपये) की वसूली इनके वेतन एवं अन्य भुगतेय राशि से करने के दंड प्रस्ताव पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-7304 (एस) अनु0 दिनांक 18.05.10 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गयी।
3. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2238 दिनांक 02.12.10 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड में आरोपित पदाधिकारी को पदावनत करने के दंड पर असहमति व्यक्त की गयी जबकि शेष दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी।
4. बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त परामर्श के आलोक में पुनः समीक्षोपरांत यह स्थापित पाया गया कि श्री पासवान के द्वारा अन्य वित्तीय अनियमितताओं के अतिरिक्त ` 1,98,871 (एक लाख अठानवे हजार आठ सौ एकहत्तर रूपये) का गवन/अनियमितता की गयी जो एक घोर वित्तीय अनियमितता है इस दृष्टिकोण से विभाग द्वारा प्रस्तावित दंड युक्ति-युक्त एवं समानुपातिक पाते हुए, एवं आयोग के सलाह को बाध्यकारी नहीं मानते हुए पुनः सरकार के अनुमोदनोपरांत श्री सत्यनारायण पासवान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल वैशाली सम्प्रति कार्यापालक अभियंता, ग्रामीण कार्य प्रमंडल-2, औरंगाबाद को अधिसूचना संख्या 5057 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-5058 (एस) दिनांक 02.05.11 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-
(I) कार्यपालक अभियंता (असैनिक) के पद से सहायक अभियंता (असैनिक) के निम्नतम प्रक्रम पर पदावनत।
(II) निलंबन अवधि में मात्र जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान, परन्तु, अन्य प्रयोजन हेतु इसे कर्तव्य पर बिताई गयी अवधि मानी जायेगी।
(III) गबन की गयी वास्तविक राशि ` 1,98,871 (एक लाख अठानवे हजार आठ सौएकहत्तर रुपये) इनके वेतन एवं अन्य भुगतेय राशि से वसूली।
5. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री पासवान द्वारा माननीय न्यायालय में याचिका संख्या 10423/2011 दायर की गयी। माननीय न्यायालय ने दिनांक 06.04.12 को पारित अंतरिम आदेश में कहा कि इस प्रकरण में सरकार को हुई वित्तीय क्षति की राशि का निर्धारण न्यायालय द्वारा नहीं किया जा पा रहा है कि वास्तविक क्षति की राशि कितनी है। इस हेतु विभागीय अभिलेख के साथ उप-सचिव (निगरानी) को दिनांक 10.04.12 को न्यायालय में उपस्थित होने का 3
(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 14 जून 2012
निदेश दिया गया। दिनांक-10.04.12 को माननीय न्यायालय ने उपस्थित होकर विभाग द्वारा सूचना दी गयी कि श्री पासवान द्वारा इस बीच वृहद दंड के विरूद्ध अपील अभ्यावेदन दिनांक 02.02.12 को समर्पित किया है, जो समीक्षाधीन है। तत्पश्चात् माननीय न्यायालय ने अपने पारित अंतरिम आदेश दिनांक 10.04.12 में दो सप्ताह का समय देते हुए यह अपेक्षा की गयी कि इस अवधि में श्री पासवान के अभ्यावेदन पर विभाग द्वारा समुचित निर्णय ले लिया जाए। 6. माननीय न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेश दिनांक 10.04.12 एवं श्री पासवान से प्राप्त अपील अभ्यावेदन दिनांक 02.02.12 के आलोक में संचिका के पुनर्विलोकन एवं अधीक्षण अभियंता, सारण पथ अंचल, हाजीपुर से प्राप्त कागजातों के अवलोकनोपंरात पाया गया कि विषयांकित मामले में गबन की वास्तविक राशि ` 1,94,871 है जिसकी वसूली अधीक्षण अभियंता, सारण पथ अंचल, हाजीपुर के कार्यालय आदेश ज्ञापांक-628 दिनांक 01.06.09 द्वारा श्री कृष्णादास, लेखा लिपिक से करने का आदेश निर्गत किया जा चुका है। इस तरह श्री पासवान के विरूद्ध राशि वसूली का मामला नहीं बनता है, परन्तु श्री पासवान के विरूद्ध गठित अन्य आरोपों को संचालन पदाधिकारी एवं विभागीय समीक्षा में प्रमाणित पाया गया।
7. तदआलोक में पुर्नसमीक्षोपरांत सरकार के निर्णयोपरांत पूर्व निर्गत दंडादेश अधिसूचना संख्या 5057 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-5058 (एस) दिनांक 02.05.11 के कंडिका-4 (i) एवं (ii) को यथावत रखते हुए कंडिका-4 (iii) में वसूली से संबंधित आदेश को निरस्त किया जाता है।
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———— अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु6ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 258-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in