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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 19 July 2012

Published 19 July 2012

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-07-19.346
Languages
English, Hindi

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट

असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 28282828 आषाढआषाढआषाढआषाढ+ 1111934934934934 ((((शशशश0000))))

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इस बीच प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़-भपटियाही के ज्ञापांक 982-2 दिनांक 03.08.2007 द्वारा श्री दिलीप चौधरी, पंचायत सचिव से दिनांक 28.07.2007 से कार्यालय से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने और दिनांक 01.08.2007 से अर्जित अवकाष के लिए आवेदन देकर अवकाष स्वीकृत कराए बिना कार्यालय से अनुपस्थित रहने के लिए तथा कार्यालय से एवं पंचायत मुख्यालय से बराबर गायब हो जाने के कारण बी0 पी0 एल0 सूची निर्माण, इंदिरा आवास भुगतान तथा बाढ़ साहाय्य के कार्याे में कठिनाई उत्पन्न होने के मद्देनजर पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण की मांग की गई। तत्‌आलोक में श्री चौधरी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण दिनांक 25.09.2007 में अंकित किया गया है कि मैं दिनांक 23.07.2007 से 28.07.2007 तक विधिवत अवकाष आवेदन देकर और आकस्मिक अवकाष स्वीकृत कराकर मुख्यालय से आया था और दिनांक 29.07.2007 एवं 30.07.2007 (षनिवार और रविवार) अवकाष घोषित था, इस तरह मैं अनधिकृत रूप से कभी भी मुख्यालय से बाहर नहीं रहा। यह भी अंकित है कि गत 2-3 माह से गंभीर रूप से बीमार रहने एवं चिकित्सक द्वारा हर्निया की बीमारी बताकर ऑपरेषन करने की सलाह देने के फलस्वरूप वे दिनांक 01.08.2007 से दो माह का अर्जित अवकाष के लिए विधिवत्‌ आवेदन प्रखंड विकास पदाधिकारी को समर्पित किया। प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही द्वारा अपने पत्रांक 987-2 दिनांक 17.10.2007 द्वारा जिला पदाधिकारी, सुपौल को प्रतिवेदित किया गया कि श्री दिलीप चौधरी लगभग दो माह बाद उनके समक्ष उपस्थित होकर उक्त दोनों स्पष्टीकरणों का जवाब समर्पित किया गया। दिनांक 28.07.2007 से अपनी अनधिकृत अनुपस्थित के संदर्भ में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण बिल्कुल गलत और आधारहीन है। स्पष्टीकरण में उनके द्वारा कहा गया है कि उन्होंने अपना अवकाष आवेदन दिनांक 23.07.2007 से 28.07.2007 तक के लिए स्वीकृत कराया था, जबकि अवकाष आवेदन मात्र 23.7.2007 से 27.7.2007 तक के लिए ही था और उसे दिनांक 27.07.2007 तक के लिए स्वीकृत किया गया था। पुनः उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में लिखा गया है कि उन्होंने दो माह के लिए अर्जित अवकाष का विधिवत ओवदन दिया था, लेकिन उनका कथन भी पूर्णतः गलत है चूँकि उनके द्वारा प्रस्तुत आवेदन में अवकाष की अवधि मात्र 01.08. 2007 से 30.08.2007 ही है और इसे उनके द्वारा किसी अनजान व्यक्ति के द्वारा उनके आवास पर भिजवा दिया गया था न कि विधिवत तरीके से इसे प्रस्तुत किया गया था। अनधिकृत रूप से अनुपस्थिति के संदर्भ में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में मौजूद उक्त विसंगतियों से यह स्पष्ट होता है कि श्री चौधरी भ्रामक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने में माहिर है और उनका पूर्व का इतिहास भी ऐसे मंतव्य की पुष्टि करता है। प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही द्वारा यह भी प्रतिवेदित किया गया है कि श्री दिलीप चौधरी से मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 की प्रष्नगत अवैध निकासी के संदर्भ में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण जब प्रथम दृष्टया अविष्वसनीय प्रतीत हुआ तो उनके द्वारा श्री दिलीप चौधरी को इस कार्यालय के ज्ञापांक 947-2 दिनांक 05.10.2007 द्वारा ग्राम पंचायत सरायगढ अंतर्गत चल रहे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से संबंधित अभिलेखों, मापी पुस्त, मस्टर रॉल एवं अन्य कागजात अवलोकन हेतु 24 घंटे के अन्दर प्रस्तुत करने का निदेष दिया गया। समय सीमा के अंदर उक्त कागजात उनके द्वारा प्रस्तुत नहीं करने पर कार्यालय पत्रांक 951-2 दिनांक 06. 10.2007 द्वारा पंचायत कार्यालय में ही सभी योजनाओं की जाँच हेतु दिनांक 16.10.2007 की तिथि निर्धारित करते हुए इसकी विधिवत सूचना मुखिया, ग्राम पंचायत, सरायगढ को दी गई जिसकी प्रतिलिपि श्री चौधरी को भी दी गई। श्री दिलीप चौधरी के मुख्यालय एवं पंचायत से पुनः दिनांक 06.10.2007 से 10.10.2007 तक अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें उक्त पत्र उनके स्थायी पता पर निबंधित डाक के द्वारा दिनांक 11.10.2007 को भेज दिया गया। निर्धारित तिथि 16.10.2007 को प्रखंड विकास पदाधिकारी के द्वारा दो अंचल गार्डो एवं प्रखंड नाजिर के साथ अभिलेखों की जाँच की गई। पंचायत कार्यालय में श्री चौधरी के निर्धारित तिथि (16.10.2007) को अनुपस्थित रहने के कारण मुखिया, ग्राम पंचायत, सरायगढ़ के आवास पर उनके यहाँ रखे अभिलेखों की जाँच की गई जो निम्न प्रकार हैंः-

क्र0 योजना संख्या योजना का नाम प्रा0राषि अग्रिम की राषि मापीपुस्त अभिश्रव एवं मस्टर रॉल अभ्युक्ति
1 2 3 4 5 6 7 8
1 01/06-07 जगरनाथ यादव खेत से जोजन यादव खेत होते हुए मदरसा तक भी0सी0 सफाई कार्य 87,800/- 84,900/- 84,900/- 59,475.00
2 02/06-07 75 आर0डी0 गंगापुर से मुनर राम घर तक भी0सी0 सफाई कार्य 99,100/- 92,500/- 99,100/- 89,625/-
3 03/06-07 सुपौल उपषाखा नहर के किनारे चैनल निर्माण 55,400/- 51,000/- 51,450/- 51,000/-
4 04/06-07 भपटियाही माईनर से चाँदपीपर सीमा तक भी0सी0 सफाई कार्य 89,300/- 87,500/- 89,388/- 87,415/-
5 05/06-07 बद्री पंडित घर से प्रा0वि0 होते हुए सतसंग भवन तक सड़क-सह-सुरक्षा बांध निर्माण 80,000/- 70,656/- 79,933/- 50,127/-
6 06/06-07 भपटियाही माईनर गढ़िया सीमा से सायफन तक भी0सी0 सफाई एवं मरम्मती कार्य 87,800/- 84,900/- 84,900/- 59,475/-
7 07/06-07 चिकनी माईनर से निकलने वाली भी0सी0 जो परमेष्वर यादव घर होते हुए चाँदपीपर सीमा तक मरम्मती एवं जल निकासी कार्य 87,800/- 84,900/- 84,900/- 59,475/-
8 08/06-07 आर0ई0ओ0 रोड से दक्षिण वीनू यादव घर तक सड़क सह सुरक्षा बांध निर्माण 87,800/- 84,900/- 84,900/- 59,475/-
9 09/06-07 पी0डब्लू0डी0 रोड से म0वि0 सरायगढ़ तक सड़क निर्माण कार्य 87,800/- 84,900/- 84,900/- 59,475.00
10 10/06-07 सहदेव सुतिहार घर से रामू साह घर तक सड़क सह सुरक्षा बांध निर्माण कार्य 87,800/- 84,900/- 84,900/- 59,475.00
11 11/06-07 टेंगराह माईनर से मझौआ जाने वाले भी0सी0 जो मनोज यादव के टोल से झबर यादव के घर तक भी0सी0 सफाई एवं मरम्मति कार्य 87,800/- 84,900/- 84,900/- 59,475.00
3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 19 जुलाई 2012

श्री दिलीप चौधरी के द्वारा प्रष्नगत मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 की अवैध निकासी के सम्बन्ध में समर्पित स्पष्टीकरण में लिखा गया है कि यह राषि उनके द्वारा योजना संख्या 12/2006-07 का अभिर्काा होने के कारण कृत कार्य के विरूद्व उसे भुगतान करने हेतु खाता संख्या 378 सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया, अन्दौली (किषनपुर) से निकासी की गई। श्री चौधरी का उक्त स्पष्टीकरण भी गलत और भ्रामक प्रतीत होता है, चूँकि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ग्राम पंचायत, सरायगढ़ अन्तर्गत संचालित योजनाओं में विषयांकित योजना संख्या 12/2006-07 शामिल नहीं है। पुनः स्पष्टीकरण में सिर्फ योजना संख्या का जिक्र किया गया है, योजना का नाम अंकित नहीं है। समर्पित स्पष्टीकरण में योजना की प्राक्कलित राषि मो0 3,31,600.00 (तीन लाख इकतीस हजार छः सौ) रू0 दर्षायी गयी है। योजना संख्या 6/2006-207, भपटियाही माइनर गढ़िया सीमा से साईफन तक भी0सी0 सफाई एवं मरम्मति कार्य की प्राक्कलित राषि भी मो0 3,31,600.00 (तीन लाख इकतीस हजार छः सौ) रू0 की है। प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत सरायगढ़ को मात्र दो ही योजनाओं की प्रषासनिक स्वीकृत प्रदान की गयी है जिसमें मो0 3,31,600.00 (तीन लाख इकतीस हजार छः सौ) रू0 का मात्र एक ही योजना की प्रषासनिक स्वीकृति दी गयी थी जो वस्तुतः 06/2006-07 है। इस प्रकार श्री चौधरी के द्वारा अंकित योजना संख्या 12/2006-07 का हवाला देकर मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 की निकासी को कृत कार्य के विरूद्व भुगतान करने के कथन को गलत और भा्रमक माना जाता है। श्री दिलीप चौधरी के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में मुखिया, ग्राम पंचायत, सरायगढ पर राषि छीनने का असफल प्रयास करने और गाली गलौज एवं मारपीट करने का लगाए गए आरोप के संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी ने प्रतिवेदित किया है कि यह जाँच का विषय है, परन्तु श्री चौधरी के द्वारा ऐसी घटना की सूचना पूर्व में और समय पर4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 19 जुलाई 2012 उन्हें कभी नहीं दी गई। इससे प्रतीत होता है कि श्री चौधरी के द्वारा राषि छीनने एवं अन्य आरोप मामले को उलझाने के लिए लगाया गया है। श्री दिलीप चौधरी, पंचायत सचिव के द्वारा खाता संख्या 378 सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया, अन्दौली (किषनपुर) से मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 की निकासी की गयी है, लेकिन इसे के0 के0 जी0 बी0, भपटियाही में जमा नहीं कर अपने पास ही रख लिया गया जिससे सरकारी राषि के गबन की पूरी संभावना बनती है। प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा श्री दिलीप चौधरी, पंचायत सचिव के विरूद्व उक्त विाीय अनियमिता के लिए आवष्यक कानूनी कार्रवाई करने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही की अनुषंसा के आलोक में जिला पदाधिकारी के ज्ञापांक 2780-2/गो0 दिनांक 05.11.2007 द्वारा सरकारी राषि गबन के आरोप में श्री दिलीप चौधरी पंचायत सचिव के विरूद्व स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेष प्रखंड विकास पदाधिकारी सरायगढ़-भपटियाही को दिया गया। इस आदेष के बाद भी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़-भपटियाही द्वारा एक और मौका देते हुए श्री दिलीप चौधरी, पंचायत सचिव को राषि जमा करने हेतु एक सप्ताह का समय देते हुए निबंधित डाक से पत्र भेजा गया। इस पत्र के जवाब में श्री चौधरी ने अभ्यावेदन भेजा कि मैं दिनांक 14.12.2007 तक पूरी राषि बैंक में जमाकर रसीद के साथ श्रीमान्‌ (प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही) के कार्यालय में उपस्थित हो रहा हूँ। परन्तु दिनांक 14.12. 2007 तक श्री चौधरी द्वारा राषि जमा करने संबंधी कोई सूचना नहीं दी गई। तत्पष्चात्‌ प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़-भपटियाही के पत्रांक 30-2 सपत्र दिनांक 09.01.2008 द्वारा श्री दिलीप चौधरी, पचांयत सचिव के विरूद्व किषनपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। यही नहीं, श्री दिलीप चौधरी, पचांयत सचिव द्वारा षिक्षक नियोजन में भी धांघली बरती गयी। प्राथमिक विद्यालय, गंगापुर में एक रिक्त पद पर सीमा कुमारी को नियोजित किया गया। बाद में सरकारी नियमों के विपरीत पुनः अपने हस्ताक्षर से प्रीति कुमारी को बिना नियोजन समिति की सहमति तथा सीमा कुमारी के नियोजन को रद्द किए बिना नियोजन पत्र देकर विद्यालय में योगदान करवाया गया, जिसे जिला पदाधिकारी, सुपौल के ज्ञापांक 730/गो0 दिनांक 15.03.2008 के द्वारा रद्द किया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी,सरायगढ-भपटियाही पत्रांक 986-2 दिनांक 17.10.2007 द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन, यथा श्री दिलीप चौधरी, पचांयत सचिव द्वाराः - अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहना, - स्पष्टीकरण पूछे जाने पर न जवाब देना और न उपस्थित होना, - मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 सरकारी राषि की चेक से निकासी कर अपने पास रखना, - षिक्षक नियोजन में चयन समिति के अनुमोदन बिना सीमा कुमारी का नियोजन रद्द करना तथा प्रीति कुमारी का अवैध रूप से नियोजन करना एवंअवैध रूप से नियोजन करना एवंअवैध रूप से नियोजन करना एवंअवैध रूप से नियोजन करना एवं - बिना प्रषासनिक स्वीकृति का योजना का कार्यान्वयन करने के आरोप में कार्यालय ज्ञापांक 2451-2/गो0 दिनांक 23.01.2008 के द्वारा श्री दिलीप चौधरी, पंचायत सचिव, सरायगढ़-भपटियाही को तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए इनका मुख्यालय छातापुर प्रखंड निर्धारित किया गया। साथ ही प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़ भपटियाही को इनके विरूद्व अनुमंडल पदाधिकारी, सुपौल के माध्यम से प्रपत्र-''क'' उपलब्ध कराने एवं श्री चौधरी के विरूद्व प्राथमिकी दर्ज की गई या नहीं, सूचित करने का निदेष दिया गया। कार्यालय ज्ञापांक 2451-2/गो0 दिनांक 23कार्यालय ज्ञापांक 2451-2/गो0 दिनांक 23कार्यालय ज्ञापांक 2451-2/गो0 दिनांक 23कार्यालय ज्ञापांक 2451-2/गो0 दिनांक 23....01010101....2008 में यह भी अंकित है किः-2008 में यह भी अंकित है किः-2008 में यह भी अंकित है किः-2008 में यह भी अंकित है किः- जिला पंचायत शाखा, सुपौल की संचिका संख्या 4-61/2007 जो श्री दिलीप चौधरी, पंचायत सचिव, सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड के विरूद्व आरोप से सम्बन्धित है। श्री दिलीप चौधरी, पंचायत सचिव, सरायगढ-भपटियाही के विरूद्व पूर्व में मो0 49,47,700.00 रू0 गबन के आरोप में थाना कांड संख्या 07/2001 दर्ज कराया, जिसमें वे जेल भी गए थे। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अन्य मामलों में पारित आदेष जिसमें उल्लेख है कि यदि किसी व्यक्ति पर आपराधिक मुकदमा दर्ज है और वह उसी मामले में निलंबित भी है तो निलंबन से मुक्त किया जा सकता है की प्रति उपस्थापित किया गया। इस आदेष के आलोक में श्री दिलीप चौधरी को कार्यालय आदेष ज्ञापांक 1373-2/पं0, सुपौल, दिनांक 05. 12.2006 द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। क्योंकि कार्यालय द्वारा कार्मिक एवं प्रषासनिक सुधार विभाग बिहार, पटना के पत्र संख्या 2475, दिनांक 28.11.2005 उपस्थापित नहीं किया गया जिसके साथ संलग्न बिहार गजट अधिसूचना दिनांक 12.07.2005 के भाग IV के नियम 1 की कंडिका ''ग'' में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि सरकारी सेवक के विरूद्व यदि कोई आपराधिक मामला अन्वेषण, जाँच या विचारण के अधीन हो और सक्षम प्राधिकार का यह समाधान हो गया हो कि लोकहित में सरकारी सेवक का निलम्बित करना समीचिन है तो उन्हें निलम्बित किया जा सकता है। कार्यालय ज्ञापांक 2451-2/गो0 दिनांक 23.01.2008 के आलोक में प्रखंड विकास पदाधिकारी, छातापुर के द्वारा अपने पत्रांक 874-2 दिनांक 30.4.2011 द्वारा सूचित किया गया कि श्री दिलीप चौधरी द्वारा छातापुर प्रखंड कार्यालय में योगदान नहीं किया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़ भपटियाही के पत्रांक 986-2 दिनांक 17.10.2007 द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण,सुपौल के ज्ञापांक 409/अभि0 दिनांक 15.02.2008 द्वारा राषि गबन के आरोप में स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज करने तथा श्री चौधरी के विरूद्व प्रपत्र-''क'' में आरोप गठित कर भेजने का निदेष दिया गया।5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 19 जुलाई 2012 प्रपत्र-''क'' का गठनप्रपत्र-''क'' का गठनप्रपत्र-''क'' का गठनप्रपत्र-''क'' का गठन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़-भपटियाही द्वारा श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सेवक के विरूद्व प्रपत्र-''क'' में निम्न आरोप गठित कर भेजा गयाः- प्रपत्र-''क'' में निम्न आरोप गठित कर भेजा गयाः- प्रपत्र-''क'' में निम्न आरोप गठित कर भेजा गयाः- प्रपत्र-''क'' में निम्न आरोप गठित कर भेजा गयाः- आआआआरोप संख्याः1रोप संख्याः1रोप संख्याः1रोप संख्याः1 आप बराबर बिना सूचना एवं बिना अवकाष स्वीकृत कराये मुख्यालय एवं पंचायत से अनुपस्थित पाए गए जिसके चलते पंचायत का विकास कार्य तथा बी0पी0एल0, इंदिरा आवास के लाभान्वितों के भुगतान, बाढ़ साहाय्य संबंधी कार्य में काफी कठिनाई हुई। अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण प्रखंड कार्यालय के ज्ञापांक 782-2 दिनांक 03.07.2007 के द्वारा आपसे स्पष्टीकरण पूछा गया, लेकिन आप दो माह बाद उपस्थित होकर गलत एवं भ्रामक जवाब प्रस्तुत किए जो सेवा संहिता के विरूद्व है। आरोप संख्याः2आरोप संख्याः2आरोप संख्याः2आरोप संख्याः2 ग्राम पंचायत, सरायगढ़ के र्वामान मुखिया ने आवेदन दिया कि आपके द्वारा मुखिया को धोखे में डालकर खाता-378 सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया, अन्दौल्ी से मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 की निकासी कर खाता संख्या 2766 कोषी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, भपटियाही में जमा करने हेतु चेक पर हस्ताक्षर करवाया लेकिन सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया से राषि निकासी कर अपने पास रख लिए। इस संबंध में आपसे स्पष्टीकरण कार्यालय ज्ञापांक 883-2 दिनांक 12.06.2007 द्वारा पूछा गया। आप ने स्पष्टीकरण का जवाब दिया कि मेरे द्वारा चलायी गयी योजना संख्या 12/2006-07 की राषि कनीय अभियंता तथा सहायक अभियंता द्वारा मापी पुस्त सत्यापित करने के उपरान्त मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रु0 का चेक प्राप्त हुआ, की राषि हस्तान्तरण हेतु, तथा सभी अभिलेख मुखिया द्वारा छीन लेने का आरोप लगाया गया। आपके आरोप के आलोक में ग्राम पंचायत सरागयढ़ के मुखिया को इस कार्यालय के ज्ञापांक 915-2 दिनांक 06.10. 2007 द्वारा दिनांक 16.10.2007 को कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्ट करने हेतु लिखा गया जिसकी प्रतिलिपि आपको दी गई, लेकिन आप निर्धारित तिथि को उपस्थित न होकर जाँच कार्य में असहयोग प्रदान किया। नाजिर भाष्कर पाठक तथा अंचल गार्डो के साथ पंचायत कार्यालय जाकर अभिलेख की जाँच की गई तो पाया कि आपके द्वारा उल्लिखित योजना संख्या 12/2006-07 चलायी ही नहीं गयी है। बांकि अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय द्वारा प्रषासनिक स्वीकृती भी नहीं दी गयी है। आपके द्वारा झूठा आरोप तथा झूठा प्रतिवेदन देकर सच को दबानेकी कोषिष करने के साथ प्रषासन को गुमराह किया गया है। इससे स्पष्ट है कि आपके द्वारा गलत तरीके से मो03,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 की निकासी कर सरकारी राषि गबन कर लिया गया है। जिसके विरुद्ध जिला पदाधिकारी, सुपौल के ज्ञापांक 2780-2/गो0 दिनांक 05.11.2007 के आलोक में इस कार्यालय के पत्रांक 30-2 दिनांक 09.01.2008 के द्वारा स्थानीय थाना, किषनपुर में सरकारी राषि गबन करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है जिसका थाना कांड संख्या 08/2008 है। आरोप संख्याः3आरोप संख्याः3आरोप संख्याः3आरोप संख्याः3 आपने षिक्षक नियुक्ति में भी धांधली बरती है। प्राथमिकी विद्यालय, गंगापुर में एक रिक्त पद पर सीमा कुमारी की नियुक्ति की गई। पुनः अपने हस्ताक्षर से प्रीति कुमारी को बिना नियुक्ति समिति की सहमति तथा सीमा कुमारी की नियुक्ति को रद्द किये बिना नियुक्ति पत्र स्वयं के हस्ताक्षर से देकर विद्यालय में योगदान दिया गया। जिससे जिला पदाधिकारी के पत्रांक 730-2/गो0 दिनांक 15.03.2008 के द्वारा रद्द किया गया। आपके द्वारा सरकारी नियमों की धज्जी उड़ायी गयी। अतः आपको बिना अनुमति के मुख्यालय क्षेत्र से बाहर रहने, जालसाजी कर मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 की बैंक से निकासी कर गबन करने तथा नियम के विरुद्ध षिक्षक नियोजन करने के आरोप में क्यों नहीं आपकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाए। संचालन पदाधिकारी की नियुक्तिसंचालन पदाधिकारी की नियुक्तिसंचालन पदाधिकारी की नियुक्तिसंचालन पदाधिकारी की नियुक्ति उक्त प्रपत्र-''क'' के आलोक में इस कार्यालय के आदेष ज्ञापांक 291-2/जि0पं0, दिनांक 06.08.2009 के द्वारा श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सचिव, सरायगढ़-भपटियाही के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु उप विकास आयुक्त, सुपौल कोे संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। उप विकास आयुक्त, सुपौल द्वारा अपने ज्ञापांक 1859/अभि0 दिनांक 13.10.2009 द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही के माध्यम से श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सेवक को प्रपत्र-''क'' की एक प्रति भेजते हुए प्रपत्र-''क'' में गठित आरोप पर अपना स्पष्टीकरण पत्र प्राप्ति के सात दिनों के अंदर समर्पित करने का निदेष दिया गया। स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने के कारण उप विकास आयुक्त, सुपौल द्वारा अपने ज्ञापांक 1763/अभि0 दिनांक 30.11.2010 द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरागयढ़-भपटियाही के माध्यम से श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सेवक को स्मार पत्र देते हुए पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अन्दर अपना स्पष्टीकरण करने का निदेष दिया गया। स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने पर पुनः उप विकास आयुक्त, सुपौल के द्वारा अपने ज्ञापांक 597/अभि0 दिनांक 11.04.2011 द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही के माध्यम से उनके स्थायी पता यथा हटिया गाछी, वार्ड नं0-34, जिला सहरसा के पता से स्मार पत्र भेजते हुए निदेष दिया गया कि दिनांक 05.05.2011 तक अपना स्पष्टीकरण उपलब्ध कराना सुनिष्चित करें अन्यथा यह समझा जाएगा कि आरोप पत्र में गठित आरोप पर आपको कुछ नहीं कहना है एवं एकतरफा निर्णय ले लिया जाएगा।6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 19 जुलाई 2012 श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सचिव द्वारा दिनांक 14.05.2011 को प्रपत्र-''क'' की प्रति प्राप्त किया गया । श्री दिलीप चौधरी ने उप विकास आयुक्त,सुपौल-सह-संचालन पदाधिकारी को उनके ज्ञापांक 597/अभि0 दिनांक 11.04.2011 के संदर्भ में दिनांक 15.05.2011 को समर्पित स्पष्टीकरण में अंकित किया कि निम्नांकित लेख्य साक्ष्यों की अभिप्रमाणित छायाप्रतियाँं नियमानुसार प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही द्वारा उपलब्ध नहीं करायी गयी है। जिससे कि मैं अपना बचाव पक्ष प्रस्तुतकर सकूँः-

1. अनाधिकार रूप से अनुपस्थित रहने संबंधी ठोस साक्ष्य, उपस्थिति पंजी एवं अनुपस्थिति विवरणी की छायाप्रति। 2. सरकारी राषि गबन से संबंधित चेक संयुक्त या फर्जी हस्ताक्षर से निकासी हुई है का प्रमाण-पत्र की छायाप्रति।

3. षिक्षक नियोजन में गड़बड़ी के सम्बन्ध मेंः

(क) पंचायत षिक्षक नियोजन नियमावाली, 2006 की छायाप्रति, (ख) मेघा सूची की छायाप्रति, (ग) नियोजन समिति की बैठक पंजी की छायाप्रति, (घ) अत्यधिक मेघा अंक वाले पुरूष/महिला अभ्यर्थियों की नियुक्ति अनारिक्षत कोटि में होती है या नहीं से संंबंधित प्रमाण-पत्र की छायाप्रति, (ड.) नियोजित पंचायत षिक्षिका प्रीति कुमारी की निजी संचिका की छायाप्रति, (च) विज्ञ जिला पदाधिकारी, सुपौल द्वारा प्रीति कुमारी का नियोजन रद्द संबंधी आदेष की छायाप्रति, (छ) प्रीति कुमारी के स्थान पर नियोजन पंचायत षिक्षक (पुरूष) की निजी संचिका की छायाप्रति। स्पष्टीकरण में यह भी अंकित किया गया है कि इन्हीं कथित आरोपों को ही आधार बनाकर किषनपुर थाना में मेरे विरूद्व प्राथमिकी दर्ज की गर्ई जिसका थाना कांड 8/2008 है जिसमें दिनांक 23.07.2008 से 18.06.2009 तक हाजती बंदी के रूप में मंडल कारा, सुपौल में बिताना पड़ा और 18.6.2009 के अपराह्‌न में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा जमानत पर रिहाई किया गया। साथ ही मुख्य सचिव, बिहार द्वारा निर्गत परिपत्र संख्या 10158(का0) दिनांक 23.8.63, बिहार पर्षदीय प्रकीर्ण नियमावली के नियम, 167 (जी), सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 7021/91 दिनांक 05.05.93 एवं सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या- 16335/09 में दिए गए निदेष के आलोक में निलंबन से मुक्त करने हेतु अनुषंसा एवं याचित कागजातों की छायाप्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया ताकि मैं अपना बचाव पक्ष पेष कर सकूं। पुनः श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सचिव ने दिनांक 16.05.2011 को उप विकास आयुक्त,सुपौल सह संचालन पदाधिकारी को समर्पित आवेदन में अंकित किया किः

1. भवदीय ज्ञापांक 597/अभि0 दिनांक 11.04.2011 के संदर्भ में दिनांक 05.05.2011 को मेरे द्वारा लेख्य साक्ष्यों की छायाप्रति की याचना हेतु अनुरोध किया गया था जिसमें से क्रमांक 2,3 (ii)(iii) ही कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराया गया है, शेष याचित कागजातों की छायाप्रति अनुलपब्धा के कारण आज दिनांक 16.05.2011 को श्रीमान्‌ के समक्ष बचाव पक्ष पेष करने में असर्थ हूँ।

2. ठीक इन्हीं कथित आरोपों से संबंधित मेरे विरुद्ध किषनपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी जो माननीय न्यायालय, सुपौल में निष्पादन हेतु लंबित है।

3. इस तरह के मामले में राज्य सरकार के मुख्य सचिव द्वारा निर्गत परिपत्र संख्या 10158 (का0) दिनांक 23.08. 63 बि0प0 प्रकीर्ण नियमावली के नियम 167 (बी) एवं सी0डब्लू0जे0सी0 7021/91 दिनांक 05.05.93 में प्रावधान है कि अगर गंभीर आरोप पर फौजदारी मुकदमा दायर किया गया है तो उस आरोप में विभागीय कार्यवाही को फौजदारी मुकदमा के निष्पादन तक स्थगित रखी जाएगी।

उपरोक्त परिपत्र के आलोक में न्यायिक दृष्टिकोण से विभागीय कार्यवाही स्थगित करने का अनुरोध किया गया। उप विकास आयुक्त, सुपौल द्वारा अपने पत्रांक 948/अभि0 दिनांक 11.07.2011 के द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही को श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सचिव पर लगाए गए आरोप की जाँच हेतु निम्नलिखित मूल कागजात के साथ दिनांक 12.07.2011 को 11.00 बजे पूर्वाह्‌न में उनके कार्यालय वेष्म्‌ में उपस्थित होने का निदेष दिया गयाः- 1. अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के संबंध में प्रखंड की पंजी, 2. सरकारी राषि गबन करने के संबंध में मूल साक्ष्य, 3. षिक्षक नियुक्ति में गडबड़ी करने के संबंध में मूल साक्ष्य। विभागीय कार्यवाही का संचालन पूर्ण कने के उपरान्त उप विकास आयुक्त, सुपौल सह संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 1112/अभि0 दिनांक 02.08.2011 द्वारा जाँच प्रतिवेदन मूल अभिलेख के साथ उपलब्ध कराया गया । अभिेलख के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी द्वारा भिन्न-भिन्न तिथियों का निर्धारण कर आरोपी एवं उपस्थापन पदाधिकारी को उपस्थित होकर स्पष्टीकरण एवं साक्ष्य देने हेतु सूचना निर्गत की गयी। अभिलेख में उपलब्ध आरोपी श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सचिव द्वारा प्रपत्र-''क'' के विरुद्ध संचालन पदाधिकारी को समर्पित कारण पृच्छा सहित एवं उसपर संचालन पदाधिकारी के मन्तव्य का भी अवलोकन किया जो निम्न प्रकार हैः-7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 19 जुलाई 2012 आरोप संख्याः1आरोप संख्याः1आरोप संख्याः1आरोप संख्याः1 आप बराबर बिना सूचना एवं ...................................................................... जो सेवा संहिता के विरुद्ध है। आरोप संख्याः1 का जवाबआरोप संख्याः1 का जवाबआरोप संख्याः1 का जवाबआरोप संख्याः1 का जवाब प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़ भपटियाही द्वारा पूछे गए स्पष्टीकरण के क्रम में श्री दिलीप चौधरी ने दिनांक 25.09.2007 को अपने स्पष्टीकरण में लिखा है कि उन्होंने दिनांक 23.07.07 से 28.07.07 तक विधिवत्‌ अवकाष का आवेदन देकर और आकस्मिक अवकाष स्वीकृत कराकर मुख्यालय से आया था। दिनांक 29.07.07 एवं 30.07.07 को अवकाष घोषित था। सहरसा के वरीय चिकित्सक डा0 गोपाल शराण सिंह की सलाह पर उन्होंने दिनांक 01.08.2007 से दो माह का अर्जित अवकाष के लिए विधिवत्‌ आवेदन समर्पित किया। प्रखंड विकास पदाधिकारी का प्रतिवेदनप्रखंड विकास पदाधिकारी का प्रतिवेदनप्रखंड विकास पदाधिकारी का प्रतिवेदनप्रखंड विकास पदाधिकारी का प्रतिवेदन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़ भपटियाही द्वारा अपने पत्रांक 986-2 दिनांक 17.10.07 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि दिनांक 23.07.2007 से दिनांक 27.07.2007 तक अवकाष स्वीकृत किया गया था एवं दिनांक 01.08.07 से 30.08.07 तक अवकाष हेतु आवेदन भेजा गया था। संचालन पदाधिकारी का मन्तव्यसंचालन पदाधिकारी का मन्तव्यसंचालन पदाधिकारी का मन्तव्यसंचालन पदाधिकारी का मन्तव्य श्री दिलीप चौधरी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़-भपटियाही द्वारा दिए गए प्रतिवेदन के आधार पर अनुपस्थिति संबंधी आरोप की पुष्टि नहीं होती है। आरोप संख्याः2आरोप संख्याः2आरोप संख्याः2आरोप संख्याः2 ग्राम पंचायत, सरायगढ़ के र्वामान मुखिया ने .............................. जिसका थाना कांड संख्या 08/2008 है। आरोप संख्याः 2 का जवाबआरोप संख्याः 2 का जवाबआरोप संख्याः 2 का जवाबआरोप संख्याः 2 का जवाब प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ भपटियाही द्वारा पूछे गए स्पष्टीकरण के क्रम में श्री दिलीप चौधरी द्वारा दिनांक 25.09.07 को अपने स्पष्टीकरण में वर्णित किया गया है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत योजना संख्या 12/06-07 में कनीय अभियंता द्वारा किए गए मापी एवं सहायक अभियंता द्वारा अंतिम जाँच के बाद मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 भुगतान हेतु लिया गया है। प्रखंड विकास पदाधिकारी का प्रतिवेदनप्रखंड विकास पदाधिकारी का प्रतिवेदनप्रखंड विकास पदाधिकारी का प्रतिवेदनप्रखंड विकास पदाधिकारी का प्रतिवेदन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़-भपटियाही द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत अभिलेखों की जाँच के क्रम में विाीय वर्ष 2006-07 में मात्र 11 (ग्यारह) योजना की प्रषासनिक स्वीकृति दी गयी थी। योजना संख्या 12/2006-07 की प्रषासनिक स्वीकृति नहीं मिलने के बाद भी दिलीप चौधरी द्वारा योजना सख्ंया 12/06-07 में मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रु0 की निकासी कर ली गयी है। संचालन पदाधिकारी का मन्तव्यसंचालन पदाधिकारी का मन्तव्यसंचालन पदाधिकारी का मन्तव्यसंचालन पदाधिकारी का मन्तव्य प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही द्वारा जब योजना संख्या 12/06-07 की प्रषासनिक स्वीकृति नहीं दी गयी तो इस योजना हेतु राषि की निकासी करना स्पष्ट रूप से गबन है। साक्ष्यों एवं अभिलेख के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि पंचायत सचिव द्वारा मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 बैंक से निकासी की गयी, जिसके व्यय का जायज ब्यौरा पंचायत सचिव नहीं दे पाए है। संबंधित पंचायत के मुखिया द्वारा भी लिखित रूप में प्रतिवेदित किया गया है कि पंचायत सचिव द्वारा उनके संयुक्त हस्ताक्षर से राषि की निकासी की गई जिसे किसी भी सरकारी कार्य पर व्यय नहीं किया गया। संबंधित मुखिया इस अवैध निकासी एवं गबन के लिए किस हद तक दोषी है, यह अगल जाँच का मुद्दा है, परन्तु उपरोक्त तथ्य से यह स्पष्ट है कि पंचायत सचिव श्री दिलीप चौधरी द्वारा मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 सरकारी खाते से निकासी कर उनके द्वारा गबन कर लिया गया है। संचालन पदाधिकारी का निष्कर्षसंचालन पदाधिकारी का निष्कर्षसंचालन पदाधिकारी का निष्कर्षसंचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष राषि गबन संबंधी आरोप की पुष्टि होती है। आरोप संख्याः3आरोप संख्याः3आरोप संख्याः3आरोप संख्याः3 आपने षिक्षक नियुक्ति ................................................. आपकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाए। आरोप संख्याः3 का जवाबआरोप संख्याः3 का जवाबआरोप संख्याः3 का जवाबआरोप संख्याः3 का जवाब आरोपी द्वारा कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है बल्कि टाल-मटोल जवाब दिया गया है। संचालन पदाधिकारी का मन्तव्यसंचालन पदाधिकारी का मन्तव्यसंचालन पदाधिकारी का मन्तव्यसंचालन पदाधिकारी का मन्तव्य अभिलेख की जाँच के क्रम में देखा गया की दिनांक 28.02.07 को सम्पन्न कॉन्सिलिंग में प्रीति कुमारी द्वारा भाग नहीं लिया गया है। पंचायत सेवक द्वारा बैठक के प्रस्ताव से अलग प्रीति कुमारी को नियोजन पत्र निर्गत किया गया है, जो नियम के विरुद्ध है। संचालन पदाधिकारी का निष्कर्षसंचालन पदाधिकारी का निष्कर्षसंचालन पदाधिकारी का निष्कर्षसंचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष षिक्षक नियोजन संबंधी आरोप की पुष्टि होती है।8 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 19 जुलाई 2012 जिला पदाधिकारी को द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करना जिला पदाधिकारी को द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करना जिला पदाधिकारी को द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करना जिला पदाधिकारी को द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करना उप विकास आयुक्त, सुपौल सह संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं उनके मन्तव्य के आलोक में इस कार्यालय के ज्ञापांक 1115-2/जि0पं0 दिनांक 05.09.2011 द्वारा संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन संलग्न करते हुए श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सचिव प्रखंड सरायगढ-भपटियाही, मुख्यालय छातापुर प्रखंड को अपना स्पष्टीकरण 10 (दस) दिनों के अंदर प्रस्तुत करने का निदेष देते हुए निदेषित किया गया कि स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने की स्थिति में समझा जाएगा कि आपको इस संबंध में कुछ नहीं कहना है और आपके विरुद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के तहत्‌ वृहत्‌ दण्ड अधिरोपित कर दिया जाएगा। तत्‌आलोक में आरोपी श्री दिलीप चौधरी द्वारा दिनांक 22.09.2011 को द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया, जिसे कार्यालय द्वारा काफी विलंब से संचिका संख्या 4-81/09-12 में दिनांक 17.02.2012 को उपस्थापित किया गया जिस पर अधोहस्ताक्षरी द्वारा सुनवाई के लिए दिनांक 28.02.2012 को आरोपी को उपस्थित होने का आदेष दिया गया। तत्‌आलोक में जिला पंचायत राज पदाधिकारी, सुपौल द्वारा अपने ज्ञापांक 146-/जि0पं0 दिनांक 18.02.2012 द्वारा आरोपी श्री दिलीप चौधरी को सूचना निर्गत कर दिनांक 28.02.2012 को 11.00 बजे पूर्वाह्‌न जिला पदाधिकारी, सुपौल के कार्यालय वेष्म्‌ में उनके समक्ष अपनी उपस्थिति सुनिष्चित करने का निदेष दिया गया। सुनवाई की निर्धारित तिथि 28.02.2012 को आरोपी श्री चौधरी अधोहस्ताक्षरी के समक्ष स्वयं उपस्थित हुए। परन्तु इनके द्वारा दिनांक 22.09.2011 को अधोहस्ताक्षरी को समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के अतिरिक्त लगाए गए आरोपों के काट में कोई स्वीकारणीय तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया। द्वितीयकारण पृच्छा के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि उप विकास आयुक्त, सुपौल सह संचालन पदाधिकारी के समक्ष विभागीय कार्यवाही के दौरान समर्पित स्पष्टीकरण एवं अधोहस्ताक्षरी को समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के अतिरिक्त कोई नया स्वीकारणीय तथ्य नहीं रखा गया है।

दिनांक 28दिनांक 28दिनांक 28दिनांक 28....02020202....2012 को सुनवाई के दौरान श्री चौधरी ने मौखिक रूप से अधोहस्ताक्षरी को बताया 2012 को सुनवाई के दौरान श्री चौधरी ने मौखिक रूप से अधोहस्ताक्षरी को बताया 2012 को सुनवाई के दौरान श्री चौधरी ने मौखिक रूप से अधोहस्ताक्षरी को बताया 2012 को सुनवाई के दौरान श्री चौधरी ने मौखिक रूप से अधोहस्ताक्षरी को बताया 0 सहरसा में चिकित्सक से अपने इलाज कराने कि गबनित राषि मो0 3,05,00005,00005,00005,000....00 (तीन लाख पाँच हजार) 00 (तीन लाख पाँच हजार) 00 (तीन लाख पाँच हजार) 00 (तीन लाख पाँच हजार) रुरुरुरु0 सहरसा में चिकित्सक से अपने इलाज कराने कि गबनित राषि मो0 3, 0 सहरसा में चिकित्सक से अपने इलाज कराने 0 सहरसा में चिकित्सक से अपने इलाज कराने कि गबनित राषि मो0 3, कि गबनित राषि मो0 3, में खर्च हो गए।में खर्च हो गए।में खर्च हो गए।में खर्च हो गए। इस पर अधोहस्ताक्षरी द्वारा उनसे पृच्छा की गई कि आपकी नियुक्ति सरकारी कोष के सदुपयोग के लिए की गई है या गबन के लिए, जिसका कोई जवाब उन्होंने नहीं दिया। इस प्रकार श्री चौधरी द्वारा उक्त राषि गबन कर लेने की पुष्टि की गई। फलस्वरूप द्वितीय कारण पृच्छा स्वीकार योग्य नहीं है, अतः उसे अस्वीकृत किया जाता है।

आदतन गबनआदतन गबनआदतन गबनआदतन गबन का आरोपीका आरोपीका आरोपीका आरोपी श्री दिलीप चौधरी, पंचायत सचिव द्वारा सरकारी राषि के गबन का पुराना इतिहास रहा है। उदाहरणस्वरूप, श्री दिलीप चौधरी, पंचायतश्री दिलीप चौधरी, पंचायतश्री दिलीप चौधरी, पंचायतश्री दिलीप चौधरी, पंचायत सचिव, सरायगढ़-भपटियाही के विसचिव, सरायगढ़-भपटियाही के विसचिव, सरायगढ़-भपटियाही के विसचिव, सरायगढ़-भपटियाही के विरुद्धरुद्धरुद्धरुद्ध पूर्व में मो0 49,47,700पूर्व में मो0 49,47,700पूर्व में मो0 49,47,700पूर्व में मो0 49,47,700....00( उन00( उन00( उन00( उनचास लाख सैतालीस चास लाख सैतालीस चास लाख सैतालीस चास लाख सैतालीस संख्या 07/2001 दर्ज किया गया था जिसमें वे जेल भी गए थे। हजार सात सौ) हजार सात सौ) हजार सात सौ) हजार सात सौ) रुरुरुरु0 गबन के आरोप में थाना कांड0 गबन के आरोप में थाना कांड0 गबन के आरोप में थाना कांड0 गबन के आरोप में थाना कांड संख्या 07/2001 दर्ज किया गया था जिसमें वे जेल भी गए थे। संख्या 07/2001 दर्ज किया गया था जिसमें वे जेल भी गए थे। संख्या 07/2001 दर्ज किया गया था जिसमें वे जेल भी गए थे। कालान्तर मे माननीय उच्च न्यायालय के न्यायादेष के आलोक में उन्हें कार्यालय आदेष ज्ञापांक 1373-2/पंचायत, सुपौल, दिनांक 05.12.2006 द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया था। इस प्रकार, पुनः अल्प अवधि में श्री चौधरी द्वारा सरकारी राषि मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रू0 का गबन करना इनके आदतन सरकारी राषि के गबन करते रहने के चरित्र को दर्षाता है। आरोआरोआरोआरोपी द्वारा गबनित राषि को स्वीकारपी द्वारा गबनित राषि को स्वीकारपी द्वारा गबनित राषि को स्वीकारपी द्वारा गबनित राषि को स्वीकारननननाााा प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही द्वारा जिला पदाधिकारी, सुपौल के ज्ञापांक 2780-2/गो0 दिनांक 05.11.2007 द्वारा दिए गए आदेष के बाद भी श्री चौधरी को एक मौका राषि जमा करने हेतु एक सप्ताह का समय देने हेतु निबंधित डाक से पत्र भेजा गया। बकौल प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़-भपटियाही पत्र के जवाब में श्री चौधरी ने अभ्यावेदन भेजा कि मैं दिनांक 14.12.2007 तक पूरी राषि बैंक में जमा कर रसीद के साथ श्रीमान्‌ (प्रखंड विकास पदाधिकारी) के कार्यालय में उपस्थित हो रहा हूँ। लेकिन दिनांक 14.12.2007 के बाद भी श्री चौधरी द्वारा राषि जमा करने संबंधी कोई सूचना नहीं दी गई। इस प्रकार, आरोपी श्रइस प्रकार, आरोपी श्रइस प्रकार, आरोपी श्रइस प्रकार, आरोपी श्री चौधरी द्वारा उक्त राषि मो0 3, ी चौधरी द्वारा उक्त राषि मो0 3,05,00005,00005,00005,000.... ी चौधरी द्वारा उक्त राषि मो0 3, ी चौधरी द्वारा उक्त राषि मो0 3, 0 को स्वयं गबन किए जाने की बात स्वीकार कर ली गई है। 00 (तीन लाख पाँच हजार) 00 (तीन लाख पाँच हजार) 00 (तीन लाख पाँच हजार) 00 (तीन लाख पाँच हजार) रुरुरुरु0 को स्वयं गबन किए जाने की बात स्वीकार कर ली गई है। 0 को स्वयं गबन किए जाने की बात स्वीकार कर ली गई है। 0 को स्वयं गबन किए जाने की बात स्वीकार कर ली गई है। समीक्षासमीक्षासमीक्षासमीक्षा संचालन पदाधिकारी के द्वारा विभागीय कार्यवाही का संचालन पूर्ण करने के उपरान्त प्रेषित जाँच प्रतिवेदन एवं साक्ष्यों तथा द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरान्त आरोपी श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सचिव के विरुद्ध प्रपत्र-''क'' के गंभीर दोनों आरोप यथा आरोप संख्या-2 एवं आरोप संख्या-3 के आरोप प्रमाणित होते हैं। आरोप के विरुद्ध आरोपी द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण/कारण पृच्छा तथ्यहीन एवं वास्तविकता से परे हैै। आरोपी के द्वारा स्पष्टीकरण/ पृच्छा के साथ कोई साक्ष्य नहीं देना आरोपों की पुष्टि होती है। बिना प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़-भपटियाही के प्रषासनिक स्वीकृति के आरोपी श्री चौधरी द्वारा काल्पनिक योजना संख्या 12/2006-07 के नाम पर मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रु0 सरकारी राषि का गबन करना एवं पूर्व में भी मो0 49,47,700.00( उनचास लाख सैतालीस हजार सात सौ) रु0 गबन के आरोप में इनके विरुद्ध दर्ज थाना कांड संख्या 07/2001 में जेल जाना, अपने आप में श्री चौधरी के अनुषासहीनता, र्काव्यहीनता एवं बार-बार सरकारी राषि का गबन कर सरकार एवं प्रषासन के साथ धोखाधड़ी को दर्षाता है। आरोपी श्री चौधरी द्वारा उक्त राषि मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रु0 के स्वयं द्वारा गबन किए जाने की प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित स्वीकारोक्ति के बावजूद स्वयं को9 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 19 जुलाई 2012 बचाने के लिए सही तथ्यों को छुपाकर मनगढंं़त एवं तथ्य से परे स्पष्टीकरण/कारण पृच्छा समर्पित किया गया है जो किसी भी दृष्टिकोण से युक्तिसंगत नहीं है। आरोपी द्वारा समर्पित साक्ष्यरहित स्पष्टीकरण/कारण पृच्छा अपने आप में आरोप की पुष्टि करता है। श्री चौधरी के कुकृत्य से सरकारी राजस्व को गंभीर क्षति पहुँची है। निष्कर्षनिष्कर्षनिष्कर्षनिष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्य एवं कागजातों,संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन तथा उनके मन्तव्य और आरोपी के स्पष्टीकरण/ द्वितीय कारण पृच्छा के जाँचोपरान्त श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सचिव के विरुद्ध सरकारी राषि के गबन एवं नियम विरुद्ध षिक्षक नियोजन का आरोप सिद्व होते हैं। यह आचरण सरकारी कार्य एवं कार्यालय की मर्यादाओं के प्रति घोर लापरवाही, अनुषासनहीनता, स्वेच्छाचारिता, र्काव्यहीनता एवं धोखाधड़ी का परिचायक है। इनके द्वारा बार-बार सरकारी राषि गबन के कुकृत्य से सरकारी राजस्व को क्षति पहुँची है। इस प्रकार, श्री चौधरी के विरुद्ध आरोप अत्यन्त ही गंभीर श्रेणी में आता है जो सरकारी सेवा से बर्खास्त किये जाने के लिए यथेष्ट है एवं आरोपी श्री चौधरी निलंबित पंचायत सचिव को बर्खास्त करने के सिवा और कोई विकल्प बचा नहीं है। अतः उपर्युक्त आरोपों के प्रमाणित हो जाने के कारण बिहार बोर्ड प्रकीर्ण नियमावली के नियम 165 एवं 166 तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (x) में विनिर्दिष्ट प्रावधानों के आलोक में मैं कुमार रवि, भा0प्र0से0, समार्हाा-सह-जिला पदाधिकारी, सुपौल श्री दिलीप चौधरी, निलंबित पंचायत सचिव, प्रखंड कार्यालय, सरायगढ़-भपटियाही सम्प्रति निलंबन मुख्यालय प्रखंड कार्यालय-छातापुर को आदेष निर्गत की तिथि से सरकारी सेवा से बर्खास्त बर्खास्त बर्खास्त बर्खास्त (Dismiss) करता हूँ। प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ-भपटियाही को आदेष दिया जाता है कि श्री दिलीप चौधरी द्वारा गबन की गई वास्तविक राषि मो0 3,05,000.00 (तीन लाख पाँच हजार) रु0 की बैंक से निकासी की गयी तिथि से नियमानुसार सूद की राषि की गणना कर सूद सहित वसूली हेतु आवष्यक कार्रवाई करना सुनिष्चित करेंगे तथा तत्संबंधी प्रतिवेदन अधोहस्ताक्षरी के अवलोकनार्थ भेजना सुनिष्चित करेंगे। मेरे हस्ताक्षर एवं कार्यालय मुहर से आज दिनांक 16161616....04040404....2012201220122012 को निर्गत किया गया। श्री दिलीप चौधरी से संबंधित विवरण निम्न प्रकार हैः-

1. सरकारी सेवक का नाम ः श्री दिलीप चौधरी 2. पिता का नाम ः स्व0 राम किसुन चौधरी 3. स्थायी पता ः सहरसा वस्ती वार्ड नं0-11, जिला सहरसा 4. जन्म तिथि ः 10.12.1966 5. पदनाम ः पंचायत सचिव 6. कार्यालय का नाम ः प्रखंड कार्यालय, सरायगढ़-भपटियाही 7. नियुक्ति तिथि ः 23.01.1986

आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, समार्हाा-सह-जिलापदाधिकारी, सुपौल।

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अधी0क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु5ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 346-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 19 July 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-07-19.346/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-07-19.346.