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ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââz=ásìâ=^=2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अगःत 2012 बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) विधेयक, 2012 [foŒlŒfoŒ&08@2012] बिहार आकस्मिकता निधि अधिनियम, 1950 (बिहार अधिनियम 19, 1950) का संशोधन करने के लिए विधेयक । प्रस्तावनाः- चूँकि, किसानाें को उनकी उपज की उचित मूल्य दिलाने के लिए पैक्स के माध्यम से गेहूँ/धान की अधिप्राप्ति की जानी है, और चूँकि, राज्य में अनियमित मौनसून एवं भू-जलस्तर गिरने के कारण कृषि पर कभी-कभी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा पेयजल की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है, कुछ क्षेत्राें में बाढ़ आने की संभावना रहती है जिसके कारण राहत एवं पुनर्वास के उपायाें को आपात और व्यापक पैमाने पर किया जाना होता है । साथ ही साथ कई अन्य आवश्यक कार्याें को तुरन्त निष्पादित करने की आवश्यकता रहती है, और आकस्मिकता निधि की वर्तमान स्थायी काय 350 करोड़ रूपए अपर्याप्त हो सकती है;
इसलिए अब, भारत गणराज्य के तिरसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :- 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ ।- (1) यह अधिनियम बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) अधिनियम, 2012 कहा जा सकेगा।
(2) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा। 2. बिहार आकस्मिकता अधिनियम, 1950 (बिहार अधिनियम 19, 1950) की धारा-4 के बाद एक नई धारा-4 'क' का अंतःस्थापन । - बिहार आकस्मिकता निधि अधिनियम, 1950 (बिहार अधिनियम 19, 1950) की धारा-4 के बाद निम्नलिखित नई धारा 4 'क' अंतःस्थापित की जाएगी, यथाः- ''4 'क' अस्थायी काय- बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) अधिनियम, 2012 के प्रभावी होने की तिथि से प्रारंभ होकर प्रत्येक वर्ष 30 मार्च, तक के लिए आकस्मिकता निधि के स्थायी काय में 350 करोड़ (तीन सौ पचास करोड़) रूपए से अधिक वृद्धि करने की यदि अपेक्षा हो तो उसे मंत्रिपरिषद् द्वारा अस्थायी रूप से बढ़ाया जा सकेगा जो उस वर्ष के वित्तीय वर्ष के 30 मार्च तक, व्यय बजट का अधिकतम 3 (तीन) प्रतिशत तक होगा। उस राशि में से एक तिहाई राशि का उपयोग केवल प्राकृतिक आपदाआें के कारण राहत एवं पुनर्वास के उपायाें के लिए ही किया जा सकेगा ।'' 3. निरसन एवं व्यावृति (1) बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) अध्यादेश, 2012 (बिहार अध्यादेश संख्या-1, 2012) इसके द्वारा निरसित किया जाता है । (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश द्वारा या के अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में किया गया कोई कार्य या की गयी कोई कार्रवाई इस अधिनियम द्वारा या के अधीन प्रदत्त शक्तियाें के प्रयोग में किया गया या की गयी समझी जाएगी, मानो यह अधिनियम उस दिन प्रवृत था जिस दिन ऐसा कार्य किया गया था या ऐसी कार्रवाई की गई थी ।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अगःत 2012 वित्तीय संलेख बिहार आकस्मिकता निधि का स्थायी काय 350(तीन सौ पचास) करोड़ रुपये का है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में विधान मंडल के बजट सत्र के उपरांत किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए पैक्स के माध्यम से गेहूँ की अधिप्राप्ति का निर्णय हुआ जिसके लिए बजट प्रावधान नहीं किया गया था । इस कारण यह आवश्यक हुआ कि आकस्मिकता निधि में आवश्यक संशोधन अध्यादेश के प्रख्यापित कर किया जाय । महामहिम राज्यपाल, बिहार द्वारा बिहार आकस्मिकता निधि(संशोधन) अध्यादेश, 2012 दिनांक-23 मई 2012 को प्रख्यापित किया गया। वित्तीय वर्ष 2007-08 से 2011-12 तक प्रत्येक वर्ष स्थायी काय को अस्थायी रूप से बढ़ाया गया था जिसमें वर्ष 2007-08 में 1500 (एक हजार पांच सौ) करोड़ रूपये, 2008-09 में 2500 (देा हजार पांच सौ) करेाड़ रूपये, 2009-10 में 1500 (एक हजार पांच सौ) करोड़ रूपये, 2010-11 में 1500 (एक हजार पांच सौ) करोड़ रूपये एवं 2011-12 में 1150 (एक हजार एक सौ पचास) करोड़ रूपये किया गया था। इस प्रकार प्रत्येक वर्ष बिहार आकस्मिकता निधि अधिनियम में संशोधन करने की आवश्कता पड़ रही है। राज्य में अनियमित मौनसून की वजह से सूखा एवं भू-जलस्तर गिरने के कारण कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने एवं पेयजल की समस्या उत्पन्न होने तथा कुछ क्षेत्रों में बाढ़ आने के कारण बड़े पैमाने पर राहत एवं पुनर्वास के उपायों को आपात और ब्यापक पैमाने पर करना पड़ता रहा है। इसके अतिरिक्त विकास कार्याें में आकस्मिक प्रकृति के खर्चों को भी पूरा किए जाने हेतु अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होती है। वर्तमान में बिहार आकस्मिकता निधि का 350 करोड़ रूपये का स्थायी काय अपर्याप्त साबित हो रहा है। बार-बार अधिनियम को संशोधन नहीं करना पड़े, इस आलोक में बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) विधेयक 2012 द्वारा एक धारा 4क जोड़ कर प्रत्येक वर्ष के लिए एक अस्थायी काय का प्रावधान कराये जाने की आवश्यकता है, जिसे मंत्रिपरिषद् के अनुमोदन से उस वर्ष के व्यय बजट के 3 (तीन) प्रतिशत की अधिसीमा तक बढ़ाया जा सकेगा । इस बढ़ी हुई कुल राशि की एक तिहाई राशि का उपयोग केवल प्राकृतिक आपदाओं के कारण राहत एवं पुनर्वास के उपायों के लिए किया जाएगा। इसी उद्देश्य से बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) विधेयक, 2012 को अधिनियमित कराना आवश्यक है। अतएव प्रस्ताव है कि बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) विधेयक, 2012 की स्वीकृति दी जाए।
(सुशील कुमार मोदी)
भार साधक सदस्य।
4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अगःत 2012उद्देश्य एवं हेतु बिहार आकस्मिकता निधि का स्थायी काय 350 (तीन सौ पचास) करोड़ रुपये का है। कई आवश्यक कार्यों को तुरंत निष्पादित करने की आवश्यकता रहती है और आकस्मिकता निधि का वर्त्तमान स्थायी काय 350 (तीन सौ पचास) करोड़ रुपये अपर्याप्त हो जाता है । किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए पैक्स के माध्यम से गेहूँ एवं धान की अधिप्राप्ति का निर्णय लिया गया है । राज्य में अनियमित मौनसून की वजह से सूखा एवं भू-जलस्तर गिरने के कारण कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने एवं पेयजल की समस्या उत्पन्न होने तथा कुछ क्षेत्रों में बाढ़ आने के कारण बड़े पैमाने पर राहत एवं पुनर्वास के उपायों को आपात और ब्यापक पैमाने पर किया जाना होता है। इसके अतिरिक्त विकास कार्याें में आकस्मिक प्रकृति के खर्चों को भी पूरा किए जाने हेतु अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होती है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में बिहार आकस्मिकता निधि का 350 करोड़ रुपये का स्थायी काय अपर्याप्त साबित हो रहा था। राशि की उपलब्धता के लिए महामहिम राज्यपाल, बिहार द्वारा बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) अध्यादेश, 2012 भी दिनांक 23 मई 2012 को प्रख्यापित किया गया। आवश्यकतानुसार राशि की उपलब्धता बिहार आकस्मिकता निधि में हो सके इसके लिए अस्थायी काय की नियमित व्यवस्था किया जाना अपेक्षित है जो बजट के आकार के अनुरूप हो । इसलिए अब यह आवश्यक हो गया है कि बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) अधिनियम 1950 की धारा 4 के बाद एक नयी धारा 4क का अंतःस्थापन किया जाय जिसमें अस्थायी काय की व्यवस्था करने की सक्षमता मंत्रिपरिषद् को हो । राशि के शोधन और विनियोग करने हेतु एक नियमित व्यवस्था करना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है तथा इसे अधिनियमित करना ही विधेयक का अभीष्ठ है।
(सुशील कुमार मोदी)
भार साधक सदस्य।
पटनाः दिनांकः 03 अगस्त, 2012
लक्ष्मीकान्त झा, प्रभारी सचिव, बिहार विधान-सभा।
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अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 430-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in