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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 28 August 2012

Published 28 August 2012

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-08-28.434
Languages
English, Hindi

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त्र2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अगःत 2012

बिहार मूल्यवर्द्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2012

[कृप्रक्तकृप्रब्ट,व्डछव्]

बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27,2005) में संशोधन हेतु विधेयक। भारत गणराज्य के तिरसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः- 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।-(1) यह अधिनियम बिहार मूल्यवर्द्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2012 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरत प्रवृत्त होगा। 2. बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-16 में संशोधन।-(1) बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-16 की उप-धारा (1) के प्रथम परंतुक को निम्नांकित से प्रतिस्थापित किया जाता है, यथाः- ''परंतु जब किसी माह के लिए खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) या खंड (घ) या खंड (ङ) के अधीन निवेश कर प्रतिदाय के लिए दावा उसी माह के लिए उत्पादन कर से अधिक होता है, तो ऐसा आधिक्य पश्चातवर्ती माहों के उत्पादन कर के विरूद्ध समायोजन के लिए अग्रणित किया जायेगाः'' (2) बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-16 की उप-धारा (1) के प्रथम परंतुक के उपरांत निम्नलिखित दो नये परंतुक अंतःस्थापित किये जायेंगे, यथा- ''परंतु यह और कि निवेश कर क्रेडिट का कोई आधिक्य उस वर्ष जिसमें वह उद्‌भूत हुआ था की समाप्ति के दो वर्षों के बाद के उत्पादन कर के विरूद्ध समायोजन हेतु अग्रसारित नही किया जायेगा एवं निवेश कर प्रतिदाय की ऐसी राशि जो उक्त अवधि के समाप्ति पर असमायोजित रह जाती है को इस अधिनियम की धारा-68, धारा-69, धारा-69क और धारा-71 के उपबंधों के अधीन रहते हुए व्यवहारी को ऐसे आधिक्य के संबंध में विवरणी दाखिल किये जाने के तीन माह के भीतर प्रतिदाय किया जायेगाः

परंतु और भी कि द्वितीय परन्तुक के अधीन निवेश कर-प्रतिदाय की कोई राशि वित्तीय वर्ष के अंतिम माह के पश्चात्‌ किसी माह के उत्पादन कर से समायोजन हेतु तब तक अग्रसारित नही की जायेगी जब तक दावा करने वाला व्यवसायी विहित की गई सूचना एवं साक्ष्य दाखिल नही करता।'' 3. बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-25 में संशोधन।-(1) बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-25 की उप-धारा (1) के खंड (ङ) के अंत में पूर्णविराम ''।'' को अर्द्धविराम '';'' से प्रतिस्थापित किया जायेगा। (2) इस प्रकार प्रतिस्थापित '';'' के पश्चात्‌ बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-25 की उप-धारा (1) के खंड (ङ) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नया खंड (च) अंतःस्थापित किया जायेगा;- ''(च) विवरणी में निवेश कर प्रतिदाय एवं कटौती के अन्य दावों के समर्थन में विहित की गई सूचना एवं साक्ष्य विहित रीति से दाखिल की गई है।'' (3) बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-25 की उप-धारा (1) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नई उप-धारा (1क) अंतविर्ष्ट किया जायेगा, यथाः- ''(1क) उप-धारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, किसी वित्तीय वर्ष के अंतिम तिमाही की ऐसी हर विवरणी जिसके संबंध में निवेश कर-प्रतिदाय की राशि उत्पादन कर की राशि से अधिक हो, यथाविहित रीति एवं समय से दाखिल किये जाने के तीन माह के भीतर संविक्षित की जायेगी।''3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अगःत 2012

वित्तीय संलेख

वैट प्रणाली के अधीन किसी अवधि में बिक्रय पर संगणित कर (आउटपुट टैक्स) में से उस अवधि में राज्यांतर्गत क्रय पर भुगताये गये कर की राशि (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का सामंजन किए जाने के उपरांत अवशेष राशि ही कर के रूप में भुगतेय होती है। बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 16 के प्रावधानों के अनुरूप यदि किसी अवधि में इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि उस अवधि के कुल आउटपुट टैक्स से कम हो तो अधिकाई राशि परावर्ती अवधि के आउटपुट टैक्स से सामंजन हेतु अग्रसारित की जानी है। दिनांक 31.03.12 के प्रभाव से अधिनियम में किए गए संशोधन के फलस्वरूप ऐसी अधिकाई राशि अगले वित्तीय वर्ष में सामंजन हेतु अग्रसारित नहीं की जा सकती है एवं इस राशि की वापसी की जानी है। इस बंधेज के कारण यह समस्या अनुभूत हुई कि इस राशि के वापसी में काफी समय लगता है एवं लंबे समय तक भंडारित माल पर चुकाये गये कर के रूप में क्रियाशिल पूंजी में वृ़द्धि होती है। अतः यह प्रस्ताव दिया गया कि असामंजित इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि उद्‌भूत होने वाले वर्ष की समाप्ति से दो वर्षों तक अग्रसारित की जा सकेगी ।

परंतु अग्रसारण के कारण नियमित कर भुगतान की प्रक्रिया अवरूद्ध होती है अतएव अग्रसारण की अनुमान्यता प्रदान करने के पूर्व यह सुनिश्चित होना आवश्यक है कि इस मद्‌ में किया गया दावा तथ्यों पर आधारित एवं साक्ष्यों से समर्थित है।

इस संदर्भ में अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (1) के प्रथम परंतुक में इनपुट टैक्स क्रेडिट के अग्रसारण के संंबंध में सम्प्रति विद्यमान वित्तीय वर्ष की समय-सीमा को समाप्त करते हुए इस आशय का संशोधन किया जाय कि ऐसी राशि अग्रसारण हेतु उपलब्ध होगी। इसके साथ ही, उक्त संशोधित प्रथम परंतुक के उपरांत दो नये परंतुक अंतःस्थापित किये जाने का प्रस्ताव है कि असामंजित क्रेडिट को उद्‌भूत होने वाले वर्ष की समाप्ति से दो वर्षों तक अग्रसारित की जा सकेगी। पुनः यदि किसी वित्तीय वर्ष के समापन के पश्चात्‌ इनपुट टैक्स क्रेडिट का अग्रसारण किया जाय तो इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे के समर्थन में यथाविहित साक्ष्य एवं सूचनाएँ समर्पित करना अपेक्षित होगा। साथ ही, अधिनियम की धारा 25 (जिसके अधीन विवरणियों के संविक्षा का प्रावधन है) में इस आशय के संशोधन का प्रस्ताव है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट एवं कटौती के अन्य दावों के समर्थन में यथाविहित साक्ष्य एवं सूचनाएँ दावा करने वाले व्यवसायी द्वारा समर्पित की जानी होंगी एवं अग्रसारण से संबंधित सभी विवरणियों की संविक्षा दाखिल होने के तीन माहों के भीतर कर ली जाय ताकि ऐसे दावों की निश्चित समय-सीमा के अधीन निर्धारित माप-दंडों के आधार पर जाँच की जा सके।

विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है ।

(सुशील कुमार मोदी) भार साधक सदस्य ।4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अगःत 2012

उद्देश्य एवं हेतु

वैट प्रणाली के अधीन किसी अवधि में बिक्रय पर संगणित कर (आउटपुट टैक्स) में से उस अवधि में राज्यांतर्गत क्रय पर भुगताये गये कर की राशि (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का सामंजन किए जाने के उपरांत अवशेष राशि ही कर के रूप में भुगतेय होती है। बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 16 के प्रावधानों के अनुरूप यदि किसी अवधि में इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि उस अवधि के कुल आउटपुट टैक्स से कम हो तो अधिकाई राशि परावर्ती अवधि के आउटपुट टैक्स से सामंजन हेतु अग्रसारित की जानी है। दिनांक 31.03.12 के प्रभाव से अधिनियम में किए गए संशोधन के फलस्वरूप ऐसी अधिकाई राशि अगले वित्तीय वर्ष में सामंजन हेतु अग्रसारित नहीं की जा सकती है एवं इस राशि की वापसी की जानी है। इस बंधेज के कारण यह समस्या अनुभूत हुई कि इस राशि के वापसी में काफी समय लगता है एवं लंबे समय तक भंडारित माल पर चुकाये गये कर के रूप में क्रियाशिल पूंजी में वृ़द्धि होती है। अतः यह प्रस्ताव दिया गया कि असामंजित इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि उद्‌भूत होने वाले वर्ष की समाप्ति से दो वर्षों तक अग्रसारित की जा सकेगी ।

परंतु अग्रसारण के कारण नियमित कर भुगतान की प्रक्रिया अवरूद्ध होती है अतएव अग्रसारण की अनुमान्यता प्रदान करने के पूर्व यह सुनिश्चित होना आवश्यक है कि इस मद्‌ में किया गया दावा तथ्यों पर आधारित एवं साक्ष्यों से समर्थित है ।

इस संदर्भ में अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (1) के प्रथम परंतुक में इनपुट टैक्स क्रेडिट के अग्रसारण के संंबंध में सम्प्रति विद्यमान वित्तीय वर्ष की समय-सीमा को समाप्त करते हुए इस आशय का संशोधन किया जाय कि ऐसी राशि अग्रसारण हेतु उपलब्ध होगी। इसके साथ ही, उक्त संशोधित प्रथम परंतुक के उपरांत दो नये परंतुक अंतःस्थापित किये जाने का प्रस्ताव है कि असामंजित क्रेडिट को उद्‌भूत होने वाले वर्ष की समाप्ति से दो वर्षों तक अग्रसारित की जा सकेगी। पुनः यदि किसी वित्तीय वर्ष के समापन के पश्चात्‌ इनपुट टैक्स क्रेडिट का अग्रसारण किया जाय तो इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे के समर्थन में यथाविहित साक्ष्य एवं सूचनाएँ समर्पित करना अपेक्षित होगा । साथ ही, अधिनियम की धारा 25 (जिसके अधीन विवरणियों के संविक्षा का प्रावधान है) में इस आशय के संशोधन का प्रस्ताव है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट एवं कटौती के अन्य दावों के समर्थन में यथाविहित साक्ष्य एवं सूचनाएँ दावा करने वाले व्यवसायी द्वारा समर्पित की जानी होंगी एवं अग्रसारण से संबंधित सभी विवरणियों की संविक्षा दाखिल होने के तीन माहों के भीतर कर ली जाय ताकि ऐसे दावों की निश्चित समय-सीमा के अधीन निर्धारित माप-दंडों के आधार पर जाँच की जा सके।

अतः इनपुट टैक्स क्रेडिट के अग्रसारण में अनुभूत कठिनाइयों एवं ऐसे दावों की समुचित सत्यापन के औचित्य को देखते हुए तत्‌संबंधी संशोधन हेतु विधेयक विधान मंडल के चालू सत्र में लाया जाय । इस विधेयक को अधिनियमित करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट के अग्रसारण में व्यवसायियों द्वारा अनुभूत कठिनाइयाँ एवं ऐसे दावों के सत्यापन में विभाग द्वारा अनुभूत कठिनाईयों का निराकरण हो सके । इस हेतु विधेयक को अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ठ है ।

(सुशील कुमार मोदी) भार साधक सदस्य । पटनाः दिनांकः 06 अगस्त, 2012

लक्ष्मीकान्त झा, प्रभारी सचिव, बिहार विधान-सभा।त्र

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अधी-क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 434-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 28 August 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-08-28.434/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-08-28.434.