िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 6666 भाभाभाभािििि 1111934934934934 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 444434343434) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, मंगलमंगलमंगलमंगलवारवारवारवार,,,, 22228888 अगःतअगःतअगःतअगःत 2012201220122012 कृऊझ्हृह्नत्रकृप्रस्हृड्डब्क्तमहृहृत्रक्तकृन्नप्रहृग्त्र
ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्त्र
्यकृस्क्तड्ढन्नड्डहृत्र
ैत्र्य॰पट्टत्रव्डछव्त्र
त्र क्त्डत्र कृप्रक्तकृप्रब्छै,व्डछव्ब्च्न्ज्च्,कृप्रक्तत्र '—क्ष्क्ष्कृऊझ्हृह्नत्र ewY;of)Zr djत्र म्क्त्क्हृहृट्ठस्ड्डथ्त्र कृप्रस्ट्ठग््रत्रिं व्डछव्ळळ्रत्र द्दहृट्ठत्र कृऊझ्हृह्नत्र कृप्रस्हृड्डब्क्तमहृहृत्र र्ट्ठिं्त्र कृ०ड्डहृ्त्रिं डैत्र ्य॰पट्ट्रत्र व्डछव्त्र हृिंट्ठत्र ह्यध्ह्नठपबहृहृकृह्यट्टत्र झ्ध््यहृत्र बहृहृ्रत्र कृऊझ्हृह्नत्र कृप्रस्हृड्डब्क्तमहृहृत्र श्त्रिं ह्यकृग्हृत्र ट्टबहृहृत्र हृिंग्ूत्र क्त्न्नहृड्डत्र कृड्डग्र्हृिंप्रश्त्रट्ठिंत्रकृड्डग्र्ब्छिंछैत्रट्ठिंत्र्यतट्ट॰ूट्टत्रह्मट्ठक्ग्त्र्यहृचह्नत्रझ्ट्ठट्टध्त्रक्तकृझ्ट्टत्रह्यहृिंकृक्हृट्टत्रकृग्हृिंत्रद्दहृट्टहृत्रझ्चत्र'त्र
्यहृ०ट्ठक्हृत्रक्तट्ठ्रत्र
क्कर्श्हृिंिंतट्टत्रख्हृ्रत्र
ह्यमहृहृह्नश्त्रक्तकृन्नप्र्रत्र
कृऊझ्हृह्नत्रकृप्रस्हृड्डब्क्तमहृहृ्रत्रह्येड्डहृ'
त्र2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अगःत 2012
बिहार मूल्यवर्द्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2012
[कृप्रक्तकृप्रब्ट,व्डछव्]
बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27,2005) में संशोधन हेतु विधेयक। भारत गणराज्य के तिरसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः- 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।-(1) यह अधिनियम बिहार मूल्यवर्द्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2012 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरत प्रवृत्त होगा। 2. बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-16 में संशोधन।-(1) बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-16 की उप-धारा (1) के प्रथम परंतुक को निम्नांकित से प्रतिस्थापित किया जाता है, यथाः- ''परंतु जब किसी माह के लिए खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) या खंड (घ) या खंड (ङ) के अधीन निवेश कर प्रतिदाय के लिए दावा उसी माह के लिए उत्पादन कर से अधिक होता है, तो ऐसा आधिक्य पश्चातवर्ती माहों के उत्पादन कर के विरूद्ध समायोजन के लिए अग्रणित किया जायेगाः'' (2) बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-16 की उप-धारा (1) के प्रथम परंतुक के उपरांत निम्नलिखित दो नये परंतुक अंतःस्थापित किये जायेंगे, यथा- ''परंतु यह और कि निवेश कर क्रेडिट का कोई आधिक्य उस वर्ष जिसमें वह उद्भूत हुआ था की समाप्ति के दो वर्षों के बाद के उत्पादन कर के विरूद्ध समायोजन हेतु अग्रसारित नही किया जायेगा एवं निवेश कर प्रतिदाय की ऐसी राशि जो उक्त अवधि के समाप्ति पर असमायोजित रह जाती है को इस अधिनियम की धारा-68, धारा-69, धारा-69क और धारा-71 के उपबंधों के अधीन रहते हुए व्यवहारी को ऐसे आधिक्य के संबंध में विवरणी दाखिल किये जाने के तीन माह के भीतर प्रतिदाय किया जायेगाः
परंतु और भी कि द्वितीय परन्तुक के अधीन निवेश कर-प्रतिदाय की कोई राशि वित्तीय वर्ष के अंतिम माह के पश्चात् किसी माह के उत्पादन कर से समायोजन हेतु तब तक अग्रसारित नही की जायेगी जब तक दावा करने वाला व्यवसायी विहित की गई सूचना एवं साक्ष्य दाखिल नही करता।'' 3. बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-25 में संशोधन।-(1) बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-25 की उप-धारा (1) के खंड (ङ) के अंत में पूर्णविराम ''।'' को अर्द्धविराम '';'' से प्रतिस्थापित किया जायेगा। (2) इस प्रकार प्रतिस्थापित '';'' के पश्चात् बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-25 की उप-धारा (1) के खंड (ङ) के पश्चात् निम्नलिखित नया खंड (च) अंतःस्थापित किया जायेगा;- ''(च) विवरणी में निवेश कर प्रतिदाय एवं कटौती के अन्य दावों के समर्थन में विहित की गई सूचना एवं साक्ष्य विहित रीति से दाखिल की गई है।'' (3) बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27, 2005) की धारा-25 की उप-धारा (1) के पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा (1क) अंतविर्ष्ट किया जायेगा, यथाः- ''(1क) उप-धारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, किसी वित्तीय वर्ष के अंतिम तिमाही की ऐसी हर विवरणी जिसके संबंध में निवेश कर-प्रतिदाय की राशि उत्पादन कर की राशि से अधिक हो, यथाविहित रीति एवं समय से दाखिल किये जाने के तीन माह के भीतर संविक्षित की जायेगी।''3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अगःत 2012
वित्तीय संलेख
वैट प्रणाली के अधीन किसी अवधि में बिक्रय पर संगणित कर (आउटपुट टैक्स) में से उस अवधि में राज्यांतर्गत क्रय पर भुगताये गये कर की राशि (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का सामंजन किए जाने के उपरांत अवशेष राशि ही कर के रूप में भुगतेय होती है। बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 16 के प्रावधानों के अनुरूप यदि किसी अवधि में इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि उस अवधि के कुल आउटपुट टैक्स से कम हो तो अधिकाई राशि परावर्ती अवधि के आउटपुट टैक्स से सामंजन हेतु अग्रसारित की जानी है। दिनांक 31.03.12 के प्रभाव से अधिनियम में किए गए संशोधन के फलस्वरूप ऐसी अधिकाई राशि अगले वित्तीय वर्ष में सामंजन हेतु अग्रसारित नहीं की जा सकती है एवं इस राशि की वापसी की जानी है। इस बंधेज के कारण यह समस्या अनुभूत हुई कि इस राशि के वापसी में काफी समय लगता है एवं लंबे समय तक भंडारित माल पर चुकाये गये कर के रूप में क्रियाशिल पूंजी में वृ़द्धि होती है। अतः यह प्रस्ताव दिया गया कि असामंजित इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि उद्भूत होने वाले वर्ष की समाप्ति से दो वर्षों तक अग्रसारित की जा सकेगी ।
परंतु अग्रसारण के कारण नियमित कर भुगतान की प्रक्रिया अवरूद्ध होती है अतएव अग्रसारण की अनुमान्यता प्रदान करने के पूर्व यह सुनिश्चित होना आवश्यक है कि इस मद् में किया गया दावा तथ्यों पर आधारित एवं साक्ष्यों से समर्थित है।
इस संदर्भ में अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (1) के प्रथम परंतुक में इनपुट टैक्स क्रेडिट के अग्रसारण के संंबंध में सम्प्रति विद्यमान वित्तीय वर्ष की समय-सीमा को समाप्त करते हुए इस आशय का संशोधन किया जाय कि ऐसी राशि अग्रसारण हेतु उपलब्ध होगी। इसके साथ ही, उक्त संशोधित प्रथम परंतुक के उपरांत दो नये परंतुक अंतःस्थापित किये जाने का प्रस्ताव है कि असामंजित क्रेडिट को उद्भूत होने वाले वर्ष की समाप्ति से दो वर्षों तक अग्रसारित की जा सकेगी। पुनः यदि किसी वित्तीय वर्ष के समापन के पश्चात् इनपुट टैक्स क्रेडिट का अग्रसारण किया जाय तो इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे के समर्थन में यथाविहित साक्ष्य एवं सूचनाएँ समर्पित करना अपेक्षित होगा। साथ ही, अधिनियम की धारा 25 (जिसके अधीन विवरणियों के संविक्षा का प्रावधन है) में इस आशय के संशोधन का प्रस्ताव है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट एवं कटौती के अन्य दावों के समर्थन में यथाविहित साक्ष्य एवं सूचनाएँ दावा करने वाले व्यवसायी द्वारा समर्पित की जानी होंगी एवं अग्रसारण से संबंधित सभी विवरणियों की संविक्षा दाखिल होने के तीन माहों के भीतर कर ली जाय ताकि ऐसे दावों की निश्चित समय-सीमा के अधीन निर्धारित माप-दंडों के आधार पर जाँच की जा सके।
विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है ।
(सुशील कुमार मोदी) भार साधक सदस्य ।4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अगःत 2012
उद्देश्य एवं हेतु
वैट प्रणाली के अधीन किसी अवधि में बिक्रय पर संगणित कर (आउटपुट टैक्स) में से उस अवधि में राज्यांतर्गत क्रय पर भुगताये गये कर की राशि (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का सामंजन किए जाने के उपरांत अवशेष राशि ही कर के रूप में भुगतेय होती है। बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 16 के प्रावधानों के अनुरूप यदि किसी अवधि में इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि उस अवधि के कुल आउटपुट टैक्स से कम हो तो अधिकाई राशि परावर्ती अवधि के आउटपुट टैक्स से सामंजन हेतु अग्रसारित की जानी है। दिनांक 31.03.12 के प्रभाव से अधिनियम में किए गए संशोधन के फलस्वरूप ऐसी अधिकाई राशि अगले वित्तीय वर्ष में सामंजन हेतु अग्रसारित नहीं की जा सकती है एवं इस राशि की वापसी की जानी है। इस बंधेज के कारण यह समस्या अनुभूत हुई कि इस राशि के वापसी में काफी समय लगता है एवं लंबे समय तक भंडारित माल पर चुकाये गये कर के रूप में क्रियाशिल पूंजी में वृ़द्धि होती है। अतः यह प्रस्ताव दिया गया कि असामंजित इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि उद्भूत होने वाले वर्ष की समाप्ति से दो वर्षों तक अग्रसारित की जा सकेगी ।
परंतु अग्रसारण के कारण नियमित कर भुगतान की प्रक्रिया अवरूद्ध होती है अतएव अग्रसारण की अनुमान्यता प्रदान करने के पूर्व यह सुनिश्चित होना आवश्यक है कि इस मद् में किया गया दावा तथ्यों पर आधारित एवं साक्ष्यों से समर्थित है ।
इस संदर्भ में अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (1) के प्रथम परंतुक में इनपुट टैक्स क्रेडिट के अग्रसारण के संंबंध में सम्प्रति विद्यमान वित्तीय वर्ष की समय-सीमा को समाप्त करते हुए इस आशय का संशोधन किया जाय कि ऐसी राशि अग्रसारण हेतु उपलब्ध होगी। इसके साथ ही, उक्त संशोधित प्रथम परंतुक के उपरांत दो नये परंतुक अंतःस्थापित किये जाने का प्रस्ताव है कि असामंजित क्रेडिट को उद्भूत होने वाले वर्ष की समाप्ति से दो वर्षों तक अग्रसारित की जा सकेगी। पुनः यदि किसी वित्तीय वर्ष के समापन के पश्चात् इनपुट टैक्स क्रेडिट का अग्रसारण किया जाय तो इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे के समर्थन में यथाविहित साक्ष्य एवं सूचनाएँ समर्पित करना अपेक्षित होगा । साथ ही, अधिनियम की धारा 25 (जिसके अधीन विवरणियों के संविक्षा का प्रावधान है) में इस आशय के संशोधन का प्रस्ताव है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट एवं कटौती के अन्य दावों के समर्थन में यथाविहित साक्ष्य एवं सूचनाएँ दावा करने वाले व्यवसायी द्वारा समर्पित की जानी होंगी एवं अग्रसारण से संबंधित सभी विवरणियों की संविक्षा दाखिल होने के तीन माहों के भीतर कर ली जाय ताकि ऐसे दावों की निश्चित समय-सीमा के अधीन निर्धारित माप-दंडों के आधार पर जाँच की जा सके।
अतः इनपुट टैक्स क्रेडिट के अग्रसारण में अनुभूत कठिनाइयों एवं ऐसे दावों की समुचित सत्यापन के औचित्य को देखते हुए तत्संबंधी संशोधन हेतु विधेयक विधान मंडल के चालू सत्र में लाया जाय । इस विधेयक को अधिनियमित करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट के अग्रसारण में व्यवसायियों द्वारा अनुभूत कठिनाइयाँ एवं ऐसे दावों के सत्यापन में विभाग द्वारा अनुभूत कठिनाईयों का निराकरण हो सके । इस हेतु विधेयक को अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ठ है ।
(सुशील कुमार मोदी) भार साधक सदस्य । पटनाः दिनांकः 06 अगस्त, 2012
लक्ष्मीकान्त झा, प्रभारी सचिव, बिहार विधान-सभा।त्र
—————
अधी-क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 434-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in